📍नई दिल्ली | 23 Mar, 2026, 8:07 PM
Shaurya Squadron Indian Army: भारतीय सेना अब तेजी से अपने युद्ध लड़ने के तरीके को बदल रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध, ऑपरेशन सिंदूर और अमेरिका-ईरान जैसे हालिया संघर्षों ने यह साफ कर दिया है कि आधुनिक युद्ध सिर्फ टैंक, तोप और सैनिकों से नहीं जीते जाते, बल्कि टेक्नोलॉजी, खासकर ड्रोन की बड़ी भूमिका होती है। यही वजह है कि भारतीय सेना अब अपनी इन्फैंट्री के बाद आर्मर्ड कोर यानी टैंक यूनिट्स में भी बड़ा बदलाव करने जा रही है।
सेना अब हर आर्मर्ड रेजिमेंट में “शौर्य स्क्वाड्रन” नाम से एक नई यूनिट जोड़ने की तैयारी कर रही है। यह कोई सामान्य यूनिट नहीं होगी, बल्कि इन्फैंट्री की अश्नि प्लाटून की तरह ड्रोन और एडवांस टेक्नोलॉजी से लैस एक आधुनिक टैक्टिकल फोर्स होगी, जो टैंकों की ताकत को कई गुना बढ़ा देगी। (Shaurya Squadron Indian Army)
Shaurya Squadron Indian Army: क्यों जरूरी हुआ यह बदलाव
पिछले कुछ सालों में हुए युद्धों ने दुनिया को दिखाया है कि ड्रोन अब गेम चेंजर बन चुके हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध में कई बार ऐसा देखा गया कि छोटे-छोटे ड्रोन ने महंगे टैंकों को भी नष्ट कर दिया। वहीं, मिडिल ईस्ट में भी ड्रोन अटैक और सर्विलांस ने युद्ध की दिशा बदल दी।
भारतीय सेना ने इन अनुभवों से सीख लेते हुए यह फैसला किया है कि अब सिर्फ टैंक या आर्मर्ड व्हीकल्स पर निर्भर रहना काफी नहीं है। उन्हें ड्रोन-एनेबल्ड बनाना जरूरी है। यानी अब टैंक जमीन पर ही नहीं, बल्कि आसमान से मिलने वाली जानकारी और हमले की क्षमता के साथ काम करेंगे। (Shaurya Squadron Indian Army)
Lt Gen Dhiraj Seth, GOC-in-C #SouthernCommand, witnessed the Indian #Army’s #ShauryaSquadron in action during a high-tempo integrated mechanised manoeuvre exercise at Babina Field Firing Ranges.#IndianArmy #SouthernCommand #MultiDomainOperations #DecadeOfTransformation… pic.twitter.com/Nr8oSQGj4a
— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) March 23, 2026
क्या है नई शौर्य स्क्वाड्रन
शौर्य स्क्वाड्रन भारतीय सेना की एक नई और आधुनिक टैक्टिकल यूनिट है, जिसे खास तौर पर मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस के लिए तैयार किया जा रहा है। आसान भाषा में समझें तो यह ऐसी यूनिट है जो एक साथ कई काम कर सकती है। इन प्रस्तावित स्क्वाड्रनों को आर्मर्ड रेजिमेंट के अंदर कंपनी स्तर पर बनाया जाएगा। इसका मतलब यह है कि ड्रोन यूनिट्स को सीधे फ्रंटलाइन लड़ाकू यूनिट्स के साथ जोड़ा जाएगा, न कि उन्हें ऊपर के स्तर पर अलग रखा जाएगा।
आम तौर पर एक आर्मर्ड रेजिमेंट की कंपनी में करीब एक दर्जन टैंक और सौ से ज्यादा जवान होते हैं। ऐसे में इसी स्तर पर ड्रोन तैनात करने का मकसद है कि निगरानी, टारगेट पहचान और हमला करने की प्रक्रिया को तेज और ज्यादा प्रभावी बनाया जा सके।
यह यूनिट दुश्मन की निगरानी करेगी, टारगेट ढूंढेगी, जरूरत पड़ने पर तुरंत हमला भी करेगी और लगातार मैदान में सक्रिय भी रहेगी। इसका मकसद है दूर तक देखना, गहराई में वार करना और लंबे समय तक ऑपरेशन जारी रखना।
यह यूनिट सबसे पहले सदर्न कमांड के तहत सुदर्शन चक्र कोर की व्हाइट टाइगर डिवीजन में रेज की गई है। हाल ही में इसे बाबीना फायरिंग रेंज में “अमोघ ज्वाला एक्सरसाइज” के दौरान टेस्ट भी किया गया, जहां इसने अपनी क्षमताओं का सफल प्रदर्शन किया। (Shaurya Squadron Indian Army)
ड्रोन के साथ टैंक की नई जोड़ी
अब भारतीय सेना का फोकस यह है कि टैंक और ड्रोन एक साथ मिलकर काम करें। पहले टैंक आगे बढ़ते थे और उन्हें दुश्मन की जानकारी सीमित मिलती थी। लेकिन अब ड्रोन पहले ही आसमान से दुश्मन की पोजीशन, मूवमेंट और हथियारों की जानकारी दे देंगे।
इससे टैंक यूनिट्स ज्यादा सुरक्षित और प्रभावी हो जाएंगी। अगर दुश्मन कहीं छिपा हुआ है, तो ड्रोन पहले ही उसे पहचान लेगा। इसके बाद टैंक या ड्रोन खुद उस पर सटीक हमला कर सकते हैं।
यही नहीं, अब टैंक कॉलम के आगे ड्रोन “स्काउट” की तरह काम करेंगे। यानी वे रास्ता साफ करेंगे, खतरे की जानकारी देंगे और जरूरत पड़ने पर खुद हमला भी कर सकते हैं। (Shaurya Squadron Indian Army)
हर आर्मर्ड रेजिमेंट में होगी ड्रोन यूनिट
सूत्रों के मुताबिक, इन स्क्वाड्रनों का फोकस निगरानी के साथ-साथ हमले पर भी रहेगा। इसमें फर्स्ट पर्सन व्यू (एफपीवी) ड्रोन के जरिए दुश्मन के टैंक और लॉजिस्टिक ठिकानों पर हमला करने की क्षमता शामिल होगी।
हालांकि, सूत्रों ने यह भी साफ किया है कि “शौर्य स्क्वाड्रन” का यह कॉन्सेप्ट अभी शुरुआती चरण में है और इसे धीरे-धीरे डेवलप किया जा रहा है।
सेना की योजना है कि आने वाले समय में हर आर्मर्ड रेजिमेंट में एक डेडिकेटेड ड्रोन प्लाटून या शौर्य स्क्वाड्रन तैनात किया जाए। इसमें करीब 20 से 25 प्रशिक्षित सैनिक होंगे, जो खास तौर पर ड्रोन ऑपरेशन में एक्सपर्ट होंगे। बता दें कि प्रेसिडेंट गार्ड को शामिल करके सेना में लगभग 60 से 67 आर्मर्ड रेजिमेंट्स हैं। जिनमें से हर एक में लगभग 45-50 टैंक हैं और इन्हें कई स्क्वाड्रनों में बांटा गया है। (Shaurya Squadron Indian Army)
भारतीय सेना के पास करीब 4000-4200 तक मुख्य युद्धक टैंक हैं। इनमें टी-90 भीष्मा, टी-72 अजेय और अर्जुन एमके1ए जैसे टैंक शामिल हैं। सेना की आर्मर्ड रेजिमेंट्स इन्हीं टैंकों को चलाती और इस्तेमाल करती हैं।
इन यूनिट्स के पास अलग-अलग तरह के ड्रोन होंगे। कुछ ड्रोन सिर्फ निगरानी के लिए होंगे, कुछ दुश्मन पर हमला करने के लिए और कुछ ऐसे होंगे जो टारगेट पर मंडराते रहेंगे और सही समय पर खुद को विस्फोट कर देंगे।
इस तरह यह यूनिट टैंक यूनिट्स के लिए “आंख और हथियार” दोनों का काम करेगी। (Shaurya Squadron Indian Army)
अमोघ ज्वाला एक्सरसाइज में दिखी ताकत
हाल ही में बाबीना फील्ड फायरिंग रेंज में आयोजित “अमोघ ज्वाला एक्सरसाइज” में शौर्य स्क्वाड्रन का प्रदर्शन देखा गया। जहां सदर्न कमांड के जजनरल ऑफिसर कमांडर इन चीफ लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ भी इस एक्सरसाइज को देखने पहुंचे। इस एक्सरसाइज में टैंक, अटैक हेलीकॉप्टर, फाइटर जेट, ड्रोन और एयर डिफेंस सिस्टम एक साथ काम करते नजर आए।
यह पहली बार था जब इतने बड़े स्तर पर मल्टी-डोमेन ऑपरेशन का प्रदर्शन किया गया। इसमें ड्रोन ने रियल-टाइम सर्विलांस दिया, टारगेट की पहचान की और फिर सटीक हमले में मदद की।
बता दें कि लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ जल्द ही दिल्ली में वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ की जिम्मेदारी संभालेंगे।
Lt Gen Dhiraj Seth, PVSM, UYSM, AVSM, General Officer Commanding-in-Chief, #SouthernCommand, witnessed 𝐄𝐱𝐞𝐫𝐜𝐢𝐬𝐞 𝐀𝐌𝐎𝐆𝐇 𝐉𝐖𝐀𝐋𝐀, where speed, precision and the seamless integration of new-generation equipment and technologies defined high-tempo mechanised warfare,… pic.twitter.com/2fg3YGErlc
— Southern Command INDIAN ARMY (@IaSouthern) March 19, 2026
सदर्न कमांड की तरफ से जारी ट्विट में लिखा गया, “अमोघ ज्वाला एक्सरसाइज के दौरान भारतीय सेना ने शौर्य स्क्वाड्रन का प्रदर्शन किया। यह एक नई और आधुनिक टैक्टिकल यूनिट है, जिसे व्हाइट टाइगर डिवीजन ने सुदर्शन चक्र कोर के तहत तैयार किया है। (Shaurya Squadron Indian Army)
इस एक्सरसाइज में शौर्य स्क्वाड्रन को बिल्कुल असली युद्ध जैसे माहौल में टेस्ट किया गया। इसमें इस यूनिट ने दिखाया कि कैसे यह एक साथ दुश्मन पर नजर रख सकती है, उसकी गतिविधियों को समझ सकती है और फिर सही समय पर सटीक हमला भी कर सकती है।
शौर्य स्क्वाड्रन की खास बात यह है कि यह दूर तक निगरानी करने, दुश्मन के इलाके में गहराई तक जाकर हमला करने और लंबे समय तक ऑपरेशन जारी रखने के लिए बनाई गई है। यह रियल टाइम जानकारी जुटाकर तुरंत और सटीक प्रतिक्रिया देने में सक्षम है।
इस एक्सरसाइज से यह साफ हो गया कि आने वाले समय में यह यूनिट युद्ध के मैदान में बहुत अहम भूमिका निभा सकती है और सेना की ताकत को काफी बढ़ा सकती है।” (Shaurya Squadron Indian Army)
इन्फैंट्री में अश्नि, शक्तिबाण और दिव्यास्त्र
पिछले साल 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस पर सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने अश्नि प्लाटून, शक्तिबाण रेजिमेंट, भैरव बटालियन और दिव्यास्त्र बैटरी जैसी नई UAV/ड्रोन-केंद्रित स्ट्रक्चर बनाने का ऐलान किया था। ये सभी यूनिट्स मुख्य रूप से इन्फैंट्री और आर्टिलरी के लिए डिजाइन की गई हैं, ताकि पारंपरिक बलों को आधुनिक ड्रोन युद्ध क्षमता से लैस किया जा सके।
अश्नि प्लाटून (Ashni Platoons) इन्फैंट्री बटालियनों के अंदर रेज की गई हैं। प्रत्येक बटालियन में 20-25 विशेष प्रशिक्षित सैनिकों वाली यह प्लाटून सर्विलांस, रिकॉन्सेंस, FPV स्ट्राइक और लॉइटरिंग मुनिशन (कामिकाजे ड्रोन) से लैस है। इसका उद्देश्य हर इन्फैंट्री यूनिट को ऑर्गेनिक ड्रोन क्षमता देना है, जिससे ग्राउंड फोर्सेस रीयल-टाइम इंटेलिजेंस और प्रिसिजन स्ट्राइक कर सकें। सेना की योजना है कि हर इन्फैंट्री यूनिट में अश्नि प्लाटून तैयार की जाए।
शक्तिबाण रेजिमेंट भी आर्टिलरी के अंतर्गत तैयार की गई हैं। ये यूएवी/सी-यूएवी आधारित स्पेशल आर्टिलरी रेजिमेंट्स हैं, जो लंबी दूरी के ड्रोन स्वार्म, लॉइटरिंग मुनिशन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम से लैस हैं। ये बैटलफील्ड पर डीप स्ट्राइक और एंटी-ड्रोन रक्षा प्रदान करती हैं।
भैरव बटालियन स्पेशल फोर्सेस/लाइट कमांडो यूनिट्स हैं, जो घातक और स्पेशल फोर्सेस के बीच की कड़ी है। ये ड्रोन-इंटीग्रेटेड कमांडो ऑपरेशंस के लिए हैं, जहां स्वार्म ड्रोन, ओवरवॉच और शॉक एक्शन पर फोकस है। 25-30 ऐसी बटालियन रेज की जा रही हैं।
वहीं, दिव्यास्त्र बैटरी आर्टिलरी में लॉइटरिंग मुनिशन और सर्विलांस एसेट्स का कॉम्बिनेशन हैं। ये मूविंग टारगेट्स को ट्रैक करके रीयल-टाइम में सटीक हमला करती हैं, जिससे आर्टिलरी की मारक क्षमता कई गुना बढ़ जाती है।
ये स्ट्रक्चर ‘डेकेड ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन’ (2023-2032) का हिस्सा हैं, जो रुद्र ब्रिगेड्स के साथ मिलकर सेना को अगली पीढ़ी के युद्ध के लिए तैयार कर रही हैं। ड्रोन को सबसे निचले स्तर तक इंटीग्रेट करके भारतीय सेना फ्यूचर-रेडी बन रही है, जहां हर सैनिक ईगल इन द आर्म की तरह ड्रोन से लैस होगा। यह परिवर्तन सीमा पर चीन-पाकिस्तान थ्रेट्स के जवाब में महत्वपूर्ण है। (Shaurya Squadron Indian Army)
सेना की “ड्रोन-फर्स्ट” अप्रोच
भारतीय सेना अब धीरे-धीरे “ड्रोन-फर्स्ट” रणनीति की ओर बढ़ रही है। इसका मतलब है कि अब युद्ध में सबसे पहले ड्रोन का इस्तेमाल होगा, उसके बाद बाकी हथियारों का।
भारतीय सेना की इन्फैंट्री में पहले ही अश्नि प्लाटून, शक्तिबाण और दिव्यास्त्र जैसे ड्रोन यूनिट्स तैनात की जा चुकी हैं। अब उसी मॉडल को आर्मर्ड में भी लागू किया जा रहा है।
सेना का लक्ष्य है कि 2027 तक हर सैनिक को बेसिक ड्रोन ऑपरेशन की ट्रेनिंग मिल जाए। इसके लिए देशभर के कई मिलिट्री संस्थानों में ट्रेनिंग सेंटर भी बनाए गए हैं। (Shaurya Squadron Indian Army)
रुद्र ब्रिगेड और मल्टी-डोमेन वॉर
सेना अब सिर्फ यूनिट लेवल पर ही नहीं, बल्कि ब्रिगेड लेवल पर भी बदलाव कर रही है। “रुद्र ब्रिगेड” जैसे नए स्ट्रक्चर बनाए जा रहे हैं, जिनमें टैंक, इन्फैंट्री, आर्टिलरी और ड्रोन सभी को एक साथ जोड़ा जा रहा है।
इससे सेना की मारक क्षमता और प्रतिक्रिया समय दोनों बेहतर होंगे। दुश्मन पर तेजी से और सटीक हमला करना आसान हो जाएगा। (Shaurya Squadron Indian Army)


