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Indigenous Fighter Jet Engine: स्वदेशी जेट इंजन बनाने में कहां फंसा है पेंच? क्या सफरान और रोल्स-रॉयस से बातचीत हो गई फेल? या रिवर्स इंजीनियरिंग है आखिरी जुगाड़!

Indigenous Fighter Jet Engine

Indigenous Fighter Jet Engine: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को देश में स्वदेशी लड़ाकू विमानों के लिए स्वदेशी जेट इंजनों को देश में ही बनाने की अपील की। अपने 103 मिनट के जोरदार भाषाण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वदेशी जेट इंजन बनाने पर जोर देते हुए कहा कि भारत के युवा वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, प्रोफेशनल्स और युवाओं को मेड-इन-इंडिया फाइटर जेट्स के लिए खुद के जेट इंजन डेवलप करने चाहिए। उन्होंने कहा कि जेट इंजनों का विकास सुनिश्चित करेगा कि भविष्य की रक्षा तकनीक पूरी तरह से स्वदेशी हो, जो 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लिए जरूरी है।

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Indigenous Fighter Jet Engine: स्वदेशी तेजस को नहीं मिल रहा इंजन

दरअसल समस्या भारत के स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस (LCA Mk-1A) के इंजन को लेकर है। इंजन की कमी के चलते यह प्रोग्राम जरूरत से ज्यादा पीछे चल रहा है। इसकी वजह अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस से एफ404-आईएन20 इंजनों की सप्लाई में देरी है। हालांकि जीई पिछले कुछ महीनों से हर माह एक इंजन सप्लाई कर रहा है, लेकिन जरूरत इससे ज्यादा है। वहीं, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) इसके एडवांस वर्जन एलसीए एमके-2 कार्यक्रम के लिए भारत में एफ414 इंजनों के जॉइंट प्रोडक्शन के लिए जीई एयरोस्पेस से बातचीत कर रहा है। इस सौदे में 80 फीसदी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर होगा और इसकी कीमत तकरीबन 1 अरब डॉलर है।

Indigenous Fighter Jet Engine: टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को लेकर मतभेद

वहीं, भारत के लिए स्वदेशी एयरो इंजन बनाना बड़ी चुनौती है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अप्रैल में कहा था कि देश लड़ाकू विमानों का इंजन बनाने के लिए वैश्विक कंपनियों से बातचीत जारी है, जिनमें सफरान और रोल्स-रॉयस जैसी कंपनियां भी शामिल हैं। भारत और फ्रांस की सफरान कंपनी के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है। सफरान ने भारतीय इंजन प्रोजेक्ट्स में सहयोग की इच्छा जताई है, लेकिन टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को लेकर मतभेद बने हुए हैं। इसी तरह ब्रिटेन की रोल्स रॉयस ने भी भारत को इंजन डेवलपमेंट में मदद की पेशकश की है। लेकिन लागत और तकनीकी साझेदारी को लेकर ठोस नतीजा नहीं निकला है।

Indigenous Fighter Jet Engine
Cavari Engine

Indigenous Fighter Jet Engine: 80 के दशक में शुरू हुआ था कावेरी प्रोजेक्ट

दरअसल भारत अभी से नहीं बल्कि बहुत पहले से स्वदेशी इंजन बनाने के लिए प्रयासरत है। भारत ने 1980 के दशक में कावेरी इंजन प्रोजेक्ट शुरू किया था। यह इंजन तेजस विमान के लिए इस्तेमाल होना था। लेकिन तकनीकी दिक्कतों और जरूरी थ्रस्ट की कमी के चलते यह प्रोजेक्ट असफल हो गया। इसके बावजूद कावेरी प्रोजेक्ट से भारतीय वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बड़ी सीख मिली। आज भी इसका इस्तेमाल रिसर्च और ड्रोन इंजन प्रोग्राम्स में किया जा रहा है।

Indigenous Fighter Jet Engine: चार देशों के पास ही इंजन बनाने की क्षमता

भारत का गैस टरबाइन अनुसंधान संस्थान (Gas Turbine Research Establishment- GTRE) डीआरडीओ (DRDO) का ही हिस्सा है। जो भारत के स्वदेशी एयरो-इंजन विकास कार्यक्रम में जुटा हुआ है। जीटीआरई (GTRE) के निदेशक डॉ. श्रीराममूर्ति कहते हैं, पूरी दुनिया में केवल चार देश अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और रूस ही लड़ाकू विमान के लिए उड़ने योग्य इंजन बना पाए हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यूरोपियन EJ200 इंजन का डेवलपमेंट 1982 में शुरू हुआ और पहली बार 2001 में सर्विस में आया। यह इंजन 90 किलो न्यूटन का थ्रस्ट देता था। इसे बनाने 20 साल लगे और लगभग 2.5 अरब डॉलर की लागत आई। इसी तरह फ्रांस का M88 इंजन 1978 में शुरू हुआ और 1996 में सेवा में आया। इसे बनाने में भी लगभग 20 साल लगे और लगभग 2 बिलियन डॉलर का खर्च आया।

उन्होंने कहा कि दुनिया में पहले टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट का काम शुरू होता ह, जहां टेक्नोलॉजी रेडिनेस लेवल (टीआरएल) को लेवल 5 तक पहुंचाया जाता है, जिसके बाद इंजन का डेवलपमेंट शुरू होता है, जिसमें कंपोनेंट बनाने में 5-6 साल और कुल इंजन डेवलपमेंट में 10 साल का समय लगता है।

Indigenous Fighter Jet Engine: भारत में हाई एल्टीट्यूड टेस्टिंग फैसिलिटी नहीं

वह बताते हैं कि कावेरी इंजन का काम टीआरएल 2-3 से ही शुरू कर दिया गया। टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट और इंजन डेवलपमेंट प्रोग्राम दोनों साथ-साथ चलाए गए। डिजाइन बार-बार बदलना पड़ा, जरूरी मटेरियल और टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी रही। कई अहम हिस्सों के लिए विदेशी मदद लेनी पड़ी। खास तौर पर महत्वपूर्ण फोर्जिंग्स के लिए 40,000 टन हाइड्रोलिक प्रेस की जरूरत थी जो भारत में नहीं थी, इसलिए विदेश पर निर्भर रहना पड़ा। नतीजतन समय पर इंजन बनाने में देरी हुई। लेकिन बावजूद इसके हमने इंजन बनाया गया और जीटी विशेष फ्लाइंग टेस्ट बेड (FTB) में अधिकतम रेटिंग पर टेस्टिंग की गई। इंजन की पूरी टेस्टिंग करने के लिए भारत में हाई एल्टीट्यूड टेस्टिंग फैसिलिटी नहीं थी। इसलिए दो इंजनों को विदेश ले जाया गया। जहां फैन फ्लटर और आफ्टरबर्नर स्क्रीन जैसी दिक्कतें आईं। फैन या कंप्रेसर के लिए 20 मेगावाट टेस्टिंग फैसिलिटी की जरूरत थी।

Indigenous Fighter Jet Engine
LCA Tejas Mk1A Fighter Jet

जिसके चलते कुछ कमी रही, जिससे एलसीए को समय पर सर्टिफाइड इंजन नहीं दिया जा सका। वह बताते हैं कि दुनिया में टीआरएल 4-5 तक पहुंचाने का काम अकादमिक और आरएंडडी संस्थान करते हैं। उस समय अकादमिक, आरएंडडी संस्थान और उद्योग के बीच सीमित सहयोग था। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि इसे राष्ट्रीय मिशन के तौर पर अपनाना चाहिए, जहां अकादमिक, स्टार्टअप, आरएंडडी संस्थान और इंडस्ट्रीज को इंटीग्रेट किया जा सके।

डॉ. श्रीराममूर्ति के मुताबिक, कावेरी इंजन पर खर्च 250 मिलियन डॉलर था, जबकि दुनिया 2.5 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च कर रही थी। उस वक्त टीम की कमी थी, जिसकी जवाबदेही और जिम्मेदारी भी जरूरी होती है। यह न केवल कावेरी के लिए बल्कि 25 किलो न्यूटन हिंदुस्तान टर्बो फैन इंजन या 1200 किलोवाट हिंदुस्तान टर्बो शाफ्ट इंजन के लिए भी है।

बनाए 9 कावेरी इंजन

वह कहते हैं फिर भी, 9 कावेरी इंजन बनाए गए, जिन पर 3000 घंटे से ज्यादा टेस्टिंग हुई। 18 घंटे ऊंचाई पर भी परीक्षण किया गया और 57 घंटे एफटीबी किए गए और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुए एक ऑडिट ने भी यह माना है कि कावेरी इंजन उड़ान भरने लायक बनाया जा सकता है। हालांकि यह एलसीए (लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) के लिए समय पर सर्टिफाइड नहीं हो सका।

उन्होंने बताया कि इंजन का डिजाइन शुरू में LCA (लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) के लिए था, लेकिन देरी हुई। इसके बावजूद भारत ने इस इंजन को आगे बढ़ाते हुए कई नई चीजें हासिल कीं। देरी के बावजूद अब भारत ने बहुत कुछ सीख लिया है इंजन बनाने के लिए अपनी खुद की तकनीकी क्षमता तैयार कर ली है। इसी इंजन के साथ हाइड्रोलिक पंप और पावर सिस्टम जोड़े गए। भारत ने चौथी पीढ़ी के इंजन बनाने का अनुभव हासिल कर लिया है। “स्मार्ट इंजन” बनाने का काम किया गया, जो खास मिशनों में इस्तेमाल हो सकता है। हमारी प्रयोगशालाओं ने टर्बोचार्जर भी बनाया और सर्टिफाइड किया।

110 किलो-न्यूटन का इंजन है लक्ष्य

क्या भारत वेट इंजन (जो आफ्टरबर्नर के साथ अधिक ताकत देता है) पर काम करेगा, क्योंकि चर्चा में हमेशा 110 किलो-न्यूटन (AMCA इंजन) की ही बात होती है। इस पर जीटीआरई के निदेशक डॉ. श्रीराममूर्ति ने जवाब दिया, “हमारा लक्ष्य 110 किलो-न्यूटन का इंजन है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि कंपेरिजन करते वक्त हमें ध्यान रखना चाहिए कि जैसे अमेरिका का एफ414 इंजन 120 किलो-न्यूटन की ताकत देता है, वैसे ही हमारा क्राइटेरिया होगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारत इस काम को अंतरराष्ट्रीय इंजन कंपनियों के साथ मिलकर, यानी को-डिजाइन और को-डेवलपमेंट के जरिए आगे बढ़ाएगा। साथ ही, जीटीआरई और डिफेंस रिसर्च इंटीट्यूशंस ने पहले से ही एडवांस टेक्नोलॉजी पर काम शुरू कर दिया है।

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इसमें ऐसी खास सामग्री का डेवलपमेंट शामिल है, जो बहुत अधिक तापमान सहन कर सके। इसके साथ ही नई डिजाइन तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे इंजन का डिजाइन जल्दी तैयार हो सके। इन प्रयासों में देश के विभिन्न रिसर्च इंस्टीट्यूशंस और विश्वविद्यालयों का भी सहयोग लिया जा रहा है, ताकि तकनीकी विकास को और मजबूत बनाया जा सके।

रिवर्स इंजीनियरिंग के जरिये बनाए इंजन

एयर वाइस मार्शल सुरेश सिंह का कहना है कि जीटीआरई ने बेहतरीन काम किया है लेकिन सही परिणाम नहीं मिला। सुधार हमेशा होते हैं। गलत क्या हुआ, इसे स्वीकार किए बिना सुधार नहीं होगा। वह कहते हैं कि इंजन मानव बुद्धि की बेहतरीन खोज है और यही वायुसेना को गति, फुर्ती और निर्णायक शक्ति देता है। लेकिन किसी भी विदेशी कंपनी से पूरी तकनीक मिलने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। कोई भी देश 100% तकनीक साझा नहीं करता क्योंकि इससे उसका आर्थिक और सामरिक हित प्रभावित होता है।

इसलिए भारत को आत्मनिर्भर होकर इंजन बनाना होगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि ब्रिटेन, अमेरिका और रूस ने शुरुआती दिनों में रिवर्स इंजीनियरिंग के जरिये इंजन बनाए। भारत को भी इसी तरह तेजी से आगे बढ़ना होगा। एवीएम सुरेश सिंह के मुताबिक, भारत में एक मजबूत एयरो इंजन विकसित करने के लिए मिशन एयरो इंजन शुरू करना ताहिए। इंजन को 20 हिस्सों में बांटकर छोटे-मध्यम उद्योगों को सौंपें, जो बेसिक रिसर्च, डेवलपमेंट, टेस्टिंग और इंटीग्रेशन का काम करें। एक कंसोर्टियम आखिरी इंटीग्रेशन और टेस्टिंग की जिम्मेदारी लेगा। इसमें पूरा निवेश सरकार की तरफ से हो। कंसोर्टियम का लीड पार्टनर स्थायी रहेगा, लेकिन अन्य पार्टनर रिस्क और रेवेन्यू के आधार पर बदल सकते हैं।

10 से 12 साल लग सकते हैं इंजन बनाने में

वैंप टेक्नोलॉजीज के चीफ वेंकट राजू कहते हैं, भारत का उद्योग अब इस चुनौती के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने सबसे पहले जीटीआरई (GTRE) के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत स्पेशल कंपोनेंट्स और इक्विपमेंट्स अब देश में ही बना सकता है। फ्यूल सिस्टम बनाने का अनुभव भी उद्योग के पास मौजूद है। पहले भारतीय कंपनियां केवल कुछ पुर्जे बनाती थीं, लेकिन अब वे पार्ट्स से सिस्टम तक का सफर तय कर चुकी हैं।

हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि टेस्टिंग के लिए सरकार का सहयोग बेहद जरूरी है। हाई एल्टीट्यूड टेस्टिंग, डिजाइन टूल्स, सिमुलेशन, मटेरियल इंजीनियरिंग और प्रिसीजन मैन्युफैक्चरिंग में सरकार के सहयोग की जरूरत है। उन्होंने कहा, रणनीतिक तौर पर से विदेशी कंपनियों से साझेदारी समस्या का हल नहीं है, क्योंकि इससे सही टेक्नोलॉजी हासिल नहीं हो सकती। लेकिन तत्कालिक जरूरतों को देखते हुए, सीमित सहयोग पर काम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पूरे प्रोजेक्ट के लिए लगभग 12 से 15 हजार करोड़ रुपये का बजट लगेगा। इसमें विकास, उत्पादन और बड़े पैमाने पर निर्माण सब शामिल होंगे और इसे पूरा करने में 10 से 12 साल लग सकते हैं। क्योंकि सिर्फ टेस्टिंग फेज में ही 5 साल का समय लग जाएगा, इसलिए इस पर जल्द से जल्द फैसला लेना जरूरी है।

भारतीय ने बनाया चीनी स्टेल्थ एयरक्राफ्ट

एविएशन एक्सपर्ट अनुराग त्रिपाठी का कहना है, भारत को AMCA (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) के लिए 120 किलो-न्यूटन वाले जेट इंजन की जरूरत और उसे समय पर तैयार करने के लिए हमें अपनी रणनीति बदलनी होगी। उनका कहना था कि भारत के प्रयासों में कोई चूक नहीं थी, लेकिन फिर भी जरूरी तकनीक नहीं बन सकी।

उन्होंने चीन की तरक्की का उदाहरण देते हुए बताया कि वे सिर्फ रिवर्स इंजीनियरिंग या सरकारी सौदों पर निर्भर नहीं हुए। बल्कि उन्होंने एक भारतीय वैज्ञानिक और इंजीनियर नोशर गवादिया को रखा, जो अमेरिका से स्टील्थ तकनीक लेकर आए। वे अमेरिकी कंपनी में काम करते थे और रिटायर होने के बाद चीन ने उन्हें काम पर रखा। वे कहते हैं चीनी स्टेल्थ तकनीक के पिता मुंबई के पारसी नोशेर गवादिया हैं। चीन ने उन्हें पैसे और संसाधन उपलब्ध कराए, जिसके बाद चीन ने J-35 फाइटर जेट बनाया।

भारत ने क्यों नहीं खरीदी Eurofighter बनाने वाली कंपनी

त्रिपाठी ने बताया कि स्पेन में स्थित एक जेट इंजन बनाने वाकी कंपनी जिसने Eurofighter Typhoon का प्रोडक्शन किया था। उस कंपनी को 2022 में एक अमेरिकी कंपनी (Bain Private Equity) ने $1.5 बिलियन में खरीदा था। भारत ने क्यों इतना बड़ा मौका गंवाा दिया। भारत ने बोली क्यों नहीं लगाई। हम भी उस कंपनी को खरीद सकते थे। यह एक बड़ी चूक थी।

त्रिपाठी ने सुझाव दिया कि भारत को एक ऐसा स्ट्रक्चर बनाना चाहिए, जहां वैश्विक तकनीकी क्षमता और इंसानी प्रतिभा को आकर्षित किया जाए। वे कहते हैं कि DRDO और GTRE जैसी संस्थाओं को इस प्रक्रिया में मुख्य साझेदार बनाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि एचएल ने इंजन निर्माण में लंबे समय से काम किया है, लेकिन उन्हें पर्याप्त संसाधन और सहायता नहीं मिले। उन्होंने कहा कि भारत ने गलतियां नहीं कीं, लेकिन फिर भी हमारे पास आधुनिक फाइटर इंजन नहीं है। जबकि चीन ने विदेशी टैलेंट के जरिए तकनीक हासिल की। भारत को भी दुनिया भर से भारतीय मूल के विशेषज्ञों को अपने साथ जोड़कर यह स्वदेशी इंजन बनाने का काम शुरू करना चाहिए।

Yudh Seva Medal: ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के फर्जी नैरेटिव को बेनकाब करने वाले सेना के स्ट्रैट कॉम एडीजी मेजर जनरल संदीप शारदा को युद्ध सेवा मेडल, दो अग्निवीरों को मिला सेना मेडल

Yudh Seva Medal: Maj Gen Sandeep Sharda Honoured for Busting Pakistan’s Fake Narratives in Operation Sindoor
Maj Gen Sandeep Sharda (Left), Lt Col Harsh Gupta (Right)

Yudh Seva Medal: स्वतंत्रता दिवस पर जारी पुरस्कार सूची में भारतीय सेना के स्ट्रेटजिक कम्युनिकेशन विंग का भी नाम शामिल था। सेना के स्ट्रेटजिक कम्युनिकेशन के अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) मेजर जनरल संदीप एस शारदा को युद्ध सेवा मेडल देने का ऐलान किया गया। यह विशिष्ट सेवा पुरस्कार (Distinguished Service Award) की युद्ध श्रेणी का सम्मान है।

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इसके अलावा, ऑपरेशन सिंदूर का Logo बनाने वाले लेफ्टिनेंट कर्नल हर्ष गुप्ता को आर्मी चीफ का कमेंडेशन कार्ड (प्रशंसा पत्र) मिलेगा। स्ट्रेटजिक कम्युनिकेशन टीम के लेफ्टिनेंट कर्नल अमोल जाधव और लेफ्टिनेंट कर्नल अनिकेत को भी चीफ का कमेंडेशन कार्ड और लेफ्टिनेंट कर्नल गौतम झा को वाइस चीफ का कमेंडेशन कार्ड देने का एलान किया गया।

Yudh Seva Medal: ऑपरेशन सिंदूर में कैसे पाकिस्तानी नैरेटिव किया बेनकाब

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना ने न केवल जमीनी और हवाई मोर्चे पर कार्रवाई की, बल्कि साइबर और इनफॉरमेशन वॉरफेयर के मोर्चे पर भी सक्रिय भूमिका निभाई। वहीं साइबर स्पेस में भी एक अलग तरह की जंग लड़ी जा रही थी। इस दौरान ड्रोन, मिसाइल, एंटी-ड्रोन सिस्टम, फाइटर विमान और तोपों के साथ-साथ नैरेटिव मैनेजमेंट पर भी भारतीय सेना ने विशेष ध्यान दिया। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की तरफ से तरह-तरह की गलत सूचनाएं चलाईं जा रही थीं। पाकिस्तान ने सोशल मीडिया और अन्य मंचों के जरिए झूठे दावे फैलाने की कोशिश की, जिसमें यह कहा गया कि भारतीय हमलों में नागरिक मारे गए। सेना की स्ट्रेटजिक कम्युनिकेशन टीम लगातार पाकिस्तान के फर्जी नैरेटिव को ध्वस्त कर रही थी और वहां से फैलाई जा रही झूठी सूचनाओं का पर्दाफाश कर रही थी।

मेजर जनरल संदीप एस शारदा के नेतृत्व में स्ट्रेटजिक कम्युनिकेशन डायरेक्टोरेट ने सोशल मीडिया पर सक्रिय रहकर पाकिस्तान के प्रोपेगेंडा को नाकाम किया। टीम ने ऑपरेशन की सटीक जानकारी, जैसे हमले के लक्ष्य और परिणामों को दुनिया के सामने रखा। भारतीय सेना ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर लिखा, “न्याय हुआ। जय हिंद!”

मेजर जनरल संदीप एस शारदा ने कहा, “यह सम्मान वास्तव में स्ट्रैटेजिक कम्युनिकेशन (Strat Comn) टीम द्वारा किए गए अद्भुत, निरंतर और समर्पित कार्य का नतीजा है। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी अपना सर्वश्रेष्ठ दिया और टीमवर्क, अनुशासन तथा रचनात्मक सोच का बेहतरीन उदाहरण पेश किया। मैं तो बस उनकी मेहनत, लगन और जुनून की रोशनी में नहाया हुआ हूँ। क्योंकि यह उपलब्धि पूरी तरह से टीम के सामूहिक प्रयास की पहचान है।”

ऑपरेशन के दौरान स्ट्रेटजिक कम्युनिकेशन के महत्व को इस बात से समझा जा सकता है कि हाल ही में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान के मुताबिक, करीब 15 फीसदी ऑपरेशनल प्रयास फर्जी सूचना और झूठे नैरेटिव का मुकाबला करने में लगाए गए। वहीं सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने एक बयान में कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान रणनीतिक संदेश देना बेहद जरूरी था। उन्होंने कहा कि जब सेना ऐसे बड़े ऑपरेशन में जाती है, तो केवल बैटल फील्ड की ही नहीं, बल्कि सूचना के मोर्चे की भी पूरी तैयारी होती है। इस नैरेटिव मैनेजमेंट सिस्टम को विकसित करने और उसे लागू करने में काफी समय और मेहनत लगी।

ऑपरेशन सिंदूर का लोगो बनाने वाले अफसर भी सम्मानित

ऑपरेशन सिंदूर के लोगो को डिजाइन करने वाले लेफ्टिनेंट कर्नल हर्ष गुप्ता को सेना प्रमुख का प्रशंसा पत्र (कमेंडेशन कार्ड) दिया जाएगा। यह लोगो न केवल ऑपरेशन की पहचान बन गया, बल्कि इसने भारत की सांस्कृतिक और भावनात्मक संवेदनाओं को भी दर्शाया। यही वह समय था जब पहली बार ऑपरेशन सिंदूर का लोगो भी सार्वजनिक किया गया। इस चिन्ह में ‘सिंदूर’ के प्रतीक के माध्यम से यह संदेश दिया गया था कि “बदला पूरा हुआ”।

ऑपरेशन सिंदूर के लिए स्ट्रेटजिक कम्युनिकेशन टीम के अन्य तीन अधिकारियों को भी सम्मानित किया गया है। लेफ्टिनेंट कर्नल अमोल जाधव और लेफ्टिनेंट कर्नल अनिकेत को सेना प्रमुख का प्रशंसा पत्र, जबकि लेफ्टिनेंट कर्नल गौतम झा को सेना उपप्रमुख का प्रशंसा पत्र दिया जाएगा। इन अधिकारियों ने सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर सही जानकारियां लोगों तक पहुंचाई और पाकिस्तान के झूठे दावों को बेनकाब किया।

तीन अग्निवीर भी सम्मानित

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कई अन्य सैन्य कर्मियों को भी सम्मानित किया गया। तीन अग्निवीरों को वीरता के लिए सम्मानित किया गया, जिनमें दो को सेना मेडल (वीरता) और एक को मेंशन-इन-डिस्पैचेस से नवाजा गया। ये सम्मान ऑपरेशन सिंदूर और अन्य मिशनों में उनकी बहादुरी के लिए दिए गए।

Yudh Seva Medal: Maj Gen Sandeep Sharda Honoured for Busting Pakistan’s Fake Narratives in Operation Sindoor
Sons of 2 former IAF Chiefs awarded Vayu Sena Medal (Gallantry) Gp Capt Omar Browne, Sqn Ldr Mihir Vivek Chaudhary

दो पूर्व वायुसेना प्रमुखों के बेटों को वायुसेना मेडल

दो पूर्व वायु सेना प्रमुखों के बेटों, ग्रुप कैप्टन ओमर ब्राउन और स्क्वाड्रन लीडर मिहिर विवेक चौधरी, को वायुसेना मेडल (गैलेंट्री से सम्मानित किया गया। इन दोनों ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तानी आतंकी ठिकानों को तबाह करने में अहम भूमिका निभाई।

लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी को मरणोपरांत कीर्ति चक्र

भारतीय सेना के युवा अधिकारी लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी को मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया। यह शांति काल में दूसरा सबसे बड़ा वीरता पुरस्कार है। लेफ्टिनेंट तिवारी ने सिक्किम में अपनी जान देकर एक अग्निवीर की जान बचाई थी।

22 मई 2025 को लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी सिक्किम में एक गश्ती दल का नेतृत्व कर रहे थे। यह दल एक महत्वपूर्ण रणनीतिक पोस्ट की ओर बढ़ रहा था। सुबह करीब 11 बजे, उनके दल का एक अग्निवीर, स्टीफन सुब्बा, एक लकड़ी के पुल को पार करते समय संतुलन खो बैठा और तेज धार वाली पहाड़ी नदी में बह गया। लेफ्टिनेंट तिवारी ने बिना देर किए नदी में छलांग लगा दी। उनके साथ नायक पुकार कटेल ने भी मदद के लिए छलांग लगाई। दोनों ने मिलकर अग्निवीर को बचा लिया, लेकिन लेफ्टिनेंट तिवारी तेज धार में बह गए।

उनके शव को घटनास्थल से 800 मीटर दूर बरामद किया गया। लेफ्टिनेंट तिवारी 14 दिसंबर 2024 को सेना में कमीशन हुए थे और यह उनकी पहली पोस्टिंग थी। अयोध्या के रहने वाले 23 वर्षीय शशांक ने केवल चार महीने की सेवा में भारतीय सेना की गौरवशाली परंपरा को कायम रखा।

What is Sudarshan Chakra Mission?: AI मिसाइलों, रडार और लेजर सिस्टम से लैस होगा स्वदेशी एयर डिफेंस कवच सुदर्शन चक्र, जानें इजरायल के आयरन डोम से कैसे होगा अलग?

Sudarshan Chakra Mission Explained: India’s AI-Powered Missiles, Radars & Laser Defence Shield – How It Differs from Israel’s Iron Dome
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What is Sudarshan Chakra Mission?: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 79वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किला के प्राचीर से देश की सुरक्षा के लिए ‘सुदर्शन चक्र मिशन’ की शुरुआत की घोषणा की। उन्होंने बताया कि सुदर्शन चक्र मिशन को 2035 तक पूरी तरह लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। यह मिशन एक दशक से अधिक समय से तैयार हो रही उस योजना का हिस्सा है, जिसमें एक स्वदेशी और व्यापक एयर डिफेंस सिस्टम तैयार करना है। इस सिस्टम को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा कवच’ नाम दिया गया है, जो शहरों, मिलिट्री बेस और महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर को ड्रोन, मिसाइल और अन्य हवाई हमलों से बचाएगा।

PM Modi Speech on 15 August: सुदर्शन चक्र से लेकर मेड इन इंडिया जेट इंजन तक, लाल किला से PM मोदी ने पेश की सुरक्षित और समृद्ध भारत की तस्वीर

What is Sudarshan Chakra Mission?: श्रीकृष्ण के सुदर्शन चक्र से प्रेरित

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि इस मिशन की प्रेरणा भगवान श्रीकृष्ण के सुदर्शन चक्र से ली गई है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगले 10 सालों में, चाहे वह रणनीतिक महत्व का इलाका हो, नागरिक क्षेत्र हो या आस्था के केंद्र, देश में एक ऐसा राष्ट्रीय सुरक्षा कवच खड़ा किया जाएगा, जो किसी भी हमले का सामना कर सके। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा को देश की समृद्धि का आधार बनाना होगा और इसके लिए आधुनिक तकनीक का अधिकतम इस्तेमाल करना जरूरी है।

पीएम ने ये एलान ऐसे समय में किया है जब देश हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर से गुजरा है, जिसमें पाकिस्तान ने भारत के सैन्य ठिकानों, नागरिक क्षेत्रों और मंदिरों को निशाना बनाया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे एयर डिफेंस सिस्टम ने इन हमलों को नाकाम किया और यह साबित किया कि भारत किसी भी तरह के युद्ध का सामना करने के लिए तैयार है।

What is Sudarshan Chakra Mission?: कब तैयार हुई रूपरेखा

सुदर्शन चक्र मिशन की रूपरेखा जून 2025 में एक उच्चस्तरीय सुरक्षा बैठक में तैयार की गई थी। इस बैठक में भारत के शीर्ष नेतृत्व ने एक स्वदेशी, बहुस्तरीय एयर डिफेंस शील्ड बनाने का फैसला लिया। इसकी जरूरत ऑपरेशन सिंदूर के दौरान महसूस की गई। ऑपरेशन सिंदूर को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया था। इस हमले में 26 लोग मारे गए थे, जिनमें 25 भारतीय और एक नेपाली नागरिक शामिल थे। हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ ने ली थी।

ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। इस दौरान पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए भारतीय सैन्य ठिकानों, नागरिक क्षेत्रों और धार्मिक स्थलों पर ड्रोनों और मिसाइलों से हमले किए। भारत के एयर डिफेंस सिस्टम जैसे आकाश और S-400, ने इन हमलों को नाकाम कर दिया। लेकिन इस ऑपरेशन के बाद महसूस हुआ कि भारत को एक मजबूत और स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम की जरूरत है, जिसके बाद सुदर्शन चक्र मिशन की नींव रखी गई।

सेना की ताकत बढ़ाना नहीं है उद्देश्य

सुदर्शन चक्र मिशन का उद्देश्य केवल सेना की ताकत बढ़ाना नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक सुरक्षा दृष्टिकोण है जिसमें सीमा क्षेत्रों में निगरानी और जवाबी कार्रवाई की क्षमता को मजबूत करना, साइबर हमलों से बचाव के लिए एडवांस टेक्नोलॉजी और प्रशिक्षित मानव संसाधन विकसित करना, स्वदेशी रक्षा तकनीकों का निर्माण और अंतरराष्ट्रीय मानकों की प्रणालियों का समावेश करना शामिल है। साथ ही, सैनिकों के लिए आधुनिक प्रशिक्षण और सुविधाओं की व्यवस्था भी इस योजना का हिस्सा है।

एयर डिफेंस नेटवर्क से होगा कनेक्ट

रक्षा मंत्रालय से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह प्रणाली देश के मौजूदा एयर डिफेंस नेटवर्क में इंटीग्रेट होगी। इसमें राष्ट्रीय स्तर पर रडार का नेटवर्क, कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर और इंटरसेप्टर मिसाइलें शामिल होंगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित रियल टाइम निगरानी और क्विक रेस्पॉन्स सिस्टम इसे और अधिक प्रभावी बनाएगा, जो आने वाली मिसाइलों, ड्रोन, तोप के गोले, और दुश्मन के स्वार्म अटैक को तुरंत पहचानकर नष्ट कर सकेगी। यह सिस्टम शहरों, सैन्य ठिकानों, बिजली संयंत्रों, रेलवे, बंदरगाहों और अस्पतालों को हवाई हमलों से बचाएगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह सिस्टम रडार, कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर और इंटरसेप्टर मिसाइलों का राष्ट्रव्यापी नेटवर्क होगी।

इजरायल के आयरन डोम से कैसे होगा अलग

यह मिशन आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत तैयार किया जा रहा है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन इसका नेतृत्व करेगा, और निजी क्षेत्र की कंपनियां भी इसमें शामिल होंगी। यह सिस्टम मौजूदा आकाश, S-400 और QR-SAM प्रणालियों के साथ इंटीग्रेट होगा। भविष्य में लेजर-आधारित इंटरसेप्टर सिस्टम भी जोड़े जाएंगे। यह सिस्टम इजरायल के आयरन डोम से अलग होगा, जो केवल छोटी दूरी के रॉकेट हमलों को रोकता है। सुदर्शन चक्र मिशन लंबी दूरी की बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों जैसे बड़े खतरों से भी निपटेगा।

इसका डिजाइन इस तरह किया जा रहा है कि यह पाकिस्तान और चीन से आने वाले खतरों का भी सामना कर सके। भारत की विविधता वाली भौगोलिक परिस्थितियां, जिसमें हिमालय, रेगिस्तान और तटीय इलाके शामिल हैं, वहां भी यह सिस्टम बखूबी काम करेगा।

सुदर्शन चक्र मिशन अभी प्रारंभिक चरण में है। इसके स्ट्रक्चर औऱ टेक्नोलॉजी को अंतिम रूप देना बाकी है। सरकार ने 2035 तक सुदर्शन चक्र की पूर्ण तैनाती का लक्ष्य रखा है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा कवच केवल युद्ध और रक्षा का विषय नहीं है, बल्कि यह आर्थिक स्थिरता, सामाजिक एकता और नागरिकों की सुरक्षा को भी मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि पिछले 11 सालों में रक्षा और नागरिक सुरक्षा के लिए जो कदम उठाए गए हैं, वे सरकार की प्राथमिकता को स्पष्ट करते हैं और सुदर्शन चक्र मिशन उसी दिशा में एक निर्णायक कदम है।

PM Modi Speech on 15 August: सुदर्शन चक्र से लेकर मेड इन इंडिया जेट इंजन तक, लाल किला से PM मोदी ने पेश की सुरक्षित और समृद्ध भारत की तस्वीर

PM Modi Speech on 15 August: From Sudarshan Chakra to Made-in-India Jet Engines
Photo: PIB

PM Modi Speech on 15 August: शुक्रवार 15 अगस्त को 79वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किला से राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की सुरक्षा को लेकर कई बड़ी बातें कहीं। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा आत्मनिर्भरता और आर्थिक विकास को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उनके भाषण में आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख, स्वदेशी डिफेंस सिस्टम की ताकत, और सिंधु जल समझौते जैसे मुद्दों पर विशेष जोर रहा। इसके साथ ही, उन्होंने सेमीकंडक्टर, परमाणु ऊर्जा, और रोजगार योजनाओं जैसे क्षेत्रों में बड़े कदम उठाने की घोषणा की।

Independence Day 2025: ऑपरेशन सिंदूर में दुश्मन को मजा चखाने वाले 9 एय़र फोर्स और 4 सेना कर्मियों को वीर चक्र, 7 को सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल

PM Modi Speech on 15 August: तोड़े कई रिकॉर्ड

हल्की फुहारों के बीच प्रधानमंत्री मोदी शुक्रवार को जब लाल किला की प्राचीर पर पहुंचे तो उन्होंने केसरी रंग की पगड़ी पहनी हुई थी। उनके प्राचीर पर पहुंचने पर जब राष्ट्रगान बजा तो उन्होंने एयरफोर्स सैल्यूट किया। वहीं, उन्होंने इस बार उन्होंने 103 मिनट तक भाषण दिया, जो उनके अब तक के सभी स्वतंत्रता दिवस पर दिए भाषणों में सबसे लंबा है। इससे पहले, उनका सबसे लंबा भाषण पिछले साल था, जो 98 मिनट चला था। प्रधानमंत्री मोदी ने 2015 में भी रिकॉर्ड बनाया था, जब उन्होंने 88 मिनट का भाषण दिया था। आजादी के समय 1947 में, तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 72 मिनट का भाषण दिया था। इसके साथ ही, प्रधानमंत्री मोदी ने एक और रिकॉर्ड तोड़ा। उन्होंने लाल किला की प्राचीर से लगातार 12 बार स्वतंत्रता दिवस पर भाषण दिया है। इस मामले में वे अब केवल जवाहरलाल नेहरू से पीछे हैं, जिन्होंने लगातार 17 बार राष्ट्र को स्वतंत्रता दिवस पर संबोधन दिया था। प्रधानमंत्री मोदी का सबसे छोटा भाषण 2017 का था, जब उन्होंने केवल 56 मिनट ही देश को संबोधित किया था।

PM Modi Speech on 15 August: From Sudarshan Chakra to Made-in-India Jet Engines
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PM Modi Speech on 15 August: आतंकवाद के खिलाफ “न्यू नॉर्मल”

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने आतंकवाद के खिलाफ एक नया मानक स्थापित किया है, जिसे उन्होंने “न्यू नॉर्मल” करार दिया। पीएम ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “आतंकवादी और उनके समर्थकों को अब अलग-अलग नहीं माना जाएगा।” उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि भारत अब परमाणु धमकियों को बर्दाश्त नहीं करेगा। यह बयान पड़ोसी देशों, खासकर पाकिस्तान, के लिए एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।

PM Modi Speech on 15 August: ऑपरेशन सिंदूर में सेना ने दिखाई ताकत

प्रधानमंत्री ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कैसे आतंकियों ने धर्म पूछ-पूछ कर लोगों को मौत के घाट उतारा। कैसे महिलाओं के सिंदूर उजड़े गए और कैसे बच्चों के सामने ही उनके पिता को गोलियों से भूना गयाा। उन्होंने कहा कि इस हमले के जवाब में भारतीय सेना ने “ऑपरेशन सिंदूर” चलाया, जिसमें सीमा पार आतंकी ठिकानों को नष्ट किया गया। पीएम ने इस ऑपरेशन को “दुश्मनों के लिए करारा जवाब” बताते हुए कहा कि इससे पाकिस्तान में “तबाही” मच गई। उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन पूरी तरह से स्वदेशी हथियारों से अंजाम दिया गया और इसने साबित किया कि भारतीय रक्षा उत्पादन अब विश्वस्तरीय क्षमता रखता है।

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PM Modi Speech on 15 August: 2035 तक सुदर्शन चक्र मिशन

पीएम मोदी ने राष्ट्रीय सुरक्षा को देश की समृद्धि का आधार बताते हुए कहा कि टेक्नोलॉजी का उपयोग करके हमें अगले 10 सालों में हमें पूरे भारत को एक सुरक्षा कवच देना है। हमें श्रीकृष्ण के सुदर्शन चक्र से प्रेरणा लेकर यह काम करना चाहिए। देश ‘सुदर्शन चक्र मिशन’ लॉन्च करेगा, जिसमें एक शक्तिशाली विपन सिस्टम जो दुश्मन के ड्रोन और हवाई हमलों को निष्क्रिय करेगा और उन्हें करारा जवाब देगा। उन्होंने कहा कि 2035 तक भारत के डिफेंस सिस्टम को और विस्तार दिया जाएगा, इसे आधुनिक बनाया जाएगा, और इसे और सशक्त किया जाएगा। पीएम ने पिछले 11 वर्षों में रक्षा और नागरिकों की सुरक्षा के लिए किए गए कार्यों का उल्लेख किया और इसे सरकार की प्राथमिकता बताया।

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PM Modi Speech on 15 August: राष्ट्रीय सुरक्षा कवच का विस्तार

राष्ट्रीय सुरक्षा कवच के तहत, पीएम ने कई प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही। इनमें शामिल हैं: सीमा सुरक्षा का सुदृढ़ीकरण, जिसमें सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी और जवाबी कार्रवाई की क्षमता को बढ़ाना। साइबर हमलों से बचाव के लिए एडवांस टेक्नोलॉजी और प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना। स्वदेशी रक्षा तकनीकों का विकास और वैश्विक स्तर की प्रणालियों का समावेश और सैनिकों के लिए विश्वस्तरीय प्रशिक्षण और आधुनिक सुविधाओं का निर्माण शामिल है।

प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा कवच केवल सैन्य ताकत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आर्थिक स्थिरता, सामाजिक एकता, और नागरिकों की सुरक्षा को भी सुनिश्चित करता है। उन्होंने इसे एक समग्र दृष्टिकोण बताया, जिसमें सभी क्षेत्रों का समन्वय शामिल है।

आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता

‘मेड इन इंडिया’ अभियान को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का प्रतीक बताते हुए, पीएम ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में स्वदेशी हथियारों ने सेना को बिना किसी रुकावट के पराक्रम दिखाने की शक्ति दी। उन्होंने बताया कि भारत अब अपने रक्षा उपकरणों के निर्माण में तेजी से प्रगति कर रहा है, जिससे न केवल सेना की ताकत बढ़ रही है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी बल मिल रहा है।

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सिंधु जल समझौते पर सख्त रुख

सुरक्षा के साथ-साथ, पीएम ने सिंधु जल समझौते पर भी सख्त रुख अपनाया। उन्होंने इसे “अन्यायपूर्ण” करार देते हुए कहा कि भारत से निकलने वाली नदियों का पानी पड़ोसी देशों के खेतों को सींच रहा है, जबकि भारतीय किसान पानी के लिए तरस रहे हैं। उन्होंने कहा, “खून और पानी एक साथ नहीं बहेंगे।”

मेड इन इंडिया जेट इंजन

15 अगस्त 2025 को लाल किले से अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मेड इन इंडिया’ जेट इंजन पर कहा, “आज मैं लाल किला के प्राचीर से मेरे देश के युवा वैज्ञानिकों से, मेरे टैलेंट यूथ से, मेरे इंजीनियर्स से और सरकार के हर विभाग से भी आह्वान करता हूं कि हमारे अपने मेड इन इंडिया फाइटर जेट्स के लिए जेट इंजन हमारा ही होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस तरह भारत ने कोविड वैक्सीन और यूपीआई जैसे डिजिटल पेमेंट सिस्टम विकसित किए, उसी तरह अब देश को अपने जेट इंजन बनाने होंगे। उन्होंने कहा यह एक राष्ट्रीय चुनौती है। मैं अपने वैज्ञानिकों और युवाओं से कहता हूं कि इसे सीधी चुनौती के रूप में स्वीकार करें और भारत को इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएं।

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सेमीकंडक्टर में मिशन मोड

राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ, पीएम ने तकनीकी आत्मनिर्भरता पर भी जोर दिया। उन्होंने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि 50-60 साल पहले इस क्षेत्र में शुरूआत करने की कोशिशें नाकाम कर दी गई थीं। लेकिन अब भारत “मिशन मोड” में काम कर रहा है। उन्होंने घोषणा की कि इस वर्ष के अंत तक भारत का पहला ‘मेड इन इंडिया’ सेमीकंडक्टर चिप बाजार में उपलब्ध होगा।

परमाणु ऊर्जा में विस्तार

परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भारत की प्रगति का जिक्र करते हुए, पीएम ने कहा कि देश में 10 नए परमाणु रिएक्टरों पर काम चल रहा है। पिछले 11 वर्षों में हमारी सौर ऊर्जा क्षमता 30 गुना बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि भारत मिशन ग्रीन हाइड्रोजन की दिशा में आज हजारों करोड़ रुपए इन्वेस्ट कर रहा है। भारत अब परमाणु ऊर्जा पर सक्रिय रूप से ध्यान केंद्रित कर रहा है। दस नए परमाणु रिएक्टर तेजी से काम कर रहे हैं। जब भारत अपनी स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा, उनका लक्ष्य अगले दो दशकों में भारत की परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता को 10 गुना बढ़ाना है। यह कदम भारत को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर ले जाएगा और पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देगा। उन्होंने कहा कि इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए हम निजी क्षेत्र की कंपनियों को भी इस क्षेत्र में शामिल कर रहे हैं। निजी कंपनियों की तकनीकी विशेषज्ञता और निवेश से परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी आएगी।

जीएसटी सुधार: दिवाली का तोहफा

15 अगस्त 2025 को अपने भाषण में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीएसटी सुधार पर कहा, “इस दिवाली मैं आपके लिए डबल दिवाली का काम करने वाला हूं। इस दिवाली में देशवासियों को बहुत बड़ा तोहफा मिलने वाला है। पिछले आठ वर्षों में हमने जीएसटी में बड़ा सुधार किया है। पूरे देश में टैक्स के बोझ को कम किया, टैक्स की व्यवस्थाओं को सरल किया। आठ साल के बाद समय की मांग है कि हम इसकी समीक्षा करें। हमने हाई पावर कमेटी बनाकर रिव्यू कराया, राज्यों से भी विचार-विमर्श किया। हम नेक्स्ट जेनरेशन जीएसटी रिफॉर्म लेकर आ रहे हैं। ये दिवाली के अंदर आपके लिए तोहफा बन जाएंगे। सामान्य मानवीय जरूरतों के टैक्स भारी मात्रा में कम कर दिए जाएंगे। रोजमर्रा की चीजें बहुत सस्ती हो जाएंगी। हमारे एमएसएमई और लघु उद्यमियों को बहुत बड़ा लाभ मिलेगा। इससे हमारी अर्थव्यवस्था को भी एक नया बल मिलेगा।”

10 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लिए टास्क फोर्स

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के बारे में कहा, “हमने एक विशेष सुधार टास्क फोर्स का गठन किया है, जिसका लक्ष्य भारत को 2047 तक 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना है। इस टास्क फोर्स का काम आर्थिक विकास को गति देना, लालफीताशाही को खत्म करना, और शासन प्रणाली को आधुनिक बनाना होगा। उन्होंने कहा कि यह टास्क फोर्स न केवल आर्थिक विकास को गति देगी, बल्कि यह सुनिश्चित करेगी कि भारत का हर क्षेत्र, हर नागरिक इस विकास का हिस्सा बने। हमारा लक्ष्य है कि 2047 तक भारत न सिर्फ आर्थिक रूप से बल्कि सामाजिक और तकनीकी रूप से भी एक वैश्विक शक्ति के रूप में उभरे। इसके लिए हमें अपने संसाधनों का सही उपयोग करना होगा, नवाचार को बढ़ावा देना होगा, और हर स्तर पर सुशासन को लागू करना होगा।

पीएम विकसित भारत रोजगार योजना

युवाओं के लिए रोजगार सृजन को प्राथमिकता देते हुए, पीएम ने 1 लाख करोड़ रुपये की “पीएम विकसित भारत रोजगार योजना” की शुरुआत की। इस योजना के तहत नए नियुक्त युवाओं को प्रति माह 15,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसका लक्ष्य 3 करोड़ युवाओं को लाभ पहुंचाना है, ताकि भारत की युवा शक्ति को रोजगार के अवसर मिलें और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले।

जनसांख्यिकी मिशन

सीमा क्षेत्रों में घुसपैठ और अवैध प्रवासन से उत्पन्न होने वाले जनसांख्यिकीय असंतुलन पर चिंता जताते हुए, पीएम ने एक उच्च-स्तरीय जनसांख्यिकी मिशन की घोषणा की। यह मिशन भारत की एकता, अखंडता, और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए काम करेगा। यह कदम विशेष रूप से सीमावर्ती राज्यों में जनसांख्यिकीय बदलावों को नियंत्रित करने के लिए उठाया गया है।

ऊर्जा स्वतंत्रता और समुद्र मंथन

ऊर्जा आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए, पीएम ने कहा कि भारत का बड़ा बजट पेट्रोल, डीजल, और गैस के आयात पर खर्च होता है। इसे कम करने के लिए उन्होंने राष्ट्रीय गहरे समुद्र अन्वेषण मिशन की शुरुआत की। इस मिशन के तहत समुद्री संसाधनों का दोहन किया जाएगा। साथ ही, सौर, हाइड्रोजन, जल, और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में बड़े विस्तार की योजना है।

वोकल फॉर लोकल – भारत का नया मंत्र

अपने भाषण में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘वोकल फॉर लोकल’ पर जोर देते हुए कहा, “वोकल फॉर लोकल हमारा मंत्र है। हमें अपने स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना है। हर भारतीय को गर्व के साथ ‘मेड इन इंडिया’ सामान खरीदना चाहिए। हमारे स्थानीय कारीगर, छोटे व्यापारी और उद्यमी हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। जब हम स्थानीय उत्पाद खरीदते हैं, तो हम न केवल अपनी संस्कृति को मजबूत करते हैं, बल्कि लाखों परिवारों की आजीविका को भी सहारा देते हैं।” उन्होंने कहा, “मैं हर छोटे दुकानदार से कहना चाहता हूं कि हम स्वदेशी पर फोकस करें और अपनी दुकान के बाहर बोर्ड लगाएं – यहां स्वदेशी बिकता है”।

Independence Day 2025: ऑपरेशन सिंदूर में दुश्मन को मजा चखाने वाले 9 एयर फोर्स और 4 सेना कर्मियों को वीर चक्र, 7 को सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल

Independence Day 2025: 9 IAF and 4 Army Heroes Awarded Vir Chakra, 7 Top Officers Honoured with Sarvottam Yudh Seva Medal for Operation Sindoor

Independence Day 2025: भारत के 79वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सशस्त्र बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के कर्मियों के लिए 127 वीरता पुरस्कार और 40 विशिष्ट सेवा पुरस्कारों को मंजूरी दी। इनमें ऑपरेशन सिंदूर में असाधारण वीरता और नेतृत्व दिखाने वाले 13 कर्मियों को वीर चक्र और सात वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल (SYSM) से सम्मानित किया गया। भारतीय वायु सेना के चार, नेवी के एख और सेना को दो अफसरों को युद्धकालीन विशिष्ट सेवा पुरस्कार सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित किया जा रहा है, जो शांति काल के परम विशिष्ट सेवा मेडल (PVSM) के समकक्ष है।

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कुल 13 सैनिकों को वीर चक्र (Vir Chakra) से सम्मानित किया गया है, जो वॉरटाइम का तीसरा सबसे बड़ा गैलेंट्री अवॉर्ड है। इनमें नौ अधिकारी भारतीय वायुसेना (IAF) से और चार अधिकारी भारतीय थलसेना से हैं। वीर चक्र उन सैनिकों को दिया जाता है, जिन्होंने युद्ध के दौरान असाधारण साहस और वीरता का प्रदर्शन किया हो।

Independence Day 2025: वीर चक्र पाने वाले वायुसेना अधिकारी

ऑपरेशन सिंदूर में असाधारण वीरता के लिए 13 कर्मियों को वीर चक्र से सम्मानित किया गया, जो युद्धकाल में तीसरा सबसे बड़ा वीरता पुरस्कार है। भारतीय वायु सेना के नौ अधिकारियों में शामिल हैं:

– ग्रुप कैप्टन रंजीत सिंह सिद्धू
– ग्रुप कैप्टन मनीष अरोड़ा
– ग्रुप कैप्टन अनिमेष पाटनी
– ग्रुप कैप्टन कुनाल कालरा
– विंग कमांडर जॉय चंद्रा
– स्क्वाड्रन लीडर सरथक कुमार
– स्क्वाड्रन लीडर सिद्धांत सिंह
– स्क्वाड्रन लीडर रिजवान मलिक
– फ्लाइट लेफ्टिनेंट अर्शवीर सिंह ठाकुर

इन अधिकारियों ने पाकिस्तान के मुरिदके और बहावलपुर में आतंकी मुख्यालयों और दुश्मन के सैन्य ठिकानों पर सटीक और साहसी हमले किए। वायु सेना के पायलटों ने छह पाकिस्तानी विमानों को मार गिराया, जिसमें एक बड़ा विमान शामिल था, जिसे 300 किलोमीटर की दूरी से नष्ट किया गया। यह सतह से हवा में मार करने का सबसे बड़ा रिकॉर्ड माना जा रहा है।

थल सेना के चार कर्मियों में शामिल हैं:

– कर्नल कोशांक लांबा (302 मीडियम रेजिमेंट)
– लेफ्टिनेंट कर्नल सुशील बिष्ट (1988 मीडियम बैटरी)
– नायब सूबेदार सतीश कुमार (4 डोगरा)
– राइफलमैन सुनील कुमार (4 जम्मू और कश्मीर लाइट इन्फैंट्री)

इन जवानों ने सीमा पार आतंकवादियों के ठिकानों को ध्वस्त करने में निर्णायक भूमिका निभाई।

सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल

ऑपरेशन सिंदूर में अहम योगदान देने के लिए भारतीय वायुसेना के चार और सेना के तीन अफसरों को सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल (Sarvottam Yudh Seva Medal – SYSM) प्रदान किया गया। यह वॉरटाइम डिस्टिंग्विश्ड सर्विस अवॉर्ड है, जो वायु सेना की रणनीतिक क्षमता को दर्शाता है। इसके अलावा पहली बार नौसेना से वाइस एडमिरल संजय जसजित सिंह (रिटायर्ड), जो वेस्टर्न नेवल कमांड के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ रहे हैं, को सम्मानित किया गया है।

1. लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा, उत्तरी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ
2. लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई, पूर्व डीजीएमओ
3. वाइस एडमिरल संजय जसजित सिंह (रिटायर्ड), पूर्व फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, वेस्टर्न नेवल कमांड
4. एयर मार्शल नरमदेश्वर तिवारी, वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ
5. एयर मार्शल नागेश कपूर, एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, सदर्न एयर कमांड
6. एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा, एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, वेस्टर्न एयर कमांड
7. एयर मार्शल ए.के. भारती, डायरेक्टर जनरल एयर ऑपरेशंस

चार कीर्ति और 15 वीर चक्र

राष्ट्रपति ने चार कीर्ति चक्र, 15 वीर चक्र, 16 शौर्य चक्र, दो बार टू सेना मेडल, 58 सेना मेडल, छह नौसेना मेडल, 26 वायु सेना मेडल, सात सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल, नौ उत्तम युद्ध सेवा मेडल और 24 युद्ध सेवा मेडल को मंजूरी दी। इसके अलावा, 290 मेंशन-इन-डिस्पैचेस (Mention-in-Despatch) भी घोषित किए गए, जिनमें 115 सेना, पांच नौसेना, 167 वायु सेना और तीन बॉर्डर रोड्स डेवलपमेंट बोर्ड से हैं। साथ ही, आठ थल सेना, एक वायु सेना और दो नौसेना कर्मियों को शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया।

कीर्ति चक्र से सम्मानित चार सेना कर्मियों में शामिल हैं:

– कैप्टन लालरिनावमा साइलो (4 पैरा, स्पेशल फोर्सेस)
– लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी (सेना सेवा कोर)
– लांस नायक मीनाची सुंदरम ए (34 राष्ट्रीय राइफल्स)
– सिपाही जंजाल प्रवीण प्रभाकर (1 राष्ट्रीय राइफल्स)

ऑपरेशन सिंदूर 7 मई 2025 को 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया था। इस आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया, जिसमें 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए।

ऑपरेशन के दौरान भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के कई एयरबेस को भी निशाना बनाया। S-400, आकाश मिसाइल प्रणाली और स्वदेशी रडार ने 800-900 पाकिस्तानी ड्रोनों को सफलतापूर्वक नष्ट किया। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने बताया था कि भारतीय वायुसेना ने पांच पाकिस्तानी फाइटर जेट्स और एक बड़े एयरक्राफ्ट को मार गिराया। यह एयरक्राफ्ट या तो इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस (ELINT) विमान था या एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AEW\&C) सिस्टम।

वॉरटाइम और पीसटाइम अवॉर्ड्स

वॉरटाइम गैलेंट्री अवॉर्ड्स में सबसे ऊपर परमवीर चक्र होता है, उसके बाद महावीर चक्र और फिर वीर चक्र। पीसटाइम में सबसे बड़ा सम्मान अशोक चक्र है, उसके बाद कीर्ति चक्र और शौर्य चक्र।

वॉरटाइम सर्विस अवॉर्ड्स में सबसे ऊपर सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल (SYSM) होता है, उसके बाद उत्तम युद्ध सेवा मेडल (UYSM) और फिर युद्ध सेवा मेडल (YSM)। पीसटाइम सर्विस अवॉर्ड्स में सबसे बड़ा परम विशिष्ट सेवा मेडल (PVSM), फिर अतिविशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) और विशिष्ट सेवा मेडल (VSM) होता है।

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Op Sindoor Gallantry Awards: इस स्वतंत्रता दिवस पर भारतीय वायुसेना के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के लिए वायुसेना के चार और दो सेना के अफसरों को सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल (Sarvottam Yudh Seva Medal – SYSM) से सम्मानित किया जाएगा। यह वॉर टाइम विशिष्ट सेवा पुरस्कार, पीस टाइम में दिए जाने वाले परम विशिष्ट सेवा मेडल (PVSM) के बराबर माना जाता है। यह सम्मान उन अफसरों को दिया जाएगा, जिन्होंने युद्ध के समय असाधारण सेवा और नेतृत्व का प्रदर्शन किया है। इससे पहले 26 साल पहले कारगिल युद्ध के दौरान एयर मार्शल विनोद पाटनी और दो सेना के अफसरों लेफ्टिनेंट जनरल हरि मोहन खन्ना और लेफ्टिनेंट जनरल अमरजीत सिंह कालकाट को इस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था।

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Op Sindoor Gallantry Awards: ऑपरेशन सिंदूर में किया शानदार प्रदर्शन

सूत्रों के अनुसार, यह सम्मान सीधे ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ा है, जिसमें भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना ने मिलकर पाकिस्तान के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई की। 7 से 10 मई 2025 के बीच हुए इस संघर्ष में पाकिस्तान ने भारतीय सैन्य ठिकानों, एयरबेस और शहरों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की बौछार कर दी थी, लेकिन भारतीय वायुसेना की एयर डिफेंस शील्ड ने इन्हें नाकाम कर दिया। इस ऑपरेशन में वायुसेना ने न केवल दुश्मन के हमलों को विफल किया बल्कि कई रणनीतिक लक्ष्यों को भी सफलतापूर्वक भेदा। वायुसेना के जिन चार अफसरों को सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित किया जा रहा है, उन्होंने युद्ध के इस निर्णायक दौर में नेतृत्व और सूझबूझ का शानदार प्रदर्शन किया।

Op Sindoor Gallantry Awards: कब मिलते हैं गैलेंट्री और विशिष्ट पुरस्कार

भारत में हर साल 26 जनवरी और 15 अगस्त की पूर्व संध्या पर गैलेंट्री अवॉर्ड (Gallantry Awards) की घोषणा होती है। गैलेंट्री अवॉर्ड का उद्देश्य युद्ध या शांति काल में असाधारण साहस और वीरता का सम्मान करना होता है। वॉर टाइम गैलेंट्री अवॉर्ड में परमवीर चक्र, महावीर चक्र और वीर चक्र शामिल हैं, जो युद्धकाल में वीरता के लिए दिए जाते हैं। शांति काल में अशोक चक्र, कीर्ति चक्र और शौर्य चक्र प्रदान किए जाते हैं।

वहीं, विशिष्ट अवॉर्ड दो तरह के होते हैं, युद्धकाल के लिए YSM सीरीज (सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल, उत्तम युद्ध सेवा मेडल, युद्ध सेवा मेडल) और शांति काल के लिए VSM सीरीज (परम विशिष्ट सेवा मेडल, अतिविशिष्ट सेवा मेडल, विशिष्ट सेवा मेडल)। ऑपरेशन सिंदूर में गैलेंट्री और विशिष्ट दोनों तरह के पुरस्कारों के एलान होने की संभावना है।

Op Sindoor Gallantry Awards: इन्हें मिलेगा सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल 

ऑपरेशन सिंदूर में बहादुरी और नेतृत्व का शानदार प्रदर्शन करने वाले सात वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को इस बार सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल (SYSM) से सम्मानित किया जाएगा। यह वॉर-टाइम डिस्टिंग्विश्ड सर्विस अवॉर्ड है, जो किसी ऑपरेशन के दौरान बेहतरीन नेतृत्व और रणनीतिक योगदान के लिए दिया जाता है।

सम्मान पाने वालों में सबसे पहले हैं लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा, जो उत्तरी कमान (Northern Command) के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ हैं और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उत्तरी सीमाओं पर सेना की कमान संभाल रहे थे। उनके साथ लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई, डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) को भी यह अवॉर्ड मिलेगा, जिन्होंने पूरे ऑपरेशन की योजना और कॉर्डिनेशन में अहम भूमिका निभाई।

वायुसेना से यह सम्मान पाने वालों में शामिल हैं एयर मार्शल नरमदेश्वर तिवारी, वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ; एयर मार्शल नागेश कपूर, सदर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ; एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा, वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ; और एयर मार्शल ए.के. भारती, डायरेक्टर जनरल एयर ऑपरेशंस।

Op Sindoor Gallantry Awards: कारगिल युद्ध में वॉर टाइम अवॉर्ड

कारगिल युद्ध 1999 में भारत के सैन्य इतिहास में साहस और बलिदान की मिसाल बना। उस युद्ध में चार सैनिकों को परमवीर चक्र, नौ को महावीर चक्र और 55 को वीर चक्र से सम्मानित किया गया। इसके अलावा, एयर मार्शल विनोद पाटनी और दो सेना के अफसरों को सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल, छह को उत्तम युद्ध सेवा मेडल और आठ को युद्ध सेवा मेडल मिला। कारगिल के बाद, 2021 में गलवान घाटी में शहीद हुए कर्नल संतोष बाबू को महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था। इसके बाद यह पहला मौका है जब फिर से वॉर टाइम विशिष्ट सेवा अवॉर्ड दिया जा रहा है।

पहलगाम हमले के लिया था बदला

ऑपरेशन सिंदूर 6-7 मई 2025 की मध्यरात्रि को शुरू हुआ था, जो 10 मई तक चला। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले के जवाब में भारत ने अपनी प्रतिक्रिया दी थी। इस हमले में 26 नागरिक मारे गए थे, जिनमें एक नेपाली नागरिक भी शामिल था। हमलावरों ने हिंदू पर्यटकों को निशाना बनाया, उनके नाम और धर्म पूछकर क्रूरता की सारी हदें पार की थीं। इस हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ ने ली थी। भारतीय जांच एजेंसियों ने इस हमले में पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन के शामिल होने की बात कही थी।

ऑपरेशन सिंदूर ने भारतीय सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए हवाई, जमीनी और समुद्री मोर्चों पर पाकिस्तान को कड़ा जवाब दिया। इस दौरान, वायुसेना ने अपने एम्ब्राएर नेत्रा AWACS, सुखोई-30, मिग-29 और तेजस लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया। 1971 के भारत-पाक युद्ध के बाद पहला मौका था जब तीनों सेनाओं ने एक साथ इतने बड़े पैमाने पर कार्रवाई की। 6-7 मई 2025 की रात को भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में नौ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें जैश-ए-मोहम्मद का बहावलपुर मुख्यालय, लश्कर-ए-तैयबा का मुरिदके आधार और मुजफ्फराबाद व कोटली के आतंकी शिविर शामिल थे।

हमले में भारतीय वायु सेना ने SCALP क्रूज मिसाइल, हैमर प्रिसिजन-गाइडेड बम और लॉइटरिंग म्यूनिशन का इस्तेमाल किया। ये हमले पूरी तरह से भारतीय क्षेत्र से किए गए, और वायु सेना के विमानों ने पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र में प्रवेश नहीं किया। रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि किसी भी पाकिस्तानी सैन्य सुविधा को निशाना नहीं बनाया गया, और कार्रवाई में सटीकता और संयम का परिचय दिया।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान में हड़कंप मच गया। पाकिस्तान ने नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर गोलीबारी शुरू की। 10 मई 2025 को भारतीय हमलों ने पाकिस्तान के 11 एयरबेस को नुकसान पहुंचाया, जिसमें रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण नूर खान एयरबेस और सरगोधा शामिल थे। भारतीय ब्रह्मोस मिसाइलों ने पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जिसके बाद पाकिस्तान ने युद्धविराम की मांग की। यह युद्धविराम भारत की शर्तों पर हुआ, और प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में कहा कि इसमें किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता नहीं थी।

अवॉर्ड देने की क्या है प्रक्रिया

अवार्ड की घोषणा राष्ट्रपति भवन से होती है, जहां सशस्त्र बलों के सुप्रीम कमांडर भारत के राष्ट्रपति इन सम्मानों की स्वीकृति देते हैं। इसके बाद स्वतंत्रता दिवस या गणतंत्र दिवस की परेड में इन्हें औपचारिक रूप से प्रदान किया जाता है। वॉर टाइम अवॉर्ड का चयन एक बेहद गोपनीय और सख्त प्रक्रिया से गुजरता है। इसमें ऑपरेशन के दौरान संबंधित अफसरों और जवानों के योगदान, नेतृत्व क्षमता, मिशन के नतीजे और उनके साहसिक फैसलों को ध्यान में रखा जाता है।

Agniveer Retention Policy: ऑपरेशन सिंदूर में अग्निवीरों को मिलेगा उनकी मेहनत का इनाम! ट्रेनिंग में हो रहा ज्यादा खर्चा, सेना को चाहिए एक्सपर्ट जवान

Agniveer Retention Policy: Operation Sindoor Highlights Need for Expert Soldiers as Training Costs Soar
Pic: Indian Army

Agniveer Retention Policy: ऑपरेशन सिंदूर में अग्निवीरों ने काफी योगदान दिया था। उस दौरान तकरीबन 3000 अग्निवीरों ने भारत के एयर डिफेंस सिस्टम से पाकिस्तानी मिसाइलों और ड्रोन हमलों को नाकाम किया था। भारतीय सेनाओं में अग्निपथ योजना के तहत भर्ती होने वाले अग्निवीरों की सेवा अवधि और रिटेंशन (सेवा में बनाए रखने) के नियमों पर फिर से विचार किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, मई में हुए ऑपरेशन सिंदूर में अग्निवीरों के प्रदर्शन को “शानदार” माना गया है, जिसके बाद उनकी चार साल की सेवा अवधि पूरी होने पर उन्हें अधिक संख्या में स्थायी रूप से रखने को लेकर समीक्षा शुरू हो गई है।

Agniveer retention policy: अग्निवीरों के लिए बड़ी खबर, इन बहादुरों को मिलेगी परमानेंट नौकरी की गारंटी, तीसरा असेसमेंट तय करेगा सेना में फ्यूचर!

Agniveer Retention Policy: 3,000 अग्निवीरों ने संभाला था मोर्चा

7 से 10 मई के बीच ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 20 साल की उम्र वाले करीब तकरीबन 3,000 अग्निवीरों ने मोर्चा संभाला और सेना के एयर डिफेंस (AD) सिस्टम से पाकिस्तान के इरादों को नेस्तानाबूद कर दिया। इन अग्निवीरों को पिछले दो साल में भर्ती किया गया था। ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान ने भारत ड्रोनों और मिसाइलों से हमला किया था, लेकिन एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिव होने के चलते उनके मंसूबे पूरे नहीं हो पाए।

अग्निपथ योजना 2022 (Agniveer Retention Policy) में शुरू हुई थी। इसके तहत थल सेना, वायु सेना और नौसेना में चार साल की अवधि के लिए अग्निवीरों की भर्ती की जाती है। अग्निवीरों को पहले छह महीने रेजिमेंटल केंद्रों में बेसिक ट्रेनिंग दी जाती है। इसके बाद उनकी यूनिट्स में विशेष ट्रेनिंग होती है, जिसमें वे आधुनिक हथियारों और उपकरणों को चलाना सीखते हैं। वर्तमान नियमों के मुताबिक, चार साल बाद केवल 25 फीसदी अग्निवीरों को ही स्थायी तौर पर रखे जाने का प्रावधान है। वहीं, पहला बैच 2026 के आखिर तक अपनी चार साल की सेवा पूरी करेगा। जिसके बाद मौजूदा नियमों की समीक्षा और बदलाव पर औपचारिक फैसला होने की संभावना है।

सूत्रों के अनुसार, अलग-अलग विभागों के लिए अलग-अलग रिटेंशन रेट्स (Agniveer Retention Policy) पर विचार हो रहा है। इसके तहत इन्फैंट्री और अन्य कॉम्बैट यूनिट्स में 70-75 फीसदी अग्निवीरों को रखने की चर्चा है। वहीं, एयर डिफेंस, सिग्नल और इंजीनियर्स जैसे विभागों में 80 फीसदी रिटेंशन पर विचार हो रहा है। जबकि स्पेशल फोर्सेस के लिए 100 फीसदी रिटेंशन की बात है, क्योंकि इनका सिलेक्शन शुरुआती ट्रेनिंग में ही हो जाता है। हालांकि, यह सुनिश्चित किया जाएगा कि रिटेंशन बढ़ाने से सैनिकों की औसत आयु में ज्यादा बढ़ोतरी न हो। इन सभी आकड़ों पर अभी सेना के भीतर चर्चा चल रही है। इन पर आगामी सेना कमांडरों की बैठक में और विचार-विमर्श होगा। इसके बाद अंतिम प्रस्ताव सरकार को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

Agniveer Retention Policy: ट्रेनिंग में खर्चा ज्यादा

अग्निवीरों (Agniveer Retention Policy) को पहले छह महीने रेजिमेंटल केंद्रों में बेसिक ट्रेनिंग दी जाती है। इसके बाद उनकी यूनिट में 3 से 6 महीने का विशेष ट्रेनिंग होता है। सूत्रों ने बताया, अगर शुरुआती छह महीनों में सिलेक्शन हो जाए और फिर विशेष ट्रेनिंग दी जाए, तो मौजूदा योजना में अग्निवीर सिर्फ 2 से 2.5 साल के लिए ही उपलब्ध रहते हैं। इतने कम समय में ट्रेनिंग पर होने वाला खर्च बहुत ज्यादा हो जाता है, क्योंकि हर चार साल में प्रशिक्षित सैनिक बाहर चले जाते हैं और नए लोगों को फिर से ट्रेनिंग देनी पड़ती है। इससे संगठन पर बोझ बढ़ता है। इसके अलावा, ट्रेनर्स की कमी भी एक बड़ी दिक्कत है। यही वजह है कि रिटेंशन यानी सेवा अवधि बढ़ाने पर विचार हो रहा है, ताकि ट्रेंड सैनिकों को लंबे समय तक रखा जा सके और बार-बार ट्रेनिंग का बोझ कम हो।

Agniveer Retention Policy: सेना को चाहिए एक्सपर्ट जवान

ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेनाओं में नए हथियार, उपकरण और आधुनिक तकनीकें को तेजी शामिल किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, सेना को ऐसे तकनीकी रूप से एक्सपर्ट सैनिक (Agniveer Retention Policy) चाहिए, जो ड्रोन, साइबर युद्ध, लंबी दूरी के हथियार और लेटेस्ट इक्विपमेंट्स को को सही तरह से चला सकें। उदाहरण के लिए, T-90 टैंक, पिनाका रॉकेट लांचर और K9 वज्र तोपें जैसे हथियारों को चलाने के लिए स्पेशल ट्रेनिंग चाहिए। अग्निवीरों को यह ट्रेनिंग उनकी यूनिट्स में दी जाती है। अगर रिटेंशन की दर बढ़ाई गई, तो इन प्रशिक्षित सैनिकों को लंबे समय तक सेवा में रखा जा सकेगा। अधिकारियों का कहना है कि अगर योजना में बदलाव नहीं हुआ, तो 2035 तक कई महत्वपूर्ण तकनीकी पद खाली रह सकते हैं। रिटेंशन बढ़ाने से इन पदों को भरने में मदद मिलेगी।

क्योंकि इनका सही इस्तेमाल करने के लिए ट्रेंड सैनिकों की जरूरत है। अभी सेना में ज्यादातर अग्निवीरों को स्पेशल ट्रेनिंग (Agniveer Retention Policy) उनकी यूनिट में शामिल होने के बाद दी जाती है। अगर चार साल बाद इनके रिटेंशन कम रही, तो बार-बार नए सैनिकों को ट्रेन करना पड़ेगा, जिससे समय और संसाधन दोनों की बर्बादी होगी। रिटेंशन बढ़ाने से इन प्रशिक्षित सैनिकों को लंबे समय तक नौकरी में रखा जा सकेगा और जिससे उनकी एक्सपर्टाइज का फायदा मिलेगा।

सेना कमांडरों की बैठक में चर्चा

अग्निवीरों को ज़्यादा समय तक नौकरी में रखने का प्रस्ताव अभी शुरुआती दौर में है। सेना में इस पर बातचीत जारी है और अगली सेना कमांडरों की बैठक में इस पर विस्तार से चर्चा होगी। इस बैठक में रिटेंशन दर, ट्रेनिंग की कॉस्ट और सैनिकों की औसत उम्र जैसे मुद्दों पर बात होगी। इसके बाद एक अंतिम प्रस्ताव तैयार कर सरकार को भेजा जाएगा।

इसके अलावा नौसेना और वायुसेना भी अग्निवीरों की रिटेंशन बढ़ाने पर विचार कर रही हैं। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने पिछले साल कहा था कि अग्निवीरों का प्रदर्शन बेहतरीन रहा है और वायुसेना 25 फीसदी से ज़्यादा अग्निवीरों को रखने के लिए तैयार है। नौसेना भी अपने पहले बैच के चार साल पूरे होने पर नौसैनिकों को लंबे समय तक नौकरी में रखने के लिए तैयार है, हालांकि यह तय नहीं है कि कितने लोगों को स्थाई रखा जाएगा।

सेना प्रमुख ने कही थी ये बड़ी बात

इस साल की शुरुआत में सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने अग्निपथ योजना में कुछ अन्य बदलावों पर विचार करने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि अग्निवीरों की छुट्टियों को नियमित सैनिकों की तरह करने की कोशिश की जा रही है। इसके अलावा, शहीद होने की स्थिति में अग्निवीरों को नियमित सैनिकों जैसी सुविधाएं देने पर भी विचार हो रहा है। जनरल द्विवेदी ने यह भी कहा कि तकनीकी रूप से कुशल सैनिकों की जरूरत को देखते हुए भर्ती की अधिकतम आयु सीमा 21 साल से बढ़ाकर 23 साल करने पर विचार हो रहा है। क्योंकि सिग्नल और इंजीनियर्स, में अनुभवी सैनिकों की जरूरत है। अग्निपथ योजना अभी इस जरूरत को पूरी तरह पूरा नहीं कर पा रही है, इसलिए इसमें बदलाव की मांग उठ रही है।

बता दें कि अग्निपथ योजना में अफसर से नीचे के रैंक (PBOR) के जवानों की भर्ती जून 2022 में शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य सेना को जवान और युद्ध के लिए हमेशा तैयार रखना था। यह पुराने रिक्रूटमेंट सिस्टम से बिल्कुल अलग थी, जिसमें सैनिक करीब 20 साल सेवा करने के बाद रिटायर होते थे। इस योजना के तहत जवानों को सिर्फ चार साल के लिए भर्ती किया जाता है, जिसमें से 25 फीसदी को नियमित सेवा में 15 साल तक रखने का प्रावधान है। भर्ती के लिए उम्र 17.5 से 21 साल तय है। पहले साल में वार्षिक वेतन 4.76 लाख रुपये और चौथे साल में 6.92 लाख रुपये मिलता है, साथ ही 48 लाख रुपये का बीमा और सेवा के दौरान मृत्यु होने पर अतिरिक्त 44 लाख रुपये मुआवज़ा मिलता है। चार साल की सेवा पूरी होने पर 11.71 लाख रुपये की ‘सेवा निधि’ दी जाती है।

ऑपरेशन सिंदूर में अग्निवीरों ने चलाई मिसाइलें

मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 3,000 से अधिक अग्निवीरों ने एयर डिफेंस में अहम जिम्मेदारी निभाई। उन्होंने ‘आकाशतीर’ एयर डिफेंस कंट्रोल और रिपोर्टिंग सिस्टम को ऑपरेट किया। अग्निवीर एयर डिफेंस यूनिट्स में गनर, ऑपरेटर फायर कंट्रोल, ऑपरेटर रेडियो और हेवी व्हीकल ड्राइविंग जैसे अहम भूमिकाओं में तैनात थे। इसके अलावा उन्होंने कंधे से दागी जाने वाली मिसाइलों से दुश्मन के टारगेट गिराए। L-70 और Zu-23-2B जैसी तोपें चलाईं। पिचोरा, शिलिकाओसारा, स्ट्रेला, Strela, तुंगुस्का और मीडियम रेंज सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें ऑपरेट कीं। उन्होंने रडार और ‘आकाशतीर’ नोड्स चलाए, कम्युनिकेशन नेटवर्क संभाला, और मिसाइल लांच करने वाले व्हीकल्स को ड्राइव किया।

Yudh Abhyas 2025: युद्ध अभ्यास 2025 में यूएस आर्मी को ऑपरेशन सिंदूर के सबक पढ़ाएगी भारतीय सेना, अलास्का में शोकेस हो सकता है स्ट्राइकर का एंफिबियस वर्जन!

Yudh Abhyas 2025: Indian Army to Share Operation Sindoor Lessons with US Army, Amphibious Stryker Variant Likely to be Showcased in Alaska
Stryker infantry combat vehicle (File Photo)

Yudh Abhyas 2025: एक तरफ जहां अमेरिका भारत पर टैरिफ और पैनल्टी दोनों लगा रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ मिलिट्री डिप्लोमेसी अपना काम कर रही है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह पहला मौका होगा जब भारत और अमेरिका की सेनाएं एक साथ किसी बड़ी मिलिट्री एक्सरसाइज में हिस्सा लेंगी। जॉइंट मिलिट्री एक्सरसाइज युद्ध अभ्यास (Exercise Yudh Abhyas 2025) अगले महीने अमेरिका के अलास्का में आयोजित की जा रही है, जो इस एक्सरसाइज का 21वां संस्करण होगा। इस बात की भी संभावना व्यक्त की जा रही है कि इस एक्सरसाइज के दौरान अमेरिका अपने स्ट्राइकर आर्मर्ड व्हीकल के एंफिबियस वर्जन (पानी में चलने वाले मॉडल) को भी शोकेस कर सकता है, जिसे खास भारत के अनुरोध पर तैयार किया जा रहा है।

Yudh Abhyas 2025: क्या है ‘युद्ध अभ्यास’?

‘युद्ध अभ्यास’ (Yudh Abhyas 2025) भारत और अमेरिका की सेनाओं के बीच हर साल होने वाली एक जॉइंट मिलिट्री एक्सरसाइज है। जिसकी शुरुआत 2004 में हुई थी। यह अभ्यास बारी-बारी से भारत और अमेरिका में हर साल आयोजित होता है। इसका मकसद दोनों देशों की सेनाओं को आतंकवाद से लड़ने और संयुक्त राष्ट्र के नियमों (चैप्टर VII) के तहत शांति स्थापना के लिए तैयार करना है। पिछले साल 2024 में इसका 20वां संस्करण राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में हुआ था। इस बार यह अलास्का के ठंडे और पहाड़ी इलाकों में होगा।

इस बार क्या है खास?

2025 का ‘युद्ध अभ्यास’ (Yudh Abhyas 2025) पिछले सालों की तुलना में काफी अलग होगा। रक्षा सूत्रों ने बताया कि भारत की तरफ से लगभग 150 सैनिक इस अभ्यास में हिस्सा लेंगे। वहीं, इस बार इस एक्सरसाइज में भारतीय सेना की मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री हिस्सा नहीं लेगी, बल्कि इन्फैंट्री मद्रास रेजिमेंट करेगी, जो भारत की सबसे पुरानी और अनुभवी रेजिमेंट्स में से एक है। इसमें पैदल सेना, टैंक, आर्टिलरी और दूसरी सपोर्ट यूनिट्स शामिल होंगी।

Yudh Abhyas 2025
Yudh Abhyas 2024 (Photo: PIB)

इस अभ्यास (Yudh Abhyas 2025) में दोनों सेनाएं कई तरह की गतिविधियों में हिस्सा लेंगी। आतंकवाद रोधी अभ्यास में सैनिक यह सीखेंगे कि आतंकवादी हमलों का जवाब कैसे देना है। संयुक्त रणनीति बनाने की प्रक्रिया में दोनों सेनाएं एक साथ बैठकर युद्ध की योजना तैयार करेंगी। फील्ड ट्रेनिंग के दौरान सैनिक असली युद्ध जैसे हालात में काम करेंगे। इसके अलावा, दोनों सेनाएं एक-दूसरे से नई तकनीक और रणनीति सीखेंगी। अलास्का का ठंडा और पहाड़ी इलाका इस अभ्यास को और मुश्किल बनाता है। यहां सैनिकों को ठंडे मौसम और मुश्किल टैरेन में ट्रेनिंग करने का मौका मिलेगा। इस अभ्यास में प्राकृतिक आपदा राहत की ट्रेनिंग भी दी जाएगी, जिसमें सैनिकों को आपदा के समय लोगों की मदद करने की प्रैक्टिस कराई जाएगी।

अलास्का के बेरिंग सागर में स्ट्राइकर!

अमेरिकी सेना इस अभ्यास (Yudh Abhyas 2025) में अपनी आधुनिक तकनीक और हथियारों को शोकेस करेगी। खास तौर पर, अमेरिका अपने आर्मर्ड व्हीकल स्ट्राइकर के एंफिबियस मॉडल को भी शोकेस करेगा। हालांकि भारत पहले इसके लैंड वर्जन के ट्रायल कर चुका है, लेकिन भारत ने इसके पानी में चलने वाले एंफिबियस वर्जन को भी देखना चाहता था, जिसे अमेरिका ने खासतौर पर तैयार किया है। सूत्रों ने उम्मीद जताई कि अलास्का में एंफिबियस वर्जन को भी शोकेस किया जा सकता है। संभवतया इसकी क्षमता का प्रदर्शन अलास्का के बेरिंग सागर में किया जा सकता है।

इस साल का यह सैन्य अभ्यास (Yudh Abhyas 2025) इसलिए भी खास है क्योंकि यह ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और अमेरिकी सेनाओं की यह पहली जॉइंट एक्सरसाइज होगी। भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में अपनी आधुनिक और इंटीग्रेटेड बैटल स्ट्रेटजी का शानदार प्रदर्शन किया था। सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी सैनिक भारत के अनुभव से सीखने को उत्सुक हैं। अब दोनों सेनाएं आतंकवाद रोधी ऑपरेशनों, प्राकृतिक आपदा राहत और ठंडे इलाकों में ऑपरेशन की तैयारियों को अंजाम देंगे।

बता दें कि भारत और अमेरिका के बीच यह अभ्यास (Yudh Abhyas 2025) ऐसे समय में हो रहा है, जब दोनों देशों के बीच व्यापारिक मुद्दों पर तनाव चरम पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत के साथ टैरिफ को लेकर चर्चा में हैं। इसके बावजूद, यह अभ्यास दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग की मजबूती को दर्शाता है।

क्या कहा था रक्षा सचिव ने

इससे पहले जुलाई में एक इंटरव्यू में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने कहा था कि भारत में हाल ही में किए गए स्ट्राइकर आर्मर्ड व्हीकल के ट्रायल्स में यह भारतीय सेना की एक अहम जरूरत को पूरा नहीं कर पाया। भारतीय सेना को ऐसा आर्मर्ड व्हीकल चाहिए जो पानी में भी चल सके, ताकि नदियों और पानी से भरे इलाकों में आसानी से ऑपरेशन हो सके। यह क्षमता खासकर चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) और पूर्वोत्तर भारत के नदी वाले इलाकों में बेहद जरूरी है।

सिंह ने कहा था, “भारतीय सेना को इसका पानी में चलने वाला (एम्फिबियस) संस्करण चाहिए।” उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका ने भविष्य में होने वाले दोनों सेनाओं के संयुक्त सैन्य अभ्यास (Yudh Abhyas 2025) में स्ट्राइकर का एम्फिबियस संस्करण दिखाने की पेशकश की है।

स्ट्राइकर की खूबियां

स्ट्राइकर (Stryker infantry combat vehicle) 8-पहियों वाला आर्मर्ड व्हीकल है, जिसे अमेरिकी कंपनी जनरल डायनेमिक्स बनाती है। यह गाड़ी 8-9 सैनिकों को ले जा सकती है और इसे इराक युद्ध में भी सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया गया है। इसे इस सर्दी में अलास्का के तट पर डेमो के लिए तैयार किया जा रहा है।

अमेरिका ने 2023 में भारत को स्ट्राइकर M-SHORAD (Stryker armored combat vehicle) की पेशकश की थी। जो एक मोबाइल एयर डिफेंस व्हीकल वाहन है। यह विभिन्न प्रकार के हवाई खतरों से निपटने के लिए डिजाइन किया गया है। यह स्ट्राइकर A1 के चेसिस पर आधारित है और सेना की मैन्युवर यूनिट्स के लिए बेहद अहम है और मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस को अंजाम दे सकता है।

इस व्हीकल की खासियत इसकी टारगेट हासिल करने की क्षमता है, जो इसके ऑनबोर्ड सिस्टम के जरिए होती है। यह सिस्टम सेना के इंटीग्रेटेड एयर और मिसाइल डिफेंस कमांड सिस्टम से जुड़ा होता है, जिससे यह ज्यादा सटीकता के साथ एरियल टारगेट्स का पता लगाने और ट्रैक करने में सक्षम है।

स्ट्राइकर M-SHORAD में हेलफायर और स्टिंगर मिसाइलें लगी होती हैं, साथ ही इसमें 30 मिमी की तोप भी होती है। जिससे यह फिक्स्ड-विंग (साधारण हवाई जहाज), रोटरी-विंग (हेलीकॉप्टर) और ड्रोन जैसे विभिन्न प्रकार के हवाई खतरों का मुकाबला कर सकता है। इसे तीन या चार लोगों की टीम ऑपरेट करती है। युद्ध की स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया दे सकता है।

भारत चाहता है देश में बने स्ट्राइकर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछली वाशिंगटन यात्रा के दौरान संयुक्त बयान में स्ट्राइकर का जिक्र हुआ था। संयुक्त बयान में भारत की तरफ से P8I मरीन सर्विलांस एयरक्राफ्ट और जैवलिन एंटी-टैंक सिस्टम की मांग का भी उल्लेख था। लेकिन भारतीय सेना ने खासतौर पर स्ट्राइकर के ऐसे वेरिएंट की मांग की थी जो पानी में भी चल सके। साथ ही, आत्मनिर्भर भारत नीति के तहत इसे भारत में ही बनाने की शर्त रखी थी।

वहीं, अमेरिका चाहता है कि स्ट्राइकर को सीधे तैयार हालत (off-the-shelf) में दिया जाए, जबकि भारत की मांग है कि इसका निर्माण देश में ही हो ताकि घरेलू उद्योग को फायदा मिल सके। सूत्रों के अनुसार, भारत में आर्मर्ड व्हीकल्स बनाने की क्षमता पहले से मौजूद है। कहा जा रहा है कि तमिलनाडु के चेन्नई स्थित अवादी फैक्टरी में जहां टैंक बनाए जाते हैं, तो स्ट्राइकर जैसे व्हीकल भी यहां आसानी से तैयार किया जा सकते हैं।

हर स्ट्राइकर व्हीकल की कीमत करीब 5 मिलियन डॉलर (लगभग 41-42 करोड़ रुपये) या उससे अधिक होगी। अमेरिका ने भारत को इन व्हीकल्स की कई सौ यूनिट्स की पेशकश की है। वहीं अगर अलास्का में यह अपने डेमो में खरा उतरता है, तो भारत इस सौदे को मंजूरी दे सकता है।

Independence Day 2025: स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले के ऊपर ऑपरेशन सिंदूर का झंडा लेकर उड़ेंगे वायुसेना के हेलिकॉप्टर, सेना के बैंड देशभर में बजाएंगे देशभक्ति के तराने

Independence Day 2025: IAF Choppers to Fly Over Red Fort with Operation Sindoor Flag, Army Bands to Play Patriotic Tunes Across India
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Independence Day 2025: इस साल 79वां स्वतंत्रता दिवस (79th Independence Day) कई मायनों में खास होने जा रहा है। भारतीय वायुसेना लाल किले के ऊपर एक विशेष फ्लाईपास्ट करेगी, जिसमें तीन हेलिकॉप्टर एक साथ उड़ान भरेंगे। इनमें एक हेलिकॉप्टर राष्ट्रीय ध्वज लेकर उड़ेगा, जबकि दूसरा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का खास झंडा लेकर जाएगा। तीसरा हेलिकॉप्टर इनके साथ फॉर्मेशन में रहेगा। पहले की तरह इस बार भी हेलिकॉप्टर से जनता पर फूलों की वर्षा की जाएगी।

Op Sindoor Pakistani jets downed: ऑपरेशन सिंदूर में गिरे कितने पाकिस्तानी फाइटर जेट? इस कंपनी ने दिया ये बड़ा सुराग, वायु सेना प्रमुख ने किया था खुलासा

ऑपरेशन सिंदूर में हिस्सा लेने वाले करीब 15 जवानों को इस बार लाल किले के प्राचीर पर खास स्थान दिया जाएगा, जहां से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्र को संबोधित करेंगे। वायुसेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि स्वतंत्रता दिवस (Independence Day 2025) और गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय अवसरों पर विमान और हेलिकॉप्टर से तिरंगा फहराने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है।

इस साल 7 मई को शुरू हुए ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को दर्शाने के लिए प्रतीक के तौर पर हेलिकॉप्टरों पर इसका झंडा भी लगाया जाएगा। ऑपरेशन सिंदूर को पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में पाकिस्तान के खिलाफ शुरू किया था, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी, जिनमें 25 भारतीय और एक नेपाली नागरिक शामिल थे।

Independence Day 2025: IAF Choppers to Fly Over Red Fort with Operation Sindoor Flag, Army Bands to Play Patriotic Tunes Across India

Independence Day 2025: निमंत्रण पत्र में ऑपरेशन सिंदूर

रक्षा मंत्रालय ने इस साल स्वतंत्रता दिवस (Independence Day 2025) के निमंत्रण पत्रों में ऑपरेशन सिंदूर को मुख्य थीम बनाया है। इन कार्ड्स के ऊपरी दाहिने कोने में ऑपरेशन का नाम छपा है और बीच में चिनाब रेलवे ब्रिज की तस्वीर है। यह तस्वीर पहले मौजूद सेंट्रल विस्टा की जगह लगाई गई है। हाल ही में प्रधानमंत्री ने इस पुल का उद्घाटन किया था, जिससे पहली बार कश्मीर घाटी देश के बाकी हिस्सों से रेल मार्ग से जुड़ गई है।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

लाल किले (Independence Day 2025) के आसपास सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने एरियल सर्विलांस को बढ़ा दिया है। इसके साथ ही, आयोजन स्थल और उसके आसपास ‘मेड इन चाइना’ निगरानी उपकरणों के इस्तेमाल पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है।

Independence Day 2025: IAF Choppers to Fly Over Red Fort with Operation Sindoor Flag, Army Bands to Play Patriotic Tunes Across India
Photo: Indian Army

देशभर में मिलिट्री बैंड के कार्यक्रम

79वें स्वतंत्रता दिवस (79th Independence Day) के मौके पर भारतीय सेना के बैंड पूरे देश में विशेष संगीत प्रस्तुतियां देंगे। इसका उद्देश्य देशवासियों में देशभक्ति की भावना को और मजबूत करना, जनता और भारतीय सेनाओं के बीच रिॆश्तों को और गहरा करना और सेना की समृद्ध सांस्कृतिक एवं औपचारिक परंपराओं को प्रदर्शित करना है। इन कार्यक्रमों में देशभक्ति, सैन्य, बॉलीवुड और स्थानीय लोकप्रिय धुनें शामिल होंगी। इसके साथ ही खास सेल्फी प्वाइंट और थीम आधारित बैकड्रॉप बैनर भी लगाए जाएंगे।

भारतीय सेना देश के अलग-अलग हिस्सों में 20 प्रतिष्ठित सार्वजनिक स्थानों पर ये कार्यक्रम आयोजित करेगी। इनमें पटना का मरीन ड्राइव, गया म्यूजियम (बिहार), हजारीबाग का बड़ाम किला, लखनऊ का बड़ा इमामबाड़ा, वाराणसी का गंगा घाट, आगरा का ताजमहल और लाल किला, प्रयागराज का संगम, देहरादून का जसवंत ग्राउंड, गोवा का पणजी बीच और साउथ गोवा, बेंगलुरु का लाल बाग बॉटनिकल गार्डन, भोपाल का शौर्य स्मारक, सागर का राहतगढ़ किला, मुंबई का गेटवे ऑफ इंडिया, पुणे का शनिवार वाड़ा, वेलिंगटन वॉर मेमोरियल, हैदराबाद का तेलंगाना शहीद स्मारक, दिल्ली का इंडिया गेट, शिमला का मॉल रोड/रिज रोड और कारगिल शामिल हैं।

राजधानी दिल्ली में 15 अगस्त (Independence Day 2025) को प्रतिष्ठित आर्मी सिम्फनी बैंड इंडिया गेट पर प्रस्तुति देगा। यह एक घंटे का कार्यक्रम होगा, जिसमें देशभक्ति, सैन्य और पारंपरिक धुनों का मिश्रण होगा। इसका उद्देश्य राष्ट्र की भावना और देश के शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि देना है। यह याद दिलाएगा कि स्वतंत्रता की भावना सिर्फ रणभूमि के वीरता भरे किस्सों में ही नहीं, बल्कि उस साझा सांस्कृतिक गर्व में भी जीवित है, जो हर नागरिक को तिरंगे के नीचे एकजुट करता है।

Tejas Mk1A Engines: तेजस के लिए अक्टूबर से आने लगेंगे हर महीने दो GE F-404 इंजन, अमेरिकी F-35 फाइटर जेट नहीं खरीदेगा भारत!

HAL receives 3rd GE-404 engine for Tejas Mk-1A
Photo by HAL

Tejas Mk1A Engines: भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सौदों को लेकर बातचीत तेज हो गई है। भारत की कोशिश है कि तेजस एमके-1ए लड़ाकू विमानों के लिए एफ404 इंजनों (Tejas Mk1A Engines) की डिलीवरी को तेज किया जाए। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक ने अब तक दो इंजन भारत को दिए हैं। जबकि तीसरा इंजन अगस्त 2025 में भारत पहुंचेगा। यह डिलीवरी एक साल से ज्यादा की देरी के बाद हुई है। सूत्रों के अनुसार, जीई ने सितंबर तक हर महीने एक इंजन और अक्टूबर से हर महीने दो इंजन देने का वादा किया है।

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सूत्रों के अनुसार, जीई ने वादा किया है कि वह हर महीने एक इंजन देगी और अक्टूबर 2025 से हर महीने दो इंजन देना शुरू करेगी। भारत ने तेजस एमके-1ए के लिए 99 एफ404 इंजनों (Tejas Mk1A Engines) का पहला ऑर्डर दिया था। अब 97 और तेजस विमानों के लिए अतिरिक्त इंजनों का ऑर्डर देने की बातचीत चल रही है। इन विमानों की खरीद को रक्षा मंत्रालय पहले ही मंजूरी दे चुका है। यह सौदा अगस्त 2025 के अंत तक पूरा हो सकता है।

इसके साथ ही, अमेरिका से एफ-414 इंजन की खरीद पर भी बातचीत जारी है, जो भारत में बनने वाले एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) और तेजस एमके-2 लड़ाकू विमानों के लिए इस्तेमाल होंगे। ये दोनों विमान भारत में बनाए जा रहे हैं। इस सौदे की तकनीकी बातचीत पूरी हो चुकी है, लेकिन अंतिम समझौता होने में कुछ महीने और लग सकते हैं।

कुछ खबरों में दावा किया गया था कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत पर 50 फीसदी टैरिफ बढ़ाने के बाद भारत ने अमेरिका से रक्षा सौदों को रोक दिया है। लेकिन रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने इन खबरों को गलत और मनगढ़ंत बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ किसी भी रक्षा सौदे को रद्द करने का कोई फैसला नहीं लिया गया है और रक्षा खरीद की मौजूदा प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

अगले महीने अमेरिका से एक टीम भारत आएगी। यह टीम रक्षा सौदों पर आगे की बातचीत करेगी। सूत्रों ने बताया कि भारतीय नौसेना के लिए छह और पी-8आई विमानों की खरीद पर भी चर्चा जारी है। इन विमानों का इस्तेमाल समुद्री निगरानी और एंटी-सबमरीन वॉरफेयर के लिए होता है। अमेरिका द्वारा टैरिफ बढ़ाने का इन सौदों पर कोई असर नहीं पड़ा है।

सूत्रों ने बताया कि तेजस कार्यक्रम के अलावा, भारत मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) की खरीद पर भी विचार कर रहा है। इसकी घोषणा जल्द हो सकती है। भारतीय वायुसेना के पुराने मिग विमानों के रिटायर होने के कारण वायुसेना की ताकत 29 स्क्वाड्रनों तक घट हो सकती है। जबकि वायुसेना को कम से कम 42 स्क्वाड्रनों की जरूरत है। इस कमी को पूरा करने के लिए विदेशी लड़ाकू विमानों की खरीद पर विचार किया जा रहा है।

भारत की आत्मनिर्भर भारत पहल का मकसद स्वदेशी लड़ाकू विमानों को बढ़ावा देना है। लेकिन जरूरत पड़ने पर विदेशी विमानों की खरीद भी एक विकल्प है। भारतीय वायुसेना और नौसेना पहले से ही राफेल विमानों का इस्तेमाल कर रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, वायुसेना ने एमआरएफए कार्यक्रम के लिए राफेल को ही सुझाया है। हालांकि, रक्षा मंत्रालय रूस के एसयू-35, अमेरिकी और स्वीडिश विमानों जैसे अन्य विकल्पों पर भी विचार कर सकता है। वहीं, अमेरिका के पांचवी पीढ़ी के एफ-35 विमानों में भारत की कोई रुचि नहीं है। यह विमान दुनिया के सबसे एडवांस स्टील्थ फाइटर जेट्स में से एक है, लेकिन भारत की प्राथमिकता स्वदेशी विमानों और तकनीक पर है।

हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने अपनी रक्षा तैयारियों को और तेज कर दिया है। अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारत ने यह ऑपरेशन शुरू किया था। इस हमले में 26 लोग मारे गए थे। इसके बाद 6-7 मई की रात को भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पीओके में नौ आतंकी ठिकानों पर हमला किया।

इस ऑपरेशन में भारत ने ड्रोन और स्वदेशी मिसाइलों का इस्तेमाल किया। इन हमलों में कोई आम नागरिक हताहत नहीं हुआ। पाकिस्तान ने जवाब में ड्रोन और मिसाइल हमले किए, लेकिन भारत के एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम ने इन्हें नाकाम कर दिया। जिसके बाद 10 मई को पाकिस्तान की पहल पर दोनों देशों के बीच सीजफायर का एलान हुआ।