📍नई दिल्ली | 19 Jan, 2026, 9:17 PM
INS Sudarshini Lokayan 26: भारतीय नौसेना का सेल ट्रेनिंग शिप आईएनएस सुदर्शिनी एक बार फिर भारत की समुद्री परंपरा और नौसैनिक कौशल को दुनिया के सामने पेश करने जा रहा है। 20 जनवरी को आईएनएस सुदर्शिनी ऐतिहासिक ट्रांसओसैनिक सेल एक्सपीडिशन “लोकायन 26” पर रवाना होगी। यह यात्रा पूरे 10 महीने चलेगी, जिसमें जहाज 22,000 नॉटिकल माइल से अधिक की दूरी तय करते हुए 13 देशों के 18 विदेशी बंदरगाहों पर पहुंचेगा।
यह अभियान केवल एक प्रशिक्षण यात्रा नहीं है, बल्कि यह भारत की समुद्री विरासत, वसुधैव कुटुम्बकम की भावना और वैश्विक समुद्री सहयोग का एक सशक्त प्रतीक माना जा रहा है। लोकायन 26 अभियान में शामिल हो कर भारतीय नौसेना समुद्रों के जरिए ब्रिज ऑफ कोऑपरेशन बना रही है और आने वाली पीढ़ियों के लिए समुद्री परंपरा को जीवित रख रही है। (INS Sudarshini Lokayan 26)
INS Sudarshini Lokayan 26: क्या है लोकायन 26 अभियान
लोकायन 26 भारतीय नौसेना की एक प्रमुख सेल ट्रेनिंग डिप्लॉयमेंट है, जिसका मकसद युवा नौसैनिकों को पारंपरिक सेलिंग, लंबी दूरी की समुद्री नेविगेशन और ओपन ओशन ऑपरेशंस का वास्तविक अनुभव देना है। इस अभियान के दौरान आईएनएस सुदर्शिनी हिंद महासागर, अटलांटिक महासागर और अन्य समुद्री मार्गों से होते हुए कई महाद्वीपों तक पहुंचेगी।
नौसेना के अनुसार, यह यात्रा भारत की उस परंपरा को आगे बढ़ाती है, जहां सदियों पहले भारतीय नाविक समुद्र के रास्ते व्यापार, संस्कृति और ज्ञान का आदान-प्रदान करते थे। (INS Sudarshini Lokayan 26)
अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भारत का प्रतिनिधित्व
इस यात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण आईएनएस सुदर्शिनी की दो प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय टॉल-शिप इवेंट्स में भागीदारी होगी।
पहला आयोजन है एस्काल आ सेत (Escale à Sète), जो फ्रांस के सेत बंदरगाह पर आयोजित किया जाता है। यह दुनिया के सबसे प्रसिद्ध सेलिंग और टॉल-शिप फेस्टिवल्स में से एक माना जाता है। यहां आईएनएस सुदर्शिनी भारत की पारंपरिक नौकायन संस्कृति और सेलिंग विरासत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करेगी।
दूसरा बड़ा आयोजन है सेल 250 (SAIL 250), जो अमेरिका के न्यूयॉर्क में आयोजित होगा। इस कार्यक्रम में दुनिया भर से ऐतिहासिक और आधुनिक टॉल शिप्स हिस्सा लेती हैं। इस दौरान आईएनएस सुदर्शिनी भारतीय नौसेना का प्रतिनिधित्व करते हुए भारत की समुद्री ताकत और अनुशासन को दर्शाएगी। (INS Sudarshini Lokayan 26)
200 से अधिक प्रशिक्षुओं को मिलेगा समुद्र का असली अनुभव
लोकायन 26 अभियान के दौरान भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल के 200 से अधिक प्रशिक्षु इस जहाज पर सवार रहेंगे। ये सभी प्रशिक्षु इस लंबी यात्रा के दौरान गहन सेल ट्रेनिंग से गुजरेंगे।
उन्हें पारंपरिक सीमैनशिप, ओशन नेविगेशन, मौसम की समझ, हवा और लहरों के अनुसार जहाज संचालन, और खुले समुद्र में जीवन की बारीकियां सिखाई जाएंगी। नौसेना के अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की लंबी समुद्री यात्राएं युवा नाविकों के आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और टीमवर्क को मजबूत करती हैं। (INS Sudarshini Lokayan 26)
विदेशी नौसेनाओं के साथ प्रशिक्षण और संवाद
आईएनएस सुदर्शिनी की यह यात्रा केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है। जिन देशों के बंदरगाहों पर यह जहाज पहुंचेगा, वहां संबंधित देशों की नौसेनाओं के साथ ट्रेनिंग इंटरैक्शन, प्रोफेशनल एक्सचेंज और मैरीटाइम पार्टनरशिप एक्टिविटीज आयोजित की जाएंगी।
इन कार्यक्रमों के जरिए भारतीय नौसेना समुद्री सुरक्षा, नेविगेशन और संयुक्त संचालन जैसे विषयों पर अनुभव साझा करेगी। यह पहल भारत की महा सागर (म्यूचुअल एंड होलिस्टिक एडवांसमेंट फॉर सिक्योरिटी एंड ग्रोथ अक्रॉस रीजन) की सोच को आगे बढ़ाती है। (INS Sudarshini Lokayan 26)
सांस्कृतिक कूटनीति का मजबूत संदेश
लोकायन 26 को एक कल्चरल डिप्लोमेसी मिशन के तौर पर भी देखा जा रहा है। अलग-अलग देशों के बंदरगाहों पर आईएनएस सुदर्शिनी भारत की संस्कृति, अनुशासन और मित्रता का संदेश लेकर पहुंचेगी।
जहां भी जहाज रुकेगा, वहां स्थानीय लोगों, नौसेना अधिकारियों और युवाओं को जहाज देखने और भारतीय नौसेना की कार्यप्रणाली समझने का अवसर मिलेगा। इससे देशों के बीच विश्वास और सहयोग को और मजबूती मिलेगी। (INS Sudarshini Lokayan 26)
आईएनएस सुदर्शिनी दूसरा सेल ट्रेनिंग शिप
आईएनएस सुदर्शिनी भारतीय नौसेना का दूसरा सेल ट्रेनिंग शिप है। अब तक यह जहाज 1,40,000 नॉटिकल माइल से अधिक की दूरी तय कर चुका है। यह जहाज पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय अभियानों और प्रशिक्षण यात्राओं का हिस्सा रह चुका है।
नौसेना के अनुसार, लोकायन 26 के जरिए आईएनएस सुदर्शिनी एक बार फिर भारत की समुद्री क्षमता, प्रोफेशनलिज्म और गुडविल को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे अभियान भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी, नेबरहुड फर्स्ट और इंडो-पैसिफिक विजन को मजबूत करते हैं। यह दिखाता है कि भारत केवल सैन्य ताकत के रूप में नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार समुद्री राष्ट्र के रूप में दुनिया से जुड़ना चाहता है। (INS Sudarshini Lokayan 26)

