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Sir Creek Indian Army: सर क्रीक में अपनी मौजूदगी मजबूत कर रहा भारत, सेना को चाहिए लैंडिंग क्राफ्ट असॉल्ट और फास्ट पेट्रोल बोट्स, जारी की RFP

सरकार के वरिष्ठ सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान सर क्रीक से 26-11 जैसे मुंबई हमले जैसे साजिश को अंजाम देने की साजिश रच रहा है और यहां से आतंकियों को भारत में भेजने में की रणनीति बना रहा है, ताकि बड़ी आतंकी वारदातों को अंजाम दिया जा सके...

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📍नई दिल्ली | 7 Nov, 2025, 5:44 PM

Sir Creek Indian Army: भारत ने अपनी पश्चिमी सीमा, खास तौर पर सर क्रीक इलाके की सुरक्षा को लेकर जरूरी कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। एक तरफ जहां सर क्रीक इलाके पास तीनों भारतीय सेनाएं 13 नवंर तक ट्राई सर्विसेज एक्सरसाइज त्रिशूल कर रही हैं, तो वहीं रक्षा मंत्रालय ने इस इलाके की संवेदनशीलता को देखते हुए दो अहम रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) भी जारी किए हैं। इनमें से एक आरएफपी भारतीय सेना के लिए लैंडिंग क्राफ्ट असॉल्ट (एलसीए) के लिए तो दूसरी फास्ट पेट्रोल बोट के लिए जारी की गई हैं। इनका उद्देश्य सीमा की निगरानी, सैनिकों की आवाजाही और समुद्री गश्त की क्षमता को मजबूत करना है।

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हाल ही में 6 नवंबर को जारी की गई आरएफपी में सेना आठ लैंडिंग क्राफ्ट असॉल्ट बोट्स खरीदेगी। इन नौकाओं को इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि वे दलदली, उथले और संकरे जलमार्गों में भी ऑपरेशन कर सकें। वहीं, 21 अक्टूबर को जारी की गई आरएफपी के तहत छह फास्ट पेट्रोल बोट खरीदी जाएंगी। ये नौकाएं तेज गश्त, निगरानी और तस्करी या घुसपैठ के मामलों में तुरंत जवाबी कार्रवाई करने में मदद करेंगी।

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक ये दोनों प्रोजेक्ट्स ‘बॉय (इंडियन-आईडीडीएम)’ कैटेगरी में रखे गए हैं, यानी दोनों का निर्माण पूरी तरह भारत में होगा। इसमें कम से कम 60 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल जरूरी होगा। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इन परियोजनाओं को एमएसएमई उद्योगों के लिए भी खोला गया है, ताकि छोटे और मझोले उद्योग भी रक्षा उत्पादन में सक्रिय भागीदारी कर सकें।

Sir Creek Indian Army: सर क्रीक इलाका है बेहद संवेदनशील

सर क्रीक को अक्सर भारत की “वेस्टर्न नेवल बॉटलनेक” कहा जाता है। यह वही इलाका है जहां से अरब सागर तक पहुंचने वाला रास्ता गुजरता है। इसलिए यह नौसैनिक रणनीति और कोस्टल डिफेंस दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। सर क्रीक इलाका भारत और पाकिस्तान के बीच फैला लगभग 96 किलोमीटर लंबा दलदली इलाका है, जो गुजरात के कच्छ जिले से अरब सागर तक फैला हुआ है। यह क्षेत्र दशकों से सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता रहा है, क्योंकि यहां की मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियों के चलते पारंपरिक गश्त और निगरानी बेहद कठिन होती है। इस इलाके में पाकिस्तान की ओर से घुसपैठ, तस्करी और जासूसी जैसी गतिविधियों की कई बार कोशिश की जा चुकी है। इसलिए, भारतीय सेना ने अब एडवांस तकनीक वाली बोट्स की तैनाती के जरिए इस क्षेत्र को और सुरक्षित करने का फैसला किया है।

लैंडिंग क्राफ्ट असॉल्ट बोट्स की सर क्रीक में तैनाती

सेना के अनुसार, लैंडिंग क्राफ्ट असॉल्ट बोट्स की तैनाती सर क्रीक में लखपत–लक्की नाला (गुजरात) क्षेत्र और असम के गुवाहाटी में की जाएगी। इनमें से चार नौकाएं गुजरात में और चार असम में तैनात होंगी। इनका मुख्य उद्देश्य सीमाई और जलीय इलाकों में सैनिकों, वाहनों और सामग्री की आवाजाही को तेज बनाना है। ये नौकाएं लगभग 25 नॉट्स (46 किमी प्रति घंटे) की गति से चल सकती हैं और लगभग 10 टन तक का भार उठा सकती हैं। इन्हें इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि ये –15°C से +50°C तक तापमान में आसानी से काम कर सकें। आरएफपी के मुताबिक इसे समुंदर के साथ-साथ उथले क्रिक इलाकों, सर क्रीक, ब्रह्मपुत्र नदी, सुंदरबन डेल्टा और पूर्वी लद्दाख जैसे कठिन इलाकों में काम करने के लिये तैनात किया जाएगा।

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आरएफपी में कहा गया है कि ये लैंडिंग क्राफ्ट असॉल्ट बोट्स कई आधुनिक सिस्टम, जैसे जीपीएस-ग्लोनास आधारित नेविगेशन सिस्टम, ऑटोमेटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम, लो-पावर रडार, इको साउंडर, वीएचएफ रेडियो कम्युनिकेशन सिस्टम, और एआईजे लेवल-III बुलेट रेसिस्टेंट प्रोटेक्शन से लैस होनी चाहिए। इनका कंट्रोल एक मल्टी-फंक्शन कंसोल से होगा, जो रडार, जीपीएस और एआईएस डेटा को एक साथ शो करेगा। इन नौकाओं को आईपी66/आईपी67 वाटरप्रूफिंग मानकों का भी पालन करना होगा, ताकि ये हर मौसम में काम कर सकें।

रक्षा मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि कॉन्ट्रैक्ट साइन होने के बाद पहले 9 महीने में पहली प्रोटोटाइप बोट तैयार की जाएगी, जबकि बाकी बोट्स 24 महीने के भीतर सेना को सौंप दी जाएंगी। इन नौकाओं के साथ कंप्यूटर-बेस्ड ट्रेनिंग मॉड्यूल और मेंटेनेंस सिमुलेटर भी दिया जाएगा, ताकि सैनिकों को ऑपरेशन और मेंटेनेंस की भी ट्रेनिंग मिल सके।

क्या हैं लैंडिंग क्राफ्ट असॉल्ट?

‘लैंडिंग क्राफ्ट असॉल्ट एक ऐसी तेज रफ्तार और मल्टीपर्पज बोट होती है, जिसका इस्तेमाल सैनिकों, हथियारों और हल्के वाहनों को पानी के रास्ते तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए किया जाता है। इसका इस्तेमाल दलदली तटीय क्षेत्र, नदी मार्ग या उथले समुद्री इलकों में किया जाता है, जहां सड़क या पुल से पहुंचना मुश्किल होता है।

इस नाव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कम गहराई वाले पानी (शैलो वाटर) में भी आसानी से चल सकती है। इसलिए इसे सर क्रीक (गुजरात), ब्रह्मपुत्र नदी (असम) या सुंदरबन डेल्टा (पश्चिम बंगाल) जैसे इलाकों के लिए बेहद उपयुक्त माना जाता है।

इनकी लंबाई लगभग 13–14 मीटर के आसपास होती है। इनकी पेलोड क्षमता 10 टन तक, यानी यह एक प्लाटून को पूरे कॉम्बैट लोड के साथ या हल्के सैन्य वाहनों को ले जा सकती है। ये कंपोजिट फाइबर रिइनफोर्स्ड स्ट्रक्चर की बनी होती हैं, जिससे हल्की और मजबूत बनी रहती हैं। इस नाव में बुलेट-रेसिस्टेंट केबिन भी होता है, जिससे यह दुश्मन की गोलीबारी के बीच भी सुरक्षित रह सकती है।

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सेना को चाहिए 6 फास्ट पेट्रोल बोट्स

वहीं, फास्ट पेट्रोल बोट्स को भी सर क्रीक के अलावा कच्छ और लखपत के तटीय इलाकों में तैनात किया जाएगा। ये बोट्स तेज रफ्तार वाली और हल्के वजन वाली होंगी। इनका डिजाइन इस तरह तैयार किया गया है कि वे 35 नॉट्स तक की स्पीड से चल सकें और सीमाई इलाकों में तुरंत प्रतिक्रिया दे सकें। ये नौकाएं मुख्य रूप से निगरानी, घुसपैठ-रोधी मिशन, सर्च एंड रेस्क्यू और लॉजिस्टिक सपोर्ट के लिए इस्तेमाल की जाएंगी।

आरएफपी के मुताबिक इन नौकाओं में इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक पूरी तरह से स्वदेशी होगी। डिजाइन का स्वामित्व भारतीय कंपनियों के पास होगा और उत्पादन भारतीय शिपयार्ड्स में किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के तहत आने वाली कंपनियों को यह प्रमाणित करना होगा कि उनकी तकनीक और निर्माण पूरी तरह देश के अंदर किया गया है। रक्षा मंत्रालय ने इन नौकाओं के रखरखाव के लिए लाइफ-साइकिल सपोर्ट सिस्टम भी अनिवार्य किया है, ताकि आने वाले वर्षों में मरम्मत और अपग्रेडेशन के लिए विदेशी निर्भरता न रहे।

सर क्रीक में लगातार अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है पाकिस्तान

60 साल पहले पाकिस्तान के पहले तानाशाह अयूब खान ने कच्छ में फौजी हमला किया था। 1965 में पाकिस्तान ने ऑपरेशन डेजर्ट हॉक के तहत इसी इलाके में हमला किया था। लेकिन भारतीय सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए उन्हें पीछे हटने पर मजबूर कर दिया था। हाल ही में सर क्रीक इलाके में पाकिस्तान ने तेजी से गतिविधियां बढ़ाई हैं। पाकिस्तान वहां मिनी-कैंटोनमेंट, एयरस्ट्रिप बनाए हैं। सैटेलाइट इमेजरी के मुताबिक पाकिस्तान ने वहां कई छोटे मिनी-कैंटोनमेंट और मिलिट्री कॉम्प्लेक्स बनाए हैं। ये 150 वर्ग किलोमीटर से ज्यादा इलाके में फैले हैं, जहां सिविलियंस का प्रवेश बैन है। पाकिस्तान की मरीन फोर्स ने सर क्रीक के रह-दा-पिर इलाके में एक नई मिलिट्री बैरक भी बनाई है।

इसके अलावा आपातकालीन हवाई पट्टियां बनाईं हैं, जो फाइटर जेट्स या ड्रोन्स के लिए इस्तेमाल हो सकती हैं। साथ ही दर्जनों कोस्टल डिफेंस बोट्स, मरीन असॉल्ट क्राफ्ट्स, नेवल शिप्स और पैट्रोलिंग स्पीडबोट्स की भी तैनाती की है। इसके अलावा 31वीं और 32वीं क्रीक बटालियन्स के हेडक्वार्टर भी सुझावल और घारो में बनाए हैं। यही नहीं, पाकिस्तान ने वहां तीन ग्रिफॉन 2400टीडी हॉवरक्राफ्ट इंडक्ट किए हैं, जो दलदली इलाके में तेज रफ्तार से चल सकते हैं।

क्या सर क्रीक से मुंबई हमलों जैसी साजिश रच रहा पाकिस्तान

सर क्रीक में पाकिस्तान की गतिविधियां इस कदर बढ़ चुकी हैं कि दशहरा के मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भुज का दौरा किया था। जहां से उन्होंने पाकिस्तान को चेतावनी दी थी कि अगर पाकिस्तान सर क्रीक में कोई हिमाकत करेगा तो हम इतना जोरदार जवाब देंगे कि इतिहास और भूगोल दोनों बदल जाएंगे। उन्होंने यह बयान उस समय दिया जब भारत की खुफिया रिपोर्टों ने पाकिस्तान की नई सैन्य तैयारियों की पुष्टि की थी। भारतीय खुफिया एजेंसियों का कहना है कि यह पाकिस्तान का “जमीनी हकीकत बदलने का प्रयास” है ताकि विवादित इलाकों पर नियंत्रण स्थापित किया जा सके।

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वहीं, 25 अक्टूबर को पाकिस्तान के नौसेना प्रमुख एडमिरल नवेद अशरफ ने सर क्रीक के आगे के ठिकानों का दौरा किया था और कहा था, “सर क्रीक से जिवानी तक, पाकिस्तान अपने हर इंच समुद्री मोर्चे की रक्षा करेगा।” पाकिस्तान ने अपनी नौसेना को “हाई रेडीनेस मोड” में डाल दिया है और समुद्री सीमाओं पर निगरानी बढ़ा दी है।

सरकार के वरिष्ठ सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान यहां से 26-11 जैसे मुंबई हमले जैसे साजिश को अंजाम देने की साजिश रच रहा है और यहां से आतंकियों को भारत में भेजने में की रणनीति बना रहा है, ताकि बड़ा आतंकी वारदातों को अंजाम दिया जा सके।

बता दें कि मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने कच्छ में सरदार पोस्ट और विगोकोट पर गोले बरसाए थे। 10 मई को एक पाकिस्तानी ड्रोन को गांव के पास मार गिराया था।

डायनामिक मैरीटाइम रेडीनेस की नीति

रक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह परियोजना केवल सुरक्षा बढ़ाने के लिए नहीं है, बल्कि यह भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि भारतीय सीमाएं न केवल सुरक्षित रहें बल्कि हर प्रकार के ऑपरेशन के लिए तैयार भी रहें। यह परियोजना उस दिशा में एक ठोस कदम है।”

सर क्रीक क्षेत्र में इन नौकाओं की तैनाती पाकिस्तान के लिए भी एक स्पष्ट संदेश मानी जा रही है। भारत ने अब इस क्षेत्र में डायनामिक मैरीटाइम रेडीनेस की नीति अपनाई है, जिसमें केवल रक्षा नहीं बल्कि तुरंत जवाबी कार्रवाई और आक्रामक निगरानी को प्राथमिकता दी गई है।

सर क्रीक की मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह कदम बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह इलाका न केवल पाकिस्तान से सटा हुआ है, बल्कि यहां से अरब सागर तक सीधी पहुंच होने के कारण यह एक महत्वपूर्ण सामरिक गलियारा भी है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन नई नौकाओं की तैनाती से भारत की सीमा पर निगरानी, खुफिया गतिविधियों और रैपिड रेस्पॉन्स क्षमता में बड़ा सुधार आएगा।

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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