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Exercise MaruJwala: थार मरुस्थल में थल सेना और वायुसेना ने दिखाई जॉइंटनेस की ताकत, पैराट्रूपर्स ने आसमान से लगाई छलांग

Exercise MaruJwala
Exercise MaruJwala

Exercise MaruJwala: जैसलमेर के थार मरुस्थल में भारतीय सेना के दक्षिणी कमान ने अपनी जबरदस्त ताकत और रणनीतिक कौशल का प्रदर्शन किया। यह एक्सरसाइज मुरुज्वाला का हिस्सा है, जो ट्राई सर्विस एक्सरसाइज त्रिशूल के तहत आयोजित की गई है। इस अभ्यास में भारतीय सेना, वायुसेना और पैराट्रूपर्स ने संयुक्त रूप से हिस्सा लिया और अपने ऑपरेशनल कौशल का प्रदर्शन किया।

Exercise Maru Jwala: थार की तपती रेत में भारतीय सेना कर रही हाई-टेक वॉर एक्सरसाइज, अभ्यास त्रिशूल का है हिस्सा

इस मौके पर साउदर्न कमांड के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने अभ्यास का निरीक्षण किया। उन्होंने सुदर्शन चक्र कोर और शाहबाज डिवीजन की ऑपरेशनल तैयारी की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि पिछले दो महीनों में साउदर्न कमांड की सुदर्शन चक्र कोर ने बेहद मेहनत से ट्रेनिंग की है, जिसकी झलक परिणाम आज एक्सरसाइज मुरुज्वाला में देखने को मिली है।

Exercise MaruJwala
Exercise MaruJwala: Lieutenant General Dhiraj Seth,General Officer Commanding-in-Chief of the Indian Army’s Southern Command

लेफ्टिनेंट जनरल सेठ ने बताया कि यह अभ्यास साउदर्न कमांड की स्ट्राइक कोर सुदर्शन चक्र कोर की युद्धक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसमें शाहबाज डिवीजन, एविएशन ब्रिगेड, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर ब्रिगेड और पैरास्पेशल फोर्सेज बटालियन ने भाग लिया। उन्होंने बताया कि इन सभी ने मिलकर पिछले दो महीनों में जिस समर्पण और दक्षता के साथ काम किया, वह भारतीय सेना के प्रोफेशनलिज्म को दर्शाता है।

थार मरुस्थल में आयोजित इस अभ्यास में आधुनिक युद्ध तकनीकों का परीक्षण किया गया। इसमें देश में बने ड्रोन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम, नई पीढ़ी के हथियारों और अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया। युद्धाभ्यास के दौरान मेकनाइज्ड और इन्फैंट्री कॉलम्स के साथ थार रैप्टर्स की एविएशन यूनिट और भारतीय वायुसेना ने भी हिस्सा लिया। यह अभ्यास वास्तविक युद्ध जैसे माहौल में किया गया, जिससे सैनिकों की तैयारी और सहयोग का स्तर परखा जा सके।

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने कहा कि इस तरह के अभ्यास भारतीय सेना की “नेटवर्क-सेंट्रिक ऑपरेशन” और “मल्टी-डोमेन वॉरफेयर” क्षमता को और मजबूत बनाते हैं। उन्होंने सुदर्शन चक्र कोर के सभी अधिकारियों और सैनिकों को उनके शानदार प्रदर्शन और अनुशासन के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि सेना की नई पीढ़ी के उपकरण और स्वदेशी तकनीक भारतीय रक्षा तैयारियों में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मजबूत कदम है।

Delhi Defence Dialogue 2025: रक्षा मंत्री बोले- साझेदारी से मिलेगी आत्मनिर्भरता, डिफेंस डील में लाइफ साइकिल कॉस्ट जरूरी

Delhi Defence Dialogue 2025
Raksha Mantri Rajnath Singh at Delhi Defence Dialogue 2025

Delhi Defence Dialogue 2025: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत को अब केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि उसका निर्माता बनना होगा। उन्होंने कहा कि भारत को एक ऐसा इकोसिस्टम तैयार करने की जरूरत है, जहां नई तकनीक का विकास और उसका इस्तेमाल सहज, तेज और टिकाऊ हो। रक्षा मंत्री नई दिल्ली में आयोजित दिल्ली डिफेंस डायलॉग 2025 में बोल रहे थे। यह कार्यक्रम मनोहर पर्रिकर इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस (MP-IDSA) द्वारा आयोजित किया गया था।

Delhi Defence Dialogue 2025: मिलकर करें काम

उन्होंने कहा कि भारत तभी तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बन सकता है जब देश में सैनिक, वैज्ञानिक, स्टार्टअप और रणनीतिकार एक साथ मिलकर काम करें। उनके शब्दों में, “सोल्जर, साइंटिस्ट, स्टार्टअप और स्ट्रैटेजिस्ट की साझेदारी ही भारत को तकनीक निर्माता बना सकती है।”

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राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत को ऐसे सिस्टम और संस्थान बनाने होंगे, जो नई तकनीकों के विकास और अपनाने में तेज और सक्षम हों। उन्होंने कहा कि अगर हमारी नींव मजबूत है और हमारे संस्थान फ्लेक्सिबल हैं तो कोई भी तकनीकी क्रांति हमें दबा नहीं पाएगी, बल्कि हमें आगे बढ़ाएगी।

उन्होंने कहा, “हमें सिर्फ दूसरों की बनाई तकनीक को अपनाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि हमें खुद नई तकनीकी क्रांतियों के निर्माता बनना चाहिए।”

रक्षा मंत्री ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, क्वांटम कंप्यूटिंग और स्वार्म टेक्नोलॉजी जैसी नई तकनीकों के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक की ताकत सिर्फ मशीनों या एल्गोरिद्म में नहीं, बल्कि उस सोच में है जो राष्ट्रीय सुरक्षा के हर हिस्से को नया रूप देती है।

‘डिजिटल सोवेरेन्टी से आएगी सच्ची आत्मनिर्भरता

राजनाथ सिंह ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को अब डिजिटल संप्रभुता (डिजिटल सोवेरेन्टी) तक बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि “सच्ची रणनीतिक स्वायत्तता तभी मिलेगी जब हमारा कोड भी उतना ही स्वदेशी होगा जितना हमारा हार्डवेयर।”

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उन्होंने बताया कि सरकार अब सुरक्षित और स्वदेशी सॉफ्टवेयर सिस्टम, विश्वसनीय सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन, और भारतीय डेटा पर आधारित एआई मॉडल को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा, “हमें मशीनों और एल्गोरिद्म की शक्ति के साथ-साथ उनके नैतिक और कानूनी पहलुओं पर भी ध्यान देना चाहिए।”

Delhi Defence Dialogue 2025: मानव और मशीन का संतुलन जरूरी

रक्षा मंत्री ने कहा कि तकनीक का उद्देश्य इंसान की सोच को बदलना नहीं, बल्कि उसे और मजबूत बनाना है। उन्होंने कहा कि भारत को उन नई तकनीकों में निवेश करना चाहिए जो न सिर्फ रक्षा क्षेत्र में मदद करें बल्कि नैतिक और मानवीय मूल्यों के साथ आगे बढ़ें।

उन्होंने बताया कि भारत की रक्षा उद्योग अब पहले से कहीं ज्यादा आत्मविश्वास से भरा हुआ है। देश में डीआरडीओ, सशस्त्र बल, उद्योग और शिक्षण संस्थान मिलकर एक ऐसा चक्र बना रहे हैं जो रिसर्च, टेस्ट, फीडबैक और इनोवेशन पर आधारित है।

iDEX और TDF ने बदला डिफेंस इनोवेशन का चेहरा

राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार के दो प्रमुख कार्यक्रम, इनोवेशंस फॉर डिफेंस एक्सीलेंस (iDEX) और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड (TDF) देश में एक नई पीढ़ी के इनोवेटर्स को तैयार कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि “आज छोटे स्टार्टअप से लेकर बड़ी कंपनियों तक, सभी भारत को आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के मिशन में योगदान दे रहे हैं।” उन्होंने यह भी बताया कि भविष्य की भारतीय रक्षा तकनीक में अब क्वांटम सेंसर, ऑटोनॉमस सिस्टम और स्पेस सर्विलांस जैसे क्षेत्रों में भारतीय कौशल की छाप होगी।

टेक्नोलॉजी सिर्फ ताकत नहीं, संसाधन का सही इस्तेमाल भी

रक्षा मंत्री ने कहा कि तकनीक को सिर्फ ताकत बढ़ाने का साधन नहीं, बल्कि संसाधन के बेहतर उपयोग का माध्यम भी माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि “कई विकसित देशों में रक्षा खरीद प्रक्रिया में लाइफ साइकिल कॉस्ट का सिद्धांत शामिल है। मैंने निर्देश दिया है कि अब भारत में भी हर रक्षा खरीद प्रस्ताव की शुरुआत में ही उसके रखरखाव और खर्च का आकलन किया जाए।”

उन्होंने कहा कि इससे रक्षा संसाधनों का सही इस्तेमाल सुनिश्चित होगा और दीर्घकालिक योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी।

‘विदेश से उपकरण नहीं, सर्वश्रेष्ठ प्रैक्टिस लाएं’

राजनाथ सिंह ने सशस्त्र बलों से कहा कि वे सिर्फ नई तकनीक ही नहीं, बल्कि ट्रेनिंग, लॉजिस्टिक्स, और मैनेजमेंट सिस्टम्स में भी दुनिया की सर्वश्रेष्ठ प्रैक्टिस को अपनाएं। उन्होंने कहा, “बेहतर है कि हम श्रेष्ठ उपकरणों की बजाय श्रेष्ठ प्रक्रियाएं अपनाएं, क्योंकि जब हमारी प्रणाली मजबूत होगी, तो हम वही उत्कृष्टता खुद बना सकेंगे।”

दिल्ली ब्लास्ट पर बोले रक्षा मंत्री

अपने संबोधन की शुरुआत में रक्षा मंत्री ने दिल्ली में 10 नवंबर को हुए दुखद हादसे में जान गंवाने वालों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि देश की जांच एजेंसियां मामले की तेजी से जांच कर रही हैं और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

Delhi Defence Dialogue: सीडीएस जनरल चौहान बोले- मॉडर्न वॉरफेयर का सबसे सफल उदाहरण है ऑपरेशन सिंदूर, हथियारों के साथ तकनीक है जीत की चाबी

Operation Sindoor: Example of Modern Warfare and Technological Power, Says CDS General Anil Chauhan
CDS General Anil Chauhan speaking at Delhi Defence Dialogue

Delhi Defence Dialogue: चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर मॉडर्न वॉरफेयर का एक सशक्त उदाहरण है, जिसमें तकनीकी श्रेष्ठता और तुरंत फैसले लेने की क्षमता ने निर्णायक भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन में प्रिसिजन स्ट्राइक, नेटवर्क-सेंट्रिक ऑपरेशन, डिजिटाइज्ड इंटेलिजेंस और मल्टी-डोमेन टैक्टिक्स का बेहद प्रभावी इस्तेमाल किया गया।

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जनरल चौहान दिल्ली में आयोजित दिल्ली डिफेंस डायलॉग में ‘इम्पैक्ट ऑफ टेक्नोलॉजी ऑन मॉडर्न वॉरफेयर विषय पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि आज के दौर में तकनीकी विशेषज्ञता ही युद्ध के नतीजे तय करती है और वही देश विजयी होता है जो तकनीक में आगे रहता है।

Delhi Defence Dialogue: तकनीक से तय हो रही है जीत की दिशा

सीडीएस चौहान ने कहा कि आधुनिक युद्ध सिर्फ हथियारों की ताकत पर नहीं, बल्कि तकनीक पर आधारित है। उन्होंने बताया कि उभरती हुई तकनीकें जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और क्वांटम टेक्नोलॉजी ने युद्ध की परिभाषा बदल दी है। उन्होंने कहा कि आज के युद्धक्षेत्र में डेटा, नेटवर्क और तुरंत फैसले लेने की क्षमता ही सबसे बड़ी ताकत है।

जनरल चौहान ने बताया कि भारतीय सेनाएं अब तेजी से नई तकनीकों को अपना रही हैं और पारंपरिक युद्ध से आगे बढ़कर मल्टी-डोमेन ऑपरेशन की दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य का युद्ध केवल सीमा पर नहीं लड़ा जाएगा, बल्कि इसमें साइबर, स्पेस और इलेक्ट्रॉनिक डोमेन भी शामिल होंगे।

यह दो दिवसीय सम्मेलन मनोज पार्रिकर इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस (MP-IDSA) द्वारा आयोजित किया गया था। इस वर्ष संस्थान के 60वें स्थापना दिवस के मौके पर इसका आयोजन किया गया।
सम्मेलन का विषय था, ‘हार्नेसिंग न्यू एज टेक्नोलॉजी फॉर डिफेंस कैपेबिलिटी डेवलपमेंट’ यानी नई पीढ़ी की तकनीक का उपयोग कर रक्षा क्षमता का विकास।

Delhi Defence Dialogue

कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उद्घाटन किया, जबकि मनोज पार्रिकर इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस के डीजी एंबेसडर सुजान चिनॉय ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया औद्योगिक युग से आगे बढ़कर सूचना और साइबर युग में प्रवेश कर चुकी है, जहां तकनीक ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है।

एंबेसडर चिनॉय ने बताया कि रक्षा क्षेत्र में भारत को विदेशी तकनीक पर निर्भरता घटाकर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज दुनिया की सेनाएं इंडस्ट्रियल एज से निकलकर डिजिटल और साइबर युद्ध के दौर में पहुंच चुकी हैं, जहां मशीन और मानव दोनों की भूमिका बराबर है।

जनरल चौहान ने कहा कि भारतीय सेनाएं अब सिर्फ युद्ध नहीं, बल्कि तकनीकी उत्कृष्टता के माध्यम से सुरक्षा और स्थिरता की दिशा में काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने दिखाया कि अगर तकनीक, रणनीति और कॉर्डिनेशन एक साथ हो, तो सीमित समय में भी बड़े रिजल्ट हासिल किए जा सकते हैं।

कार्यक्रम में नीति-निर्माता रक्षा विशेषज्ञ, उद्योगपति और शिक्षाविद भी शामिल हुए। सभी ने एकमत से कहा कि भारत को भविष्य की रक्षा प्रणाली में डेटा-ड्रिवन दृष्टिकोण अपनाना होगा और टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन को आगे बढ़ाना होगा।

जनरल चौहान ने कहा, “युद्ध का असली मकसद जीत सुनिश्चित करना है, और यह तभी संभव है जब हमारे पास श्रेष्ठ तकनीक, सटीक जानकारी और फैसला लेने की क्षमता हो।”

Cavalry Seminar 2025: सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी बोले- भविष्य के युद्ध में जरूरी होगी ‘इंसान और मशीन’ की साझेदारी

Cavalry Seminar 2025- General Upendra Dwivedi
Indian Army Chief General Upendra Dwivedi at Cavalry Seminar 2025

Cavalry Seminar 2025: भारतीय थल सेना के प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि आने वाले समय में युद्ध का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा। उन्होंने कहा कि भविष्य के बैटल फील्ड में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन, डेटा एनालिटिक्स और मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस का बड़ा योगदान होगा।

जनरल उपेंद्र द्विवेदी दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित दो दिवसीय कैवेलरी सेमिनार 2025 में बोल रहे थे।

Cavalry Seminar 2025: भविष्य के युद्ध में जरूरी होगी “इंसान और मशीन” की साझेदारी

सेना प्रमुख ने कहा कि तकनीक जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, उतनी ही तेजी से युद्ध की रणनीतियां भी बदल रही हैं। उन्होंने कहा, “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कभी इंसान के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह इंसान को और अधिक सक्षम बनाती है। असली ताकत एक कमांडर की रचनात्मक सोच, उसकी सहानुभूति और समय पर सही फैसले लेने की क्षमता में होती है।” उन्होंने समझाया कि जब तकनीक को मानव नेतृत्व के साथ जोड़ा जाता है, तब युद्ध में जीत तय की जा सकती है।

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Cavalry Seminar 2025: ऑपरेशन और रणनीति में बढ़ेगा एआई और डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल

जनरल द्विवेदी ने कहा कि भारतीय सेना 2032 तक पूरी तरह मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस में ट्रांसफॉर्म होने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसमें थल, वायु, समुद्र, अंतरिक्ष और साइबर सभी क्षेत्रों में तालमेल बनाकर युद्ध लड़ने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने बताया कि सेना अब एआई-आधारित सिस्टम्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी, और डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल तुरंत और सटीक फैसले लेने के लिए कर रही है।

 

लीडरशिप और इनोवेशन से बनेगी भविष्य की सेना

सेना प्रमुख ने कहा कि “भविष्य का युद्ध जीतने के लिए हमें सिर्फ हथियार नहीं, बल्कि सोच, इनोवेशन और नेतृत्व में भी बदलाव लाना होगा।” उन्होंने कहा कि भारतीय सेना एक ऐसी ताकत बनना चाहती है जो तकनीक और इंसानी नेतृत्व दोनों के संतुलन से दुनिया के किसी भी युद्धक्षेत्र में अपनी श्रेष्ठता बनाए रख सके।

यह दो दिवसीय सम्मेलन कैवेलरी ऑफिसर्स एसोसिएशन द्वारा आयोजित किया गया था, जिसका विषय था “मैकेनाइज्ड फोर्सेज ऑन द फ्यूचर बैटलफील्ड”। पहले दिन विशेषज्ञों ने टैंक टेक्नोलॉजी, इंफैंट्री कॉम्बैट व्हीकल्स, डीप टेक, ड्रोन ऑपरेशन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर जैसे विषयों पर विचार साझा किए।

इस मौके पर कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों लेफ्टिनेंट जनरल राकेश कपूर, लेफ्टिनेंट जनरल राजा सुब्रमणि, और कर्नल एके शर्मा (रिटायर्ड) समेत इंडस्ट्री के एक्सपर्ट्स शामिल हुए। सेमिनार के आखिरी दिन लेफ्टिनेंट जनरल पीपी सिंह, लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर. सिंह और कई वरिष्ठ अफसरों ने “मेक इन इंडिया” के तहत डिफेंस सेक्टर में नई तकनीकों के डेवलपमेंट पर चर्चा की। सभी विशेषज्ञों का मानना था कि 2047 के विकसित भारत लक्ष्य को हासिल करने के लिए तकनीक, इनोवेशन और उद्योग-सेना के साझा प्रयास बेहद जरूरी हैं।

Operation Sindoor: भारतीय वायुसेना के वाइस चीफ एयर मार्शल नरमदेश्वर तिवारी बोले- ऑपरेशन सिंदूर में दिखा इंटीग्रेटेड नेटवर्क का कमाल

Operation Sindoor: Vice Chief of Air Staff (VCAS) Air Marshal Narmdeshwar Tiwari
Vice Chief of Air Staff (VCAS) Air Marshal Narmdeshwar Tiwari

Operation Sindoor: भारतीय वायुसेना के वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ एयर मार्शल नरमदेश्वर तिवारी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का सबसे बड़ा कारण भारतीय सेना का मजबूत और प्रभावी नेटवर्क रहा। उन्होंने कहा कि अगर यह नेटवर्क इतना सटीक और भरोसेमंद न होता, तो वायुसेना इतनी दक्षता के साथ इस ऑपरेशन को अंजाम नहीं दे पाती।

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एयर मार्शल तिवारी मंगलवार को दिल्ली के सुब्रतो पार्क में आयोजित डिफेंस सेमिनार ‘सी4I2 एंड नेटवर्क सेंट्रिक वॉरफेयर इंडिया 2025’ में बोल रहे थे। यह कार्यक्रम सेंटर फॉर एयरोस्पेस पावर एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज (CAPSS) और इंडियन मिलिट्री रिव्यू ने संयुक्त रूप से आयोजित किया था।

Operation Sindoor: ऑपरेशन सिंदूर में दिखा नेटवर्क का कमाल

एयर मार्शल तिवारी ने कहा कि मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना ने अपनी इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (IACCS) की क्षमता का पूरा इस्तेमाल किया। इस सिस्टम ने देश के विभिन्न एयर डिफेंस सेंटरों को जोड़कर रियल टाइम में हालात की निगरानी की। उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर ने साबित किया कि जब हम सही नेटवर्क से जुड़े हों और हमारे पास सही उपकरण हों, तो हम किसी भी सैन्य अभियान को सटीकता और कुशलता से अंजाम दे सकते हैं।”

भारत ने 7 मई को इस ऑपरेशन की शुरुआत की थी, जिसमें पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्थित कई आतंकवादी ठिकानों को नष्ट किया था। इसके बाद पाकिस्तान ने भी जवाबी कार्रवाई की, लेकिन भारत की मजबूत तैयारी और नेटवर्क आधारित ऑपरेशन ने उसे पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। 10 मई की शाम दोनों देशों के बीच सीजफायर के बाद यह सैन्य अभियान खत्म हुआ।

मजबूत नेटवर्क ने दिलाई सफलता 

एयर मार्शल तिवारी ने अपने संबोधन में कहा कि “अगर हमारे पास मजबूत नेटवर्क नहीं होता, तो यह ऑपरेशन इतना प्रभावी नहीं हो सकता था। हो सकता है कि हम सफल होते, लेकिन इतनी कुशलता और तेजी के साथ नहीं।” उन्होंने कहा कि बीते 20 सालों में भारत का मिलिट्री नेटवर्क बहुत एडवांस हुआ है, जिससे अब पूरे देश की एयर पिक्चर रियल टाइम में मॉनिटर की जा सकती है।

एआई और स्वदेशी तकनीक ने दिखाई ताकत

सेमिनार में चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ एयर मार्शल अशुतोष दीक्षित ने कहा कि Operation Sindoor ऑपरेशन सिंदूर भारत की डिफेंस हिस्ट्री का एक अहम मोड़ रहा। उन्होंने बताया कि इस अभियान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्वदेशी तकनीक ने बड़ी भूमिका निभाई।

एयर मार्शल दीक्षित ने कहा, “स्वदेशी तकनीक ने हमें युद्ध के मैदान में स्वतंत्रता और रफ्तार दी। इसने दिखाया कि आत्मनिर्भर भारत की नीति अब केवल एक नारा नहीं, बल्कि डिफेंस पावर की असली पहचान बन चुकी है।”

कार्यक्रम में रक्षा विशेषज्ञों ने कमान, कंट्रोल, कम्युनिकेशन, कंप्यूटर, इंटेलिजेंस और इंटरऑपरेबिलिटी (सी4I2) सिस्टम के महत्व पर चर्चा की। कार्यक्रम के दौरान ग्रुप कैप्टन डॉ. रजनीश कुमार की किताब “इंडियाज एयरोस्पेस पॉवर: द सेंट्रल एशियन डायनामिक्स” का विमोचन भी किया गया।

GPS Spoofing Delhi Blast Link: क्या एक ही साजिश से जुड़े हैं दिल्ली ब्लास्ट और जीपीएस स्पूफिंग के तार? क्या भारत पर हुआ हाइब्रिड टेररिज्म अटैक?

GPS Spoofing Delhi Blast Connection

GPS Spoofing Delhi Blast Link: दिल्ली के लाल किला ब्लास्ट, एयरपोर्ट पर हुई जीपीएस स्पूफिंग और फरीदाबाद में बरामद हुए 2900 किलो विस्फोटक के बीच अब एक गहरी कड़ी सामने आ रही है। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह तीनों घटनाएं “हाइब्रिड टेररिज्म” का हिस्सा हो सकती हैं, यानी ऐसा आतंकवाद जिसमें फिजिकल और साइबर दोनों तरह के हमले एक साथ किए जाते हैं।

Delhi Red Fort blast: आतंकियों ने बदली रणनीति, कश्मीर से दिल्ली तक फैला जैश और अंसार गजवत-उल-हिंद का नेटवर्क

दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए भीषण ब्लास्ट और पिछले हफ्ते एयरपोर्ट पर हुई जीपीएस स्पूफिंग की घटना ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। दोनों घटनाएं एक हफ्ते के अंदर हुई हैं और अब जांच एजेंसियां यह जानने में जुटी हैं कि क्या इन दोनों का आपस में कोई सीधा आतंकी कनेक्शन है।

GPS Spoofing Delhi Blast Link: लोकल टेरर सेल के बचे लोग बने साजिश का हिस्सा

सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, फरीदाबाद और दिल्ली में हुए ऑपरेशन के बाद आतंकियों के कई नेटवर्क को “रोल-अप” किया गया था। हालांकि, कुछ “रेमनेंट्स” यानी बचे हुए लोग सक्रिय हो गए और उन्होंने योजना को अंजाम दे दिया। फरीदाबाद में गिरफ्तार डॉक्टरों और दिल्ली में मिले ब्लास्ट एविडेंस से पता चला कि पाकिस्तानी हैंडलर्स से जुड़ा एक टेलीग्राम चैनल इस्तेमाल किया जा रहा था। इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह चैनल जैश-ए-मोहम्मद और आईएसआईएस के प्रॉक्सी अकाउंट्स से जुड़ा है।

दिल्ली एयरपोर्ट पर जीपीएस स्पूफिंग का अलर्ट

पिछले हफ्ते दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास विमानों के नेविगेशन सिस्टम में गड़बड़ी देखी गई थी। पायलटों ने बताया कि उन्हें गलत लोकेशन डेटा और टेरेन वार्निंग मिल रही थी। यह सब दिल्ली से करीब 60 नौटिकल मील के दायरे में हुआ।

Red Fort Car Blast: दिल्ली कार ब्लास्ट में कहीं जम्मू-कश्मीर के डॉक्टरों से जुड़े आतंकी मॉड्यूल का हाथ तो नहीं? फरीदाबाद से बरामद हुआ था 350 किलो विस्फोटक

जीपीएस स्पूफिंग दरअसल एक ऐसा साइबर अटैक होता है जिसमें नकली सैटेलाइट सिग्नल भेजकर नेविगेशन सिस्टम को धोखा दिया जाता है। यानी विमान का सिस्टम यह समझता है कि वह सही रास्ते पर है, जबकि असल में वह गलत दिशा में जा रहा होता है।

यह घटना तब हुई जब एयरपोर्ट का इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम अपग्रेड के लिए बंद था और विमान पूरी तरह जीपीएस पर निर्भर थे। इस दौरान नकली सिग्नल भेजे जाने से कई उड़ानों की दिशा गड़बड़ा गई और एयर ट्रैफिक कंट्रोल को मैनुअल नेविगेशन जीपीएस पर स्विच करना पड़ा।

एनएसए दफ्तर ने जांच शुरू की

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के दफ्तर ने दिल्ली एयरपोर्ट पर जीपीएस स्पूफिंग के मामले में जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों को शक है कि यह सिर्फ एक तकनीकी गलती नहीं, बल्कि किसी संगठित साइबर अटैक का हिस्सा हो सकता है, जो लाल किला ब्लास्ट से पहले या उसके साथ जुड़ा हो। राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के अधीन काम करने वाले नेशनल साइबर सिक्योरिटी कोऑर्डिनेटर नवीन कुमार सिंह इस पूरे मामले की जांच का नेतृत्व कर रहे हैं। सर्ट-इन, डीजीसीए और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया भी इस जांच में शामिल हैं।

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अधिकारियों के अनुसार, यह जांच इस बात पर केंद्रित है कि कहीं यह स्पूफिंग किसी आतंकी नेटवर्क या विदेशी एजेंसी जैसे आईएसआई की कोशिश तो नहीं थी।

फरीदाबाद में डॉक्टरों की गिरफ्तारी से बढ़ा शक

जीपीएस स्पूफिंग की घटना के दो दिन बाद फरीदाबाद में पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने 2900 किलो विस्फोटक बरामद किया। इस कार्रवाई में तीन डॉक्टरों डॉ. आदिल अहमद राथर, डॉ. सादिया और डॉ. मुजम्मिल गनी को गिरफ्तार किया गया, जिनके संबंध जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवत-उल-हिंद जैसे आतंकी संगठनों से पाए गए।

Jaish Female Wing: जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग की हेड निकली डॉक्टर शाहीन, पाकिस्तान से था सीधा लिंक

जांच में यह भी सामने आया कि फरीदाबाद में गिरफ्तार आतंकी नेटवर्क दिल्ली में बड़े ब्लास्ट की साजिश रच रहा था, जो बाद में लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुआ।

लाल किला ब्लास्ट में आतंकी मंशा हुई साफ

10 नवंबर की शाम लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास खड़ी एक ह्युंडई आई-20 कार में जोरदार धमाका हुआ।
इसमें अब तक 13 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। सूत्रों के अनुसार, यह फिदायीन हमला था, जिसे जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों ने अंजाम दिया था।

जांच अधिकारियों का कहना है कि लाल किला को इसलिए चुना गया क्योंकि यह दिल्ली के दिल में स्थित है और इसका प्रतीकात्मक महत्व बहुत बड़ा है। आतंकियों का मकसद यह दिखाना था कि वे भारत की राजधानी के केंद्र तक पहुंच सकते हैं।

GPS Spoofing Delhi Blast Link: हाइब्रिड टेररिज्म का नया चेहरा?

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला केवल ब्लास्ट तक सीमित नहीं है। यह मल्टी-लेयर अटैक था, जिसमें एक साथ साइबर हमला, फिजिकल ब्लास्ट और मनोवैज्ञानिक दहशत फैलाने की कोशिश की गई। इसका उद्देश्य भारत की इकोनॉमी, सिक्योरिटी सिस्टम और जनता के भरोसे को एक साथ झटका देना था।

जानकारों के अनुसार, दिल्ली एयरपोर्ट पर हुई जीपीएस स्पूफिंग ने उड़ानों की दिशा बदल दी थी। करीब 800 फ्लाइट्स डिले हुईं और 20 से ज्यादा उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। इससे करीब 500 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ, जो सीधे तौर पर ट्रेड और टूरिज्म को प्रभावित करता है।

क्या जीपीएस स्पूफिंग इसी साजिश का हिस्सा थी?

यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत आने वाले हैं। दोनों देशों की खुफिया एजेंसियां मोसाद और एफएसबी भारत के साथ मिलकर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा कर रही हैं।

सूत्रों का कहना है कि जीपीएस स्पूफिंग एक सिग्नल जैमिंग रिहर्सल भी हो सकता है, ताकि इन हाई प्रोफाइल दौरों से पहले भारत के एयर डिफेंस सिस्टम की क्षमता परखा जा सके। कुछ सूत्रों का कहना है कि जीपीएस स्पूफिंग और ब्लास्ट दोनों एक ही मास्टर प्लान का हिस्सा थे, जिनका उद्देश्य भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को चुनौती देना था।

क्या जीपीएस स्पूफिंग ऑपरेशन सिंदूर का काउंटर-मूव

भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर के जरिए पाकिस्तान की एयर डिफेंस ग्रिड को कुछ घंटों के लिए डिएक्टिवेट कर दिया था। यह भारत की बड़ी रणनीतिक सफलता मानी जा रही थी। विशेषज्ञों का कहना है कि अब जीपीएस स्पूफिंग उसी का काउंटर-मूव हो सकता है, यानी भारत को दिखाना कि पाकिस्तान भी उसके एयर नेटवर्क को “ब्लाइंड” कर सकता है। अगर यह सच है, तो यह एक नए तरह का वॉरफेयर है, जहां सैटेलाइट, साइबर और सिग्नल इंटरफेरेंस अब मिसाइलों जितने खतरनाक हथियार बन चुके हैं।

साइलेंस में लड़ी जा रही जंग: साइबर और साइकोलॉजिकल वार

सुरक्षा विशेषज्ञ इसे वॉर फॉट इन साइलेंस कह रहे हैं। जिसमें तीन स्तरों पर हमला किया गया। साइबर अटैक के जरिए भ्रम फैलाना, साइकोलॉजिकल वार के जरिए डर पैदा करना, और फिजिकल ब्लास्ट के जरिए दहशत और नुकसान पहुंचाना।

यह रणनीति भारत की रिस्पॉन्स कैपेसिटी को टेस्ट करने के लिए भी बनाई गई है। कई विशेषज्ञों का कहना है कि यह हमला डिस्ट्रक्शन के लिए नहीं बल्कि डिसऑर्डर के लिए किया गया।

एनएसए अजीत डोभाल के नेतृत्व में अब देशभर में एक “डीप क्लीन ऑपरेशन” चलाया जा रहा है। एनआईए, आईबी और रॉ मिलकर उन नेटवर्क्स को ट्रैक कर रहे हैं, जो आईएसआई या विदेशी एजेंसियों से संपर्क में थे। साथ ही इसका असली मास्टरमाइंड कौन है, इसकी की पहचान की जा रही है।

कूटनीतिक दौरों से पहले बढ़ी साजिशें

GPS Spoofing Delhi Blast Link इस पूरे घटनाक्रम का समय भी बेहद अहम है। जल्द ही भारत में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के दौरे तय हैं। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि इन दौरों से पहले भारत में अस्थिरता फैलाने की यह कोशिश की गई है। इसके अलावा भारत ने हाल ही में अरब सागर से बंगाल की खाड़ी तक कई नोटाम जारी किए हैं। आधिकारिक तौर पर यह मिसाइल परीक्षणों के लिए हैं, लेकिन सूत्रों के अनुसार, यह कदम भारत के काउंटर-ऑपरेशंस का हिस्सा भी हो सकते हैं।

Delhi Red Fort blast: आतंकियों ने बदली रणनीति, कश्मीर से दिल्ली तक फैला जैश और अंसार गजवत-उल-हिंद का नेटवर्क

Delhi Red Fort blast
Delhi Red Fort blast: Terror network shifts focus from Kashmir to India’s heartland

Delhi Red Fort blast: दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास 10 नवंबर की शाम हुआ भीषण ब्लास्ट अब देश की राजधानी को दहला देने वाला सबसे बड़ा आतंकी हमला माना जा रहा है। शुरुआती जांच में यह साफ हो गया है कि यह धमाका किसी साधारण घटना का नतीजा नहीं, बल्कि एक संगठित आतंकी साजिश थी। अब तक की जानकारी के मुताबिक 13 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें तीन संदिग्ध हमलावर भी शामिल हैं।

Delhi Red Fort blast: आतंकियों की रणनीति में बड़ा बदलाव

खुफिया एजेंसियों का मानना है कि इस धमाके का मकसद सिर्फ जान-माल की हानि नहीं था, बल्कि यह दिखाना था कि आतंकी अब कश्मीर से आगे बढ़कर भारत के दिल यानी दिल्ली को निशाना बना रहे हैं। मामले की जांच कर रहे शीर्ष सूत्रों ने बताया कि नई दिल्ली में लाल किले पर हुआ आतंकी हमला एक फिदायीन हमला था। जैश-ए-मोहम्मद ने राजधानी के दिल पर हमला करने के लिए अपनी ताकत का संदेश देने के लिए लाल किले को चुना है।

Jaish Female Wing: जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग की हेड निकली डॉक्टर शाहीन, पाकिस्तान से था सीधा लिंक

लाल किला मेट्रो स्टेशन दिल्ली के सबसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में से एक है, जो संसद भवन, राष्ट्रपति भवन और अन्य सरकारी संस्थानों से कुछ ही दूरी पर है। यहां हमला करना आतंकियों की “नई रणनीति” का संकेत है, अब वे जंगलों या पहाड़ियों में नहीं, बल्कि शहरी इलाकों में हमला कर रहे हैं।

Delhi Red Fort blast: फरीदाबाद से मिला 2900 किलो विस्फोटक

धमाके से सिर्फ एक दिन पहले, यानी 9 नवंबर को फरीदाबाद पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई में करीब 2,900 किलो विस्फोटक, हथियार और आईईडी बनाने का सामान बरामद किया था। पुलिस ने इस मामले में जम्मू-कश्मीर से जुड़े व्हाइट कॉलर प्रोफेशनल्स यानी कुछ डॉक्टरों को गिरफ्तार किया था।

अब जांच में यह साफ होता जा रहा है कि लाल किला ब्लास्ट का तार उसी फरीदाबाद मॉड्यूल से जुड़ा है। संभावना है कि ये विस्फोटक दिल्ली लाए जा रहे थे और किसी और जगह इस्तेमाल किए जाने थे, लेकिन कार में अचानक ब्लास्ट हो गया।

कश्मीर से दिल्ली तक फैला जैश और अंसार गजवत-उल-हिंद का नेटवर्क

प्रारंभिक जांच में सुरक्षा एजेंसियों ने इस हमले के पीछे पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवत-उल-हिंद के हाथ होने की आशंका जताई है।

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दोनों संगठन लंबे समय से जम्मू-कश्मीर में सक्रिय रहे हैं, लेकिन अब उनका नेटवर्क राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र तक फैल चुका है। गिरफ्तार आरोपियों में कई उच्च शिक्षित लोग शामिल हैं, जिनमें डॉक्टर और विश्वविद्यालय के शिक्षक भी हैं।

‘व्हाइट कॉलर’ आतंकी

इस पूरे मॉड्यूल में एक खास बात सामने आई है कि अब आतंकी संगठन ‘व्हाइट कॉलर टेररिस्ट’ का इस्तेमाल कर रहे हैं। यानी ऐसे लोग जो दिखने में पढ़े-लिखे, प्रोफेशनल और सम्मानित वर्ग से हों, ताकि सुरक्षा एजेंसियों को उन पर शक न हो।

फरीदाबाद में गिरफ्तार हुई महिला डॉक्टर डॉ. शाहीन शाहिद, जम्मू-कश्मीर के डॉक्टर आदिल अहमद राथर, और अन्य आरोपी इसी नेटवर्क से जुड़े पाए गए हैं। इन लोगों को पाकिस्तान से भेजे गए संदेशों और फंडिंग के आधार पर आतंक फैलाने के मिशन में लगाया गया था।

आतंकियों की नई रणनीति शहरी इलाकों में हमला

सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, अब आतंकवादी संगठन अपनी रणनीति बदल चुके हैं। पहले वे सीमित इलाकों में सुरक्षा बलों को निशाना बनाते थे, लेकिन अब उनका फोकस घनी आबादी वाले शहरी इलाकों पर है।
उनकी योजना ऐसे शहरों में दहशत फैलाने की है जहां भीड़ और मीडिया की मौजूदगी सबसे ज्यादा हो।

एनएसए अजीत डोभाल की चेतावनी  

दिल्ली ब्लास्ट के कुछ दिन पहले ही, 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने एक कार्यक्रम में कहा था कि भारत ने आतंकवाद पर काफी हद तक नियंत्रण पाया है। उन्होंने कहा था, “जम्मू-कश्मीर को छोड़कर भारत के किसी भी हिस्से में 2013 के बाद कोई बड़ा आतंकी हमला नहीं हुआ।” लेकिन दिल्ली ब्लास्ट ने यह साबित कर दिया कि आतंकियों ने अपनी रणनीति बदल ली है और अब वे देश के अंदरूनी हिस्सों में सक्रिय होने की कोशिश कर रहे हैं।

Delhi Blast Update – जांच एजेंसियों की निगरानी और सख्त हुई सुरक्षा

Delhi Red Fort blast ब्लास्ट के बाद एनआईए, दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल और इंटेलिजेंस ब्यूरो ने जांच की जिम्मेदारी संभाल ली है।
राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ा दिया गया है। रेलवे स्टेशन, मेट्रो स्टेशन और धार्मिक स्थलों पर तलाशी अभियान चल रहे हैं।

एजेंसियां इस बात की जांच कर रही हैं कि क्या यह ब्लास्ट किसी बड़े हमले की तैयारी का हिस्सा था। साथ ही, पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों के साथ इसके सीधे संपर्कों की भी जांच की जा रही है।

Jaish Female Wing: जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग की हेड निकली डॉक्टर शाहीन, पाकिस्तान से था सीधा लिंक

Jaish Female Wing
Dr Shaheen Sadia

Jaish Female Wing: दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए ब्लास्ट की जांच के बीच फरीदाबाद से हुई एक महिला डॉक्टर की गिरफ्तारी ने सुरक्षा एजेंसियों को चौंका दिया है। खुफिया सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार महिला डॉक्टर डॉ. शाहीन शाहिद पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग जमात-ए-मोमिनात की भारत प्रमुख थी।

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सूत्रों के मुताबिक, डॉ. शाहीन शाहिद का सीधा संपर्क पाकिस्तान में जैश की महिला विंग की प्रमुख सादिया अजहर से था। सादिया, जैश के मुखिया मसूद अजहर की बहन है और उसका पति यूसुफ अजहर 1999 में हुए कंधार विमान अपहरण के साजिशकर्ताओं में शामिल था।

Jaish Female Wing: भारत में महिलाओं को आतंकी नेटवर्क से जोड़ रही थी शाहीन

जांच में सामने आया है कि डॉ. शाहीन शाहिद अल-फलाह यूनिवर्सिटी में काम करती थी और वहीं से उसने अपने नेटवर्क को मजबूत किया। वह भारत में महिला आतंकियों की भर्ती और ट्रेनिंग का काम संभाल रही थी। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि शाहीन का मकसद भारतीय महिलाओं को जैश-ए-मोहम्मद के कट्टर नेटवर्क से जोड़ना और उन्हें “जिहाद” के नाम पर तैयार करना था।

शाहीन को सोमवार को जम्मू-कश्मीर पुलिस और फरीदाबाद पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में गिरफ्तार किया गया। इस कार्रवाई के दौरान एक बड़े आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ हुआ जो कई राज्यों में सक्रिय था।

Jaish Female Wing: कार से मिली एके-47 राइफल और 83 राउंड

जांच एजेंसियों ने शाहीन की स्विफ्ट कार को जब्त किया है। कार की तलाशी के दौरान एक क्रिनकोव असॉल्ट राइफल, तीन मैगजीन और 83 राउंड बरामद किए गए। इसके अलावा, एक पिस्टल, आठ जिंदा कारतूस, दो खाली शेल और कई कम्युनिकेशन डिवाइस मिली हैं।

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खुफिया सूत्रों के अनुसार, शाहीन की कार में हर समय हथियार रखे जाते थे। वह कहीं भी जाती थी, तो एके-47 राइफल साथ लेकर चलती थी ताकि किसी भी कार्रवाई से बचाव किया जा सके।

Jaish Female Wing: कैसे बेनकाब हुआ जैश का नेटवर्क

यह कार्रवाई तब शुरू हुई जब जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कुछ दिन पहले अनंतनाग मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर आदिल अहमद राथर को गिरफ्तार किया। आदिल के लॉकर से एक एके-47 राइफल बरामद हुई थी। उसकी पूछताछ में अन्य नाम सामने आए जिनमें डॉ. मुजम्मिल गनई और डॉ. शाहीन शाहिद शामिल थे।

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फरीदाबाद और सहारनपुर में हुई तलाशी के दौरान एजेंसियों को 14 बोरियों में रखा गया 360 किलो अमोनियम नाइट्रेट, दो असॉल्ट राइफल, कई पिस्टल और इलेक्ट्रॉनिक सर्किट्स मिले। शुरुआती जांच में इसे आरडीएक्स समझा गया था, लेकिन बाद में पुष्टि हुई कि यह अमोनियम नाइट्रेट था, जो आईईडी बनाने में इस्तेमाल किया जाता है।

पाकिस्तान की सादिया अजहर से चैटिंग का खुलासा

खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, डॉ. शाहीन के मोबाइल और लैपटॉप से मिले डेटा में पाकिस्तान की सादिया अजहर के साथ एन्क्रिप्टेड चैट्स मिली हैं। इन बातचीत में महिलाओं की भर्ती, हथियारों की खरीद और भारत में “जमात-ए-मोमिनात” की शाखा फैलाने की बातें दर्ज हैं।

शाहीन का नेटवर्क देश के कई राज्यों तक फैला था, जिसमें दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, यूपी और जम्मू-कश्मीर प्रमुख हैं। एजेंसियों का मानना है कि शाहीन और उसके सहयोगी डॉ. आदिल अहमद राथर, डॉ. मुजम्मिल गनई और डॉ. उमर मोहम्मद मिलकर भारत में एक बड़े आतंकी हमले की साजिश रच रहे थे।

आतंकियों से सीधा संपर्क

सूत्रों का कहना है कि शाहीन के संपर्क में कई महिला छात्राएं थीं, जिन्हें कट्टरपंथी विचारधारा के जरिए संगठन में जोड़ा जा रहा था। उसे पाकिस्तान से लगातार आईएसआई और जैश के कमांडरों से निर्देश मिल रहे थे।

डॉ. शाहीन की गिरफ्तारी के बाद उसे पूछताछ के लिए श्रीनगर लाया गया, जहां उससे कई अहम खुलासे हुए हैं। एजेंसियों ने यह भी पाया कि जैश के इस मॉड्यूल का संपर्क अंसार गजवत-उल-हिंद से भी था, जो अल-कायदा से जुड़ा संगठन है।

दिल्ली ब्लास्ट से जुड़ रहा फरीदाबाद मॉड्यूल

जांच में अब यह साफ होता जा रहा है कि दिल्ली के रेड फोर्ट ब्लास्ट का सीधा रिश्ता फरीदाबाद के इसी आतंकी मॉड्यूल से है। सूत्रों के मुताबिक, जिस हुंडई आई20 कार में ब्लास्ट हुआ, वह इन्हीं लोगों से जुड़ी थी। कार की शुरुआती जांच में आईईडी के अंश और बारूद के निशान मिले हैं।

एजेंसियां अब इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि क्या यह ब्लास्ट उसी मॉड्यूल की आखिरी कोशिश थी, जिसे शाहीन और उसके साथियों ने तैयार किया था।

JeM Audio Threat: दिल्ली ब्लास्ट के बाद पाकिस्तान से धमकी भरा ऑडियो, कहा- ‘हथियार दिल्ली की ओर ताने हुए हैं’

JeM Audio Threat
Abdul Rauf Azhar and brother Masood Azhar

JeM Audio Threat: दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए भीषण ब्लास्ट के बाद एक नया ऑडियो संदेश सामने आया है, जिसमें पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के डिप्टी चीफ अब्दुल रऊफ अजहर ने भारत को खुले तौर पर धमकी दी है। ऑडियो में रऊफ अज़हर यह कहते सुना जा सकता है, “हमने हथियार खरीद लिए हैं और वे अब दिल्ली की ओर ताने हुए हैं। भारत का रक्षा खर्च उसे बचा नहीं पाएगा।”

इस धमकी भरे ऑडियो की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां इसे बेहद गंभीरता से ले रही हैं। भारत की खुफिया एजेंसियों ने इसे पाकिस्तान की ओर से दी जा रही एक डराने वाली रणनीति बताया है।

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सूत्रों के मुताबिक, यह वही अब्दुल रऊफ अजहर है जिसे भारतीय सेना ने कुछ महीने पहले ऑपरेशन सिंदूर में मारा गया बताया था। लेकिन इस नए ऑडियो के सामने आने के बाद यह संकेत मिल रहा है कि वह अभी जिंदा है और पाकिस्तान में छिपा हुआ है।

रऊफ अजहर, जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर का छोटा भाई है और लंबे समय से संगठन को चला रहा है। वह पहले भी भारत में कई बड़े आतंकी हमलों की साजिशों में शामिल रहा है।

JeM Audio Threat: पीएम मोदी और रक्षा मंत्री की सख्त चेतावनी

सोमवार शाम हुए रेड फोर्ट ब्लास्ट में कम से कम 13 लोगों की मौत हुई थी और दो दर्जन से ज्यादा घायल हुए थे। इस घटना के बाद भारत में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जो इस समय भूटान दौरे पर हैं, उन्होंने कहा, “दिल्ली में जो दुखद घटना हुई है, मैं उन परिवारों का दर्द समझ सकता हूं जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया है। हमारी एजेंसियां पूरी गंभीरता से जांच कर रही हैं। दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।”

वहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि “जो लोग इस हमले के जिम्मेदार हैं, उन्हें किसी भी हालत में नहीं छोड़ा जाएगा।”

JeM Audio Threat: कौन है अब्दुल रऊफ अजहर?

अब्दुल रऊफ अज़हर, जिसे मुफ्ती रऊफ असगर के नाम से भी जाना जाता है, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के बहावलपुर का रहने वाला है। वह देओबंदी सुन्नी इस्लामिक स्कूल ऑफ थॉट से जुड़ा है, जो जैश-ए-मोहम्मद की विचारधारा की नींव है।

उसका भाई मसूद अजहर संगठन का चेहरा रहा है, लेकिन कई बार जब मसूद अजहर पृष्ठभूमि में रहा, तब रऊफ ही जैश का वास्तविक संचालन प्रमुख बना रहा। वह पर्दे के पीछे रहकर संगठन के लिए फंडिंग, भर्ती और ऑपरेशन की जिम्मेदारी संभालता है।

भारत पर रऊफ अजहर के आतंकी हमले

रऊफ अजहर का नाम भारत में हुए कई बड़े आतंकी हमलों से जुड़ा हुआ है। 1999 में आईसी-814 विमान अपहरण में उसकी भूमिका सबसे अहम थी। इस अपहरण के बाद भारत को मजबूरी में मसूद अज़हर को रिहा करना पड़ा, जिसने बाद में जैश-ए-मोहम्मद की स्थापना की।

2001 में हुए भारतीय संसद हमले में भी उसका नाम सामने आया। माना जाता है कि यह हमला जैश और लश्कर-ए-तैयबा के संयुक्त नेटवर्क द्वारा किया गया था।

2005 में अयोध्या मंदिर हमले, 2014 में कठुआ आर्मी कैंप पर हमला, 2016 में पठानकोट एयरबेस हमला, और 2019 में पुलवामा हमले, इन सभी में रऊफ अजहर की भूमिका रही है। पुलवामा हमले में 42 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए थे। इस हमले में उसका और मसूद अजहर दोनों का नाम चार्जशीट में शामिल है।

भारतीय खुफिया सूत्रों ने बताया कि यह ऑडियो संदेश भय और अस्थिरता फैलाने की कोशिश है। यह धमकी ऐसे समय आई है जब भारत में हाल ही में कई आतंकी नेटवर्कों का भंडाफोड़ हुआ है, जिनमें फरीदाबाद, जम्मू-कश्मीर और दिल्ली से जुड़े मॉड्यूल शामिल हैं।

एजेंसियों ने कहा कि “जैश-ए-मोहम्मद की यह धमकी केवल एक राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक संदेश है। यह दिखाने की कोशिश है कि संगठन अभी भी सक्रिय है।”

दिल्ली में ब्लास्ट के बाद सुरक्षा एजेंसियां सोशल मीडिया, फोन कॉल रिकॉर्ड और बॉर्डर मूवमेंट्स पर कड़ी निगरानी रख रही हैं। वहीं, पाकिस्तान के अंदर कई आतंकी समूहों की गतिविधियों को भी ट्रैक किया जा रहा है।

Delhi Blast Update: रेड फोर्ट के आसपास मोबाइल डंप डेटा जुटा रही जांच एजेंसियां, सोशल मीडिया पर पैनी नजर

Delhi Blast Update

Delhi Blast Update: दिल्ली के रेड फोर्ट मेट्रो स्टेशन के पास हुए ब्लास्ट के बाद जांच एजेंसियों ने जांच की रफ्तार और तेज कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां अब सोशल मीडिया गतिविधियों पर नजर रख रही हैं और साथ ही आसपास के इलाकों में मोबाइल डंप डेटा जुटाया जा रहा है। यह डेटा उन सभी मोबाइल फोनों से संबंधित है जो ब्लास्ट के वक्त रेड फोर्ट और उसके आसपास के इलाके में एक्टिव थे।

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अधिकारियों का कहना है कि इस डंप डेटा से उन फोन नंबरों का पता लगाया जा सकेगा जिनका ब्लास्ट में इस्तेमाल हुई कार से संपर्क हुआ था। जांच टीम का मानना है कि कार में सवार लोग ब्लास्ट से पहले आपस में बातचीत कर रहे थे, इसलिए पार्किंग एरिया और उसके आस-पास का डेटा बेहद अहम हो सकता है।

सूत्रों के अनुसार, फरीदाबाद का मोबाइल डेटा भी खंगाला जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस पूरी साजिश में किन लोगों के बीच संपर्क या बातचीत हुई थी। जांच एजेंसियां यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि ब्लास्ट से पहले और बाद में किन लोगों के बीच कॉल या मैसेजिंग हुई।

सोमवार शाम हुआ यह धमाका दिल्ली के दिल कहे जाने वाले इलाके में हुआ था, जब एक हरियाणा नंबर की हुंडई आई20 कार रेड फोर्ट मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर-1 के पास अचानक फट गई। धमाका इतना जोरदार था कि आसपास खड़ी कई गाड़ियां जल गईं। इस हादसे में अब तक आठ लोगों की मौत और कई घायल हुए हैं।

दिल्ली पुलिस ने बताया कि ब्लास्ट में इस्तेमाल की गई हुंडई आई20 कार फरीदाबाद में सेक्टर-37 स्थित एक सेकंड हैंड कार डीलर से खरीदी गई थी। इस कार को कई बार खरीदा और बेचा गया था। पहले यह कार मोहम्मद सलमान की थी, जिसने इसे नदीम को बेचा, फिर यह गाड़ी सेकंड हैंड कार डीलर के पास पहुंची। बाद में यह कार आमिर ने खरीदी, जिसने इसे तारीक को दी। जांच एजेंसियों को शक है कि तारीक का संबंध फरीदाबाद टेरर मॉड्यूल से है।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि मोहम्मद उमर नाम के व्यक्ति ने बाद में यह कार अपने कब्जे में ली थी। फिलहाल इन सभी लोगों से पूछताछ की जा रही है और पुलिस ने कुछ को हिरासत में लिया है।

धमाके से कुछ ही घंटे पहले, पुलिस ने फरीदाबाद में 2,900 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री बरामद की थी, जिसमें अमोनियम नाइट्रेट, पोटेशियम नाइट्रेट और सल्फर जैसे खतरनाक केमिकल शामिल थे। इन सामग्रियों से सैकड़ों आईईडी बनाए जा सकते थे।

सूत्रों ने बताया कि जम्मू-कश्मीर के दो डॉक्टर आदिल अहमद राथर और मुजम्मिल गनई को कुछ दिन पहले गिरफ्तार किया गया था। दोनों का संबंध जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवत-उल-हिंद जैसे आतंकी संगठनों से बताया जा रहा है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इन गिरफ्तारियों के बाद ही आतंकी मॉड्यूल में अफरातफरी मच गई और इसी घबराहट में ब्लास्ट को अंजाम दिया गया।

घटना के बाद दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार और मुंबई में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। सभी भीड़भाड़ वाले इलाकों, धार्मिक स्थलों और मेट्रो स्टेशनों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

फिलहाल, एनआईए और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल मिलकर पूरे नेटवर्क को खंगाल रही हैं। जांच टीमें सीसीटीवी फुटेज, फोन कॉल रिकॉर्ड्स और सोशल मीडिया डेटा के जरिए इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि ब्लास्ट के पीछे कौन लोग थे और किसने यह पूरी साजिश रची।