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Qatar Amir’s India Visit: भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारियों की अपील; कतर में फंसे साथी को भारत वापस लाने की गुहार

Qatar Amir's India Visit: Ex-Naval Officers Urge PM Modi to Help Bring Back Retired Commander Purnendu Tiwari

Qatar Amir’s India Visit: भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल-थानी से अपील की है कि उनके एक साथी रिटायर्ड कमांडर पूर्णेंदू तिवारी, जो अब भी कतर में हैं, को भारत वापस लाने में मदद करें। यह अपील उस समय आई है जब कतर के अमीर भारत के दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर आ रहे हैं।

Qatar Amir's India Visit: Ex-Naval Officers Urge PM Modi to Help Bring Back Retired Commander Purnendu Tiwari

पिथछे साल फरवरी में, सात पूर्व नौसेना अधिकारियों की रिहाई के बाद भारत सरकार ने कूटनीतिक स्तर पर एक बड़ी सफलता हासिल की थी। ये अधिकारी अगस्त 2022 से कतर में अज्ञात आरोपों में हिरासत में थे और उन्हें पहले मौत की सजा सुनाई गई थी। हालांकि, दिसंबर 2023 में कतर की कोर्ट ऑफ अपील ने उनकी सजा को बदलकर तीन से 25 साल के कारावास में तब्दील कर दिया। 11 फरवरी 2024 को उन्हें 17 महीने की कैद के बाद भारत वापस लाया गया था।

भारत लौटने वालों में कैप्टन नवतेज गिल, कैप्टन सौरभ वशिष्ठ, कमांडर संजीव गुप्ता, कमांडर अमित नागपाल, कमांडर बीके वर्मा, कमांडर सुगुणाकर पकाला और नाविक रागेश शामिल थे। लेकिन कमांडर पूर्णेंदू तिवारी (रिटायर्ड) अभी भी कतर में हैं।

कमांडर तिवारी को 2019 में प्रवासी भारतीय सम्मान से भी नवाजा गया था। लेकिन उन्हें अभी तक भारत लौटने की अनुमति नहीं मिली है। उनकी वापसी पर ट्रैवल बैन (यात्रा प्रतिबंध) लगा हुआ है। उनके साथी, कमांडर संजीव गुप्ता और कमांडर सुगुणाकर पकाला ने एक साझा बयान में कहा, “एक साल हो गया है जब कतर ने भारतीय नौसेना के आठ पूर्व अधिकारियों को रिहा किया, लेकिन उनमें से एक साथी अभी भी वहीं फंसा हुआ है।”

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उन्होंने आगे कहा, “हम कतर के अमीर और भारत के प्रधानमंत्री से अनुरोध करते हैं कि वे इस मामले का शीघ्र समाधान निकालें। यात्रा प्रतिबंध हटाकर तिवारी को भारत लौटने दिया जाए ताकि वे अपनी वृद्ध मां और परिवार के साथ फिर से मिल सकें।”

Qatar Amir’s India Visit: क्यों हुई थी इनकी गिरफ्तारी?

गिरफ्तार किए गए ये आठ अधिकारी कतर की एक निजी कंपनी अल दहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजीज में काम करते थे। यह कंपनी कतर की सेना और सुरक्षा एजेंसियों के लिए ट्रेनिंग और अन्य सर्विसेज प्रदान करती थी। इन सभी पर अज्ञात आरोपों के तहत अगस्त 2022 में गिरफ्तारी हुई थी।

इस मामले में कतर की कोर्ट ऑफ फर्स्ट इंस्टेंस ने पहले सभी आठ भारतीय अधिकारियों को मौत की सजा सुनाई थी। हालांकि, भारत सरकार के उच्च-स्तरीय कूटनीतिक प्रयासों और राजनयिक हस्तक्षेप के बाद दिसंबर 2023 में कोर्ट ऑफ अपील ने उनकी सजा को बदलकर तीन से 25 साल के कारावास में बदल दिया। इसके बाद, भारत सरकार की लगातार बातचीत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तिगत प्रयासों के चलते फरवरी 2024 में सात अधिकारियों को रिहा किया गया और वे सुरक्षित भारत लौट आए।

कमांडर पूर्णेंदू तिवारी भारतीय सशस्त्र बलों के पहले ऐसे व्यक्ति थे, जिन्हें प्रवासी भारतीय सम्मान से नवाजा गया था। यह पुरस्कार उन्हें भारतीय समुदाय और डिफेंस सेक्टर में उनके योगदान के लिए दिया गया था। उनके साथियों की मानें तो तिवारी की गिरफ्तारी और उन पर लगाए गए प्रतिबंधों को जल्द से जल्द हटाया जाना चाहिए।

पूर्व नौसेना अधिकारियों ने बताया कि कतर में बिताए गए 17 महीनों का समय बेहद कठिन था। एक पूर्व अधिकारी, संजीव गुप्ता ने कहा, “वह 17 महीने बेहद भयावह थे। पहले छह महीने तो और भी ज्यादा मुश्किल थे। कई बार ऐसा महसूस हुआ कि शायद मैं कभी भारत लौट भी नहीं पाऊंगा।”

गुप्ता ने बताया कि उन 531 दिनों में उन्होंने 42 किताबें पढ़ीं और प्रतिदिन चार घंटे योग और ध्यान किया, जिससे वे मानसिक रूप से खुद को मजबूत रख पाए।

कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल-थानी के भारत दौरे के दौरान यह मामला फिर से उठ सकता है। भारत और कतर के बीच ऐतिहासिक रूप से मजबूत व्यापारिक और कूटनीतिक संबंध रहे हैं। दोनों देशों के बीच तेल, गैस, व्यापार और निवेश के क्षेत्रों में घनिष्ठ सहयोग है।

इस दौरे के दौरान भारत सरकार द्वारा कतर के समक्ष कमांडर तिवारी की वापसी का मुद्दा उठाए जाने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला न केवल मानवीय आधार पर बल्कि कूटनीतिक रिश्तों को और मजबूत करने के दृष्टिकोण से भी अहम हो सकता है।

बता दें कि विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 30 दिसंबर 2024 से 1 जनवरी 2025 तक कतर की आधिकारिक यात्रा की थी। इस दौरान, उन्होंने कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री, महामहिम शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जसीम अल थानी से मुलाकात की थी। इस यात्रा का उद्देश्य भारत और कतर के बीच राजनीतिक, व्यापार, निवेश, ऊर्जा, सुरक्षा, सांस्कृतिक और जनसंपर्क सहित द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा करना था।

इससे पहले, डॉ. जयशंकर ने 6 से 7 दिसंबर 2024 को दोहा फोरम के 22वें एडिशन में हिस्सा लेने के लिए कतर की यात्रा की थी। इसके बाद, उन्होंने 8 से 9 दिसंबर 2024 को बहरीन की यात्रा की, जहां उन्होंने चौथी भारत-बहरीन संयुक्त उच्चायोग की सह-अध्यक्षता की।

F-35 Stealth Fighter Jets: आसान नहीं है भारतीय वायुसेना में अमेरिकी फाइटर जेट्स शामिल करने की डगर! पहले इन चुनौतियों से पाना होगा पार?

F-35 Stealth Fighter Jets: Challenges Ahead for Indian Air Force Before Induction!

F-35 Stealth Fighter Jets: पिछले हफ्ते बेंगलुरु काफी चर्चा में रहा। यहां के येलाहंका एयर फोर्स स्टेशन में एयरो इंडिया शो का आयोजन हुआ। खास इस मायने में रहा कि पहली बार दुनिया के दो धुरविरोधी शक्तिशाली देशों अमेरिका और रूस के पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट F-35 और SU-57 एक ही एयर स्ट्रिप पर थे। दोनों के बीच 10 मीटर का भी अंतर नहीं था। इन दोनों का एक ही प्लेटफॉर्म पर मौजूदा होना ही पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींचने के लिए काफी था। लेकिन बात यहीं खत्म नहीं हुई। उस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वाशिंगटन डीसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ खड़े होकर एलान किया कि अमेरिका भारत को “कई अरब डॉलर” की सैन्य बिक्री बढ़ाएगा और “अंततः” भारत को F-35 स्टेल्थ फाइटर जेट देने का रास्ता तैयार कर रहा है।

F-35 Stealth Fighter Jets: Challenges Ahead for Indian Air Force Before Induction!

F-35 Stealth Fighter Jets: लॉकहीड मार्टिन ने जारी किया ये बयान

इस घोषणा के बाद भारत में इस बात पर चर्चा शुरू हो गई कि क्या भारतीय वायुसेना (IAF) को इस एडवांस फाइटर जेट की जरूरत है। भारत पहले से ही अपने पुराने लड़ाकू विमानों को बदलने और नए विमान बनाने की कोशिशों में जुटा है। हालांकि, इस एलान के बाद विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि सैन्य खरीद की एक प्रक्रिया होती है और अभी तक इसे लेकर कोई औपचारिक कदम नहीं उठाया गया है। हालाकि अमेरिकी राष्ट्रपति के एलान के कुछ देर बाद ही F-35 फाइटर जेट बनाने वाली एयरोस्पेस कंपनी लॉकहीड मार्टिन (Lockheed Martin) ने एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया, जिसमें कंपनी ने कहा कि वह पिछले तीन दशकों से भारत की रक्षा और एयरोस्पेस प्रणाली को मजबूत करने में एक विश्वसनीय और रणनीतिक भागीदार रही है।

F-35 GAO Report: इस रिपोर्ट के खुलासे के बाद क्या भारत को खरीदना चाहिए F-35 फाइटर जेट? अमेरिका के सरकारी विभाग ने ही खोले सारे राज!

लॉकहीड मार्टिन ने अपने बयान में कहा, “हमने C-130J ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, S-92 हेलीकॉप्टर कैबिन और फाइटर विंग्स जैसे उत्पादन कार्यक्रमों के माध्यम से अपनी प्रतिबद्धता को साबित किया है। ये सभी कार्यक्रम वैश्विक सप्लाई चेन का हिस्सा हैं और भारतीय रक्षा क्षेत्र को मजबूती प्रदान कर रहे हैं।” कंपनी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने भारत को F-35 स्टील्थ फाइटर जेट्स देने की मंशा जाहिर की थी। लॉकहीड मार्टिन ने कहा कि “हम इस घोषणा से उत्साहित हैं और दोनों देशों की सरकारों के साथ मिलकर रणनीतिक खरीद प्रक्रियाओं पर काम करने के लिए तैयार हैं।”

कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह भारत के साथ न केवल फाइटर जेट्स, बल्कि जेवलिन मिसाइल सिस्टम और हेलीकॉप्टर्स जैसे अन्य डिफेंस प्रोडक्ट्स पर भी सहयोग बढ़ाने की इच्छुक है। उन्होंने कहा, “हम भारतीय सशस्त्र बलों को 21वीं सदी की सुरक्षा तकनीकों और आधुनिक क्षमताओं से लैस करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि वे अपनी वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपट सकें।”

F-35 क्यों है खास?

F-35 जॉइंट स्ट्राइक फाइटर जेट है औऱ दुनिया के सबसे एडवांस लड़ाकू विमानों में से एक है। इसे स्टील्थ टेक्नोलॉजी से बनाया गया है, जिससे यह दुश्मन के रडार में पकड़ में नहीं आता। यह तीन अलग-अलग वेरिएंट में आता है, F-35A, जो सामान्य टेकऑफ और लैंडिंग के लिए बनाया गया है; F-35B, जिसे कम जगह में उड़ान भरने और वर्टिकल लैंडिंग करने के लिए डिजाइन किया गया है; और F-35C, जो एयरक्राफ्ट कैरियर से ऑपरेट करने के लिए तैयार किया गया है।

अमेरिका इस विमान को कई देशों को निर्यात भी कर रहा है। अब तक 10 देशों ने इसे अपनी वायुसेना में शामिल कर लिया है और अमेरिका खुद 2,470 से ज्यादा F-35 खरीदने की योजना बना रहा है।

F-35 Stealth Fighter Jets: क्या भारत को F-35 की जरूरत है?

भारतीय वायुसेना फिलहाल अपने लड़ाकू बेड़े को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। कई पुराने विमान रिटायर होने वाले हैं, और ऐसे में नए फाइटर जेट्स की जरूरत महसूस की जा रही है। भारतीय वायुसेना की स्क्वाड्रन क्षमता भी लगातार घट रही है। मौजूदा समय में वायुसेना के पास बचे हैं कुल 32 स्क्वाड्रन, जबकि जरूरत है 42 की। यह आंकड़े भी लगभग आठ साल पुराने हैं। हालांकि 36 राफेल आने बाद दो स्क्वाड्रनों की संख्यया तो बढ़ी, लेकिन जैसे-जैसे पुराने विमान रिटायर होते जाएंगे, इनमें लगातार कमी आती रहेगी, क्योंकि अगले कुछ सालों में मिग-21, मिग-27, जगुआर औऱ मिराज को भी चरणबद्ध तरीके से रिटायर किया जाना है।

लेकिन सवाल यह है कि क्या F-35 इस काम के लिए सबसे सही विकल्प होगा? भारत पहले से ही रूस, फ्रांस और इजरायल की तकनीकों का इस्तेमाल कर रहा है। ऐसे में, अमेरिकी F-35 को भारत के मौजूदा सिस्टम से जोड़ना आसान नहीं होगा। इंडियन डिफेन्स स्ट्रक्चर में यह एक बड़ी चुनौती हो सकती है।

F-35 Stealth Fighter Jets: चुनौतियां क्या हैं?

अगर अमेरिका भारत को F-35 ऑफर कर रहा है, तो इसका मतलब यह है कि अमेरिका को अब भारत के रूसी S-400 मिसाइल सिस्टम से ज्यादा परेशानी नहीं है।  पहले यह माना जा रहा था कि S-400 की खरीद के कारण अमेरिका भारत को F-35 नहीं देगा, लेकिन ट्रंप के बयान के बाद यह साफ हो गया कि अब अमेरिका इस शर्त को दरकिनार कर सकता है।

कीमत और मेंटेनेंस भी बड़ा सवाल 

F-35 दुनिया के सबसे महंगे फाइटर जेट्स में से एक है। अमेरिकी सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रोजेक्ट एक दशक की देरी से चल रहा है और इसकी लागत 209 बिलियन डॉलर (17 लाख करोड़ रुपये) ज्यादा हो चुकी है। भारत को यह देखना होगा कि क्या यह सौदा उसके बजट के अनुकूल रहेगा?

भारतीया वायुसेना की पसंद ट्विन-सीटर फाइटर जेट्स 

एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि F-35 सिंगल-सीटर जेट है, जबकि भारतीय वायुसेना ज्यादातर ट्विन-सीटर फाइटर जेट्स को प्राथमिकता देती आई है। पहले, भारत ने रूस के साथ मिलकर पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान (FGFA) बनाने की योजना बनाई थी, लेकिन जब यह सामने आया कि यह विमान सिंगल-सीट कॉन्फ़िगरेशन में है, तो भारत ने यह प्रोजेक्ट छोड़ दिया। ऐसे में अगर भारत F-35 खरीदता है, तो यह देखना होगा कि यह हमारे पायलट्स के लिए कितना उपयुक्त रहेगा और इसकी लागत कितनी होगी।

भारत के स्वदेशी प्रोजेक्ट्स का क्या होगा?

हालांकि अभी तक भारत ने इस सौदे को लेकर कोई आधिकारिक बातचीत शुरू नहीं की है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भारत F-35 को अपने बेड़े में शामिल करने का विचार करेगा या अपने स्वदेशी प्रोजेक्ट्स AMCA को ही प्राथमिकता देगा। वहीं, अगर भारत F-35 खरीदता है, तो इससे हमारे अपने फाइटर जेट प्रोजेक्ट्स पर क्या असर पड़ेगा? क्योंकि अगर भारत F-35 खरीदता है, तो इससे देश के स्वदेशी फाइटर जेट बनाने के प्रोजेक्ट्स प्रभावित हो सकते हैं। भारत डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की कोशिश कर रहा है और ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत ज्यादा से ज्यादा सैन्य उपकरणों का निर्माण देश में करने पर जोर दे रहा है। ऐसे में, अगर भारत F-35 खरीदता है, तो इससे डोमेस्टिक डिफेंस इंडस्ट्री को नुकसान हो सकता है और भारत को लंबे समय तक अमेरिकी डिफेंस सिस्टम पर निर्भर रहना पड़ सकता है।

भारत के अपने फाइटर जेट प्रोजेक्ट्स

भारत का हल्का लड़ाकू विमान (LCA)-Mk1A प्रोजेक्ट अभी भी पूरा नहीं हुआ है। इस विमान में अमेरिकी General Electric (GE) का F404 इंजन लगाया गया है, लेकिन इंजन की डिलीवरी में दो साल की देरी हो चुकी है। हालांकि, एयरो इंडिया शो में अधिकारियों ने कहा कि GE ने अब अपनी सप्लाई चेन की समस्या सुलझा ली है और मार्च से डिलीवरी शुरू हो जाएगी।

इसके अलावा, LCA-Mk2 का पहला प्रोटोटाइप इस साल के अंत तक तैयार होने की उम्मीद है और इसका पहली उड़ान परीक्षण 2026 में किया जाएगा। इसके बाद भारत का अपना फाइटर जेट प्रोजेक्ट, एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA), 2034-35 तक भारतीय वायुसेना में शामिल करने की योजना है।

इसके अलावा, भारत 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) खरीदने की योजना बना रहा है, जिसमें एक विदेशी लड़ाकू विमान को लाइसेंस के तहत भारत में बनाया जाएगा।

एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “अभी इस पर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन जो भी फैसला लिया जाए, भारत को अपने स्वदेशी प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता देनी चाहिए।”

F-35 GAO Report: इस रिपोर्ट के खुलासे के बाद क्या भारत को खरीदना चाहिए F-35 फाइटर जेट? अमेरिका के सरकारी विभाग ने ही खोले सारे राज!

F-35 GAO Report: Should India Still Consider Buying the Fighter Jet?

F-35 GAO Report: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को अपने एडवाांस F-35 फाइटर जेट को देने की पेशकश की है। यह वही विमान है जिसे अमेरिका अपने सबसे आधुनिक और घातक फाइटर जेट के तौर पर प्रचारित करता है। लेकिन इसी बीच अमेरिकी सरकार की निगरानी एजेंसी – गवर्नमेंट अकाउंटेबिलिटी ऑफिस (GAO) की एक रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट में हुए खुलासों से विमान को लेकर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

F-35 GAO Report: Should India Still Consider Buying the Fighter Jet?

GAO की रिपोर्ट के मुताबिक F-35 की ऑपरेशनल एफिशिएंसी पिछले पांच सालों में लगातार गिर रही है, और इसके सभी वेरिएंट (F-35A, F-35B और F-35C) परफॉरमेंस के तय मानकों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। यानी कि यह विमान जितना एडवांस बताया जाता है, उतना भरोसेमंद साबित नहीं हो रहा है। बता दें कि यह विमान अमेरिकी वायुसेना, नौसेना और मरीन कॉर्प्स में भी शामिल है।

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F-35 लड़ाकू विमान को अमेरिकी रक्षा विभाग (DOD) ने अपने सबसे महत्वपूर्ण वेपन सिस्टम्स के तौर पर डेवलप किया था। वर्तमान में अमेरिका के पास 630 से अधिक F-35 फाइटर जेट हैं, और वह 1,800 और खरीदने की योजना बना रहा है, जिन्हें 2088 तक इस्तेमाल किया जाएगा।

लेकिन समस्या यह है कि F-35 की लागत तेजी से बढ़ रही है। 2018 में इस विमान की अनुमानित ऑपरेटिंग कॉस्ट्स 1.1 ट्रिलियन डॉलर (91.3 लाख करोड़ रुपये) थी, जो 2023 में बढ़कर 1.58 ट्रिलियन डॉलर (131.14 लाख करोड़ रुपये) हो गई। और यह तब है जब अमेरिकी वायुसेना, नौसेना और मरीन कॉर्प्स ने इसके उड़ान घंटों को कम करने का फैसला लिया है, क्योंकि इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।

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रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी वायुसेना के लिए एक F-35 को उड़ाने की वार्षिक लागत 4.1 मिलियन डॉलर (34.03 करोड़ रुपये) आंकी गई थी, लेकिन अब यह बढ़कर 6.8 मिलियन डॉलर (56.44 करोड़ रुपये) प्रति वर्ष हो गई है।

F-35 GAO Report: ये हैं दिक्कतें; क्यों उठ रहे हैं सवाल?

अमेरिकी सरकार की निगरानी एजेंसी गवर्नमेंट अकाउंटेबिलिटी ऑफिस (GAO) की रिपोर्ट में F-35 लड़ाकू विमान को लेकर कई तकनीकी खामियों और लॉजिस्टिक्स चुनौतियों की बात भी की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सबसे बड़ी समस्या मेंटेनेंस में लगने वाला लंबा वक्त है। F-35 के कई कंपोनेंट्स इतने मुश्किल हैं कि छोटे-छोटे रिपेयर्स में भी महीनों लग जाते हैं। इसका मतलब है कि अगर कोई विमान तकनीकी खराबी की वजह से ग्राउंडेड हो जाता है, तो उसे फिर से उड़ान के लिए तैयार करने में बेहद लंबा वक्त लग सकता है।

इसके अलावा, कंपोनेंट्स की भारी कमी भी एक बड़ी चुनौती बन गई है। GAO की रिपोर्ट बताती है कि स्पेयर पार्ट्स की न मिलने से कई विमान ज़मीन पर खड़े रहते हैं और उन्हें मिशन के लिए तैयार नहीं किया जा सकता। अमेरिकी वायुसेना और नौसेना के लिए यह एक गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि इससे उनकी तैयारियों पर असर पड़ता है।

तकनीकी दिक्कतों में सॉफ्टवेयर अपडेट में देरी भी एक बड़ी समस्या है। F-35 को एक “फ्लाइंग कंप्यूटर” कहा जाता है, क्योंकि इसमें एडवांस डिजिटल सिस्टम और सॉफ्टवेयर-बेस्ड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है। लेकिन यह सॉफ़्टवेयर लगातार अपग्रेड होते रहना चाहिए। कई बार जरूरी अपग्रेड समय पर न होने की वजह से F-35 को मिशन से हटाना पड़ता है।

अमेरिकी सप्लाई चेन और मेंटेनेंस सिस्टम पर रहना होगा निर्भर

ट्रंप के प्रस्ताव के बाद भारत के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या F-35 वाकई में एक अच्छा ऑप्शन है? यह विमान अपनी स्टील्थ टेक्नोलॉजी और एडवांस फीचर्स के लिए मशहूर है, लेकिन इसकी कमियों को भी अनदेखा नहीं किया जा सकता। भारत इस समय अपने वायुसेना बेड़े को मजबूत और मॉर्डन बनाने पर फोकस कर रहा है। भारत के पास पहले से ही राफेल, तेजस और सुखोई-30MKI जैसे बेहतरीन विकल्प हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या भारत को एक ऐसा विमान खरीदना चाहिए, जिसकी खुद अमेरिका में आलोचना हो रही है?

अगर भारत F-35 को अपनाता है, तो इस पर न केवल भारी भरकम खर्च करना पड़ेगाा, बल्कि इसके मेंटेनेंस और टेक्नोलॉजी अपग्रेड पर भी निर्भर रहना होगा। क्योंकि यह विमान पूरी तरह से अमेरिकी सप्लाई चेन और मेंटेनेंस सिस्टम पर निर्भर है।

हालांकि अभी तक भारत सरकार की तरफ से इस प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भारत अमेरिका से F-35 खरीदने की दिशा में कदम बढ़ाएगा, या फिर अपने स्वदेशी AMCA और मौजूदा बेड़े को ही मजबूत करेगा।

Pinaka MBRL: फ्रांस को चाहिए ‘शिवजी का धनुष’! मैक्रों हुए राजी तो डिफेंस एक्सपोर्ट में भारत का बढ़ जाएगा दबदबा

Pinaka MBRL: France Eyes India’s Pinaka Rocket Launcher System, Boosting India's Defense Exports

Pinaka MBRL: भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करने के लिए भारत ने फ्रांस को स्वदेशी पिनाका मल्टी-लॉन्च आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम ऑफर किया है। अगर यह सौदा फाइनल हो जाता है, तो यह पहली बार होगा जब फ्रांस भारत से हथियार खरीदेगा। अभी तक भारत ही फ्रांस से हथियार खरीदता रहा है, लेकिन यह डील अपने अंतिम अंजाम तक पहुंचती है, तो एक निर्यातक के तौर पर भारत का बड़ी पहचान मिलेगी।

Pinaka MBRL: France Eyes India’s Pinaka Rocket Launcher System, Boosting India's Defense Exports

Pinaka MBRL: फ्रांसीसी सेना को दिया न्योता

प्रदानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों फ्रांस में हैं, जहां वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समिट में हिस्सा लेने पहुंचे हुए हैं। इसी दौरान पीएम मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को पिनाका सिस्टम का ऑफर दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने फ्रांसीसी सेना को पिनाका मल्टी-बैरेल रॉकेट लॉन्चर (MBRL) सिस्टम देखने के लिए भी आमंत्रित किया है। हाालंकि तीन महीने पहले फ्रांस का एक प्रतिनिधिमंडल भारत आया था और पिनाका सिस्टम का डेमो देखा था। इस डेमो के नतीजों के बाद फ्रांसीसी अधिकारियों ने इस सौदे में रूचि दिखाई है। सूत्रों के अनुसार, फ्रांस पिनाका का गाइडेड वर्जन खरीदना चाहता है।

PINAKA Rocket System: भारतीय सेना का पिनाका रॉकेट सिस्टम होगा और घातक! रक्षा मंत्रालय ने किया 10,147 करोड़ रुपये के गोला-बारूद का सौदा

इसके साथ ही भारत 26 राफेल मरीन फाइटर्स और 3 अतिरिक्त स्कॉर्पीन सबमरीन्स डील को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है। राफेल मरीन फाइटर्स का सौदा करीब 63,000 करोड़ रुपये का है, जबकि स्कॉर्पीन सबमरीन्स की डील 33,500 करोड़ रुपये में होगी।

Pinaka MBRL: कारगिल युद्ध में पिनाका ने दिखाया था कमाल

बता दें कि पिनाका का नाम शिवजी के धनुष पर रखा गया है। इस धनुष से भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का वध किया था। पिनाका रॉकेट सिस्टम को DRDO ने बनाया है। इसकी मारक क्षमता 90 किलोमीटर तक है और इसे भारतीय सेना ने 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तान के खिलाफ इस्तेमाल किया था। इस युद्ध में पिनाका ने अपने घातक हमलों से पाकिस्तानी सेना को धूल चटा दी थी।

Pinaka MBRL: भारत के पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम खरीदने का इच्छुक है फ्रांस! रक्षा निर्यात में होगा जबरदस्त इजाफा

DRDO के मिसाइल्स एंड स्ट्रेटेजिक सिस्टम्स के डायरेक्टर जनरल उम्मलनेनी राजा बाबू ने बताया, फ्रांस पिनाका को लेकर इच्छुक है। हालांकि, अभी तक इस सौदे को लेकर कोई औपचारिक समझौता नहीं हुआ है, लेकिन बातचीत लगातार जारी है।

फ्रांस रूस के बाद दूसरा ऐसा देश है, जो भारत को हथियारों की सप्लाई करता है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के आंकड़ों के अनुसार, 2019 से 2023 के बीच भारत और फ्रांस के बीच डिफेंस एक्सपोर्ट में जबरदस्त इजाफा हुआ है।

Pinaka MBRL: भारतीय सेना का बड़ा फैसला! पिनाका रॉकेट सिस्टम को देगी तरजीह, महंगी आयातित मिसाइलों से बनाएगी दूरी

बता दें कि इससे पहले आर्मेनिया भी पिनाका को खरीद चुका है। पिछले साल नवंबर में आर्मेनिया को पिनाका का पहला रेजिमेंट भी भेजा गया था।

दोनों देश डिफेंस कोऑपरेशन में भी काफी आगे बढ़ रहे हैं। जनवरी 2025 में फ्रांसीसी कैरियर स्ट्राइक ग्रुप चार्ल्स डी गॉल भारत आया था। वहीं, भारतीय नौसेना ने फ्रेंच मल्टीनेशनल एक्सरसााइज ला पेरूज में भी हिस्सा लिया था। वहीं, अब अगला वरुणा अभ्यास मार्च 2025 में आयोजित होगा। इसके अलावा, फ्रांस-इंडिया डिफेंस स्टार्टअप एक्सीलेंस (FRIND-X) को दिसंबर 2024 में पेरिस में लॉन्च किया गया, जिसमें दोनों देशों के रक्षा स्टार्टअप्स, निवेशकों और रिसर्च ऑर्गनाइजेशंस ने हिस्सा लिया था।

Pinaka MBRL: भारतीय सेना में चार पिनाका रेजीमेंट्स

बता दें कि भारतीय सेना पहले ही चार पिनाका रेजीमेंट्स को शामिल कर चुकी है, जिनमें से कुछ लांचर उत्तरी सीमाओं पर ऊंचाई वाले इलाकों में भी तैनात किए गए हैं। बाकी छह रेजीमेंट्स को जल्द ही शामिल किया जाएगा। डीआरडीओ ने पिनाका के लिए 45 किमी तक की मारक क्षमता वाले एक्सटेंडेड रेंज रॉकेट और 75 किमी तक की गाइडेड रेंज रॉकेट भी डेवलप किए हैं। इसके अलावा, पिनाका की रेंज को 120 किमी और फिर 300 किमी तक बढ़ाने की योजना है।

GE Aerospace की टीम फरवरी में भारत दौरे पर, LCA Mk2 और AMCA के लिए इंजन टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर बातचीत

LCA Mk-1A: HAL Confirms Tejas Mk1A's First Engine Ready for April Delivery!

GE Aerospace: भारतीय वायुसेना प्रमुख एपी सिंह की हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के एमडी को खरी-खरी सुनाने के एक दिन बाद ही एचएएल की तरफ से राहत भरी खबर आई है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने बताया कि अमेरिकी एयरोस्पेस कंपनी GE की एक टीम इस महीने के अंत में भारत का दौरा करेगी। यह टीम GE 414 इंजन की 80 फीसदी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (ToT) पर बातचीत करेगी। एक बार इस टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर क्लैरिटी आने के बाद दोनों पक्ष कीमतों को लेकर बातचीत शुरू करेंगे।

GE Aerospace Team to Visit India in February for LCA Mk2 and AMCA Engine Tech Transfer Talks

GE Aerospace: इस महीने के अंत तक भारत आएगी टीम

HAL के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर डीके सुनील ने बताया, इससे पहले अमेरिका ने केवल 58 फीसदी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की पेशकश की थी, लेकिन अब बातचीत के जरिए इसे 80 फीसदी तक बढ़ाने की योजना है। उनकी टीम पिछले हफ्ते बोस्टन गई थी और अब GE टीम इस महीने के अंत तक भारत आएगी। उन्होंने कहा, “हम दो फेज में काम कर रहे हैं। पहला फेज 80 फीसदी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर बातचीत का है और उसके बाद कीमतों पर चर्चा की जाएगी।”

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GE 414 इंजन को भारत के स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान (LCA) Mk2 और एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) में फिट किया जाएगा। AMCA प्रोजेक्ट के बारे में डीके सुनील ने कहा कि यह पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट है और अगले तीन सालों में इसकी पहली उड़ान होने की संभावना है। वहीं, AMCA प्रोजेक्ट डायरेक्टर कृष्णा राजेंद्र नीली का कहना है कि AMCA का इंडक्शन 2036 से शुरू होने की संभावना है।

GE Aerospace: LCA Mk1 और LCA Mk1A की डिलीवरी योजना

HAL के प्रमुख डीके सुनील ने बताया कि 83 LCA Mk1 और 97 LCA Mk1A विमान 2031 तक भारतीय वायुसेना को सौंप दिए जाएंगे। अगले 3 से 3.5 वर्षों में सभी 83 LCA Mk1 विमानों की डिलीवरी पूरी कर ली जाएगी। GE कंपनी ने इस कैलेंडर वर्ष में 12 GE 404 इंजन की सप्लाई का भी वादा किया है।

HAL की ऑर्डर बुक 1.33 लाख करोड़ रुपये!

HAL चीफ डीके सुनील ने बताया कि HAL की ऑर्डर बुक 2026-27 तक 2.50 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है। कई बड़े कॉन्ट्रैक्ट पाइपलाइन में हैं, जिनमें 97 LCA Mk1A फाइटर जेट्स, 156 लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर्स (LCH), और SU-30 MKI जेट्स का एक्वीजीशन और अपग्रेड भी शामिल है।

उन्होंने बताया कि पिछले नौ महीनों में HAL को 55,800 करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट मिले हैं। इसमें 39,000 करोड़ रुपये के मैन्युफैक्चरिंग ऑर्डर शामिल हैं, जिनमें 240 AL-31 FP इंजनों के लिए 25,350 करोड़ रुपये और 12 SU-30 MKI विमानों के एक्वीजीशन के लिए 12,573 करोड़ रुपये के ऑर्डर भी शामिल हैं। इसके अलावा HAL को 16,500 करोड़ रुपये के मरम्मत, ओवरहॉल, स्पेयर्स और डिज़ाइन एवं डेवलपमेंट के ऑर्डर भी मिले हैं।

इसके अलावा पिछले एक साल में HAL ने भारतीय सेना को 25 एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH), भारतीय तटरक्षक बल को 9 ALH, भारतीय वायुसेना को 80 RD-33 इंजन, और भारतीय नौसेना एवं वायुसेना को 65 डॉर्नियर मिड-लाइफ अपग्रेड की सप्लाई की है।

डीके सुनील ने बताया कि नई डील्स के साथ, HAL की ऑर्डर बुक दिसंबर 2024 तक 1.33 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा, “हम दो बड़े कॉन्ट्रैक्ट्स पर सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं, जिनमें 97 LCA Mk-1A और 156 LCH के ऑर्डर शामिल हैं। ये दोनों ऑर्डर मंजूरी के अंतिम चरण में हैं और अगले 3 से 6 महीनों में इन सौदों के पूरा होने की उम्मीद है।”

P-8I Aircraft Deal: पीएम मोदी की अमेरिका दौरे में इस डिफेंस डील पर हो सकती है बातचीत, तीन साल पहले डाल दी थी ठंडे बस्ते में

P-8I Aircraft Deal: PM Modi's US Visit May Revive Stalled Defense Talks

P-8I Aircraft Deal: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा से पहले भारत और अमेरिका के बीच एक बड़ी डिफेंस डील पर बातचीत हो सकती है। यह डील अमेरिका से छह और एडवांस्ड P-8I लॉन्ग-रेंज मेरीटाइम पेट्रोल और सबमरीन-हंटिंग एयरक्राफ्ट खरीदने को लेकर है। यह सौदा लगभग तीन साल पहले ठंडे बस्ते में चला गया था, लेकिन अब इसे फिर से इस पर काम करने की कोशिश की जा रही है।

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P-8I Aircraft Deal: चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियां

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वॉशिंगटन में होने वाली समिट मीटिंग से पहले इस प्रस्ताव को फिर से “पुनर्विचार” के लिए उठाया गया है। इसके पीछे जो वजह बताई जा रही है, उसके मुताबिक हिंद महासागर और आसपास के क्षेत्रों में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों के चलते भारत की निगरानी क्षमताओं को मजबूत करने की जरूरत है।

अमेरिका से इन छह P-8I विमानों के लिए एक वाजिब दामों का प्रस्ताव देने के लिए कहा गया है। यह सौदा अमेरिका के फॉरेन मिलिट्री सेल्स (FMS) कार्यक्रम के तहत गर्वनमेंट-टू-गर्वनमेंट के स्तर पर किया जाएगा। सही कीमतें मिलने बाद के बाद ही यह तय किया जाएगा कि इस सौदे को अमली जामा पहनाया जा सकता है या नहीं।

P-8I Aircraft Deal: भारतीय नौसेना के पास पहले से ही 12 P-8I विमान

बता दें कि भारतीय नौसेना के पास पहले से ही 12 P-8I विमान हैं, जिन्हें मल्टी-मोड रडार, एडवांस इलेक्ट्रो-ऑप्टिक सेंसर, हार्पून ब्लॉक-II मिसाइलें, MK-54 हल्के टॉरपीडो, रॉकेट और डेप्थ चार्ज से लैस किया गया है। इन विमानों को बोइंग ने बनाया है और 2009 और 2016 में कुल 3.2 बिलियन डॉलर से अधिक के दो अलग-अलग सौदों के तहत इन्हे भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था।

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P-8I विमान का इस्तेमाल मुख्य रूप से दुश्मन की पनडुब्बियों और वॉरशिपों को टारगेट कर उन्हें नष्ट करने के लिए किया जाता है। लेकिन भारत ने इन विमानों का इस्तेमाल पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ अप्रैल 2020 में शुरू हुए हिंसक संघर्ष के बाद से 3,488 किमी लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के साथ चीनी सैनिकों और उनकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए भी बड़े पैमाने पर किया है।

मई 2021 में अमेरिका ने दिया था ऑफर

मई 2021 में, अमेरिकी विदेश विभाग ने कांग्रेस को भारत को छह P-8I विमानों और उससे जुड़े इक्विपमेंट्स की 2.4 बिलियन डॉलर की संभावित बिक्री के बारे में बताया था।। हालांकि, भारत ने इस सौदे पर कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई, जिसके बाद इस सौदे को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। अब, यदि भारत इस सौदे को आगे बढ़ाता है, तो कीमत पहले के मुकाबले ज्यादा होने की संभावना है।

इसके अलावा, भारतीय नौसेना को अमेरिका से 31 MQ-9B प्रीडेटर ड्रोन में से 15 ड्रोन मिलने वाले हैं। ये ड्रोन लंबी दूरी के “हंट एंड किल” मिशनों के लिए बनाए गए हैं। यह सौदा पिछले साल अक्टूबर में 3.4 अरब डॉलर में तय हुआ था। भारतीय सेना और वायुसेना को इन ड्रोनों में से आठ-आठ ड्रोन मिलेंगे।

अमेरिका ने भारत को बेचे 25 अरब डॉलर से अधिक के हथियार

2007 के बाद से अमेरिका ने भारत को 25 अरब डॉलर से अधिक के हथियार बेचे हैं। लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप इससे संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने 27 जनवरी को प्रधानमंत्री मोदी के साथ टेलीफोन पर हुई बातचीत में भारत से और अधिक अमेरिकी हथियारों की खरीद को बढ़ाने का आग्रह किया था।

P-8I विमानों के अलावा, अमेरिका भारत के साथ आठ पहियों वाले स्ट्राइकर आर्मर्ड इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल्स की जॉइंट मैन्युफैक्चरिंग की भी पेशकश कर रहा है। इसके साथ ही भारत के साथ मिल कर तेजस मार्क-II लड़ाकू विमानों के लिए जनरल इलेक्ट्रिक F414-INS6 एरो-इंजन बनाने को लेकर भी बातचीत चल रही है।

114 नए मल्टी-रोल लड़ाकू विमानों के सौदे पर नजर

इसके साथ ही, अमेरिका भारतीय वायुसेना के लिए 114 नए मल्टी-रोल लड़ाकू विमानों (MRFA) बनाने को लेकर भी रुचि दिखा रहा है। इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 1.25 लाख करोड़ रुपये है। इसके अलावा, इसके अलावा, अमेरिकी विमान निर्माता कंपनी लॉकहीड मार्टिन और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड की साझेदारी में, भारतीय वायुसेना के मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट प्रोजेक्ट की भी रेस में हैं। इस प्रोजेक्ट के तहत 80 विमान खरीदे जाने हैं, जो पुराने सोवियत मूल के AN-32 बेड़े की जगह लेंगे।

Sukhoi-30MKI: जल्द ही भारत के सुखोई-30 के आगे ढेर होगा चीन का लेटेस्ट J-35 फाइटर जेट! रूस ने दिया सुखोई-57 का इंजन लगाने का ऑफर

Sukhoi-30MKI Upgrade: Russia Offers Su-57 Engine, Set to Outclass China’s J-35 Fighter Jet!

Sukhoi-30MKI: बेंगलुरु में चल रहे एरो इंडिया 2025 के बीच रूस की तरफ से भारत को तगड़ा ऑफर मिला है। रूस ने भारतीय वायुसेना के बैकबोन कहे जाने वाले लड़ाकू विमान सुखोई-30MKI के अपग्रेड को लेकर जबरदस्त ऑफर दिया है। रूस ने अपने लेटेस्ट स्टील्थ फाइटर सुखोई-57 में इस्तेमाल हो रहे एडवांस AL-41 इंजन को भारतीय सुखोई विमानों के लिए पेश किया है। ये इंजन मौजूदा AL-31 इंजन से ज्यादा ताकतवर और बेहतर है, जिसके बाद भारतीय वायुसेना की ताकत में बड़ा इजाफा होगा।

Sukhoi-30MKI Upgrade: Russia Offers Su-57 Engine, Set to Outclass China’s J-35 Fighter Jet!

भारतीय वायुसेना के पास इस वक्त 272 सुखोई-30MKI जेट्स हैं, जो किसी भी एक विमान मॉडल के मुकाबले सबसे बड़ा बेड़ा है। इन विमानों को अपग्रेड करने के लिए भारत रूस के साथ बातचीत कर रहा है। इस नए इंजन से भारत के फाइटर जेट्स की ताकत और परफॉर्मेंस में बड़ा बदलाव आ सकता है।

Sukhoi-30MKI: क्या खास है इस नए इंजन में?

अभी सुखोई-30MKI फाइटर जेट्स में AL-31 इंजन इस्तेमाल हो रहा है। लेकिन रूस का नया AL-41 इंजन ज्यादा पावरफुल है और यह सुखोई-57 जैसे एडवांस्ड स्टील्थ फाइटर में भी इस्तेमाल होता है। नए इंजन से सुखोई-30 की स्पीड, रेंज और फ्यूल एफिशिएंसी में जबरदस्त सुधार हो सकता है।

एयरो इंडिया 2025 के दौरान रूसी विमान निर्माता यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन के सीईओ वादिम बाडेखा ने इस ऑफर का एलान किया। उन्होंने कहा, “हम भारत को सुखोई-30 के अपग्रेड के हिस्से के रूप में यह नया इंजन ऑफर कर रहे हैं। AL-41 इंजन लगने के बाद सुखोई-30MKI की परफॉरमेंस बेहतर हो जाएगी, जिससे यह विमान नई पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को भी टक्कर देगा।

Su-57 Fighter Jet: रूस का भारत को बड़ा ऑफर! फिफ्थ-जेनरेशन Su-57 के जॉइंट प्रोडक्शन की पेशकश, AMCA प्रोजेक्ट में सहयोग का वादा

वहीं, भारत में सुखोई-30MKI को बनाने वाली कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL)का कहना है कि इस अपग्रेड के लिए डील जल्द साइन हो सकती है।

वहीं, सुखोई-30MKI का यह अपग्रेड केवल इंजन तक सीमित नहीं रहेगा। अपग्रेडेड विमानों में भारतत में बने एवियोनिक्स, रडार और मिशन कंप्यूटर लगाए जाएंगे। DRDO के बनाए उत्तम एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड अरे (AESA) रडार से विमान की पहचान और ट्रैकिंग में भी सुधार होगा।

इसके अलावा, विमान का कॉकपिट पूरी तरह डिजिटल होगा, जिसमें बड़े टचस्क्रीन डिस्प्ले पायलट को बेहतर कंट्रोल और विजिबिलिटी देंगे। नए मिशन कंप्यूटर भी जोड़े जाएंगे ताकि नई टेक्नोलॉजी को हैंडल किया जा सके।

भारत की योजना है अपग्रेडेड सुखोई-30MKI में 78 फीसदी स्वदेशी पार्ट्स इस्तेमाल किए जाएं। इससे मेक इन इंडिया को बढ़ावा मिलेगा और विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम होगी।

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रूस का दूसरा बड़ा ऑफर: भारत में सुखोई-57E का निर्माण

एयरो इंडिया 2025 के दौरान रूस ने भारत को एक और बड़ा ऑफर दिया है। रूस ने भारत को सुखोई-57E (एक्सपोर्ट वर्जन) की लोकल मैन्युफैक्चरिंग का प्रस्ताव दिया है। अगर यह डील फाइनल होती है, तो 2025 से हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) में सुखोई-57E का निर्माण शुरू हो सकता है।

रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के एक प्रवक्ता ने बताया कि रूस भारत में पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट का उत्पादन करने के लिए पूरी तकनीकी मदद देने को तैयार है। उन्होंने कहा, “अगर सब कुछ योजना के अनुसार चलता है, तो हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) में सुखोई-57E का उत्पादन 2025 तक शुरू हो सकता है।”

साथ ही, रूस ने भारत के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) प्रोजेक्ट में भी सहयोग की पेशकश की है। इसमें इंजन टेक्नोलॉजी, AESA रडार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एडवांस्ड सॉफ्टवेयर शामिल हैं। यह भारत के AMCA फाइटर जेट प्रोजेक्ट को बड़ा बूस्ट मिल सकता है।

सूत्रों का कहना है कि रूस का यह ऑफर भारत के लिए बड़ा मौका है। इससे भारत को क्रिटिकल टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी। रूस के अधिकारियों ने कहा कि इस तरह के सहयोग से भारत को भविष्य में किसी भी इंटरनेशनल प्रतिबंध या सप्लाई चेन में दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा।

Sukhoi-30MKI: भारत का सबसे बड़ा रक्षा सहयोगी है रूस

भारत और रूस के रिश्ते दशकों पुराने हैं। रूस लंबे समय से भारत का सबसे बड़ा रक्षा सहयोगी रहा है। 2000 से 2020 के बीच भारत के कुल हथियार आयात का 66.5 फीसदी रूस से आया है। आज भी भारतीय सेना के हथियारों में रूस का असर साफ दिखा जा सकता है।

हालांकि, अब भारत मेक इन इंडिया के तहत अपनी डिफेंस प्रोडक्शन को घरेलू स्तर पर बढ़ा रहा है। रूस के इस सहयोग से भारत को न केवल तकनीकी रूप से मजबूती मिलेगी, बल्कि घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को भी बड़ा फायदा मिलेगा।

वर्तमान में भारतीय वायुसेना को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। भारतीय वायुसेना के फाइटर स्क्वाड्रन की संख्या 42 से घटकर 31 रह गई है, जो एक गंभीर चिंता का विषय है। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह भी कई बार LCA Mk1 फाइटर जेट्स की डिलीवरी में देरी को लेकर चिंता जता चुके हैं। वहीं, रूस के इस प्रस्ताव से भारतीय वायुसेना को अपने मौजूदा बेड़े को अपग्रेड करने का बड़ा मौका मिल सकता है।

LCA Tejas Mk1A को लेकर IAF प्रमुख ने सुनाई फिर खरी-खरी, HAL से क्यों नाखुश है वायुसेना? आप भी सुनें

Tejas Mk1A Order: Indian Air Force Halts New Procurement Amid Delivery Delays and Production Challenges

LCA Tejas Mk1A: भारतीय वायुसेना (IAF) के प्रमुख एयर चीफ मार्शल (ACM) अमर प्रीत सिंह ने हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के प्रति अपनी नाराज़गी खुलकर जताई है। बेंगलुरु में एरो इंडिया शो के दौरान उन्होंने HAL के चेयरमैन डी.के. सुनील से सीधे सवाल करते हुए तेजस Mk1A जेट्स की देरी पर नाराजगी जाहिर की। वायुसेना प्रमुख ने जिस तरह से खुल कर अपनी नाराजगी जाहिर की है, उनके शब्द शायद हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के अधिकारियों की नींद उड़ाने के लिए काफी होंगे।

IAF Chief Slams HAL Over LCA Tejas Mk1A Delays – Why Is the Air Force Unhappy?

LCA Tejas Mk1A: बोले- मुझे HAL पर कोई भरोसा नहीं

हाल ही में एरो इंडिया में एक कार्यक्रम के दौरान, एयर चीफ मार्शल सिंह ने HAL के चेयरमैन डीके सुनील के सामने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए उन्होंने कहा, “मैं आपको केवल यह बता सकता हूं कि हमारी जरूरतें और चिंताएं क्या हैं। आपको हमारी चिंताओं को दूर करना होगा और हमें भरोसा दिलाना होगा। फिलहाल, मुझे HAL पर कोई भरोसा नहीं है, और यह बहुत ही गलत है।”

उन्होंने यह बातें उस वक्त कहीं, जब एयर चीफ मार्शल सिंह HJT-36 यशस के कॉकपिट में बैठे ब्रीफिंग ले रहे थे। यह पूरी बातचीत एक वीडियो में कैद हो गई, जिसे डिफेंस न्यूज़ पोर्टल ने अपने यूट्यूब चैनल पर साझा किया है। इस छह मिनट के वीडियो में ACM सिंह के चेहरे पर नाराजगी साफ झलक रही थी।

IAF Chief Slams HAL Over LCA Tejas Mk1A Delays – Why Is the Air Force Unhappy?

LCA Tejas Mk1A: फरवरी तक 11 तेजस Mk1A जेट्स देने का किया था वादा

एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि उन्हें फरवरी तक 11 तेजस Mk1A जेट्स तैयार होने का वादा किया गया था, लेकिन “एक भी विमान तैयार नहीं है।” उन्होंने यह भी कहा कि HAL का काम करने का तरीका मिशन मोड में नहीं है, जो इस प्रोजेक्ट में देरी की सबसे बड़ी वजह है।

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सबसे गंभीर बात यह रही कि वायुसेना प्रमुख ने आरोप लगाया कि Aero India 2025 शो में पेश किए गए तेजस Mk1A जेट्स वास्तव में Mk1A नहीं हैं। “आपने जो विमान उड़ाया और उसे Mk1A कहा, वह Mk1A नहीं है। केवल सॉफ्टवेयर बदलने या लुक्स में बदलाव करने से यह Mk1A नहीं बन जाता। जब हथियार और क्षमताएं बढ़ेंगी, तभी इसे Mk1A कहा जा सकता है।”

वायुसेना प्रमुख की यह नाराजगी ऐसे समय पर सामने आई है, जब एक दिन पहले ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने HAL के तेजस Mk1A जेट्स के उत्पादन संयंत्र का दौरा किया था। उसके ठीक बाद Aero India शो में चार Mk1A जेट्स ने पहली बार सार्वजनिक उड़ान भी भरी थी।

वायुसेना प्रमुख बोले- जादू की छड़ी की जरूरत है

जब HAL की लीडरशिप एंड टेस्टिंग टीम ने आईएएफ चीफ सिंह की बातों को “ध्यानपूर्वक नोट करने” और सुधार करने का भरोसा दिया, तो उन्होंने जवाब दिया, “अगर मैं गलत साबित हुआ तो मैं सबसे खुश व्यक्ति होऊंगा। मुझे लगता है कि केवल कुछ लोग ही मेहनत कर रहे हैं, या फिर सभी बिना बड़ी तस्वीर को देखे अपने-अपने क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। कुछ बदलना होगा, कोई बड़ा बदलाव। यह सब ठीक करने के लिए किसी जादू की छड़ी की जरूरत है। अब समय आ गया है।”

मीडिया कवरेज पर भी जताई नाराज़गी

अपने पिछले बयानों की मीडिया में निगेटिव कवरेज को लेकर आईएएफ चीफ ने कहा, “मुझे यह मजाक लगता है कि जब मैं कुछ कहता हूं तो मीडिया केवल नकारात्मक हिस्से को ही उठाता है। मैं केवल एक मुद्दा उठाने की कोशिश कर रहा हूं। मैं किसी पर उंगली नहीं उठा सकता, क्योंकि तीन उंगलियां मेरी ओर भी इशारा कर रही होती हैं।”

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पहले भी कई बार एचएएल पर उठा चुके हैं सवाल

हालांकि यह पहली बार नहीं जब वायुसेना प्रमुख एपी सिंह ने तेजस की डिलीवरी को लेकर सवाल उठाए हों। वे इससे पहले ही कई बार एचएएल को कठघरे में खड़ा कर चुके हैं। पिछले महीने 9 जनवरी को भी 21वें सुब्रतो मुखर्जी सेमिनार में ‘वायुक्षेत्र में आत्मनिर्भरता’ पर बोलते हुए उन्होंने तेजस लड़ाकू विमानों के अधिग्रहण में हो रही देरी पर गहरी नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने कहा था जहां एक ओर चीन छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों का परीक्षण कर रहा है, वहीं भारत अभी भी स्वदेशी तेजस विमानों के अधिग्रहण का इंतजार कर रहा है। एयर चीफ मार्शल सिंह ने स्पष्ट किया था कि रक्षा क्षेत्र में समय का पालन बेहद जरूरी है, क्योंकि तकनीक समय के साथ अप्रासंगिक हो जाती है।

उन्होंने कहा था कि तेजस परियोजना की शुरुआत 1984 में हुई थी और 17 साल बाद इसका पहला विमान उड़ान भर सका। 2016 में तेजस को वायुसेना में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन 2025 तक भी पहले 40 विमानों की डिलीवरी पूरी नहीं हो सकी है। उन्होंने इसे देश की उत्पादन क्षमता की कमजोरी बताया था।

एयर चीफ मार्शल सिंह ने सुझाव दिया था कि रक्षा क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने की आवश्यकता है, ताकि कंपनियों को यह एहसास हो कि ऑर्डर छिन भी सकते हैं। सिंह ने अनुसंधान और विकास (R&D) में निवेश बढ़ाने की जरूरत पर भी बल देते हुए कहा था फिलहाल रक्षा बजट का केवल 5% अनुसंधान पर खर्च किया जा रहा है, जबकि इसे 15% तक बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने चेताया कि अगर तकनीक समय पर विकसित नहीं हुई, तो उसका कोई फायदा नहीं होगा।

Archer-NG UAV: भारत का स्वदेशी आर्म्ड ड्रोन ‘आर्चर-NG’ जल्द उड़ान भरने को तैयार, 34 घंटे तक लगातार भर सकता है उड़ान

Archer-NG UAV: India Indigenous Armed Drone Ready for Takeoff, First Sortie Next Month!

Archer-NG UAV: मीडियम एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस ड्रोन अर्चर एनजी (Archer NG) को लेकर अच्छी खबर सामने आई है। स्वदेश में ही बने अनमैंड एरियल व्हीकल (UAV) अर्चर एनजी को न केवल सर्विलांस बल्कि स्ट्राइक मिशनों के लिए तैयार किया गया है। वहीं, इसे जल्द ही भारतीय सेना के बेड़े में शामिल किया जाएगा। एरो इंडिया 2025 के दौरान इस लेटेस्ट ड्रोन की क्षमताओं और भविष्य की योजनाओं के बारे में जानकारी दी गई।

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Archer-NG UAV के फीचर्स 

यह UAV मीडियम एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस (MALE) श्रेणी में आता है, जिसका मुख्य कार्य इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनसेंस (ISR) है। हालांकि, यह केवल निगरानी तक सीमित नहीं है; अर्चर एनजी स्ट्राइक मिशन भी अंजाम दे सकता है। यह UAV 300 किलोग्राम तक हथियार ले जाने में सक्षम है।

यह ड्रोन सिंगल इंजन ट्विन बूम कॉन्फ़िगरेशन में तैयार किया गया है, जिससे यह वजन में हल्का और बढ़िया परफॉरमेंस भी देता है। इस UAV में कई तरह के पेलोड्स लगाए जा सकते हैं, जिनमें इलेक्ट्रो-ऑप्टिक सेंसर, रडार पेलोड और सिचुएशनल अवेयरनेस इक्विपमेंट्स शामिल हैं। यह दिन और रात दोनों समय, किसी भी मौसम में मिशन को अंजाम देने में सक्षम है।

Archer-NG UAV: नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध के लिए तैयार

अर्चर एनजी को आधुनिक नेटवर्क-सेंट्रिक वारफेयर के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह मैन-यून्मैन्ड टीमिंग (MUM-T) के तहत काम कर सकता है, जिसमें मानव संचालित लड़ाकू विमानों के साथ मिलकर मिशन को अंजाम दिया जाता है। इसके अतिरिक्त, यह UAV डीप पेनेट्रेशन (Deep Penetration) मिशन में भी कारगर है, जिससे यह दुश्मन के इलाके में जाकर सटीक हमले कर सकता है।

Archer-NG UAV: कितनी है इसकी रेंज

अर्चर एनजी की उड़ान चौंकाने वाली है। इसकी रेंज 1,000 किलोमीटर से अधिक हो सकती है, बशर्ते सेटेलाइट कम्युनिकेशन (Satcom) कवरेज उपलब्ध हो। इसकी ऑपरेशनल ऊंचाई 30,000 फीट तक है और यह 34 घंटे तक लगातार उड़ान भरने में सक्षम है। सामान्यत: यह 24 घंटे तक इलेक्ट्रो-ऑप्टिक पेलोड के साथ उड़ान भरता है।

अर्चर एनजी अपने डेवलपमेंट के एडवांस फेज में है। इसके टैक्सी ट्रायल (जमीन पर दौड़ने के ट्रायल) पहले ही शुरू हो चुके हैं, और पहला फ्लाइट ट्रायल जल्द ही अगले महीने तक शुरू होने की उम्मीद है। वर्तमान में, सर्टिफिकेशन की मंजरी मिलने का इंतजार किया जा रहा है। वहीं, इसका पूर्ण रूप से हथियार ढोने वाले वर्जन अगले तीन सालों में बन कर तैयार हो जाएगा।

तपस या RUSTOM-II से ज्यादा एडवांस

अर्चर एनजी को भारत के मौजूदा UAVs, जैसे कि तपस या RUSTOM-II से ज्यादा एडवांस माना जा रहा है, क्योंकि इसमें हथियार ले जाने की क्षमता है। जबकि दुनियाभर में मशहूर Hermes 900 UAV की टक्कर का यूएवी है। हालांकि, MQ-9 Reaper जैसे UAVs High Altitude Long Endurance (HALE) श्रेणी में आते हैं, जो अर्चर एनजी से अलग हैं।

अर्चर एनजी में डीजल इंजन का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि अन्य हाई कैटेगरी के UAVs में गैस टर्बाइन इंजन लगाए जाते हैं। इस वजह से यह एक सस्ता विकल्प है।

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भारतीय सेना और वायुसेना अर्चर एनजी के डेवलपमेंट में सक्रिय भागीदारी रही है। वे लगातार जरूरतों के अनुसार सुझाव दे रही हैं और ट्रायल्स में भी हिस्सा ले रही हैं। सेना के सूत्रों को कहना है कि यह ड्रोन रियल-टाइम सर्विलांस, लॉजिस्टिक सपोर्ट और सटीक हमलों के लिए बेहद कारगर है।

मिग-21 और जगुआर जैसे पुराने लड़ाकू विमानों के रिटायर होने के बाद सेना को ऐसे प्लेटफार्मों की जरूरत है, जिन्हें कम लागत में तेजी से डिप्लॉय किया जा सके। आर्चर-NG इन सभी जरूरतों  को पूरा करता है।

आर्चर-NG जैसे ताकतवर यूएवी बनाने के बाद भारत अब उन देशों की सूची में शामिल हो गया है, जो अपने आर्म्ड ड्रोन का प्रोजक्शन और डिप्लॉयमेंट खुद कर सकते हैं।

MANPADS: भारतीय सेना को यूके से मिलेगा नया एयर डिफेंस सिस्टम, जानें STARStreak मिसाइल के बारे में, जो रूसी Igla-S की लेगी जगह

MANPADS Deal: Indian Army to Get UK’s STARStreak Missiles, Replacing Russian Igla-S Systems

MANPADS: एरो इंडिया 2025 में जहां दुनिया की कंपनियां अपने मिलिट्री प्रोडक्ट्स को पेश कर रही हैं, तो दूसरी तरफ वे नए साझेदार भी तलाश रही हैं। भारतीय सेना ने भी एक नया पार्टनर तलाशा है। ब्रिटेन ने भारतीय सेना को मैन पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम्स (MANPADS) की सप्लाई के लिए एक बड़ी डिफेंस डील की है। इसके साथ ही, यूके ने भारत के साथ रक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए डिफेंस पार्टनरशिप–इंडिया (DP-I) की भी औपचारिक शुरुआत की है।

MANPADS Deal: Indian Army to Get UK’s STARStreak Missiles, Replacing Russian Igla-S Systems

इस साल के अंत तक मिलेगी MANPADS की पहली खेप

ब्रिटेन के रक्षा मंत्री लॉर्ड वर्नोन कोकर ने यूके-इंडिया डिफेंस पार्टनरशिप पवेलियन का उद्घाटन करते हुए इस साझेदारी का एलान किया। इस मौके पर उन्होंने बताया कि यूके के रक्षा मंत्रालय में एक विशेष प्रोग्राम ऑफिस स्थापित किया गया है, जो भारत के साथ रक्षा सहयोग को और मजबूत बनाने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम के तौर पर काम करेगा।

ब्रिटेन और भारत के बीच हुए इस समझौते के तहत थेल्स यूके (Thales UK) और भारत डायनामिक्स लिमिटेड (BDL) के बीच नेक्स्ट जनरेशन हथियारों पर सहयोग बढ़ाने का फैसला लिया गया है। इसके तहत लेजर बीम राइडिंग MANPADS (LBRMs) की सप्लाई के लिए एक समझौते हुआ है। इस सौदे के तहत हाई वेलोसिटी मिसाइल्स (StarStreak) और लॉन्चर्स की पहली खेप इस साल के अंत तक भारत को सौंप दी जाएगी।

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गौरतलब है कि BDL पहले ही भारतीय सेना से आपातकालीन खरीद (इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट) के तहत ऐसे ही एक कॉन्ट्रैक्ट पर दस्तखत कर चुकी है। डिफेंस सोर्सेज का कहना कि इस सौदे का मुख्य उद्देश्य भारतीय सेना के मौजूदा पुराने रूसी Igla-S सिस्टम्स को बदलना है।

इस प्रारंभिक LBRM कॉन्ट्रैक्ट पर दस्तखत के बाद, थेल्स यूके और BDL भविष्य में लाइटवेट मल्टीरोल मिसाइल्स (LMM) के प्रोडक्शन में भी सहयोग करेंगे।

हैदराबाद में ASRAAM असेंबली और टेस्ट फैसिलिटी

थेल्स यूके के साथ इस सौदे के अलावा, BDL ब्रिटेन की MBDA यूके के साथ भी काम कर रहा है। हैदराबाद में एडवांस्ड शॉर्ट-रेंज एयर टू एयर मिसाइल (ASRAAM) की असेंबली और टेस्ट फैसिलिटी बनाने की प्रक्रिया चल रही है।

नई पीढ़ी के नेवी प्लेटफॉर्म्स के लिए सहयोग

ब्रिटेन और भारत ने भारत के अगली पीढ़ी के लैंडिंग प्लेटफॉर्म डॉक (LPD) बेड़े के लिए इंटीग्रेटेड फुल इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन (IFEP) सिस्टम के डिजाइन और डेवलपमेंट के लिए एक स्टेटमेंट ऑफ इंटेंट पर भी दस्तखत किए हैं।

इसके अगले चरण के तहत, GE वर्नोवा और BHEL भारत की पहली मैरीटाइम लैंड बेस्ड टेस्टिंग फैसिलिटी का डेवलपमेंट करेंगे। यह कदम भारतीय नौसेना के भविष्य के प्लेटफॉर्म्स के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

क्या हैं STARStreak मिसाइल्स?

स्टारस्ट्रीक (STARStreak) हाई वेलोसिटी मिसाइल (HVM) एक लेटेस्ट एडवांस्ड एयर डिफेंस सिस्टम है, जिसे पारंपरिक हवाई खतरों जैसे फिक्स्ड-विंग फाइटर जेट्स और हेलिकॉप्टर के खिलाफ नजदीकी सुरक्षा यानी क्लोज एयर डिफेंस देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इस मिसाइल को थेल्स कंपनी ने बनाया है।

STARStreak मिसाइल की खूबियां

  • इस मिसाइल से पारंपरिक हवाई खतरों जैसे लड़ाकू विमानों और हेलिकॉप्टरों के खिलाफ नजदीकी सुरक्षा मिलती है।
  • 7 किलोमीटर से अधिक की रेंज के साथ यह छोटे और तेजी से उड़ने वाले टारगेट्स के खिलाफ भी प्रभावी है।
  • यह मिसाइल कम समय में तेजी से निशाना बनाने में सक्षम है, जिससे अचानक सामने आए हवाई खतरों से निपटना आसान होता है।
  • इसका लेजर बीम राइडिंग गाइडेंस सिस्टम छोटे लक्ष्यों पर भी सटीकता से निशाना साधता है, जिन्हें पारंपरिक मिसाइलों से भेदना कठिन होता है।
  • फ्लाइट के दौरान मिसाइल में ऑटोमैटिक कट-ऑफ की सुविधा है, जिससे फ्रैट्रिसाइड (गलती से अपने ही सैनिकों को नुकसान) से बचा जा सकता है।
  • इस मिसाइल की कोई सर्विसिंग आवश्यकता नहीं होती, जिससे मेंटेनेंस लागत में कमी आती है।
  • इसका वजन केवल 14 किलोग्राम, जिससे इसे आसानी से तैनात किया जा सकता है।
  • मैक 3+ की हाई स्पीड, जिससे यह तेज़ी से लक्ष्य तक पहुंचती है।
  • इसकी रेंज 7000 मीटर से ज्यादा है।

कैसे काम करती है स्टारस्ट्रीक मिसाइल?

स्टारस्ट्रीक मिसाइल के अंदर तीन डार्ट्स (तीरनुमा हिटाइल्स) होते हैं जो टारगेट को तुरंत निशाना बना सकते हैं। जैसे ही कोई एरियल टारगेट रडार पर दिखाई देता है, ऑपरेटर तुरंत ट्रिगर दबाता है और मिसाइल लॉन्च हो जाती है। इसका रॉकेट मोटर मिसाइल को मैक 3 की से भी ज्यादा रफ्तार देता है।

जब मिसाइल लक्ष्य के पास पहुंचती है, तो यह तीन डार्ट्स छोड़ती है जो तेजी से टारगेट में घुसते हैं और विस्फोट करते हैं। ये डार्ट्स काइनेटिक एनर्जी और एक्सप्लोसिव एनर्जी के जरिए जबरदस्त नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे भारी ऑर्मर्ड और लाइट एरियल टार्गेट्स भी इसके सामने ठहर नहीं पाते।