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Honorary Ranks in Indian Army: सेना में ऑनरी रैंक लेकर क्यों खड़े होते हैं विवाद? आइए जानते हैं इस सम्मान का क्या है महत्व और क्या है सेना की गाइडलाइंस

Honorary Rank

Honorary Ranks in the Indian Army: सेना में अनुशासन, सीनियरिटी और सम्मान का महत्व सर्वोपरि है। लेकिन जब किसी जूनियर कमीशंड अधिकारी (JCO) को ऑनरी रैंक (जैसे ऑनरी लेफ्टिनेंट या कैप्टन) से सम्मानित किया जाता है, तो सीनियरिटी और हालात को लेकर अक्सर भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है। अक्सर देखा जाता है कि परेड या अन्य औपचारिक आयोजनों में उनकी भूमिका क्या होगी? क्या उन्हें अन्य अधिकारियों के समान अतिरिक्त अधिकार मिलेंगे? इन सवालों को लेकर सेना में अक्सर भ्रम और असमंजस की स्थिति बनी रहती है। जानिए ऐसे मामलों में सेना का क्या रुख रहता है। आइए जानने की कोशिश करते हैं…

Honorary Ranks in the Indian Army: Why Do Controversies Arise? Understanding Their Significance and Official Guidelines

ऑनरी रैंक का महत्व और विवाद

सेना में ऑनरी रैंक का उद्देश्य किसी अधिकारी की लंबी सेवा और विशिष्ट योगदान को सम्मानित करना है। यह रैंक आमतौर पर 26 जनवरी या 15 अगस्त जैसे राष्ट्रीय उत्सवों पर प्रदान की जाती है। हालांकि, यह रैंक सीनियरिटी में बदलाव नहीं करती और न ही इसे किसी विशेष कमांड अथवा अधिकारों का प्रतीक माना जाता है।

उदाहरण के तौर पर, यदि किसी सूबेदार को ऑनरी कैप्टन की रैंक प्रदान की गई है, तो उसकी मूल सीनियरिटी वही रहेगी, जो उसकी जेसीओ रैंक में थी। भले ही उनके कंधे पर कैप्टन के बैज लगे हों, लेकिन वह अपने से सीनियर सूबेदार मेजर या अन्य अधिकारियों को सम्मानपूर्वक सलामी देंगे।

अक्सर पूछे जाते हैं ये सवाल?

ऑनरी रैंक प्राप्त करने वाले अधिकारियों को कई बार ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, जहां उनके कंधे पर लगे रैंक और उनके मौजूदा पद के बीच विरोधाभास उत्पन्न हो जाता है। उदाहरण के लिए:

  • क्या ऑनरी कैप्टन बने अधिकारी को सूबेदार मेजर को सलूट करना होगा या सूबेदार मेजर उन्हें?
  • परेड या अन्य औपचारिक आयोजनों में उनकी भूमिका क्या होगी?
  • क्या उन्हें अन्य अधिकारियों के समान अतिरिक्त अधिकार मिलेंगे?

इन सवालों को लेकर सेना में अक्सर भ्रम और असमंजस की स्थिति बनी रहती है।

Honorary Ranks in the Indian Army: Why Do Controversies Arise? Understanding Their Significance and Official Guidelines

रक्षा मंत्रालय की स्पष्टीकरण

इस भ्रम को दूर करने के लिए रक्षा मंत्रालय ने 3 अगस्त 2023 को एक स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किया। इस पत्र के मुताबिक जो दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, वह इस प्रकार हैं:

  1. सीनियरिटी में कोई बदलाव नहीं होगा:
    ऑनरी रैंक से संबंधित अधिकारी की वास्तविक सीनियरिटी वही रहेगी, जो उनकी मूल जेसीओ रैंक में थी। उदाहरणस्वरूप, यदि किसी सूबेदार को ऑनरी कैप्टन बनाया गया है, तो वह अपने सीनियर सूबेदार मेजर को ही रिपोर्ट करेंगे।
  2. अतिरिक्त अधिकार नहीं दिए जाएंगे:
    ऑनरी रैंक केवल एक प्रतीकात्मक सम्मान है और इसे किसी अतिरिक्त अधिकार या कमांड का प्रतिनिधित्व नहीं माना जाएगा।
  3. पेंशन और वित्तीय लाभ:
    ऑनरी रैंक से अधिकारी को पेंशन और वेतनमान में बढ़ोतरी का फायदा मिलता है। यह रैंक उनके वित्तीय हितों को मजबूत करने के लिए प्रदान की जाती है।

परेड और औपचारिक आयोजनों में भूमिका

परेड जैसे आयोजनों में कई बार भ्रम की स्थिति पैदा होती है, जब एक ऑनरी कैप्टन को सूबेदार मेजर के समक्ष रिपोर्ट करनी होती है। ऐसे में दिशानिर्देश साफ करते हैं कि रैंक के बैज के बावजूद, परेड में उनकी स्थिति उनकी मूल रैंक के अनुसार ही होगी।

रक्षा मंत्रालय ने सेना के सभी यूनिट्स को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि इस विषय पर सभी अधिकारियों और जवानों को स्पष्ट जानकारी दी जाए। ऐसा करने से अनावश्यक विवाद और शिकायतों को रोका जा सकेगा।

सम्मान और सादगी का प्रतीक

ऑनरी रैंक सेना की परंपरा और अनुशासन का हिस्सा है। यह न केवल सम्मान का प्रतीक है, बल्कि यह दर्शाता है कि सेना हर अधिकारी और जवान की सेना में योगदान की कद्र करती है। हालांकि, इस रैंक से जुड़े भ्रम और सवालों को रक्षा मंत्रालय ने अपने स्पष्ट दिशानिर्देशों से सुलझा दिया है। सेना के लिए यह आवश्यक है कि सम्मान और सीनियरिटी के इस संतुलन को बनाए रखा जाए। ऑनरी रैंक प्राप्त करना न केवल एक अधिकारी के लिए गर्व का विषय है, बल्कि यह उनकी वर्षों की सेवा और समर्पण का सम्मान भी है।

INS Arihant K-4 SLBM: क्या भारत ने गुपचुप किया है INS अरिहंत से K-4 मिसाइल का टेस्ट? DRDO और रक्षा मंत्रालय ने क्यों नहीं किया सार्वजनिक एलान?

INS Arihant K-4 SLBM: Has India Secretly Tested K-4 Missile from INS Arihant? No Official Confirmation Yet from DRDO or Defence Ministry

INS Arihant K-4 SLBM: भारत ने 27 नवंबर से 30 नवंबर के बीच जारी किया गया “नोटिस टू एयरमेन” (NOTAM) अचानक वापस ले लिया है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब अटकलें लगाई जा रही हैं कि 27 नवंबर, 2024 को INS अरिहंत से K-4 सबमरीन-लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल (SLBM) का परीक्षण किया गया। हालांकि, भारतीय सरकार या रक्षा अधिकारियों की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

INS Arihant K-4 SLBM: Has India Secretly Tested K-4 Missile from INS Arihant? No Official Confirmation Yet from DRDO or Defence Ministry

INS Arihant K-4 SLBM

K-4 मिसाइल को डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) ने डेवलप किया है, जो भारत की समुद्र-आधारित परमाणु प्रतिरोध रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह मिसाइल लगभग 3,500 किलोमीटर की मारक क्षमता रखती है, जो इसे दुश्मन के सामरिक ठिकानों तक पहुंचने में सक्षम बनाती है। K-4 की खासियत यह है कि इसे पानी के भीतर से लॉन्च किया जा सकता है, जिससे इसे ढूंढ पाना बेहद मुश्किल हो जाता है।

6000 हजार टन वजनी INS अरिहंत सबमरीन, भारत की स्वदेशी रूप से विकसित परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी, K-4 मिसाइलों को ले जाने में सक्षम है। यह पनडुब्बी एक बार में चार K-4 मिसाइलें ले जा सकती है। वहीं अगर इस मिसाइल का परीक्षण सफल रहा है, तो यह भारत की “न्यूक्लियर ट्रायड” (थल, जल और वायु आधारित परमाणु हथियारों की प्रणाली) को मजबूती प्रदान करेगा और यह संकेत देगा कि भारत समुद्र-आधारित प्रतिरोध क्षमताओं को पूरी तरह से ऑपरेशनल करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने के लिए बिल्कुल तैयार है।

NOTAM की वापसी: अटकलों का दौर

आमतैर पर जब भी K-4 जैसे रणनीतिक महत्व के हथियारों से जुड़े परीक्षण होते हैं, तो डीआरडीओ और सरकार की तरफ से मिसाइल परीक्षण के सफल होने का एलान किया जाता है। लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ है। लेकिन इस बार NOTAM को अचानक वापस लेना और कोई आधिकारिक बयान जारी न करना, इससे चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम “निचले प्रोफाइल” में टेस्ट करने की रणनीति हो सकती है ताकि क्षेत्रीय या वैश्विक स्तर पर बेवजह के ज्योपॉलिटिकल तनाव से बचा जा सके। INS अरिहंत जैसे प्लेटफॉर्म से इस तरह का परीक्षण समुद्र-आधारित परमाणु हमले की क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है।

INS Arihant K-4 SLBM: Has India Secretly Tested K-4 Missile from INS Arihant? No Official Confirmation Yet from DRDO or Defence Ministry

INS अरिहंत और K-4 का महत्व

INS अरिहंत, भारत की पहली स्वदेशी परमाणु-संचालित पनडुब्बी है, जो देश के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। यह पनडुब्बी परमाणु हथियारों से लैस होकर पानी के अंदर रहकर दुश्मन पर हमला करने की क्षमता रखती है।

K-4 जैसे मिसाइल भारत की दूसरी स्ट्राइक क्षमता को मजबूत करते हैं। इसका मतलब यह है कि अगर भारत पर कोई परमाणु हमला होता है, तो भी वह इस तरह के हथियारों की मदद से जवाबी हमला करने में सक्षम होगा। यह क्षमता “विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोध” (Credible Minimum Deterrence) की भारत की परमाणु नीति का अभिन्न हिस्सा है।

भविष्य की रणनीति पर नजर

यदि यह परीक्षण सफल रहा है, तो यह भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी। समुद्र-आधारित मिसाइल प्रणाली का ऑपरेशनल होना भारत के लिए रणनीतिक स्थिरता बनाए रखने में सहायक होगा, खासकर ऐसे समय में जब क्षेत्रीय तनाव और भूराजनीतिक चुनौतियां बढ़ रही हैं।

इसके अलावा, K-4 मिसाइल के परीक्षण से यह स्पष्ट होता है कि भारत अपने परमाणु हथियारों की तैनाती को और अधिक सुरक्षित और प्रभावी बना रहा है। यह कदम चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों की चुनौतियों का सामना करने में भी मदद करेगा।

सरकार की चुप्पी और चर्चाओं का दौर

हालांकि, इस पूरे मामले में सरकार की चुप्पी ने चर्चाओं को और तेज कर दिया है। रक्षा मंत्रालय और DRDO जैसे संस्थान आमतौर पर इस तरह के परीक्षणों की जानकारी साझा करते हैं, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ।

यह संभव है कि सरकार और सेना इसे रणनीतिक गोपनीयता के तहत रखना चाहती हो। परीक्षण की पुष्टि न करना और NOTAM को वापस लेना, दोनों कदम यह संकेत देते हैं कि भारत इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की ज्योपॉलिटिकल  प्रतिक्रिया से बचना चाहता है।

वहीं अगर INS अरिहंत से K-4 मिसाइल का परीक्षण यदि सफल हुआ है, तो यह भारत की परमाणु रणनीति में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी। यह कदम भारत को समुद्र-आधारित परमाणु शक्ति के क्षेत्र में एक मजबूत खिलाड़ी बना देगा।

भले ही सरकार ने इस पर कोई बयान नहीं दिया हो, लेकिन यह तय है कि ऐसे परीक्षण भारत की रक्षा क्षमताओं को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे। इसके साथ ही यह देश की आत्मनिर्भरता और DRDO जैसे संस्थानों की सफलता का प्रमाण भी है।

आने वाले दिनों में अगर इस परीक्षण की पुष्टि होती है, तो यह भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी ताकत दिखाने का एक और अवसर होगा। अब, पूरे देश की नजरें इस बात पर हैं कि सरकार कब और कैसे इस पर अपनी प्रतिक्रिया देती है।

President Colours: आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने चार मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री बटालियनों को ‘प्रेजिडेंट्स कलर्स’ से किया सम्मानित

Army Chief General Upendra Dwivedi Honours Four Mechanised Infantry Battalions with President Colours

President Colours: भारतीय सेना के प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने 27 नवंबर को आहिल्यनगर स्थित मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री सेंटर और स्कूल (MIC&S) में आयोजित एक समारोह में चार मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री बटालियनों को ‘प्रेजिडेंट्स कलर्स’ प्रदान किए। यह सम्मान बटालियनों की उत्कृष्ट और अनुकरणीय सेवा के लिए दिया गया। सम्मानित बटालियनें थीं – 26वीं और 27वीं मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री रेजीमेंट, और 20वीं व 22वीं ब्रिगेड ऑफ द गार्ड्स। इस विशेष अवसर पर सेना के वेटरन, सैन्य कर्मी और नागरिक गणमान्य व्यक्तियों ने समारोह में भाग लिया।

Army Chief General Upendra Dwivedi Honours Four Mechanised Infantry Battalions with President Colours

President Colours: परेड और सम्मान का प्रदर्शन

जनरल द्विवेदी ने परेड का निरीक्षण करते हुए चारों बटालियनों की उत्कृष्ट प्रस्तुति की सराहना की। उन्होंने भारत के राष्ट्रपति की ओर से प्रेजिडेंट्स कलर्स प्रदान किए और इन बटालियनों की सेवाओं को राष्ट्र के प्रति समर्पण और अनुकरणीय प्रदर्शन के रूप में मान्यता दी। उन्होंने सभी सैनिकों को बधाई दी और मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री की युद्ध और शांति दोनों में निभाई गई भूमिका की प्रशंसा की।

मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री, जो 1979 में स्थापित हुई, भारतीय सेना के सबसे युवा और कुशल हथियारों में से एक है। यह बल इन्फैंट्री और मैकेनाइज्ड फोर्सेज का मिश्रण है और इसे अपनी बहुमुखी प्रतिभा और शौर्य के लिए जाना जाता है।

Army Chief General Upendra Dwivedi Honours Four Mechanised Infantry Battalions with President Colours

इतिहास और योगदान की झलक

अपने संबोधन में सेना प्रमुख ने कहा कि मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री ने ऑपरेशन पवन, ऑपरेशन विजय, ऑपरेशन रक्षा और ऑपरेशन स्नो लेपर्ड जैसी महत्वपूर्ण सैन्य गतिविधियों में अपनी दक्षता साबित की है। इसके अलावा, इन बटालियनों ने संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। उन्होंने उल्लेख किया कि चार बटालियनों को उनके अनुकरणीय सेवा और उपलब्धियों के लिए यह सम्मान प्रदान किया जा रहा है।

आधुनिक युद्ध के लिए तत्परता और आत्मनिर्भरता

सेना प्रमुख ने कहा कि बदलते युद्ध परिदृश्य में मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री आधुनिक उपकरणों जैसे फ्यूचरिस्टिक इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल्स, नाग मिसाइल सिस्टम, मिनी ड्रोन और एकीकृत निगरानी प्रणालियों के साथ खुद को एडवांस बना रही है। यह सभी प्रयास आत्मनिर्भरता के आधार पर किए जा रहे हैं, जिससे सेना भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो रही है।

Army Chief General Upendra Dwivedi Honours Four Mechanised Infantry Battalions with President Colours

प्रेजिडेंट्स कलर्स का ऐतिहासिक महत्व

प्रेजिडेंट्स कलर्स सेना की किसी इकाई को दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है। यह सम्मान किसी भी बटालियन की असाधारण सेवा और समर्पण का प्रतीक है। ऐतिहासिक रूप से, इसे युद्ध के दौरान सैनिकों को प्रेरित करने और उनकी एकजुटता बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। वर्तमान समय में, यह एक सांकेतिक पहचान के रूप में मनोबल बढ़ाने का कार्य करता है।

Army Chief General Upendra Dwivedi Honours Four Mechanised Infantry Battalions with President Colours

वयोवृद्धों का सम्मान और भविष्य की प्रेरणा

समारोह के दौरान, सेना प्रमुख ने चार पूर्व सैनिकों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया और उनके प्रयासों की सराहना की। उन्होंने सभी सैनिकों और उनके परिवारों को शुभकामनाएं दीं और उनसे राष्ट्र की सेवा में उत्कृष्टता के लिए प्रयासरत रहने की अपील की।

इस समारोह ने भारतीय सेना की समर्पण भावना और अनुशासन को और अधिक प्रोत्साहित किया। यह सम्मान बटालियनों की अदम्य सेवा का प्रतीक है और आने वाले समय में उनके लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।

India-China Disengagement: देपसांग बल्ज से चीनी सेना की हुई वापसी! लेकिन “नो-डिप्लॉयमेंट जोन” में बनाईं दो पोस्ट, भारतीय सेना के लिए चुनौतियां बरकरार

India-China Disengagement: PLA Withdraws from Depsang Bulge, But New Posts in "No-Deployment Zone" Pose Challenges for Indian Army
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India-China Disengagement: पूर्वी लद्दाख के देपसांग प्लेंस से चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की वापसी भारतीय सेना और देश के लिए एक राहत की खबर है। राकी नाला से PLA की वापसी 21 अक्टूबर, 2024 को हुए भारत-चीन पेट्रोलिंग समझौते का हिस्सा है। इस समझौते के तहत दोनों देशों ने तनावग्रस्त इलाकों से अपने-अपने सैनिकों को वापस बुलाने की बात कही थी। वहीं, अब राकी नाला और बुर्त्सा नाला जैसे विवादित इलाकों में गश्त फिर से शुरू हो गई है।

India-China Disengagement: PLA Withdraws from Depsang Bulge, But New Posts in "No-Deployment Zone" Pose Challenges for Indian Army
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PLA ने बनाईं दो अस्थायी पोस्ट

वहीं, रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन की पीएलए सेना ने उन क्षेत्रों से अपनी अस्थायी पोस्ट और ऑपरेशनल ट्रैक्स को हटा लिया है, जो पहले भारतीय पेट्रोलिंग रूट्स का हिस्सा थे। इस समझौते के तहत चीनी सेना ने सब सेक्टर नॉर्थ में श्योक नदी के पास स्थित राकी नाला घाटी और बॉटलनेक, वाई-जंक्शन 1 और वाई-जंक्शन 2 के पास से अपनी अस्थायी चौकियां और इंफ्रास्ट्रक्चर को हटा लिया है। वहीं, PLA ने दो अस्थायी पोस्ट को नई जगहों पर स्थानांतरित किया है, एक पोस्ट राकी नाला के स्रोत के पास वाई-जंक्शन से लगभग 7 मील उत्तर-उत्तर-पूर्व में और दूसरी पूर्व दिशा में ऊपरी बुर्त्सा नाला घाटी में बनाई है। इन नई चौकियों को ऑपरेशनल ट्रैक्स से जोड़ा गया है। हालांकि यह कदम सकारात्मक माना जा रहा है, लेकिन इससे कुछ सवाल भी खड़े हो रहे हैं।

क्या PLA ने LAC पार की?

विशेषज्ञों के मुताबिक, यह स्पष्ट नहीं है कि PLA ने पूरी तरह से वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के बाहर के इलाकों से अपनी मौजूदगी हटा ली है। इसके अलावा, “नो-डिप्लॉयमेंट ज़ोन” के भीतर उनके तंबुओं और पोस्ट की मौजूदगी पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि सैटेलाइट इमेजरी में इन पोस्ट्स की स्थिति स्पष्ट रूप से नहीं दिखाई दे रही है।

गश्त तो बहाल हुई, लेकिन सीमित

हालांकि भारतीय सेना ने देपसांग क्षेत्र में पेट्रोलिंग को तो फिर से शुरू कर दिया है, लेकिन यह केवल कुछ निश्चित क्षेत्रों तक ही सीमित है। पेट्रोलिंग पॉइंट्स (PP) 10-13 जैसी जगहों पर भारतीय सैनिक 2020 के पहले रेगुलर पेट्रोलिंग पर जाते थे, वे अब चीनी सड़कों और पोस्ट्स के करीब हैं। इससे भारतीय सेना की पेट्रोलिंग को लेकर चुनौतियां बढ़ गई हैं। सैन्य सूत्रों का मानना है कि चीनी सेना ने इन रूट्स पर भारतीय पेट्रोलिंग की पहुंच को सीमित करने के लिए रणनीतिक रूप से अपनी तैनाती को पुनर्गठित किया है। उनका कहना है कि कई पुराने पेट्रोलिंग पॉइंट्स अब चीनी सड़कों और पोस्ट्स के करीब हैं, जो 2010-2013 के बीच बनाए गए थे।

India-China Disengagement: PLA Withdraws from Depsang Bulge, But New Posts in "No-Deployment Zone" Pose Challenges for Indian Army
image by @NatureDesai

राकी नाला और वाई-जंक्शन की स्थिति

राकी नाला घाटी में गश्त शुरू हो गई है, लेकिन बॉटलनेक और वाई-जंक्शन क्षेत्रों में स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि PLA ने इन स्थानों पर अपनी मौजूदगी को “नो डिप्लॉयमेंट ज़ोन” के भीतर स्थानांतरित कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक बुर्त्सा नाला और राकी नाला के बीच चीनी सेना के नए ट्रैक्स और अस्थायी चौकियों ने भारतीय सेना के लिए चुनौती बढ़ा दी हैं। उनका कहना है कि यह चीन की रणनीति हो सकती है, ताकि इन इलाकों में उसकी मौजूदगी बरकरार रहे।

डी-एस्केलेशन और डी-इंडक्शन की प्रक्रिया

डिसइंगेजमेंट के बाद, डी-एस्केलेशन और डी-इंडक्शन को लेकर बातचीत जारी है। ये कदम सीमा पर तनाव कम करने के लिए आवश्यक हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह तभी संभव है जब दोनों पक्ष पारदर्शिता और ईमानदारी के साथ समझौते का पालन करें। उनका कहना है कि चीनी सेना की नई चौकियां और ट्रैक्स भारतीय सेना के पेट्रोलिंग रूट्स में बाधा पैदा कर सकते हैं। आने वाले महीनों में यह देखना होगा कि यहां स्थिति कैसी रहती है।

हालांकि देपसांग प्लेंस से PLA की वापसी एक सकारात्मक पहल है, लेकिन भारतीय सेना और सरकार के सामने अभी भी कई चुनौतियां बरकरार हैं। पेट्रोलिंग रूट्स की बहाली, पारदर्शिता और स्थिरता सुनिश्चित करना न केवल सीमा विवाद के समाधान के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारत की सुरक्षा और संप्रभुता के लिए भी जरूरी है। सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए दोनों देशों को ठोस और पारदर्शी प्रयास करने होंगे। व्यापार और आपसी सहयोग के लिए यह जरूरी है कि दोनों देश संघर्ष के हालात से दूर रहें और शांतिपूर्वक समझौते का पालन करें।

New ECHS Advisory: अगर डिस्पेंसरी में नहीं है दवा तो क्या करें? रक्षा मंत्रालय की तरफ से जारी हुए नए दिशा-निर्देश

ECHS Scam: New Guidelines Issued to Prevent Frauds, Key for Beneficiaries
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New ECHS Advisory: रक्षा मंत्रालय के इंटीग्रेटेड हेडक्वॉर्टर (सेना) की तरफ से 12 नवंबर 2024 को जारी किए गए पत्र में, ईसीएचएस (एक्स-सर्विसमैन कंज्यूमर हेल्थकेयर स्कीम) से जुड़े सभी क्षेत्रीय केंद्रों को निर्देश दिए गए हैं कि वे नॉन-सीडीएल यानी NonCommon Drug List दवाओं के लिए एनए (नॉट अवेलेबल) पॉलिसी का सख्ती से पालन करें।

New ECHS Advisory: What to Do If Medicines Are Not Available at Dispensaries? New Guidelines Issued by the Army
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क्या है नई नीति?

ईसीएचएस से जुड़े सभी पीसी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) और उनकी डिस्पेंसरी में यदि किसी दवा की उपलब्धता नहीं है, तो संबंधित अधिकारी (ओआईसी) को एक नई गाइडलाइन जारी की गई है। अगर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में दवा उपलब्ध नहीं है, तो वे या तो अधिकृत स्थानीय केमिस्ट (Authorized Local Chemist) से दवाइयाँ खरीद सकते हैं, बशर्ते वह नगरपालिका की सीमा के भीतर स्थित हो। यदि केमिस्ट बाहर स्थित है, तो यह प्रक्रिया 72 घंटे के भीतर पूरी करनी होगी। यदि निर्धारित दवा फिर भी उपलब्ध नहीं हो पाती है, तो ईसीएचएस लाभार्थी को पर्चे पर नॉट अवेलेबल जारी किया जाएगा। इसके बाद, लाभार्थी स्थानीय मेडिकल स्टोर से दवाइयां खरीद सकते हैं और बाद में सीओ ईसीएचएस के दिशा-निर्देशों के अनुसार दवा की खरीद के बिल का दावा कर सकते हैं।

CE-ECHS ने क्यों लिखा पत्र

ईसीएचएस के प्रमुख ने इस पत्र में स्पष्ट किया कि केवल वही दवाइयां, जो ईसीडीएल-2024 (ईसीएचएस ड्रग लिस्ट) के अंतर्गत आती हैं, उनके लिए नॉट अवेलेबल जारी किया जा सकता है। यदि किसी दवा की डिमांड ईसीडीएल-2024 के बाहर से की जाती है, तो उसका एनए पास नहीं किया जाएगा, सिवाय इसके कि वह दवा अत्यंत आवश्यक और महत्वपूर्ण हो। ऐसी स्थिति में SEMO (सैन्य चिकित्सा अधिकारी) की मंजूरी के बाद ही दवा को खरीदने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है, और बाद में उस दवा को ईसीएचएस ड्रग लिस्ट में शामिल करने के लिए CO ECHS के पास भेजा जा सकता है।

 नॉट अवेलेबल (एनए) और इसके महत्व पर जोर

इस नई नीति के तहत, केवल सिस्टम द्वारा जनरेटेड एनए को ही मान्यता दी जाएगी। इसका मतलब यह है कि रीजनल सेंटर्स को किसी भी तरह से अन्यथा एनए पास करने की अनुमति नहीं होगी। यदि किसी दवा की मांग लगातार बढ़ रही है, तो इसे प्राथमिकता देते हुए आवश्यक मंजूरी के बाद ईसीएचएस सूची में शामिल किया जा सकता है।

New ECHS Advisory: What to Do If Medicines Are Not Available at Dispensaries? New Guidelines Issued by the Army

क्या है इसका उद्देश्य?

इस नीति का मुख्य उद्देश्य ईसीएचएस प्रणाली को और अधिक सशक्त और प्रभावी बनाना है, ताकि लाभार्थियों को तुरंत और बिना किसी रुकावट के उनकी चिकित्सा आवश्यकताओं के अनुसार दवाइयां मिल सकें। साथ ही, यह सुनिश्चित किया जाएगा कि केवल वही दवाइयां दी जाएं, जो सही दिशा-निर्देशों और अप्रूवल के तहत हों, जिससे सिस्टम में ट्रांसपेरेंसी बनी रहे और समयबद्ध तरीके से सेवा प्रदान की जा सके।

वहीं, इस नए निर्देश से ईसीएचएस लाभार्थियों के लिए दवाइयों की उपलब्धता को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। इसके साथ ही, सिस्टम जनरेटेड एनए की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि सभी लाभार्थियों को उनकी जरूरत की दवाइयां समय पर मिल सकें। यह नीति ईसीएचएस के तहत सेवा देने वाले सभी संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण है और इस पर सख्त पालन किया जाएगा।

One Month of India-China Disengagement: क्या चीन LAC पर रहा है पेट्रोलिंग समझौते का पालन? नियमित गश्त को लेकर यह बात आई सामने

One Month of India-China Disengagement: Has China Adhered to Patrolling Agreement on LAC? Regular Patrols Proceeding Smoothly
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One Month of India-China Disengagement: भारत और चीन के बीच डिसएंगेजमेंट के एक महीने बाद, दोनों देशों ने लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर स्थित डेपसांग और डेमचोक क्षेत्रों में नियमित पेट्रोलिंग शुरू कर दी है। यह पेट्रोलिंग निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार हो रही है, जो 21 अक्टूबर को समझौते के बाद फिर से शुरू हुई है।

One Month of India-China Disengagement: Has China Adhered to Patrolling Agreement on LAC? Regular Patrols Proceeding Smoothly
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सूत्रों के अनुसार, डिसएंगेजमेंट समझौता होने के बाद, दोनों देशों ने डेपसांग और डेमचोक क्षेत्रों में साप्ताहिक पेट्रोलिंग की योजना बनाई थी। इस प्रोटोकॉल के तहत, दोनों देश हर सप्ताह एक-एक पेट्रोलिंग करेंगे, जिसके चलते दोनों देशों की तरफ से सप्ताह में दो पेट्रोलिंग की जा रही है।

पिछले महीने में भारतीय सैनिकों ने अब तक आठ पेट्रोलिंग पूरी की हैं, और यह सभी पेट्रोलिंग डिसएंगेजमेंट योजना के अनुसार सही तरीके से की गई हैं। भारतीय सैनिक उन सभी स्थानों पर पेट्रोलिंग कर रहे हैं, जहां वे अप्रैल 2020 से पहले नियमित रूप से गश्त करते थे। डेपसांग में पांच पेट्रोलिंग पॉइंट्स (PPs) निर्धारित हैं, जबकि डेमचोक में दो पॉइंट्स पर पेट्रोलिंग की योजना बनाई गई है।

सूत्रों ने बताया, “प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन किया जा रहा है और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी नहीं आई है। पेट्रोलिंग की प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है और यह निर्धारित योजना के अनुसार की जा रही है।”

इस बीच, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद के मौजूदा सत्र में LAC की स्थिति पर एक बयान देने की योजना बनाई है। इसमें डिसएंगेजमेंट और पेट्रोलिंग के बारे में जानकारी दी जाएगी। उनके बयान से क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए उठाए जा रहे कदमों के बारे में और भी जानकारी मिलने की संभावना है।

डेपसांग और डेमचोक क्षेत्रों में डिसएंगेजमेंट और पेट्रोलिंग की नियमित प्रक्रिया एक महत्वपूर्ण कदम है, जो LAC पर सामान्य स्थिति बहाल करने की दिशा में अहम है। यह LAC पर 2020 में गालवान घाटी की झड़प के बाद से चल रही तनावपूर्ण स्थिति को शांत करने की ओर बढ़ाया गया कदम है।

हालांकि, वर्तमान समझौता सीमा विवाद को सुलझाने में एक अहम पड़ाव साबित हुआ है, लेकिन अभी भी सभी तनावपूर्ण बिंदुओं पर पूरी तरह से डि-एस्केलेशन नहीं हुआ है। आगामी महीनों में दोनों देशों के बीच इस प्रोटोकॉल का पालन जारी रहने की उम्मीद है, जो LAC पर हालात को स्थिर रखने के लिए विश्वास बहाली के कदम के तौर पर कार्य करेगा।

LAC पर चल रहे पेट्रोलिंग समझौते के बावजूद, भारतीय सेना क्षेत्र में अपनी तैनाती बनाए रखे हुए है। यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए भारतीय सैनिक पूरी तरह से तैयार रहें।

भारत और चीन के बीच LAC पर शांति बनाए रखने की प्रक्रिया जारी है और यह दोनों देशों के रिश्तों में स्थिरता लाने के लिए एक अहम कदम साबित हो सकता है।

ARMY CHIEF: मिलिट पुणे में युवा सैन्य अधिकारियों से मिले सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी, मॉर्डन वारफेयर की चुनौतियों पर साझा किए विचार

Army Chief General Upendra Dwivedi Meets Young Military Officers at MILIT Pune, Shares Insights on Modern Warfare Challenges

ARMY CHIEF GENERAL UPENDRA DWIVEDI: पुणे स्थित Military Institute of Technology (MILIT) मिलिट संस्थान के मेहरा ऑडिटोरियम में भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी का भाषण सेना के युवा कमांडरों और अगली पीढ़ी के सैन्य नेताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया। रक्षा सेवा तकनीकी कर्मचारी पाठ्यक्रम (DSTSC) में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे भारतीय सेना के अधिकारियों को संबोधित करते हुए, जनरल द्विवेदी ने उन्हें मॉर्डन वारफेयर के चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में आत्मविश्वास और जोश से सामना करने के लिए प्रेरित किया।

Army Chief General Upendra Dwivedi Meets Young Military Officers at MILIT Pune, Shares Insights on Modern Warfare Challenges

 

अपने संबोधन में जनरल द्विवेदी ने युद्ध के परिदृश्य में हो रहे तेजी से बदलाव पर जोर देते हुए कहा कि सैन्य तैयारियां केवल एक आवश्यकता नहीं हैं, बल्कि एक कला है। उन्होंने कहा कि यह एक सामूहिक प्रयास है जिसमें रणनीति और सटीकता की आवश्यकता होती है। भारतीय संदर्भ में सामने आने वाली चुनौतियों का उल्लेख करते हुए, उन्होंने भारतीय सेना द्वारा किए जा रहे बदलावों और सुधारों पर प्रकाश डाला। जनरल द्विवेदी ने अधिकारियों से कहा कि वे लचीलापन, अनुकूलता और दृढ़ संकल्प के साथ परिवर्तन को अपनाएं, जो कि सेना सुधारों का हिस्सा हैं।

जनरल द्विवेदी ने भारतीय सेना के राष्ट्र निर्माण में अद्वितीय योगदान पर गर्व व्यक्त करते हुए सेना की भूमिका को सराहा। उन्होंने कहा कि सेना प्राकृतिक आपदाओं के समय मानवीय सहायता प्रदान करने में अग्रणी रही है। इसके अलावा, भारतीय सेना संकटग्रस्त इलाकों से भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालने में भी आगे रही है। जो दिखाता है कि भारतीय सेना केवल लड़ाई में ही नहीं, बल्कि मानवीय कार्यों में भी अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देती है।

Army Chief General Upendra Dwivedi Meets Young Military Officers at MILIT Pune, Shares Insights on Modern Warfare Challenges

जनरल द्विवेदी ने सैन्य-राजनयिक सहयोग के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि बाहरी खतरों का मुकाबला करने के लिए एकता और समन्वय महत्वपूर्ण हैं। ऑपरेशनल रेडिनेस, रणनीतिक समन्वय और एकजुटता ही एक मजबूत सेना की नींव हैं। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे सैन्य युद्ध विधियों के उपकरणों और तकनीकों को नए दृष्टिकोण से देखें और फिर से कल्पना करें।

सैन्य प्रमुख ने मिलिट संस्थान की भूमिका की सराहना की, जो न केवल भारतीय सशस्त्र बलों के लिए बल्कि मित्रवत विदेशी देशों (FFCs) के लिए भी नेताओं का निर्माण करता है। उन्होंने मिलिट को उत्कृष्टता का प्रतीक माना, जहां आने वाले कल के नेता दिमाग, चरित्र और उद्देश्य के साथ तैयार होते हैं, जिससे फैकल्टी और छात्रों दोनों को प्रेरणा मिलती है।

मिलिट के कमांडेंट रियर एडमिरल नेल्सन डी’सूजा, एनएम ने जनरल द्विवेदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके शब्दों ने स्टाफ और छात्र अधिकारियों में एक नया उत्साह और उद्देश्य की भावना जागृत की है, जो उन्हें महान ऊंचाइयों तक पहुंचने में मार्गदर्शन करेंगे। यह साहस और समर्पण के सिद्धांतों को अपनाने के लिए प्रेरित करेगा।

K9 Vajra Guns: भारतीय सेना को जल्द मिल सकती हैं 100 और K-9 वज्र तोपें, कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी के सामने प्रपोजल पेश करने की तैयारी

K9 Vajra Artillery Guns: K9 Vajra Guns, Indian Army Likely to Get 100 More K9 Vajra Howitzers, Proposal to Be Presented to CCS Soon

K9 Vajra Guns: भारतीय सेना की मारक क्षमता को और मजबूत करने के लिए 100 और K-9 वज्र सेल्फ-प्रोपेल्ड होवित्ज़र तोपों की मांग का प्रस्ताव जल्द ही कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) के सामने रखा जाएगा। इस प्रस्ताव पर फैसला होते ही लार्सन एंड टूब्रो (L&T) को इन तोपों की मैन्युफैक्चरिंग शुरू करने का आदेश जारी किया जाएगा।

K9 Vajra Guns: Indian Army Likely to Get 100 More K9 Vajra Howitzers, Proposal to Be Presented to CCS Soon

 

K9 Vajra Guns: भारत की सीमा सुरक्षा का मजबूत हथियार

K-9 वज्र तोपें 155 मिमी, 52-कैलिबर की ट्रैक सेल्फ-प्रोपेल्ड गन हैं। इन्हें पहले ही चीन के साथ लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) और पाकिस्तान के साथ नियंत्रण रेखा (LoC) पर तैनात किया जा चुका है। इन तोपों ने अत्यधिक गर्मी और ठंडे मौसम में अपनी उपयोगिता साबित की है।

गुजरात के “आर्मर्ड सिस्टम्स कॉम्प्लेक्स” में L&T इन तोपों को बना रही है। इन्हें बनाने की टेक्नोलॉजी दक्षिण कोरियाई रक्षा कंपनी हनवा डिफेंस से ली गई है, लेकिन इसे भारत में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय स्तर पर कई कंपोनेंट्स के साथ बनाया गया है। K-9 वज्र, हनवा डिफेंस के बनाए K-9 थंडर सेल्फ-प्रोपेल्ड होवित्जर का एक कस्टमाइज्ड वैरिएंट है। एलएंडटी डिफेंस ने भारतीय सेना की जरूरतों को पूरा करने के लिए K-9 थंडर को भारत के मुताबिक तैयार किया है। इस कस्टमाइजेशन में 18,000 से अधिक भारत में निर्मितत कंपोनेंट्स का उपयोग किया गया है।

वज्र तोपों की खासियत

  • एक K-9 वज्र तोप का वजन लगभग 50 टन है।
  • यह तोप 50 किलोमीटर से भी अधिक दूरी तक गोलाबारी कर सकती है।
  • आधुनिक तकनीक से लैस यह तोप भारतीय सेना की फायर पावर को कई गुना बढ़ा सकती है।

वहीं, भारतीय सेना भी K-9 वज्र की प्रदर्शन क्षमताओं से संतुष्ट है। इसकी प्रभावशीलता को देखते हुए, इसके नए बैच में विशेष विंटर क्लाइमेटाइजेशन किट्स लगाई जाएंगी, जो इन्हें लद्दाख के सर्दियों के कठोर उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन करने में उपयोगी बनाएंगी।

2017 के बाद दूसरी बड़ी डील

L&T को 2017 में पहली बार 100 K-9 वज्र तोपों का ऑर्डर मिला था, जिसे 2021 में तय समय से पहले पूरा कर लिया गया। यह डील लगभग 4500 करोड़ ररुपये की थी। हालांकि, इस बार 100 तोपों की लागत इससे अधिक होने की संभावना है।

K9 Vajra Guns: Indian Army Likely to Get 100 More K9 Vajra Howitzers, Proposal to Be Presented to CCS Soon

प्रस्ताव में देरी की वजह

सूत्रों के मुताबिक, सेना ने एक साल पहले ही इन तोपों की खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी थी, लेकिन 2024 में होने वाले लोकसभा चुनावों के कारण इस प्रक्रिया में देरी हो रही है।

आत्मनिर्भर भारत की ओर एक और कदम

L&T ने K-9 वज्र तोपों में बड़ी संख्या में स्वदेशी घटकों को शामिल कर इसे “मेक इन इंडिया” का हिस्सा बनाया है। यह कदम न केवल रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देता है, बल्कि भारत को वैश्विक रक्षा बाजार में एक मजबूत स्थान दिलाने में भी मदद करता है।

सेना की फायर पावर में बढ़ोतरी

K-9 वज्र तोपों का नया बैच सेना की ताकत को और बढ़ाएगा। इन तोपों की तैनाती से भारत की सीमा सुरक्षा और मजबूत होगी, खासकर उन क्षेत्रों में जहां चीन और पाकिस्तान के साथ तनाव बना रहता है। वहीं, भारतीय सेना का यह कदम न केवल उसकी रणनीतिक ताकत को बढ़ाएगा, बल्कि यह भारत के रक्षा उत्पादन और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। अब देखना होगा कि कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी इस प्रस्ताव को कब मंजूरी देती है और भारतीय सेना को कब ये नई तोपें मिलती हैं।

Border Tourism: जल्द ही पर्यटकों के लिए खुलेगा गलवान! टूरिज्म बढ़ाने के लिए सेना खोलेगी कई सीमा से सटे इलाके

Border Tourism: Galwan to Open Soon for Visitors as Army Unlocks Border Areas to Boost Tourism
Galwan War Memorial

Border Tourism: भारतीय सेना ने सीमा से इलाकों में पर्यटन को बढ़ावा देने और दूरस्थ क्षेत्रों के विकास के लिए एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है। जल्द ही, लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) के पास के कुछ प्रतिबंधित क्षेत्रों को पर्यटकों के लिए खोलने की योजना है। यह कदम न केवल देश की सीमाओं को लोगों के करीब लाने का प्रयास है, बल्कि सीमावर्ती इलाकों के सामाजिक और आर्थिक विकास को भी गति देगा।

Border Tourism: Galwan to Open Soon for Visitors as Army Unlocks Border Areas to Boost Tourism
Galwan War Memorial

Border Tourism: वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत पहल

सरकार के वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत यह पहल की जा रही है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सीमावर्ती इलाकों में कनेक्टिविटी, पर्यटन और सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है।

सूत्रों के अनुसार, इस योजना में गलवान मेमोरियल को पर्यटकों के लिए खोलने पर भी विचार किया जा रहा है। बता दें कि रेजांग ला वॉर मेमोरियल पहले से ही पर्यटकों के लिए खुला है। इसके अलावा, लद्दाख के त्रिशूल और रंगला जैसे स्थानों को भी पर्यटकों के लिए खोला जाएगा। इन क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट का काम तेजी से चल रहा है।

इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर जोर

भारतीय सेना और बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन (बीआरओ) ने पिछले चार वर्षों में सीमा पर बुनियादी ढांचे के विकास में उल्लेखनीय प्रगति की है।

  • 8500 किलोमीटर सड़कों का निर्माण: खासकर एलएसी के पास।
  • 400 स्थायी पुलों का निर्माण: इसमें सेला और शिंकुन ला सुरंगों जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट शामिल हैं।
  • भारत नेट कार्यक्रम के तहत हाई-स्पीड इंटरनेट: 1,500 गांवों तक इंटरनेट की सुविधा दी गई है, जिससे 7,000 से अधिक सीमावर्ती गांवों को जोड़ा गया है।

बुनियादी ढांचा में ये सुधार न केवल दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच को आसान बनाएंगे, बल्कि पर्यटन और आर्थिक विकास को भी बढ़ावा देंगे।

Border Tourism: Galwan to Open Soon for Visitors as Army Unlocks Border Areas to Boost Tourism
Galwan War Memorial

पर्यटकों की बढ़ती रुचि

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में बताया कि पिछले चार वर्षों में लद्दाख, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में पर्यटकों की संख्या में 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इसके पीछे बेहतर बुनियादी ढांचा और सीमाई पर्यटन के प्रति बढ़ती दिलचस्पी मुख्य कारण हैं।

स्थानीय समुदायों को मदद

सीमाई इलाकों में केवल बुनियादी ढांचे का विकास ही नहीं हो रहा, बल्कि भारतीय सेना स्थानीय समुदायों की मदद में भी अहम भूमिका निभा रही है।

  • स्वास्थ्य सेवाएं और राहत कार्य: सेना ग्रामीण इलाकों में चिकित्सा सहायता और आपदा राहत सेवाएं प्रदान कर रही है।
  • जीवन स्तर सुधारने का प्रयास: सेना की यह पहल सीमावर्ती इलाकों के निवासियों के जीवन स्तर को बेहतर बना रही है।

मुख्यधारा से जोड़ने की पहल

प्रतिबंधित क्षेत्रों को पर्यटन के लिए खोलने का यह निर्णय सीमावर्ती इलाकों को राष्ट्रीय मुख्यधारा में शामिल करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसके जरिए इन इलाकों की सांस्कृतिक और भौगोलिक पहचान को भी बढ़ावा मिलेगा भारतीय सेना और सरकार की यह पहल न केवल सीमा क्षेत्रों को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी, बल्कि देशवासियों को अपनी सीमाओं और वहां की जीवनशैली से जोड़ने में भी मदद करेगी। इस फैसले से न केवल इन क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय समुदायों का भी सशक्तिकरण होगा।

Women COs in Indian Army: भारतीय सेना में महिला कमांडिंग अफसर को लेकर चिंताएं, कोर कमांडर ने लिखा रिव्यू करें पॉलिसी, बढ़ रहे इगो प्रॉब्लम के मामले

Women COs in Indian Army: Concerns Raised, Corps Commander Calls for Policy Review Amid Growing Ego Issues

Women COs in Indian Army: भारतीय सेना में महिला कमांडिंग अधिकारियों (सीओ) की भूमिका को लेकर एक बड़ी बहस छिड़ गई है। सेना की 17वीं कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल राजीव पुरी ने सेना के ईस्टर्न आर्मी कमांडर सहित सेना के एमएस (मिलिट्री सेक्रेटरी) और एजी (Adjutant General)) को भेजे गए फीडबैक में कहा है कि महिला अधिकारियों को सेना की यूनिट कमांड करते हुए एक साल से ज्यादा का वक्त हो गया है। यह जरूरी है कि उनकी परफॉर्मेंशन का प्रैक्टिकल तरीके से मूल्यांकन किया जाए। लेफ्टिनेंट जनरल राजीव पुरी ने महिला सीओ के प्रदर्शन और उनसे जुड़े मुद्दों पर अपने अनुभव साझा किए हैं। यह पत्र उन्होंने 17वीं कोर के कोर कमांडर के रूप में पूर्वी कमान के जीओसी-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल राम चंदर तिवारी को लिखा था।

Women COs in Indian Army: Concerns Raised, Corps Commander Calls for Policy Review Amid Growing Ego Issues

1 अक्टूबर 2024 को लिखा गए इस पत्र में लेफ्टिनेंट जनरल पुरी ने महिला अधिकारियों के प्रदर्शन के एक साल का विश्लेषण लिखा है। पत्र में उठाए गए मुद्दों ने सेना और रक्षा विशेषज्ञों के बीच महिला नेतृत्व को लेकर व्यापक चर्चा को जन्म दिया है। पत्र में महिला अधिकारियों के नेतृत्व में आने वाली चुनौतियों और कमियों पर विस्तार से चर्चा की गई है।

1. आपसी संबंध और संवाद की कमी

लेफ्टिनेंट जनरल पुरी ने कहा कि महिला सीओ के नेतृत्व वाली यूनिटों में ऑफिसर मैनेजमेंट की समस्याएं बढ़ गई हैं। उन्होंने इसे महिला अधिकारियों की पर्सनल और प्रोफेशनल जरूरतों को समझने में कमी से जोड़ा। उनका कहना था कि महिला सीओ अक्सर विवादों को संवाद से हल करने की बजाय अधिकारवादी दृष्टिकोण अपनाती हैं।

2. बार-बार शिकायतें करना

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि महिला सीओ छोटी-छोटी समस्याओं को सीनियर अधिकारियों तक ले जाती हैं, बजाय इसके कि वे उन्हें अपनी यूनिट में हल करें। इसे ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट की कमी के रूप में देखा गया।

3. केंद्रीकृत नेतृत्व शैली

महिला सीओ के नेतृत्व में निर्णय लेने की प्रक्रिया में अधीनस्थ अधिकारियों को शामिल नहीं किया जाता। पत्र में इसे “My Way or Highway” मानसिकता कहा गया, जो अधीनस्थ अधिकारियों में असंतोष का कारण बनती है।

4. अधिकार और एंपैथी का संतुलन

पत्र में कुछ घटनाओं का जिक्र है, जहां महिला सीओ ने व्यक्तिगत सुविधाओं को प्राथमिकता दी। उदाहरण के तौर पर, एक महिला सीओ ने यूनिट के सूबेदार मेजर से अपनी गाड़ी का दरवाजा खोलने को कहा। यह अपने अधिकारों के अनुचित इस्तेमाल का संकेत है।

5. एंपैथी की कमी

पत्र में कहा गया कि महिला सीओ संवेदनशीलता की कमी के कारण अपने अधीनस्थ कर्मचारियों की वास्तविक जरूरतों को समझने में असफल रहीं हैं।

6. नेतृत्व में अधिक सख्ती

महिला अधिकारी, पारंपरिक रूप से पुरुष-प्रधान वातावरण में खुद को साबित करने के प्रयास में, अधिक सख्त नेतृत्व शैली अपनाती हैं, जो संतुलित नेतृत्व में बाधा डालती है।

7. छोटी उपलब्धियों का अधिक उत्सव

महिला अधिकारियों की छोटी-छोटी उपलब्धियों का ज्यादा जश्न मनाने की प्रवृत्ति ने गलत उम्मीदें पैदा की हैं, जिससे नेतृत्व की गतिशीलता प्रभावित होती है।

सुधारात्मक उपायों के सुझाव

पत्र में इन समस्याओं को हल करने के लिए कई सुझाव दिए गए हैं:

  • जेंडर-न्यूट्रल पोस्टिंग नीति: महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए एक समान नीति लागू की जाए।
  • बेहतर प्रशिक्षण: महिला अधिकारियों को नेतृत्व और निर्णय लेने के कौशल में बेहतर प्रशिक्षण दिया जाए।
  • प्रतीकात्मकता कम करना: महिला अधिकारियों को केवल सशक्तिकरण दिखाने के लिए प्रतीकात्मक भूमिकाओं में नहीं रखा जाए।
  • स्पाउस कोऑर्डिनेटेड पोस्टिंग पर पुनर्विचार: इस नीति को अधिक व्यावहारिक बनाया जाए।

चर्चा और विवाद

लेफ्टिनेंट जनरल पुरी का यह पत्र सेना के भीतर और रक्षा विशेषज्ञों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। यह पत्र तब आया है जब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद महिला अधिकारियों को कमांड भूमिकाओं में नियुक्त किया गया है।

हालांकि, सेना के कुछ अधिकारियों का कहना है कि यह पत्र सिर्फ लेफ्टिनेंट जनरल पुरी के व्यक्तिगत अवलोकन हो सकते हैं, क्योंकि इसका आधार 17वीं कोर की केवल 7 महिला अधिकारियों पर आधारित है। सेना में वर्तमान में लगभग 100 महिला अधिकारी कमांडिंग भूमिकाओं में हैं।

भारतीय सेना में महिला अधिकारियों को नेतृत्व भूमिकाएं देना लैंगिक समानता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। हालांकि, यह प्रक्रिया शुरुआती दौर में है और इसमें सुधार की गुंजाइश है। वहीं, महिला अधिकारियों के सामने आईं चुनौतियां न केवल उनके नेतृत्व कौशल को मजबूत करने की जरूरत को दर्शाती हैं, बल्कि यह भी दिखाती हैं कि सेना को अपनी नीतियों और प्रशिक्षण प्रक्रियाओं में बदलाव करना होगा। यह पहल महिला सशक्तिकरण के साथ-साथ सेना को अधिक मजबूत और समावेशी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।