📍नई दिल्ली | 12 Jan, 2026, 4:00 AM
India Germany defence cooperation: भारत और जर्मनी के बीच सैन्य और रणनीतिक रिश्ते एक नए दौर में प्रवेश करने जा रहे हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज दो दिन की भारत यात्रा पर हैं और उनके इस दौरे के दौरान पीएम मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय बैठक भी प्रस्तावित है। वहीं उनके इस अहम दौरे के बीच दोनों देशों ने एक बड़ा फैसला लिया है। जल्द ही जर्मनी से एक लायजन ऑफिसर इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर–इंडियन ओशन रीजन (आईएफसी–आईओआर) में तैनात किया जाएगा।
India Germany defence cooperation: 12 और 13 जनवरी को भारत यात्रा पर हैं जर्मन चांसलर
जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज 12 और 13 जनवरी को भारत यात्रा पर हैं। जर्मनी के चांसलर का पदभार संभालने के आठ महीने बाद यह भारत उनकी पहली आधिकारिक यात्रा है। उनके इस दौरे को भारत-जर्मनी संबंधों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। (India Germany defence cooperation)
India Germany defence cooperation: जून 2026 से पहले हो सकती है जॉइनिंग
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, जर्मन संपर्क अधिकारी को आईएफसी-आईओआर में तैनात करने का फैसला ले लिया गया है। यह अधिकारी जून 2026 से पहले भारत में अपनी पोस्टिंग जॉइन कर सकता है। इससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत और जर्मनी के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग और मजबूत होगा।
आईएफसी-आईओआर की स्थापना दिसंबर 2018 में भारतीय नौसेना ने की थी। इसका उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, शिपिंग की निगरानी, समुद्री अपराधों पर नजर और आपसी सूचना साझा करने को मजबूत करना है। आज यह सेंटर एक अंतरराष्ट्रीय मंच बन चुका है, जहां 15 देशों के इंटरनेशनल लायजन ऑफिसर तैनात हैं। इसके अलावा यह 57 मैरीटाइम सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशन और 25 पार्टनर देशों के साथ मिलकर काम करता है। जर्मनी का इस नेटवर्क में शामिल होना भारत के लिए रणनीतिक रूप से एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। (India Germany defence cooperation)
India Germany defence cooperation: सैन्य संबंधों में लगातार बढ़ोतरी
भारत और जर्मनी के बीच सैन्य सहयोग कोई नई बात नहीं है। दोनों देशों के रिश्ते साल 2000 से स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप के स्तर पर हैं। साल 2011 से दोनों देशों के बीच सरकार प्रमुखों के स्तर पर इंटर-गवर्नमेंटल कंसल्टेशन की शुरुआत हुई, जिससे रक्षा, सुरक्षा और इंडस्ट्रियल सहयोग को नई दिशा मिली।
बीते कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच सैन्य संबंधों में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है। ट्रेनिंग में दोनों की साझेदारी बढ़ रही है। समुद्री क्षेत्र में दोनों देशों की नौसेनाएं पैसेज एक्सरसाइज यानी पैसेक्स में हिस्सा ले चुकी हैं। इसके अलावा भारतीय नौसेना पहले से ही जर्मन टेक्नोलॉजी से बनी शिशुमार क्लास डीजल-इलेक्ट्रिक अटैक सबमरीन ऑपरेट कर रही है। ये सबमरीन जर्मनी से टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के तहत भारत में बनाई गई थीं। (India Germany defence cooperation)
तरंग शक्ति में पहली बार भारत आया था यूरोफाइटर
वहीं, अगस्त 2024 में जर्मनी ने पहली बार भारत की जमीन पर किसी सैन्य हवाई अभ्यास में हिस्सा लिया था। जर्मनी के यूरोफाइटर टाइफून फाइटर जेट्स ने भारतीय वायुसेना के पहले बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास तरंग शक्ति 2024 में हिस्सा लिया था। यह भारत-जर्मनी सैन्य रिश्तों के लिहाज से ऐतिहासिक कदम माना गया।
वहीं दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूती तब मिली जब जून 2023 में भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस के बीच नई दिल्ली में चार दिनों तक द्विपक्षीय बैठकें हुईं। इन बैठकों में दोनों देशों ने मौजूदा रक्षा सहयोग की समीक्षा की और रक्षा औद्योगिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की।
नवंबर 2025 में भारत-जर्मनी हाई डिफेंस कमिटी की बैठक नई दिल्ली में हुई, जिसकी सह-अध्यक्षता रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और जर्मन रक्षा मंत्रालय के स्टेट सेक्रेटरी येंस प्लॉटनर ने की। इस बैठक में मिलिट्री टू मिलिट्री रिलेशंस को स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का अहम हिस्सा बनाने पर सहमति बनी। (India Germany defence cooperation)
31 मार्च से पहले साइन हो सकती है पी-75आई सबमरीन डील
वहीं, प्रोजेक्ट 75 इंडिया (पी-75आई) भारत और जर्मनी के सैन्य रिश्तों में सबसे बड़ा और अहम बदलाव साबित होने वाला है। इस प्रोजेक्ट के तहत भारतीय नौसेना के लिए छह एडवांस्ड पारंपरिक पनडुब्बियां बनाई जाएंगी, जिसमें एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (एआईपी) टेक्नोलॉजी शामिल होगी। जनवरी 2026 में जर्मनी की कंपनी थायसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (टीकेएमएस) को मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड के साथ विदेशी ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर पार्टनर के रूप में चुना जा चुका है। (India Germany defence cooperation)
यह रक्षा मंत्रालय के स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप मॉडल के तहत पहला बड़ा अधिग्रहण कार्यक्रम है। इसके तहत पनडुब्बियों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा और जर्मनी भारत को डिजाइन और तकनीक ट्रांसफर करेगा। इस डील पर 31 मार्च 2026 से पहले साइन होने की उम्मीद है।
एआईपी टेक्नोलॉजी से लैस पनडुब्बियां लंबे समय तक बिना सतह पर आए पानी के नीचे रह सकती हैं। आम पारंपरिक पनडुब्बियों को बैटरी चार्ज करने के लिए सतह पर आना पड़ता है, जिससे उनकी लोकेशन पता लगने का खतरा बढ़ जाता है। एआईपी तकनीक दुनिया के कुछ ही देशों के पास है और भारत का डीआरडीओ भी इसे स्वदेशी तौर पर डेवलप कर रहा है। (India Germany defence cooperation)
पनडुब्बियों को नेवल वारफेयर की सबसे गुप्त और घातक मशीनें माना जाता है। ये वहां ऑपरेट कर सकती हैं, जहां युद्धपोत नहीं पहुंच पाते। दुश्मन पर अचानक हमला कर ये समुद्र में गायब हो जाती हैं। ऐसे में पी-75आई प्रोजेक्ट भारतीय नौसेना की ताकत कई गुना बढ़ाने वाला साबित होगा।
कुल मिलाकर, भारत और जर्मनी के बीच सैन्य रिश्ते अब केवल एक्सरसाइज और डॉयलॉग तक सीमित नहीं रहे हैं, बल्कि टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, जॉइंट मैन्युफैक्चरिंग और हिंद महासागर क्षेत्र में साझा सुरक्षा की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं। (India Germany defence cooperation)



