📍नई दिल्ली | 17 Nov, 2025, 1:57 PM
Smartphone Use in Army: सेना में फोन के इस्तेमाल को लेकर सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी का कहना है कि स्मार्टफोन आज के समय की जरूरत बन गया है, लेकिन साथ ही सैनिकों को सोशल मीडिया पर रिएक्ट और रेस्पॉन्ड के बीच अंतर समझना होगा।
नई दिल्ली में आयोजित चाणक्य डिफेंस डायलॉग के दौरान जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने सेना में आ रही आज की युवा पीढ़ी डिजिटल है और स्मार्टफोन आज की जरूरत बन गया है। लेकिन साथ ही सैनिकों को सोशल मीडिया पर तत्काल प्रतिक्रिया यानी रिएक्ट और सोची-समझी प्रतिक्रिया यानी रेस्पॉन्ड के बीच अंतर समझना होगा। उन्होंने कहा कि स्मार्टफोन पर पूरी तरह पाबंदी सही नहीं है, बल्कि इस्तेमाल के नियम और जवाब देने का तरीका महत्वपूर्ण है।
सेना प्रमुख ने कहा कि जब युवा एनडीए में आता है तो उसे यह बताने में तीन से छह महीने लगते हैं कि बिना फोन के भी जिंदगी है। उन्होंने कहा कि स्मार्टफोन आज के जमाने की जरूरत है। जब भी मैं जवानों से मिलता हूं तो उन्हें यही बताता हूं स्मार्टफोन निहायत जरूरत है। मैं उसको मना कभी नहीं करता हूं। क्योंकि जब हम लोग फील्ड में रहते हैं, सैनिक जहां पर कहीं पर है वह अगर वह बच्चे की किलकारी देखना चाहता है तो फोन पर ही देखेगा?
जनरल द्विवेदी ने फील्ड में तैनात जवानों के संदर्भ में बताया कि स्मार्टफोन परिवार और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ने का जरिया है। उन्होंने कहा कि सैनिकों को अपने परिवार की चिंता, बच्चों की खबरें और निजी जरूरी काम के लिए फोन की जरूरत होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फोन का इस्तेमाल पूरी तरह से बंद रखना व्यावहारिक नहीं होगा क्योंकि इससे जवानों का मनोबल और घरेलू जिम्मेदारियां प्रभावित हो सकती हैं। फिर भी उन्होंने यह भी कहा कि फोन के इस्तेमाल में अनुशासन जरूरी है और जवानों को यह समझना होगा कि क्या तुरंत रिएक्ट करना है और क्या गंभीरता से सोचकर रेस्पॉन्ड करना है।
सेना प्रमुख ने रिएक्ट और रेस्पॉन्ड के फर्क पर जोर देते हुए बताया कि रिएक्ट में अक्सर भावनात्मक और अधूरा संदर्भ रहता है जबकि रेस्पॉन्ड में विश्लेषण और परिपक्वता होती है। उनके शब्दों में, “रिएक्ट वह होता है जिसमें आप तुरंत उत्तर देना चाहते हैं; रेस्पॉन्ड वह है जिसे सोचकर, गंभीरता से विश्लेषित करके दिया जाता है।” उन्होंने कहा कि फौजी भाई-बहनों को ट्विटर आदि प्लेटफॉर्म पर निगरानी की अनुमति दी जा सकती है ताकि वे देख सकें, लेकिन सार्वजनिक रूप से तुरंत जवाब देने से रुका जाए।

