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Pakistan Issues NOTAM: दिल्ली ब्लास्ट के बाद पाकिस्तान ने जारी किया नोटeम, सेना और नौसेना को हाई अलर्ट पर रखा

Pakistan Issues NOTAM

Pakistan Issues NOTAM: दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए ब्लास्ट के बाद पाकिस्तान में सुरक्षा एजेंसियों ने अलर्ट जारी कर दिया है। पाकिस्तान ने सोमवार देर रात एक नोटeम (नोटिस टू एयरमेन) जारी किया और अपनी एयरफोर्स व नेवी को हाई अलर्ट पर रखा है।

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सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान को डर है कि दिल्ली में हुए आतंकी हमले के बाद भारत की ओर से किसी तरह की जवाबी कार्रवाई हो सकती है। इसी को देखते हुए पाकिस्तान के सेंट्रल कमांड ने सभी सैन्य शाखाओं को चौकन्ना रहने और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए हैं।

पाकिस्तान ने देशभर के एयरबेस और एयरफील्ड्स पर रेड अलर्ट जारी कर दिया गया है। इसके तहत सभी फॉरवर्ड एयरबेस से फाइटर जेट्स को तुरंत उड़ान भरने के लिए तैयार रहने का आदेश दिया गया है।

जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान एयरफोर्स को अपने एयरस्पेस की 24 घंटे निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। देश के कई संवेदनशील सैन्य ठिकानों और हवाई ठिकानों के आसपास सुरक्षा घेरा और कड़ा कर दिया गया है। वहीं, एयर डिफेंस सिस्टम्स को एक्टिव मोड पर रखा गया है ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।

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साथ ही, पाकिस्तान ने अपने महत्वपूर्ण एयर एसेट्स को सुरक्षित रखने के लिए विशेष एहतियाती कदम उठाए हैं। इस दौरान किसी भी संभावित भारतीय कार्रवाई से निपटने के लिए सभी स्ट्रैटेजिक इंस्टॉलेशन्स की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

Pakistan Issues NOTAM

नोटम जारी होने के बाद 11 से 12 नवंबर तक पाकिस्तान के एयरस्पेस में एयर ट्रैफिक प्रतिबंध लगाए गए हैं। यह कदम भारत-पाकिस्तान सीमा के आसपास के इलाकों में बढ़ते तनाव को देखते हुए उठाया गया है।

पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों का कहना है कि उनकी तीनों सेनाएं आर्मी, नेवी और एयरफोर्स किसी भी स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार हैं। सेंट्रल कमांड ने सभी इकाइयों को यह निर्देश दिया है कि वे भारत की किसी भी गतिविधि पर नजर रखें और यदि कोई अप्रत्याशित स्थिति बनती है तो तुरंत जवाबी कदम उठाएं।

दिल्ली में सोमवार शाम हुए ब्लास्ट को अब तक की जांच में आतंकी साजिश से जुड़ा बताया जा रहा है। इस हमले में कम से कम दस लोगों की मौत और कई घायल हुए हैं। घटना के बाद भारत में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं और एनआईए इस पूरे मामले की जांच कर रही है।

सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि दिल्ली ब्लास्ट का संबंध हाल ही में फरीदाबाद से बरामद 2,900 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री से हो सकता है। इन सामग्रियों का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर आईईडी बनाने में किया जा सकता था।

Pakistan Issues NOTAM पाकिस्तान की ओर से यह नोटम ऐसे समय में जारी किया गया है जब भारत में लगातार आतंकी मॉड्यूल्स के खिलाफ कार्रवाई हो रही है। हाल के दिनों में जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, गुजरात और दिल्ली में कई आतंकी साजिशों का खुलासा हुआ है।

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Delhi Terror Plots

Delhi Terror Plots: देश की राजधानी दिल्ली में सोमवार शाम लाल किला के पास हुए कार धमाके ने सुरक्षा एजेंसियों की पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया। सूत्रों का कहना है कि आतंकियों की प्लानिंग बड़ी थी, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां लगातार उनके मॉड्यूल को तोड़ रही थीं, जिसके बाद हताश होकर कार में धमाका कर दिया। यह विस्फोट उस समय हुआ जब दिल्ली पुलिस और खुफिया एजेंसियां बीते 30 दिनों में आठ बड़े आतंकी नेटवर्क को तोड़ने में सफलता हासिल कर चुकी थीं। इन ऑपरेशनों में लश्कर-ए-तैयबा, आईएसआई, आईएसआईएस और बब्बर खालसा इंटरनेशनल से जुड़े नेटवर्क तोड़े गए।

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सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि अगर हाल ही में हुई गिरफ्तारियां और विस्फोटक जब्त नहीं किया गया होता, तो यह धमाका कहीं ज्यादा बड़ा हो सकता था। परंतु, इस एक चूक ने साफ कर दिया कि आतंकियों का नेटवर्क अभी भी सक्रिय है और उनके देश में छिपे “स्लीपर सेल” अभी भी मौजूद हैं।

Delhi Terror Plots: फरीदाबाद से मिला था 2,900 किलो विस्फोटक

10 नवंबर को दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर पुलिस के संयुक्त अभियान में फरीदाबाद के एक गोदाम से लगभग 2,900 किलो विस्फोटक सामग्री बरामद की गई थी। इनमें अमोनियम नाइट्रेट, पोटैशियम नाइट्रेट और सल्फर जैसे कैमिकल शामिल थे, जिनसे सैकड़ों आईईडी बनाए जा सकते थे।

इस मामले में दो संदिग्ध डॉक्टरों डॉ. मुजम्मिल गनई और डॉ. आदिल को गिरफ्तार किया गया। जांच एजेंसियों का कहना है कि यह नेटवर्क दिल्ली, गुरुग्राम और जयपुर तक फैला हुआ था। शुरुआती जांच में पता चला कि फरीदाबाद के गोदाम से कुछ विस्फोटक पहले ही दिल्ली भेजे जा चुके थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इसी नेटवर्क से जुड़े लोग दिल्ली तक पहुंचे थे, और लाल किला ब्लास्ट में इस्तेमाल हुआ विस्फोटक इसी ग्रुप से आया था।

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गुजरात एटीएस ने पकड़ा आईएसआईएस मॉड्यूल

इससे पहले 8 नवंबर को गुजरात एटीएस ने गांधीनगर से आईएसआईएस से जुड़े तीन आतंकियों को गिरफ्तार किया। इनमें एक एमबीबीएस डॉक्टर अहमद मोहियुद्दीन सैयद भी शामिल था। उसके पास से दो ग्लॉक पिस्टल, एक बेरेटा पिस्तौल, 30 कारतूस, 4 लीटर कास्टर ऑयल और रिसिन गैस बनाने का सामान बरामद हुआ।

जांच में खुलासा हुआ कि यह मॉड्यूल आईएसआई से जुड़ा था और दिल्ली व अहमदाबाद के भीड़भरे इलाकों और आरएसएस दफ्तरों पर हमला करने की योजना बना रहा था।

राजस्थान में मौलवी गिरफ्तार

7 नवंबर को राजस्थान एटीएस ने जालौर जिले से मौलवी उसामा उमर को गिरफ्तार किया। उसके अफगानिस्तान स्थित आतंकी गुटों के कमांडरों से संपर्क थे। वह पिछले चार साल से युवाओं को कट्टरपंथ की राह पर ले जा रहा था और दुबई के रास्ते अफगानिस्तान भागने की तैयारी में था। जालोर, बाड़मेर और जोधपुर में एक साथ छापेमारी कर चार अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया गया।

दिल्ली में ISIS नेटवर्क का भंडाफोड़

24 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने दो युवकों अदनान (दिल्ली) और एक अन्य आरोपी (मध्यप्रदेश) को गिरफ्तार किया। दोनों फिदायीन हमले की तैयारी में थे और राजधानी के भीड़भाड़ वाले बाजारों को निशाना बनाना चाहते थे। उनके पास से हथियार, गोला-बारूद और इलेक्ट्रॉनिक सर्किट बरामद किए गए।

पंजाब में हथियार-ड्रग्स नेटवर्क ध्वस्त

15 अक्टूबर को पंजाब पुलिस ने अमृतसर, फाजिल्का और तरनतारन में छापे मारकर तीन लोगों को पकड़ा। उनके पास से 10 आधुनिक पिस्टल और 500 ग्राम अफीम मिली। यह नेटवर्क पाकिस्तान से हथियार और ड्रग्स लाकर पंजाब में गैंगस्टरों को सप्लाई कर रहा था।

पुणे से इंजीनियर गिरफ्तार

28 अक्टूबर को महाराष्ट्र एटीएस ने पुणे के कोंढवा इलाके से सॉफ्टवेयर इंजीनियर ज़ुबेर हंगरगेकर (33) को गिरफ्तार किया। उसके लैपटॉप से अल-कायदा का प्रचार सामग्री और युवाओं को भड़काने वाले वीडियो मिले। वह मुंबई और गुजरात में बम विस्फोट की योजना में शामिल था।

पंजाब में फिर मिला RDX

9 अक्टूबर को पंजाब पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस यूनिट ने बब्बर खालसा इंटरनेशनल के दो आतंकियों को जालंधर से गिरफ्तार किया। उनके पास से 2.5 किलो आरडीएक्स और रिमोट-कंट्रोल आईईडी बरामद हुआ। यह मॉड्यूल यूके से संचालित किया जा रहा था।

आंध्र प्रदेश से महाराष्ट्र तक फैला नेटवर्क

17 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश पुलिस ने उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के दो लोगों को आतंक के शक में पकड़ा। ये दोनों ISIS से प्रेरित नेटवर्क का हिस्सा थे, जो राज्य की सीमाओं से बाहर भी सक्रिय था। इन गिरफ्तारियों ने साबित किया कि भारत में स्लीपर सेल्स राज्यों में काम कर रहे थे।

लाल किला धमाका और स्लीपर सेल नेटवर्क

विशेषज्ञों के अनुसार, लाल किला के पास हुआ धमाका इन्हीं नेटवर्क्स से जुड़ा हो सकता है। दिल्ली पुलिस ने बताया कि धमाके वाली कार तीन घंटे से पार्किंग में खड़ी थी। संभव है कि इसमें पहले से विस्फोटक रखा गया था।

जांच में पाया गया कि कार का मालिक एक साल पहले वाहन बेच चुका था, लेकिन खरीदारों की पहचान संदिग्ध है। यह भी संभावना जताई जा रही है कि धमाका जानबूझकर किया गया आत्मघाती हमला था, क्योंकि विस्फोटक के हिस्से और डिटोनेटर अलग-अलग रखे जाते हैं और सामान्य दुर्घटना से ऐसे विस्फोट नहीं होते।

सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में सक्रिय स्लीपर सेल फरीदाबाद छापे के बाद सतर्क हो गए थे और अपने ठिकाने खाली करने लगे थे। उन्हें डर था कि कहीं ये पुलिस के हाथों न पड़ जाए। एक संभावना यह भी जताई जा रही है कि इसी दौरान विस्फोटक ले जाई जा रही कार में बैठे व्यक्ति ने या तो जानबूझकर डिटोनेटर दबाया या गलती से बम फट गया।

खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्लीपर सेल्स दिल्ली, हरियाणा और यूपी में सक्रिय थे। फरीदाबाद में हुई कार्रवाई के बाद इन नेटवर्कों को भनक लग गई थी कि छापेमारी सटीक जानकारी के आधार पर हो रही है, इसलिए उन्होंने विस्फोटक सामग्री दिल्ली में शिफ्ट करनी शुरू कर दी। धमाके वाली कार करीब दो घंटे पार्किंग में खड़ी थी। विशेषज्ञों का मानना है कि वह पहले से ही विस्फोटक से भरी थी, और किसी स्थानीय नेता के निर्देश का इंतजार किया जा रहा था। संभावना है कि सुसाइड बॉम्बर ने मौके पर ही खुद को उड़ा लिया।

नेशनल सिक्योरिटी गार्ड के कमांडो धमाके के अवशेषों की जांच कर रहे हैं ताकि पता चल सके कि हाई ग्रेड के विस्फोटक का इस्तेमाल हुआ या नहीं। अगर अमोनियम नाइट्रेट या आरडीएक्स के सबूत मिलते हैं, तो यह मामला सीधे फरीदाबाद मॉड्यूल से जुड़ जाएगा।

Screenshot of a Reddit post in r/delhi with title Is something going on in delhi? and text from a 12th grade student describing return from school seeing police and army everywhere including at Red Fort metro more than usual asking what is up today, with 54 upvotes 45 comments and AskDelhi flair.

रेडिट पर पोस्ट से खुलेगा राज

धमाके से कुछ घंटे पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर एक यूजर ने लिखा था कि “दिल्ली में चारों ओर पुलिस और सेना की गाड़ियां हैं, रेड फोर्ट के पास कुछ बड़ा होने वाला लग रहा है।” यह पोस्ट अब सुरक्षा एजेंसियों की जांच के घेरे में है।

सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस को पहले से इनपुट मिला था कि आतंकवादी संगठन दिल्ली में बड़ी वारदात की योजना बना रहे हैं।

आईएसआई और पाकिस्तानी नेटवर्क की भूमिका

खुफिया एजेंसियों का मानना है कि इन सभी मामलों के पीछे पाकिस्तान की आईएसआईकी भूमिका है। आतंकियों के बीच हर स्तर पर जानकारी “नीड टू नो” आधार पर दी जाती है ताकि कोई एक व्यक्ति पूरा नेटवर्क उजागर न कर सके।

जानकारों का कहना है कि यह सब एक बड़े “प्लान” का हिस्सा है, जो ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की असफल कोशिशों का जवाब लगता है। पाकिस्तान ने अपने नेटवर्क को भारत के अंदर फिर से सक्रिय किया है और कुछ भारतीयों को इसमें शामिल किया है।

Red Fort Car Blast: दिल्ली कार ब्लास्ट में कहीं जम्मू-कश्मीर के डॉक्टरों से जुड़े आतंकी मॉड्यूल का हाथ तो नहीं? फरीदाबाद से बरामद हुआ था 350 किलो विस्फोटक

Red Fort Car Blast

Red Fort Car Blast: दिल्ली में सोमवार शाम उस समय हड़कंप मच गया जब लाल किले के गेट नंबर-1 के पास खड़ी एक कार में अचानक तेज धमाका हो गया। इस विस्फोट में कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई, जबकि 14 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। दिल्ली ब्लास्ट में खुलासा हुआ है कि धमाका HR26CE7674 आई20 में कार हुआ था। यह गाड़ी मोहम्मद सलमान के नाम रजिस्टर्ड हैI ब्लास्ट में कम से कम 8 गााड़ियों को जबरदस्त नुकसान हुआ है। घटना शाम करीब 6 बजकर 55 मिनट पर हुई, जिसकी तेज आवाज दूर तक सुनाई दी और आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई। एनएसजी और एनआईए समेत फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम भी मौके पर पहुंच गई है और जांच शुरू कर दी गई है।

Red Fort Car Blast: लाल किले के पास कार ब्लास्ट में 10 की मौत, NIA-NSG ने संभाली जांच

इससे पहले फरीदाबाद में सोमवार को एक बड़े आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें जम्मू-कश्मीर के दो डॉक्टरों की शामिल होने की बात सामने आई है। पुलिस ने करीब 350 किलो आरडीएक्स, एके-47 राइफल और बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद की है। यह आतंकी नेटवर्क पूरे भारत में हमलों की योजना बना रहा था। सूत्रों के अनुसार, यह गिरोह गजवात-ए-उल-हिंद (ISIS का लोकल मॉड्यूल) से जुड़ा था, जो देशभर में बड़े पैमाने पर आतंकी हमलों की साजिश रच रहा था।

एनआईए संभाल सकती है जांच

इस मामले की जांच अब नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी को सौंपी जा सकती है। जांच एजेंसियों ने बताया कि जम्मू-कश्मीर के दो डॉक्टर डॉ. आदिल अहमद राठर और डॉ. मुफाजिल शकील ने स्थानीय युवाओं को कट्टरपंथ की ओर झुकाने का काम किया। पुलिस ने डॉ. राठर को यूपी के सहारनपुर से गिरफ्तार किया, जहां वह एक अस्पताल में कार्यरत थे। उसकी गिरफ्तारी के बाद ही फरीदाबाद के एक फ्लैट में छापा मारा गया, जहां से विस्फोटक और हथियार मिले।

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कैसे हुआ खुलासा

यह जांच उस समय शुरू हुई जब 27 अक्टूबर को श्रीनगर में जैश-ए-मोहम्मद के समर्थन में पोस्टर लगाए गए। सीसीटीवी फुटेज में डॉ. आदिल राठर को पोस्टर लगाते देखा गया था। बाद में उनसे पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिलीं, जिनके आधार पर हरियाणा और उत्तर प्रदेश में छापेमारी की गई। फरीदाबाद में डॉ. मुफाजिल शकील के ठिकाने से 300 किलो से ज्यादा विस्फोटक, एके-47 राइफल और अन्य बम बनाने का सामान मिला। इस बरामदगी ने पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ।

पुलिस के अनुसार, इस मॉड्यूल का उद्देश्य अपना अलग आतंकी संगठन बनाना था, जिसे तंजीम कहा जा रहा है। यह संगठन लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी समूहों के सहयोग से काम करना चाहता था।

आतंकी नेटवर्क और गिरफ्तारियां

इस पूरे नेटवर्क में जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश और हरियाणा से जुड़े लोग शामिल थे। पुलिस ने इस कार्रवाई में 7 आतंकियों को गिरफ्तार किया है, इनमें दो डॉक्टर, एक मौलवी और कई अन्य स्थानीय व्यक्ति शामिल हैं। पुलिस को छापेमारी के दौरान 2900 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री बरामद हुई है, जो बम और आईईडी बनाने में इस्तेमाल की जा सकती थी। इसके अलावा कई हथियार भी मिले हैं, जिनमें दो पिस्तौल (चीनी स्टार और बेरेटा), एके-56 राइफल, एके क्रिन्कोव राइफल, और बड़ी मात्रा में गोलियां व कारतूस शामिल हैं।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों के नाम इस प्रकार हैं- डॉ. अदील (वानपोरा, कुलगाम), डॉ. मुझम्मिल अहमद गनाई (कोइल, पुलवामा), मौलवी इरफान अहमद (इमाम, शोपियां), आरिफ निसार डार, यासिर-उल-अशरफ, मकसूद अहमद डार (नौगाम, श्रीनगर) और जमीर अहमद अहांगर (वाकुरा, गांदरबल)।

जांच एजेंसियों ने घटनास्थल से कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, विस्फोटक रसायन, तार, बैटरियां, रिमोट, टाइमर, और धातु की प्लेटें भी जब्त की हैं।

एनएसजी टीम कर रही है जांच

फरीदाबाद और दिल्ली के आसपास के इलाकों में मिली विस्फोटक सामग्री की जांच के लिए नेशनल सिक्योरिटी गार्ड की बम डिस्पोज़ल टीम मौके पर पहुंच गई है। इस टीम में 7 से 8 कमांडो शामिल हैं, जो ब्लास्ट रेजिड्यू की जांच करेंगे ताकि यह पता चल सके कि क्या इसमें हाई-एंड विस्फोटक जैसे अमोनियम नाइट्रेट का इस्तेमाल हुआ था।

अगर इसके निशान मिलते हैं तो यह आतंकी साजिश के सबूतों को और पुख्ता करेगा और फरीदाबाद मॉड्यूल के अन्य लिंक भी स्पष्ट होंगे। टीम साइट से डेटोनेटर और बम बनाने के उपकरणों की भी जांच कर रही है।

रेड फोर्ट ब्लास्ट की जांच भी तेज

इसी बीच, दिल्ली के लाल किला क्षेत्र में कार ब्लास्ट की घटना के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने मौके का दौरा किया और कहा कि “सभी कोणों से जांच की जा रही है।” सूत्रों के अनुसार, रेड फोर्ट ब्लास्ट में आतंकी कनेक्शन से इनकार नहीं किया जा सकता। जांच एजेंसियां अब दोनों घटनाओं फरीदाबाद विस्फोटक बरामदगी और रेड फोर्ट कार ब्लास्ट के बीच संभावित कड़ी की जांच कर रही हैं।

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Red Fort Car Blast

Red Fort Car Blast: दिल्ली में सोमवार शाम लाल किले के पास उस समय दहशत फैल गई जब गेट नंबर-1 के पास खड़ी एक कार में जोरदार धमाका हुआ। धमाके में कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई और 14 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। यह हादसा शाम करीब 6:55 बजे हुआ। धमाके की आवाज पूरे इलाके में गूंज उठी और आसपास अफरा-तफरी मच गई।

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दमकल विभाग को सूचना मिलते ही सात फायर टेंडर मौके पर पहुंचे और आग पर काबू पाया गया। हादसे के तुरंत बाद इलाके को पूरी तरह से सील कर दिया गया। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम घटनास्थल पर पहुंच गई है।

Red Fort Car Blast: घटनास्थल पर जांच जारी

सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां कार से बरामद अवशेषों की जांच कर रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इसमें अमोनियम नाइट्रेट जैसे किसी विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया था। एनआईए और दिल्ली पुलिस के संयुक्त दल ने घटनास्थल से धातु के टुकड़े और जल चुके कार के हिस्से जब्त किए हैं।

इस बीच, एलएनजेपी अस्पताल के अधिकारियों ने बताया कि 24 लोगों को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया, जिनमें से 10 लोगों की मौत हो गई। बाकी घायलों का इलाज चल रहा है।

एनआईए और एनएसजी की टीमें सक्रिय

इस घटना के बाद एनआईए ने जांच अपने हाथ में ले ली है। वहीं, नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (एनएसजी) की बम डिस्पोज़ल टीम भी मौके पर पहुंच गई है। इस टीम में 7 से 8 कमांडो शामिल हैं जो ब्लास्ट रेजिड्यू की जांच करेंगे ताकि यह पता चल सके कि क्या किसी हाई-इंटेंसिटी विस्फोटक का इस्तेमाल हुआ।

अगर अमोनियम नाइट्रेट या किसी एडवांस विस्फोटक के निशान मिलते हैं, तो यह घटना फरीदाबाद मॉड्यूल से जुड़ सकती है, जहां हाल ही में पुलिस ने 350 किलो विस्फोटक और हथियार बरामद किए थे। एनएसजी की टीम डिटोनेटर और किसी भी बम बनाने की सामग्री की तलाश में जुटी है।

एक संदिग्ध गिरफ्तार, कई एजेंसियां जांच में जुटीं

दिल्ली पुलिस ने इस मामले में एक संदिग्ध को हिरासत में लिया है। एनआईए, इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी), दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल और फॉरेंसिक टीमें संयुक्त रूप से जांच कर रही हैं। जांच के दौरान मेट्रो स्टेशन और आस-पास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।

धमाका ठीक उस समय हुआ जब दिल्ली में सुरक्षा एजेंसियां पहले से ही फरीदाबाद में पकड़े गए आतंकी नेटवर्क के कारण हाई अलर्ट पर थीं। यह वही मॉड्यूल बताया जा रहा है, जो आईएसआईएस से जुड़े गजवात-ए-उल-हिंद की ब्रांच है।

आई-विटनेस ने बताया भयावह दृश्य

स्थानीय निवासी ने बताया, “मेरे घर के बाहर जोरदार धमाका हुआ। मैंने देखा कि आग की लपटें आसमान छू रही थीं। जब नीचे आया तो चारों ओर अफरा-तफरी थी।”

दूसरे प्रत्यक्षदर्शी ने कहा, “हमने देखा कि एक हाथ सड़क पर पड़ा हुआ था, यह दृश्य बहुत डरावना था। कई कारें धमाके की तीव्रता से उछल गईं।”

धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के स्ट्रीट लाइट्स टूट गए और कई कारें 100 से 150 मीटर तक फेंक दी गईं।

कार में थे दो से तीन लोग

पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार, धमाके में ह्युंदैई आई20 कार शामिल थी, जिसमें दो से तीन लोग सवार थे। धमाका कार के पिछले हिस्से में हुआ, जिससे संकेत मिलता है कि यह या तो लो-इंटेंसिटी विस्फोट था या फिर कार की तकनीकी खराबी के कारण आग लगी।

हालांकि, अब तक किसी विस्फोटक के टुकड़े या स्प्लिंटर बरामद नहीं हुए हैं। अधिकारी हर कोण से जांच कर रहे हैं चाहे वह आतंकी हमला हो, तकनीकी खराबी हो या किसी साजिश का हिस्सा।

देशभर में अलर्ट

इस घटना के बाद दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। यूपी पुलिस ने सभी धार्मिक स्थलों, संवेदनशील जिलों और बॉर्डर इलाकों में चौकसी बढ़ाने के आदेश दिए हैं। राजस्थान में भी जयपुर रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट पर अतिरिक्त सुरक्षा तैनात की गई है।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने खुद स्थिति की जानकारी ली और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रिपोर्ट दी है। शाह ने कहा कि “सभी कोणों से जांच की जा रही है।”

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की नीति साफ

सरकारी सूत्रों ने बताया कि इस धमाके को आतंकी हमले के रूप में देखा जा रहा है, खासकर जब पिछले कुछ दिनों में दिल्ली-एनसीआर में विस्फोटकों की बरामदगी हुई है। सरकार का रुख अब बिल्कुल स्पष्ट है, “ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत पर किसी भी आतंकी हमले को युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा।”

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Security Synergy Seminar 2025
Lieutenant General Manjinder Singh, Army Commander, South Western Command

Security Synergy Seminar 2025: जयपुर मिलिट्री स्टेशन में आज से दो दिवसीय “सिक्योरिटी सिनर्जी सेमिनार 2025” की शुरुआत हुई। इस सेमिनार का विषय है ‘व्होल ऑफ नेशन अप्रोच टू काउंटर फ्यूचर कॉन्फ्लिक्ट्स’, यानी भविष्य के संघर्षों से निपटने के लिए एकजुट राष्ट्रीय रणनीति। यह कार्यक्रम सप्त शक्ति कमान के तत्वावधान में और सेंटर फॉर लैंड वॉरफेयर स्टडीज (CLAWS) के सहयोग से आयोजित किया गया है।

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साउथ वेस्टर्न कमांड के आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल मंजिंदर सिंह के मुताबिक इस सेमिनार को कराने का उद्देश्य सशस्त्र बलों, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, नागरिक प्रशासन, उद्योग, शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर एक इंटीग्रेटेड राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचा तैयार करना है।

अपने उद्घाटन भाषण में आर्मी कमांडर ने कहा कि आज का वैश्विक माहौल अत्यधिक अस्थिर है, जहां अनिश्चितता और बदलते शक्ति संतुलन नई चुनौतियां पेश कर रहे हैं। उन्होंने रूस–यूक्रेन और इजराइल–हमास युद्धों का उदाहरण देते हुए बताया कि अब युद्ध केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं हैं, बल्कि साइबर, सूचना, अर्थव्यवस्था और नागरिक संरचनाओं को भी निशाना बनाया जा रहा है।

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उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध अब मल्टी-डोमेन स्वरूप ले चुका है, जिसमें साइबर, स्पेस, ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर जैसे नए सेक्टर शामिल हैं। इसलिए, सभी राष्ट्रीय शक्तियों डिप्लोमेटिक, इन्फॉर्मेशनल, मिलिट्री और इकॉनॉमिक का तकनीकी सहयोग के साथ इंटीग्रेट होना जरूरी है।

लेफ्टिनेंट जनरल सिंह ने कहा कि वास्तविक राष्ट्रीय मजबूती तब आती है, जब शासन, उद्योग और नागरिक एकजुट होकर काम करें। यही ‘व्होल ऑफ नेशन अप्रोच’ की आत्मा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘जय यानी – जॉइंटनेस, आत्मनिर्भरता और इनोवेशन’ के विजन का उदाहरण देते हुए कहा कि हमें व्यक्तिगत सोच से ऊपर उठकर राष्ट्रकेंद्रित सोच अपनानी चाहिए।

इस दो दिवसीय सेमिनार में वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, रणनीतिकार, पूर्व सैनिक, उद्योग जगत के विशेषज्ञ, नौकरशाह, शिक्षाविद, मीडिया प्रतिनिधि और जयपुर की कई विश्वविद्यालयों के 130 छात्र शामिल हुए।

चर्चाओं में उभरते मल्टी-डोमेन खतरों, आतंकवाद-रोधी रणनीतियों और नागरिक–सैन्य सहयोग को मजबूत करने के उपायों पर विचार-विमर्श किया गया।

Security Synergy Seminar 2025

पहले दिन के सत्र में ‘द स्ट्रेटेजिक इम्पेरेटिव ऑफ व्होल ऑफ नेशन अप्रोच’ और ‘फॉर्जिंग पार्टनरशिप्स– द पिलर्स ऑफ कोलैबोरेशन’ जैसे विषयों पर चर्चा हुई। दूसरे दिन ‘इन्फॉर्मेशन ऑपरेशंस’ और राज्य-स्तरीय सुरक्षा ढांचे पर विमर्श किया जाएगा।

Security Synergy Seminar 2025
Lt. Gen. DP Pandey (Retd)

सेमिनार के दौरान “सिटीजन वारियर्स” का कॉन्सेप्ट भी पेश किया गया, जिसके अनुसार हर नागरिक राष्ट्र का सुरक्षा प्रहरी है। वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सेना की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक की साझेदारी से संभव है। चर्चाओं में मिलिट्री-सिविल फ्यूजन को मजबूत करने, संस्थागत और तकनीकी अंतरालों को पाटने तथा सभी हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

यह सेमिनार आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत 2047 के विजन के अनुरूप राष्ट्रीय सुरक्षा को सशक्त बनाने का एक अहम कदम है। सप्त शक्ति कमान द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम इस बात पर केंद्रित रहा कि भारत की सुरक्षा संस्कृति को कैसे सामूहिक प्रयासों और आधुनिक तकनीक के माध्यम से मजबूत किया जा सकता है।

Exercise Mitra Shakti-2025: बेलगावी में भारत और श्रीलंका की सेनाएं साथ मिल कर करेंगी अभ्यास, ड्रोन और काउंटर अनमैन्ड एरियल सिस्टम भी होंगे इस्तेमाल

Exercise Mitra Shakti-2025

Exercise Mitra Shakti-2025: भारत और श्रीलंका के बीच 11वां संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘एक्सरसाइज मित्र शक्ति-2025 आज से कर्नाटक के बेलगावी स्थित फॉरेन ट्रेनिंग नोड में शुरू हुआ। यह अभ्यास 10 नवंबर से 23 नवंबर 2025 तक चलेगा। इसका उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच आतंकवाद-रोधी अभियानों में जॉइंटनेस और सहयोग बढ़ाना है।

Exercise Malabar 2025: प्रशांत महासागर में भारत के आईएएस सह्याद्री ने शुरू किया क्वाड देशों के साथ संयुक्त नौसैनिक अभ्यास

भारतीय सेना की ओर से इस अभ्यास में 170 जवान हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें मुख्य रूप से राजपूत रेजिमेंट के जवान शामिल हैं। वहीं, श्रीलंका की ओर से 135 सैनिक भाग ले रहे हैं, जिनका प्रतिनिधित्व गजाबा रेजिमेंट र रही है। इसके अलावा, भारतीय वायुसेना के 20 कर्मी और श्रीलंका वायुसेना के 10 कर्मी भी इस अभ्यास में भाग ले रहे हैं।

Exercise Mitra Shakti-2025: संयुक्त अभ्यास का उद्देश्य

अभ्यास का मुख्य उद्देश्य संयुक्त रूप से संयुक्त राष्ट्र के सातवें अध्याय के तहत सब-कन्वेंशनल ऑपरेशंस को अंजाम देने की क्षमता का विकास करना है। इसके तहत दोनों सेनाएं काउंटर टेरर ऑपरेशंस, सर्च एंड डेस्ट्रॉय मिशन, हेलिबोर्न ऑपरेशन, और रेड ऑपरेशन जैसी सामरिक रणनीतियों का अभ्यास कर रही हैं।

इसके साथ ही अभ्यास के दौरान आर्मी मार्शल आर्ट्स रूटीन, कॉम्बैट रिफ्लेक्स शूटिंग, और योगा जैसी गतिविधियों को भी शामिल किया गया है, ताकि सैनिकों की शारीरिक और मानसिक क्षमता को मजबूत किया जा सके।

Exercise Mitra Shakti-2025: आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल

‘मित्र शक्ति-2025’ अभ्यास में इस बार आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें ड्रोन और काउंटर अनमैन्ड एरियल सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके अलावा, हेलीकॉप्टरों की मदद से कैजुअल्टी इवैक्युएशन और हेलिपैड सुरक्षा अभ्यास भी किए जा रहे हैं। दोनों सेनाएं मिलकर इन ऑपरेशनों का अभ्यास इस तरह से कर रही हैं, जिससे संयुक्त मिशनों में तालमेल बेहतर हो और जान-माल के नुकसान को कम किया जा सके।

इस अभ्यास में दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के सर्वश्रेष्ठ सैन्य अनुभव साझा करेंगी। भारतीय सेना और श्रीलंका सेना के जवान एक साथ प्रशिक्षण लेकर विभिन्न कॉम्बैट स्किल्स में सुधार करेंगे। यह अभ्यास दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करेगा और भारत-श्रीलंका द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देगा।

भारतीय सेना ने बताया कि इस अभ्यास से न केवल दोनों सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ेगी, बल्कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि भविष्य में संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में दोनों देशों की सेनाएं बेहतर तालमेल के साथ कार्य कर सकें।

भारत-श्रीलंका रक्षा साझेदारी का प्रतीक

‘मित्र शक्ति’ अभ्यास भारत और श्रीलंका के बीच आपसी विश्वास और सहयोग का प्रतीक है। यह हर साल दोनों देशों में बारी-बारी से आयोजित किया जाता है। इस वर्ष भारत मेजबान देश है। अभ्यास के जरिए दोनों सेनाएं यह संदेश दे रही हैं कि दक्षिण एशिया में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए उनका सहयोग जारी रहेगा।

Defence Production: भारत का रक्षा उत्पादन 1.51 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा, रक्षा निर्यात में भी रिकॉर्ड जंप

Defence Production
Rajnath Singh inaugurates DPSU Bhawan

Defence Production: भारत के रक्षा उत्पादन क्षेत्र ने आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ी छलांग लगाई है। वित्त वर्ष 2024-25 में देश का रक्षा उत्पादन 1.51 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसमें रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों का योगदान 71.6 फीसदी रहा है। वहीं, भारत का रक्षा निर्यात 6,695 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो यह दर्शाता है कि दुनिया अब भारत के स्वदेशी रक्षा उत्पादों पर भरोसा कर रही है।

Defence Production: रक्षा मंत्री की उद्योग जगत से अपील- डिफेंस प्रोडक्शन में बढ़ाएं योगदान, ऑपरेशन सिंदूर में स्वदेशी रक्षा उपकरणों से बढ़ी भारत की साख

नई दिल्ली के नौरोजी नगर स्थित वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने यह जानकारी दी। इस मौके पर उन्होंने अत्याधुनिक डीपीएसयू भवन का उद्घाटन किया और डीपीएसयू के प्रदर्शन की समीक्षा की।

कार्यक्रम के दौरान चार इकाइयों म्यूनिशन इंडिया लिमिटेड, आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड, इंडिया ऑप्टेल लिमिटेड और हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड को मिनीरत्न श्रेणी-1 का दर्जा मिलने पर सम्मानित किया गया।

डीपीएसयू ने बदला भारत का रक्षा परिदृश्य

राजनाथ सिंह ने कहा कि देश की सभी 16 डीपीएसयू भारत की आत्मनिर्भरता के मजबूत स्तंभ हैं। उन्होंने कहा, “इन कंपनियों का प्रदर्शन न केवल ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे अभियानों में देखा गया, बल्कि यह भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता का प्रतीक भी है।”

रक्षा मंत्री ने बताया कि 2021 में ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड को सात नई डीपीएसयू में बदला गया था। इससे इन इकाइयों को अधिक स्वतंत्र और प्रतिस्पर्धा का अवसर मिला। अब इन इकाइयों को मिनीरत्न का दर्जा मिलने से वे नई साझेदारियों, उत्पादन विस्तार और आधुनिकीकरण की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ सकेंगी।

उन्होंने कहा कि भारत का रक्षा उत्पादन न केवल आत्मनिर्भर भारत का उदाहरण है, बल्कि यह दुनिया को यह संदेश भी देता है कि भारत अब रक्षा तकनीक का वैश्विक केंद्र बनने की ओर अग्रसर है।

कार्यक्रम में तीन अहम एमओयू पर हस्ताक्षर हुए। इनमें हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड का यंत्र इंडिया लिमिटेड के साथ समझौता शामिल है। इस समझौते के तहत एचएएल ने यंत्र इंडिया को 435 करोड़ रुपये का ब्याज-मुक्त अग्रिम देने की घोषणा की, जबकि भारत डायनेमिक्स लिमिटेड अगले 10 सालों में 3,000 मीट्रिक टन वर्क लोड देगा।

रक्षा मंत्री ने कहा कि Defence Production नया डीपीएसयू भवन एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जो देश की सभी 16 डीपीएसयू को एक छत के नीचे लाता है। भवन में आधुनिक कॉन्फ्रेंस रूम, सिमुलेशन लैब्स, और डिफेंस इनोवेशन प्रदर्शनी क्षेत्र बनाए गए हैं। यह भवन न केवल घरेलू बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की रक्षा उत्पादन क्षमताओं को प्रदर्शित करेगा।

Exercise Malabar 2025: प्रशांत महासागर में भारत के आईएएस सह्याद्री ने शुरू किया क्वाड देशों के साथ संयुक्त नौसैनिक अभ्यास

Exercise Malabar 2025
INS Sahyadri

Exercise Malabar 2025: भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया की नौसेनाएं एक बार फिर एक साथ आई हैं। प्रशांत महासागर के गुआम द्वीप पर सोमवार से शुरू हुआ है मलाबार अभ्यास 2025। इस अभ्यास में भारत की तरफ से स्वदेशी आईएनएस सह्याद्री हिस्सा ले रहा है।

यह संयुक्त नौसैनिक अभ्यास 10 से 18 नवंबर तक चलेगा, जिसमें चारों देशों के युद्धपोत और विमान समुद्री अभियानों में हिस्सा लेंगे। यह आयोजन क्वाड देशों के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सामरिक एकजुटता को दर्शाता है।

Malabar Exercise 2025: अमेरिका के 50 फीसदी टैरिफ के बावजूद गुआम में मालाबार नेवल एक्सरसाइज में हिस्सा लेगा भारत

सह्याद्री भारतीय नौसेना का सबसे आधुनिक गाइडेड मिसाइल स्टेल्थ फ्रिगेट है, जिसे देश में ही डिजाइन और निर्मित किया गया है।

भारतीय नौसेना ने कहा कि सह्याद्री की भागीदारी भारत की साझेदारी को और मजबूत करती है और यह हमारे साझा प्रयासों का प्रतीक है, जिनका उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा को सुनिश्चित करना है।

हालांकि सह्याद्री पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय अभियानों, द्विपक्षीय अभ्यासों और समुद्री तैनातियों में भाग ले चुका है। इस बार इसका मिशन प्रशांत महासागर के बीच भारत की समुद्री शक्ति और रणनीतिक मौजूदगी को प्रदर्शित करना है।

Exercise Malabar 2025

इस साल के मलाबार अभ्यास में अमेरिका का यूएसएस फिट्जगेराल्ड (एगिस गाइडेड मिसाइल डेस्ट्रॉयर), ऑस्ट्रेलिया का एचएमएएस बल्लारत (एंजैक क्लास फ्रिगेट) और जापान का जेऍस्‌ ह्यूगा (हेलीकॉप्टर डेस्ट्रॉयर) भी शामिल हैं। ये सभी जहाज गुआम बेस पर एकत्र हुए हैं, जहां अमेरिका का एक प्रमुख नौसैनिक अड्डा है।

चारों देशों की नौसेनाएं इस अभ्यास में एकजुट होकर समुद्री युद्धाभ्यास, संयुक्त फ्लीट ऑपरेशन, एंटी-सबमरीन वॉरफेयर, गनरी ड्रिल्स, और फ्लाइंग ऑपरेशंस का अभ्यास करेंगी।

दो चरणों में होगा अभ्यास: हार्बर फेज और सी फेज

भारतीय नौसेना के मुताबिक मलाबार अभ्यास दो चरणों में आयोजित किया जा रहा है। पहला चरण 10 से 12 नवंबर तक गुआम पोर्ट पर होगा, जहां चारों देशों की नौसेनाएं ऑपरेशनल प्लानिंग, संचार प्रोटोकॉल और संयुक्त रणनीतियों पर चर्चा करेंगी। इस दौरान तकनीकी संवाद और खेल प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाएंगी ताकि हिस्सा लेने वाले देशों के बीच तालमेल मजबूत हो सके।

इसके बाद समुद्री चरण 13 से 17 नवंबर तक चलेगा, जिसमें वास्तविक नौसैनिक अभियान होंगे। इस दौरान युद्धपोत और विमान मिलकर फ्लीट ऑपरेशन, एंटी-सबमरीन मिशन, मिसाइल लॉन्च सिमुलेशन और सटीक फायरिंग का अभ्यास करेंगे।

मलाबार नौसैनिक अभ्यास की शुरुआत 1992 में भारत और अमेरिका के बीच हुई थी। बाद में जापान और ऑस्ट्रेलिया इसके स्थायी सदस्य बने। यह अब क्वाड देशों के सामरिक सहयोग का प्रमुख प्रतीक बन चुका है।

यह अभ्यास न केवल समुद्री सुरक्षा को मजबूत करता है, बल्कि इन देशों के बीच इंटरऑपरेबिलिटी यानी संयुक्त रूप से काम करने की क्षमता को भी बढ़ाता है। इसका उद्देश्य समुद्री सीमाओं की रक्षा, मानवीय सहायता और आपदा प्रबंधन जैसे अभियानों में एक-दूसरे की क्षमताओं को बेहतर करना है।

मलाबार अभ्यास ऐसे समय में हो रहा है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियों को लेकर चिंता बढ़ रही है। चीन लगातार दक्षिण चीन सागर और पूर्वी एशिया में अपनी नौसैनिक मौजूदगी बढ़ा रहा है।

क्वाड देशों भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया का मानना है कि क्षेत्र में ‘फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक’ को बनाए रखना आवश्यक है ताकि समुद्री व्यापार और शांति प्रभावित न हो।

आईएनएस सह्याद्री की भागीदारी भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। यह जहाज भारत में बनाए गए अत्याधुनिक सेंसर, मिसाइल सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध उपकरणों से लैस है।

Guwahati Air display: गुवाहटी में ब्रह्मपुत्र के किनारे ब्रह्मोस के साथ सुखोई-30 ने दिखाए जलवे, ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार चिकन नेक कॉरिडोर के पास वायुसेना ने दिखाई ताकत

Guwahati Air display: Su-30MKI BrahMos Rafale SCALP - Indian Air Force’s first flying display in Northeast dazzles Guwahati skies
Guwahati Air display: Su-30MKI BrahMos Rafale SCALP - Indian Air Force’s first flying display in Northeast dazzles Guwahati skies

Guwahati Air display: रविवार को गुवाहटी की सड़कें एयर फोर्स के पोस्टरों से पटी पड़ी थीं। शहर में अलग ही उत्साह नजर आ रहा था। सभी को राफेल की गूंज सुनने का इंजतार था। आखिर पूर्वोत्तर के इस शहर में पहली बार वायुसेना अपने एयरक्राफ्ट का डिस्प्ले जो करने वाली थी। 10 तक तक हम लचित घाट पहुंच गए, जो ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे स्थित है। लोग सुबह से ही लचित घाट के पुल पर इस एयर शो को देखने के लिए पहुंच चुके थे। हर कोई आतुर था कि कब उन्हें सुखोई-30, तेजस, राफेल के हवाई करतब देखने को मिलेंगे। ब्रहमपुत्र नदी के किनारे एयर शो करने का इरादा केवल जनता की भीड़ जुटाना नहीं था, बल्कि दो पड़ोसी देशों के लिए भी एक साफ संदेश था, कि पूर्वोत्तर में अगर कोई एंडवेंचर करने की सोची भी तो भारतीय वायुसेना मुंह तोड़ जवाब देने के लिए तैयार है।

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Guwahati Air display: खचाखच भरा था लचित घाट

93वें वायुसेना दिवस समारोह के तहत हुए इस डिस्प्ले शो ने पूर्वोत्तर के आसमान को देशभक्ति और रोमांच से भर दिया। साढ़े 12 बजे एयर शो शुरू हुआ। भीड़ के उत्साह का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि लचित घाट खचाखच भरा हुआ था और जो लोग अंदर एंट्री नहीं ले पाए, वे आसपास के मकानों की छत पर खड़े हो कर इस एयर शो के शुरू होने का इंतजार कर रहे थे। हजारों की संख्या में लोग भारतीय वायुसेना की ताकत, अनुशासन और तकनीकी क्षमता को करीब से देखने के लिए बेताब थे।

 

Guwahati Air display: ध्वज फॉर्मेशन से हुई शुरुआत

सुबह से ही लोग गुवाहाटी के लचित घाट और ब्रह्मपुत्र नदी के किनारों पर जमा होने लगे थे। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक, हर कोई आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठा था। शुरुआत तीन एमआई-17 हेलीकॉप्टरों की ध्वज निर्माण (ध्वज फॉर्मेशन) उड़ान से हुई। इसके बाद स्वदेशी तेजस फाइटर जेट ने “लाचित” कॉल साइन के साथ उड़ान भरी।
जैसे ही वायुसेना के विमानों ने उड़ान भरी, आसमान इंजन की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। हर बार जब कोई विमान करतब दिखाता, पूरा इलाका तालियों और जयकारों से भर उठता।

Guwahati Air display: 25 से ज्यादा फॉर्मेशन

यह पहली बार था जब पूर्वोत्तर भारत में इतने बड़े पैमाने पर भारतीय वायुसेना ने सार्वजनिक तौर पर अपने लड़ाकू विमानों का प्रदर्शन किया। इस आयोजन में सुखोई-30 एमकेआई, राफेल, तेजस, सी-17 ग्लोबमास्टर, सी-130 हरक्यूलिस, अपाचे हेलीकॉप्टर और सारंग टीम के हेलीकॉप्टर शामिल हुए। इस एयर शो में 25 से ज्यादा फॉर्मेशन हुईं।

ब्रह्मपुत्र के किनारे ब्रह्मोस

इस फ्लाईपास्ट का मुख्य आकर्षण रहा सुखोई-30 एमकेआई की उड़ान, जिसमें उसने ब्रहमपुत्र के घाट पर ब्रह्मोस मिसाइल के साथ उड़ान भरी। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार सुखोई-30 सार्वजनिक तौर पर ब्रह्मोस से लैस नजर आया। यह वही ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है जिसने ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के सैन्य और आतंकी ठिकानों का तबाह कर दिया था। पहली बार इसे किसी सार्वजनिक फ्लाइंग डिस्प्ले में दिखाया गया।

स्कैल्प मिसाइल के साथ दिखा राफेल

इसके साथ ही इसके साथ ही राफेल विमान ने स्कैल्प मिसाइल के साथ शानदार उड़ान भरी। यह लंबी दूरी की और बेहद सटीक वार करने वाली मिसाइल है। स्कैल्प मिसाइल को स्टॉर्म शैडो भी कहा जाता है। ऑपरेशन सिंदूर में राफेल लड़ाकू विमानों ने इस मिसाइल से पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों पर बेहद सटीक हमले किए और 100 से ज्यादा आतंकियों को ढेर कर दिया। यह फ्रांस से खरीदी लंबी दूरी की स्टेल्थ क्रूज मिसाइल है, जो कम ऊंचाई पर उड़कर रडार से बचती है और डीप स्ट्राइक मिशन, किलेबंद बंकरों, कमांड सेंटरों को भेदने में सक्षम है।

Guwahati Air display दोनों फाइटर जेट्स की कोआर्डिनेटेड फ्लाइट ने संदेश दिया कि भारतीय वायुसेना आधुनिक तकनीक, आत्मनिर्भरता और समन्वय के क्षेत्र में विश्वस्तरीय स्तर पर पहुंच चुकी है।

पहली बराक फॉर्मेशन

वहीं कार्यक्रम में बराक फॉर्मेशन देख कर लोग खुशी से ताली बजाने लगे। बराक फॉर्मेशन भारतीय वायुसेना की एक विशेष एरियल फॉर्मेशन है, जो पहली बार गुवाहाटी के लाचित घाट पर ब्रह्मपुत्र नदी के ऊपर आयोजित 93वें वायुसेना दिवस के भव्य फ्लाइंग डिस्प्ले में शोकेस की गई। बराक को संस्कृत में बिजली या तेज रफ्तार बी कहा जाता है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार इस फॉर्मेशन में सुखोई-30, राफेल, मिराज-2000 और स्वदेशी तेजस ने हिस्सा लिया। ये सभी विमान ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के खिलाफ इस्तेमाल हुए थे, जहां भारतीय वायुसेना ने ने दुश्मन के 12 एयरबेस को निशाना बनाया। यह फॉर्मेशन इनकी एकजुट ताकत को दर्शाती है। जो विमानों की रफ्तार, ताकत और आकस्मिक हमले की क्षमता का प्रतीक है और यह पूर्वोत्तर की सांस्कृतिक धरोहर से भी जुड़ा है।

महान योद्धा लचित बरफुकन को श्रद्धांजलि

हर फॉर्मेशन का नाम असम और पूर्वोत्तर की संस्कृति से जोड़ा गया था, जैसे होलोंग, काजीरंगा, कंचनजंगा, हाथी और बराक। वायुसेना की टीमों ने लचित, मानस, जैसी फॉर्मेशन में उड़ान भरी। इनमें से लचित फॉर्मेशन एलसीए तेजस विमान ने बनाई थी, जो असम के महान योद्धा लचित बरफुकन को श्रद्धांजलि थी। वहीं अपाचे हेलीकॉप्टरों ने राइनो कॉलसाइन के साथ उड़ान भरी, जो असम के गैंडे की शक्ति का प्रतीक था।

डिस्प्ले के आखिर में सुर्यकिरण एरोबैटिक टीम और सारंग हेलीकॉप्टर टीम ने उड़ान और करतब दिखाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरे कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम थे। गुवाहाटी, तेजपुर, हासीमारा और बागडोगरा सहित सात एयरबेसों को हाई अलर्ट पर रखा गया था।

वायुसेना प्रमुख ने बोला थैंक्स

वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि उत्तर-पूर्व क्षेत्र वायुसेना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और यहां इस तरह का आयोजन करना लंबे समय से उनकी योजना का हिस्सा था। उन्होंने कहा कि “हम पिछले दो-तीन सालों से पूर्वोत्तर में फ्लाइंग डिस्प्ले आयोजित करने की तैयारी कर रहे थे। इस बार हमने मौसम को ध्यान में रखते हुए नवंबर का समय चुना ताकि कार्यक्रम सुचारू रूप से हो सके।”

एयर चीफ ने यह भी कहा कि पूर्वोत्तर अब देश का दूरस्थ इलाका नहीं, बल्कि भारत की रणनीतिक शक्ति का अहम केंद्र है। उन्होंने आगे कहा, “यह देखकर दिल खुश हो गया कि गुवाहाटी और आसपास के इलाकों से लाखों लोग पहुंचे। मैं उम्मीद करता हूं कि यहां के युवा बड़ी संख्या में वायुसेना और एविएशन सेक्टर से जुड़ेंगे और देश की सेवा करेंगे।”

भारत हर मोर्चे पर तैयार- हिमंता बिस्वा सरमा

वहीं, मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि यह फ्लाइंग डिस्प्ले न केवल पूर्वोत्तर बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा, “चिकन नेक कॉरिडोर के पास इस तरह का एयर शो दुश्मनों के लिए स्पष्ट संदेश है कि भारत हर मोर्चे पर तैयार है।” उन्होंने जनता का उत्साह देखकर कहा कि “गुवाहाटी ने जिस तरह वायुसेना के साथ एकजुटता दिखाई है, वह असम के गौरव और देशभक्ति की मिसाल है।”

पूर्वोत्तर से जुड़ाव और सुरक्षा पर फोकस

इस कार्यक्रम के आयोजन में अहम भूमिका निभाने वाले ईस्टर्न एयर कमांड के एयर मार्शल सुरत सिंह ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य पूर्वोत्तर के लोगों से जुड़ाव बढ़ाना है। उन्होंने बताया कि अरुणाचल प्रदेश में आठ एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड पूरी तरह ऑपरेशनल हैं और वायुसेना नियमित रूप से यहां अभ्यास करती है।

उन्होंने कहा, “पूर्वी सीमा क्षेत्र में हमारी तैयारी पूरी है। चाहे दिन हो या रात, हमारे फाइटर, ट्रांसपोर्ट और हेलीकॉप्टर मिशन लगातार चलते रहते हैं। हाल ही में हमने सेना के साथ मिलकर बड़ी सफलता से संयुक्त अभ्यास भी किया है।”

युवाओं में दिखा खास जोश

फ्लाइंग डिस्प्ले के बाद लोगों ने सोशल मीडिया पर वीडियो और तस्वीरें साझा कीं। कई लोगों ने लिखा कि उन्होंने अपने जीवन में पहली बार वायुसेना का ऐसा शानदार प्रदर्शन देखा। युवाओं में खास जोश देखा गया और कई ने भारतीय वायुसेना में करियर बनाने की इच्छा जाहिर की।

यह दिन गुवाहाटी और पूरे उत्तर-पूर्व के लिए यादगार बन गया। भारतीय वायुसेना का यह फ्लाइंग डिस्प्ले सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह भारत की ताकत, आत्मनिर्भरता और एकता का प्रतीक बन गया। ब्रह्मपुत्र के किनारे आसमान में फाइटर जेट के इंजनों की गड़गड़ाहट ने साबित किया कि भारतीय वायुसेना हर परिस्थिति में देश की सुरक्षा के लिए तैयार है।

Indian Navy Day 2025: इस साल तिरुवनंतपुरम में नौसेना दिखाएगी ताकत, समुद्र में होगा नौसेना दिवस का भव्य आयोजन

Indian Navy Day 2025
Indian Navy Day 2025: Navy to Showcase Maritime Power with Grand Operational Display at Thiruvananthapuram

Indian Navy Day 2025: भारतीय नौसेना इस साल नौसेना दिवस का आयोजन केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में करेगी। 4 दिसंबर को शंगुमुगम बीच पर एक शानदार ऑपरेशनल डेमो का आयोजन होगा, जिसमें नौसेना की ताकत, तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भर भारत की झलक देखने को मिलेगी।

भारतीय नौसेना हर साल 4 दिसंबर को नौसेना दिवस मनाती है। इस बार का आयोजन खास इसलिए है क्योंकि इसे किसी बड़े नौसैनिक अड्डे की बजाय कोस्टल शहर (तटीय) में आयोजित किया जा रहा है, ताकि आम नागरिक भी नौसेना की क्षमता को करीब से देख सकें। पिछले वर्षों में यह कार्यक्रम ओडिशा के पुरी और महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग में हुआ था।

Indian Navy Day 2025: समुद्र में दिखेगी नौसेना की ताकत

शंगुमुगम तट पर होने वाले इस कार्यक्रम में भारतीय नौसेना अपनी मल्टी-डोमेन क्षमताओं को दिखाएगी। इसमें नौसेना के फ्रंटलाइन प्लेटफॉर्म्स, युद्धपोतों, पनडुब्बियों, हेलिकॉप्टरों और लड़ाकू विमानों की शानदार झलक देखने को मिलेगी।

INS Ikshak Indian Navy: नौसेना में शामिल हुआ स्वदेशी सर्वे शिप ‘इक्षक’, देश की समुद्री सीमाओं की करेगा निगरानी

कार्यक्रम में भारतीय नौसेना दिखाएगी कि कैसे समुद्र, हवा और पानी के नीचे एक साथ ऑपरेशन किए जा सकते हैं। जिसमें नौसेना की ऑपरेशनल रेडीनेस और सटीक हमला करने की ताकत को दुनिया देखेगी।

यह आयोजन भारत की बढ़ती समुद्री शक्ति, तकनीकी उत्कृष्टता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक होगा। भारतीय नौसेना ने हाल के वर्षों में खुद को न केवल एक कॉम्बैट-रेडी फोर्स के रूप में साबित किया है, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में एक पसंदीदा सुरक्षा भागीदार के रूप में भी स्थापित किया है।

इस साल नौसेना दिवस का आयोजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महासागर (म्यूचुअल एंड होलिस्टिक एडवांसमेंट फॉर सिक्युरिटी एंड ग्रोथ अक्रोस रीजंस) विजन पर आधारित है। जिसका उद्देश्य है भारत को हिंद महासागर क्षेत्र में एक स्थिर और भरोसेमंद सुरक्षा साझेदार के रूप में स्थापित करना।

इस साल के ऑपरेशनल डेमो में कई स्वदेशी प्लेटफॉर्म्स भी शामिल होंगे, जो भारत की आत्मनिर्भरता को दर्शाएंगे। ये जहाज और सिस्टम ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत तैयार किए गए हैं।

इनमें शामिल नौसैनिक प्लेटफॉर्म न केवल भारत की तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन करेंगे, बल्कि यह भी दिखाएंगे कि भारतीय नौसेना अब पूरी तरह फ्यूचर-रेडी है और किसी भी खतरे का जवाब देने के लिए तैयार है।

हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय नौसेना ने यह साबित किया कि वह सटीकता, गति और ताकत से किसी भी चुनौती का जवाब देने में सक्षम है। नौसेना का यह प्रदर्शन उन वीर सैनिकों को समर्पित है जो समुद्र में देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं।

नौसेना दिवस मनाने की कहानी

नौसेना दिवस हर साल 1971 के भारत-पाक युद्ध में भारतीय नौसेना की ऐतिहासिक भूमिका को याद करते हुए मनाया जाता है। उस युद्ध में ऑपरेशन ट्राइडेंट के तहत भारतीय नौसेना के मिसाइल बोट्स ने कराची बंदरगाह पर हमला कर पाकिस्तान के नौसैनिक ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया था। यह भारत की समुद्री शक्ति और रणनीतिक कुशलता का बड़ा उदाहरण था।

Indian Navy Day 2025 का नौसेना दिवस भारत की समुद्री शक्ति, साहस और पेशेवर क्षमता के जज्बे की याद दिलाएगा। यह आयोजन इस बात का प्रतीक होगा कि भारतीय नौसेना बैटल रेडी, एकजुट, विश्वसनीय और आत्मनिर्भर है, जो देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के लिए पूरी तरह से तैयार है।