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राफेल डील पर बड़ा फैसला; डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड ने दी 114 जेट्स की खरीद को हरी झंडी

Rafale ITAR impact on India

114 Rafale fighter jets: रक्षा मंत्रालय के डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड ने फ्रांस की कंपनी डसॉल्ट एविएशन से 114 राफेल फाइटर जेट खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस बोर्ड की अध्यक्षता रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने की। यह मंजूरी मिलने के बाद अब यह प्रस्ताव रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल के पास जाएगा। इसके बाद अंतिम फैसला कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी लेगी, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करते हैं।

सूत्रों के अनुसार, भारत और फ्रांस के बीच इस सौदे को फरवरी में अंतिम रूप दिया जा सकता है। इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच बैठक प्रस्तावित है, जिसमें इस डील पर मुहर लग सकती है। (114 Rafale fighter jets)

114 Rafale fighter jets: भारतीय वायुसेना की जरूरतों से जुड़ा है 114 राफेल का फैसला

भारतीय वायुसेना लंबे समय से अपने स्क्वॉड्रन की संख्या बढ़ाने की मांग कर रही है। मौजूदा समय में कई पुराने लड़ाकू विमान धीरे-धीरे सेवा से बाहर हो रहे हैं, जिससे वायुसेना की ताकत पर असर पड़ा है। इसी को ध्यान में रखते हुए सितंबर 2025 में वायुसेना ने रक्षा मंत्रालय को औपचारिक प्रस्ताव भेजकर 114 नए राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की मांग की थी।

राफेल को चुनने के पीछे कई व्यावहारिक वजहें बताई जा रही हैं। भारतीय वायुसेना पहले से ही 36 राफेल जेट ऑपरेट कर रही है, जबकि भारतीय नौसेना ने भी 26 मरीन वेरिएंट राफेल विमानों का ऑर्डर दिया है। एक ही प्लेटफॉर्म की संख्या बढ़ने से ट्रेनिंग, मेंटेनेंस और स्पेयर पार्ट्स की लागत कम होगी। (114 Rafale fighter jets)

अंबाला एयरबेस में पहले से मौजूद है राफेल इंफ्रास्ट्रक्चर

भारतीय वायुसेना के अंबाला एयरबेस पर राफेल के लिए फ्लाइट ट्रेनिंग और मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल (एमआरओ) की सुविधा पहले से चालू है। वायुसेना के पास जरूरी स्पेस, टूलिंग, स्पेयर पार्ट्स और ट्रेंड मैनपावर मौजूद है। इसी वजह से वायुसेना तुरंत दो स्क्वॉड्रन, यानी करीब 36 से 38 राफेल विमानों को शामिल करने की स्थिति में है। (114 Rafale fighter jets)

‘मेक इन इंडिया’ के तहत होगी खरीद

इस बार राफेल की खरीद सिर्फ सीधे आयात तक सीमित नहीं रहेगी। यह सौदा मेक इन इंडिया योजना के तहत किया जाएगा। इसके तहत दसॉ एविएशन किसी भारतीय कंपनी के साथ साझेदारी करेगी और भारत में ही विमानों का निर्माण किया जाएगा।

हाल ही में दसॉ एविएशन ने अपनी भारतीय जॉइंट वेंचर कंपनी दसॉ रिलायंस एयरोस्पेस लिमिटेड (डीआरएएल) में अपनी हिस्सेदारी 49 फीसदी से बढ़ाकर 51 फीसदी कर ली है। इसके बाद यह कंपनी फ्रांसीसी कंपनी की मेजॉरिटी ओनड सब्सिडियरी बन गई है। इस जॉइंट वेंचर में अनिल अंबानी की रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर भी साझेदार है। (114 Rafale fighter jets)

भारतीय हथियारों से लैस होंगे सभी 114 राफेल

इस सौदे की एक अहम शर्त यह है कि सभी 114 राफेल विमानों में भारतीय हथियार, मिसाइल और एम्युनिशन लगाए जाएंगे। इसके साथ ही दसॉ एविएशन को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि राफेल जेट्स भारतीय रडार और सेंसर सिस्टम से डिजिटल रूप से जुड़े हों।

इसके लिए सुरक्षित डेटा लिंक सिस्टम उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे लड़ाकू विमान जमीन पर मौजूद कंट्रोल सिस्टम को रियल टाइम इमेजरी और जानकारी भेज सकें। इससे वायुसेना की ऑपरेशनल क्षमता और हालात पर तुरंत प्रतिक्रिया देने की ताकत बढ़ेगी। (114 Rafale fighter jets)

टेक्नोलॉजी ट्रांसफर भी होगा सौदे का हिस्सा

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इस डील में ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी (टीओटी) भी शामिल होगा। इसके तहत राफेल के एयरफ्रेम यानी ढांचे के निर्माण की तकनीक भारत को दी जाएगी। इसके अलावा इंजन बनाने वाली कंपनी साफरान और एवियोनिक्स सिस्टम बनाने वाली कंपनी थेल्स भी इस टेक्नोलॉजी ट्रांसफर प्रक्रिया का हिस्सा होंगी।

जब एयरफ्रेम, इंजन और एवियोनिक्स से जुड़ी टेक्नोलॉजी भारत को मिल जाएगी, तो राफेल में स्वदेशी कंटेंट की हिस्सेदारी करीब 55 से 60 फीसदी तक पहुंच सकती है। इससे देश के डिफेंस इंडस्ट्रियल बेस को बड़ा फायदा मिलेगा। (114 Rafale fighter jets)

एएमसीए और तेजस मार्क-2 पर कोई असर नहीं

रक्षा सूत्रों ने साफ किया है कि 114 राफेल की खरीद से भारत की स्वदेशी फाइटर जेट योजनाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा। एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) और लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस मार्क-2 दोनों की योजना, बजट और टाइमलाइन अलग से तय की गई है।

एएमसीए भारत का फिफ्थ जेनरेशन स्टेल्थ फाइटर प्रोजेक्ट है, जबकि तेजस मार्क-2 मौजूदा तेजस मार्क-1ए का एडवांस्ड वर्जन होगा। रक्षा मंत्रालय पहले ही हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को 180 तेजस मार्क-1ए विमानों का ऑर्डर दे चुका है। (114 Rafale fighter jets)

114 राफेल विमानों की खरीद भारतीय वायुसेना की उस बहुस्तरीय रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत पुराने विमानों की जगह नए और आधुनिक फाइटर जेट शामिल किए जा रहे हैं। एक तरफ स्वदेशी प्लेटफॉर्म विकसित किए जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ तुरंत जरूरतों को पूरा करने के लिए आधुनिक विदेशी विमानों को भी शामिल किया जा रहा है।

डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड की मंजूरी के बाद अब यह सौदा तेजी से आगे बढ़ने की उम्मीद है और आने वाले दिनों में रक्षा मंत्री और कैबिनेट स्तर पर इस पर फैसला लिया जाएगा। (114 Rafale fighter jets)

भारतीय सेना को मिला फायर-फाइटिंग रोबोट, आग के खतरे से सुरक्षित रहेंगे सैनिक

Indian Army, Fire Fighting Robot

Indian Army Fire Fighting Robot: भारतीय सेना ने सैनिकों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए पहली बार एक फायर-फाइटिंग रोबोट की खरीद के लिए करार किया है। यह रोबोट आग लगने जैसी खतरनाक परिस्थितियों में बिना किसी सैनिक को जोखिम में डाले काम करेगा। यह करार इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सीलेंस यानी आईडेक्स कार्यक्रम के तहत किया गया है।

यह समझौता 13 जनवरी को भारतीय सेना के कैपेबिलिटी डेवलपमेंट डायरेक्टोरेट में देश की स्टार्ट-अप कंपनी स्वदेशी एम्प्रेसा प्राइवेट लिमिटेड के साथ किया गया। इस पहल को आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से जोड़कर देखा जा रहा है। (Indian Army Fire Fighting Robot)

Indian Army Fire Fighting Robot: पहली बार सेना के लिए खरीदा गया फायर-फाइटिंग रोबोट

यह फायर-फाइटिंग रोबोट पहले भारतीय नौसेना के लिए आईडेक्स फ्रेमवर्क के तहत डेवलप किया गया था। अब सेना ने आईडेक्स के नियमों के तहत एक प्रावधान का इस्तेमाल करते हुए इसे अपने लिए खरीदा है। इसका मतलब यह है कि एक सेवा के लिए बनी तकनीक को दूसरी सेवा भी अपना सकती है। इससे समय और संसाधनों दोनों की बचत होगी।

सेना ने इस रोबोट को सिंगल स्टेज कंपोजिट ट्रायल के आधार पर चुना है। ट्रायल में इसके प्रदर्शन को सफल पाया गया, जिसके बाद इसे खरीदने का फैसला लिया गया। (Indian Army Fire Fighting Robot)

खतरनाक हालात में सैनिकों की जान बचाएगा रोबोट

फायर-फाइटिंग रोबोट एक कॉम्पैक्ट और वर्सेटाइल अनमैन्ड ग्राउंड व्हीकल है। इसे खास तौर पर ऐसे इलाकों में काम करने के लिए बनाया गया है, जहां आग बहुत तेज हो और इंसानों का जाना बेहद खतरनाक हो।

सेना के कई ठिकानों, गोला-बारूद भंडार, ईंधन स्टोरेज और तकनीकी प्रतिष्ठानों में आग लगने का खतरा हमेशा बना रहता है। ऐसे हालात में यह रोबोट आग बुझाने का काम सुरक्षित दूरी से करेगा। इससे फायर-फाइटर्स को सीधे आग के सामने जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और जान का जोखिम काफी कम हो जाएगा। (Indian Army Fire Fighting Robot)

रिमोट कंट्रोल से चलेगा रोबोट

यह रोबोट रिमोट कंट्रोल के जरिये ऑपरेट किया जाता है। फायर-फाइटर सुरक्षित जगह से इसे नियंत्रित कर सकते हैं। रोबोट तेज गर्मी, धुएं और कम विजिबिलिटी में भी काम कर सकता है। यह आग की ओर जाकर पानी या फोम का छिड़काव कर सकता है और हालात को काबू में करने में मदद करता है।

सेना के मुताबिक, यह तकनीक क्रिटिकल रिस्पॉन्स और इमरजेंसी सिचुएशन में बेहद उपयोगी साबित होगी। (Indian Army Fire Fighting Robot)

डिफेंस स्टार्ट-अप्स को मिल रहा बढ़ावा

इस करार से भारत के डिफेंस स्टार्ट-अप इकोसिस्टम को भी मजबूती मिली है। स्वदेशी एम्प्रेसा जैसी कंपनियों को सेना से सीधा ऑर्डर मिलना यह दिखाता है कि अब भारतीय सेना घरेलू इनोवेशन पर भरोसा कर रही है।

आईडेक्स कार्यक्रम के तहत सशस्त्र बलों और स्टार्ट-अप्स के बीच सीधा संपर्क बनाया गया है। इससे नई सोच, नई तकनीक और जमीनी जरूरतों के हिसाब से समाधान सामने आ रहे हैं। (Indian Army Fire Fighting Robot)

आईडेक्स बना सेना और इनोवेशन के बीच पुल

आईडेक्स डिफेंस इनोवेशन ऑर्गनाइजेशन के तहत चलता है। यह अब तेजी से सशस्त्र बलों और इनोवेटर्स को जोड़ने वाला एक मजबूत प्लेटफॉर्म बन गया है। इस कार्यक्रम को स्टार्ट-अप्स के बीच अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है।

एक अधिकारी के अनुसार, भारतीय सेना अब तक डिलीवर किए गए आईडेक्स प्रोजेक्ट्स पर स्पाइरल डेवलपमेंट के तरीके से आगे बढ़ रही है। इसके अलावा, करीब 22 आईडेक्स प्रोजेक्ट्स ऐसे हैं, जो प्रोटोटाइप पूरा होने के बाद ट्रायल के चरण में पहुंच चुके हैं। (Indian Army Fire Fighting Robot)

गणतंत्र दिवस परेड 2026 में VIP एन्क्लोजर खत्म! नदियों के नाम से पहचानी जाएंगी दर्शक दीर्घाएं

Republic Day Parade 2026

Republic Day Parade 2026: गणतंत्र दिवस परेड 2026 इस बार कई मायनों में ऐतिहासिक होने जा रही है। देश की आजादी के बाद पहली बार गणतंत्र दिवस परेड के दौरान कर्तव्य पथ पर बने दर्शक दीर्घाओं यानी व्यूइंग गैलरीज को सिर्फ नंबरों से नहीं, बल्कि भारत की प्रमुख नदियों के नाम से पहचाना जाएगा।

अब तक गणतंत्र दिवस परेड में दर्शकों के बैठने की जगहों को ब्लॉक नंबर या वीआईपी एन्क्लोजर के नाम से जाना जाता था। लेकिन 2026 में इस परंपरा को तोड़ते हुए सरकार ने इन सभी दीर्घाओं को भारत की जीवनरेखाओं कही जाने वाली नदियों के नाम पर रखा है। इसका मकसद देश की सांस्कृतिक विरासत, सभ्यता और आम नागरिकों से जुड़े प्रतीकों को सामने लाना है। (Republic Day Parade 2026)

Republic Day Parade 2026: नदियों के नाम पर रखी गईं दर्शक दीर्घाएं

सूत्रों के मुताबिक, कर्तव्य पथ पर बनी दर्शक दीर्घाओं के नाम अब यमुना, ब्यास, ब्रह्मपुत्र, गंगा, तीस्ता, चंबल, सतलुज, सोन, रावी, वैगई, पेरियार, गंडक, पेनार, नर्मदा, घाघरा, गोदावरी, कृष्णा, महानदी, सिंधु, कोसी, झेलम और कावेरी जैसे नामों पर रखे गए हैं। ये नदियां देश के अलग-अलग हिस्सों से होकर बहती हैं और सदियों से वहां के लोगों की जीवनरेखा बनी हुई हैं।

सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इन नदियों ने न सिर्फ भारत की भौगोलिक संरचना को आकार दिया है, बल्कि देश की सभ्यता, संस्कृति, कृषि, व्यापार और अर्थव्यवस्था को भी मजबूत आधार दिया है। इसी सोच के तहत गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर नदियों को सम्मान देने का फैसला लिया गया है। (Republic Day Parade 2026)

राष्ट्रपति के पास गंगा और घाघरा गैलरी

कर्तव्य पथ पर जिस स्थान से राष्ट्रपति और भारतीय सेनाओं की सुप्रीम कमांडर द्रौपदी मुर्मू परेड की सलामी लेंगी, उसके पास बनी दर्शक दीर्घाओं को गंगा और घाघरा नाम दिया गया है। गंगा को भारत में आस्था और संस्कृति की सबसे पवित्र नदी माना जाता है, जबकि घाघरा उत्तर भारत के बड़े हिस्से को जीवन देती है। (Republic Day Parade 2026)

ज्यादा दर्शकों के लिए बड़ी गैलरी

सूत्रों के मुताबिक, सभी दीर्घाएं एक जैसी नहीं हैं। तीस्ता और चंबल नाम की दर्शक दीर्घाएं आकार में बड़ी हैं, ताकि ज्यादा संख्या में लोग परेड को देख सकें। इससे आम नागरिकों को बेहतर सुविधा मिलेगी और गणतंत्र दिवस को जनभागीदारी का उत्सव बनाने की सोच को बल मिलेगा।

पहले इन जगहों को सिर्फ “ब्लॉक” या “वीआईपी एन्क्लोजर” कहा जाता था, जिससे आम और खास के बीच फर्क साफ दिखाई देता था। अब नदियों के नाम रखने से यह दूरी खत्म करने की कोशिश की गई है। (Republic Day Parade 2026)

वीआईपी संस्कृति खत्म करने का संदेश

रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने साफ शब्दों में कहा है कि इस बार गणतंत्र दिवस समारोह के जरिए वीआईपी संस्कृति को समाप्त करने का संदेश दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि न सिर्फ परेड के दौरान दर्शक दीर्घाओं को नदियों के नाम पर रखा गया है, बल्कि बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी के दौरान एन्क्लोजर्स को भारतीय संगीत वाद्य यंत्रों के नाम पर रखा जाएगा।

उनका कहना है कि गणतंत्र दिवस सिर्फ किसी खास वर्ग का नहीं, बल्कि पूरे देश का पर्व है, और इसे आम नागरिकों से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। (Republic Day Parade 2026)

परेड की अवधि 90 मिनट

रक्षा सचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि परेड की अवधि में कोई बदलाव नहीं किया गया है। गणतंत्र दिवस परेड करीब 90 मिनट की ही होगी, जैसा कि पिछले वर्षों में होती रही है। हालांकि इस दौरान दर्शकों को नए अनुभव और नए दृश्य देखने को मिलेंगे।

2,000 कलाकार करेंगे प्रस्तुति

इस बार गणतंत्र दिवस परेड में करीब 2,000 कलाकार हिस्सा लेंगे। ये कलाकार देश के अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों से आए होंगे और कर्तव्य पथ पर अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। इनके जरिए भारत की विविध संस्कृति, लोक परंपराएं और कलात्मक विरासत को दिखाया जाएगा।

पिछले साल यानी 2025 में गणतंत्र दिवस समारोह में करीब 5,000 कलाकारों ने हिस्सा लिया था, जिसे इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी दर्ज किया गया था। इस बार संख्या थोड़ी कम जरूर है, लेकिन प्रस्तुति का स्तर और विविधता बनाए रखने पर जोर दिया गया है। (Republic Day Parade 2026)

वीर गाथा पुरस्कार विजेता बच्चे भी होंगे शामिल

पिछले वर्षों की तरह इस बार भी सरकार ने विशेष मेहमानों और वीर गाथा पुरस्कार से सम्मानित बच्चों को गणतंत्र दिवस परेड देखने के लिए आमंत्रित किया है। ये बच्चे देश के अलग-अलग हिस्सों से आते हैं और इन्होंने छोटी उम्र में साहस और बहादुरी की मिसाल पेश की है।

77वें गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि

भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह के लिए इस बार यूरोपीय संघ के दो शीर्ष नेताओं को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। इनमें यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष एंतोनियो लुईस सांतोस दा कोस्टा और यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डर लेयेन शामिल हैं।

भारत और यूरोपीय संघ के बीच 2004 से रणनीतिक साझेदारी है। दोनों पक्षों के बीच सहयोग समय के साथ और मजबूत हुआ है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, फरवरी 2025 में यूरोपीय संघ के कमिश्नरों के भारत दौरे के बाद द्विपक्षीय संबंधों को नई गति मिली है। (Republic Day Parade 2026)

वंदे मातरम के 150 साल पर थीम

इस साल गणतंत्र दिवस समारोह की थीम “वंदे मातरम के 150 वर्ष” रखी गई है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने बताया कि इस थीम को पूरे आयोजन में खास तौर पर दिखाया जाएगा। परेड के समापन पर वंदे मातरम बैनर के साथ गुब्बारे छोड़े जाएंगे।

गणतंत्र दिवस के निमंत्रण पत्र और टिकट भी इसी देशभक्ति थीम पर आधारित होंगे। इसके अलावा, कर्तव्य पथ पर 30 झांकियां निकाली जाएंगी, जो भारत की सांस्कृतिक विविधता, इतिहास और परंपराओं को दर्शाएंगी। (Republic Day Parade 2026)

No Indian Weapons, No Deal: Inside India’s Tough New Conditions for 114 Rafale Fighters

114 Rafale Fighters

114 Rafale Fighters: India has drawn clear red lines for French aircraft manufacturer Dassault Aviation as negotiations move forward for the proposed acquisition and domestic production of 114 Rafale fighter jets.

According to highly places sources Government has communicated a set of non-negotiable clauses on technology transfer and combat integration conditions that will shape not only the cost and timelines of the programme, but also India’s long-term ability to operate the jets independently in a networked battlefield.

At the centre of India’s demands is a push to ensure the Rafale fleet is not merely assembled in India, but genuinely adapted for Indian operational requirements, including indigenous weapons, missiles and command-and-control systems.

114 Rafale Fighters: Two key non-negotiables: Indian weapons and secure data integration

Sources indicate that the most critical condition is that Indian-made weapons, missiles and ammunition must be integrated on all 114 jets. This would mean the Rafale’s onboard mission computer and weapons management system must be compatible with a range of Indian platforms and munitions, enabling seamless employment without depending on foreign approvals at every stage of modifications or upgrades.

Equally important is India’s insistence on secure data links that allow real-time connectivity between the Rafale and India’s wider air defence ecosystem. The idea is to digitally integrate the fighter with Indian radars and sensors, so imagery and operational data can be shared instantly with ground-based controllers. Such networking is increasingly viewed as decisive in modern air warfare, allowing pilots to receive updated threat information, coordinate engagements and operate as part of a multi-layered combat grid.

Though these conditions may appear routine on paper, they require deep technical access. Integration of weapons and secure communications typically demands changes in software architecture and coding of the fighter’s mission systems. This is where India is pushing Dassault to go beyond standard delivery terms.

Transfer of technology: airframe, engines and avionics

Beyond operational integration, India is seeking a significant transfer of technology (ToT) package for manufacturing. Sources said the ToT will include the airframe, and will involve Dassault’s major suppliers such as Safran, which makes the Rafale’s engines, and Thales, which provides key avionics and electronics.

If the ToT is executed fully, indigenous content in the aircraft could rise to an estimated 55–60 per cent over time. That would mark a major leap from basic assembly work, and aligns with India’s larger Make in India and defence manufacturing ambitions, building an ecosystem capable of producing and sustaining high-end fighter jets domestically.

Newer Rafale versions on the table: F4 and future F5

India’s current Rafale fleet of 36 jets, ordered in 2015, belongs to the F3R configuration-the same version flown by the French Air and Space Force. However, the Rafale itself has evolved significantly since then.

Dassault has introduced the upgraded F4 standard, and India is understood to be seeking a mix of the F4 and the upcoming F5 version. The upgrade path is expected to bring improvements across multiple areas: next-generation AESA radar with longer detection ranges, enhanced resistance to electronic warfare and more advanced self-protection suites capable of countering emerging threats.

The new standards are also expected to feature improved long-range detection and identification capabilities, supported by longer-range missiles. Enhanced satellite communications and AI-enabled decision-support tools for pilots and improving situational awareness and response time are also part of the envisioned upgrade package.

Deal size and manufacturing route

The Ministry of Defence is expected to move towards finalising the deal, valued at around $8 billion, aimed at bridging India’s widening air power gap. The jets are planned to be delivered under the Make in India framework, with Dassault partnering an Indian entity for domestic production.

A key development in this context came last year when Dassault increased its stake in Dassault Reliance Aerospace Limited (DRAL) from 49 per cent to 51 per cent, turning it into a majority-owned subsidiary. DRAL’s Indian partner is Reliance Infrastructure, led by Anil Ambani.

Why the Rafale expansion matters to the IAF

The Indian Air Force currently operates 36 Rafales, while the Indian Navy has ordered 26 Rafale-M jets for carrier operations. Expanding the Rafale numbers could yield cost efficiencies in training, spares and maintenance.

India already has a Rafale training and maintenance infrastructure at the Ambala air base, and Safran has announced an engine MRO hub in Hyderabad, strengthening in-country sustainment capabilities.

The urgency is real. The IAF’s squadron strength has fallen to 29, among the lowest levels in decades at a time when India faces a complex two-front security environment.

For New Delhi, the 114-jet programme is no longer simply a procurement plan, it is increasingly being framed as a strategic requirement to restore credible air combat capacity and ensure technological autonomy in the years ahead.

रक्षा मंत्री बोले- ऑपरेशन सिंदूर भारत के साहस और संयम का प्रतीक, आतंकवाद खत्म होने तक जारी रहेंगे शांति के प्रयास

Indian Army Day 2026

Indian Army Day 2026: जयपुर में 15 जनवरी को आयोजित 78वें भारतीय सेना दिवस समारोह के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की ओर से दिया गया एक संतुलित सैन्य जवाब था, जिसे इतिहास में भारत के साहस, ताकत, संयम और राष्ट्रीय चरित्र के प्रतीक के रूप में याद किया जाएगा।

रक्षा मंत्री ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ की गई यह कार्रवाई पूरी योजना, गहन आकलन और मानवीय मूल्यों का ध्यान रखते हुए की गई। उन्होंने भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस, अटूट समर्पण और युद्ध क्षेत्र में बदलती परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालने की क्षमता की खुलकर सराहना की। (Indian Army Day 2026)

Indian Army Day 2026: आतंकवाद के खिलाफ भारत का स्पष्ट संदेश

राजनाथ सिंह ने कहा कि आतंकवादी कभी यह कल्पना भी नहीं कर सकते थे कि भारतीय सेनाएं इतनी तेजी और बहादुरी के साथ जवाब देंगी। उन्होंने कहा कि सैनिकों की बहादुरी और तत्परता ने दुश्मन को किसी भी तरह की शरारत करने से रोक दिया। रक्षा मंत्री के अनुसार हालात कठिन थे और कई स्तरों पर दबाव भी था, लेकिन जिस धैर्य, एकजुटता और संयम के साथ ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया गया, वह अभूतपूर्व और सराहनीय है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और भारत के शांति प्रयास तब तक जारी रहेंगे, जब तक आतंकवादी विचारधारा का पूरी तरह सफाया नहीं हो जाता। (Indian Army Day 2026)

स्वदेशी हथियारों से बढ़ी आत्मनिर्भरता की ताकत

रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान स्वदेशी हथियारों के इस्तेमाल को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक मजबूत उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता केवल गर्व का विषय नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा के लिए एक आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सशस्त्र बल इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं और देश ने आत्मनिर्भरता के रास्ते पर काफी दूरी तय कर ली है।

Indian Army Day 2026

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार भारतीय सशस्त्र बलों को भारत की जरूरतों के अनुसार तैयार किए गए अत्याधुनिक और स्वदेशी हथियारों तथा प्लेटफॉर्म से लैस कर रही है। रक्षा मंत्री ने कहा कि रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में देश ने बड़ी छलांग लगाई है। वर्ष 2014 में जहां घरेलू रक्षा उत्पादन करीब 46 हजार करोड़ रुपये था, वहीं आज यह बढ़कर रिकॉर्ड 1.51 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसी तरह रक्षा निर्यात, जो 2014 में एक हजार करोड़ रुपये से भी कम था, आज करीब 24 हजार करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच चुका है। (Indian Army Day 2026)

सेनाओं के बीच मजबूत तालमेल जरूरी

राजनाथ सिंह ने कहा कि आज युद्ध के आयाम तेजी से बदल रहे हैं। जमीन, हवा, समुद्र, साइबर और अंतरिक्ष जैसे नए क्षेत्रों में चुनौतियां बढ़ रही हैं। ऐसे में सेनाओं के बीच मजबूत तालमेल और आपसी समन्वय बेहद जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा कि इंटर-सर्विस लिंकज को और मजबूत करने की जरूरत है ताकि भविष्य की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।

उन्होंने भारतीय सेना की उस सोच की भी सराहना की, जिसके तहत एक सैनिक को शारीरिक और मानसिक रूप से फिट होने के साथ-साथ तकनीकी रूप से अपडेट रहना जरूरी माना गया है। रक्षा मंत्री ने कहा कि दुनिया एक ऐसे दौर से गुजर रही है, जहां पुराने स्थापित विचारों को लगातार चुनौती मिल रही है। ऐसे समय में सशस्त्र बलों को और मजबूत बनाना सरकार की प्राथमिकता है। (Indian Army Day 2026)

भारतीय सेना देश की विविधता में एकता की मिसाल

रक्षा मंत्री ने भारतीय सेना को अदम्य साहस, अटूट समर्पण और बेमिसाल बलिदान का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना देश की विविधता में एकता की सबसे बड़ी मिसाल है, जहां अलग-अलग संस्कृतियों और पृष्ठभूमि से आए युवा एक ही लक्ष्य के लिए एकजुट होते हैं।

उन्होंने कहा कि भारतीय सेना केवल एक सैन्य शक्ति नहीं है, बल्कि राष्ट्र निर्माण का एक मजबूत स्तंभ भी है। दुनिया की कई सेनाएं समाज से अलग होकर काम करती हैं, लेकिन भारत में सेना और आम नागरिक एक-दूसरे के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलते हैं। उन्होंने कहा कि जनता का भरोसा ही सेना की सबसे बड़ी ताकत है और यही भरोसे का रिश्ता राष्ट्रीय सुरक्षा की नींव है। (Indian Army Day 2026)

वैश्विक शांति में भारतीय सैनिकों की भूमिका

राजनाथ सिंह ने संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में भारतीय सैनिकों के योगदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि भारतीय सैनिकों ने केवल शांति बनाए रखने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि अलग-अलग देशों में मेडिकल सहायता, बुनियादी ढांचे के विकास और मानवीय मदद में भी अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना दुनिया के लिए शांति का संदेशवाहक बनकर उभरी है, जिससे भारत की ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की सोच और मजबूत हुई है। (Indian Army Day 2026)

जयपुर में सेना दिवस का भव्य आयोजन

रक्षा मंत्री ने जयपुर मिलिट्री स्टेशन में सैनिकों से संवाद किया और सवाई मानसिंह स्टेडियम में आयोजित शौर्य संध्या कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम में सेना की परंपरा, वीरता और ऑपरेशनल तैयारी का भव्य प्रदर्शन किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत पैरामोटर शो और गुब्बारे छोड़ने के साथ हुई। कलारीपयट्टू और मल्लखंब जैसे मार्शल आर्ट और पारंपरिक खेलों ने भारतीय सेना की शारीरिक क्षमता और समृद्ध सैन्य विरासत को दर्शाया। नेपाली सेना के बैंड की प्रस्तुति भी आकर्षण का केंद्र रही।

शाम का समापन ऑपरेशन सिंदूर के जीवंत मंचन और शानदार ड्रोन शो के साथ हुआ, जिसने दर्शकों को रोमांचित और प्रेरित किया।

इस अवसर पर 50 नमन केंद्रों का वर्चुअल उद्घाटन भी किया गया। प्रोजेक्ट नामन के तहत सेना के पूर्व सैनिकों, पेंशनर्स, वीर नारियों और उनके परिजनों को एक ही स्थान पर पेंशन सेवाएं, सरकारी सेवाएं और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। यह परियोजना स्पर्श डिजिटल पेंशन सिस्टम के तहत चलाई जा रही है। (Indian Army Day 2026)

जयपुर में 78वें आर्मी डे परेड में दिखी ऑपरेशन सिंदूर की ताकत, पहली बार नजर आए भैरव, शक्तिबाण और सूर्यास्त्र

Indian Army Day 2026
Bhairav Batallian

Indian Army Day 2026: भारतीय सेना ने 15 जनवरी को राजस्थान की राजधानी जयपुर में अपना 78वां आर्मी डे पूरे गौरव और सम्मान के साथ मनाया। यह आयोजन कई मायनों में ऐतिहासिक रहा, क्योंकि यह चौथी बार था जब आर्मी डे परेड दिल्ली से बाहर आयोजित की गई और पहली बार यह परेड किसी सैन्य छावनी के बजाय शहर के बीचों-बीच सड़कों पर निकाली गई। जयपुर की महल रोड पर आयोजित इस भव्य परेड ने आम लोगों को भारतीय सेना की ताकत, अनुशासन और आधुनिक क्षमताओं को नजदीक से देखने का अवसर दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत प्रेरणा स्थल पर श्रद्धांजलि समारोह से हुई, जहां सीडीएस जनरल अनिल चौहान, सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी सहित तीनों सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारियों ने देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को नमन किया। भारतीय वायुसेना और भारतीय नौसेना की ओर से भी पुष्पचक्र अर्पित किए गए। (Indian Army Day 2026)

Indian Army Day 2026: दिल्ली से बाहर जनता के बीच सेना

आर्मी डे परेड को देश के अलग-अलग हिस्सों में आयोजित करने का फैसला सेना और आम जनता को नजदीक लाने के उद्देश्य से लिया गया है। जयपुर से पहले यह परेड बेंगलुरु, लखनऊ और पुणे में आयोजित की जा चुकी है। इस बार भारतीय सेना की साउथ वेस्टर्न कमांड ने पहली बार इस आयोजन की मेजबानी की। शहर के बीचों-बीच आयोजित परेड को देखने के लिए एक लाख से अधिक लोग सड़कों के किनारे जमा हुए, जिनका उत्साह देखते ही बनता था।

परेड की शुरुआत में थल सेना प्रमुख ने देश के लिए बलिदान देने वाले वीर जवानों के परिजनों को सेना मेडल (मरणोपरांत) प्रदान किए। यह सम्मान समारोह सेना की उस परंपरा को हिस्सा है, जिसमें शहीदों और उनके परिवारों को सर्वोच्च आदर दिया जाता है। (Indian Army Day 2026)

Indian Army Day 2026: मार्च पास्ट में लिया 30 कंटिजेंट्स ने हिस्सा

इस परेड में 30 से अधिक टुकड़ियों ने हिस्सा लिया। सात प्रमुख मार्चिंग कंटिंजेंट्स ने कदमताल करते हुए सेना के अनुशासन और एकता का प्रदर्शन किया। मद्रास रेजिमेंटल सेंटर, राजपूत रेजिमेंटल सेंटर, आर्टिलरी रेजिमेंट, मिक्स्ड स्काउट्स और एनसीसी गर्ल्स कंटिंजेंट ने खासतौर पर दर्शकों का ध्यान खींचा। (Indian Army Day 2026)

भैरव बटालियन की पहली झलक

इस आर्मी डे परेड की एक बड़ी खासियत भैरव बटालियन की भागीदारी रही। राजपूताना राइफल्स और सिख लाइट इन्फैंट्री से जुड़े इन विशेष कंटिंजेंट्स ने पहली बार परेड में हिस्सा लिया। इन्हें सेना की नई, फुर्तीली और आधुनिक युद्ध क्षमता का प्रतीक माना जा रहा है। यह टुकड़ियां तेज, अचूक और कम समय में जबरदस्त कार्रवाई के लिए तैयार की गई हैं, जो आधुनिक युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं। (Indian Army Day 2026)

Indian Army Day 2026

आसमान में दिखे प्रचंड और अपाचे

परेड के दौरान सेना के हेलीकॉप्टरों ने शानदार फ्लाई-पास्ट किया। लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर प्रचंड, एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर, वेपन सिस्टम इंटीग्रेटेड हेलीकॉप्टर और अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर ने जब आसमान में उड़ान भरी तो सभी की निगाहें टकटकी लगा कर आसमान की तरफ देख रही थीं। (Indian Army Day 2026)

सूर्यास्त्र, ब्रह्मोस और पिनाका की झलक

आर्मी डे परेड में सेना के आधुनिक हथियारों और प्लेटफॉर्म्स को भी शोकेस किया। भारी बख्तरबंद टैंकों से लेकर लंबी दूरी तक मार करने वाले रॉकेट सिस्टम तक, जयपुर की सड़कों पर सेना की पूरी ताकत नजर आई। टी-90 भीष्म टैंक, मुख्य युद्धक टैंक अर्जुन, अपग्रेडेड बीएमपी-2, स्मर्च और ग्रैड रॉकेट सिस्टम, के-9 वज्र, धनुष और एडवांस्ड टोइड आर्टिलरी गन सिस्टम्स दर्शकों की खूब तालियां मिलीं। (Indian Army Day 2026)

वहीं, परेड में एयर डिफेंस क्षमता की शोकेस किया गया। इनमें एडवांस शिल्का सिस्टम, सूर्यास्त्र यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम और शक्तिबाण यूनिट्स भी परेड का हिस्सा बनीं। इसके साथ ही एंटी ड्रोन सिस्टम, रोबोटिक म्यूल, व्हीकल्स आधारित इन्फैंट्री मोर्टार सिस्टम और आधुनिक मानव रहित एरियल प्लेटफॉर्म्स को भी शोकेस किया गया।

ऑपरेशन सिंदूर की झलक

परेड में उन हथियार प्रणालियों और उपकरणों को भी प्रदर्शित किया गया, जिनका इस्तेमाल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किया गया था। ब्रह्मोस, पिनाका, अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर एम-777, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम और अन्य माध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों ने दिखाया कि भारतीय सेना किस तरह युद्ध में इन आधुनिक और प्रभावी हथियारों पर भरोसा कर रही है। (Indian Army Day 2026)

मिलिट्री बैंड्स ने बांधा समा

परेड में सात मिलिट्री बैंड्स की प्रस्तुतियों ने पूरे आयोजन में जोश भर दिया। सिख, डोगरा, मराठा, बंगाल इंजीनियर्स ग्रुप, आर्टिलरी और ईएमई सेंटर के बैंड्स के साथ एनसीसी बॉयज़ और गर्ल्स का संयुक्त बैंड भी शामिल रहा। परेड में खासतौर पर नेपाल आर्मी बैंड ने भी हिस्सा लिया।

राजस्थान की लोक संस्कृति को भी परेड में विशेष स्थान मिला। कालबेलिया और गैर नृत्य के साथ मद्रास रेजिमेंट की चेंडा टीम की प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। (Indian Army Day 2026)

सेना प्रमुख ने सिविल-मिलिट्री संबंधों पर दिया जोर

सेना प्रमुख ने अपने संबोधन में सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को सम्मान देते हुए कहा कि भारतीय सेना तेजी से एक फ्यूचर रेडी फोर्स के रूप में आगे बढ़ रही है। उन्होंने आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए कहा कि स्वदेशी हथियार और तकनीक अब रणनीतिक आवश्यकता बन चुके हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तकनीक का उद्देश्य सैनिक को सशक्त बनाना है, न कि उसकी जगह लेना। (Indian Army Day 2026)

शौर्य संध्या का आयोजन

आर्मी डे के अवसर पर शाम को शौर्य संध्या कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया, जिसमें रक्षा मंत्री सहित कई वरिष्ठ सैन्य और नागरिक अधिकारी शामिल हुए। इस दौरान ऑपरेशन सिंदूर पर आधारित प्रस्तुति, एक हजार ड्रोन का शो और पारंपरिक मार्शल आर्ट्स ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया। (Indian Army Day 2026)

जोरावर टैंक को लेकर आर्मी चीफ ने दी अहम जानकारी, बताया कब होगा सेना में शामिल

Zorawar Light Tank Trials
COAS General Upendra Dwivedi addressing Indian Army Annual Press Conference 2026

Zorawar Light Tank Trials: भारतीय सेना के स्वदेशी लाइट वेट टैंक जोरावर को लेकर सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने अहम जानकारी साझा की है। उन्होंने साफ किया कि जोरावर टैंक अभी ट्रायल और सुधार के चरण में है। सेना प्रमुख ने बताया कि जोरावर टैंक का पहला प्रोटोटाइप पहले ही हाई एल्टीट्यूड इलाके में तैनात किया जा चुका है, जहां इसके शुरुआती परीक्षण किए गए थे। वहीं सेना में यह 2029 तक ही शामिल हो सकता है।

Zorawar Light Tank Trials: टैंक में अभी भी हैं कई खामियां

रक्षा समाचार के पूछे गए सवाल के जवाब में सेना प्रमुख ने बताया कि यह पहली बार था जब किसी स्वदेशी लाइट टैंक को इतने अधिक ऊंचाई वाले इलाके में सीधे तैनात किया गया। हाई एल्टीट्यूड में तैनाती के दौरान कुछ तकनीकी कमियां सामने आईं, क्योंकि ऊंचाई पर मौसम, ऑक्सीजन की कमी और तापमान जैसे नए फैक्टर्स काम करते हैं। इन तकनीकी कमियों को दूर करने के लिए टैंक को नीचे लाना जरूरी होता है, लेकिन फिलहाल पहला प्रोटोटाइप नीचे लाना संभव नहीं है। (Zorawar Light Tank Trials)

इसी वजह से सेना और डीआरडीओ ने मिलकर जोरावर टैंक का दूसरा प्रोटोटाइप तैयार किया है। यह दूसरा प्रोटोटाइप गुजरात के हजीरा में बनाया गया है और इसे अब पश्चिमी सीमा की ओर ट्रायल के लिए भेजा जा रहा है। सेना प्रमुख ने कहा कि जोरावर टैंक का बेसिक प्रोटोटाइप काफी हद तक तैयार हो चुका है, लेकिन इसकी मेजर असेंबली से जुड़ी कुछ कमियों को ठीक करने में अभी समय लगेगा। (Zorawar Light Tank Trials)

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस वजह से जोरावर टैंक के लिए किसी सटीक टाइमलाइन को तय करना आसान नहीं है। हालांकि, सेना प्रमुख ने बताया कि अब तक जो प्रगति हुई है, वह संतोषजनक है और इस प्रोजेक्ट पर लगातार काम चल रहा है। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने उम्मीद जताई कि 2029 के आसपास टैंक को भारतीय सेना में शामिल किया जा सकता है। (Zorawar Light Tank Trials)

डीआरडीओ चीफ डॉ. समीर वी. कामत ने हाल ही में कहा था कि 2026 में इंडियन आर्मी के यूजर ट्रायल्स शुरू होंगे। ये ट्रायल्स 12-18 महीने तक चल सकते हैं, जिसमें समर, विंटर, हाई-एल्टीट्यूड और विभिन्न टेरेंस में टैंक की परफॉर्मेंस टेस्ट की जाएगी। डीआरडीओ का टारगेट है कि अगर यूजर ट्रायल्स सफल रहे, तो टैंक का इंडक्शन 2027 तक शुरू हो जाएगा। शुरुआती बैच में 59 टैंक्स बनाए जाएंगे। सेना को कुल जरूरत 354 टैंक्स की है, जिसमें बाकी 295 टैंक्स बाद में मेक-1 कैटेगरी के तहत कॉम्पिटिटिव टेंडर से बनाए जाएंगे। (Zorawar Light Tank Trials)

जोरावर टैंक को खासतौर पर हाई एल्टीट्यूड और पहाड़ी इलाकों के लिए डिजाइन किया गया है। यह टैंक उन इलाकों में तैनाती के लिए बनाया गया है, जहां भारी टैंक जैसे टी-72 और टी-90 को पहुंचाना मुश्किल होता है। इसका हल्का वजन और मजबूत सस्पेंशन सिस्टम इसे ऊंचे पहाड़ों, बर्फीले इलाकों और संकरे रास्तों पर काम करने में सक्षम बनाता है। (Zorawar Light Tank Trials)

जोरावर टैंक को डीआरडीओ और लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) ने मिलकर बनाया है। इसमें 105 मिलीमीटर की तोप, आधुनिक सेंसर, नाइट विजन सिस्टम और एडवांस इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम लगाए गए हैं। यह टैंक ड्रोन कनेक्टिविटी के साथ भी काम कर सकता है, जिससे इसे दुश्मन की गतिविधियों की रियल-टाइम जानकारी मिलती है। (Zorawar Light Tank Trials)

सेना प्रमुख ने कहा कि जोरावर टैंक के विकास में जो भी तकनीकी चुनौतियां सामने आ रही हैं, उन्हें चरणबद्ध तरीके से दूर किया जा रहा है। टैंक के दूसरे प्रोटोटाइप में इंजन, सस्पेंशन और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से जुड़े कई सुधार किए गए हैं, ताकि यह अलग-अलग मौसम और इलाकों में बेहतर प्रदर्शन कर सके।

भारतीय सेना के लिए जोरावर टैंक एक अहम स्वदेशी प्लेटफॉर्म है, जिसे देश की भौगोलिक जरूरतों के हिसाब से तैयार किया जा रहा है। (Zorawar Light Tank Trials)

अब लंबी दूरी तक गोला दागेंगी सेना की तोपें, पिनाका में भी लगेगा रैमजेट इंजन, 2026 में मिल सकती है गुड न्यूज

Pinaka rocket ramjet engine
Pinaka rocket ramjet engine

Pinaka Rocket Ramjet Engine: सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा है कि भारतीय सेना रैमजेट टेक्नोलॉजी को सिर्फ आर्टिलरी गन्स तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे पिनाका रॉकेट सिस्टम में भी लगाने की संभावना पर काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि रैमजेट टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से हथियारों की रेंज में बड़ा इजाफा हो सकता है।

सेना प्रमुख ने यह बात रक्षा समाचार के पूछे सवाल के जवाब में कही। बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि रैमजेट टेक्नोलॉजी पर भारतीय संस्थान और डीआरडीओ लगातार काम कर रहे हैं और इसमें अब तक काफी प्रोग्रेस देखने को मिली है।

Pinaka Rocket Ramjet Engine: सेना को मिलेंगे ज्यादा रेंज वाले हथियार

सेना प्रमुख ने कहा कि उन्होंने खुद आईआईटी मद्रास जाकर वहां चल रहे रैमजेट प्रोजेक्ट की प्रगति देखी है। उनके मुताबिक, फीडबैक काफी सकारात्मक रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि किसी भी नई टेक्नोलॉजी की सटीक टाइमलाइन बताना आसान नहीं होता, क्योंकि यह कई परीक्षणों और तकनीकी मानकों पर निर्भर करता है।

उन्होंने कहा कि जैसे ही रैमजेट टेक्नोलॉजी पूरी तरह परिपक्व होगी, भारतीय सेना को हथियारों की ज्यादा रेंज मिलने लगेगी और इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल सिर्फ आर्टिलरी गंस तक सीमित नहीं रखा जाएगा। (Pinaka Rocket Ramjet Engine)

पिनाका रॉकेट सिस्टम में रैमजेट लगाने की योजना

सेना प्रमुख ने पिनाका रॉकेट सिस्टम का जिक्र करते हुए कहा कि अगर रैमजेट टेक्नोलॉजी को पिनाका रॉकेट में लगाया जाता है, तो इससे इसकी रेंज और ज्यादा बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसी रेंज बढ़ाने वाली टेक्नोलॉजी है, जिसका इस्तेमाल आगे भी अलग-अलग हथियार प्रणालियों में किया जा सकता है।

पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर पहले ही भारतीय सेना का एक अहम हथियार है और इसके अलग-अलग वर्जन सेवा में हैं। रैमजेट टेक्नोलॉजी के जुड़ने से इसकी मारक क्षमता और बढ़ने की उम्मीद है। (Pinaka Rocket Ramjet Engine)

डीआरडीओ भी कर रहा है रैमजेट टेक्नोलॉजी पर काम

सेना प्रमुख ने बताया कि इस दिशा में डीआरडीओ भी लगातार काम कर रहा है। डीआरडीओ और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग के जरिए इस टेक्नोलॉजी को आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उनका व्यक्तिगत आकलन है कि 2026 के दूसरे हिस्से तक इस टेक्नोलॉजी में अच्छी सफलता मिल सकती है। (Pinaka Rocket Ramjet Engine)

आईआईटी मद्रास का बड़ा तकनीकी ब्रेकथ्रू

इस बीच, आईआईटी मद्रास ने रैमजेट-असिस्टेड आर्टिलरी शेल्स डेवलप कर एक बड़ा तकनीकी ब्रेकथ्रू हासिल किया है। इस टेक्नोलॉजी के जरिए मौजूदा तोपों की रेंज में करीब 50 फीसदी तक इजाफा किया गया है, वो भी बिना किसी नई गन सिस्टम को शामिल किए।

आईआईटी मद्रास के अनुसार, 155 एमएम आर्टिलरी शेल के अंदर रैमजेट इंजन लगाने से एडवांस्ड टोव्ड आर्टिलरी गन सिस्टम की रेंज 40 किलोमीटर से बढ़कर 70 किलोमीटर तक पहुंच गई है। (Pinaka Rocket Ramjet Engine)

अलग-अलग तोपों में बढ़ी रेंज

इस टेक्नोलॉजी के परीक्षण अलग-अलग आर्टिलरी प्लेटफॉर्म पर किए गए। के-9 वज्र सेल्फ प्रोपेल्ड हॉवित्जर की रेंज 36 किलोमीटर से बढ़कर 62 किलोमीटर हो गई, जबकि धनुष आर्टिलरी गन की रेंज 30 किलोमीटर से बढ़कर 55 किलोमीटर तक पहुंच गई।

आईआईटी मद्रास के अधिकारियों के मुताबिक, यह टेक्नोलॉजी रॉकेट-असिस्टेड प्रोजेक्टाइल से अलग है। इसमें शेल के गन बैरल से बाहर निकलने के बाद भी लगातार प्रोपल्शन मिलता रहता है, जिससे रेंज काफी बढ़ जाती है। (Pinaka Rocket Ramjet Engine)

क्या है रैमजेट टेक्नोलॉजी

रैमजेट एक ऐसा इंजन होता है जिसमें किसी टरबाइन या घूमने वाले हिस्से की जरूरत नहीं होती। यह शेल की तेज रफ्तार का इस्तेमाल करके हवा को कंप्रेस करता है और फ्यूल के साथ जलाकर थ्रस्ट पैदा करता है। आर्टिलरी सिस्टम में इसका मतलब है कि शेल ज्यादा दूर तक जा सकता है, बिना गन को बदले। (Pinaka Rocket Ramjet Engine)

देवलाली और पोखरण में सफल परीक्षण

इस प्रोजेक्ट के तहत देवलाली और पोखरण में कई गन और फील्ड ट्रायल किए गए हैं। इन परीक्षणों में क्लीन गन एग्जिट, स्टेबल फ्लाइट और भरोसेमंद रैमजेट इग्निशन को सफलतापूर्वक वैलिडेट किया गया है। आईआईटी मद्रास के अनुसार, यही टेक्नोलॉजी भविष्य में रॉकेट सिस्टम में अपनाई जा सकती है, जिससे उनकी रेंज में भी बड़ा इजाफा संभव होगा। (Pinaka Rocket Ramjet Engine)

रूद्र ब्रिगेड और IBG पर सेना प्रमुख का बड़ा बयान, क्या है पूर्वी सीमा पर आर्मी का नया वार प्लान

Indian Army Rudra Brigade Vs IBG

Indian Army Rudra Brigade Vs IBG: भारतीय सेना पूर्वी सीमा पर अपनी युद्ध क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी पर अब सेना चार इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप यानी आईबीजी बनाने की तैयारी में है। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने इस योजना को लेकर बड़ा बयान दिया है और साफ किया है कि आईबीजी को अब मंजूरी मिल चुकी है और इसे चरणबद्ध तरीके से जमीन पर उतारा जाएगा।

Indian Army Rudra Brigade Vs IBG: चार आईबीजी बनाए जाने की तैयारी

आर्मी डे पहले आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय सेना भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए अपने संगठनात्मक ढांचे में बदलाव कर रही है। उन्होंने बताया कि इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप पर पिछले कई वर्षों से काम चल रहा था और अब यह योजना औपचारिक रूप से स्वीकृत हो चुकी है। पूर्वी मोर्चे पर चीन की गतिविधियों को देखते हुए यह बदलाव काफी अहम माना जा रहा है। (Indian Army Rudra Brigade Vs IBG)

पानागढ़ स्थित 17वीं माउंटेन स्ट्राइक कोर, जो सीधे तौर पर चीन सीमा की जिम्मेदारी संभालती है, इस योजना का अहम हिस्सा होगी। क्योंकि इसी कोर के तहत चार आईबीजी बनाए जाने की तैयारी है। ये आईबीजी 59 डिवीजन और 23 डिवीजन से मिलकर गठित किए जाएंगे। हर आईबीजी में करीब पांच हजार से अधिक सैनिक होंगे और इसका नेतृत्व मेजर जनरल रैंक का अधिकारी करेगा। (Indian Army Rudra Brigade Vs IBG)

सेना प्रमुख ने यह भी स्पष्ट किया कि आईबीजी में पारंपरिक ब्रिगेड कमांडर नहीं होंगे। कमांड स्ट्रक्चर को सरल और तेज बनाया जा रहा है ताकि फैसले लेने में देरी न हो। प्रत्येक आईबीजी के साथ एक अलग सपोर्ट ग्रुप भी होगा, जिसका नेतृत्व भी मेजर जनरल स्तर का अधिकारी करेगा। इससे ऑपरेशन के दौरान फायर सपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और मेडिकल सहायता तुरंत उपलब्ध हो सकेगी।

आईबीजी को पूरी तरह आत्मनिर्भर यूनिट के तौर पर तैयार किया जा रहा है। इनमें इन्फैंट्री बटालियनें, आर्टिलरी रेजिमेंट, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स, कॉम्बैट इंजीनियर्स, आर्मी सर्विस कोर और फील्ड हॉस्पिटल शामिल होंगे। जरूरत पड़ने पर ये यूनिट्स कोर मुख्यालय से अतिरिक्त सपोर्ट भी ले सकेंगी। (Indian Army Rudra Brigade Vs IBG)

सेना के सूत्रों के मुताबिक, आईबीजी की सबसे बड़ी ताकत उनकी फुर्ती और तुरंत तैनाती है। पारंपरिक कोर या डिवीजन को तैनात करने में जहां काफी समय लगता है, वहीं आईबीजी कुछ ही घंटों में ऑपरेशनल हो सकती हैं। पहाड़ी इलाकों में यह क्षमता और भी ज्यादा अहम हो जाती है, जहां तेजी से बदलती स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देना जरूरी होता है। वहीं आईबीजी को ऑफेंसिव ऑपरेशंस के लिए तैयार किया गया है।

आईबीजी बनाने का प्लान पहली बार वर्ष 2019 के आसपास सामने आया था। तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने इसे सेना के पुनर्गठन का अहम हिस्सा बताया था। पश्चिमी मोर्चे पर पाकिस्तान सीमा के पास 9 कोर में इसे प्रयोग के तौर पर आजमाया गया था। इसके अलावा पूर्वी थिएटर में ‘हिम विजय’ जैसे अभ्यासों में भी आईबीजी को शामिल किया गया। (Indian Army Rudra Brigade Vs IBG)

सेना प्रमुख ने बताया कि आईबीजी के साथ-साथ रूद्र ब्रिगेड पर भी तेजी से काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि दो रूद्र ब्रिगेड पहले ही लागू की जा चुकी हैं और सात और रूद्र ब्रिगेड की योजना है। दूसरे चरण में चार नई रूद्र ब्रिगेड को खड़ा किए जाने की संभावना है।

रूद्र ब्रिगेड को हाई टेम्पो मल्टी डोमेन ऑपरेशंस के लिए तैयार किया गया है। इनमें ड्रोन, सर्विलांस सिस्टम, रियल टाइम टारगेटिंग और तेज स्ट्राइक क्षमता पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही शक्तिबाण रेजिमेंट और दिव्यास्त्र बैटरी जैसी नई आर्टिलरी संरचनाएं भी बनाई जा रही हैं, जिससे सेना की मारक क्षमता और बढ़े। (Indian Army Rudra Brigade Vs IBG)

सेना प्रमुख ने बताया कि इन सभी नए स्ट्रक्चर को संभालने और तेजी से लागू करने के लिए सेना ने एक फ्यूचर ट्रांसफॉर्मेशन सेल भी बनाया है, जिसका नेतृत्व टू स्टार अधिकारी कर रहे हैं। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि संगठनात्मक बदलाव, तकनीक और ऑपरेशनल जरूरतों के बीच बेहतर तालमेल रहे।

सेना का यह कदम उस समय आया है जब चीन ने पिछले एक दशक में अपनी सेना को बड़े डिवीजन सिस्टम से हटाकर छोटे और ज्यादा घातक कॉम्बाइंड आर्म्स ब्रिगेड में बदला है। भारतीय सेना भी इसी तरह के फ्लेक्सिबल एंड फास्ट फ्रेमवर्क की ओर बढ़ रही है ताकि किसी भी स्थिति में प्रभावी जवाब दिया जा सके। (Indian Army Rudra Brigade Vs IBG)

Army Chief Flags 8 Active Terror Camps in Pakistan, Says 100-150 Terrorists Under Training

Pakistan terror camps
COAS General Upendra Dwivedi addressing Indian Army Annual Press Conference 2026

Pakistan terror camps: Chief of Army Staff General Upendra Dwivedi on Tuesday said Pakistan continues to run a well-oiled terror infrastructure across the border, revealing that at least eight active terror camps are currently operational with around 100 to 150 terrorists undergoing training at any given time.

Addressing the Indian Army’s annual press conference, the Army Chief said these camps remain a serious security concern despite Pakistan’s repeated claims of having dismantled terrorist infrastructure. “These are not abandoned facilities. They are active camps with regular movement and training activity. The numbers fluctuate, but on average, 100–150 terrorists are present in these camps,” he said.

Out of approximately eight such camps, two are situated opposite the International Border (IB), and six are opposite the Line of Control (LC). The Army believes these camps still host some form of presence or training activities. Consequently, the Army is closely monitoring these locations, gathering intelligence, and has stated its intention to take action if any renewed hostile activities originate from them.

General Dwivedi underlined that the Army is maintaining a strict vigil along the Line of Control (LoC) and hinterland areas to prevent infiltration attempts. He said intelligence-based operations and a strengthened counter-infiltration grid have ensured that most attempts to push terrorists into Jammu and Kashmir are being foiled. “Our surveillance is continuous on the ground and through technical means. Infiltration bids are detected early and neutralised,” he noted.

Providing details on recent aerial threats, the Army Chief confirmed that a drone was spotted along the border, an issue that was formally taken up during DGMO-level talks with Pakistan. “We flagged the drone incident through established military channels. Such activities violate existing understandings and are being closely monitored,” he said, indicating that unmanned aerial systems are increasingly being used to aid infiltration and smuggling of arms.

On the internal security situation in Jammu and Kashmir, General Dwivedi said sustained counter-terror operations have resulted in a decline in local recruitment, though foreign terrorists continue to be pushed in from across the border. “The ecosystem that supports terrorism is under pressure, but it has not collapsed. That is why constant vigilance is essential,” he said.

On preparedness, General Dwivedi said the Indian Army is fully ready to deal with both conventional and asymmetric threats. He highlighted the increasing use of technology, including counter-drone systems, precision weapons and enhanced surveillance, to counter evolving terror tactics.