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Tejas Mk1A Engines: तेजस के लिए अक्टूबर से आने लगेंगे हर महीने दो GE F-404 इंजन, अमेरिकी F-35 फाइटर जेट नहीं खरीदेगा भारत!

HAL receives 3rd GE-404 engine for Tejas Mk-1A
Photo by HAL

Tejas Mk1A Engines: भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सौदों को लेकर बातचीत तेज हो गई है। भारत की कोशिश है कि तेजस एमके-1ए लड़ाकू विमानों के लिए एफ404 इंजनों (Tejas Mk1A Engines) की डिलीवरी को तेज किया जाए। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक ने अब तक दो इंजन भारत को दिए हैं। जबकि तीसरा इंजन अगस्त 2025 में भारत पहुंचेगा। यह डिलीवरी एक साल से ज्यादा की देरी के बाद हुई है। सूत्रों के अनुसार, जीई ने सितंबर तक हर महीने एक इंजन और अक्टूबर से हर महीने दो इंजन देने का वादा किया है।

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सूत्रों के अनुसार, जीई ने वादा किया है कि वह हर महीने एक इंजन देगी और अक्टूबर 2025 से हर महीने दो इंजन देना शुरू करेगी। भारत ने तेजस एमके-1ए के लिए 99 एफ404 इंजनों (Tejas Mk1A Engines) का पहला ऑर्डर दिया था। अब 97 और तेजस विमानों के लिए अतिरिक्त इंजनों का ऑर्डर देने की बातचीत चल रही है। इन विमानों की खरीद को रक्षा मंत्रालय पहले ही मंजूरी दे चुका है। यह सौदा अगस्त 2025 के अंत तक पूरा हो सकता है।

इसके साथ ही, अमेरिका से एफ-414 इंजन की खरीद पर भी बातचीत जारी है, जो भारत में बनने वाले एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) और तेजस एमके-2 लड़ाकू विमानों के लिए इस्तेमाल होंगे। ये दोनों विमान भारत में बनाए जा रहे हैं। इस सौदे की तकनीकी बातचीत पूरी हो चुकी है, लेकिन अंतिम समझौता होने में कुछ महीने और लग सकते हैं।

कुछ खबरों में दावा किया गया था कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत पर 50 फीसदी टैरिफ बढ़ाने के बाद भारत ने अमेरिका से रक्षा सौदों को रोक दिया है। लेकिन रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने इन खबरों को गलत और मनगढ़ंत बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ किसी भी रक्षा सौदे को रद्द करने का कोई फैसला नहीं लिया गया है और रक्षा खरीद की मौजूदा प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

अगले महीने अमेरिका से एक टीम भारत आएगी। यह टीम रक्षा सौदों पर आगे की बातचीत करेगी। सूत्रों ने बताया कि भारतीय नौसेना के लिए छह और पी-8आई विमानों की खरीद पर भी चर्चा जारी है। इन विमानों का इस्तेमाल समुद्री निगरानी और एंटी-सबमरीन वॉरफेयर के लिए होता है। अमेरिका द्वारा टैरिफ बढ़ाने का इन सौदों पर कोई असर नहीं पड़ा है।

सूत्रों ने बताया कि तेजस कार्यक्रम के अलावा, भारत मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) की खरीद पर भी विचार कर रहा है। इसकी घोषणा जल्द हो सकती है। भारतीय वायुसेना के पुराने मिग विमानों के रिटायर होने के कारण वायुसेना की ताकत 29 स्क्वाड्रनों तक घट हो सकती है। जबकि वायुसेना को कम से कम 42 स्क्वाड्रनों की जरूरत है। इस कमी को पूरा करने के लिए विदेशी लड़ाकू विमानों की खरीद पर विचार किया जा रहा है।

भारत की आत्मनिर्भर भारत पहल का मकसद स्वदेशी लड़ाकू विमानों को बढ़ावा देना है। लेकिन जरूरत पड़ने पर विदेशी विमानों की खरीद भी एक विकल्प है। भारतीय वायुसेना और नौसेना पहले से ही राफेल विमानों का इस्तेमाल कर रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, वायुसेना ने एमआरएफए कार्यक्रम के लिए राफेल को ही सुझाया है। हालांकि, रक्षा मंत्रालय रूस के एसयू-35, अमेरिकी और स्वीडिश विमानों जैसे अन्य विकल्पों पर भी विचार कर सकता है। वहीं, अमेरिका के पांचवी पीढ़ी के एफ-35 विमानों में भारत की कोई रुचि नहीं है। यह विमान दुनिया के सबसे एडवांस स्टील्थ फाइटर जेट्स में से एक है, लेकिन भारत की प्राथमिकता स्वदेशी विमानों और तकनीक पर है।

हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने अपनी रक्षा तैयारियों को और तेज कर दिया है। अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारत ने यह ऑपरेशन शुरू किया था। इस हमले में 26 लोग मारे गए थे। इसके बाद 6-7 मई की रात को भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पीओके में नौ आतंकी ठिकानों पर हमला किया।

इस ऑपरेशन में भारत ने ड्रोन और स्वदेशी मिसाइलों का इस्तेमाल किया। इन हमलों में कोई आम नागरिक हताहत नहीं हुआ। पाकिस्तान ने जवाब में ड्रोन और मिसाइल हमले किए, लेकिन भारत के एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम ने इन्हें नाकाम कर दिया। जिसके बाद 10 मई को पाकिस्तान की पहल पर दोनों देशों के बीच सीजफायर का एलान हुआ।

Shaktibaan Regiments: भारतीय सेना की शक्तिबाण रेजिमेंट्स को देखते ही थर-थर कांपेगा दुश्मन! ये हथियार होंगे शामिल, इस साल के आखिर तक हो जाएगी ऑपरेशनल

Shaktibaan Regiments: Indian Army’s New Artillery Power to Deploy by Year-End
Photo: Indian Army

Shaktibaan Regiments: भारतीय सेना इस साल के आखिर तक शक्तिबाण आर्टिलरी रेजिमेंट्स को पाकिस्तान सीमा पर तैनात करने जा रही है। इसके तहत पाकिस्तान सीमा पर शक्तिबाण आर्टिलरी रेजिमेंट तैनात की जाएगी। इसके साथ ही सेना में भैरव लाइट कमांडो बटालियन और रुद्र ब्रिगेड भी बनाई जाएंगी। सेना के सूत्रों के मुताबिक, सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने इस महीने की शुरुआत में इसके लिए औपचारिक आदेश “इम्प्लीमेंटेशन इंस्ट्रक्शन्स” जारी कर दिए हैं।

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Shaktibaan Regiments में खास कंपोजिट बैटरी

शक्तिबान रेजिमेंट (Shaktibaan Regiments) में दो बड़ी बैटरियां होंगी, जिनमें सामान्य से ज्यादा संख्या में गन होंगी। इसके अलावा एक खास “कंपोजिट बैटरी” होगी, जिसमें दो तरह की तकनीकें एक साथ काम करेंगी। इनमें लंबी दूरी तक मार करने वाले लॉइटर म्युनिशन (लंबी रेंज वाले) और रिमोट से चलने वाले एयरक्राफ्ट (RPA) शामिल होंगे। जो पहले से मौजूद दिव्यास्त्र बैटरी की तर्ज पर होंगे।

एक आर्टिलरी रेजिमेंट में आमतौर पर तीन बैटरियां होती हैं और हर बैटरी में छह गन होती हैं, यानी कुल 18 गन होती हैं। बैटरी रेजिमेंट की एक टैक्टिकल यूनिट होती है, जिसमें तोपें, आवश्यक हथियार, उपकरण और प्रशिक्षित सैनिक होते हैं।

सूत्रों का कहना है कि शुरुआत में शक्तिबाण रेजिमेंट (Shaktibaan Regiments) को पश्चिमी मोर्चे पर तैनात किया जाएगा, लेकिन बाद में देश के अन्य इलाकों में भी तैनात किया जा सकता है। यह रेजिमेंट सेना को ज्यादा मारक ताकत और दुश्मन के ड्रोन का मुकाबला करने की क्षमता देगी। इस कदम का एलान ऐसे समय में हुआ है जब हालिया युद्धों में ड्रोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत-पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य टकराव में भी ड्रोन का जबरदस्त इस्तेमाल देखने को मिला था। सेना ने स्पष्ट किया है कि शक्तिबाण रेजिमेंट का गठन “सेव एंड रेज” मॉडल पर हो रहा है, यानी इसे बनाने में कोई अतिरिक्त खर्च नहीं होगा, बल्कि मौजूदा संसाधनों का इस्तेमाल कर इसे तैयार किया जाएगा।

भैरव लाइट कमांडो बटालियन

भारतीय सेना इन्फेंट्री में भी बदलाव कर रही है। इसके तहत भैरव लाइट कमांडो बटालियन तैयार की जा रही है। ये बटालियन तेज और निर्णायक कार्रवाइयों के लिए तैयार की जा रही हैं। इन्हें हाई एल्टीट्यूड इलाकों, आतंकवाद-रोधी अभियानों और अर्बन वॉरफेयर के लिए ट्रेन किया जाएगा। भैरव बटालियन सीमा पर किसी भी आपात स्थिति में जल्दी और सटीक कार्रवाई करने में सक्षम होगी। ये बटालियन सेना के अलग-अलग कोर के साथ जुड़ी होंगी। “सन ऑफ सॉयल” पॉलिसी के तहत, इनमें भर्ती के लिए ज्यादातर जवान उसी इलाके से चुने जाएंगे, जहां ये तैनात होंगी। पहले इनकी ट्रेनिंग रेजिमेंटल सेंटर्स में होगी, फिर इन्हें स्पेशल फोर्सेस ट्रेनिंग सेंटर्स में भी ट्रेनिंग दी जाएगी। ताकि स्पेशल फोर्सेस को ज्यादा महत्वपूर्ण मिशनों के लिए मुक्त किया जा सके।

भैरव बटालियन, स्पेशल फोर्सेस और सामान्य इन्फैंट्री के बीच एक कड़ी का काम करेंगी। इनकी तैनाती पाकिस्तान और चीन, दोनों सीमाओं पर होगी।

रुद्र ब्रिगेड

इसके अलावा सेना ब्रिगेड स्तर पर भी बदलाव कर रही है। नई ब्रिगेड को “रुद्र ब्रिगेड” नाम दिया जाएगा। एक ब्रिगेड में करीब 3,000 से 3,500 सैनिक होते हैं और इसकी कमान एक ब्रिगेडियर के पास होती है। रुद्र ब्रिगेड किसी भी इलाके में ऑपरेशन कर सकेगी। इसमें सभी प्रकार की कॉम्बैट आर्म्स जैसे इन्फैंट्री, आर्मर्ड और मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री और सभी सपोर्ट आर्म्स भी शामिल होंगी, जिनमें आर्टिलरी, इंजीनियर्स, एयर डिफेंस और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर शामिल हैं। साथ ही, इन्हें खास तरह की लॉजिस्टिक और लड़ाई में मदद करने वाली टीम का सपोर्ट भी मिलेगा।

सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने 26 जुलाई 2025 को कारगिल विजय दिवस के मौके पर द्रास में इन बदलावों की घोषणा की। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना न केवल मौजूदा चुनौतियों का सामना कर रही है, बल्कि एक आधुनिक और भविष्य के लिए तैयार सेना बन रही है।

Supreme Court on JAG Posts: सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की सेना की भर्ती नीति, अब जज एडवोकेट जनरल में लिंग के आधार पर नहीं होगा भेदभाव

Supreme Court on JAG Posts: Strikes Down Army Policy, Ends Gender-Based Discrimination in Recruitment
Photo from SCI Website

Supreme Court on JAG Posts: सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय सेना की जज एडवोकेट जनरल (JAG) शाखा में पुरुष उम्मीदवारों के लिए अधिक पद आरक्षित करने और महिलाओं के लिए महिलाओं के लिए कम पद रखने की नीति को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि असली जेंडर न्यूट्रैलिटी (लैंगिक समानता) का मतलब यह है कि योग्यता के आधार पर, बिना किसी लैंगिक भेदभाव के सभी योग्य उम्मीदवारों का चयन किया जाए। कोर्ट ने कहा कि यह नीति गलत है और संविधान में दी गई समानता के खिलाफ है। कोर्ट ने आदेश दिया कि अब जेएजी भर्ती में लिंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होगा। सभी उम्मीदवारों की एक ही मेरिट लिस्ट बनेगी, जिसमें सभी उम्मीदवारों के अंक सार्वजनिक किए जाएंगे।

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जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की बेंच (Supreme Court on JAG Posts) ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि सेना ने 1950 के आर्मी एक्ट के तहत महिलाओं को जैग में शामिल होने की इजाजत दी है। फिर भी पुरुषों के लिए ज्यादा पद रखना और महिलाओं की संख्या सीमित करना गलत है। कोर्ट ने 2023 की उस अधिसूचना को भी गलत बताया, जिसमें नौ जैग पदों में से छह पुरुषों और सिर्फ तीन महिलाओं के लिए थे। बैंच के मुताबिक, महिलाओं के लिए केवल तीन और पुरुषों के लिए छह पद रखने का प्रावधान संविधान में समानता के सिद्धांत के खिलाफ है, क्योंकि यह पुरुषों के लिए आरक्षण जैसा है।

अदालत ने कहा कि जज एडवोकेट जनरल ब्रांच में (Supreme Court on JAG Posts) पुरुष और महिला अधिकारियों के अलग-अलग कैडर या सेवा शर्तें नहीं हैं। चयन की प्रक्रिया और मानदंड दोनों के लिए समान हैं। इसीलिए 2023 की नीति के तहत सबसे योग्य उम्मीदवारों का चयन लिंग के भेद के बिना किया जाना चाहिए, क्योंकि इस शाखा का मुख्य काम सेना को कानूनी सलाह देना है। जस्टिस मनमोहन ने कहा कि अगर दस महिला उम्मीदवार जेएजी के लिए योग्य हैं और उनकी मेरिट पुरुषों से बेहतर है, तो सभी दस को चुना जाना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि देश की आधी आबादी को पीछे रखकर देश की सुरक्षा मजबूत नहीं हो सकती।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि महिलाओं को पहले भर्ती न करने की भरपाई के लिए कम से कम 50 फीसदी रिक्तियां महिला उम्मीदवारों को दी जाएं। लेकिन यह सीमा तभी लागू हो जब महिलाओं की योग्यता पुरुष उम्मीदवारों से कम हो। यदि महिला उम्मीदवार पुरुषों से अधिक अंक लाती हैं, तो उन्हें सीमित सीटों के कारण रोका जाना समानता के अधिकार का उल्लंघन है। अदालत ने उदाहरण देते हुए कहा कि इस मामले में याचिकाकर्ता ने 447 अंक प्राप्त किए थे, जबकि पुरुष उम्मीदवार ने 433 अंक हासिल किए थे, फिर भी पुरुष उम्मीदवार का चयन हो गया और महिला उम्मीदवार को बाहर कर दिया गया। इसे अदालत ने इनडायरेक्ट डिस्क्रिमिनेशन (अप्रत्यक्ष भेदभाव) बताया। कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया कि याचिकाकर्ता को अगले ट्रेनिंग कोर्स में जेएजी ब्रांच में शामिल किया जाए।

यह मामला दो महिला उम्मीदवारों की याचिका से शुरू हुआ था। जिन्होंने जैग एंट्री स्कीम 31वें कोर्स में चयन के लिए आवेदन किया था। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्होंने क्रमशः चौथा और पांचवां स्थान हासिल किया था और कई पुरुष उम्मीदवारों से बेहतर अंक प्राप्त किए थे, फिर भी महिलाओं के लिए केवल तीन पद होने के कारण उनका चयन नहीं हुआ। याचिका में कहा गया था कि जैग में पुरुषों के लिए आरक्षण मनमाना और भेदभावपूर्ण है।

वही, दूसरी याचिकाकर्ता को राहत नहीं मिली, क्योंकि उसने याचिका लंबित रहने के दौरान भारतीय नौसेना में नौकरी शुरू कर दी थी। कोर्ट ने पूछा कि क्या वह नौसेना में अपनी नौकरी रखना चाहती है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार से सवाल किए। सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि 2023 से जैग की भर्ती में 50-50 का अनुपात अपनाया गया है। लेकिन कोर्ट ने कहा कि अगर ज्यादा महिलाएं योग्य हैं, तो 50 प्रतिशत की सीमा लगाना भी गलत है। कोर्ट ने कहा कि जब चयन के नियम और काम एक जैसे हैं, तो लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए।

सरकार ने यह भी तर्क दिया कि अगर जेएजी की महिला अधिकारी सीमा पर युद्ध में तैनात होती हैं, तो उनके युद्धबंदी बनने का खतरा हो सकता है। कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जब भारतीय वायुसेना में महिलाएं राफेल विमान उड़ा सकती हैं, तो जेएजी जैसे कानूनी पदों पर उनकी नियुक्ति में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए।

India China Sweets Exchange: स्वतंत्रता दिवस पर चीन को मिठाई, पाकिस्तान को ‘लाल आंख’, भारतीय सेना का सख्त संदेश

India-China Sweets Exchange on Independence Day Sweets for China, Stern Warning for Pakistan
File Photo (Photo by Indian Army)

India China Sweets Exchange: इस स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त 2025 को भारत और चीन की सेनाएं पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर मिठाई का आदान-प्रदान करेंगी। यह मुलाकात एलएसी पर बने विशेष मीटिंग पॉइंट्स पर होगी। लेकिन इस बार भारत की ओर से यह मुलाकात सामान्य समारोह जैसी नहीं होगी। भारतीय सेना के जवान अपनी कॉम्बैट यूनिफॉर्म में ही मिठाई देंगे। दूसरी ओर, चीनी सेना के जवान इस तरह की मुलाकातों में सेरेमोनियल ड्रेस पहनकर आते हैं और चाहते हैं कि भारतीय जवान भी ऐसी ही ड्रेस पहनें।

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India China Sweets Exchange: गलवान के बाद खराब हुए थे रिश्ते

पूर्वी लद्दाख में अप्रैल 2020 से भारत और चीन की सेनाओं के बीच तनाव शुरू हुआ था। इस दौरान गलवान घाटी में हिंसक झड़प भी हुई थी। इसके बाद दोनों देशों के बीच रिश्ते खराब हो गए। इसके बाद सीमा पर होने वाली बॉर्डर पर्सनल मीटिंग्स भी बंद हो गई थीं। 1 अगस्त 2020 को चीन ने मुलाकात के लिए निमंत्रण भेजा था, लेकिन भारतीय सेना ने इसे ठुकरा दिया। उस समय भारत ने 15 अगस्त पर भी चीन को निमंत्रण नहीं दिया गया था।

चीन अपने राष्ट्रीय अवसरों, जैसे नए साल और राष्ट्रीय दिवस पर भी निमंत्रण भेजता रहा, लेकिन भारत का रुख साफ था। भारतीय सेना ने कहा कि जब तक एलएसी पर तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता, तब तक ऐसी औपचारिक मुलाकातें नहीं होंगी। फिर फरवरी 2021 में कुछ बॉर्डर पॉइंट्स पर तनाव कम करने की प्रक्रिया शुरू हुई। इसके बाद भारत ने चीन के निमंत्रण स्वीकार करने शुरू किए और अपने खास अवसरों पर निमंत्रण भेजना भी शुरू किया।

सेना सूत्रों के अनुसार, बातचीत बहाल होने के बाद भी जब भी ऐसी मीटिंग हुईं, भारतीय अधिकारी कॉम्बेट यूनिफॉर्म में ही पहुंचे। यह एक साफ संदेश है कि हालात सामान्य नहीं है। चीन जहां सेरेमोनियल वर्दी में आता है, वहीं भारत का कहना है कि अप्रैल 2020 से पहले जैसी स्थिति लौटने तक सामान्य माहौल का दिखावा नहीं किया जाएगा। दूसरी ओर, चीन कोशिश करता रहा कि वह हर तरह से यह दिखाए कि सब कुछ सामान्य है।

India-China Sweets Exchange on Independence Day Sweets for China, Stern Warning for Pakistan
File Photo (Photo by Indian Army)

मिठाई एक्सचेंज की परंपरा

भारत और चीन के बीच कुल पांच बीपीएम पॉइंट हैं, इनमें दो लद्दाख में, एक सिक्किम में और दो अरुणाचल प्रदेश में। 1990 में शुरू हुई इस व्यवस्था को दोनों देशों ने जमीनी स्तर पर विश्वास बहाली के लिए बनाई गई थी। साल में नौ फिक्स मीटिंग होती हैं। भारत की तरफ से 26 जनवरी, बैसाखी, 15 अगस्त और दिवाली पर बीपीएम होती है, जबकि चीन की तरफ से न्यू ईयर, 14 फरवरी स्प्रिंग फेस्टिवल, 1 मई, 1 अगस्त पीएलए डे और 1 अक्टूबर को चीन के राष्ट्रीय दिवस के मौके पर औपचारिक बातचीत के साथ मिठाई का आदान-प्रदान भी होता है।

India-China Sweets Exchange on Independence Day Sweets for China, Stern Warning for Pakistan
File Photo (Photo by Indian Army)

पिछले साल दीपावली पर चीन को दी थी मिठाई

पिछले साल दीपावली पर भी भारत और चीन की सेनाओं ने मिठाई का आदान-प्रदान किया था। यह मुलाकात चुशुल-मोल्दो बॉर्डर मीटिंग पॉइंट पर हुई था। इसके अलावा पूर्वी लद्दाख के डेमचोक और देपसांग मैदानों में भी दोनों देशों की सेनाओं ने मिठाई एक-दूसरे को मिठाई बांटी थी। इस दौरान चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने भारतीय सेना को पारंपरिक चीनी मास्क का मोमेंटो और मिठाई भेंट किए थे। सूत्रों के मुताबिक, यह स्वीट एक्सचेंज एलएसी पर स्थित पांच बॉर्डर पर्सनल मीटिंग (बीपीएम) पॉइंट्स पर हुआ था। बता दें कि पिछले साल 21 अक्तूबर को हुए डिसएंगेजमेंट समझौते के बाद दोनों देशों की सेनाओं ने इन दो स्थानों से अपने सैनिक हटाए थे।

पाकिस्तान को दिखाएंगे लाल आंख

पिछले साल स्वतंत्रता दिवस पर भारतीय सेना और बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) ने पाकिस्तान सेना और पाक रेंजर्स के साथ भी मिठाई का आदान-प्रदान किया था। जम्मू क्षेत्र में एलओसी के पूंछ और मेंढर क्रॉसिंग पॉइंट्स, और इंटरनेशनल बॉर्डर के कई बीओपी पर मिठाई और शुभकामनाएं दी गईं थी। लेकिन इस बार पहलगाम में हुए आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान के साथ यह पारंपरिक प्रकिया नहीं अपनाई जाएगी। 20204 में पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस और ईद पर भी दोनों देशों की सेनाओं ने मिठाई बांटी थी। ईद पर यह पहली बार हुआ था जब पुलवामा हमले के बाद दोनों ओर से मिठाई का आदान-प्रदान हुआ। 2019 में कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद भी कुछ समय के लिए यह परंपरा रुकी थी। उस समय पाकिस्तान ने मिठाई देने से मना कर दिया था, और भारत ने भी जवाब में ऐसा ही किया था। हालांकि, बाद में 2021 और 2023 में यह परंपरा फिर से शुरू हुई थी। 2024 में ईद-उल-अजहा पर बीएसएफ और पाकिस्तान रेंजर्स ने वाघा-अटारी सीमा पर मिठाई का आदान-प्रदान किया था। 2023 में भी ईद-उल-फितर और ईद-उल-अजहा के मौके पर भी दोनों देशों के बीच मिठाई बंटी थी।

Op Sindoor Pakistani jets downed: ऑपरेशन सिंदूर में गिरे कितने पाकिस्तानी फाइटर जेट? इस कंपनी ने दिया ये बड़ा सुराग, वायु सेना प्रमुख ने किया था खुलासा

Op Sindoor Pakistani jets downed: Martin-Baker ejection seat records reveal clue

Op Sindoor Pakistani jets downed: 7 मई से 10 मई तक लगभग 80 घंटे तक चले ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के कम से कम छह फाइटर जेट्स का नुकसान हुआ। इसका खुलासा खुद वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने किया। इस बात की पुष्टि फाइटर जेट्स के लिए इजेक्शन सीट बनाने वाली कंपनी ब्रिटेन की कंपनी मार्टिन-बेकर ने सीधे तौर पर तो नहीं की, लेकिन उसने इसके संकेत जरूर दिए।

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दरअसल मार्टिन-बेकर कंपनी हर बार आंकड़े तब अपडेट करती है, जब फाइटर जेट में उसकी बनी इजेक्शन सीट की मदद से कोई पायलट सुरक्षित बाहर निकलने में सफल होता है। वे केवल तभी पोस्ट करते हैं जब पायलट सुरक्षित बाहर निकलता है। वहीं, अगर कोई विमान क्रैश होता है या पायलट इजेक्शन सीट का इस्तेमाल करता है, लेकिन बच नहीं पाता है, तो कंपनी इसकी जानकारी शेयर नहीं करती। वहीं, कंपनी युद्ध में खोए गए विमानों की जानकारी भी नहीं देती, क्योंकि इसमें गोपनीयता का समझौता शामिल होता है। लेकिन वे बचाई गई जानों की संख्या को जरूर अपडेट करते हैं।

16 अप्रैल को मार्टिन-बेकर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि एक दिन पहले पाकिस्तान वायुसेना का मिराज वी रोज विमान रट्टा टिब्बा, वेहारी के पास क्रैश हो गया था। इस विमान के दोनों पायलट मार्टिन-बेकर की पीआरएम4 इजेक्शन सीट का इस्तेमाल करके सुरक्षित बाहर निकल गए। कंपनी ने बताया कि उस समय तक उनकी सीट्स ने 7,784 लोगों की जान बचाई थी।

इसके बाद 7 मई को, मार्टिन-बेकर ने एक और पोस्ट किया। इसमें बताया गया कि एक दिन पहले अमेरिकी नौसेना का एफ/ए-18एफ सुपर हॉर्नेट विमान रात में यूएसएस हैरी एस. ट्रूमैन जहाज पर लैंडिंग के दौरान क्रैश हो गया। इस विमान के दोनों क्रू मेंबर्स मार्टिन-बेकर की यूएस14ए (NACES) इजेक्शन सीट का इस्तेमाल करके सुरक्षित बाहर निकल गए। इस पोस्ट में कंपनी ने बचाई गई जानों की संख्या को अपडेट करके 7,788 बताया।

उसी दिन, 7 मई को कंपनी ने एक और क्रैश की जानकारी दी। इसमें बताया गया कि फिनलैंड की डिफेंस फोर्स का एफ/ए-18सी हॉर्नेट विमान लैपलैंड के रोवानीमी के पास एक एयर शो की प्रैक्टिस के दौरान क्रैश हो गया। इस विमान का पायलट मार्टिन-बेकर की एसएफ-14ए (NACES) इजेक्शन सीट का इस्तेमाल करके सुरक्षित बाहर निकल गया। इसके बाद कंपनी ने बचाई गई जानों की संख्या को 7,789 बताया।

लेकिन खास बात यह रही कि इस अपडेट में 7,785 और 7,786 की संख्या गायब थी। इसका मतलब है कि 16 अप्रैल से 7 मई के बीच कम से कम एक या दो विमान क्रैश हुए, जिसमें दो पायलट शामिल थे। इसका रिकॉर्ड तो जोड़ा गया, लेकिन जानकारी सार्वजनिक तौर पर शेयर नहीं की गई।

मार्टिन-बेकर का अगला अपडेट 31 जुलाई को आया। इसमें बताया गया कि उनकी इजेक्शन सीट्स ने कुल 7,793 लोगों की जान बचाई। इस पोस्ट में कहा गया कि एक दिन पहले पोर्टो फरेरा के ऊपर एक ए-29ए सुपर टूकानो विमान मिड-एयर टक्कर के चलते क्रैश हो गया। जिसमें पायलट ने BR10LCX सीट का इस्तेमाल कर इजेक्ट किया।

7 मई के बाद भारतीय वायुसेना में केवल एक हादसा हुआ, जिसमें एक जैगुआर फाइटर जेट ट्रेनिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हुआ, जिसमें दोनों पायलट इजेक्ट नहीं कर पाए और और उनकी जान चली गई।

मार्टिन-बेकर की इजेक्शन सीट्स से बचाई गई तीन जानों (7,790, 7,791, 7,792) का रहस्य भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के बयान से खुल सकता है। उन्होंने शनिवार को बताया कि भारत की एस-400 ट्रायम्फ एयर डिफेंस सिस्टम ने पाकिस्तान के पांच फाइटर जेट्स को मार गिराया।

पाकिस्तानी वायुसेना के जिन फाइटर जेट्स में मार्टिन-बेकर की इजेक्शन सीटें लगी होती हैं, उनमें JF-17 और F-16 शामिल हैं। जबकि उनके J-10 फाइटर जेट्स में चीनी इजेक्शन सीट्स का इस्तेमाल होता है।

मार्टिन-बेकर की पोस्ट्स और वायुसेना प्रमुख के आज के बयान को जोड़कर देखें, तो यह साफ होता है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कम से कम तीन पाकिस्तानी पायलट अपने विमानों के मार गिराए जाने के बावजूद मार्टिन-बेकर की इजेक्शन सीट्स की मदद से सुरक्षित बाहर निकले। इससे एयर चीफ मार्शल के इस दावे की पुष्टि होती है कि ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के लड़ाकू विमान भारतीय मिसाइलों का शिकार बने थे।

बता दें कि ऑपरेशन सिंदूर 7 मई को शुरू हुआ और चार दिन तक चला। यह ऑपरेशन अप्रैल 2025 में कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया था, जिसमें 26 लोग मारे गए थे। भारतीय वायुसेना ने इस ऑपरेशन में पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर में नौ आतंकी ठिकानों पर हमले किए थे।

Defence Production: भारत के डिफेंस प्रोडक्शन ने रचा नया कीर्तिमान, रिकॉर्ड 1.51 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा उत्पादन

Rajnath Singh: Self-Reliance in Defence is a Condition for Survival
Defence Minister Rajnath Singh (Photo: PIB)

Defence Production: भारत के डिफेंस प्रोडक्शन ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में नया इतिहास रचते हुए 1,50,590 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड उत्पादन हासिल किया। यह उपलब्धि पिछले वित्तीय वर्ष के 1.27 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले 18 फीसदी अधिक है। वहीं, 2019-20 के 79,071 करोड़ रुपये मुकाबले 90 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

Pakistan Air Defence: पाक एयर डिफेंस की 2022 की चूक बनी भारत की जीत का हथियार! ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस के आगे क्यों फेल हुआ पाकिस्तान का सुरक्षा कवच?

इस रिकॉर्ड उत्पादन में रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों और अन्य सार्वजनिक इकाइयों का हिस्सा 77 प्रतिशत रहा। वहीं, निजी कंपनियों ने 23 प्रतिशत योगदान दिया। पिछले साल निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी 21 प्रतिशत थी, जो इस साल बढ़कर 23 प्रतिशत हो गई। इससे पता चलता है कि प्राइवेट कंपनियां अब डिफेंस सेक्टर में और एक्टिव हो रही हैं।

पिछले दस सालों में सरकार ने रक्षा क्षेत्र में कई बड़े बदलाव किए। इनमें कारोबार को आसान बनाने और स्वदेशी डिफेंस इक्विपमेंट बनाने पर फोकस करना शामिल है। इसके चलते डिफेंस पब्लिक सेक्टर यूनिट्स का प्रोडक्शन 16 फीसदी और प्राइवेट सेक्टर का प्रोडक्शन 28 फीसदी बढ़ा है।

यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान का हिस्सा है। इस पहल का लक्ष्य है कि भारत डिफेंस इक्विपमेंट के लिए विदेशों पर कम निर्भर हो और अपना रक्षा उद्योग इतना मजबूत हो कि वह देश की जरूरतें पूरी करे और निर्यात भी बढ़ाए। इस पॉलिसी से अच्छे रिजल्ट्स देखने को मिले हैं।

रक्षा निर्यात ने भी इस साल नया रिकॉर्ड बनाया। वित्तीय वर्ष 2024-25 में रक्षा निर्यात 23,622 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह पिछले साल के 21,083 करोड़ रुपये से 2,539 करोड़ रुपये यानी 12.04 फीसदी ज्यादा है।

सरकार की नीतियों, निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी और निर्यात की बढ़ती क्षमता ने भारत के रक्षा उत्पादन को नई ऊंचाई दी है। सरकार ने कारोबार को आसान बनाने के लिए कई कदम उठाए। इनमें लाइसेंस प्रक्रिया को सरल करना और निजी कंपनियों को रक्षा क्षेत्र में आने के लिए प्रोत्साहित करना शामिल है। जिसका परिणाम यह है कि निजी क्षेत्र की बढ़ती हिस्सेदारी दिखाती है कि अब रक्षा उद्योग में सिर्फ सरकारी कंपनियां ही नहीं, बल्कि निजी कंपनियां भी अहम भूमिका निभा रही हैं। यह भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।

वहीं, रक्षा मंत्रालय ने निर्यात बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए। इनमें इंटरनेशनल डिफेंस एग्जिबिशन्स में हिस्सा लेना और विदेशी कंपनियों के साथ सहयोग करना शामिल है। इन प्रयासों ने भारत को वैश्विक रक्षा बाजार में नई पहचान दी। डिफेंस एक्सपोर्ट्स में हुई बढ़ोतरी ने भारत को दुनिया में मजबूत स्थिति दी है। भारतीय डिफेंस इक्विपमेंट्स की मांग अब विदेशों में बढ़ रही है। यह भारत की तकनीकी ताकत और गुणवत्ता का सबूत है।

रक्षा मंत्री ने इस उपलब्धि को रक्षा क्षेत्र के सभी लोगों के सहयोग का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि यह भारत के रक्षा उद्योग की ताकत को दिखाता है। यह उपलब्धि न केवल आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि देश की सुरक्षा को और मजबूत करने में भी मदद कर रही है।

IAF chief on Op Sindoor: भारतीय वायुसेना प्रमुख का बड़ा खुलासा; ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के 6 फाइटर जेट बने निशाना, राजनीतिक नेतृत्व ने खुल कर दिया था साथ

IAF Chief on Op Sindoor: 6 Pakistani fighter jets targeted during Operation Sindoor, full support from political leadership
Photo: IAF

IAF chief on Op Sindoor: भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने बेंगलुरु में आयोजित एक कार्यक्रम में ऑपरेशन सिंदूर के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने साफ किया कि इस अभियान में राजनीतिक नेतृत्व ने कोई पाबंदी नहीं लगाई थी और वायुसेना को कार्रवाई की पूरी आजादी दी गई थी। एयर चीफ मार्शल ने यह बात शनिवार को बेंगलुरु में 16वें एयर चीफ मार्शल एलएम कात्रे मेमोरियल लेक्चर के दौरान कही। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना ने छह पाकिस्तानी फाइटर जेट मार गिराए और कई को जमीन पर ही नष्ट कर दिया। वहीं, इस ऑपरेशन में पहली बार इस्तेमाल की गई एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम ने भी पूरे ऑपरेशन में गेम-चेंजर की भूमिका निभाई।

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IAF chief on Op Sindoor: एफ-16 फाइटर जेट्स का हैंगर आधा तबाह

एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा, पाकिस्तान का शाहबाज जैकबाबाद एयरफील्ड इस ऑपरेशन के दौरान प्रमुख निशानों में शामिल था। यहां पाकिस्तान को अमेरिका से मिले एफ-16 फाइटर जेट्स का का हैंगर आधा तबाह हो गया। इसके अलावा अंदर मौजूद कुछ जेट्स को भी नुकसान पहुंचा। जानकारी के अनुसार, जैकबाबाद एयरफील्ड के एईडब्ल्यू एंड सी (एयरबॉर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल) हैंगर में भी एक विमान था और कुछ एफ-16 उस समय मरम्मत में थे। इसके अलावा, मुरिद और चकलाला में कम से कम दो कमांड और कंट्रोल सेंटर और कुछ बड़े और कुछ छोटे छह रडार नष्ट किए गए।

8 मई को ऑपरेशन सिंदूर में पहली बार एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल हुआ था। लेकिन उस समय तकनीकी जानकारी के विश्लेषण के चलते विमानों की संख्या को सार्वजनिक नहीं किया गया था। बाद में यह स्पष्ट हुआ कि 7 मई को पांच लड़ाकू विमान और एक बड़ा एईडब्ल्यू एंड सी/ईएलआईएनटी विमान मार गिराया गया। वायुसेना प्रमुख के अनुसार, गिराए गए सभी पांच लड़ाकू विमान चीनी थे और कोई भी एफ-16 हवा में निशाना नहीं बनाया गया था। नष्ट किए गए फाइटर जेट्स की पहचान उनके सिग्नेचर के आधार पर की गई थी, जो चीन से खरीदे गए थे।

IAF chief on Op Sindoor: पूरे संघर्ष को बताया “हाई-टेक युद्ध”

वायुसेना प्रमुख ने बताया, लगभग 300 किलोमीटर दूर से एक धीमी रफ्तार से उड़ने वाला बड़ा जहाज मार गिराया गया, जो कि या तो स्वीडन निर्मित साब एरीआई एईडब्ल्यू एंड सी हो सकता था या फिर चीन निर्मित इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस एवं इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर विमान। एयर चीफ मार्शल सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर को एक हाई-टेक युद्ध बताया। उन्होंने इस पूरे संघर्ष को “हाई-टेक युद्ध” बताया। उन्होंने कहा कि 80 से 90 घंटों के इस युद्ध में वायुसेना ने इतना नुकसान पहुंचाया कि पाकिस्तान को लगने लगा कि अगर वे आगे बढ़े तो उन्हें और भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। इसके बाद, पाकिस्तान ने भारत के डीजीएमओ को संदेश भेजा कि वे बातचीत करना चाहते हैं, जिसे भारत ने स्वीकार कर लिया।

वायुसेना प्रमुख ने 2019 के बालाकोट हमले का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय वायुसेना अपनी उपलब्धियों को साबित करने में पूरी तरह सफल नहीं हो पाई थी। उस समय मिली सफलता को देशवासियों को समझाना मुश्किल हुआ था क्योंकि अंदरूनी नुकसान के स्पष्ट सबूत सार्वजनिक नहीं हो सके थे। लेकिन इस बार, स्थानीय मीडिया कवरेज और सैटेलाइट तस्वीरों ने वायुसेना की कार्रवाई का असर दुनिया के सामने स्पष्ट कर दिया। उन्होंने कहा कि सैटेलाइट तस्वीरों में केवल छोटे-छोटे छेद दिखते हैं, जहां से मिसाइलें भीरत घुसीं, जैसा कि बालाकोट में हुआ था। लेकिन इस बार स्थानीय मीडिया के जरिए आंतरिक नुकसान को दिखाया जा सका। इससे वायुसेना को अपनी कार्रवाइयों को साबित करने में मदद मिली।

IAF chief on Op Sindoor: एयर डिफेंस सिस्टम ने किया शानदार प्रदर्शन

एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने बताया कि भारत के एयर डिफेंस सिस्टम ने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का कोई भी फाइटर जेट आकाश या मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (MRSAM) की सीमा के पास नहीं आ सका। सभी जहाज लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (LRSAM) ने मार गिराए। हालांकि वे भारत की सीमा से दूर थे, लेकिन फिर भी वे हमारी रेंज में थे। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य किसी एक एयर बेस को पूरी तरह नष्ट करना नहीं था, बल्कि यह संदेश देना था कि हम कहीं भी, कभी भी अंदर तक मार कर सकते हैं। वायुसेना प्रमुख ने एस-400 सिस्टम को ‘गेम-चेंजर’ बताया। उन्होंने कहा कि इसकी 300 किमी की रेंज ने पाकिस्तानी जहाजों को भारतीय सीमा से दूर रखा और उन्हें लंबी दूरी के ग्लाइड बमों का इस्तेमाल करने का मौका ही नहीं दिया।

वायुसेना ने उस दिन भोलारी एयर बेस पर मौजूद एईडब्ल्यू एंड सी हैंगर को भी निशाना बनाया। एयर चीफ मार्शल सिंह ने बताया कि इस हमले के दौरान वहां एक विमान मौजूद होने के स्पष्ट संकेत मिले। इसके अलावा, सरगोधा एयर बेस पर भी हमला किया गया। सरगोधा का जिक्र करते हुए एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा कि यह बेस हमेशा से भारतीय वायुसेना के पायलटों के लिए ‘सपना’ रहा है कि उन्हें अपने रिटायरमेंट से पहले एक बार उसे निशाना बनाने का मौका मिला।

राजनीतिक नेतृत्व से कोई रोक-टोक नहीं

वायुसेना प्रमुख ने कहा कि ऑपरेशन की सफलता की एक बड़ी वजह राजनीतिक इच्छाशक्ति थी। उन्होंने बताया कि उन्हें राजनीतिक नेतृत्व से स्पष्ट दिशा-निर्देश मिले और किसी प्रकार की रोक-टोक नहीं हुई। उनका यह बयान उस समय आया है जब कुछ दिन पहले भारत के इंडोनेशिया में डिफेंस अटैच, कैप्टन शिव कुमार ने दावा किया था कि 7 मई की सुबह ऑपरेशन के दौरान कुछ विमान राजनीतिक नेतृत्व की रोकटोक के चलते गंवाने पड़े। उनका दावा था कि यह नुकसान राजनीतिक प्रतिबंधों के कारण हुआ, जिसमें मिलिट्री ठिकानों और एयर डिफेंस सिस्टम्स को निशाना बनाने की अनुमति नहीं थी। हालांकि, वायुसेना प्रमुख ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि सेना ने खुद अपनी अपनी रणनीति बनाई और बाहर से कोई दिशा-निर्देश नहीं मिले थे।

तीन दिनों तक चली कार्रवाई

वायुसेना प्रमुख ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वह केवल कपड़े बदलने के लिए घर जाते थे और अपने दफ्तर में ही आराम करने की जगह बना ली थी। पहले दिन, यानी 6-7 मई की रात के बाद, उन्होंने दो दिनों तक अपने उड़ान वर्दी (फ्लाइंग ओवरऑल) में ही काम किया। इस दौरान तीनों सेनाओं के प्रमुखों, रक्षा स्टाफ प्रमुख और संभवतया पीएमओ के बीच गहन योजना और चर्चाएं हुईं। एयर चीफ मार्शल सिंह ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान ज्यादा चर्चाएं नहीं हो रही थीं। वह केवल यह सूचित करने के लिए फोन करते थे कि हम क्या कर रहे हैं। इस ऑपरेशन में वायुसेना ने सटीक और प्रभावी हमले किए, जिससे दुश्मन को भारी नुकसान हुआ।

Dharali HADR OPS: धाराली में आपदा राहत में सेना के आंख, नाक, कान बन रहे K9 वॉरियर्स! सात फीट गहरे मलबे में तलाश रहे जिंदगी

Dharali HADR Ops: Indian Army’s K9 Warriors Act as Eyes, Ears, and Nose in Disaster Relief, Searching for Survivors in 7-Foot-Deep Debris
Video: Indian Army

Dharali HADR OPS: उत्तराखंड में उत्तरकाशी जिले के हर्षिल के पास बसे शांत पहाड़ी गांव धाराली में 5 अगस्त 2025 को बादल फटने के बाद आई भीषण आपदा ने तबाही मचा दी। तेज बारिश, उफनते झरनों और ढहते पहाड़ों के बीच, भारतीय सेना की सर्च एंड रेस्क्यू टीम के छह प्रशिक्षित खोजी कुत्ते और उनके हैंडलर राहत और बचाव कार्यों में अपनी बहादुरी और कौशल से साबित किया कि वे आपदा राहत कार्यों में सेना के सबसे भरोसेमंद साथी हैं। इन खास कैनाइन वॉरियर्स के नाम हैं सारा, ओपना, जेंसी, हेजल, जून और राही। ये सभी लैब्राडोर नस्ल के हैं और मानवीय जिंदगियां बचाने में माहिर माने जाते हैं। वहीं, इनकी उम्र 2 से 7 साल के बीच है।

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Dharali HADR OPS: एडवांस सर्च एंड रेस्क्यू के एक्सपर्ट

जैसे ही धाराली में बादल फटने की सूचना मिली तो, वहां तैनात भारतीय सेना हरकत में आ गई। हादसे के बाद इन सभी डॉग्स को मेरठ, देहरादून और लखनऊ से हवाई मार्ग से तुरंत प्रभावित इलाके में रवाना किया गया। सारा, ओपना और जेन्सी ने हाल ही में मेरठ के रीमाउंट वेटरनरी कोर (आरवीसी) से एडवांस सर्च एंड रेस्क्यू (SAR) ट्रेनिंग पूरी की थी और इससे पहले केरल के वायनाड और हिमाचल प्रदेश के रामपुर में आई बाढ़ राहत अभियानों में भी हिस्सा लिया था। अपनी कम उम्र के बावजूद, ये कई मानवीय आपदा राहत (एचएडीआर) अभियानों में काफी कुशल बन चुके हैं।

Dharali HADR OPS: 7 अगस्त को हेलिकॉप्टर से हर्षिल पहुंचे

वहीं, जून और उनके हैंडलर एडीटी घेवरलाल डी पटेल पहले से ही हर्षिल में तैनात थे। 14 राजपूताना राइफल्स के जवानों के साथ जब वे घटना स्थल की ओर बढ़ रहे थे, तो अचानक बाढ़ का पानी उनके वाहन को बहाने लगा। समय रहते वे बच निकले, लेकिन नदी के उफान के कारण आगे नहीं बढ़ पाए। हालात की गंभीरता को देखते हुए सेंट्रल कमांड ने तुरंत अतिरिक्त सर्च एंड रेस्क्यू डॉग्स भेजने का आदेश दिया। राही को देहरादून से रवाना किया गया, लेकिन भूस्खलन के चलते वह हर्षिल से 60 किमी पहले ही फंस गए। 6 अगस्त को और कुत्तों जिनमें सारा, ओपना, जेन्सी और हेजल शामिल थे, उन्हें पहले देहरादून, फिर मौसम साफ होते ही 7 अगस्त को हेलिकॉप्टर से हर्षिल पहुंचाया गया।

Dharali HADR OPS: मलबे में जिंदगी की तलाश

इन डॉग्स वॉरियर की खूबी है कि ये सात फीट तक मलबे और कीचड़ में दबे लोगों की मौजूदगी को सूंघने में सक्षम हैं। वे उन जगहों पर काम कर सकते हैं, जहां मशीनें नहीं पहुंच पातीं। एक घंटे से भी कम समय में ये कुत्ते पांच एकड़ से अधिक इलाके को स्कैन कर सकते हैं, जो 20 प्रशिक्षित जवानों और एडवांस इक्विपमेंट्स के बराबर है।

मौके पर लगातार बारिश, फिसलन भरी जमीन और हाई एल्टीट्यूड होने के बावजूद, कुत्तों और उनके हैंडलरों ने असाधारण साहस और अनुशासन दिखाते हुए फंसे हुए लोगों को ढूंढने और मृतकों के अवशेष बरामद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

जेन्सी और हेजल का पहला मिशन

धाराली आपदा में गोल्डन लैब्राडोर जेन्सी और काले लैब्राडोर हेजल का यह पहला सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन था। इनमें जेन्सी मेरठ के आरवीसी सेंटर से और हेजल 20 आर्मी डॉग यूनिट से थी। नौ महीने की विशेष ट्रेनिंग के बाद इन्हें ग्राउंड जीरो पर भेजा गया। सेना की तरफ से जारी एक वीडियो में जेन्सी और हेजल अपने हैंडलरों के साथ मलबे में दबी जिंदगियों की तलाश करते दिखे।

प्रशिक्षण और विशेष खूबियां

ये कुत्ते न केवल बाढ़ और भूस्खलन में, बल्कि हिमस्खलन जैसी आपदाओं में भी जवानों को ढूंढने में माहिर हैं। आरवीसी सेंटर में इन्हें अलग-अलग मिशन के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। खोज और बचाव अभियानों के अलावा, सेना के हमलावर (असॉल्ट) K9 कुत्तों को शहरी इलाकों में सर्च ऑपरेशन (FIBUA), घेराबंदी और खोज अभियान (CASO), लक्ष्यों को खोजकर नष्ट करने का अभियान (SADO), जंगल सर्च और एरिया सैनिटाइजेशन जैसे खास मिशनों के लिए भी तैयार किया जाता है।

कुछ कुत्तों को लेजर-गाइडेड अटैक और हथियारों की बरामदगी के लिए भी प्रशिक्षित किया जाता है। इसके अलावा, रेडियो-गाइडेड डायरेक्शनल कंट्रोल, जिसमें डॉग्स के सिर पर टैक्टिकल कैमरे लगाए जाते हैं, जिससे रियल टाइम वीडियो सर्विलांस और छुपकर हमला करने की क्षमता बढ़ती है। ये कुत्ते काउंटर इंसर्जेंसी और काउंटर टेररिज्म मिशनों में फर्स्ट रिस्पॉन्डर के रूप में काम करते हैं।

600 से ज्यादा प्रशिक्षित कैनाइन

भारतीय सेना के पास इस समय 600 से ज्यादा प्रशिक्षित डॉग्स हैं, जो 25 से अधिक डॉग यूनिट्स में तैनात हैं। हर यूनिट में 24 डॉग होते हैं और इनकी ट्रेनिंग मेरठ के आरवीसी सेंटर में होती है, जो छोटी उम्र से शुरू होकर 36 हफ्तों तक चलती है। सेना में शामिल होने के बाद ये कुत्ते 7-8 साल तक सेवा देते हैं, जिसके बाद इन्हें रिटायर कर दिया जाता है। फिलहाल में सेना में लैब्राडोर, जर्मन शेफर्ड, बेल्जियन मैलिनोइस जैसे विदेशी ब्रीड्स के साथ-साथ 2016 से चिप्पीपराई, कोम्बाई और राजापलयम जैसे स्वदेशी ब्रीड के डॉग्स भी शामिल हैं।

LUH RFI: पुराने चेतक-चीता बेड़े की जगह सेना और वायुसेना को चाहिए 200 नए हल्के हेलिकॉप्टर, जारी की आरएफआई, ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी को प्राथमिकता

LUH RFI Army, IAF Seek 200 Light Helicopters to Replace Ageing Chetak-Cheetah Fleet
Photo: Indian Army

LUH RFI: रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेनाओं के नए टोही और निगरानी हेलिकॉप्टरों (रिकॉनिसेंस एंड सर्विलांस हेलिकॉप्टर – RSH) की खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए मौजूदा चेतक और चीता हेलिकॉप्टर बेड़े को बदलने की योजना के तहत रक्षा मंत्रालय ने रिक्वेस्ट फॉर इंफॉर्मेशन जारी की है। इसके तहत कुल लगभग 200 हेलिकॉप्टर खरीदे जाएंगे, जिनमें 120 भारतीय सेना और 80 भारतीय वायुसेना के लिए होंगे।

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LUH RFI: इन कामों में होंगे इस्तेमाल

इन हेलिकॉप्टरों का इस्तेमाल दिन और रात में विभिन्न मिशनों के लिए किया जाएगा। इनका इस्तेमाल टोही और निगरानी, छोटे दस्ते या क्विक रिएक्शन टीम की तैनाती, ग्राउंड ऑपरेशंस में आंतरिक और बाहरी लोड ले जाना, अटैक हेलिकॉप्टर के साथ स्काउट मिशन, खोज और बचाव अभियान और सिविल एडमिनिस्ट्रशन को इमरजेंसी सपोर्ट जैसे कामों में किया जाएगा। आरएफआई में स्पष्ट किया गया है कि ये हेलीकॉप्टर ढलान वाले हेलीपैड, बर्फ, रेत और पानी से ढके क्षेत्रों में उतरने और उड़ान भरने में सक्षम होना चाहिए। इसके अलावा, इनमें आकाशीय बिजली से सुरक्षा, गोला-बारूद से बचाव और लंबे समय तक खुले में खड़े रहने की क्षमता होनी चाहिए।

LUH RFI: नाइट विजन गॉगल से हों लैस

वहीं, ये नए हेलिकॉप्टर सिंगल या ट्विन इंजन डिजाइन के हो सकते हैं और इनमें अधिकतम पेलोड क्षमता, ऊंचाई पर उड़ान और विभिन्न मौसम परिस्थितियों में काम करने की क्षमता होनी चाहिए। फ्यूल सिस्टम की बात करें, तो इनमें हॉट रिफ्यूलिंग और प्रेशर रिफ्यूलिंग की सुविधा, साथ ही प्रोजेक्टाइल से सुरक्षा अनिवार्य होगी। कॉकपिट नाइट विजन गॉगल (NVG) से लैस होना चाहिए और इसमें ऑटो-पायलट, आधुनिक एवियोनिक्स और एडवांस कम्यूनिकेशन सिस्टम होना चाहिए।

LUH RFI: इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर के खतरों से सुरक्षा

साथ ही, नए हेलिकॉप्टर ऐसे होने चाहिए जो हथियारों और मिशन सिस्टम के साथ इंटीग्रेट किए जा सकें। इनमें रॉकेट, गन पॉड, एंटी-टैंक मिसाइल, एयर-टू-एयर मिसाइल और पिंटल माउंटेड गन लगाए जा सकें। इनके साथ सर्विलांस सिस्टम, लॉइटर म्यूनिशन और डायरेक्टेड एनर्जी वेपन जैसे एडवांस इक्विपमेंट भी जोड़े जा सकें। आरएफआई में कहा गया है कि प्लेटफॉर्म में सेल्फ-प्रोटेक्शन सूट जैसे लेजर वार्निंग रिसीवर (LWR), रडार वार्निंग रिसीवर (RWR) और मिसाइल अप्रोच वार्निंग सिस्टम (MAWS) लगाए जा सकें, ताकि इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर खतरों से भी सुरक्षा मिल सके।

#CAS Air Chief Marshal AP Singh took to the skies in the Light Utility Helicopter at #AeroIndia2025, praising its performance and flight experience
Photo: HAL

‘मेक इन इंडिया’ और ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी को प्राथमिकता

सरकार ने इस खरीद प्रक्रिया में विदेशी निर्माताओं को भी मौका दिया है। सरकार ने आरएफआई में साफ किया है ‘मेक इन इंडिया’ और ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी (ToT) सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी। मतलब, जो भी कंपनी ये हेलिकॉप्टर बनाएगी, उसे जरूरी तकनीक भारत को देनी होगी और यहां पर ही फैक्ट्री लगाकर उत्पादन करना होगा। ToT के तहत पावर प्लांट, रोटर सिस्टम, ट्रांसमिशन सिस्टम, एवियोनिक्स और बाकी जरूरी हिस्सों की तकनीक भारत लाई जाएगी, ताकि उनका निर्माण देश में हो सके। इसके साथ ही कंपनियों को यह भी बताना होगा कि हेलिकॉप्टर में कितनी स्वदेशी सामग्री इस्तेमाल होगी, वे किन कंपनियों के साथ साझेदारी करेंगी और उनकी उत्पादन क्षमता कितनी है।

ट्रायल इवैल्यूएशन ‘नो कॉस्ट, नो कमिटमेंट’ आधार पर

आरएफआई में बताया गया है कि ट्रेनिंग के लिहाज से सप्लायर्स को यह बताना होगा कि क्या हेलिकॉप्टर बिना किसी विशेष बदलाव के ट्रेनिंग मिशन के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं। पायलट और तकनीकी कर्मचारियों के लिए ट्रेनिंग कार्यक्रम, सिम्युलेटर और वर्चुअल मेंटेनेंस ट्रेनर की उपलब्धता भी स्पष्ट करनी होगी। वहीं, यह खरीद प्रक्रिया ‘सिंगल स्टेज–टू बिड सिस्टम’ के तहत पूरी होगी, जिसमें टेक्निकल और फाइनेंशियल प्रपोजल अलग-अलग लिफाफों में जमा होंगे। तकनीकी मूल्यांकन के बाद हेलिकॉप्टरों का ट्रायल इवैल्यूएशन ‘नो कॉस्ट, नो कमिटमेंट’ आधार पर किया जाएगा। वहीं, कॉन्ट्रैक्ट के सप्लायर को लाइफ टााइम स्पेयर पार्ट्स और मैंटेनेंस इक्विपमेंट्स उपलब्ध कराने होंगे।

मार्च में, भारतीय वायुसेना पहले ही काफी संख्या में यूटिलिटी हेलिकॉप्टरों और अन्य डिफेंस प्लेटफॉर्म की खरीद की योजना बना चुकी थी। संसद में पेश स्थायी रक्षा समिति की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025-26 के लिए प्रमुख प्रस्तावित खरीद में लो-लेवल रडार, लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA), लाइट यूटिलिटी हेलिकॉप्टर (LUH), मल्टी-रोल हेलिकॉप्टर और किराए पर लिए जाने वाले मिड-एयर रिफ्यूलिंग विमान शामिल हैं।

इसके अलावा, कैबिनेट सिक्योरिटी कमेटी ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड से 45,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के 156 लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर (LCH) खरीदने को भी मंजूरी दी है। ये 156 हेलिकॉप्टर, जो क्षमता में RSH जैसे हैं, जो भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना में बांटे जाएंगे। साथ ही, ये हेलीकॉप्टर चीन और पाकिस्तान सीमा पर मिशन में इस्तेमाल होंगे।

Indian Army Rudra Brigades: पूर्वी लद्दाख और सिक्किम में तैनात होंगी भारतीय सेना की नई ‘रुद्र’ ब्रिगेड्स

Indian Army Rudra Brigades to be Deployed in Eastern Ladakh and Sikkim
Photo: Indian Army

Indian Army Rudra Brigades: भारतीय सेना ने चीन से लगी उत्तरी सीमा पर नई ‘रुद्र’ ब्रिगेड को तैनात करने का फैसला किया है। यह वहीं ब्रिगेड है जिसका एलान सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने 26वें कारगिल विजय दिवस पर द्रास में किया था। सूत्रों के अनुसार, इनमें से एक ब्रिगेड पूर्वी लद्दाख में और दूसरी सिक्किम में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास तैनात की जाएगी। इन ब्रिगेड्स को आधुनिक हथियारों, आर्मर्ड ड्रोन, लॉइटरिंग म्यूनिशन, मिसाइलों और कमांडो यूनिट्स से लैस किया जाएगा।

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Indian Army Rudra Brigades: रुद्र जल्द होगी ऑपरेशनलाइज

सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस के मौके पर ‘रुद्र’ ब्रिगेड्स बनाने की घोषणा की थी। सूत्रों ने बताया कि अगले कुछ महीनों में दोनों रुद्र ब्रिगेड्स को पूरी तरह से ऑपरेशनलाइज करने का लक्ष्य है। यह कदम एलएसी जैसे रणनीतिक रूप से संवेदनशील इलाकों में सेना की युद्धक क्षमताओं को रीऑर्गेनाइज्ड करने की रणनीति का हिस्सा है। भारत और चीन के बीच एलएसी वास्तविक सीमा के रूप में कार्य करती है, और यहां तनाव को देखते हुए सेना अपनी ताकत को और मजबूत करना चाहती है।


पारंपरिक ब्रिगेड्स में आमतौर पर 3,000 से 3,500 जवान होते हैं और ये इन्फैंट्री या आर्मर्ड यूनिट्स पर फोकस करती हैं। लेकिन रुद्र ब्रिगेड्स अलग होंगी। इसमें कई प्रकार की कॉम्बैट यूमिट्स को एक साथ जोड़ा जाएगा, ताकि एक ही ब्रिगेड जमीन पर सीधा मुकाबला कर सके, बख्तरबंद गाड़ियों और टैंकों के साथ तेजी से आगे बढ़ सके, दूर से आर्टिलरी के जरिए भारी गोलाबारी कर सके और स्पेशल मिशनों के लिए प्रशिक्षित कमांडो भी तैनात कर सके। इनके साथ इनमें ड्रोन भी शामिल होंगे, जो निगरानी और सटीक हमलों के लिए इस्तेमाल किए जाएंगे। इसके अलावा, एक मजबूत लॉजिस्टिक्स और कॉम्बैट सपोर्ट सिस्टम भी होगा, जो हर परिस्थिति में ब्रिगेड की सप्लाई और सपोर्ट देगा।

Indian Army Rudra Brigades: ‘भैरव’ और ‘शक्तिबाण’ यूनिट्स

रुद्र ब्रिगेड्स की ताकत बढ़ाने के लिए ‘भैरव’ नामक नई लाइट कमांडो बटालियन भी तैयार की जा रही हैं। ये स्पेशल फोर्सेज की तरह जल्द कार्रवाई करने वाले दस्ते होंगे, जो मौजूदा ‘घातक’ प्लाटून की मदद करेंगे, जो वर्तमान में नियंत्रण रेखा (एलओसी) और आतंकवाद-रोधी भूमिकाओं में तैनात हैं। आर्टिलरी में ‘शक्तिबाण’ आर्टिलरी रेजीमेंट बनाई जा रही हैं, जो ड्रोन वॉरफेयर और ‘लॉइटरिंग म्यूनिशन’ में एक्सपर्ट होगी।

रुद्र ब्रिगेड्स में ‘दिव्यास्त्र’ बैटरियां

रुद्र ब्रिगेड्स में ‘दिव्यास्त्र’ बैटरियों को भी शामिल किया जाएगा। ये इन्फैंट्री की बटालियन होंगी, जो ड्रोन और स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम से लैस रहेंगी। ये यूनिट्स सेना की ‘लेयर्ड एयर डिफेंस’ रणनीति का हिस्सा हैं, जिसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के ड्रोन हमलों को नाकाम किया था।

नई यूनिट्स नहीं

खास बाात यह होगी कि रूद्र ब्रिगेड्स के लिए नई यूनिट्स खड़ी नहीं की जाएंगी, बल्कि मौजूदा यूनिट्स को नए तरीके से ऑर्गेनाइज्ड और रीडिप्लॉयमेंट किया जाएगा। इसका उद्देश्य ऑपरेशनल जरूरतों के मुताबिक फोर्स स्ट्रक्चर को तैयार करना है।

साल 2023 में सेना के शीर्ष अधिकारियों ने चरणबद्ध तरीके से सेना के पुनर्गठन की योजना शुरू की थी। इसका मकसद सेना को ज्यादा फुर्तीला, सक्षम और तकनीकी रूप से आधुनिक बनाना है। इस दिशा में ‘इंटीग्रेटेड बैटल-रेडी ब्रिगेड्स’ के कॉन्सेप्ट को पंजाब में सैन्य अभ्यासों के दौरान सफलतापूर्वक परखा गया।

ये सभी बदलाव 2022 में की गई एक स्टडी ‘री-ऑर्गनाइजेशन एंड राइटसाइजिंग ऑफ इंडियन आर्मी’ पर आधारित हैं। इस अध्ययन में पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं पर बदलते खतरों के मद्देनजर मौजूदा सैन्य ढांचे की समीक्षा की गई थी, ताकि उसकी दक्षता और युद्ध-तैयारी को और बेहतर बनाया जा सके।