Home Blog Page 44

GPS interference India: दिल्ली के बाद अब मुंबई-दिल्ली रूट पर जीपीएस गड़बड़ी, सरकार ने जारी की पांच दिन की चेतावनी

GPS interference India
GPS interference India: NOTAM Issued After Mumbai–Delhi Navigation Disruptions GPS Spoofing

GPS interference India: भारत में लगातार सामने आ रही जीपीएस इंटरफेरेंस यानी जीपीएस स्पूफिंग की घटनाओं ने देश की एविएशन सिक्योरिटी को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इसी के बाद भारत सरकार ने 13 से 17 नवंबर 2025 तक के लिए एक नया नोटाम (नोटिस टू एयरमेन) जारी किया है। यह चेतावनी मुंबई के पास हवाई रूट्स पर जारी की गई है, जहां कई एयरक्राफ्ट ने जीपीएस सिग्नल लॉस और नेविगेशन एरर की शिकायत की थी। इससे पहले दिल्ली के इंदिरा गांधी हवाई अड्डे के पास भी इसी तरह की गड़बड़ी देखी गई थी।

GPS Spoofing at IGI Airport: देश के सबसे सुरक्षित इंदिरा गांधी एयरपोर्ट पर जीपीएस स्पूफिंग का खतरा, कई उड़ानें प्रभावित, कई जहाज जयपुर डायवर्ट

GPS interference India

नोटिस में कहा गया है कि मुंबई के पास कुछ हिस्सों में उड़ान भरते समय एयरक्राफ्ट को जीपीएस बेस्ड नेविगेशन में दिक्कत हो सकती है। इसलिए एयरलाइंस और पायलटों को सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पायलटों, एयर ट्रैफिक कंट्रोल और एयरलाइन ऑपरेटरों को आदेश दिया है कि किसी भी जीपीएस इंटरफेरेंस, जीपीएस स्पूफिंग या सिग्नल लॉस का मामला सामने आते ही 10 मिनट के अंदर रिपोर्टिंग करना अनिवार्य है।

GPS Spoofing Delhi Blast Link: क्या एक ही साजिश से जुड़े हैं दिल्ली ब्लास्ट और जीपीएस स्पूफिंग के तार? क्या भारत पर हुआ हाइब्रिड टेररिज्म अटैक?

डीजीसीए के सर्कुलर के मुताबिक, अगर किसी एयरक्राफ्ट को अचानक गलत लोकेशन दिखाई दे, रास्ते में बदलाव दिखाई दे, नेविगेशन एरर आए, या ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम सिग्नल (जीएनएसएस) की क्वालिटी गिर जाए, तो तुरंत उसकी जानकारी दर्ज की जाए।

दिल्ली एयरपोर्ट पर हाल ही में ऐसे कई मामले सामने आए, जहां पायलटों ने 60 नॉटिकल माइल्स तक जीपीएस गड़बड़ी की शिकायत की थी। दिल्ली एयरपोर्ट पर रोजाना लगभग 1,500 एयर ट्रैफिक मूवमेंट होता है, ऐसे में यह समस्या काफी सीरियस मानी जा रही है।

डीजीसीए ने कहा है कि रिपोर्ट में तारीख, समय, एयरक्राफ्ट का प्रकार, रजिस्ट्रेशन नंबर, उड़ान का रास्ता, प्रभावित क्षेत्र और सिग्नल की प्रकृति (जैसे स्पूफिंग, जैमिंग, सिग्नल लॉस) की विस्तृत जानकारी दी जाए। अगर संभव हो तो सिस्टम लॉग, स्क्रीनशॉट या एपएमएस डेटा भी जमा किया जाए।

अभी तक नवंबर 2023 से फरवरी 2025 के बीच 465 जीपीएस इंटरफेरेंस और स्पूफिंग के मामले दर्ज हो चुके हैं। इनमें से कई घटनाएं अमृतसर और जम्मू जैसे संवेदनशील बॉर्डर क्षेत्रों में सामने आई थीं।

सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली एटीसी सिस्टम में पिछले दिनों एक सॉफ्टवेयर बग पाया गया था, जिसकी वजह से भी कुछ जीपीएस गड़बड़ी देखी गई। इसे बाद में अपडेट कर ठीक किया गया। अधिकारियों ने साफ किया कि मुंबई नोटाम का संबंध किसी सैन्य गतिविधि, पाकिस्तान या रणनीतिक ऑपरेशन से नहीं है। नोटाम कई बार एहतियात के तौर पर भी जारी किया जाता है ताकि हवाई सुरक्षा में कोई जोखिम न रहे।

दुनिया भर में भी जीपीएस स्पूफिंग की घटनाएं बढ़ रही हैं। इंटरनेशनल सिविल एविएशन आर्गनाइजेशन और इंटरनेशनल एआईआर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन दोनों ने इस पर चिंता जताई है। यूरोपीय आयोग ने सितंबर में कहा था कि जब वह बुल्गारिया दौरे पर थीं तो रूस पर यूरोपीय यूनियन की अध्यक्ष उर्सुला वोन डेर लेयेन के जहाज का जीपीएस भी जाम करने की कोशिश की गई थी।

भारत भी इन घटनाओं की निगरानी कर रहा है। डीजीसीए और गृह मंत्रालय ने मिलकर जांच शुरू कर दी है कि यह समस्या तकनीकी है, साइबर एरर है, या इसे जानबूझकर किसी बाहरी सोर्स के जरिए अंजाम दिया जा रहा है।

मुंबई नोटाम और दिल्ली जीपीएस गड़बड़ी के संबंध में फिलहाल कोई सबूत सामने नहीं आया है कि यह किसी सुरक्षा खतरे का संकेत है, लेकिन एहतियात के तौर पर सभी उड़ानों को सतर्क रहने के लिए कहा गया है।

डीजीसीए ने एयरलाइंस से यह भी कहा है कि पायलटों को ल्टरनेट नेविगेशन सिस्टम्स यानी आईएनएस (इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम) और ग्राउंड-बेस्ड नेविगेशन पर भी तैयार रखा जाए, ताकि जीपीएस पर असर होने पर भी उड़ान सुरक्षित रूप से जारी रह सके।

GPS interference India जीपीएस इंटरफेरेंस जैसी घटनाएँ उड़ान सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती

भारतीय एयरस्पेस में जीपीएस आधारित नेविगेशन का इस्तेमाल पिछले कई सालों में काफी बढ़ा है। रनवे की लैंडिंग गाइडेंस, फ्लाइट रूट्स, एयरस्पेस मैनेजमेंट, रडार कोऑर्डिनेशन, सभी जगह जीएनएसएस का व्यापक इस्तेमाल होता है। ऐसे में जीपीएस इंटरफेरेंस जैसी घटनाएँ उड़ान सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकती हैं।

नोटाम जारी होने के बाद एयरलाइंस और पायलटों को यह भी निर्देशित किया गया है कि प्रभावित क्षेत्रों से गुजरते समय विजिबिलिटी, एल्टीट्यूड और एआईआर ट्रैफिक सेपरेशन को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरती जाए।

GPS interference India फिलहाल डीजीसीए इन सभी मामलों का डेटा एकत्र कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि जीपीएस गड़बड़ी किस पैटर्न में हो रही है और इसका सोर्स क्या है। हालांकि भारत सरकार ने साफ किया है कि विमान सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी तरह की जीपीएस गड़बड़ी को गंभीरता से लिया जाएगा।

Indian Army Transformation: ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय सेना ने बैटल सिस्टम में किया बड़ा बदलाव, ड्रोन और AI से दुश्मन को देगी मात

Indian Army Transformation
Indian Army Transformation: How Operation Sindoor Transformed Indian Army War-Fighting Architecture with Drone Units and Bhairav Battalions

Indian Army Transformation: मई 2025 में पाकिस्तान के साथ हुई झड़प के कुछ महीनों बाद, भारतीय सेना ने बड़ा ट्रांसफॉर्म किया है। जिसके तहत सेना ने अपनी कॉम्बैट सिस्टम्स एंड ऑपरेशनल फ्रेमवर्क्स में बड़ा सुधार किया है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना ने दो बड़े बदलाव किए हैं, पहला हर इन्फैंट्री बटालियन में ड्रोन यूनिट का गठन और दूसरा, नई “भैरव बटालियन” की तैनाती। ये दोनों सुधार आधुनिक युद्ध को देखते हुए किए गए हैं।

Indian Army Transformation: 385 इन्फैंट्री बटालियनों के पास “अशनि यूनिट”

अब सेना की सभी 385 इन्फैंट्री बटालियनों के पास “अशनि यूनिट” नाम की विशेष ड्रोन यूनिट है। इन यूनिट्स के पास निगरानी ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन यानी “कामिकाजे ड्रोन” मौजूद हैं, जो दुश्मन पर सटीक प्रहार करने की क्षमता रखते हैं। इससे पहले ड्रोन ऑपरेटर केवल सपोर्ट यूनिट के तौर पर काम करते थे, लेकिन अब वे इन्फैंट्री बटालियन का अभिन्न हिस्सा बन गए हैं।

Delhi Defence Dialogue 2025: आर्मी चीफ बोले- 7वीं पीढ़ी की टेक्नोलॉजी को अपनी ट्रेनिंग में शामिल कर रही सेना, तीन ‘डी’ को बताया मॉडर्न वॉरफेयर के लिए जरूरी

इन अशनि यूनिट्स में 20 से 25 ट्रेन्ड सैनिक होते हैं जो केवल ड्रोन ऑपरेशन के लिए हैं। ये यूनिट्स निगरानी, टारगेट की पहचान, बैटलफील्ड मूवमेंट और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर में काम करती हैं। इससे सेना की मारक क्षमता और वार जोन में सुरक्षा दोनों बढ़ी हैं।

दक्षिणी कमांड ने “ईगल ऑन एवरी आर्म” मंत्र के तहत एक स्वदेशी ड्रोन इकोसिस्टम तैयार किया है। इसी के तहत सेना ने अपने ड्रोन हब्स से तैयार किए गए ड्रोन को त्रिशूल अभ्यास के दौरान सफलतापूर्वक परीक्षण किया।

Indian Army Transformation: भैरव बटालियन: नई कॉम्बैट यूनिट्स

सेना ने “भैरव बटालियन” नाम की नई कॉम्बैट यूनिट्स भी तैयार की हैं, जिनकी पहली पांच बटालियनें 31 अक्टूबर 2025 को तैनात की गईं। आने वाले महीनों में 20 और बटालियनें तैयार होंगी। इन बटालियनों का मकसद स्पेशल फोर्स और सामान्य इन्फैंट्री यूनिट्स के बीच की खाई को पाटना है।

भैरव बटालियनें तेजी से और हाई इम्पैक्ट वाले मिशन करने में सक्षम हैं। ये सीमाओं पर दुश्मन के खिलाफ तुरंत हमले, छापामार कार्रवाई और एडवांस सर्विलांस जैसे ऑपरेशन कर सकती हैं। हर बटालियन में लगभग 250 सैनिक हैं, जो इन्फैंट्री, आर्टिलरी, एयर डिफेंस और सिग्नल कोर से चुने गए हैं।

इन सैनिकों को पर्वतीय, जंगल और कमांडो वार फेयर की विशेष ट्रेनिंग दी गई है, जिसमें हाई एल्टीट्यूड वॉरफेयर स्कूल और काउंटर इंसर्जेंसी एंड जंगल वॉरफेयर स्कूल जैसे संस्थानों में ट्रेनिंग मिली है।

इन बटालियनों को ड्रोन, मोर्टार, मशीन गन, एंटी-टैंक मिसाइल, और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम से लैस किया गया है। सेना ने 25 ऐसी बटालियनों को तैयार करने का लक्ष्य रखा है, जिनमें से कई उत्तरी, पूर्वी और पश्चिमी कमांड में तैनात हैं।

Indian Army Transformation: सेना का नया सुरक्षा कवच: सक्षम् सिस्टम

ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना ने दुश्मन के ड्रोन से निपटने के लिए एक नई “काउंटर यूएएस ग्रिड सिस्टम” शुरू किया है। इसके लिए भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के बनाए “सक्षम सिस्टम” को अपनाया गया है। यह सिस्टम जमीन से 10,000 फीट तक के हवाई क्षेत्र को सुरक्षित रखेगा।

सक्षम सिस्टम दुश्मन के ड्रोन की पहचान करने, उन्हें ट्रैक करने और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए रेडियो वेव्स का इस्तेमाल करता है। इसे फास्ट ट्रैक प्रोक्योरमेंट प्रक्रिया के तहत मंजूरी दी गई है ताकि इसे जल्द से जल्द सभी फील्ड यूनिट्स में लागू किया जा सके।

यह सिस्टम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर बेस्ड है, जिससे यह भविष्य के युद्धों में और अधिक अपग्रेड किया जा सकेगा। सक्षम सिस्टम सेना के अपने सुरक्षित डेटा नेटवर्क पर चलेगा और सभी फील्ड कमांडरों को रीयल-टाइम स्थिति की जानकारी देगा।

Exercise Akhand Prahaar: एक्सरसाइज त्रिशूल में रुद्र ब्रिगेड का ‘अखंड प्रहार’, जैसलमेर में दक्षिण कमान ने दिखाई जॉइंटनेस की ताकत

Exercise Akhand Prahaar
Exercise Akhand Prahaar

Exercise Akhand Prahaar: भारतीय सेना की सदर्न कमांड ने रेगिस्तान क्षेत्र में ‘एक्सरसाइज अखंड प्रहार’ में हिस्सा लिया। यह अभ्यास ट्राई सर्विस युद्धाभ्यास ‘एक्सरसाइज त्रिशूल 2025’ का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य विभिन्न सेनाओं के बीच जॉइंट ऑपरेशन और कॉर्डिनेशन को परखना था।

Exercise Trishul 2025: थार से अरब सागर तक गरजा भारत का ‘त्रिशूल’, सबसे बड़े संयुक्त अभ्यास में तीनों सेनाओं ने की कई सब-एक्सरसाइज

Exercise Akhand Prahaar

इस अभ्यास में सदर्न कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने ‘कोणार्क कॉर्प्स’ की युद्ध तैयारी की समीक्षा की। अभ्यास के दौरान सभी हथियारों और सेवाओं की संयुक्त कार्रवाई का प्रदर्शन किया गया, जिसमें मैकेनाइज्ड फॉर्मेशन, इन्फैंट्री मूवमेंट्स, और आर्मी एविएशन के साथ हेलीकॉप्टर अटैक मिशन शामिल रहे।

Exercise Akhand Prahaar
General Officer Commanding-In-Chief, Southern Command Lieutenant General Dhiraj Seth

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने बताया कि इस अभ्यास में ‘रुद्र ब्रिगेड’ ने अपनी पूरी ऑपरेशनल क्षमता साबित की। उन्होंने कहा, “रुद्र हाल ही में गठित एक इंटीग्रेटेड ऑल आर्म्स ब्रिगेड है, जो इन्फैंट्री, आर्मर्ड, मैकेनाइज्ड और एयर डिफेंस आर्टिलरी ऑपरेशंस के लिए तैयार है। रुद्र का अर्थ भगवान शिव से जुड़ा है, जो शक्ति और प्रचंडता का प्रतीक है।”

अभ्यास में भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना के बीच बेहतरीन तालमेल देखने को मिला। वायुसेना के फाइटर एयरक्राफ्ट ने लैंड फोर्सेस को सपोर्ट करते हुए फाइटर ग्राउंड अटैक मिशन पूरे किए।

‘अखंड प्रहार’ ने यह भी दिखाया कि भारतीय सेना किस तरह आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर रही है। अभ्यास के दौरान स्वदेशी ड्रोन, अनमैन्ड सिस्टम्स, काउंटर-ड्रोन सिस्टम्स और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर ग्रिड का इस्तेमाल किया गया।

लेफ्टिनेंट जनरल सेठ ने सभी सैनिकों की प्रोफेशनल कैपेसिटी, अनुशासन और समर्पण की सराहना की और कहा कि रुद्र ब्रिगेड भविष्य के जटिल युद्धक्षेत्रों में भी सफलता हासिल करेगी।

VIP Culture in Punjab: रिटायर्ड जनरल की कार को हूटर बजाती एस्कॉर्ट गाड़ी ने मारी टक्कर, पंजाब पुलिस ने मांगी माफी

VIP Culture in Punjab: Lt Gen D S Hooda (Retd)
Lt Gen D S Hooda (Retd)

VIP Culture in Punjab: पूर्व नॉर्दर्न आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) डी.एस. हुड्डा ने एक गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि पंजाब पुलिस के एक वीआईपी एस्कॉर्ट वाहन ने उनकी कार को जानबूझकर टक्कर मारी और मौके से भाग गया। यह घटना बुधवार शाम लगभग 4 बजे जिरकपुर फ्लाईओवर पर हुई, जब हुड्डा अपनी पत्नी के साथ कार से अंबाला की ओर जा रहे थे। बता दें कि पंजाब में आम आदमी की सरकार है। मामले पर बवाल बढ़ने पर पंजाब पुलिस ने साफ कहा है कि वह एक पेशेवर फोर्स है और किसी भी तरह की अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

Speedy Justice for Armed Forces: दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश; आर्मी, नेवी, एयरफोर्स और पैरामिलिट्री मामलों की सुनवाई को मिलेगी प्राथमिकता

हुड्डा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि जब वह ट्रैफिक में फंसे थे, तभी दो पुलिस जीपें सायरन बजाते हुए पीछे से आईं। उन्होंने पहली गाड़ी को निकलने दिया, लेकिन जब वीआईपी वाहन को तीन सेकंड अधिक लग गए, तो पीछे आ रही एस्कॉर्ट जीप ने गुस्से में बाईं ओर से ओवरटेक कर उनकी कार को जानबूझकर दाईं ओर से काटते हुए टक्कर मारी और बिना रुके तेजी से निकल गई।

रिटायर्ड जनरल ने इस घटना को “जानबूझकर किया गया हमला” बताया और कहा कि इससे उनकी कार को नुकसान हुआ और उनकी तथा उनकी पत्नी की जान को खतरा हुआ। उन्होंने लिखा, “कानून की रक्षा करने वाले ही जब कानून तोड़ने लगें, तो यह वर्दी और संस्था की छवि को खराब करता है। आशा है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान और डीजीपी गौरव यादव इस पर ध्यान देंगे।”

VIP Culture in Punjab

उनके इस पोस्ट के जवाब में पंजाब पुलिस महानिदेशक गौरव यादव ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और माफी मांगी। उन्होंने लिखा, “आप और आपकी पत्नी को इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के कारण जो परेशानी हुई, उसके लिए हम गहरा खेद व्यक्त करते हैं। यदि ऐसा हुआ है, तो यह पूरी तरह से गलत है और पंजाब पुलिस के प्रोफेशनल वैल्यूज के खिलाफ है।”

डीजीपी यादव ने बताया कि उन्होंने स्पेशल डीजीपी ट्रैफिक एएस राय से बात की है और वाहन तथा संबंधित कर्मियों की पहचान के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा, “कृपया आश्वस्त रहें कि इस मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।”

इसके बाद लेफ्टिनेंट जनरल हुड्डा ने डीजीपी के जवाब पर धन्यवाद देते हुए कहा, “आपके उत्तर की सराहना करता हूं। चूंकि मेरी कार में डैशकैम नहीं था, इसलिए मेरा बयान ही इस मामले की सच्चाई बताने के लिए पर्याप्त होना चाहिए।”

पुलिस सूत्रों के अनुसार, घटना की जांच शुरू कर दी गई है और सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से वाहनों की पहचान की जा रही है। इस घटना ने सोशल मीडिया पर भी बहस छेड़ दी है, जहां कई लोगों ने वीआईपी सुरक्षा गाड़ियों के “अकड़ भरे रवैये” पर सवाल उठाए हैं।

पंजाब पुलिस की सख्त कार्रवाई

जिरकपुर-अंबाला हाईवे पर एक एस्कॉर्ट वाहन से जुड़ी घटना सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद पंजाब पुलिस के डीजीपी ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। पंजाब पुलिस ने साफ कहा है कि वह एक पेशेवर फोर्स है और किसी भी तरह की अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

पंजाब पुलिस ने कहा कि वीआईपी सुरक्षा एक बड़ी जिम्मेदारी है, जिसमें सुरक्षा के साथ-साथ आम लोगों की सुरक्षा और सम्मान भी उतना ही जरूरी है। इसलिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था के साथ नागरिकों के प्रति सम्मानजनक व्यवहार अनिवार्य है।

पुलिस मुख्यालय से सभी जिलों को तुरंत लागू करने के लिए नए निर्देश जारी किए गए हैं। इनमें गैर-आपातकालीन स्थिति में ट्रैफिक नियमों का कड़ाई से पालन करना, सड़क पर आम लोगों को कम से कम परेशानी देना और पूरे सफर के दौरान पेशेवर तथा शालीन व्यवहार बनाए रखना शामिल है। एस्कॉर्ट टीम को हर परिस्थिति में धैर्य और संयम रखने को कहा गया है।

साथ ही सभी जिलों को 48 घंटों के भीतर एस्कॉर्ट, पायलट और ट्रैफिक स्टाफ की अनिवार्य ब्रीफिंग करने के आदेश दिए गए हैं। पंजाब पुलिस ने कहा कि उनका उद्देश्य सभी नागरिकों की सुरक्षा करना और जनता का विश्वास बनाए रखना है।

Exercise Trishul 2025: थार से अरब सागर तक गरजा भारत का ‘त्रिशूल’, सबसे बड़े संयुक्त अभ्यास में तीनों सेनाओं ने की कई सब-एक्सरसाइज

Exercise Trishul 2025
Exercise Trishul 2025

Exercise Trishul 2025: भारत की तीनों सेनाएं थलसेना, नौसेना और वायुसेना इन दिनों देश के पाकिस्तान से सटे पश्चिमी सीमावर्ती इलाकों में एक साथ बड़े पैमाने पर एक्सरसाइज त्रिशूल 2025 में हिस्सा ले रही हैं। इसे अब तक की सबसे बड़ी ट्राई सर्विसेज एक्सरसाइज माना जा रहा है। एक्सरसाइज त्रिशूल की विशालता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अकेले सेना की तरफ से इसकी 7 सब-एक्सरसाइज भी हो रही हैं। इस एक्सरसाइज में सेना की तरफ से 20,000 जवान, नौसेना से 20-25 जहाज, वायुसेना से 40+ विमान जैसे राफेल, सुखोई-30 शामिल हो रहे हैं। वहीं जवानों के अलावा सेना की तरफ से मेन बैटल टैंक्स, हॉवित्जर्स, हेलीकॉप्टर्स, और मिसाइल सिस्टम भी शामिल हैं।

Exercise Trishul 2025
Exercise Trishul 2025

Exercise Trishul 2025: भारतीय कोस्टगार्ड और बीएसएफ भी शामिल

यह अभ्यास भारतीय सेना के दक्षिणी कमांड के नेतृत्व में 30 अक्टूबर से 13 नवंबर 2025 तक राजस्थान के थार रेगिस्तान, गुजरात के कच्छ क्षेत्र, सौराष्ट्र तट और उत्तरी अरब सागर में चलाया जा रहा है। यह पहला मौका है जब इतनी बड़ी संख्या में तीनों सेनाओं के साथ भारतीय कोस्टगार्ड और बीएसएफ ने सीमावर्ती इलाकों में एक साथ अपनी सामरिक क्षमताओं का प्रदर्शन किया है।

Exercise Trishul: भारतीय सेना की दक्षिणी कमान ने दिखाई ‘फ्यूचर-रेडी फोर्स’ की ताकत, एक्सरसाइज त्रिशूल में जमीन से लेकर समंदर तक में दिखा तीनों सेनाओं का जबरदस्त तालमेल

Exercise Trishul 2025: JAI यानी जॉइंटनेस, आत्मनिर्भरता और इनोवेशन

एक्सरसाइज त्रिशूल का मुख्य उद्देश्य तीनों सेनाओं के बीच समन्वय को बढ़ाना और मल्टी-डोमेन युद्ध परिस्थितियों में आपसी तालमेल की क्षमता का परीक्षण करना है। इस अभ्यास का मूल सिद्धांत प्रधानमंत्री मोदी के विजन JAI यानी जॉइंटनेस, आत्मनिर्भरता और इनोवेशन पर आधारित है।

इस कॉम्प्रीहेंसिव फ्रेमवर्क के तहत कई उप-अभ्यास भी आयोजित किए गए, जिनमें मरूज्वाला, अखंड प्रहार, ब्रहमशिरा, महागुजराज, वायु समन्वय-2, सुदर्शन क्षमता, त्रिनेत्र और एम्फीबियस एक्सरसाइज शामिल हैं।

Exercise Trishul 2025
Exercise Trishul 2025

Exercise Trishul 2025: मरूज्वाला और अखंड प्रहार अभ्यास

थार रेगिस्तान में भारतीय सेना की 21 कॉर्प्स यानी सुदर्शन चक्र कॉर्प्स और 12 कॉर्प्स यानी कोणार्क कॉर्प्स की तरफ से आयोजित मरूज्वाला और अखंड प्रहार अभ्यासों में थलसेना और वायुसेना ने संयुक्त हथियार चलाने की क्षमता के साथ, मोबिनलिटी, और ड्रोन-आधारित निगरानी तकनीकों का प्रदर्शन किया। दक्षिणी कमांड की सुदर्शन चक्र कोर और शाहबाज डिवीजन ने इन अभ्यासों में मुख्य भूमिका निभाई। वायुसेना के सुखोई-30 एमकेआई और राफेल विमानों ने हवाई समर्थन और एयर-लैंड इंटीग्रेशन की क्षमता को परखा।

Ex Trishul-Poorvi Prachand Prahar: टू फ्रंट वॉर की तैयारी! पूर्वी मोर्चे पर ‘पूर्वी प्रचंड प्रहार’ और पश्चिम में ‘त्रिशूल’, दो मोर्चों से भारत ने दिया बड़ा संदेश

Exercise Trishul 2025: कच्छ में ब्रहमशिरा अभ्यास

इसके अलावा गुजरात के कच्छ क्षेत्र और सर क्रीक सेक्टर में ब्रहमशिरा अभ्यास किया गया, जिसमें थलसेना, नौसेना, वायुसेना, तटरक्षक बल और बीएसएफ ने भाग लिया। इस अभ्यास में भूमि, समुद्र और वायु की संयुक्त रणनीति पर विशेष फोकस रहा। इस क्षेत्र की भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद सेनाओं ने सटीक समन्वय और ऑपरेशनल तैयारी का प्रदर्शन किया।

Exercise Trishul 2025
Exercise Trishul 2025

 

Exercise Trishul 2025: एम्फीबियस एक्सरसाइज का आयोजन

सौराष्ट्र तट पर 12 नवंबर को पोरबंदर के तट पर एम्फीबियस एक्सरसाइज आयोजित की जाएगी। जिसमें भारतीय नौसेना के आईएनएस जलश्वा, मर्कोस कमांडो और अन्य लैंडिंग क्राफ्ट यूटिलिटी जहाज हिस्सा लेंगे। इसमें तटीय इलाकों पर उतरने और मल्टी-डोमेन पावर प्रोजेक्शन की रणनीति का अभ्यास किया गया।

Exercise Maru Jwala: थार की तपती रेत में भारतीय सेना कर रही हाई-टेक वॉर एक्सरसाइज, अभ्यास त्रिशूल का है हिस्सा

Exercise Trishul 2025: महागुजराज-25 अभ्यास

वहीं, महागुजराज-25 अभ्यास में वायुसेना की प्रमुख भूमिका रही, जिसमें इंटिग्रेटेड एयर ऑपरेशंस और एयर डिफेंस मिशनों का अभ्यास किया गया। इस दौरान लड़ाकू विमानों ने पहली बार नागरिक हवाई अड्डों से ऑपरेशन कर सिविल-मिलिट्री कोआर्डिनेशन की मिसाल पेश की।

Exercise Trishul 2025: Exercise MahaGujRaj-25
Exercise MahaGujRaj-25

Exercise Trishul 2025: एक्सरसाइज वायु समन्वय-2

थार के रेगिस्तानी इलाके में दो दिन तक नेक्स्ट-जनरेशन वारफेयर एक्सरसाइज वायु समन्वय-2 का भी आयोजन किया गया। एक्सरसाइज त्रिशूल 2025 के तहत दक्षिणी कमांड की तरफ से आयोजित इस अभ्यास में ड्रोन और काउंटर-ड्रोन ऑपरेशंस चलाए गए। इसमें उभरते हवाई खतरों जैसे स्वार्म अटैक्स और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध से निपटने की रणनीतियों का अभ्यास किया गया।

Exercise Trishul 2025
Exercise Trishul 2025

Exercise Trishul 2025: त्रिनेत्र ड्रिल

इसके अलावा त्रिशूल 2025 के प्रारंभिक चरण में सुदर्शन चक्र कॉर्प्स (21 कॉर्प्स) द्वारा डेजर्ट सेक्टर में 21 अक्टूबर को दो-दिवसीय ड्रिल त्रिनेत्र का भी आयोजन किया गया। इसमें भारतीय वायुसेना, भारतीय नौसेना के साथ सेना के इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर यूनिट्स, ड्रोन, जेमर्स और सिग्नल कोर ने इसमें भाग लिया। इसमें स्पेक्ट्रम डोमिनेंस और एडवांस इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर का अभ्यास किया गया। यह अभ्यास आधुनिक युद्ध की तकनीकों जैसे लेक्ट्रॉनिक स्पेक्ट्रम ऑपरेशंस, काउंटर-ड्रोन किल चेन, और मल्टी-डोमेन कोऑर्डिनेशन पर फोकस था।

Exercise Trishul 2025
Exercise Trishul 2025

लॉजिस्टिक्स एक्सरसाइज सुदर्शन क्षमता

इसके अलावा एक्सरसाइज त्रिशूल में भारतीय सेना की लॉजिस्टिक्स क्षमता को परखने के लिए दक्षिण कमांड ने एक्सरसाइज सुदर्शन क्षमता का भी आयोजन किया। इसका उद्देश्य लंबी अवधि तक चलने वाले ऑपरेशंस में सेना की लॉजिस्टिक्स स्टेमिना यानी ईंधन, गोला-बारूद, स्पेयर पार्ट्स और मेडिकल सपोर्ट की निरंतर सप्लाई सुनिश्चित करना था। 72+ घंटे तक चले इस अभ्यास में ड्रोन, एविएशन रिफ्यूलर, इन्वेंटरी मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर, एरियल रीप्लेनिशमेंट और नेटवर्क-इन-अ-बॉक्स सिस्टम जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया।

इस अभ्यास में ड्रोन, “नेटवर्क-इन-अ-बॉक्स” सिस्टम, एआई-बेस्ड ट्रैकिंग और 3D प्रिंटिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया। इसमें गोला-बारूद और ईंधन ट्रांसपोर्ट के लिए 50+ वैगन, चिनूक हेलीकॉप्टर से एयर ड्रॉप,
स्पेयर पार्ट्स और भोजन की सप्लाई के लिए 100 से ज्यादा सिविल ट्रक, और रियल टाइम लोकेशन ट्रेकिंग के लिए एआई ट्रैकिंग एप का इस्तेमाल किया गया।

सेना के साथ भारतीय वायुसेना और नौसेना ने भी भाग लिया, जबकि सिविल एडमिनिस्ट्रेशन ने सड़क, रेल और हवाई मार्ग से सप्लाई में सहयोग किया। इस अभ्यास ने दिखाया कि भारतीय सेना अब आत्मनिर्भर और टेक्नोलॉजी-ड्राइवन सैन्य लॉजिस्टिक्स की दिशा में आगे बढ़ रही है।

एक्सरसाइज त्रिशूल के दौरान इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर, साइबर सुरक्षा, इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस जैसी आधुनिक तकनीकों का भी व्यापक इस्तेमाल हुआ। यह अभ्यास भारत की रक्षा तैयारियों में तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

रक्षा सूत्रों के अनुसार, इस अभ्यास में करीब 30,000 से अधिक सैनिक, 40 से ज्यादा विमान और 20 से अधिक नौसैनिक जहाज शामिल हुए। भारतीय तटरक्षक और अन्य केंद्रीय एजेंसियों की भी सक्रिय भागीदारी रही, जिसने अभ्यास को और अधिक रियल एंड होलिस्टिक बनाया।

भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि त्रिशूल 2025 ऑपरेशन सिंदूर के बाद सबसे बड़ा ट्राई सर्विस एक्सरसाइज है। पाकिस्तान की सीमा के नजदीक हो रहे इस अभ्यास का उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता और तत्परता को दिखाना है।

Exercise Malabar 2025: इंडो-पैसिफिक में शुरू हुआ क्वाड देशों का बड़ा नौसैनिक अभ्यास, एक्सरसाइज मालाबार में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया एक साथ

Exercise Malabar 2025
Exercise Malabar 2025 (File Photo)

Exercise Malabar 2025: क्वाड देशों भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बड़ी एक्सरसाइज शुरू की है। एक्सरसाइज मालाबार 2025 के तहत चारों देशों की नौसेनाएं पश्चिमी प्रशांत महासागर के ट्रेनिंग एरिया में 10 से 18 नवंबर तक बड़े पैमाने पर संयुक्त अभ्यास कर रही हैं। जहां हार्बर फेज (10-12 नवंबर) में योजना और चर्चा तथा सी फेज (13-17 नवंबर) में जॉइंट ड्रिल्स (जैसे एंटी-सबमरीन वारफेयर, गनरी, फ्लाइट ऑपरेशंस) शामिल हैं।

Exercise Malabar 2025: प्रशांत महासागर में भारत के आईएएस सह्याद्री ने शुरू किया क्वाड देशों के साथ संयुक्त नौसैनिक अभ्यास

यह अभ्यास क्वाड देशों के बीच सामरिक तालमेल और समुद्री सुरक्षा को और मजबूत करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। भारत और अमेरिका के बीच 1992 में शुरू हुआ यह नौसैनिक अभ्यास अब चार देशों की भागीदारी के साथ एक प्रमुख मल्टी-नेशनल एक्सरसाइज बन चुका है। पहले यह भारत औऱ अमेरिका के बीच द्विपक्षीय अभ्यास था, जिसके बाद 2015 में जापान शामिल हुआ औऱ 2020 में ऑस्ट्रेलिया ने इसमें सक्रिय रूप से इसमें भाग लिया है।

ऑस्ट्रेलिया की नौसेना ने अपनी एंजैक-क्लास फ्रिगेट एचएमएएस बैलरत और पी-8ए पोसीडन मैरीटाइम पैट्रोल एयरक्राफ्ट को इस अभ्यास में शामिल किया है। यह विमान गुआम स्थित एंडरसन एयर बेस से उड़ान भर रहा है। वहीं भारत की तरफ से आईएनएस सहयाद्री, जापानी मैरीटाइम सेल्फ-डिफेंस फोर्स की तरफ से जेएस (जैपनीज शिप) सुजुनामी (अकीजुकी-क्लास डिस्ट्रॉयर) और अमेरिका की तरफ से यूएसएस फिट्जगेराल्ड (अर्ले बर्क-क्लास गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर) शामिल हो रहा है।

Malabar Exercise 2025: अमेरिका के 50 फीसदी टैरिफ के बावजूद गुआम में मालाबार नेवल एक्सरसाइज में हिस्सा लेगा भारत

ऑस्ट्रेलिया के चीफ ओएफ जॉइंट आपरेशंस वाइस एडमिरल जस्टिन जोन्स ने कहा कि इंडो-पैसिफिक में बदलते सुरक्षा माहौल के बीच साझेदारी और सामूहिक अभ्यास पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गए हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के अभ्यास देशों को साझा चुनौतियों का सामना करने, आपसी कोआर्डिनेशन बढ़ाने और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने में मदद करते हैं।

वाइस एडमिरल जस्टिन जोन्स ने बताया कि इस अभ्यास के दौरान एंटी-सबमरीन वारफेयर, एयर डिफेंस और रीप्लेनिशमेंट ऐट सी जैसी कॉम्प्लेक्स ट्रेनिंग ड्रिल्स की जा रही हैं, जिससे भाग लेने वाले देशों के बीच आपसी भरोसा और तत्परता बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि “ऐसे अभ्यास हमें यह सुनिश्चित करने में मदद करते हैं कि हम किसी भी सामूहिक सुरक्षा चुनौती का एकजुट होकर सामना कर सकें।”

ऑस्ट्रेलियाई नौसेना के कमांडिंग ऑफिसर कमांडर डीन युरेन ने कहा कि उनकी टीम क्षेत्र के सबसे पेशेवर और सक्षम साझेदारों के साथ काम करने को लेकर उत्साहित है। उन्होंने बताया कि एचएमएएस बैलरत, जिसमें 177 सदस्यीय क्रू और एक एमएच-60आर सीहॉक हेलिकॉप्टर तैनात है, एयर डिफेंस, सरफेस और अंडरवाटर वारफेयर जैसी कई ऑपरेशनों को अंजाम देने में सक्षम है।

उन्होंने कहा कि इस तरह के अभ्यास हमारी तैयारियों को और बेहतर बनाते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि ऑस्ट्रेलिया और उसके सहयोगी इंडो-पैसिफिक में किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए तैयार रहें।

Exercise MahaGujRaj-25: पश्चिमी सेक्टर में भारतीय वायुसेना ने दिखाई ऑपरेशनल ताकत, सेना और नौसेना के साथ किया संयुक्त अभ्यास

Exercise Trishul 2025: Exercise MahaGujRaj-25
Exercise MahaGujRaj-25

Exercise MahaGujRaj-25: भारतीय वायुसेना ने पश्चिमी सेक्टर में अपनी ऑपरेशनल तैयारी और जॉइंट वारफेयर कैपेबिलिटी का शानदार प्रदर्शन किया। 29 अक्टूबर से 11 नवंबर 2025 तक चले इस बड़े अभ्यास एक्सरसाइज महागुजराज-25 में वायुसेना ने समुद्र, थल और आकाश के कोआर्डिनेटेड ऑपरेशनों के जरिए अपनी ताकत दिखाई।

Exercise MaruJwala: थार मरुस्थल में थल सेना और वायुसेना ने दिखाई जॉइंटनेस की ताकत, पैराट्रूपर्स ने आसमान से लगाई छलांग

Exercise MahaGujRaj-25

इस अभ्यास में भारतीय वायुसेना एक साथ विभिन्न डोमेन एयर कैम्पेन, मरीटाइम और एयर-लैंड मिशनों को पूरा किया। इस दौरान वायुसेना ने अपने लड़ाकू विमानों को गुजरात के हीरासर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भराकर अभ्यास में शामिल किया। इस दौरान वायुसेना ने सिविल और मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर को एक साथ इस्तेमाल किया।

अभ्यास में वायुसेना ने तकनीकी एकीकरण, नेटवर्क आधारित ऑपरेशंस और मल्टी-डोमेन युद्ध रणनीति को परखा। इसमें फील्ड स्तर पर प्रशासन, लॉजिस्टिक्स और मेंटेनेंस टीमों के बीच कोआर्डिनेशन की हाई लेवल तैयारी दिखाई दी।

इस दौरान भारतीय सेना के सदर्न कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने भी एक्सरसाइज अखंड प्रहर की समीक्षा की, जो ट्राई-सर्विस एक्सरसाइज त्रिशूल का एक प्रमुख हिस्सा है। उन्होंने कोणार्क कॉर्प्स की ऑपरेशनल तैयारी का जायजा लिया और अभ्यास के दौरान हुए कम्बाइंड आर्म्स मैन्यूवर्स को देखा, जिसमें थल सेना और वायुसेना ने मिलकर कई मिशनों को अंजाम दिया।

Exercise MahaGujRaj-25 अभ्यास के दौरान स्वदेशी तकनीक से बने ड्रोन, काउंटर-ड्रोन सिस्टम और एडवांस सर्विलांस उपकरण का भी प्रदर्शन किया गया। यह सभी उपकरण आत्मनिर्भर भारत के तहत विकसित किए गए हैं और अब इन्हें वास्तविक परिस्थितियों में परखा गया।

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने सैनिकों की मेहनत, तकनीकी समझ और पेशेवर क्षमता की सराहना की। उन्होंने कहा कि सदर्न कमांड की यह पहल पीएम मोदी के विजन “जय” मंत्र यानी जॉइंटनेस, आत्मनिर्भरता और इनोवेशन के अनुरूप है। यह अभ्यास न केवल युद्धक्षेत्र में तालमेल और टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन को बढ़ावा देता है, बल्कि भारत की रक्षा तैयारियों को नए स्तर पर ले जाता है।

वायुसेना और थलसेना के इस संयुक्त अभ्यास का मकसद है कि भारत की सेनाएं अब मल्टी-डोमेन वारफेयर के लिए पूरी तरह तैयार हैं, जहा हर ब्रांच का तालमेल, तकनीक का सही उपयोग और तुरंत प्रतिक्रिया ही जीत की कुंजी है।

यह अभ्यास भारतीय रक्षा बलों के लिए केवल एक सैन्य कवायद नहीं, बल्कि एक आत्मविश्वास का प्रतीक भी है — जो यह दिखाता है कि आधुनिक युद्ध में भारत न केवल तैयार है, बल्कि निर्णायक बढ़त हासिल करने की क्षमता रखता है।

Nyoma Airfield: 13,700 फीट की ऊंचाई पर भारत का सबसे ऊंचा एयरबेस अब ऑपरेशनल, वायुसेना प्रमुख ने C-130J से की पहली लैंडिंग

Nyoma Airfield
Chief of Air Staff Air Chief Marshal AP Singh inaugurated the strategic Mudh-Nyoma airbase in eastern Ladakh by landing a C-130J special operations aircraft there

Nyoma Airfield: पूर्वी लद्दाख में चीन सीमा के करीब बना भारत का सबसे ऊंचा न्योमा एयरबेस अब पूरी तरह ऑपरेशनल हो गया है। यह एयरबेस 13,700 फीट की ऊंचाई पर स्थित है और एलएसी से मात्र 23-30 किलोमीटर की दूरी पर है। बुधवार को भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने खुद सी-130जे ‘सुपर हरक्यूलिस’ विमान उड़ाकर यहां लैंडिंग की और एयरबेस का औपचारिक उद्घाटन किया। उनके साथ वेस्टर्न एयर कमांड प्रमुख एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा भी मौजूद थे।

न्योमा एयरफील्ड के शुरू होने से न केवल भारत की हवाई क्षमता बढ़ेगी, बल्कि सीमाई इलाकों में सैनिकों और सैन्य साजोसामान की तैनाती भी पहले से कहीं तेजी से हो सकेगी।

Nyoma Airstrip in Eastern Ladakh: एलएसी पर चीन को टक्कर देने की तैयारी, अक्टूबर तक न्योमा एयरस्ट्रिप पर लैंड कर सकेंगे मिग-29 और सुखोई-30 फाइटर जेट

यह एयरफील्ड पूर्वी लद्दाख के मुध-न्योमा क्षेत्र में बनाया गया है। 218 करोड़ रुपये की लागत से बने इस एयरबेस का निर्माण कार्य 12 सितंबर 2023 को शुरू हुआ था और 12 अक्टूबर 2024 को यह पूरी तरह तैयार कर लिया गया। लद्दाख में छह महीने तक बर्फ जमने और रास्ते बंद रहने के कारण यह प्रोजेक्ट सिर्फ सात महीनों में मिशन मोड पर पूरा किया गया।

सूत्रों के मुताबिक यहाां असल काम का समय केवल सात महीने का ही था। यहां सितंबर और अक्टूबर के बीच ही काम करना संभव होता है, इसलिए इस प्रोजेक्ट को मिशन मोड में पूरा किया गया।

निर्माण में शामिल एक अधिकारी ने कहा, “हमने दिन-रात काम किया। कठिन मौसम और ऊंचाई के बावजूद, काम की क्वॉलिटी से कोई समझौता नहीं किया गया।”

इस एयरबेस में 2.7 किलोमीटर लंबा कंक्रीट रनवे बनाया गया है, जिस पर अब लड़ाकू विमान, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर आराम से लैंड कर सकेंगे। यहां एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर, हैंगर, रिफ्यूलिंग बे और चालक दल के ठहरने की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे यह बेस लंबे समय तक ऑपरेशनल रह सकेगा। इस रनवे पर अब लड़ाकू विमान, हेलिकॉप्टर और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट आसानी से उड़ान भर सकेंगे और लैंड कर सकेंगे।

इस एयर फील्ड को कई सैन्य मानवरहित, रोटरी-विंग, फिक्स्ड-विंग विमानों को रखने के लिए डिजाइन किया गया है, जिनमें सी-17 ग्लोबमास्टर III जैसे भारी परिवहन विमान और सुखोई-30 जैसे लड़ाकू जेट शामिल हैं।

Nyoma Airbase: पूर्वी लद्दाख में चीन से सटे इस एडवांस लैंडिंग ग्राउंड से जल्द उड़ान भरेंगे फाइटर जेट, पहली टेस्ट फ्लाइट की हो रही तैयारी

बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन ने इस प्रोजेक्ट को अपने प्रोजेक्ट हिमांक के तहत पूरा किया है। इसकी अगुवाई उसकी महिला अधिकारियों की टीम ने की है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सितंबर 2023 में इसका शिलान्यास किया था और इसे “भारतीय सेना के लिए गेम-चेंजर” बताया था।

1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद, न्योमा हवाई पट्टी दशकों तक उपयोग में नहीं रही, और 2009 में भारतीय वायु सेना के ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट एएन-32 के पहली बार यहां उतरने के बाद इसे फिर से एक्टिव किया गया।

बीआरओ के प्रोजेक्ट हिमांक के चीफ इंजीनियर ब्रिगेडियर विशाल श्रीवास्तव ने इस सफलता पर गर्व जताते हुए कहा कि उनकी टीम ने बेहद कठिन परिस्थितियों में असाधारण काम किया है। उन्होंने बताया कि न्योमा का यह रनवे न सिर्फ सामरिक दृष्टि से, बल्कि स्थानीय लोगों की आवाजाही और आपातकालीन राहत कार्यों के लिए भी अहम साबित होगा।

ब्रिगेडियर श्रीवास्तव ने कहा, “इस एयरबेस का नाम पास के मुध गांव के नाम पर रखा गया है, जो इस इलाके की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को दर्शाता है।” उन्होंने बताया कि सर्दियों में यहां का तापमान माइनस 30 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है और कई महीनों तक सड़कें पूरी तरह बर्फ से ढकी रहती हैं। इसके बावजूद, बीआरओ की टीम ने आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर तय समय पर रनवे तैयार कर दिया।

इस एयरबेस के तैयार होने के बाद लद्दाख में वायुसेना के अब चार प्रमुख एयरबेस लेह, कारगिल, थोएस और अब न्योमा पूरी तरह ऑपरेशनल हैं। इसके अलावा, दौलत बेग ओल्डी में भी विशेष ऑपरेशन विमानों के लिए रनवे मौजूद है।

न्योमा एयरबेस के ऑपरेशनल होने से भारत को चीन सीमा पर जबरदस्त बढ़त मिलेगी। अब वायुसेना पैंगोंग त्सो, देमचोक और देपसांग जैसे अग्रिम इलाकों में सैनिकों और उपकरणों को बहुत तेजी से तैनात कर सकेगी। यह एयरबेस लड़ाकू विमानों के ऑपरेशन, ट्रांसपोर्ट मिशनों और आपातकालीन राहत अभियानों के लिए भी उपयोगी रहेगा।

रक्षा सूत्रों के मुताबिक, इस एयरबेस की भूमिका अगले वर्ष की शुरुआत में लड़ाकू विमान अभियानों में भी होगी। इसके साथ ही चीन की ओर से पिछले पांच वर्षों में सीमा के पार नए एयरबेस, बंकर, मिसाइल साइट्स और हेलीपैड्स बनाए गए हैं।

रक्षा विशेषज्ञ एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) अनिल चोपड़ा के अनुसार, “न्योमा एयरबेस की भौगोलिकता इसे रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बनाती है। यह लेह से भी अधिक प्लेन घाटी में है और एलएसी के अधिक करीब है। यह तेजी से इंटरडिक्शन स्ट्राइक्स और सैनिकों की तैनाती में मदद करेगा।”

भारत ने पिछले कुछ सालों में एलएसी के पास तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर विकास किया है। सड़कों, पुलों और सुरंगों के साथ अब एयरफील्ड का नेटवर्क भी मजबूत किया जा रहा है। न्योमा एयरफील्ड इसके तहत एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

यह एयरफील्ड न केवल सैन्य दृष्टि से बल्कि स्थानीय लोगों की जिंदगी में भी बड़ा बदलाव लाएगा। भविष्य में यहां से सिविल उड़ानें शुरू होने की संभावना है, जिससे लद्दाख के दूरदराज इलाकों के लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी और आर्थिक अवसर मिल सकेंगे।

भारतीय वायुसेना का कहना है कि न्योमा एयरफील्ड का निर्माण भारत की सामरिक तैयारियों को और मजबूती देता है। एलएसी पर किसी भी आपात स्थिति में यह एयरफील्ड सैनिकों, उपकरणों और राहत सामग्री की तुरंत तैनाती में अहम भूमिका निभाएगा।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि न्योमा एयरफील्ड भारत की सामरिक ताकत का नया प्रतीक है। इसकी मदद से पूर्वी लद्दाख में भारतीय सेना और वायुसेना को चीन की सीमा पर निगरानी, आपूर्ति और प्रतिक्रिया में तेजी मिलेगी। भारतीय वायुसेना के लिए यह एयरफील्ड एक “गेम चेंजर” साबित हो सकता है क्योंकि अब भारत के पास एक ऐसा हाई-एल्टीट्यूड एयरबेस है जो किसी भी मौसम या परिस्थिति में ऑपरेशनल रह सकता है।

Underwater Surveillance: रक्षा मंत्रालय और कल्याणी स्ट्रैटेजिक सिस्टम्स में करार, नौसेना के लिए बनाएगी एडवांस अंडरवाटर सिस्टम

Underwater Surveillance- Kalyani Strategic Systems Navy Contract
Underwater Surveillance- Kalyani Strategic Systems Navy Contract

Underwater Surveillance: भारतीय रक्षा मंत्रालय ने कल्याणी स्ट्रैटेजिक सिस्टम्स लिमिटेड (केएसएसएल) को एक बड़ा ऑर्डर दिया है। इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत कंपनी नौसेना को एडवांस अंडरवाटर सिस्टम्स की सप्लाई करेगी। इस कॉन्ट्रैक्ट की कीमत 250 करोड़ रुपये से अधिक है। साथ ही, इसकी डिलीवरी फास्ट ट्रैक खरीद प्रक्रिया के तहत नवंबर 2026 तक पूरी की जाएगी।

Defence Boost: भारतीय सेना ने हथियारों की सबसे बड़ी खरीद पर लगाई मुहर, मेक इन इंडिया को मिलेगा जबरदस्त बढ़ावा

यह समझौता भारतीय नौसेना की मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस बढ़ाने और हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ते अंडरवाटर खतरों का तेजी से मुकाबला करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत नौसेना को स्वदेशी अनमैन्ड मैरीटाइम सिस्टम मिलेंगे, जो निगरानी, बारूदी सुरंगों से बचाव और सुरक्षित संचार को बढ़ाएंगे। कल्याणी स्ट्रैटेजिक सिस्टम्स लिमिटेड के ऑटोमैटेड अंडरवाटर व्हीकल्स और अन्य मानवरहित प्लेटफॉर्म नौसेना को लंबे समय तक गुप्त निगरानी करने, डेटा जुटाने और बिना किसी मानव जोखिम के रणनीतिक क्षेत्रों की सुरक्षा करने में सक्षम बनाएगे।

Underwater Surveillance

इन नए सिस्टम से माइन काउंटरमेजर्स के क्षेत्र में भी बड़ा सुधार होगा। तैनात किए गए ऑटोमैटेड अंडरवाटर व्हीकल्स (एयूवी) बारूदी सुरंगों का तेजी से और सुरक्षित रूप से पता लगाकर उन्हें निष्क्रिय करने में मदद करेंगे। इससे न केवल नौसेना अभियानों में जोखिम घटेगा, बल्कि कमर्शियल शिपिंग भी सुरक्षित रहेगी।

Explained: हिंद महासागर की निगरानी के लिए भारत बना रहा साइलेंट वॉरियर HEAUV, क्यों कहा जा रहा इसे नौसेना के लिए गेमचेंजर

केएसएसएल की इन नई तकनीकों में पानी के अंदर सुरक्षित संचार याानी सिक्योर अंडरवाटर कम्यूनिकेशन और क्रिप्टोग्राफिक डेटा लिंक भी शामिल हैं, जो विवादित इलाकों में कमांड-एंड-कंट्रोल को मजबूती देंगे। यह सिस्टम ऑटोनॉमस प्लेटफॉर्म बेड़े की कमान को आवश्यक जानकारी सुरक्षित रूप से भेजने में मदद करेंगे।

Underwater Surveillance रक्षा उद्योग के लिए यह कॉन्ट्रैक्ट आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। भारत अब मुश्किल अन्मैंडर सिस्टम का उत्पादन घरेलू स्तर पर कर रहा है, जिससे न केवल टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि रक्षा खरीद में समय भी घटेगा।

Delhi Defence Dialogue 2025: आर्मी चीफ बोले- 7वीं पीढ़ी की टेक्नोलॉजी को अपनी ट्रेनिंग में शामिल कर रही सेना, तीन ‘डी’ को बताया मॉडर्न वॉरफेयर के लिए जरूरी

Delhi Defence Dialogue 2025
Army Chief Gen Upendra Dwivedi

Delhi Defence Dialogue 2025: भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने कहा कि आधुनिक युद्ध अब केवल बंदूकों और तोपों से नहीं, बल्कि तकनीक, जनसंख्या और लोकतंत्रीकरण से तय होगा। उन्होंने इसे आधुनिक युद्ध के तीन ‘डी’- डेमोक्रेटाइजेशन, डिफ्यूजन और डेमोग्राफी बताया।

वे बुधवार को नई दिल्ली स्थित मनमोहन पर्रिकर इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस (MP-IDSA) में आयोजित दिल्ली डिफेंस डॉयलॉग 2025 को संबोधित कर रहे थे। इस सम्मेलन का विषय था, ‘हार्नेसिंग न्यू एज टेक्नोलॉजी फॉर डिफेंस कैपेबिलिटी डेवलपमेंट’।

Cavalry Seminar 2025: सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी बोले- भविष्य के युद्ध में जरूरी होगी इंसान और मशीन की साझेदारी

जनरल द्विवेदी ने कहा कि आज के समय में दुनिया में 50 से ज्यादा जगहों पर युद्ध चल रहे हैं और 100 से ज्यादा देश किसी न किसी रूप में इसमें शामिल हैं। उन्होंने कहा, “हम यूक्रेन-रूस युद्ध को ध्यान से देख रहे हैं, क्योंकि यह हमारे लिए एक ‘लिविंग लैब’ जैसा है। इस युद्ध में ड्रोन टैंकों का पीछा कर रहे हैं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रेडियो सिग्नल जाम कर रही है और 100 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक सटीक निशाने साधे जा रहे हैं।”

Delhi Defence Dialogue 2025

सेना प्रमुख ने कहा कि भविष्य का युद्ध बहुआयामी होगा, जिसमें एआई, रोबोटिक्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी, साइबर टूल्स और एनर्जी वेपन्स का इस्तेमाल बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि डेमोक्रेटाइजेशन का मतलब है कि नई तकनीक अब केवल बड़े देशों या संस्थानों तक सीमित नहीं रही, बल्कि हर देश और व्यक्ति तक पहुंच रही है। डिफ्यूजन का अर्थ है कि यह तकनीक अब सीमाओं से परे फैल रही है और डेमोग्राफी यानी नागरिक भी अब युद्ध में भूमिका निभा रहे हैं, चाहे वे सैनिक हों, व्यापारी हों या तकनीकी विशेषज्ञ।

उन्होंने कहा, “अब नागरिक सैनिक और गार्डियन फोर्सेज जैसे कॉन्सेप्ट सामने आ रहे हैं, जहां आम नागरिक भी डिफेंस सिस्टम का हिस्सा बन रहे हैं। कुछ व्यापारी तो दोनों पक्षों को तकनीक या उपकरण बेचकर युद्ध का हिस्सा बन जाते हैं।”

जनरल द्विवेदी ने कहा कि भारत को अपनी दो-ढाई मोर्चों की चुनौतियों को देखते हुए हर तकनीक जिसमें ट्रेंच वॉरफेयर से लेकर हाइब्रिड और फिफ्थ-जनरेशन वॉरफेयर शामिल हैं, उन्हें पांच पीढ़ियों के युद्ध के अनुरूप ढालना होगा।

उन्होंने कहा कि सेना अब “ह्यूमन सेंट्रिक टेक्नोलॉजी” पर काम कर रही है, जिसका उद्देश्य मशीनों को नहीं बल्कि मनुष्यों को सशक्त बनाना है। उन्होंने बताया कि भारत में अब “इंडस्ट्री 5.0” का दौर है, जिसमें इंसानों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का कॉर्डिनेशन सबसे अहम है।

सेना प्रमुख ने कहा, “हम एआई की मदद से सैनिकों की क्षमता बढ़ाना चाहते हैं। हमारी कोशिश है कि डेटा को फैसले में बदलने की प्रक्रिया इंसानों के नियंत्रण में रहे, न कि मशीनों के।” उन्होंने बताया कि सेना 7वीं पीढ़ी की तकनीक, जैसे 7 नेनोमिलियन माइक्रोचिप्स टेक्नोलॉजी, एडवांस मोबाइल डिवाइस और गेमिंग कंसोल्स को भी अपनी ट्रेनिंग में शामिल कर रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि यह तकनीक न केवल युद्धक्षेत्र में उपयोगी है बल्कि तेजी से फैसले लेने और सटीकता को भी बढ़ाती है।

इससे पहले मंगलवार को दिल्ली डिफेंस डायलॉग 2025 में सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने कहा था, “युद्ध और युद्ध में जीत, दोनों ही रणनीति पर निर्भर करते हैं। पहले यह रणनीति भूगोल से तय होती थी, लेकिन अब धीरे-धीरे तकनीक उस पर हावी होती जा रही है। पहले सेनाएं क्षेत्र, मौसम, और भौगोलिक परिस्थितियों के आधार पर योजनाएं बनाती थीं, लेकिन अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम टेक्नोलॉजी और नेटवर्क सेंट्रिक सिस्टम युद्ध की दिशा तय करते हैं।”

जनरल चौहान ने बताया कि अब दुनिया भर में युद्ध केवल जमीन, हवा या समुद्र तक सीमित नहीं हैं, बल्कि साइबर और अंतरिक्ष जैसे नए क्षेत्रों तक फैल चुके हैं। उन्होंने कहा कि तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल ने युद्ध की प्रकृति को पूरी तरह बदल दिया है। उन्होंने कहा कि पहले दुश्मन के स्थान और सीमाओं को जानना ही बड़ी बात होती थी, लेकिन आज तकनीक इतनी एडवांस है कि डेटा, सैटेलाइट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से युद्ध के हर पहलू पर नजर रखी जा सकती है।

Delhi Defence Dialogue: सीडीएस जनरल चौहान बोले- मॉडर्न वॉरफेयर का सबसे सफल उदाहरण है ऑपरेशन सिंदूर, हथियारों के साथ तकनीक है जीत की चाबी

सीडीएस ने यह भी जोड़ा कि आधुनिक समय में रणनीतिक निर्णय केवल हथियारों पर नहीं, बल्कि डेटा और सूचना पर निर्भर करते हैं। उन्होंने कहा, “जिसके पास तकनीक की समझ और डेटा का नियंत्रण है, वही युद्ध के परिणाम तय कर सकता है।”

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सम्मेलन का उद्घाटन किया था। अपने भाषण में उन्होंने कहा था कि भारत को आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन और नई तकनीकों के क्षेत्र में अग्रणी बनाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि देश की सेनाएं अब “टेक्नोलॉजी-ड्रिवन वॉरफेयर” के युग में प्रवेश कर चुकी हैं।

Delhi Defence Dialogue 2025 डिफेंस डायलॉग 2025 में कई देशों के रक्षा विशेषज्ञ, वैज्ञानिक और उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस कार्यक्रम में नई तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स, क्वांटम कंप्यूटिंग, ड्रोन टेक्नोलॉजी और साइबर सुरक्षा पर विस्तृत चर्चा हुई।