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India Submarine Plan: भारत को मिलने वाली हैं 9 नई पनडुब्बियां, एक लाख करोड़ से ज्यादा के दो बड़े सौदों को जल्द मिलेगी मंजूरी

दिसंबर 2017 में पहली पनडुब्बी आईएनएस कलवरी नौसेना में शामिल हुई। इसके बाद सितंबर 2019 में खंडेरी, मार्च 2021 में करंज, नवंबर 2021 में वेला, जनवरी 2023 में वागीर और 2024 में छठी और आखिरी पनडुब्बी वागशीर भी नौसेना को मिल गई...

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📍नई दिल्ली | 3 Sep, 2025, 4:03 PM

India Submarine Plan: भारतीय नौसेना आने वाले वर्षों में अपनी पनडुब्बी क्षमता को बड़ा उछाल देने जा रही है। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, नौसेना को जल्द ही 9 नई डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां मिलने वाली हैं। इनमें तीन पनडुब्बियां फ्रांसीसी स्कॉर्पीन क्लास का फॉलोऑन ऑर्डर होंगी और छह पनडुब्बियां प्रोजेक्ट 75 इंडिया (P75-I) के तहत बनाई जाएंगी। इन दोनों प्रोजेक्ट्स पर कीमतों और शर्तों को लेकर बातचीत अंतिम दौर में है।

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अभी इन सौदों पर लागत और शर्तों को लेकर बातचीत चल रही है। जैसे ही कीमत तय होगी, मामला कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) के पास मंजूरी के लिए जाएगा। माना जा रहा है कि यह सौदा भारतीय नौसेना की ताकत को अगले कई दशकों तक समुद्र में रणनीतिक बढ़त देगा।

India Submarine Plan: प्रोजेक्ट पी-75 कैसे शुरू हुआ

भारत का सबमरीन प्रोग्राम काफी पुराना है। साल 1997 में रक्षा मंत्रालय ने 24 नई पनडुब्बियों की योजना बनाई थी। इसी के तहत प्रोजेक्ट 75 की शुरुआत हुई।

भारत ने 2005 में फ्रांस के नेवल ग्रुप के साथ स्कॉर्पीन क्लास पनडुब्बियों के लिए करार किया था। इसके तहत छह पनडुब्बियां बनाने का समझौता हुआ था। इनका निर्माण मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL), मुंबई में किया गया।

दिसंबर 2017 में पहली पनडुब्बी आईएनएस कलवरी नौसेना में शामिल हुई। इसके बाद सितंबर 2019 में खंडेरी, मार्च 2021 में करंज, नवंबर 2021 में वेला, जनवरी 2023 में वागीर और 2024 में छठी और आखिरी पनडुब्बी वागशीर भी नौसेना को मिल गई। इन पनडुब्बियों ने भारतीय नौसेना की पानी के भीतर अटैक कैपेबिलिटी को मजबूत किया।

ये सभी डीजल-इलेक्ट्रिक स्कॉर्पीन क्लास सबमरीन भारतीय नौसेना के लिए गहरे पानी में “साइलेंट किलर” साबित हो रही हैं। अब इन्हीं का फॉलोऑन ऑर्डर देकर भारत तीन और स्कॉर्पीन क्लास सबमरीन लेगा। जिसकी अनुमानित लागत 36,000 करोड़ रुपये है।

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India Submarine Plan: प्रोजेक्ट 75 इंडिया (P75-I)

जहाँ स्कॉर्पीन क्लास मौजूदा जरूरतें पूरी कर रही हैं, वहीं प्रोजेक्ट 75 इंडिया (P75-I) भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इस प्रोजेक्ट के तहत छह अत्याधुनिक स्टेल्थ डीजल-इलेक्ट्रिक सबमरीन बनाई जाएंगी। इन पनडुब्बियों में एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) सिस्टम होगा। AIP तकनीक से पनडुब्बी को सतह पर आए बिना लंबे समय तक पानी के भीतर ऑपरेट करने की क्षमता मिलती है। यह तकनीक भारतीय महासागर जैसे विशाल क्षेत्र में ऑपरेशन के लिए बेहद जरूरी मानी जाती है।

इस प्रोजेक्ट की लागत लगभग 65,000 करोड़ रुपये आंकी गई है। जर्मनी की थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (TKMS) और MDL मिलकर इसका निर्माण करेंगे। यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा “मेक इन इंडिया” रक्षा सहयोग माना जा रहा है।

India Submarine Plan: भारतीय नौसेना की मौजूदा क्षमता

भारत के पास इस समय 17 डीजल-इलेक्ट्रिक सबमरीन और 2 न्यूक्लियर बैलेस्टिक मिसाइल सबमरीन (SSBN) हैं। इसके अलावा, भारत ने हाल ही में दो न्यूक्लियर अटैक सबमरीन (SSN) बनाने की मंजूरी भी दी है।

स्वदेशी SSN प्रोजेक्ट पर भी काम चल रहा है, जिसे 2036-37 तक नौसेना में शामिल किया जा सकता है। इन सबमरीन के शामिल होने के बाद भारत हिंद महासागर क्षेत्र में चीन जैसी बड़ी नौसेनाओं को चुनौती देने में सक्षम होगा।

पुरानी सोवियत कालीन किलो क्लास और जर्मन HDW क्लास पनडुब्बियां अपनी सर्विस लाइफ के अंत तक पहुंच चुकी हैं।

नौसेना को अपनी ताकत बनाए रखने के लिए नई पनडुब्बियों की तत्काल जरूरत है। प्रोजेक्ट 75 और P75-I इसी रणनीति का हिस्सा हैं। भारतीय महासागर में चीन की नौसेना की मौजूदगी लगातार बढ़ रही है। चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (PLAN) लगातार नई परमाणु और परंपरागत पनडुब्बियां बना रही है। ऐसे में भारत के लिए अपनी अंडरवॉटर वॉरफेयर कैपेबिलिटी बढ़ाना जरूरी हो गया है।

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विशेषज्ञ मानते हैं कि इन दोनों प्रोजेक्ट्स से भारतीय नौसेना को दुश्मन की पनडुब्बियों को रोकने और हिंद महासागर क्षेत्र में मजबूत पकड़ बनाए रखने में मदद मिलेगी।

पाकिस्तान की हंगोर पनडुब्बियां और भारत की बढ़त

पाकिस्तान के पास फिलहाल आठ पनडुब्बियां हैं। इसमें से तीन चीन में बनी हंगोर क्लास (युआन क्लास का एक्सपोर्ट वर्जन) हैं। 2015 में पाकिस्तान ने चीन से प्रोजेक्ट S-26 के तहत आठ पनडुब्बियों का सौदा किया था। इनमें से चार चीन में और बाकी चार कराची शिपयार्ड में बन रही हैं।

हालांकि, इन हंगोर क्लास पनडुब्बियों में कई खामियां हैं। इनमें लगा प्रोपल्शन सिस्टम और सेंसर भारतीय स्कॉर्पीन पनडुब्बियों जितने आधुनिक नहीं हैं। साथ ही, जर्मनी के MTU डीजल इंजन पर लगे प्रतिबंध के चलते चीन को मजबूरी में अपना CHD-620 इंजन लगाना पड़ा, जिसकी विश्वसनीयता संदिग्ध है।

पनडुब्बियों की सबसे बड़ी ताकत उनका स्टेल्थ (गुप्त रहने की क्षमता) होती है। लेकिन चीनी पनडुब्बियां अपेक्षाकृत ज्यादा शोर करती हैं, जिससे उन्हें ट्रैक करना आसान हो जाता है। भारतीय नौसेना की एंटी-सबमरीन वॉरफेयर (ASW) तकनीक के सामने ये पनडुब्बियां टिक नहीं पाएंगी।

1971 के युद्ध में भारतीय नौसेना ने पाकिस्तानी पनडुब्बी PNS गाजी को विशाखापत्तनम के पास डुबो दिया था। रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि मौजूदा हंगोर क्लास पनडुब्बियों का भी भविष्य कुछ ऐसा ही हो सकता है।

India Submarine Plan: न्यूक्लियर सबमरीन बनाने में जुटा भारत

डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों के साथ-साथ भारत न्यूक्लियर सबमरीन पर भी काम कर रहा है। सरकार ने दो न्यूक्लियर अटैक सबमरीन (SSN) बनाने को मंजूरी दी है। स्वदेशी SSN पर काम जारी है और अनुमान है कि 2036-37 तक पहली पनडुब्बी नौसेना में शामिल हो जाएगी।

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