📍नई दिल्ली | 28 Mar, 2026, 3:48 PM
T-90 Gunnery Simulator: भारतीय सेना अब टी-90 भीष्म टैंक क्रू को सिमुलेटर पर ट्रेनिंग देगी। रक्षा मंत्रालय ने करीब 50 बेसिक गनरी सिमुलेटर खरीदने के लिए रिक्वेस्ट फॉर इंफॉर्मेशन यानी आरएफआई जारी की है। इन सिमुलेटर के जरिए टैंक गनर्स को बिना असली फायरिंग रेंज पर ले जाए ट्रेनिंग दी जाएगी।
यह सिमुलेटर खास तौर पर टी-90 टैंक के गनर और कमांडर को ध्यान में रखकर तैयार किए जाएंगे, ताकि वे असली युद्ध जैसे माहौल में बेहतर तरीके से अभ्यास कर सकें।
T-90 Gunnery Simulator: असली फायरिंग जैसा अनुभव मिलेगा
सेना ने साफ किया है कि यह सिमुलेटर सिर्फ स्क्रीन पर ट्रेनिंग देने वाला साधारण सिस्टम नहीं होगा, बल्कि इसमें वास्तविक फायरिंग जैसा पूरा अनुभव मिलेगा। टैंक के अंदर का माहौल बिल्कुल असली टी-90 जैसा बनाया जाएगा, जिसमें गनर की सीट, कंट्रोल्स और डिस्प्ले सिस्टम भी उसी तरह काम करेंगे।
इसमें गनर को दुश्मन को पहचानने, उसे ट्रैक करने, दूरी नापने, निशाना साधने और फायर करने तक की पूरी प्रक्रिया सिखाई जाएगी। इसमें 125 मिमी की मुख्य तोप, 7.62 मिमी मशीन गन, इनवार मिसाइल और स्मोक ग्रेनेड लॉन्चर का इस्तेमाल भी सिखाया जाएगा। (T-90 Gunnery Simulator)
आवाज और झटके भी लगेंगे
इस सिमुलेटर की एक खास बात यह होगी कि इसमें सिर्फ विजुअल नहीं, बल्कि आवाज और झटकों का भी पूरा अनुभव दिया जाएगा। जब टैंक फायर करेगा तो झटका महसूस होगा और स्क्रीन पर फ्लैश भी दिखाई देगा।
इंजन की आवाज, ऑटो लोडर के चलने की आवाज, दुश्मन की फायरिंग और युद्ध में बम फटने की आवाजें भी सुनाई देंगी। इससे ट्रेनिंग लेने वाला सैनिक मानसिक रूप से उसी स्थिति में पहुंच जाएगा, जैसा असली युद्ध के दौरान होता है। (T-90 Gunnery Simulator)
मशीन में होगा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल
इस सिमुलेटर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई का खास इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें दुश्मन के टारगेट एआई के जरिए तैयार किए जाएंगे, जो हर अभ्यास के साथ ज्यादा मुश्किल होते जाएंगे।
इंस्ट्रक्टर चाहे तो कठिनाई का स्तर खुद भी तय कर सकता है। इसके अलावा सिस्टम खुद ही यह देखेगा कि ट्रेनिंग लेने वाला सैनिक कहां गलती कर रहा है और उसे सुधारने के सुझाव भी देगा। (T-90 Gunnery Simulator)
अलग-अलग इलाकों में होगी ट्रेनिंग
इस सिस्टम में भारत के अलग-अलग सीमावर्ती इलाकों जैसा माहौल बनाया जाएगा। इसमें पश्चिमी सीमा, नियंत्रण रेखा और वास्तविक नियंत्रण रेखा जैसे क्षेत्रों के हालात शामिल होंगे।
रेगिस्तान, मैदान, नदी के इलाके, ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्र और शहरी इलाकों जैसे अलग-अलग टेरेन में ट्रेनिंग दी जाएगी। इससे सैनिकों को हर तरह के ऑपरेशन के लिए तैयार किया जा सकेगा। (T-90 Gunnery Simulator)
ट्रेनिंग पर नजर रखेगा इंस्ट्रक्टर
इस सिस्टम में एक इंस्ट्रक्टर स्टेशन भी होगा, जहां से ट्रेनिंग पर नजर रखी जाएगी। इंस्ट्रक्टर यह देख सकेगा कि सैनिक कैसे प्रदर्शन कर रहे हैं, कहां गलती कर रहे हैं और उन्हें कैसे सुधारना है। साथ ही बाहर लगे डिस्प्ले पर दूसरे सैनिक भी ट्रेनिंग को देख सकेंगे।
जरूरत पड़ने पर सिस्टम में जानबूझकर खराबी भी डाली जा सकती है, ताकि सैनिकों को इमरजेंसी स्थिति से निपटना सिखाया जा सके।
साइज और मजबूती पर खास ध्यान
सेना ने सिमुलेटर के डिजाइन को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं। इसे मिलिट्री ग्रेड मजबूती के साथ बनाया जाना होगा, ताकि यह अलग-अलग मौसम और कठिन परिस्थितियों में काम कर सके।
यह सिस्टम इतना कॉम्पैक्ट होगा कि इसे अशोक लेलैंड स्टैलियन ट्रक में रखा जा सके। इसका वजन और साइज भी तय सीमा के भीतर होना चाहिए, ताकि इसे आसानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सके।
यह सिमुलेटर -10 डिग्री से लेकर 45 डिग्री तक के तापमान में काम कर सकेगा और दिन में 12 से 16 घंटे तक लगातार चलने में सक्षम होगा। इसमें बैकअप पावर के लिए यूपीएस की सुविधा भी होगी। (T-90 Gunnery Simulator)
लंबी सर्विस लाइफ और मेंटेनेंस की व्यवस्था
सेना ने इस सिमुलेटर की सर्विस लाइफ करीब 15 साल तय की है। कंपनियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि वे लंबे समय तक इसके स्पेयर्स और मेंटेनेंस की सुविधा दे सकें।
साथ ही, अगर किसी कंपनी को प्रोडक्शन बंद करना हो, तो उसे पहले से सूचना देनी होगी, ताकि जरूरी पार्ट्स का स्टॉक तैयार किया जा सके। (T-90 Gunnery Simulator)
खरीद प्रक्रिया में स्वदेशी कंपनियों को प्राथमिकता
यह पूरी प्रक्रिया आत्मनिर्भर भारत के तहत की जा रही है। इसका मतलब है कि इसमें भारतीय कंपनियों को प्राथमिकता दी जाएगी। सेना कंपनियों से यह भी पूछ रही है कि उनके प्रोडक्ट में कितना हिस्सा भारत में बना है। इसके आधार पर आगे चयन किया जाएगा। (T-90 Gunnery Simulator)


