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Dubai Airshow 2025: रेगिस्तान के आसमान में गरजे फाइटर जेट्स, पहली इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी ने भरी उड़ान, एमिरेट्स ने दिया विमानों का बड़ा ऑर्डर

Dubai Airshow 2025
Pic Courtesy: Romiya Das

Dubai Airshow 2025: दुनिया के सबसे बड़े और चर्चित एयर शो में से एक दुबई एयरशो 2025 की शुरुआत दुबई वर्ल्ड सेंट्रल के स्काईलाइन के नीचे भव्य अंदाज में हुई। सुबह होते ही रेगिस्तान के आसमान में लड़ाकू विमानों, इलेक्ट्रिक एयर टैक्सियों और दुनिया की सबसे नई एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी की गूंज सुनाई दी। इस एयर शो का पहला दिन ही बताता है कि यह कार्यक्रम आने वाले समय में ग्लोबल एविएशन इंडस्ट्री की दिशा बदलने वाला है।

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शो की शुरुआत यूएई एयरफोर्स के दमदार फ्लाईपास्ट से हुई, जिसने माहौल को शानदार बना दिया। आसमान में इलेक्ट्रिक प्रोपेलर्स का तेज म्यूजिक और पंखों से उठ रही गड़गड़ाहट से यह आभास हुआ कि अब एविएशन सिर्फ सवारी का माध्यम नहीं बल्कि एक नया युग है।

Dubai Airshow 2025: एमिरेट्स का 52 अरब डॉलर का बोइंग ऑर्डर

पहले ही दिन सबसे बड़ी खबर एमिरेट्स एयरलाइंस की तरफ से आई। एयरलाइन ने 52 बिलियन डॉलर (52 अरब डॉलर) का बोइंग विमानों का बड़ा ऑर्डर दिया है। यह सौदा न केवल एयर शो की हेडलाइन है, बल्कि आने वाले सालों में ग्लोबल एविएशन इंडस्ट्री पर बड़ा असर डालने वाला कदम माना जा रहा है।

यह ऑर्डर बताता है कि दुबई अपनी एयरलाइन इंडस्ट्री में कितना बड़ा निवेश कर रहा है और आने वाले सालों में यात्रियों की संख्या बढ़ने की कितनी उम्मीद है। एमिरेट्स इस नए ऑर्डर के जरिए अपने बेड़े को और आधुनिक, सुरक्षित और एनर्जी एफिशिएंट बनाने में जुटी है। इस सौदे ने विमानन उद्योग में हलचल ला दी और यह स्पष्ट कर दिया कि दुबई तेजी से ग्लोबल एविएशन इंडस्ट्री बनने जा रहा है।

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Pic Courtesy: Romiya Das

पहली बार किसी ग्लोबल एयरशो में eVTOL की लाइव उड़ान

दुबई एयरशो 2025 में आज वह दृश्य भी देखने को मिला, जिसे कई विशेषज्ञ भविष्य की शुरुआत मान रहे हैं। वहीं स्टार्ट-अप और इनोवेशन सेक्टर ने भी अपनी अलग चमक बिखेरी। जहां जॉबी एविएशन की इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी eVTOL (इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग विमान) ने पहली बार किसी अंतरराष्ट्रीय एयर शो में लाइव उड़ान भरी। बैटरी से चलने वाला यह एयर क्राफ्ट बिना आवाज किए बेहद स्मूथ तरीके से हवा में उठा और आसानी से लैंड भी हुआ। यह उड़ान शहरों में भविष्य के ट्रैवल का संकेत मानी जा रही है।

लोगों ने जोरदार तालियों के साथ इस ऐतिहासिक उड़ान का स्वागत किया। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह टेक्नोलाजी भविष्य में एयर टैक्सी सर्विस का आधार बनने वाली है।

Dubai Airshow 2025
Pic Courtesy: Romiya Das

यूएई ने उड़ाए चीनी होंगडू एल-15 ट्रेनर जेट

एरियल डिस्प्ले की शुरुआत यूएई वायुसेना के शानदार फ्लाईपास्ट से हुई। इसके तुरंत बाद मैदान में उतरी यूएई की मशहूर एरोबैटिक टीम फुरसान अल इमारात। ये पायलट चीन के नए होंगडू एल-15 ट्रेनर जेट उड़ा रहे थे। उनका प्रदर्शन देखकर हर कोई दंग रह गया। पूरी दोपहर दर्शक पुराने और नए दिग्गज विमानों का लुत्फ उठाते रहे।

एयर शो में अमेरिकी वायुसेना के बॉम्बर बी-52 स्ट्रैटोफोर्ट्रेस, एफ-35 लाइटनिंग II और एफ-16 फाइटिंग फाल्कन ने भी अपनी ताकत दिखायी। साथ ही, आने वाले समय का बड़ा यात्री जहाज बोइंग 777X ने भी एयरशो में उड़ान भरी।
यह भविष्य का सुपर-लॉन्ग रेंज पैसेंजर विमान है।

अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है यूएई

यूएई के उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री, हिज हाइनेस शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने कहा कि दुबई एयरशो सिर्फ आयोजन नहीं, बल्कि देश की आगे बढ़ने की सोच और तकनीक में सस्टेनेबल इन्वेस्टमेंट का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यूएई विज्ञान, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन में निवेश करके न केवल अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है बल्कि दुनिया को नई राह भी दिखा रहा है।

1500 से अधिक एग्जिबिटर्स, 115 देशों से प्रतिनिधिमंडल

इस साल दुबई एयर शो बड़े पैमाने पर आयोजित किया गया है। इस साल के आयोजन में दुनिया भर से 1,500 से ज़्यादा एग्जिबिटर्स शामिल हुए हैं, जिनमें 440 पहली बार हिस्सा ले रहे हैं। आयोजकों के मुताबिक, इस शो में कुल 1.48 लाख से अधिक लोगों के पहुंचने की उम्मीद है। यह एयर शो एविएशन और डिफेंस सेक्टर का सबसे प्रभावशाली ग्लोबल प्लेटफॉर्म माना जाता है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 115 देशों से 490 मिलिटरी एंड सिविलियन डेलीगेशंस इसमें हिस्सा ले रहे हैं।

एग्जिबिशन कॉम्प्लैक्स में 21 देशों के नेशनल पवेलियन बने हैं, जहां नई टेक्नॉलजी का प्रदर्शन किया जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां सिर्फ तकनीक ही नहीं, बल्कि सहयोग की भावना भी दिखाई देती है। दुनिया के बड़े एक्सपर्ट्स, इंडस्ट्री लीडर्स और एविएशन से जुड़े वैज्ञानिक एक ही स्थान पर मिलकर विचार साझा कर रहे हैं, पार्टनरशिप बना रहे हैं और भविष्य की उड़ान तकनीक की दिशा तय कर रहे हैं।

इन पवेलियनों के अलावा, एयर शो में प्राइवेट मीटिंग्स के लिए 98 खास जगह भी बनाई गई हैं। यहीं पर कई बड़ी कंपनियां गुपचुप बातचीत करती हैं और सौदे भी तय होते हैं। इस बार मांग इतनी बढ़ गई कि आयोजकों को पूरे आयोजन स्थल में 8,000 वर्गमीटर अतिरिक्त जगह जोड़नी पड़ी। यह दिखाता है कि दुनिया के सबसे बड़े एयर शो में जगह पाना अब भी कितनी बड़ी बात है।

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यूएई की कंपनी ने एक ही दिन में लॉन्च किए 42 नए प्रोडक्ट

दुबई एयर शो में इस बार यूएई की डिफेंस कंपनी एज ग्रुप ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। कंपनी ने हवाई और अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में एक ही बार में 42 नए प्रोडक्ट लॉन्च करके बड़ा कदम उठाया है। इतने बड़े पैमाने पर लॉन्च यह दिखाता है कि यूएई डिफेंस और एयरोस्पेस टेक्नॉलजी में कितनी तेजी से आगे बढ़ रहा है।

इन नए उत्पादों में क्रूज़ मिसाइल इंजन, आधुनिक MALE ड्रोन (मीडियम अल्टीट्यूड, लॉन्ग एंड्योरेंस), और नई क्रूज मिसाइल शामिल है, जिनमें एडवांस तकनीक लगी है। एज के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ हमद अल मरार ने बताया कि कंपनी की तेज बढ़त इस उपलब्धि से साफ नजर आती है। सिर्फ एक दिन में 42 प्रोडक्ट लॉन्च करना और कुल मिलाकर 250 से ज़्यादा प्रोडक्ट रखना यह दिखाता है कि एज अब दुनिया की बड़ी कंपनियों की बराबरी में खड़ी है। उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी की 53 फीसदी कमाई अब एक्सपोर्ट से आती है।

120 नए स्टार्टअप्स

दुबई एयर शो में बड़े एयरक्राफ्ट और अंतरराष्ट्रीय समझौतों के बीच इस बार रिकॉर्ड 120 नए स्टार्टअप्स अपने आइडिया और तकनीक दिखा रहे हैं। इनमें से कई स्टार्टअप्स सस्टेनेबिलिटी, ऑटोमेशन, और नेक्स्ट जनरेशन प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी पर भी काम कर रहे हैं।

इनके साथ 50 निवेशक भी मौजूद हैं, जो नई तकनीक और नए आइडिया में निवेश करने का मौकार तलाश रहे हैं। यह पूरा इकोसिस्टम दुबई की उस आर्थिक सोच को दर्शाता है जिसमें सिर्फ बड़े प्रोजेक्ट ही नहीं, बल्कि छोटी-छोटी इनोवेशन करने वाली कंपनियों को भी आगे बढ़ने का रास्ता दिया जाता है।

दुबई एयर शो 2025 के पहले दिन जब शाम हुई, तो माहौल साफ बता रहा था कि यह शो सिर्फ एयरक्राफ्ट देखने का मौका नहीं है। यह वास्तव में भविष्य की उड़ान की पूरी पिक्चर है। यहां परंपरा और नई तकनीक, बड़े व्यापार और नई सोच सब एक साथ दिखते हैं। यही यूएई की खासियत है, जो न सिर्फ मेजबान है, बल्कि बदलाव का एक मजबूत जरिया भी है।

Army Chief Sikkim Visit: दो दिन के दौरे पर सिक्किम पहुंचे सेना प्रमुख, एक दिन पहले ही चीन पर कही थी ये बात

Army Chief Sikkim Visit
Army Chief Sikkim Visit

Army Chief Sikkim Visit: भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी दो दिवसीय सिक्किम के दौरे पर हैं। सेना प्रमुख ने दौरान सेना की ऑपरेशन तैयारियों का जायजा लिया। अपने इस दौरे में वे एलएसी के संवेदनशील इलाकों में तैनात सैनिकों से भी मिलेंगे और हालात की जमीनी समीक्षा भी करेंगे। यह इलाका चीन सीमा के बेहद करीब है और रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।

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सेना प्रमुख यह दौरा इसलिए भी अहम है क्योंकि 17 नवंबर को ही उन्होंने कहा था कि पिछले साल अक्टूबर से भारत-चीन संबंधों में सुधार आया है, और दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत का उद्देश्य हालात को सामान्य बनाना है।

Army Chief Sikkim Visit: फॉरवर्ड पोस्टों की समीक्षा

18-19 नवंबर दो दिन के सिक्किम दौरे पर पहुंचे सेना प्रमुख सकलिंग, नाथू ला और उत्तरी सिक्किम के कई ऊंचाई वाली पोस्टों पर जाकर सैनिकों से मुलाकात करेंगे। साथ ही, तैनाती, रसद, मौसम संबंधी चुनौतियों और तकनीकी उपकरणों की उपलब्धता की जानकारी भी लेंगे। यह इलाका समुद्र तल से 15,000 से 17,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है, जहां सैनिक अत्यंत कठिन परिस्थितियों में सीमा की सुरक्षा करते हैं।

क्यों अहम है सिक्किम

भारत और चीन के बीच सीमा पर बेहतर संवाद के लिए कई व्यवस्थाएं पहले से मौजूद हैं। मई 2020 में पूर्वी लद्दाख में तनाव के लगभग एक साल बाद दोनों देशों के बीच एक नई हॉटलाइन भी शुरू की गई थी। यह हॉटलाइन भारतीय सेना की कांग्रेस ला (उत्तर सिक्किम) पोस्ट और चीन की पीएलए की खाम्बा जोंग पोस्ट (तिब्बत) के बीच स्थापित की गई थी। इसका उद्देश्य सीमा पर भरोसा और समन्वय बढ़ाना है।

फिलहाल दोनों देशों की सेनाओं के बीच छह हॉटलाइन चल रही हैं, जिनमें दो पूर्वी लद्दाख में, दो सिक्किम में और दो अरुणाचल प्रदेश में हैं। इनमें दौलत बेग ओल्डी, चुशुल, नाथू ला, बुम ला और किबिथू जैसे महत्वपूर्ण पॉइंट शामिल हैं।

भारत और चीन के बीच लगभग 3,488 किमी लंबी सीमा है, जो जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश तक फैली हुई है। सिर्फ सिक्किम की सीमा लगभग 220 किमी लंबी है। सिक्किम की सीमाएं नेपाल और भूटान से भी मिलती हैं।

सिक्किम के दक्षिण में सिलीगुड़ी कॉरिडोर है, जिसे चिकन नेक कहा जाता है। यह इलाका सिर्फ 20-22 किमी तक संकरा हो जाता है और बेहद रणनीतिक महत्व रखता है। यही रास्ता उत्तर-पूर्व भारत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है। इसी इलाके से राष्ट्रीय राजमार्ग, रेलवे लाइनें, पाइपलाइन और ऑप्टिकल फाइबर कनेक्टिविटी गुजरती है। 2023 में केंद्र ने घोषणा की थी कि सीमा सुरक्षा से जुड़ी एजेंसियां शांति के समय भी सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगी।

गंगटोक में मुख्यमंत्री से मुलाकात

अपनी यात्रा के दौरान जनरल द्विवेदी गंगटोक पहुंचे और सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग (गोलय) से उनके आधिकारिक निवास, सम्मान भवन, पर मुलाकात की। उनके साथ पूर्वी कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल विजय भूषण कुमार, त्रिशक्ति कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता और ब्लैक कैट डिविजन के जीओसी मेजर जनरल राजेश सेठी भी मौजूद थे।

सीएम तमांग ने कहा कि यह मुलाकात बेहद सकारात्मक रही और कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से बात हुई। दोनों पक्षों ने राष्ट्रीय सुरक्षा, मिलिट्री-सिविल सहयोग, रणभूमि दर्शन प्रोग्राम और सिक्किम के पूर्व सैनिकों तथा वीर नारियों के कल्याण से जुड़े विषयों पर चर्चा की।

सिक्किम सरकार का रणभूमि दर्शन प्रोग्राम राज्य के लोगों को ऐतिहासिक युद्ध स्थलों और सीमावर्ती इलाकों का दौरा कराने की एक योजना है। इसका उद्देश्य युवाओं में राष्ट्रभक्ति की भावना बढ़ाना है। सेना और सरकार ने इस कार्यक्रम पर संयुक्त काम को आगे बढ़ाने पर बात की।

सिक्किम भूकंप और भूस्खलन के लिए संवेदनशील राज्य है। इस कारण सेना और राज्य सरकार आपदा प्रबंधन में मिलकर काम करती हैं। बैठक में मिलिट्री-सिविल फ्यूजन प्रोजेक्ट्स पर भी चर्चा हुई, जिनमें सड़कें, हेलीपैड, संचार और राहत कार्यों में सहयोग शामिल है।

सिक्किम के सैकड़ों जवान भारतीय सेना में सेवा दे चुके हैं। मुख्यमंत्री ने सेना प्रमुख को बताया कि राज्य सरकार वेटरन्स और वीर नारियों के लिए कल्याण योजनाओं को मजबूत कर रही है। सेना प्रमुख ने इन प्रयासों की सराहना की।

Army Chief Sikkim Visit – एक दिन पहले ही भारत-चीन संबंधों पर बोले थे सेना प्रमुख

अपने सिक्किम दौरे से एक दिन पहले 17 नवंबर को नई दिल्ली में आयोजित ‘चाणक्य डिफेंस डायलॉग’ के कार्यक्रम में जनरल द्विवेदी ने भारत-चीन संबंधों पर बोलते हुए कहा था कि अक्टूबर 2024 के बाद दोनों देशों के रिश्तों में धीरे-धीरे सुधार दिख रहा है। उन्होंने बताया कि 21 अक्टूबर को पूर्वी लद्दाख में हुए समझौते और 24 अक्टूबर को प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बैठक ने हालात को सामान्य करने में बड़ी भूमिका निभाई है।

Army Chief Sikkim Visit जनरल द्विवेदी के मुतबिक, पिछले एक साल में दोनों देशों में सैन्य स्तर पर लगभग 1,100 बार बातचीत हुई है, यानी औसतन हर दिन तीन इंटरैक्शन। उन्होंने कहा कि अब बातचीत का स्तर कोर कमांडरों से नीचे उतरकर बटालियन और कंपनी कमांडर स्तर तक आ गया है। इससे छोटे-मोटे विवाद वहीं पर तुरंत सुलझ जाते हैं और फाइलों में अटककर देरी नहीं होती।

63rd Rezang La Day: रेजांग ला डे पर 13 कुमाऊं रेजिमेंट के बहादुर वीरों को याद कर सेना ने दी श्रद्धांजलि

63rd Rezang La Day- Indian Army pays tribute to Rezang La Heroes in Ladakh

63rd Rezang La Day: लद्दाख में 63वां रेजांग ला डे श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया। फायर एंड फ्यूरी कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल हितेश भल्ला और सभी रैंक्स ने 13 कुमाऊं रेजिमेंट के बहादुर वीरों को नमन किया। भारतीय सेना ने उन सैनिकों को याद किया, जिन्होंने बेहद कठिन परिस्थितियों और संख्या में अधिक दुश्मन के सामने देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया था।

Battle of Rezang La: आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी को भेंट की मेजर शैतान सिंह, PVC : द मैन इन हाफ लाइट पुस्तक

63rd Rezang La Day- Indian Army pays tribute to Rezang La Heroes in Ladakh

रेजांग ला की यह लड़ाई भारतीय सैन्य इतिहास का एक ऐसा अध्याय है, जो आज भी साहस और कर्तव्य के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है। शहीदों की याद में 14 से 18 नवंबर 2025 तक कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में खेल प्रतियोगिताएं, देशभक्ति संगीत कार्यक्रम, और उन शहीदों की याद में दौड़ का आयोजन किया गया। समारोह में उन शहीद परिवारों और लद्दाखी समुदाय के बुजुर्ग सदस्यों को सम्मानित किया गया जिन्होंने युद्ध के दौरान सैनिकों का साथ निभाया था।

कार्यक्रम के दौरान त्रिशूल डिविजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग मेजर जनरल अरिंदम साहा ने रेजांग ला वॉर मेमोरियल पर जाकर शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने 13 कुमाऊं रेजिमेंट के उन वीर जवानों को याद किया जिन्होंने रेजांग ला की लड़ाई में अद्भुत वीरता का परिचय दिया था। उनके साहस, देशभक्ति और कर्तव्य-निष्ठा की गाथा आज भी नई पीढ़ियों को प्रेरित करती है।

63rd Rezang La Day सेना ने कहा कि रेजांग ला के योद्धाओं का बलिदान हमेशा राष्ट्र की स्मृति में अमर रहेगा। लद्दाख के स्थानीय लोग और सेना के जवान मिलकर हर साल इस ऐतिहासिक दिन को गर्व और सम्मान के साथ मनाते हैं।

India-Germany Defence ties: तरंग शक्ति और मिलन-2026 में शामिल होगा जर्मनी, भारत संग मिल कर बनाएंगे डिफेंस इक्विपमेंट्स

India-Germany Defence ties deepen as Germany to join TARANG SHAKTI 2026 and MILAN naval exercise

India-Germany Defence ties: जर्मनी अगले साल देश में होने वाली दो प्रमुख एक्सरसाइज तरंगशक्ति और मिलन में शामिल होगा। जर्मनी ने एयरफोर्स और नेवी की इन दोनों एक्सरसाइज में शामिल होने की मंजूरी दे दी है। मंगलवार को भारत और जर्मनी के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए नई दिल्ली में इंडिया-जर्मनी हाई डिफेंस कमेटी मीटिंग का आयोजन हुआ था। इस बैठक की सह-अध्यक्षता भारत के डिफेंस सेक्रेटरी राजेश कुमार सिंह और जर्मनी के स्टेट सेक्रेटरी ऑफ मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस येंस प्लॉटनर ने की।

Exercise Milan 2026: भारतीय नौसेना के लिए 2026 है बेहद खास, होने जा रहे हैं तीन मेगा इवेंट, अमेरिका और रूस समेत 55 देशों की नौसेनाएं होंगी शामिल

बैठक में दोनों देशों के बीच सुरक्षा और रक्षा सहयोग से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। इसमें को-डेवलपमेंट और को-प्रोडक्शन जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया, ताकि भविष्य में डिफेंस इक्विपमेंट्स को मिलकर डेवलप किया जा सके।

India-Germany Defence ties

इस बैठक में जर्मनी ने भारत में होने वाली दो सबसे बड़े मल्टीनेशनल मिलिट्री एक्सरसाइज में शामिल होने को लेकर सहमति जताई। इनमें तरंग शक्ति 2026 भारतीय वायुसेना की सबसे बड़ी मल्टीनेशनल एयर कॉम्बैट एक्सरसाइज है। जर्मनी ने 2026 में इसमें भाग लेने की पुष्टि की है। इस एक्सरसाइज में दुनिया भर की वायुसेनाएं शामिल होती हैं। जर्मनी की भागीदारी दोनों देशों की एयर-टू-एयर इंटरऑपरेबिलिटी को और मजबूत करेगी।

वहीं, मिलन 2026 भारतीय नौसेना की बड़ी मल्टीनेशनल नेवल एक्सरसाइज है, जिसमें कई देश हिस्सा लेते हैं। जर्मनी पहली बार इसमें शामिल होगा। इससे समुद्री सुरक्षा और मैरिटाइम कोऑपरेशन को नई दिशा मिलेगी। बैठक में दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि रक्षा उद्योगों खास कर निश टेक्नोलॉजी, यानी हाई-टेक रक्षा तकनीकों को एक-दूसरे से जोड़ना बेहद जरूरी है।

India-Germany Defence ties deepen as Germany to join TARANG SHAKTI 2026 and MILAN naval exercise
Defence Secretary Rajesh Kumar Singh

भारत ने जर्मनी को बताया कि हिंद महासागर क्षेत्र में उसकी भूमिका फर्स्ट रिस्पॉन्डर और नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर की है। भारत का पूरा प्रयास “महासागर विजन (म्यूचुअल एंड होलिस्टिक एडवांसमेंट ऑफ सिक्युरिटी एंड ग्रोथ अक्रोस रीनंस)” विजन के तहत क्षेत्रीय देशों के साथ मिलकर समुद्री सुरक्षा और मानवीय राहत में योगदान देना है। जर्मनी ने भारत की इस भूमिका की सराहना की।

India-Germany Defence ties दोनों देशों ने कहा कि भारत-जर्मनी संबंध साझा मूल्यों और लंबे भरोसे पर आधारित हैं। इस वर्ष दोनों देश अपनी 25वीं स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप वर्षगांठ मना रहे हैं, जो रक्षा संबंधों को और मजबूती देने का अवसर है।

Fujian Electromagnetic Catapult: क्या है फुजियान एयरक्राफ्ट कैरियर में लगा यह खास सिस्टम? दक्षिण सागर में चीन का यह शिप हुआ एक्टिव

China aircraft carrier Fujian electromagnetic catapult
China aircraft carrier Fujian

Fujian electromagnetic catapult: चीन ने अपने लेटेस्ट एयरक्राफ्ट कैरियर फुजियान के सी ट्रायल्स शुरू कर दिए हैं। फुजियान के साथ ही चीन के पास तीन एयरक्राफ्ट कैरियर्स हो गए हैं, जबकि भारत के पास दो हैं और अमेरिका के पास ग्यारह। हालांकि चीन और भारत के यह कैरियर पारंपरिक ऊर्जा से चलने वाले हैं, जबकि अमेरिका के न्यूक्लियर एनर्जी से चलते हैं।

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ताजा सैटेलाइट इमेजरी से पता चला है कि फुजियान को पहली बार दक्षिण सागर में पोर्ट से बाहर देखा गया है। इसने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में हलचल बढ़ा दी है। साथ ही चीन का दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर शानडोंग भी समुद्र में एक्टिव दिख रहा है। माना जा रहा है कि फुजियान और शानडोंग दोनों का एक साथ सक्रिय होना चीन की नौसैनिक रणनीति में बदलाव को संकेत देता है, जिसे भारत भी गंभीरता से देख रहा है।

Fujian electromagnetic catapult: यह तैनाती क्यों है महत्वपूर्ण

चीन की दोनों कैरियर ऐसे समय में सामने आए हैं, जब भारत अपनी नौसैनीक क्षमता को मजबूत कर रहा है और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता का प्रमुख स्तंभ बनने की दिशा में काम कर रहा है। फुजियान को तकनीकी रूप से अत्याधुनिक माना जा रहा है क्योंकि इसमें इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापल्ट लॉन्च सिस्टम (EMALS) जैसी क्षमता है। यह तैनाती अंडमान-निकोबार, मालक्का स्ट्रेट और भारतीय नौसेना की निगरानी पट्टी के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है क्योंकि दक्षिण चीन सागर से हिंद महासागर की दिशा में किसी भी गतिविधि पर भारत की सीधी नजर रहती है।

Fujian electromagnetic catapult: फुजियान की खूबियां

फुजियान चीन का पहला ऐसा एयरक्राफ्ट कैरियर है जिसे स्वदेशी रूप से डिजाइन और बनाया गया है। इसमें सपोर्ट के लिए इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापल्ट सिस्टम लगा हुआ है, जिससे लड़ाकू विमानों को ज्यादा ईंधन और वेपंस के साथ लॉन्च किए जा सकते हैं। इस नए प्लेटफॉर्म को चीन के राष्ट्रपति सी जिनपिंग ने कमीशन किया था। रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया है कि फुजियान ने नेवी ट्रायल्स के दौरान अपने डेक से जे-35 नामक नेवी स्टेल्थ लड़ाकू विमान और केजे-600 एयरबोर्न अर्ली वार्निंग प्लेन को सफलतापूर्वक लॉन्च किया है।

China aircraft carrier Fujian electromagnetic catapult
China aircraft carrier Fujian

Fujian electromagnetic catapult: भारत की तैयारी और निगरानी

भारतीय नौसेना ने अपने समुद्री निगरानी तंत्र को भी मजबूत किया है। इसमें सूचना प्रबंधन एवं विश्लेषण केन्द्र (IMAC) को भी अपग्रेड किया गया है जो चीन की समुद्री गतिविधियों पर सटीक नजर रखता है। भारत अपने मिशन महासागर के तहत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझेदार देशों के साथ मिलकर समुद्री सुरक्षा बढ़ा रहा है। स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत और आईएनएस विक्रमादित्य तथा पी-8आई समुद्री गश्ती विमान और समुद्र-आधारित निगरानी सिस्टम की मदद से चीन की गतिविधियों पर रीयल टाइम नजर रखी जा रही है।

विश्लेषकों के अनुसार, चीन के इस कैरियर (Fujian electromagnetic catapult) की तैनाती सिर्फ शक्ति प्रदर्शन नहीं बल्कि भारत और उसके साझेदार देशों के लिए एक रणनीतिक संकेत है। दक्षिण चीन सागर से हिंद महासागर तक की नौसैनी गतिविधियां और चीन का बढ़ता जलक्षेत्रीय प्रभाव इस तैनाती के जरिये और स्पष्ट होता है। चीन के इस कदम से इंडो-पैसिफिक पावर बैलेंस में एक नया चैप्टर खुल सकता है।

चीन ने पिछले दिनों कोर रूट जैसे मालक्का स्ट्रेट और अंडमान-निकोबार की दिशा में अपनी नौसेना एवं सर्वेक्षण गतिविधियों को तेज किया है। भारत का ध्यान ऐसी गतिविधियों पर बना हुआ है जो समुद्री सुरक्षा, निगरानी और साझेदारी अभ्यासों में उसकी भूमिका को प्रभावित कर सकती हैं।

क्या है फुजियान में लगा इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापल्ट सिस्टम

इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापल्ट (Fujian electromagnetic catapult) लेटेस्ट एयरक्राफ्ट कैरियर की सबसे एडवांस टेक्नोलॉजी में से एक है। परंपरागत कैरियर भाप की ताकत से विमान को तेज धक्का देकर उड़ाते थे, लेकिन इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापल्ट में भाप नहीं, बल्कि चुंबकीय ताकत यानी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फोर्स का इस्तेमाल होता है। यह सिस्टम आज दुनिया का सबसे स्मूथ और असरदार लॉन्च सिस्टम माना जाता है।

कैरियर के डेक पर एक लंबी रेल होती है। इस रेल के भीतर शक्तिशाली इलेक्ट्रोमैग्नेट (Fujian electromagnetic catapult) लगे होते हैं। जब सिस्टम को बिजली दी जाती है, तो ये इलेक्ट्रोमैग्नेट एक स्लाइडर को तेज रफ्तार से आगे खींचते हैं। यही स्लाइडर विमान से जुड़ा होता है। कुछ ही सेकंड में यह स्लाइडर विमान को इतनी तेज रफ्तार तक पहुंचा देता है कि वह सीधे हवा में उठ जाता है। पूरे प्रोसेस में न तो झटका महसूस होता है और न ही कोई अचानक बड़ा धक्का लगता है। उड़ान बिल्कुल नियंत्रित और सुरक्षित रहती है।

इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापल्ट (Fujian electromagnetic catapult) का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह हर तरह के विमान भारी लड़ाकू जेट, स्टील्थ एयरक्राफ्ट, निगरानी विमान और यहां तक कि हल्के ड्रोन सभी को आसानी से लॉन्च कर सकता है। पुराने स्टीम कैटापल्ट में हल्के ड्रोन उड़ाना मुश्किल था क्योंकि उनमें लॉन्च के दौरान झटका बहुत होता था। लेकिन इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापल्ट में रफ्तार को धीरे-धीरे बढ़ाया जाता है, जिससे हल्के और भारी दोनों तरह के विमान सुरक्षित तरीके से उड़ सकते हैं। इसी वजह से फुजियान जैसे आधुनिक चीनी एयरक्राफ्ट कैरियर अब ड्रोन और स्टील्थ फाइटर्स दोनों का उपयोग कर पाएंगे।

इस तकनीक का एक और बड़ा फायदा यह है कि यह कैरियर की सॉर्टी रेट बढ़ाती है। इसका मतलब है कि कैरियर कम समय में ज्यादा विमान हवा में भेज सकता है। लड़ाई के समय यह क्षमता किसी भी नौसेना के लिए बेहद अहम होती है। साथ ही इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापल्ट (Fujian electromagnetic catapult) में मेंटेनेंस भी पुराने सिस्टम की तुलना में कम है और यह ऊर्जा का इस्तेमाल भी अधिक कुशलता से करता है।

दुनिया में अभी तक केवल अमेरिका और चीन ही इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापल्ट (Fujian electromagnetic catapult) तकनीक को बड़े स्तर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। अमेरिका का यूएसएस गेराल्ड आर फोल्ड इसका पहला बड़ा उदाहरण है, जबकि चीन ने फुजियान कैरियर में पहली बार यह सिस्टम लगाया है। भारत के आईएनएस विक्रांत और आईएनएस विक्रमादित्य अभी स्की-जंप आधारित स्टोबार सिस्टम पर चलते हैं, जिनमें विमान अपनी ताकत से उड़ान भरते हैं। इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापल्ट को भारत के भविष्य के कैरियर प्रोजेक्ट्स के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह स्टील्थ जेट और भारी मिशन प्लेटफॉर्म के लिए सबसे प्रभावी लॉन्च सिस्टम है।

ECHS Home Delivery: अब घर बैठे ही पूर्व सैनिकों को होगी दवाइयों की डिलीवरी, ईसीएचएस ने शुरू की नई सेवा

ECHS Home Delivery
ECHS Home Delivery- 38 Polyclinics Launch Medicine Delivery Service for Veterans

ECHS Home Delivery: पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को और आसान बनाने के लिए केंद्रीय संगठन ईसीएचएस ने घर पर दवाइयां पहुंचाने की नई सुविधा शुरू की है। यह पायलट प्रोजेक्ट 16 अक्टूबर को जारी आदेश के बाद शुरू हुआ है और पहले चरण में इसे देशभर के 38 ईसीएचएस पॉलिक्लिनिक में लागू किया जा रहा है।

इस योजना का मुख्य उद्देश्य उन पूर्व सैनिकों तक दवा पहुंचाना है, जिन्हें पॉलिक्लिनिक तक आने में कठिनाई होती है। इसमें 70 वर्ष से अधिक आयु के लाभार्थी, व्हाइट कार्ड धारक और युद्ध विकलांग शामिल किए गए हैं।

ECHS Home Delivery: कैसे चलेगी नई होम डिलीवरी सेवा?

यह पूरी योजना कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) स्कीम के माध्यम से लागू होगी। प्रत्येक पॉलिक्लिनिक के लिए एक विलेज लेवल एंटरप्रेन्योर यानी वीएलई नियुक्त होगा। कोशिश की जाएगी कि अधिक से अधिक पूर्व सैनिक वीएलई के रूप में चुने जाएं।

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पॉलिक्लिनिक की फार्मेसी दवाइयां तैयार कर वीएलई को सौंपेगी। इसके बाद भारतीय डाक विभाग दवाइयों को लाभार्थियों के घर तक पहुंचाएगा। हर चरण की जानकारी मोबाइल एप पर दर्ज की जाएगी ताकि दवा कहां पहुंची है, ताकि इसका सही रिकॉर्ड बना रहे।

ECHS Home Delivery: केंद्र और कमांड मुख्यालयों की जिम्मेदारियां

केंद्रीय संगठन ईसीएचएस पूरे प्रोजेक्ट की निगरानी करेगा और हर तिमाही यह पुष्टि करेगा कि प्रत्येक पॉलिक्लिनिक कितनी डिलीवरी कर रहा है। इसी के आधार पर सीएससी, डाक विभाग और तकनीकी सेवा प्रदाता सोर्स डॉट कॉम प्रा. लिमिटेड (एसडीसीपीएल) को भुगतान किया जाएगा।

कमांड मुख्यालय यह सुनिश्चित करेंगे कि किसी पॉलिक्लिनिक द्वारा तय सीमा से अधिक डिलीवरी न हो। स्टेशन मुख्यालय हर महीने डिलीवरी का रिकॉर्ड भेजेंगे और पूरी प्रक्रिया को मॉनिटर करेंगे।

ECHS Home Delivery: पॉलिक्लिनिक में पैकिंग और वितरण की व्यवस्था

ईसीएचएस पॉलिक्लिनिक के लिए जरूरी है कि दवाइयों की पैकिंग सुरक्षित तरीके से की जाए। इसके लिए अलग से स्थान और फर्नीचर उपलब्ध कराया गया है। फार्मेसी यह सुनिश्चित करेगी कि दवाइयां ठीक तरह से पैक हों और उन्हें समय पर वीएलई को सौंपा जाए।

ECHS Home Delivery
ECHS Home Delivery- 38 Polyclinics Launch Medicine Delivery Service for Veterans

होम डिलीवरी का लाभ केवल उन्हीं लाभार्थियों को दिया जाएगा जो योजना की शर्तों में आते हैं। यदि लाभार्थी चाहें तो पॉलिक्लिनिक जाकर भी दवा ले सकते हैं।

सीएससी की जिम्मेदारी वीएलई को ट्रेनिंग देने, पैकिंग सामग्री उपलब्ध कराने और रिकॉर्ड तैयार रखने की है। वीएलई मोबाइल ऐप के माध्यम से हर पैकेज की स्थिति “रेडी फॉर डिस्पेच” के रूप में अपडेट करेगा और दवाइयां डाक विभाग को सौंपेगा।

वीएलई यह भी सुनिश्चित करेगा कि दवाइयां सुरक्षित और सही तरीके से पैक हों, ताकि रास्ते में कोई नुकसान न हो।

भारतीय डाक विभाग प्रत्येक डिलीवरी के लिए पोस्टल लेबल जारी करेगा। डिलीवरी पूरी होने पर लाभार्थी से ओटीपी वेरिफिकेशन लेकर इसकी पुष्टि की जाएगी।

डाक विभाग सोर्स डॉट कॉम प्रा. लिमिटेड (एसडीसीपीएल) मोबाइल ऐप पर हर स्टेटस अपडेट करेगा, जिससे लाभार्थी अपने पैकेज को ट्रैक कर सकेंगे।

टेक्नोलॉजी सपोर्ट देगी एसडीसीपीएल

सोर्स डॉट कॉम प्रा. लिमिटेड (एसडीसीपीएल) इस प्रोजेक्ट के लिए एंड-टू-एंड टेक्नोलॉजी उपलब्ध करा रही है। कंपनी एंड्रॉइड और iOS दोनों प्लेटफॉर्म पर मोबाइल ऐप देगी, जिसके जरिए लाभार्थी दवाओं की स्थिति देख सकेंगे।

एसडीसीपीएल पूरे सिस्टम को 96% क्वार्टरली अपटाइम एसएलए के तहत चलाएगी और सभी स्टेकहोल्डर्स को तकनीकी सहायता देगी।

कौन-सी दवाइयां नहीं भेजी जाएंगी?

इस पायलट प्रोजेक्ट में कुछ दवाइयों को शामिल नहीं किया गया है। इनमें शामिल हैं: कोल्ड चेन वाली दवाइयां, शेड्यूल H1 और शेड्यूल X की दवाइयां, इंजेक्शन, हाई-वैल्यू मेडिसिन समेत कुल 491 दवाइयों की सूची जो होम डिलीवरी में शामिल नहीं होगी।

अगर कोई पैकेज डिलीवर नहीं हो पाता है, तो लाभार्थी को 30 दिनों के भीतर पॉलिक्लिनिक से दवा लेनी होगी।

ईसीएचएस ने सभी कमांडरों से अनुरोध किया है कि वे अधिक से अधिक पूर्व सैनिकों को वीएलई के रूप में नामांकित होने के लिए प्रेरित करें। इस पहल का लक्ष्य है कि दवाइयों की सुविधा सीधे घर तक जाए और वृद्ध व बीमार पूर्व सैनिकों को पॉलिक्लिनिक आने की परेशानी न झेलनी पड़े।

FIIs defence stocks: विदेशी निवेशकों की डिफेंस शेयरों में क्यो घट रही दिलचस्पी? इन कंपनियों में घटाई हिस्सेदारी

Indian defence stocks

FIIs defence stocks: सितंबर तिमाही में फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (एफआईआई) ने भारतीय डिफेंस सेक्टर की कई कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी कम कर दी है। यह कमी ऐसे समय में दर्ज की गई है, जब पिछले कुछ महीनों में डिफेंस कंपनियों के शेयरों में तेज बढ़त देखी गई थी। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने कुल 11 प्रमुख डिफेंस शेयरों में अपनी होल्डिंग घटाई है, जबकि छह कंपनियों में मामूली बढ़ोतरी की है।

FIIs defence stocks: सबसे ज्यादा कमी गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स में

रिपोर्ट बताती है कि एफआईआई (FIIs defence stocks) ने हिस्सेदारी में सबसे ज्यादा कमी गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स में की है, जहां उनकी होल्डिंग 5.33 फीसदी से घटकर 3.26 फीसदी रह गई। यानी 207 बेसिस पॉइंट्स की गिरावट। इसी तरह सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (बीडीएल) में एफआईआई की हिस्सेदारी 2.43 फीसदी रह गई, जो पिछली तिमाही से 134 बेसिस पॉइंट्स कम है।

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निजी क्षेत्र में भी कुछ कंपनियों में हिस्सेदारी घटी है। डेटा पैटर्न्स इंडिया और पेरास डिफेंस एंड स्पेस टेक्नोलॉजीज में एफआईआई की होल्डिंग में क्रमश: 138 और 115 बेसिस पॉइंट्स की कमी दर्ज हुई।

एफआईआई (FIIs defence stocks) की हिस्सेदारी कोचीन शिपयार्ड, मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल), डायनमैटिक टेक्नोलॉजीज, सिएंट डीएलएम और जेन टेक्नोलॉजीज में भी घटी है। ये सभी कंपनियां निफ्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स का हिस्सा हैं।

दूसरी ओर, एफआईआई (FIIs defence stocks) ने कुछ कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई भी है। मिश्र धातु निगम में 3 बेसिस पॉइंट, यूनिमेक एयरोस्पेस एंड मैन्युफैक्चरिंग में 5 बेसिस पॉइंट, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) में 10 बेसिस पॉइंट और बीईएमएल तथा सोलर इंडस्ट्रीज में 15 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी हुई। एमटीएआर टेक्नॉलजीज में एफआईआई की हिस्सेदारी में 164 बेसिस पॉइंट की सबसे तेज बढ़त दर्ज की गई।

कुछ ब्रोकरेज रिपोर्ट्स का कहना है कि कई डिफेंस कंपनियों (FIIs defence stocks) में पिछले महीनों में शेयर कीमतों में तेज उछाल आया था, जिससे वैल्यूएशन बढ़ गया था। इसी वजह से एफआईआई ने प्रॉफिट बुकिंग करते हुए अपनी होल्डिंग कम की। इसके अलावा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद अपेक्षित इमरजेंसी ऑर्डर्स धीमी गति से मिलने के कारण भी सेक्टर में उत्साह कम दिखाई दिया।

हालांकि, म्यूचुअल फंड्स ने इस सेक्टर में ठीक उलटा रुझान दिखाया। उन्होंने सितंबर तिमाही में 14 डिफेंस कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई। केवल कुछ कंपनियों जैसे पारस डिफेंस, कोचीन शिपयार्ड, मिश्र धातु निगम और बीईएमएल में म्यूचुअल फंड्स ने थोड़ी कमी की।

निफ्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स ने पिछले छह महीनों में मिलाजुला प्रदर्शन किया है। कुछ कंपनियों (FIIs defence stocks) ने तेज उछाल दिखाया है, जिनमें एमटीएआर टेक्नोलॉजीज ने 61 फीसदी की बढ़त दर्ज की। डायनमैटिक टेक्नोलॉजीज में 35 फीसदी और बीईएल तथा जीआरएसई में लगभग 17 फीसदी की तेजी देखी गई। बीईएमएल, भारत फोर्ज और एचएएल ने 10 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की, जबकि डेटा पैटर्न्स के शेयर लगभग 8 फीसदी बढ़े।

इसके विपरीत, कुछ कंपनियों (FIIs defence stocks) में तेज गिरावट भी आई। मझगांव डॉक में 21 फीसदी की गिरावट हुई, जबकि ज़ेन टेक्नोलॉजीज 19 फीसदी नीचे रहा। पेरास डिफेंस में 16 फीसदी और कोचन शिपयार्ड में 15 फीसदी गिरावट दर्ज की गई। बीडीएल, मिश्र धातु निगम, यूनिमेक एयरोस्पेस और सिएंट डीएलएम में भी कंपाउंड गिरावट देखी गई।

दूसरी तरफ, जुलाई–सितंबर की दूसरी तिमाही के नतीजे कंपनियों के लिए मिश्रित रहे। डेटा पैटर्न्स ने 238 फीसदी की रेवेन्यू ग्रोथ दिखाई। बीडीएल के रेवेन्यू में 114 फीसदी और पीएटी में 76 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई। जीआरएसई ने 45 फीसदी रेवेन्यू और 57 फीसदी मुनाफा दर्ज किया।

कई कंपनियों ने स्थिर प्रदर्शन दिखाया, जबकि कोचीन शिपयार्ड और डायनमैटिक टेक्नोलॉजीज ने कमजोर परिणाम दिए। कुछ कंपनियां जैसे एस्ट्रा माइक्रोवेव और जेन टेक्नोलॉजीज भी इस तिमाही में दबाव में रहीं।

रिपोर्ट बताती है कि सितंबर तिमाही में शेयर कीमतों (FIIs defence stocks) में गिरावट के बावजूद कई कंपनियों का वैल्यूएशन आगे की कमाई के अनुमान के मुकाबले अभी भी ऊंचा है। इसके बावजूद डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी निश सेगमेंट वाली कंपनियों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है, क्योंकि इनमें मजबूत ऑर्डर बुक और बेहतर कमाई की संभावना है।

निवेशकों को क्या करना चाहिए?

शेयर कीमतों में हाल की गिरावट के बावजूद, डिफेंस सेक्टर (FIIs defence stocks) के वैल्यूएशन अभी भी आगे की कमाई (फॉरवर्ड अर्निंग्स) के आधार पर ऊंचे माने जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस सेक्टर में प्रोजेक्ट पूरे होने में लंबा समय लगता है, इसलिए फिलहाल उनका नजरिया न्यूट्रल है।

वे बताते हैं कि जिन कंपनियों की कमाई का भविष्य साफ है और जिनका ऑर्डर बुक मजबूत है खासकर वे जो डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी खास तकनीक में काम करती हैं, वे निवेशकों का ध्यान लगातार आकर्षित कर रही हैं। इन कंपनियों की क्षमता अलग है और इनके प्रोजेक्ट पूरे होने की संभावना भी अधिक रहती है।

उन्होंने कहा कि वैल्यूएशन (FIIs defence stocks) भले ही ऊंचे हों, लेकिन यह बात डिफेंस सेक्टर की बुनियादी मजबूती को कम नहीं करती। सरकार द्वारा स्वदेशीकरण और रक्षा निर्यात बढ़ाने पर जोर देने से यह सेक्टर लगातार मजबूत हो रहा है। हाल के आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि नए ऑर्डर मिलने की रफ्तार बढ़ी है।

डिस्क्लेमर: विशेषज्ञों द्वारा दिए गए सुझाव, सिफारिशें, विचार और राय पूरी तरह उनके निजी हैं। इनका ‘रक्षा समाचार’ के विचारों से कोई संबंध नहीं है।

LCA Tejas ने Dubai Air Show 2025 में मचाया धमाल, भारत के स्वदेशी विमान पर विदेशी खरीदारों की नजर

LCA Tejas at Dubai Air Show 2025
Vice Chief of Air Staff (VCAS) Air Marshal Narmdeshwar Tiwari

Dubai Air Show 2025 में भारत के स्वदेशी फाइटर जेट LCA Tejas और भारतीय वायुसेना की सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम ने धूम मचा दी। यह एयर शो 17 से 21 नवंबर तक दुबई के अल मक्तूम एयरपोर्ट पर आयोजित किया जा रहा है।

LCA Tejas vs JF-17: दुबई एयरशो में फिर आमने-सामने होंगे भारत का तेजस और पाकिस्तान का जेएफ-17 थंडर, भारत ने लगाया बड़ा इंडिया पवेलियन

भारतीय वायुसेना के वाइस चीफ एयर मार्शल नरमदेश्वर तिवारी ने कहा कि तेजस को लेकर विदेशी राष्ट्रों की दिलचस्पी काफी अधिक है। उन्होंने बताया कि दुबई एयर शो में भारत की भागीदारी भारत और यूएई के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग को दिखाती है। तिवारी ने कहा, “हमने तेजस और सूर्यकिरण टीम को यूएई के अनुरोध पर भेजा है। हमारे उनके साथ रणनीतिक और सेवा दोनों स्तरों पर मजबूत संबंध हैं।”

एयर मार्शल तिवारी ने बताया कि तेजस पहले भी दुबई एयर शो में भाग ले चुका है और तब भी इसे शानदार प्रतिक्रिया मिली थी। उन्होंने कहा कि इस बार भी स्थानीय दर्शकों और विदेशी प्रतिनिधियों को तेजस की उड़ान देखने का मौका मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि तेजस ने पहले भी इस एयर शो में भाग लिया है और पिछली बार इसमें भारी रुचि देखी गई थी।

LCA Tejas ने Dubai Air Show

तेजस ने एयर शो में अपनी उड़ान से दर्शकों को प्रभावित किया। अपनी स्मोक विंडर्स के साथ तेजस ने शानदार हवाई करतब दिखाए। सूर्यकिरण टीम ने भी अपने शानदार करतबों से दर्शकों को रोमांचित कर दिया। दुबई एयर शो में भारत के हिस्सा लेने का मकसद सिर्फ प्रदर्शन नहीं बल्कि भारत की उभरती रक्षा-उद्योग क्षमता को दुनिया के सामने पेश करना है।

इस मंच पर भारत ने अपने पवेलियन के माध्यम से एचएएल, डीआरडीओ सहित अन्य कंपनियों की एआईआर डिफेंस टेक्निक्स का प्रदर्शन भी किया है। इन प्रदर्शनों में तेजस को मुख्य आकर्षण के रूप में पेश किया गया है।

दुबई एयर शो प्रत्येक अन्य वर्ष में आयोजित होने वाला एक प्रमुख एयर-स्पेस आयोजन है, जिसमें विश्व भर के निर्माता, एयर फोर्स और उद्योग-प्रतिनिधि शामिल होते हैं।

Ajeya Warrior-25: राजस्थान में भारतीय सेना की सिख रेजिमेंट और ब्रिटेन की रॉयल गोरखा राइफल्स करेंगे एक्सरसाइज, काउंटर-टेरर ट्रेनिंग पर फोकस

Ajeya Warrior-25
Ajeya Warrior-25: India–UK Joint Military Exercise Begins in Rajasthan

Ajeya Warrior-25: भारत और ब्रिटेन की सेनाओं के बीच बाइलेटरल मिलिट्री एक्सरसाइज अजेय वॉरियर-25 राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में शुरू हो गई है। यह एक्सरसाइज 17 से 30 नवंबर तक चलेगी और इसमें दोनों देशों के कुल 240 सैनिक हिस्सा ले रहे हैं। यह ‘अजेय वॉरियर’ का आठवां एडिशन है, जिसे 2011 से हर दो साल में आयोजित किया जा रहा है।

Chanakya Defence Dialogue: आर्मी चीफ बोले- 88 घंटे का ट्रेलर था ऑपरेशन सिंदूर, पाकिस्तान मौका देगा तो फिर सिखाएंगे सबक

भारतीय सेना की ओर से सिख रेजिमेंट के सैनिक भाग ले रहे हैं, जबकि ब्रिटेन की ओर से रॉयल गोरखा राइफल्स की यूनिट शामिल हो रही है। यह ट्रेनिंग संयुक्त राष्ट्र के चैप्टर-7 मंडेट के तहत आयोजित की जा रही है, जिसमें शांति बनाए रखने और काउंटर-टेररिज्म ऑपरेशन पर खास ध्यान दिया जाता है।

Ajeya Warrior-25: सेमी-अर्बन एरिया में काउंटर-टेरर ट्रेनिंग

इस एक्सरसाइज का मुख्य फोकस सेमी-अर्बन इलाके में काउंटर-टेररिज्म ऑपरेशन पर है। ट्रेनिंग के दौरान दोनों सेनाएं ऐसा माहौल तैयार करेंगी, जो वास्तविक ऑपरेशन जैसा होगा। इसमें जॉइंट मिशन प्लानिंग, इंटीग्रेटेड टैक्टिकल ड्रिल्स, सिमुलेशन-बेस्ड सिनैरियो और कंपनी-लेवल फील्ड ट्रेनिंग शामिल है।

भारतीय और ब्रिटिश सैनिक मिलकर ब्रिगेड स्तर पर मिशन प्लानिंग करेंगे। इसके बाद टैक्टिकल ड्रिल्स की जाएंगी, जिनमें इन्फैंट्री, आर्टिलरी और एयर सपोर्ट का एक साथ इस्तेमाल दिखाया जाएगा। इसी तरह सिमुलेशन तकनीक का उपयोग कर रीयल-टाइम फैसले लेने की क्षमता का अभ्यास भी कराया जाएगा।

कंपनी-लेवल ट्रेनिंग में सैनिक राजस्थान के रेतीले इलाकों ऊंचे तापमान के बीच अभ्यास करेंगे। यह ट्रेनिंग मुश्किल हालात से निपटने के लिए दोनों सेनाओं की तैयारी और तालमेल को मजबूत बनाएगी।

Ajeya Warrior-25: भारत और ब्रिटेन के बीच मजबूत सैन्य सहयोग

‘अजेय वॉरियर’ एक्सरसाइज भारत और ब्रिटेन के बीच रक्षा सहयोग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। पिछली सात एक्सरसाइज में दोनों देशों ने अर्बन वॉरफेयर, काउंटर-इंसर्जेंसी और हाई-इंटेंसिटी ट्रेनिंग पर काम किया था। 2025 का यह एडिशन दोनों सेनाओं के बीच प्रोफेशनल्स स्किल्स और आपसी समझ को और मजबूत करता है।

सेना के अधिकारियों के अनुसार, यह एक्सरसाइज दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही रक्षा साझेदारी का प्रमाण है। इसमें एक-दूसरे के अनुभव, तकनीक और टैक्टिक्स को साझा किया जाता है, जिससे दोनों सेनाओं की ऑपरेशनल क्षमता बढ़ती है।

Ajeya Warrior-25: महाजन फील्ड फायरिंग रेंज पर 14 दिन की ट्रेनिंग

महाजन फील्ड फायरिंग रेंज राजस्थान के रेगिस्तानी इलाके में स्थित है, जहां सैनिकों को चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में ट्रेनिंग दी जाती है। यह जगह उच्च तापमान, रेत और खुले भूभाग जैसी स्थितियों के लिए जानी जाती है। यहां चल रही एक्सरसाइज में सैनिकों को कई वास्तविक स्थितियों के मुताबिक अभ्यास कराया जाएगा, जैसे आतंकवादियों के ठिकानों का पता लगाना, छिपे हुए इलाकों की तलाश, मुश्किल इलाकों में मूवमेंट करना और संयुक्त कार्रवाई करना, जैसे टास्क शामिल हैं।

भारतीय सेना के अनुसार, इस तरह की जॉइंट एक्सरसाइज से दोनों देशों की सेनाओं में ऑपरेशनल सिनर्जी बढ़ती है और आपसी तालमेल मजबूत होता है।

Delhi Blast Bangladesh Link: बांग्लादेश से जुड़ रहीं दिल्ली लाल किला ब्लास्ट की कड़ियां, धमाके से पहले ढाका में हुई थी ये खास मीटिंग

Delhi Blast Bangladesh Link
Lashkar-e-Tayyaba (LeT) top commander Saifullah Saif

Delhi Blast Bangladesh Link: दिल्ली के लाल किला के पास 10 नवंबर को हुए धमाके की जांच अब एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की ओर इशारा कर रही है। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को मिले नए सुराग बताते हैं कि इस ब्लास्ट की कड़ियां सीधे पाकिस्तान और बांग्लादेश से जुड़ी हैं।

जांच में सामने आया है कि धमाके से ठीक पहले ढाका के पॉश इलाके बनानी में एक गुप्त मीटिंग हुई थी, जिसमें पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा का टॉप कमांडर सैफुल्लाह सैफ वर्चुअल रूप से शामिल हुआ था।

Sheikh Hasina slams ICT verdict: शेख हसीना ने आईसीटी के फैसले को बताया साजिश, कहा- लोकतंत्र खत्म करने की कोशिश

इस मीटिंग में मौजूद सात लोगों में कुछ बांग्लादेश सरकार के अधिकारी, प्रतिबंधित संगठनों के नेता और एक्सप्लोसिव एक्सपर्ट्स शामिल थे। यह मीटिंग अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में हुई थी और भारतीय एजेंसियों के अनुसार, इसी बैठक में भारत में बड़े आतंकी हमले की योजना बनाई गई थी।

Delhi Blast Bangladesh Link: ढाका मीटिंग से निकला बड़ा कनेक्शन

जांच से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली धमाके की कड़ी पाकिस्तान और बांग्लादेश दोनों से जुड़ रही है। एजेंसियों का ध्यान उस अहम बैठक पर है, जिसमें लश्कर-ए-तैयबा के टॉप कमांडर सैफुल्लाह सैफ ने बांग्लादेश के अधिकारियों और कट्टरपंथी समूहों से जुड़े लोगों के साथ बातचीत की थी।

सूत्रों ने बताया कि सैफ ने इस गुप्त बैठक में भारत में ‘बड़े पैमाने पर हमले’ की तैयारी पर विस्तार से चर्चा की थी। सैफ ने इस दौरान पाकिस्तान से मिलने वाले सपोर्ट और भारत में सक्रिय स्लीपर सेल को निर्देश देने की बात कही थी।

और सबसे चिंताजनक बात यह रही कि इस बैठक में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के दो अधिकारी होम अफेयर्स सेक्रेटरी डॉ. नसीरुल घानी और ढाका नॉर्थ कॉर्पोरेशन के सीईओ मोहम्मद आजाज भी मौजूद थे।

Delhi Blast Bangladesh Link: कौन-कौन मौजूद था बैठक में

जानकारी के अनुसार, अक्टूबर के आखिरी हफ्ते में ढाका के अपस्केल इलाके बनानी में एक गुप्त मीटिंग हुई। सैफ पाकिस्तान से वर्चुअली जुड़ा था, लेकिन सात लोग मीटिंग में ढाका में मौजूद थे। इनमें प्रतिबंधित इस्लामिक समूह हिज्ब-उल-तहरीर का ढाका प्रमुख जुबैर अहमद चौधरी, सैफ का दाहिना हाथ और मरकजी जमीयत-अहले-हदीस के जनरल सेक्रेट्री इब्तिसाम इलाही जहीर, बांग्लादेश के इंटरिम होम अफेयर्स सेक्रेटरी डॉ. नासिरुल गनी, ढाका नॉर्थ कॉर्पोरेशन के सीईओ और हिज्ब-उल-तहरीर कोऑर्डिनेटर मोहम्मद एजाज, और अंसारुल्लाह बांग्ला टीम के दो सदस्य हाफिज शुजादुल्लाह, हाफिज अली फजुल शामिल थे। मीटिंग में एक एक्सप्लोसिव एक्सपर्ट सुमन अहमद भी शामिल था।

इब्तिसाम एलाही अक्टूबर 2024 में जाकिर नाइक से भी मिला था, और बांग्लादेश के बॉर्डर इलाकों में उसकी गतिविधियां भारतीय एजेंसियों की नजर में पहले से थीं।

ब्लास्ट से पहले भारत में घुसे थे आतंकी

जांच में सामने आया है कि इस बैठक में सैफ ने भारत में बड़े आतंकी हमले करने की सीधी “ऑपरेशनल डायरेक्शन” दी थी। ढाका बैठक के बाद एक टीम, जिसमें विस्फोटक विशेषज्ञ भी शामिल था, मुरशिदाबाद के रास्ते भारत में दाखिल हुई। यह घुसपैठ बांग्लादेश के राजशाही इलाके से हुई, जहां से आतंकी नियमित रूप से भारत में आते-जाते रहे हैं।

मुरशिदाबाद में इन्हें इक्तियार नाम के एक बांग्लादेशी नागरिक ने सेफ हाउस दिया। इक्तियार अपने देश में एक पुलिस अधिकारी की हत्या का आरोपी है और लंबे समय से भारत में छिपा है। उसका सेफ हाउस अंसारुल्लाह बांग्ला टीम के सदस्यों के लिए पहले भी इस्तेमाल हो चुका है।

पाकिस्तान से आया था कुछ विस्फोटक

एजेंसियों को यह भी जानकारी मिली है कि पाकिस्तान से कुछ खास प्रकार के विस्फोटक पश्चिम बंगाल के रास्ते भारत पहुंचे थे। इन्हें बाद में दिल्ली ले जाया गया। जांच में यह संदेह गहराता जा रहा है कि रेड फोर्ट के पास हुआ धमाका इसी नेटवर्क द्वारा भेजे गए विस्फोटकों से हुआ।

सैफ का उकसाने वाला भाषण

इस बीच, धमाके से 10 दिन पहले 30 अक्टूबर को पाकिस्तान के खैरपुर तमीवाली में एक सभा के दौरान सैफ ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि “हाफिज सईद खाली नहीं बैठे हैं… उनका दाहिना हाथ बांग्लादेश में है… भारत पर हमला करने की तैयारी वहीं से चल रही है… ऑपरेशन सिंदूर का जवाब दिया जाएगा…”। एजेंसियों का मानना है कि यह बयान दिल्ली धमाके से जुड़े इरादे को साफ करता है।

हालांकि बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के विदेशी सलाहकार मोहम्मद तौहीद हुसैन ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि “बांग्लादेश की जमीन भारत के खिलाफ इस्तेमाल नहीं हो रही है।”

लेकिन भारतीय एजेंसियां इसे गंभीरता से देख रही हैं, क्योंकि मीटिंग में दो सरकारी अधिकारियों की मौजूदगी कई सवाल खड़े करती है। दिल्ली धमाके के बाद बढ़ी जांच अब एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की ओर इशारा कर रही है, जिसकी कड़ियां पाकिस्तान, बांग्लादेश और भारत के कई राज्यों में फैलती दिख रही हैं।