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Pakistan-Bangladesh Nexus: बड़ा खुलासा! बांग्लादेश में 1971 से पहले के हालात बनाना चाहती है पाकिस्तान की ISI, सिलिगुड़ी कॉरिडोर पर नजर

ISI’s New Conspiracy to Revive Pre-1971 Influence, Eyes on Siliguri Corridor!

Pakistan-Bangladesh Nexus: पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) बांग्लादेश के जरिए भारत के लिए एक नई चुनौती खड़ी करने की योजना बना रही है। खुफिया सूत्रों के मुताबिक ISI बांग्लादेश में अपनी पुरानी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। बांग्लादेश के कुछ रणनीतिक इलाकों में ISI अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की योजना बना रही है। हाल ही में ISI प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल असीम मलिक ने ढाका का दौरा किया था, जहां उन्होंने बांग्लादेशी सेना के कट्टरपंथी धड़े के साथ गुप्त बैठकें कीं।

ISI’s New Conspiracy to Revive Pre-1971 Influence, Eyes on Siliguri Corridor!

सूत्रों के अनुसार, ISI प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल असीम मलिक की ढाका यात्रा के दौरान पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच खुफिया सहयोग बढ़ाने और भारत विरोधी रणनीतियों पर चर्चा की। इस दौरान बांग्लादेश के कॉक्‍स बाजार, उखिया, टेकनाफ, मौलवीबाजार, हबीगंज और शेरपुर जैसे इलाकों में ISI की मौजूदगी को लेकर बातचीत हुई।

Pakistan-Bangladesh Nexus: बांग्लादेश में 1971 से पहले की जड़ें तलाश रही ISI

ISI ने रंगपुर, उखिया, टेकनाफ, मौलवीबाजार और हबीगंज जैसे इलाकों में अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं, जहां पहले 1971 से पहले पाकिस्तानी सेना की मौजूदगी थी। अब, पाकिस्तान की कोशिश है कि इन इलाकों में अपने खुफिया नेटवर्क को फिर से खड़ा किया जाए। 1971 में बांग्लादेश के गठन से पहले, ये इलाके पूर्वी पाकिस्तान का हिस्सा थे और यहां पाकिस्तानी सेना की गहरी पकड़ थी। उस समय पाकिस्तानी सेना ने नागालैंड और मिजोरम जैसे भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में उग्रवादी गुटों को समर्थन दिया था। अब, ISI फिर से इन इलाकों में अपनी पकड़ बनाकर भारत के खिलाफ साजिशें रच रही है।

सूत्रों का कहना है कि ISI की इस चाल के पीछे बांग्लादेश के कट्टरपंथी इस्लामिक समूहों और सेना के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों का समर्थन भी प्राप्त है।बांग्लादेश सेना के क्वार्टर मास्टर जनरल लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद फैज-उर-रहमान, जो कि कट्टरपंथी विचारधारा के समर्थक माने जाते हैं, ISI के संपर्क में हैं। इसके अलावा, बांग्लादेश सेना की 24 डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग मेजर जनरल मीर मुश्फिक रहमान भी इस गुप्त योजना में शामिल बताए जा रहे हैं।

Pakistan-Bangladesh Nexus: सिलिगुड़ी कॉरिडोर या “चिकन नेक” पर ISI की नजर

ISI प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल असीम मलिक अरब अमीरात उड़ान (EK-586) से 21 जनवरी 2025 को ढाका पहुंचे थे। वे रैडिसन ब्लू होटल के तीसरी मंजिल पर ठहरे थे। उनके साथ पाकिस्तान के दो वरिष्ठ सैन्य अफसर मेजर जनरल शाहिद अमीर अफसर (डीजी ए) और मेजर जनरल आलम अमीर अवान (डीजी एसएंडए) भी मौजूद थे। इस दौरान लेफ्टिनेंट जनरल फैज-उर-रहमान ने ISI अधिकारियों की मुलाकात बांग्लादेश की खुफिया एजेंसी DGFI के प्रमुख मेजर जनरल जाहांगीर आलम से कराई थी। सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान भारत के सिलिगुड़ी कॉरिडोर या “चिकन नेक” इलाके में अपनी पकड़ बनाना चाहता है, ताकि वहां अस्थिरता फैलाई जा सके।

ISI in Bangladesh: बांग्लादेश आर्मी चीफ को हटाकर ULFA के जरिए चिकन नेक पर कब्जा करना चाहती है ISI, रंगपुर में रची ये बड़ी साजिश

ISI अधिकारियों ने बांग्लादेश के रंगपुर जिले का दौरा किया था, जो चिकन नेक से महज 130 किलोमीटर दूर स्थित है। इसके अलावा, पाकिस्तानी अधिकारी चटगांव हिल ट्रैक्ट्स जैसे संवेदनशील इलाकों में भी गए थे।

Pakistan-Bangladesh Nexus: ULFA को फिर से सक्रिय करने की साजिश

ISI ने असम के उग्रवादी संगठन ULFA (United Liberation Front of Assam) के साथ भी संपर्क साधा है। ULFA के नेता परेश बरुआ पहले भी पाकिस्तान और चीन से समर्थन लेते रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, ISI ने बांग्लादेश के जरिए ULFA को दोबारा सक्रिय करने का प्लान बनाया है ताकि भारत के पूर्वोत्तर में अस्थिरता पैदा की जा सके। बता दें कि 2009 से 2015 के बीच बांग्लादेश की शेख हसीना सरकार ने ULFA के कई शीर्ष नेताओं को भारत को सौंपा था।

बांग्लादेशी सेना प्रमुख को हटाने की तैयारी

सूत्रों के मुताबिक, लेफ्टिनेंट जनरल फैज-उर-रहमान को पाकिस्तान का समर्थन हासिल है और उसी के सहयोग से वह बांग्लादेश के वर्तमान सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमां को हटाने की साजिश रच रहे हैं। जनरल जमां को भारत के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों का समर्थक माना जाता है। बताते हैं कि बांग्लादेश सेना के 24 डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग मेजर जनरल मीर मुशफिक रहमान भी लेफ्टिनेंट जनरल फैज के साथ शामिल हैं औऱ दोनों ने ISI और बांग्लादेश की कट्टरपंथी लॉबी के साथ मिल कर सेना के भीतर एक धड़ा खड़ा कर लिया है, जो जनरल जमां को हटाने के लिए तैयार है। अगर यह योजना सफल होती है, तो बांग्लादेश की सेना में भारत विरोधी ताकतों का प्रभाव और बढ़ सकता है।

TROPEX 2025: भारतीय नौसेना की ताकत के आसपास भी नहीं फटकते पाकिस्तान और बांग्लादेश, AMAN-25 के जरिए चीन को बढ़ावा दे रहा है पाक

TROPEX 2025: India's Naval Might Surpasses Pakistan & Bangladesh, AMAN-25 Strengthens China's Influence
TROPEX 2025

TROPEX 2025: भारतीय नौसेना अपनी समुद्री ताकत को और मजबूत करने के लिए फरवरी 2025 में TROPEX 2025 (थिएटर लेवल ऑपरेशनल रेडीनेस एक्सरसाइज) का आयोजन करने जा रही है। यह अभ्यास हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में भारत की रणनीतिक स्थिति को और मजबूत करेगा। इस दौरान अत्याधुनिक युद्धपोत, पनडुब्बियां, लड़ाकू विमान और साइबर युद्ध प्रणाली की टेस्टिंग की जाएगी। बता दें कि भारत लंबे समय से इस क्षेत्र में नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर की भूमिका निभा रहा है।

TROPEX 2025: India's Naval Might Surpasses Pakistan & Bangladesh, AMAN-25 Strengthens China's Influence
TROPEX 2025

दूसरी ओर, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देश गंभीर आर्थिक और राजनीतिक संकटों से जूझ रहे हैं, और ये देश अपनी नौसेना की रणनीतियों को लेकर दिशाहीन नजर आ रहे हैं। इनकी हालिया नौसैनिक गतिविधियां किसी भी प्रभावशाली रणनीतिक प्रभाव से कोसों दूर दिख रही हैं।

TROPEX 2025: नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर है भारत

भारतीय नौसेना को लंबे समय से “नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर” माना जाता रहा है, जो इस क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। TROPEX 2025 भारत की समुद्री रणनीति का एक और मजबूत संकेत है, जो यह बताता है कि भारत हिंद महासागर में अपनी मौजूदगी को लगातार मजबूत कर रहा है। TROPEX 2025 में एडवांस वारशिप, पनडुब्बियां, लड़ाकू विमान और साइबर वारफेयर सिस्टम शामिल होंगे।

यह अभ्यास SAGAR (Security and Growth for All in the Region) नीति के तहत किया जा रहा है, जिसमें भारत न केवल अपनी समुद्री सुरक्षा को बढ़ा रहा है, बल्कि क्षेत्रीय सहयोग और स्थिरता को भी प्राथमिकता दे रहा है। TROPEX के जरिए भारतीय नौसेना मलक्का जलडमरूमध्य (Malacca Strait), बंगाल की खाड़ी और अरब सागर जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की निगरानी को और मजबूत करेगी।

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आत्मनिर्भर भारत को मिल रही मजबूती

वहीं, भारतीय नौसेने के लिए यह अच्छी खबर है कि भारत को घरेलू स्वदेशी जहाज निर्माण उद्योग से भी मजबूती मिल रही है। हाल ही में INS नीलगिरी, INS सूरत और वाघशीर सबमैरीन की कमीशनिंग से भारतीय नौसेना की ताकत में इजाफा हुआ है। जो बताता है कि भारत अब आत्मनिर्भर हो रहा है, जबकि हमारे पड़ोसी देश अभी भी मिलिट्री हार्डवेयर और स्ट्रेटेजिक डायरेक्शन के लिए दूसरे देशों पर निर्भर हैं।

TROPEX 2025: India's Naval Might Surpasses Pakistan & Bangladesh, AMAN-25 Strengthens China's Influence
TROPEX 2025

आर्थिक संकट से जूझ रहा पाकिस्तान

दूसरी तरफ, पाकिस्तान अपनी समुद्री ताकत को बढ़ाने के लिए AMAN-25 नौसैनिक अभ्यास आयोजित कर रहा है, जो 7 से 11 फरवरी 2025 के बीच कराची में होगा। लेकिन इस अभ्यास का असली उद्देश्य चीन के हितों को बढ़ावा देना है।

पाकिस्तान गहरे आर्थिक संकट से जूझ रहा है और उसकी नौसेना चीन पर पूरी तरह निर्भर हो चुकी है। पाकिस्तान की नौसेना अभी भी पुरानी और सीमित क्षमता वाली पनडुब्बियों और युद्धपोतों पर निर्भर है और उसके पास आधुनिकीकरण के लिए जरूरी बजट भी नहीं है। यहां तक कि अमेरिका और यूरोपीय देश अब पाकिस्तान की नौसेना में भी कोई रूचि नहीं ले रहे हैं। चीन की मदद पाकिस्तान को कुछ नये युद्धपोत और पनडुब्बियां मिल रही हैं, लेकिन यह पूरी तरह से पाकिस्तान को नौसैनिक महाशक्ति बनाने में सक्षम नहीं हैं। पाकिस्तान ने AMAN-25 को मल्टीलेटरल कोऑपरेशन का नाम दिया है, जिसमें चीनी नौसेना (People’s Liberation Army Navy – PLAN) की भागीदारी प्रमुख होगी, जिससे यह अभ्यास पाकिस्तान की बजाय बीजिंग की समुद्री ताकत को दिखाने का प्रयास होगा।

राजनीतिक अस्थिरता से बेहाल है बांग्लादेश

वहीं, बांग्लादेश भी हिंद महासागर में अपनी नौसेना की ताकत बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन राजनीतिक अस्थिरता और संसाधनों की कमी के चलते उसकी नौसेना अभी भी काफी पीछे हैं। हाल ही में, बांग्लादेश ने हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बनाए रखने के लिए पाकिस्तान के साथ एक नौसैनिक अभ्यास में हिस्सा लिया था। लेकिन यह अभ्यास असफल ही रहा। इसकी वजह है कि बांग्लादेश की नौसेना की क्षमताएं अभी भी सीमित हैं। बांग्लादेश की नौसेना ने भी हाल के वर्षों में कुछ पनडुब्बियों और पेट्रोलिंग शिपों का अधिग्रहण किया है, लेकिन यह अब भी चीन पर अत्यधिक निर्भर है।

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हिंद महासागर दुनियाभर के नौसेनाओं को आकर्षित कर रहा है, जिसमें भारत एक मुख्य भूमिका निभा रहा है। भारतीय नौसेना ने क्वाड (Quad) देशों के साथ सहयोग बढ़ाया है और भारत न केवल इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति को मजबूत कर रहा है, बल्कि QUAD देशों के साथ साइबर डिफेंस, ह्यूमैनिटेरियन असिस्टेंस, और एंटी-पाइरेसी ऑपरेशन में भी सक्रिय रूप से हिस्सा ले रहा है।

इसके अलावा, इनफार्मेशन फ्यूज़न सेंटर-इंडियन ओसियन रीजन (IFC-IOR) जैसी पहलों के जरिए भारत ने यह साबित किया है कि वह इस क्षेत्र में मजबूत समुद्री निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूती दे सकता है। कुल मिला कर TROPEX 2025 भारत के लिए सिर्फ एक सैन्य अभ्यास नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम है जो हिंद महासागर में भारत की शक्ति को और मजबूती देगा।

Aero India 2025: पहली बार भारत के आसमान में गरजेगा रूस का फिफ्थ-जनरेशन फाइटर जेट Su-57, अमेरिकी F-35 भी रहेगा स्टेटिक डिस्प्ले में

Aero India 2025: Russia’s Su-57 to Soar Over India for the First Time, US F-35 on Static Display
SU-57

Aero India 2025: बेंगलुरु में होने वाले एयरो इंडिया 2025 में रूस और अमेरिका के सबसे आधुनिक लड़ाकू विमानों का जलवा देखने को मिलेगा। रूस का Su-57 फिफ्थ-जनरेशन फाइटर जेट पहली बार भारत में प्रदर्शित किया जाएगा, जबकि अमेरिका के F-35 को स्टेटिक डिस्प्ले में रखा जाएगा।

Aero India 2025: Russia’s Su-57 to Soar Over India for the First Time, US F-35 on Static Display
SU-57

भारतीय वायुसेना (IAF) के सूत्रों ने बताया कि अमेरिकी लड़ाकू विमान शायद आसमान में उड़ान नहीं भरेंगे, लेकिन रूस का Su-57 अपने एरोबैटिक करतबों से दर्शकों को रोमांचित करेगा। यह शो 10 से 14 फरवरी 2025 तक आयोजित होगा और इसमें दुनिया भर की प्रमुख डिफेंस कंपनियां हिस्सा लेंगी। इस कार्यक्रम के पहले तीन दिन बिजनेस डेज़ होंगे, जबकि अंतिम दो दिन आम जनता के लिए खुले रहेंगे।

रूसी Su-57: पहली बार भारत में प्रदर्शन

रूसी एयरोस्पेस कंपनी सुखोई (Sukhoi) के बनाए Su-57 फाइटर जेट पहली बार भारत में सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाएगा। यह विमान पहले ही रूसी वायुसेना में शामिल किया जा चुका है और नवंबर 2024 में इसे एयरशो चाइना (Zhuhai) में भी प्रदर्शित किया गया था। यह विमान रूस की लेटेस्ट स्टील्थ टेक्नोलॉजी से लैस है और पहले ही रूसी वायुसेना में शामिल हो चुका है।

सूत्रों के अनुसार, Su-57 इस शो में हवाई करतब दिखाएगा, जिससे दर्शकों को इसकी सुपरक्रूज़, सुपर-मेन्युवरिबिलिटी और अन्य क्षमताओं का प्रदर्शन देखने को मिलेगा।

इस लड़ाकू विमान को पहली बार भारत में दिखाने की टाइमिंग खास है, क्योंकि इस साल रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे की भी संभावना है। गौरतलब है कि 2007 में भारत और रूस ने मिलकर Su-57 का को-डेवलपमेंट प्रोग्राम शुरू किया था, लेकिन 2018 में भारत ने इस प्रोजेक्ट से अपना हाथ खींच लिया था।

Aero India 2025: Russia’s Su-57 to Soar Over India for the First Time, US F-35 on Static Display
US F-35

अमेरिकी F-35 और F-16 भी होंगे शामिल

पिछले साल Aero India 2023 में अमेरिका ने पहली बार F-35 स्टील्थ फाइटर जेट को केवल डिस्प्ले के लिए रखा था। हालांकि, इस बार यह विमान सिर्फ स्टेटिक डिस्प्ले में रहेगा और उड़ान नहीं भरेगा।

इसके अलावा, अमेरिका की ओर से B-1 लॉन्ग रेंज बॉम्बर और F-16 फाइटर्स भी इस शो में हिस्सा लेंगे। B-1 बॉम्बर ने पिछले एयरो इंडिया शो में फ्लाई-पास्ट किया था, और इस बार भी इसके प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है।

इसके अलावा, अमेरिकी बोइंग (Boeing) कंपनी का KC-135 Stratotanker (एक रीफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट) और ब्राजील की एम्ब्रायर (Embraer) कंपनी का C-390 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट भी इस शो का हिस्सा होंगे।

Aero India 2025: Russia’s Su-57 to Soar Over India for the First Time, US F-35 on Static Display

Su-57 बनाम F-35: कौन है ज्यादा ताकतवर?

फिफ्थ-जनरेशन फाइटर जेट्स को आधुनिक सुपर-सोनिक गति, स्टील्थ तकनीक, सुपर-मेन्युवरिबिलिटी और हाई-सिचुएशनल अवेयरनेस जैसी विशेषताओं के लिए जाना जाता है।

Su-57:

  • ट्विन-इंजन स्टील्थ फाइटर
  • हाइपर-सोनिक मिसाइल लॉन्च करने की क्षमता
  • सुपरक्रूज़ और सुपर-मेन्युवरिबिलिटी से लैस
  • रडार से बचने की क्षमता
Aero India 2025: भारत के सबसे बड़े एरो शो में हिस्सा नहीं लेंगे अमेरिकी वायुसेना के F-35 और F-16 फाइटर जेट, ये है बड़ी वजह

F-35:

  • सिंगल-इंजन स्टील्थ फाइटर
  • नेटवर्क-सेंट्रिक वारफेयर के लिए डिज़ाइन किया गया
  • इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर क्षमताओं से लैस
  • वर्टिकल टेकऑफ और लैंडिंग (F-35B)

भारत भी अब अपनी फिफ्थ-जनरेशन फाइटर जेट बनाने की तैयारी में जुट गया है। डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) “एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA)” नामक स्वदेशी फाइटर जेट पर काम कर रहा है।

मार्च 2024 में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) ने इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी थी। वर्तमान में भारतीय वायुसेना के पास 31 फाइटर स्क्वाड्रन हैं, जबकि इसे 42 स्क्वाड्रन की जरूरत है। ऐसे में AMCA का निर्माण भारत की सैन्य क्षमताओं को मजबूत करेगा।

Aero India हर दो साल में आयोजित होने वाला भारत का सबसे बड़ा एयरोस्पेस और डिफेंस शो है। इसमें दुनिया भर की डिफेंस कंपनियां, MSMEs और स्टार्टअप्स अपनी नई तकनीकों और डिफेंस प्रोडक्ट्स को प्रदर्शित करते हैं। वहीं, एयरो इंडिया 2025 ऐसे समय में हो रहा है, जब भारतीय वायुसेना (IAF) गंभीर संकट से गुजर रही है। फाइटर जेट्स की नई खरीद में देरी और स्वदेशी फिफ्थ-जेनरेशन फाइटर जेट AMCA का विकास अभी कम से कम 10 साल दूर है।

IAF के पास वर्तमान में 31 स्क्वाड्रन हैं, जबकि उसे 42 स्क्वाड्रन की आवश्यकता है। आने वाले वर्षों में MiG-21 बाइसन की अंतिम दो स्क्वाड्रन भी सेवा से बाहर हो जाएंगी, जिससे वायुसेना की ताकत और कमजोर हो सकती है।

यह शो भारत को अपनी स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने और डिफेंस एक्सपोर्ट को बढ़ाने का बेहतरीन मौका देता है। इससे “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” अभियान को भी मजबूती मिलेगी।

India-China Disengagement: पूर्वी लद्दाख में LAC से सैनिकों की वापसी भारत के लिए मामूली राहत, लेकिन बड़ी चुनौतियां अभी भी बरकरार

India-China Disengagement: Troop Withdrawal from LAC in Eastern Ladakh Brings Minor Relief, Major Challenges Remain
Chinese Foreign Minister Wang Yi met with the visiting Indian Foreign Secretary Vikram Misri

India-China Disengagement: पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच डिसइंगेजमेंट की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भले ही कुछ राहत महसूस हो रही हो, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक छोटी सफलता है, जबकि राह में अभी कई रोड़े बाकी हैं। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार सी. राजा मोहन ने कहा है कि भारत को अपनी तकनीकी और आर्थिक प्रगति के लिए अमेरिका के साथ संबंध और मजबूत करने की जरूरत है।

India-China Disengagement: Troop Withdrawal from LAC in Eastern Ladakh Brings Minor Relief, Major Challenges Remain
Chinese Foreign Minister Wang Yi met with the visiting Indian Foreign Secretary Vikram Misri

हाल ही में एशिया सोसाइटी इंडिया द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में चर्चा के दौरान, राजा मोहन ने कहा, “थोड़ी राहत जरूर मिली है। भारत और चीन के बीच सीधी उड़ानें फिर से शुरू हो रही हैं, वीजा प्रक्रिया बहाल हो रही है और मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू करने पर सहमति बनी है, लेकिन अभी भी सीमा पर 50,000 सैनिक आमने-सामने खड़े हैं। व्यापार घाटा 100 अरब डॉलर के पार है और चीन ब्रह्मपुत्र नदी पर एक बड़ा बांध बना रहा है, जो भविष्य में भारत के लिए नई समस्याएं खड़ी कर सकता है।”

उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान स्थिति को “सैनिकों की वापसी” (Disengagement) कहा जा सकता है, लेकिन इसे “तनाव में कमी” (De-escalation) नहीं माना जा सकता। भारत को इस छोटे मौके का उपयोग अपने रणनीतिक उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए करना चाहिए, लेकिन यह भी समझना जरूरी है कि चीन के साथ असली समस्याएं अभी भी बनी हुई हैं।

भारत और चीन ने हाल ही में कुछ महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं, जिनका उद्देश्य आपसी संबंधों में सुधार करना है। इन फैसलों में कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करने, सीधी उड़ान सेवाओं की बहाली और अन्य द्विपक्षीय संबंध सुधारने के प्रयास शामिल हैं।

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इन समझौतों की घोषणा भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री और चीन के उप विदेश मंत्री सुन वेइडोंग के बीच हुई बातचीत के बाद की गई। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्रयासों से केवल सीमित लाभ होगा, क्योंकि सीमा पर सैन्य तनाव अब भी बना हुआ है।

चर्चा के दौरान यह भी सवाल उठा कि क्या भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के भविष्य को लेकर तैयार है? इस पर डीबीएस रिसर्च ग्रुप के प्रबंध निदेशक और मुख्य अर्थशास्त्री तैयमुर बेग ने कहा कि भारत में कई सकारात्मक पहल हुई हैं। उन्होंने कहा, “भारत में एपल के प्रोडक्शन प्लांट्स में प्रोडक्शन चीन के प्लांट्स की तुलना में लगभग समान स्तर पर है। यह एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि अधिकांश लोगों को लगा था कि भारत में आईफोन असेंबली करना बहुत कठिन होगा।”

बेग ने बताया कि “आईफोन निर्माण सिर्फ कुछ पुर्जों को जोड़ने की प्रक्रिया नहीं है। इसमें टेस्टिंग, पैकेजिंग और असेंबली जैसी प्रक्रियाएं शामिल होती हैं, जिनके लिए उच्च स्तरीय तकनीकी ज्ञान की आवश्यकता होती है।” फॉक्सकॉन के अधिकारियों के अनुसार, एपल भारतीय उत्पादन से बेहद प्रभावित है, जो भारत के लिए भविष्य में और अधिक तकनीकी निवेश के अवसर खोल सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को भू-राजनीतिक घटनाक्रमों से उत्पन्न हालात का फायदा उठाना चाहिए। पूर्व सिंगापुरी राजनयिक किशोर महबूबानी, जो संयुक्त राष्ट्र में सिंगापुर के स्थायी प्रतिनिधि के रूप में भी कार्य कर चुके हैं, ने कहा कि यूरोप के पास अमेरिका-चीन टकराव के बीच एक तीसरे ध्रुव की भूमिका निभाने का सुनहरा अवसर था, लेकिन उसने यह अवसर खो दिया और पूरी तरह से अमेरिका पर निर्भर हो गया।

महबूबानी ने कहा, “अब अमेरिका यूरोप की चााइना पॉलिसी तय करता है, जिससे यूरोप की रणनीतिक स्वायत्तता कम हो गई है।” उन्होंने सुझाव दिया कि भारत को इस स्थिति का लाभ उठाना चाहिए और अपनी विदेश नीति को और अधिक संतुलित बनाना चाहिए।

हालांकि, भारत और चीन के बीच हाल ही में हुई बातचीत और सैनिकों की वापसी से दोनों देशों के संबंधों में कुछ सकारात्मक बदलाव आए हैं, लेकिन यह भी स्पष्ट है कि असली समस्याएं अभी बनी हुई हैं। व्यापार घाटा, सीमा विवाद और भू-राजनीतिक तनाव जैसे मुद्दे भारत के लिए चुनौती बने हुए हैं।

इसके अलावा, चीन द्वारा ब्रह्मपुत्र नदी पर बनाए जा रहे बांध को लेकर भी भारत में चिंता बढ़ रही है। इस परियोजना से भविष्य में जल संसाधनों पर नियंत्रण और सीमा क्षेत्र में तनाव बढ़ सकता है।

भारत को अपनी विदेश नीति और आर्थिक रणनीति को और मजबूत करने की जरूरत है, ताकि वह इन चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना कर सके। अमेरिका और अन्य मित्र देशों के साथ संबंधों को गहरा करना, स्वदेशी तकनीक और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना और घरेलू रक्षा क्षमताओं को मजबूत करना भारत की प्राथमिकताओं में होना चाहिए।

वर्तमान में भारत को मिले इस छोटे मौके का उपयोग अपनी कूटनीतिक और आर्थिक स्थिति को और मजबूत करने के लिए करना होगा, क्योंकि चीन के साथ उसके असली मुद्दे अभी खत्म नहीं हुए हैं।

Pinaka Rocket Systems: भारतीय सेना को मिलेगी नई ताकत, CCS ने 10,000 करोड़ रुपये के स्वदेशी पिनाका रॉकेट सिस्टम की खरीद को दी मंजूरी

Indian Army Pinaka 120 km
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Pinaka Rocket Systems: केंद्र सरकार की कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) ने भारतीय सेना की मारक क्षमता को बढ़ाने के लिए 10,000 करोड़ रुपये के स्वदेशी पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम की खरीद को मंजूरी दे दी है। यह फैसला भारत की रक्षा रणनीति को मजबूत करने और आत्मनिर्भर भारत अभियान को बढ़ावा देने के लिए किया गया है। इस फैसले के बाद भारतीय सेना की तोपखाने (आर्टिलरी) क्षमता में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी। रक्षा मंत्रालय (MoD) के सूत्रों के अनुसार, इस वित्तीय वर्ष के अंत यानी मार्च 2025 से पहले दो बड़े कॉन्ट्रैक्ट्स पर दस्तखत किए जाने की संभावना है।

Pinaka Rocket Systems: Indian Army to Get a Boost as CCS Approves Rs 10,000 Crore Indigenous Deal
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सरकारी मंजूरी के बाद, दो प्रमुख कॉन्ट्रैक्ट्स पर काम किया जाएगा। पहला कॉन्ट्रैक्ट लगभग 6,050 करोड़ रुपये का होगा, जिसे नागपुर स्थित निजी क्षेत्र की कंपनी सोलर ग्रुप को सौंपा जाएगा। दूसरा कॉन्ट्रैक्ट लगभग 4,000 करोड़ रुपये का होगा, जो सरकारी रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड (MIL) को दिया जाएगा। ये दोनों कंपनियां पिनाका के लिए दो प्रकार के गोला-बारूद एरिया डिनायल म्यूनिशन (ADM) और पिनाका MKI की रेज बढ़ाने को लेकर काम करेंगी।

भारतीय सेना की तोपखाना रेजिमेंट (Regiment of Artillery) के पास 10 पिनाका रेजिमेंट हैं। इनमें से चार रेजिमेंट पहले ही सेवा में आ चुकी हैं, जिनमें से कुछ को चीन सीमा के ऊंचाई वाले इलाकों में तैनात किया गया है। इसके अलावा, छह और पिनाका रेजिमेंट्स को सेना में शामिल करने की प्रक्रिया चल रही है। इनकी तैनाती से भारतीय सेना की मारक क्षमता और उसकी युद्धक्षमता में वृद्धि होगी।

Pinaka Rocket Systems की खूबियां

पिनाका को दुनिया के सबसे एडवांस मल्टी-लॉन्च रॉकेट सिस्टम में से एक माना जाता है। यह उच्च-विस्फोटक (High-Explosive) प्री-फ्रैगमेंटेड गोला-बारूद को 45 किलोमीटर की दूरी तक निशाना बनाने में सक्षम है। वहीं, एरिया डिनायल म्यूनिशन (ADM) प्रणाली 37 किलोमीटर की दूरी तक अपने टारगेट क्षेत्र को प्रभावी रूप से नष्ट कर सकती है। यह सिस्टम युद्ध क्षेत्र में दुश्मन सैनिकों और टैंकों को निष्क्रिय करने के लिए अत्यधिक कारगर मानी जाती है।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने पिनाका के एक्सटेंडेड रेंज वेरिएंट डेवलप किए हैं, जो 75 किलोमीटर की दूरी तक मार कर सकते हैं। भविष्य में इसकी मारक क्षमता को 120 किलोमीटर और फिर 300 किलोमीटर तक बढ़ाने की योजना है।

Pinaka Rocket Systems को खरीद रहे कई देश

भारत न केवल अपनी सेना के लिए पिनाका सिस्टम को डेवलप कर रहा है, बल्कि इसे अन्य मित्र देशों को निर्यात करने की दिशा में भी प्रयास कर रहा है। ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और आकाश वायु रक्षा प्रणाली की तरह, पिनाका भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान बना रहा है। अर्मेनिया पहले ही पिनाका और आकाश डिफेंस सिस्टम खरीद चुका है, जबकि कई आसियान (ASEAN), अफ्रीकी और यूरोपीय देश भी इसे खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं।

इसके अलावा भारतीय सेना की तोपखाना रेजिमेंट (Regiment of Artillery) जल्द ही एक और बड़े सौदे पर हस्ताक्षर करने की तैयारी कर रही है। यह सौदा 8,500 करोड़ रुपये का होगा और इसके तहत 307 एडवांस टोन्ड आर्टिलरी गन सिस्टम (ATAGS) खरीदे जाएंगे, जिनकी मारक क्षमता 48 किलोमीटर तक होगी।

Pinaka MBRL: भारतीय सेना का बड़ा फैसला! पिनाका रॉकेट सिस्टम को देगी तरजीह, महंगी आयातित मिसाइलों से बनाएगी दूरी

भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा था कि पिनाका दुनिया के बेहतरीन रॉकेट सिस्टम में से एक है। इसकी रेजिमेंट को ऊंचाई वाले इलाकों में भी तैनात किया गया है और यह हमारी युद्ध क्षमता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने आगे कहा था कि जैसे ही हमें लंबी दूरी की मारक क्षमता वाले वर्जन मिलेंगे, हम अन्य लंबी दूरी के हथियारों के विकल्पों को छोड़कर पूरी तरह पिनाका सिस्टम पर फोकस कर सकते हैं।

सरकार की योजना पिनाका रॉकेट सिस्टम के और अधिक एडवांस वर्जन डेवलप करने की है। DRDO इस सिस्टम की क्षमता को बढ़ाने के लिए कई ट्रायल कर रहा है। आने वाले वर्षों में, भारतीय सेना के पास 300 किलोमीटर तक मारक क्षमता वाला स्वदेशी रॉकेट सिस्टम होगा, जो देश के डिफेंस सिस्टम को और मजबूत करेगा।

Indian Army SSC Tech Officer: भारतीय सेना में देशभक्ति के जज्बे को इस तरह कर सकते हैं पूरा, अफसर बनने का सुनहरा अवसर

Indian Army SSC Tech Officer: Golden Opportunity to Fulfill Your Dream of Becoming an Officer
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Indian Army SSC Tech Officer: देश की सेवा करने का सपना देख रहे युवाओं के लिए भारतीय सेना ने एक शानदार मौका दिया है। भारतीय सेना ने 65वें शॉर्ट सर्विस कमीशन (टेक्निकल) पुरुष पाठ्यक्रम (SSC(T)-65) और 36वें शॉर्ट सर्विस कमीशन महिला (टेक्निकल) पाठ्यक्रम (SSCW(T)-36) के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। यह भर्ती उन उम्मीदवारों के लिए है, जिन्होंने इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की है और वे भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में सेवा करना चाहते हैं। यह पाठ्यक्रम अक्टूबर 2025 में शुरू होगा।

Indian Army SSC Tech Officer: Golden Opportunity to Fulfill Your Dream of Becoming an Officer
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Indian Army SSC Tech Officer: क्या है पात्रता?

इस भर्ती प्रक्रिया के तहत 20 से 27 वर्ष की आयु वाले अविवाहित पुरुष और महिला उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। उम्मीदवारों को सूचित किए गए इंजीनियरिंग स्ट्रीम्स में डिग्री प्राप्त करनी होगी। आवेदन करने की प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन होगी, जिसे भारतीय सेना की आधिकारिक वेबसाइट www.joinindianarmy.nic.in पर पूरा किया जा सकता है।

SSC (Tech)-65 पुरुष और SSCW (Tech)-36 महिला भर्ती के लिए उम्मीदवारों की आयु 1 अप्रैल 2024 तक 20 से 27 वर्ष के बीच होनी चाहिए। यानी, आवेदन करने वाले उम्मीदवारों का जन्म 2 अप्रैल 1997 से 1 अप्रैल 2004 (दोनों तिथियां शामिल) के बीच होना चाहिए।

इसके अलावा, भारतीय सेना की उन वीर शहीदों की विधवाओं, जिन्होंने सेवा के दौरान अपने प्राण न्योछावर किए, उनके लिए आयु सीमा में 1 अप्रैल 2024 तक अधिकतम 35 वर्ष तक की छूट दी गई है।

Indian Army SSC Tech Officer: आवेदन प्रक्रिया और चयन प्रणाली

इस भर्ती के लिए आवेदन विंडो 7 जनवरी 2025 से 5 फरवरी 2025 तक खुली रहेगी। चयन प्रक्रिया में उम्मीदवारों को आवेदन, शॉर्टलिस्टिंग, SSB इंटरव्यू, मेडिकल टेस्ट, मेरिट लिस्ट और जॉइनिंग लेटर की प्रक्रिया से गुजरना होगा।

एसएसबी (सेवा चयन बोर्ड) इंटरव्यू के लिए शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों की कटऑफ लिस्ट मार्च 2025 के पहले सप्ताह में जारी की जाएगी। एसएसबी इंटरव्यू मई से जुलाई 2025 के बीच होगा, जिसमें दो सप्ताह का विकल्प मिलेगा।

Indian Army SSC Tech Officer: प्रशिक्षण और वेतनमान

चयनित उम्मीदवारों को 49 सप्ताह का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जो अक्टूबर 2025 से सितंबर 2026 तक चलेगा। प्रशिक्षण का आयोजन ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (OTA), गया या चेन्नई में किया जाएगा।

प्रशिक्षण के दौरान, उम्मीदवारों को 56,100 रुपये प्रति माह का स्टाइपेंड मिलेगा। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद, उन्हें लेफ्टिनेंट के पद पर नियुक्त किया जाएगा।

नियुक्ति के बाद, उनका कुल वार्षिक वेतनमान (CTC) लगभग 17-18 लाख रुपये प्रति वर्ष होगा। इसके अलावा, फ्री मेडिकल कवर और साल में एक बार होम टाउन ट्रेवल की सुविधा भी दी जाएगी।

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शॉर्ट सर्विस कमीशन की अवधि और अन्य फायदे

इस भर्ती के तहत 10 साल का न्यूनतम सेवा कार्यकाल होगा, जिसे बाद में अधिकतम 14 साल तक बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा, उम्मीदवारों को 5, 10 और 14 साल की सेवा के बाद स्वेच्छिक रिटायरमेंट (रिलीज) का विकल्प भी दिया जाएगा।

अगर कोई उम्मीदवार सेना में स्थायी कमीशन (Permanent Commission) प्राप्त करना चाहता है, तो उसके पास 10 साल की सेवा के बाद इसका विकल्प उपलब्ध होगा।

किस शाखा में मिलेगा कमीशन

इस भर्ती के तहत उम्मीदवारों को मुख्य रूप से कॉर्प्स ऑफ इंजीनियर्स, कॉर्प्स ऑफ सिग्नल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स शाखाओं में कमीशन दिया जाएगा। हालांकि, उन्हें अन्य शाखाओं में भी नियुक्ति दी जा सकती है।

भारतीय सेना में एसएससी (टेक) के रूप में शामिल होने का यह सुनहरा अवसर है। जो भारतीय युवा देशभक्ति का सपना देखते हैं अपने भारतीय सेना की सेवा करना चाहते हैं। ऐसे इच्छुक उम्मीदवारों को 7 जनवरी 2025 से पहले आवेदन प्रक्रिया पूरी करनी होगी। अधिक जानकारी के लिए भारतीय सेना की आधिकारिक वेबसाइट पर लॉग इन करें।

Tata owned Air India deny seat upgrade facility to Gallantry Award Veteran, draws criticism

Tata owned Indian Airlines deny seat upgrade facility to Gallantry Award Veteran, draws criticism

In a shocking turn of events, Tata owned Air India refused to upgrade the seat of Retired Brigadier Hardeep Singh Sohi, an gallantry award veteran the option of upgrading his seat during his travel.

Tata owned Indian Airlines deny seat upgrade facility to Gallantry Award Veteran, draws criticism

In a post on social media platform X, Retired Brigadier Hardeep wrote, “Travelled by Air India AI 2403 from #Chandigarh to #NewDelhi today and approached the crew of #AirIndia for upgrade if vacant seat is available. The crew checked up with Air India Manager at Chandigarh Mr Virender who flatly refused that such free upgrade for gallantry award winners is not anymore after take over by @TataCompanies @airindia @DGCAIndia. Kindly clarify to avoid further embarrassment.”

Gallantry Award Veteran: WHAT IS THE UPGRADE POLICY

According to the then Air India policy, the soldiers who have been bestowed with military honours such Param Vir Chakra (PVC), Maha Vir Chakra (MVC), Vir Chakra (VC), Ashok Chakra, Kirti Chakra and Shaurya Chakra, will get an upgrade to business class from economy at the time of boarding in case seats are available in the aircraft from this month.

The upgrade scheme, according to the then Air India, can be availed on the production of identity cards at the airline’s check-in counters.

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Domestic carriers including Air India already provides a 50 per cent discount on basic fare on select classes on their domestic network to active Military personnel of Indian Armed Forces and their family members travelling at their own expense.

Gallantry Award Veteran: VETERANS REACT

Army veteran and AFT Advocate Col. Mukul in a post on X said, “The Staff of Air India (which has come to Tata post merger of Air Vistara with Air India) is most useless, arrogant and High headed. Actually, this is the reason that Air India went down and finally it had to be sold to Tata. It will take some more time for Tata to weed out the old staff of Air India and then only we can expect something good out of the “new” Air India.”

Former IAS and chief secretary of Punjab in a post on X said, “The Tata’s bought it as a going concern – they didn’t just buy the assets. Hence, they are legally bound to honour the existing commitments. It is shameful if they are not allowing this gesture to our gallantry award winners, given that it does not entail any extra cash outflow out of the company.”

Indian Army: कौन हैं मेजर राधिका सेन? IIT करने के बाद जॉइन की इंडियन आर्मी, मिला चुका है संयुक्त राष्ट्र से ये खास अवॉर्ड

Indian Army: Who is Major Radhika Sen? IIT Graduate Turned Army Officer Honored by UN
Major Radhika Sen

Indian Army: भारतीय सेना में सेवा करने का सपना बहुत से युवाओं का होता है, लेकिन कुछ ही लोग अपने सपनों को साकार कर पाते हैं। मेजर राधिका सेन ऐसी ही एक शख्सियत हैं, जिन्होंने एक शानदार करियर विकल्प को छोड़कर देश की सेवा को प्राथमिकता दी। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे से बायोटेक्नोलॉजी में मास्टर डिग्री हासिल करने के बावजूद उन्होंने कॉर्पोरेट दुनिया की ऊंचाइयों को छोड़कर भारतीय सेना की वर्दी पहनने का फैसला किया। गणतंत्र दिवस परेड के दौरान रक्षा समाचार डॉट कॉम ने मेजर राधिका से मुलाकात भी की थी।

Indian Army: Who is Major Radhika Sen? IIT Graduate Turned Army Officer Honored by UN
Major Radhika Sen

हिमाचल प्रदेश की रहने वाली भारतीय सेना की मेजर राधिका सेन को हाल ही में संयुक्त राष्ट्र (United Nations) के प्रतिष्ठित ‘मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर’ (United Nations Gender Advocate Award) पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

Indian Army: आईआईटी बॉम्बे से ली बायोटेक्नोलॉजी में मास्टर डिग्री 

मेजर राधिका सेन का जन्म 1993 में हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के सुंदरनगर में हुआ था। वह बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल रहीं और हमेशा नई ऊंचाइयों को छूने का सपना देखा। उनकी प्रारंभिक शिक्षा सेंट मैरी स्कूल, सुंदरनगर में हुई, जिसके बाद उन्होंने माउंट कार्मेल स्कूल, चंडीगढ़ से आगे की पढ़ाई की। विज्ञान में रुचि रखने वाली राधिका ने बायोटेक्नोलॉजी में मास्टर डिग्री प्राप्त करने के लिए आईआईटी बॉम्बे में दाखिला लिया।

राधिका के माता-पिता भी शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े रहे। उनके पिता ओंकार सेन, एनआईटी हमीरपुर में कार्यरत थे, जबकि उनकी माता निर्मला सेन चौहार घाटी के कथोग स्कूल में प्रधानाचार्य थीं। माता-पिता के आदर्शों और मेहनत की प्रेरणा से उन्होंने अपने लक्ष्य को पूरा किया।

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आईआईटी बॉम्बे से उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद, राधिका के पास कॉर्पोरेट जगत में एक शानदार करियर बनाने के कई अवसर थे, लेकिन उन्होंने देशसेवा का मार्ग चुना। भारतीय सेना में शामिल होने की उनकी इच्छा बचपन से ही थी, जिसे उन्होंने हकीकत में बदल दिया।

Indian Army: 2016 में भारतीय सेना में बनीं लेफ्टिनेंट

राधिका ने 2015 में चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (OTA) में प्रशिक्षण लिया और सफलतापूर्वक इसे पूरा करने के बाद 2016 में भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर नियुक्त हुईं। अपनी सेवा के दौरान, उन्होंने जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और सिक्किम जैसे विभिन्न क्षेत्रों में तैनाती के दौरान महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।

राधिका ने भारतीय सेना में आठ साल पहले अपनी सेवाएं शुरू कीं और अपने समर्पण व कड़ी मेहनत से न केवल देश का गौरव बढ़ाया बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बनाई। उन्होंने विभिन्न सैन्य अभियानों में भाग लिया और कठिन परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्यों का निष्ठा से पालन किया।

संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में योगदान

मेजर राधिका सेन के इन उल्लेखनीय योगदानों के लिए, उन्हें मई 2024 में संयुक्त राष्ट्र के ‘मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर’ (United Nations Gender Advocate Award) पुरस्कार से सम्मानित किया गया। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने उन्हें “सच्ची नेता और रोल मॉडल” के रूप में प्रशंसा की। यह पुरस्कार महिलाओं की समानता और शांति रक्षा अभियानों में उनके अतुलनीय योगदान के लिए दिया जाता है। राधिका इस पुरस्कार को प्राप्त करने वाली दूसरी भारतीय शांति सैनिक हैं; उनसे पहले मेजर सुमन गवानी को 2019 में यह सम्मान मिला था।

मार्च 2023 में, मेजर राधिका सेन को डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कॉन्गो (DRC) में संयुक्त राष्ट्र संगठन स्थिरीकरण मिशन (MONUSCO) के तहत तैनात किया गया था। यहां उन्होंने भारतीय रैपिड डिप्लॉयमेंट बटालियन की एंगेजमेंट प्लाटून कमांडर के रूप में सेवा की।

कई युद्धग्रस्त इलाकों में जहां सुरक्षा के हालात नाजुक थे, वहां मेजर राधिका न केवल अपनी टीम का सफलतापूर्वक नेतृत्व दिया, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई प्रभावी कदम भी उठाए। उन्होंने वहां लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए और स्थानीय महिलाओं को सशक्त बनाने के प्रयास किए।

उन्होंने कम्युनिटी अलर्ट नेटवर्क की स्थापना की, जिससे स्थानीय लोग अपनी सुरक्षा और मानवीय चिंताओं को साझा कर सकें। साथ ही, उन्होंने बच्चों के लिए अंग्रेजी कक्षाओं और वयस्कों के लिए स्वास्थ्य, लिंग और व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया, जिससे महिलाओं को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया।

मेजर राधिका सेन की कहानी उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणादायक है, जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने यह साबित किया कि अगर इच्छाशक्ति मजबूत हो तो किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है।

उनकी सफलता न केवल उनकी मेहनत का परिणाम है, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि भारतीय महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। वह भारत की उन बेटियों में से हैं, जिन्होंने अपने कर्मों से यह दिखा दिया कि महिलाओं को अब केवल सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता।

Finally justice to 1965 War Veteran: Punjab and Haryana High court comes to his rescue, pulls up Indian Army for Unnecessary litigation

Liberalised Family Pension
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Finally justice to 1965 War Veteran: Pulling the Indian Army for its unnecessary litigation, the Punjab and Haryana High court had directed Centre to pay an additional 15 percent on the arrears of war injury pension to an army captain decorated with the Veer chakra in the 1965 Indo- Pak war.

Finally justice to 1965 War Veteran: Punjab and Haryana High court comes to his rescue, pulls up Indian Army for Unnecessary litigation
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A bench of Justices Sanjeev Prakash Sharma and Meenakshi Mehta expressed their shock that a war veteran was dragged into an unnecessary litigation for years and asked Indian army to pay an additional 15 percent on the arrears of war injury to captain Reet M P Singh of 8 cavalry.

The bench also expressed surprise as to how the 2018 judgment passed by the AFT was being challenged and directed that additional interest be recovered from the officers responsible for delaying the payment to the war hero.

CASE OF CAPTAIN SINGH

Captain singh had 80 disability and lost an eye in the 1965 war but had not been granted enhanced benefits by broad-banding of disability percentage in accordance with a policy introduced by the Centre with effect from 1996.

Disability Pension: Over 3000 appeals by MoD pending in Supreme Court and High Court against death and disability benefits

This was subsequently challenged

Ministry of Defence had earlier granted enhanced benefits only to invalidation cases post-1996, denying them to pre-1996 cases. Additionally, those who were released with disability pension or war injury pension upon the completion of their term, voluntary retirement or superannuation were also refused these benefits.

Supreme Court had struck down the cut-off date and quashed the distinction based on the manner of exit from service and had directed the payment of benefits with arrears from 1996 with 8 per cent interest to all affected disabled retired personnel.

TOP COURT SLAPPED FINE ON CENTRE FOR UNNECESSARY LITIGATION

Last month, top court had also slapped penalty of Rs 50,000 on the Union government and the Indian Army for forcing a soldier’s widow into unnecessary litigation. She had to fight for years to secure a family pension after her husband, Naik Inderjeet Singh, died during a counter terrorism patrol in Jammu and Kashmir.

SUCH CASES IMPACT MORALE OF ARMED FORCES

A bench of Justices A S Oka and Ujjal Bhuyan while criticising the Union government for dragging armed forces personnel and their families to the top court over disputes related to pensions highlighted the adverse impact of such litigation on morale within the armed forces.

CENTRE SHOULD COME OUT WITH POLICY

Asking the Centre to come out with a policy to avoid such litigation stressed that personnel who have served the nation should not be subjected to unnecessary legal battles and said, “As it is, there are only a few people willing to serve in the armed forces.”

“Why should the Union drag such people to this court? They have served the Union after all. Day in and day out, these matters are brought here,” the bench observed.

Republic Day Parade 2025: इस बार कर्तव्यपथ पर ये रही सर्वश्रेष्ठ झांकी, पहले नंबर पर रहा ये मार्चिंग कंटिंगेंट

Republic Day Parade 2025: These Were the Best Tableaux and Marching Contingents on Kartavya Path
Uttar Pradesh (Mahakumbh 2025 - Swarnim Bharat: Virasat aur Vikas)

Republic Day Parade 2025: गणतंत्र दिवस परेड 2025 के सर्वश्रेष्ठ मार्चिंग कंटिंगेंट और झांकियों के विजेताओं का आधिकारिक एलान कर दिया गया है। इस वर्ष की परेड में देश की सांस्कृतिक विविधता, सैन्य शक्ति और ऐतिहासिक धरोहर का भव्य प्रदर्शन किया गया। परेड में भाग लेने वाली झांकियों और मार्चिंग दस्तों के प्रदर्शन का मूल्यांकन तीन अलग-अलग ज्यूरी पैनलों द्वारा किया गया, जिन्होंने विजेताओं की सूची जारी की।

Republic Day Parade 2025: These Were the Best Tableaux and Marching Contingents on Kartavya Path
Uttar Pradesh (Mahakumbh 2025 – Swarnim Bharat: Virasat aur Vikas)

Republic Day Parade 2025: सेवाओं और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के सर्वश्रेष्ठ मार्चिंग कंटिंगेंट

इस वर्ष की परेड में जम्मू और कश्मीर राइफल्स कंटिंगेंट को सेवाओं की श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ मार्चिंग दल के रूप में चुना गया। वहीं, दिल्ली पुलिस के मार्चिंग दस्ते को केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (CAPF) और अन्य सहायक बलों की श्रेणी में पहला स्थान मिला। दोनों दस्तों ने अनुशासन, तालमेल और बेहतरीन परेड प्रदर्शन से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

Republic Day Parade 2025: These Were the Best Tableaux and Marching Contingents on Kartavya Path
Uttarakhand (Uttarakhand: Cultural Heritage and Adventure Sports)

Republic Day Parade 2025: सर्वश्रेष्ठ झांकियां (राज्य/केंद्र शासित प्रदेश)

विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की झांकियों के मूल्यांकन के बाद शीर्ष तीन झांकियों की घोषणा की गई:

उत्तर प्रदेश – “महाकुंभ 2025 – स्वर्णिम भारत: विरासत और विकास” (पहला स्थान)

त्रिपुरा – “अनंत श्रद्धा: त्रिपुरा में 14 देवताओं की पूजा – खार्ची पूजा” (दूसरा स्थान)

आंध्र प्रदेश – “एतिकोप्पका बोम्मालु – इको-फ्रेंडली वुडन टॉयज” (तीसरा स्थान)

Republic Day Parade 2025: These Were the Best Tableaux and Marching Contingents on Kartavya Path
Gujarat (Swarnim Bharat: Virasat Aur Vikas)

उत्तर प्रदेश की झांकी को महाकुंभ 2025 की भव्यता और भारतीय आध्यात्मिक धरोहर को प्रभावी रूप से प्रस्तुत करने के लिए पहला स्थान दिया गया। त्रिपुरा की झांकी ने अपनी धार्मिक परंपराओं को जीवंत तरीके से दर्शाया, जबकि आंध्र प्रदेश की झांकी ने पारंपरिक खिलौनों और हस्तशिल्प कला की महत्ता को उजागर किया।

Republic Day Parade 2025: These Were the Best Tableaux and Marching Contingents on Kartavya Path
Ministry of Women & Child Development (Multifaceted journey of women and children nurtured under the Ministry’s comprehensive schemes)

सर्वश्रेष्ठ केंद्रीय मंत्रालय/विभाग की झांकी

केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों की झांकियों में जनजातीय मामलों के मंत्रालय (मिनिस्ट्री ऑफ ट्राइबल अफेयर्स) की झांकी को “जनजातीय गौरव वर्ष” की थीम पर आधारित शानदार प्रस्तुति के लिए प्रथम स्थान दिया गया। इसके अलावा, दो विशेष पुरस्कार भी दिए गए:

केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) – “भारत के संविधान के 75 वर्ष”

‘जयति जय ममः भारतम्’ नृत्य समूह – विशेष सांस्कृतिक प्रदर्शन के लिए

जनता की पसंद के विजेता

गणतंत्र दिवस परेड 2025 में जनता को भी अपनी पसंद के सर्वश्रेष्ठ झांकी और मार्चिंग दस्ते को चुनने का अवसर दिया गया। MyGov पोर्टल पर 26 से 28 जनवरी 2025 तक ऑनलाइन मतदान कराया गया, जिसके नतीजे इस प्रकार रहे।

Republic Day Parade 2025: These Were the Best Tableaux and Marching Contingents on Kartavya Path
Best Marching Contingent among Services – Signals Contingent

जनता की पसंद के सर्वश्रेष्ठ मार्चिंग कंटिंगेंट

सेनाओं की श्रेणी में – सिग्नल्स कंटिंगेंट

केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की श्रेणी में – CRPF मार्चिंग कंटिंगेंट

जनता की पसंद की सर्वश्रेष्ठ झांकियां (राज्य/केंद्र शासित प्रदेश)

गुजरात – “स्वर्णिम भारत: विरासत और विकास” (पहला स्थान)

उत्तर प्रदेश – “महाकुंभ 2025 – स्वर्णिम भारत: विरासत और विकास” (दूसरा स्थान)

उत्तराखंड – “उत्तराखंड: सांस्कृतिक विरासत और साहसिक खेल” (तीसरा स्थान)

Republic Day Parade 2025: These Were the Best Tableaux and Marching Contingents on Kartavya Path
· Best Marching Contingent among CAPFs/other auxiliary Forces – CRPF Marching Contingent

जनता की पसंद की सर्वश्रेष्ठ केंद्रीय मंत्रालय/विभाग की झांकी

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय – “मंत्रालय की व्यापक योजनाओं के तहत महिलाओं और बच्चों की बहुआयामी यात्रा”

गणतंत्र दिवस परेड 2025 का भव्य समापन

गणतंत्र दिवस परेड 2025 में भारत की संस्कृति, सैन्य शक्ति और विकास की झलक देखने को मिली। मार्चिंग कंटिंगेंट, झांकियां और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने इस परेड को ऐतिहासिक बना दिया। विशेष रूप से, जनता द्वारा चुने गए विजेताओं ने दर्शाया कि नागरिकों की भागीदारी इस आयोजन को और अधिक शानदार बना सकती है।

हर साल की तरह, इस वर्ष भी परेड में देश की विविधता और एकता का संदेश दिया गया। अगले वर्ष के लिए और भी भव्य आयोजन की उम्मीद की जा रही है, जहां भारत की समृद्ध विरासत और विकास की यात्रा को नए अंदाज में प्रस्तुत किया जाएगा।