📍नई दिल्ली | 28 Mar, 2026, 4:18 PM
Prahar LMG India: अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने भारतीय सेना को लाइट मशीन गन ‘प्रहार’ की पहली खेप सौंप दी है। इस खेप में कुल 2,000 लाइट मशीन गन शामिल हैं, जिन्हें पूरी तरह भारत में तैयार किया गया है। यह पहली बार है जब किसी बड़े प्राइवेट सेक्टर की कंपनी ने देश में इस स्तर पर लाइट मशीन गन बनाकर सेना को डिलीवर की हैं।
Prahar LMG India: तय समय से पहले पूरी हुई डिलीवरी
इस प्रोजेक्ट की खास बात यह रही कि कंपनी ने तय समय से काफी पहले काम पूरा कर लिया। जहां इस डिलीवरी के लिए ज्यादा समय तय था, वहीं पहली खेप सिर्फ सात महीने में ही तैयार कर ली गई।
इसके अलावा प्रोडक्शन का पहला मॉडल भी तय समय से पहले तैयार हुआ, जिससे बड़े स्तर पर निर्माण शुरू करने में तेजी आई। इसके बाद जरूरी मंजूरी मिलने के साथ ही फुल स्केल मैन्युफैक्चरिंग शुरू कर दी गई। (Prahar LMG India)
ग्वालियर में बनाया आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग सेंटर
इन मशीन गनों का निर्माण मध्य प्रदेश के ग्वालियर में स्थित अदाणी डिफेंस की स्मॉल आर्म्स फैसिलिटी में किया गया है। यह भारत का पहला ऐसा प्राइवेट सेक्टर हब है, जहां छोटे हथियारों का पूरा निर्माण एक ही जगह पर किया जाता है।
करीब 100 एकड़ में फैली इस यूनिट में बैरल बनाने से लेकर मशीनिंग, रोबोटिक्स, मेटल ट्रीटमेंट और टेस्टिंग तक की सभी सुविधाएं मौजूद हैं। यहां 25 मीटर लंबी अंडरग्राउंड फायरिंग रेंज भी बनाई गई है, जहां हथियारों की जांच की जाती है। (Prahar LMG India)
‘प्रहार’ मशीन गन की खासियत
प्रहार लाइट मशीन गन 7.62 मिमी कैलिबर की है। यह गन सेमी-ऑटोमैटिक और ऑटोमैटिक दोनों मोड में फायर कर सकती है। इसमें 120 राउंड का ड्रम या बेल्ट के जरिए गोलियां भरी जा सकती हैं। इसके अलावा इसमें मजबूत बाइपॉड, एडजस्टेबल बट स्टॉक और अतिरिक्त सेफ्टी सिस्टम भी दिए गए हैं।
यह गन करीब 8 किलो वजन की है और इसकी प्रभावी रेंज लगभग 1,000 मीटर तक है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि जरूरत पड़ने पर इसे मैदान में आसानी से खोला और जोड़ा जा सके। (Prahar LMG India)
हर हथियार की कड़ी जांच
अदाणी डिफेंस के मुताबिक, सेना को देने से पहले हर मशीन गन को कई तरह के टेस्ट से गुजरना होता है। इसमें बैलिस्टिक टेस्ट, एनवायरनमेंट ट्रायल और लंबी अवधि तक चलने की जांच शामिल है। इन सभी प्रक्रियाओं के बाद ही हथियार को ऑपरेशन के लिए तैयार माना जाता है। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि हथियार हर तरह की परिस्थितियों में सही तरीके से काम करे। (Prahar LMG India)
90 फीसदी से ज्यादा हिस्सा देश में तैयार
इस प्रोजेक्ट की एक अहम बात यह है कि इसमें 90 फीसदी से ज्यादा हिस्से भारत में ही बनाए गए हैं। इसका मतलब है कि अब छोटे हथियारों के लिए विदेशों पर निर्भरता कम हो रही है। इस फैसिलिटी में बड़े पैमाने पर उत्पादन की क्षमता भी है। यहां हर साल एक लाख तक हथियार बनाए जा सकते हैं। इससे स्थानीय इंडस्ट्री को भी बढ़ावा मिल रहा है और रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
कानपुर से मिलेगा गोला-बारूद का सपोर्ट
अदाणी डिफेंस का एक और बड़ा सेंटर उत्तर प्रदेश के कानपुर में है, जहां गोला-बारूद तैयार किया जाता है। यह यूनिट सालाना करीब 30 करोड़ राउंड छोटे हथियारों के लिए बना सकती है। इस तरह हथियार और गोला-बारूद दोनों का निर्माण देश में ही हो रहा है, जिससे पूरी सप्लाई चेन मजबूत हो रही है। (Prahar LMG India)




