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INS Tamal Commissioned: भारतीय नौसेना को मिला रूस में बना सबसे आधुनिक स्टील्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट, ब्रह्मोस और देसी हथियारों से है लैस

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📍कलिनिनग्राद, रूस | 1 Jul, 2025, 1:20 PM

INS Tamal Commissioned: 1 जुलाई 2025 को भारतीय नौसेना ने अपनी सबसे आधुनिक स्टील्थ मल्टी-रोल फ्रिगेट, INS तमाल, को रूस के कालिनिनग्राद में कमीशन किया। यह समारोह दोपहर 2:00 बजे से 4:00 बजे तक भारतीय समय के अनुसार आयोजित हुआ। समारोह की अध्यक्षता वाइस एडमिरल संजय जे. सिंह, फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, वेस्टर्न नेवल कमांड ने की, जिसमें भारत और रूस के कई वरिष्ठ सरकारी और रक्षा अधिकारी शामिल थे। INS तमाल (INS Tamal), क्रिवाक क्लास (Krivak Class) फ्रिगेट्स की श्रृंखला में आठवां जहाज है, जिसे पिछले दो दशकों में रूस से शामिल किया गया है। यह तुशील क्लास (Tushil Class) का दूसरा युद्धपोत है, जो पहले के तलवार और तैग क्लास युद्धपोतों से कहीं ज्यादा आधुनिक और घातक है। इस पूरी श्रृंखला में कुल 10 ऐसे युद्धपोत होंगे, जिनमें कई तकनीकी समानताएं होंगी – जैसे कि हथियार प्रणाली, सेंसर्स और संचार उपकरण – जिससे नौसेना की संचालन क्षमता और भी मजबूत होगी।

यह 2016 में भारत-रूस अंतर-सरकारी समझौते (IGA) के तहत निर्मित चार फ्रिगेट्स में से एक है, जिसमें दो जहाज रूस से आयात किए गए और दो गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) में बनाए जा रहे हैं। INS तमाल हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में भारतीय नौसेना की स्ट्रैटेजिक और ऑपरेशन कैपेबिलिटी को मजबूत करेगा। इसे खासतौर पर पाकिस्तानी समुद्री सीमा और कराची पोर्ट की निगरानी के लिए तैनात किया जा सकता है।

INS Tamal Commissioned: रूस में बना है INS तमाल

आईएनएस तमाल का निर्माण रूस के यांतार शिपयार्ड (Yantar Shipyard), कालिनिनग्राद में हुआ है। इसके निर्माण की देखरेख भारतीय नौसेना की एक विशेषज्ञ टीम ने की, जो मास्को स्थित भारतीय दूतावास के तहत तैनात वॉरशिप ओवरसाइट टीम (Warship Overseeing Team) का हिस्सा थी। भारत सरकार के “आत्मनिर्भर भारत” और “मेक इन इंडिया” मिशन के तहत यह अंतिम युद्धपोत है, जिसे भारत ने किसी विदेशी स्रोत से हासिल किया है। यह खास बात है कि INS Tamal में लगभग 26 फीसदी स्वदेशी तकनीक का उपयोग हुआ है।

इस फ्रिगेट में लंबी दूरी तक मार करने वाली ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल प्रणाली लगी है, जो समुद्र और ज़मीन दोनों लक्ष्यों को भेद सकती है। इसके अलावा, इसमें वर्टिकल लॉन्च Shtil-1 सरफेस-टू-एयर मिसाइल (Surface-to-Air Missile), उन्नत 100 मिमी तोप, आधुनिक EO/IR सिस्टम, 30 मिमी क्लोज-इन वेपन सिस्टम (CIWS), टॉरपीडो ट्यूब और रॉकेट लॉन्चर (जैसे RBU-6000), एंटी-सबमरीन रॉकेट्स और कई अत्याधुनिक रडार व नियंत्रण प्रणाली लगाई गई हैं।

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INS Tamal की एक और बड़ी विशेषता यह है कि इसमें एयर अर्ली वॉर्निंग और मल्टी-रोल हेलिकॉप्टरों को ऑपरेट करने की क्षमता है। इसमें एक विशेष “क्विक लॉन्च सिस्टम” भी है, जो हेलीकॉप्टर को आपात स्थिति में 5 मिनट से भी कम समय में उड़ान भरने की सुविधा देता है। इसके अतिरिक्त यह जहाज नेटवर्क सेंट्रिक वॉरफेयर (Network Centric Warfare) प्रणाली और एडवंस इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम से भी लैस है। इसकी गति 30 नॉट (लगभग 55 किमी/घंटा) से अधिक है, और यह लंबे समय तक समुद्र में टिक सकता है।

चालक दल में 250 से अधिक नौसैनिक

INS तमाल के चालक दल में 250 से अधिक नौसैनिक हैं, जिन्होंने सेंट पीटर्सबर्ग और कालिनिनग्राद की कठोर सर्दियों में कठोर प्रशिक्षण लिया। पिछले तीन महीनों में इस युद्धपोत ने कई समुद्री परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए हैं, जिनमें हथियारों, रडार और अन्य प्रणालियों की टेस्टिंग शामिल थी।

इस जहाज का निर्माण भारतीय विशेषज्ञों की एक टीम द्वारा बारीकी से देखा गया, जो कालिनिनग्राद में वॉरशिप ओवरसीइंग टीम के तहत तैनात थी। यह टीम मॉस्को में भारतीय दूतावास के तहत काम कर रही थी। नौसेना मुख्यालय में, इस परियोजना को डायरेक्टरेट ऑफ शिप प्रोडक्शन के तहत कंट्रोलर ऑफ वॉरशिप प्रोडक्शन एंड एक्विजिशन ने ऑपरेट किया।

INS Tamal Commissioned: India's Most Advanced Stealth Frigate Joins Indian Navy

इंद्र की तलवार के नाम पर रखा नाम तमाल

INS तमाल का नाम भारतीय पौराणिक कथाओं में इंद्र, देवताओं के राजा, द्वारा युद्ध में इस्तेमाल की गई पौराणिक तलवार से प्रेरित है। इसका शुभंकर (Mascot) भारतीय पौराणिक चरित्र जाम्बवन्त (जाम्बवंत) और रूस के राष्ट्रीय पशु यूरेशियन ब्राउन बीयर के मेल से तैयार किया गया है। इस कारण जहाज के चालक दल को गर्व से ‘द ग्रेट बेयर’ कहा जाता है। तमाल भारत-रूस सहयोग और दोस्ती का प्रतीक है, जो समय की कसौटी पर खरा उतरा है।

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INS Tamal का आदर्श वाक्य है – “सर्वदा सर्वत्र विजय” (Sarvada Sarvatra Vijaya), जो भारतीय नौसेना की युद्धक्षमता और हर मिशन में जीत सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह भारतीय नौसेना के मिशन – ‘कॉम्बैट रेडी, क्रेडिबल, कोहेसिव एंड फ्यूचर रेडी फोर्स सेफगार्डिंग नेशनल मैरीटाइम इंटरेस्ट्स – एनटाइम, एनव्हेयर’ (Combat Ready, Credible, Cohesive and Future Ready Force Safeguarding National Maritime Interests – Anytime, Anywhere) का भी प्रतीक है।

INS Tamal के कमीशन होते ही यह भारतीय नौसेना के ‘स्वॉर्ड आर्म’ – पश्चिमी बेड़े (Western Fleet) – में शामिल हो जाएगा। यह न केवल भारतीय नौसेना की बढ़ती क्षमताओं का प्रतीक होगा, बल्कि भारत-रूस की दशकों पुरानी साझेदारी की मिसाल भी पेश करेगा।

भारत में बने 33 से अधिक सिस्टम्स का इस्तेमाल

125 मीटर लंबा और 3900 टन वजनी INS तमाल एक घातक युद्धपोत है। Tamal के डिज़ाइन को रूस के Severnoye Design Bureau और भारतीय नौसेना के विशेषज्ञों ने मिलकर तैयार किया है। इसमें भारत में बने 33 से अधिक सिस्टम्स का इस्तेमाल हो रहा है। इसमें ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल, HUMSA NG Mk II सोनार सिस्टम, लेटेस्ट सरफेस सर्विलांस रडार, अत्याधुनिक एंटी-सबमरीन वेपन कॉम्प्लेक्स, नेविगेशन और डाटा लिंक सिस्टम जैसी खूबियां हैं। इस निर्माण में शामिल प्रमुख भारतीय कंपनियों में ब्रह्मोस एयरोस्पेस, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL), केल्ट्रॉन, नोवा इंटीग्रेटेड सिस्टम्स (TATA), एल्कोम मरीन, जॉनसन कंट्रोल्स इंडिया जैसी कंपनियां शामिल थीं।

गुप्त स्टील्थ डिजाइन की खूबी

INS तमाल की स्टील्थ (गोपनीय) तकनीक केवल इसके एंटी रडार स्ट्रक्चर तक सीमित नहीं है। इस जहाज में एक खास “सिग्नेचर प्रबंधन प्रणाली” (Signature Management System) लगाई गई है, जो इसके इंफ्रारेड (गर्मी से निकलने वाले) और एकॉस्टिक (ध्वनि से संबंधित) सिग्नेचर को बहुत कम कर देती है। इसका मतलब है कि यह जहाज दुश्मन के थर्मल सेंसर और सोनार (समुद्र में ध्वनि तरंगों से खोज करने वाली तकनीक) की पकड़ में नहीं आता।

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इस एडवांस सिस्टम के तकनीकी पहलुओं को गोपनीय रखा गया है, लेकिन इतना साफ है कि यह तकनीक INS तमाल को समुद्र में लगभग अदृश्य बना देती है। इससे यह दुश्मन की नज़रों से बचकर, चुपचाप और प्रभावी तरीके से अपना मिशन पूरा कर सकता है।

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  • हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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