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MH-60R 2nd Squadron: नौसेना के लिए “आंख, कान और पहले शिकारी” का काम करेगा रोमियो, INAS 335 Ospreys हुई कमीशन

MH-60R हेलीकॉप्टर भारतीय नौसेना में लंबे समय से इस्तेमाल हो रहे पुराने सी किंग हेलीकॉप्टरों की जगह ले रहे हैं। सी किंग हेलीकॉप्टर कई दशकों तक नौसेना की रीढ़ रहे, लेकिन उम्र और तकनीक के कारण उनकी भूमिका सीमित होती जा रही थी...

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📍नई दिल्ली/गोवा | 17 Dec, 2025, 1:15 PM

MH-60R 2nd Squadron: भारतीय नौसेना के लिए आज का दिन बेहद खास रहा। गोवा स्थित आईएनएस हंसा में भारतीय नौसेना ने अपने सबसे आधुनिक समुद्री युद्धक हेलीकॉप्टर MH-60R “रोमियो” की दूसरी स्क्वाड्रन को औपचारिक रूप से कमीशन कर दिया। इस स्क्वाड्रन का नाम आईएनएएस 335 “ऑस्प्रेज” रखा गया है। इसके साथ ही नौसेना की समुद्री निगरानी, पनडुब्बी रोधी युद्ध और सतह पर मौजूद खतरों से निपटने की क्षमता को बड़ी मजबूती मिली है।

इस कमीशनिंग समारोह में नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी विशेष रूप से मौजूद रहे। समारोह आईएनएस हंसा के एयर स्टेशन पर हुआ, जिसे पश्चिमी समुद्री तट पर नौसेना का प्रमुख एयर बेस माना जाता है। आज की कमीशनिंग को नौसेना के आधुनिकीकरण की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

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आईएनएएस 335 “ऑस्प्रेज” भारतीय नौसेना की दूसरी MH-60R स्क्वाड्रन है। इससे पहले मार्च 2024 में पहली स्क्वाड्रन आईएनएएस 334 “सीहॉक्स” को कोच्चि स्थित आईएनएस गरुड़ में कमीशन किया गया था। पहली स्क्वाड्रन उस समय बनी थी, जब शुरुआती MH-60R हेलीकॉप्टर भारत पहुंचे थे। अब दूसरी स्क्वाड्रन के पूरी तरह कमीशन होने से नौसेना की ऑपरेशनल ताकत में बड़ा इजाफा हुआ है।

MH-60R 2nd Squadron

आईएनएस हंसा इंडियन नेवल एविएशन का मुख्य बेस

आईएनएस हंसा में आईएनएएस 335 ‘ऑस्प्रेज’ स्क्वाड्रन की कमीशनिंग पर भारतीय नौसेना प्रमुख ने कहा कि आज नौसेना के लिए एक बेहद खुशी और गर्व का अवसर है। आईएनएस हंसा इंडियन नेवल एविएशन का मुख्य बेस है और यहीं से नौसेना की एयर पावर को मजबूती मिलती है।

उन्होंने कहा कि पश्चिमी समुद्री तट पर एमएच-60आर (रोमियो) हेलिकॉप्टर की पहली पूरी तरह ऑपरेशनल स्क्वाड्रन का शामिल होना नौसेना के लिए एक मील का पत्थर है। यह कदम नौसेना की मल्टी-रोल और समुद्री युद्ध क्षमता को नई ऊंचाई देगा। नौसेना प्रमुख ने कहा कि यह मौका इसलिए भी खास है क्योंकि साल 2025 में इंडियन नेवल एविएशन को मंजूरी मिलने के 75 साल पूरे हो रहे हैं। इसी फैसले के बाद नौसेना को एक मल्टीडायमेन्शनल और ताकतवर समुद्री शक्ति बनाया।

इंडियन नेवल एविएशन की अहम भूमिका

उन्होंने इतिहास का जिक्र करते हुए बताया कि 64 साल पहले 17–18 दिसंबर 1971 की रात ऑपरेशन विजय की शुरुआत हुई थी, जब भारतीय नौसेना के जहाज गोवा को पुर्तगाली शासन से मुक्त कराने के लिए आगे बढ़े थे। उस समय भी इंडियन नेवल एविएशन ने अहम भूमिका निभाई थी और आईएनएस विक्रांत का एयर विंग गोवा के पास तैनात था।

नौसेना प्रमुख ने कहा कि आज का मैरीटाइम एनवॉयरमेंट पहले से कहीं ज्यादा जटिल और चुनौतीपूर्ण हो गया है। बदलती वैश्विक राजनीति, नई तकनीक और समुद्र में बढ़ते खतरों ने हालात को और कठिन बना दिया है। ऐसे समय में समुद्री सुरक्षा और मजबूत निगरानी बेहद जरूरी हो गई है।

उन्होंने प्रधानमंत्री के बयान का हवाला देते हुए कहा कि जब दुनिया के समुद्र अशांत होते हैं, तब दुनिया को एक स्थिर और मजबूत मार्गदर्शक की जरूरत होती है, और भारत उस भूमिका के लिए पूरी तरह तैयार है। रक्षा मंत्री के शब्दों को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक समृद्धि सीधे समुद्री सुरक्षा से जुड़ी हुई है, इसलिए समुद्री रास्तों की सुरक्षा बहुत जरूरी है।

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आईएनएस हंसा में पी-8आई एयरक्राफ्ट की दूसरी स्क्वाड्रन तैनात

नौसेना प्रमुख ने बताया कि भारतीय नौसेना लगातार अपनी क्षमताएं बढ़ा रही है। आईएनएस हंसा में पहले ही पी-8आई एयरक्राफ्ट की दूसरी स्क्वाड्रन तैनात की जा चुकी है। इसके साथ ही एमक्यू-9बी सी गार्डियन ड्रोन शामिल करने की प्रक्रिया भी चल रही है, जिससे समुद्री निगरानी और मजबूत होगी।

MH-60R 2nd Squadron

उन्होंने कहा कि नौसेना ने शिपबोर्न एविएशन पर भी खास ध्यान दिया है। राफेल-एम लड़ाकू विमानों की खरीद से समुद्र से दूर तक मार करने और एयर डिफेंस क्षमता मजबूत होगी। इनके साथ हेलिकॉप्टर और अनमैन्ड सिस्टम से नौसेना की निगरानी और जवाबी कार्रवाई की ताकत भी बढ़ी है।

कई सॉफ्टवेयर भारत में ही बने

एमएच-60आर हेलिकॉप्टर के बारे में उन्होंने कहा कि इसके आधुनिक सेंसर, एडवांस एवियोनिक्स और ताकतवर हथियार इसे एंटी-सबमरीन वारफेयर, समुद्री निगरानी और सर्च एंड रेस्क्यू के लिए बेहद कारगार बनाते हैं। यह हेलिकॉप्टर पहले ही ऑपरेशन सिंदूर, ट्रोपेक्स-25 और ट्राई-सर्विसेज एक्सरसाइज 2025 में अपनी क्षमता साबित कर चुका है।

उन्होंने यह भी बताया कि नौसेना इस हेलिकॉप्टर में स्वदेशी हथियार और सेंसर जोड़ने पर लगातार काम कर रही है। कई अहम सिस्टम, जैसे सॉफ्टवेयर-डिफाइंड रेडियो, डेटा लिंक और डेप्थ चार्ज पूरी तरह भारत में बने हैं।

नौसेना प्रमुख ने आईएनएएस-335 की टीम की सराहना करते हुए कहा कि ‘ऑस्प्रे’ नाम तेज नजर, फुर्ती और सटीकता का प्रतीक है। उन्होंने भरोसा जताया कि यह स्क्वाड्रन समुद्री सुरक्षा को किसी भी चुनौती का मुंहतोड़ जवाब देगी।

MH-60R 2nd Squadron

एमएच-60आर है ऑल-वेदर हेलीकॉप्टर

आईएनएएस 335 के सीनियर पायलट लेफ्टिनेंट कमांडर प्रखर भार्गव ने कहा, “एमएच-60आर भारतीय नौसेना के पास मौजूद सबसे आधुनिक हेलीकॉप्टर है। यह एक ऑल-वेदर हेलीकॉप्टर है, जो दिन और रात, दोनों समय उड़ान भर सकता है। उन्होंने बताया कि इस हेलीकॉप्टर की बेहतर स्थिरता, लंबी उड़ान क्षमता और इसमें लगे आधुनिक हथियार और सेंसर इसे हर तरह के ऑपरेशनल माहौल के लिए बेहद असरदार बनाते हैं। चाहे एंटी-सबमरीन ऑपरेशन, समुद्री निगरानी या फिर सर्च एंड रेस्क्यू मिशन हों, एमएच-60आर हर भूमिका में पूरी तरह सक्षम है।”

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लेफ्टिनेंट कमांडर प्रखर भार्गव के अनुसार, इस हेलीकॉप्टर की बहु-उपयोगी क्षमता और आधुनिक तकनीक भारतीय नौसेना को सबसे कठिन परिस्थितियों में भी किसी भी तरह का मिशन सफलतापूर्वक पूरा करने की ताकत देती है।

आईएनएएस 335 है “आंख, कान और पहला शिकारी”

वहीं, गोवा से आईएनएएस 335 के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन धीरेंद्र बिष्ट ने कहा, “आईएनएएस 335 की कमीशनिंग के साथ भारतीय नौसेना की दूसरी एमएच-60आर स्क्वाड्रन औपचारिक रूप से शामिल हो गई है। उन्होंने बताया कि इससे नौसेना की समुद्री निगरानी, स्ट्राइक क्षमता और मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर ताकत में बड़ा इजाफा हुआ है। यह नौसेना के बेड़े के ऑपरेशंस और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक अहम उपलब्धि है।”

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कैप्टन बिष्ट के अनुसार, यह स्क्वाड्रन नौसेना के बेड़े के लिए “आंख, कान और पहले शिकारी” की तरह काम करेगी। यह समुद्र में होने वाली गतिविधियों की रियल-टाइम जानकारी देगी, पानी के नीचे मौजूद खतरों से निपटने में मदद करेगी और पूरे तटीय समुद्री क्षेत्र में तेजी से प्रतिक्रिया देने की क्षमता प्रदान करेगी।

MH-60R 2nd Squadron

बता दें कि नौसेना प्रमुख ने नेवी डे की प्रेस कॉन्फ्रेंस में ही संकेत दे दिया था कि दिसंबर 2025 में गोवा में फुल स्क्वाड्रन कमीशन की जाएगी। नौसेना की योजना कुल तीन MH-60R स्क्वाड्रन बनाने की है, जिनमें से दो पश्चिमी बेड़े और एक पूर्वी बेड़े के लिए तैनात की जाएंगी। आज कमीशन हुई स्क्वाड्रन पश्चिमी समुद्री क्षेत्र में नौसेना की क्षमताओं को और मजबूत करेगी।

सबसे आधुनिक मैरीटाइम कॉम्बैट हेलीकॉप्टर

MH-60R हेलीकॉप्टरों को दुनिया के सबसे आधुनिक मैरीटाइम कॉम्बैट हेलीकॉप्टर में गिना जाता है। इन्हें खास तौर पर एंटी-सबमरीन वॉरफेयर, यानी पनडुब्बी रोधी अभियानों के लिए डिजाइन किया गया है। इसके साथ ही ये हेलीकॉप्टर सतह पर मौजूद दुश्मन जहाजों की पहचान और उन पर कार्रवाई करने में भी सक्षम हैं। यह एक ऑल-वेदर, मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर है, जो हर मौसम और हर हालात में ऑपरेशन कर सकता है।

MH-60R हेलीकॉप्टरों की खासियत इनके अत्याधुनिक सेंसर और सिस्टम हैं। इनमें डिपिंग सोनार, मल्टी-मोड मैरीटाइम रडार और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सिस्टम लगे होते हैं। डिपिंग सोनार की मदद से यह हेलीकॉप्टर समुद्र की गहराई में छिपी पनडुब्बियों का सटीक पता लगा सकता है। इसके साथ ही सोनाबॉय सिस्टम के जरिए बड़े समुद्री इलाके में अंडरवॉटर निगरानी की जा सकती है।

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हथियारों की बात करें तो MH-60R हेलीकॉप्टर मार्क-54 लाइटवेट टॉरपीडो और हेलफायर एयर-टू-सर्फेस मिसाइल से लैस हैं। ये हथियार इन्हें दुश्मन पनडुब्बियों और जहाजों के खिलाफ बेहद प्रभावी बनाते हैं। जरूरत पड़ने पर यह हेलीकॉप्टर निगरानी से सीधे हमले की भूमिका में आ सकता है।

ये हेलीकॉप्टर भारतीय नौसेना के एयरक्राफ्ट कैरियर्स, डिस्ट्रॉयर्स और फ्रिगेट्स से ऑपरेट करते हैं। इसका मतलब है कि एक ही स्क्वाड्रन के हेलीकॉप्टर अलग-अलग युद्धपोतों पर तैनात रह सकते हैं। इससे समुद्र के बड़े इलाके में निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया की क्षमता कई गुना बढ़ जाती है।

भारतीय नौसेना ने साल 2020 में अमेरिका के साथ 24 MH-60R हेलीकॉप्टर खरीदने का समझौता किया था। इस सौदे की कुल कीमत करीब 2.4 अरब डॉलर थी। अब तक इनमें से 15 हेलीकॉप्टर भारत को मिल चुके हैं। बाकी हेलीकॉप्टरों की डिलीवरी चरणबद्ध तरीके से हो रही है और सभी की आपूर्ति 2027 तक पूरी होने की उम्मीद है। कुछ हेलीकॉप्टर अभी अमेरिका में हैं, जहां भारतीय पायलट और तकनीकी कर्मियों को ट्रेनिंग दी जा रही है।

आज कमीशन हुई स्क्वाड्रन की तैनाती आईएनएस हंसा, गोवा से की गई है। यह बेस अरब सागर और पश्चिमी समुद्री क्षेत्र की निगरानी के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम है। हाल के वर्षों में इस क्षेत्र में विदेशी नौसैनिक गतिविधियों में बढ़ोतरी देखी गई है। ऐसे में MH-60R जैसे आधुनिक हेलीकॉप्टर नौसेना को हर गतिविधि पर नजर रखने में मदद करेंगे।

MH-60R हेलीकॉप्टर भारतीय नौसेना में लंबे समय से इस्तेमाल हो रहे पुराने सी किंग हेलीकॉप्टरों की जगह ले रहे हैं। सी किंग हेलीकॉप्टर कई दशकों तक नौसेना की रीढ़ रहे, लेकिन उम्र और तकनीक के कारण उनकी भूमिका सीमित होती जा रही थी। रोमियो हेलीकॉप्टरों के आने से पनडुब्बी रोधी क्षमता को नई मजबूती मिली है।

मेंटेनेंस और सपोर्ट के मोर्चे पर भी नौसेना ने तैयारी की है। भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में MH-60R हेलीकॉप्टरों के लिए करीब 7,995 करोड़ रुपये का फॉलो-ऑन सपोर्ट समझौता हुआ है। इसके तहत अगले पांच साल तक मेंटेनेंस, रिपेयर और स्पेयर सपोर्ट सुनिश्चित किया जाएगा। भारत में ही इंटरमीडिएट लेवल मेंटेनेंस फैसिलिटी स्थापित की जा रही है, जिससे हेलीकॉप्टरों की उपलब्धता और ऑपरेशनल रेडीनेस बनी रहेगी।

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