📍नई दिल्ली | 13 Jan, 2026, 9:47 PM
Pinaka Rocket Ramjet Engine: सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा है कि भारतीय सेना रैमजेट टेक्नोलॉजी को सिर्फ आर्टिलरी गन्स तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे पिनाका रॉकेट सिस्टम में भी लगाने की संभावना पर काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि रैमजेट टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से हथियारों की रेंज में बड़ा इजाफा हो सकता है।
सेना प्रमुख ने यह बात रक्षा समाचार के पूछे सवाल के जवाब में कही। बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि रैमजेट टेक्नोलॉजी पर भारतीय संस्थान और डीआरडीओ लगातार काम कर रहे हैं और इसमें अब तक काफी प्रोग्रेस देखने को मिली है।
What’s next for India’s battlefield tech? Responding to Raksha samachar, Army Chief General Upendra Dwivedi outlined developments on ramjet artillery shells and the Zorawar light tank at the annual press conference #armychief #indianarmy #COAS #ramjet #zorawartank @adgpi… pic.twitter.com/hE67IdtwDM
— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) January 13, 2026
Pinaka Rocket Ramjet Engine: सेना को मिलेंगे ज्यादा रेंज वाले हथियार
सेना प्रमुख ने कहा कि उन्होंने खुद आईआईटी मद्रास जाकर वहां चल रहे रैमजेट प्रोजेक्ट की प्रगति देखी है। उनके मुताबिक, फीडबैक काफी सकारात्मक रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि किसी भी नई टेक्नोलॉजी की सटीक टाइमलाइन बताना आसान नहीं होता, क्योंकि यह कई परीक्षणों और तकनीकी मानकों पर निर्भर करता है।
उन्होंने कहा कि जैसे ही रैमजेट टेक्नोलॉजी पूरी तरह परिपक्व होगी, भारतीय सेना को हथियारों की ज्यादा रेंज मिलने लगेगी और इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल सिर्फ आर्टिलरी गंस तक सीमित नहीं रखा जाएगा। (Pinaka Rocket Ramjet Engine)
पिनाका रॉकेट सिस्टम में रैमजेट लगाने की योजना
सेना प्रमुख ने पिनाका रॉकेट सिस्टम का जिक्र करते हुए कहा कि अगर रैमजेट टेक्नोलॉजी को पिनाका रॉकेट में लगाया जाता है, तो इससे इसकी रेंज और ज्यादा बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसी रेंज बढ़ाने वाली टेक्नोलॉजी है, जिसका इस्तेमाल आगे भी अलग-अलग हथियार प्रणालियों में किया जा सकता है।
पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर पहले ही भारतीय सेना का एक अहम हथियार है और इसके अलग-अलग वर्जन सेवा में हैं। रैमजेट टेक्नोलॉजी के जुड़ने से इसकी मारक क्षमता और बढ़ने की उम्मीद है। (Pinaka Rocket Ramjet Engine)
डीआरडीओ भी कर रहा है रैमजेट टेक्नोलॉजी पर काम
सेना प्रमुख ने बताया कि इस दिशा में डीआरडीओ भी लगातार काम कर रहा है। डीआरडीओ और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग के जरिए इस टेक्नोलॉजी को आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उनका व्यक्तिगत आकलन है कि 2026 के दूसरे हिस्से तक इस टेक्नोलॉजी में अच्छी सफलता मिल सकती है। (Pinaka Rocket Ramjet Engine)
आईआईटी मद्रास का बड़ा तकनीकी ब्रेकथ्रू
इस बीच, आईआईटी मद्रास ने रैमजेट-असिस्टेड आर्टिलरी शेल्स डेवलप कर एक बड़ा तकनीकी ब्रेकथ्रू हासिल किया है। इस टेक्नोलॉजी के जरिए मौजूदा तोपों की रेंज में करीब 50 फीसदी तक इजाफा किया गया है, वो भी बिना किसी नई गन सिस्टम को शामिल किए।
आईआईटी मद्रास के अनुसार, 155 एमएम आर्टिलरी शेल के अंदर रैमजेट इंजन लगाने से एडवांस्ड टोव्ड आर्टिलरी गन सिस्टम की रेंज 40 किलोमीटर से बढ़कर 70 किलोमीटर तक पहुंच गई है। (Pinaka Rocket Ramjet Engine)
अलग-अलग तोपों में बढ़ी रेंज
इस टेक्नोलॉजी के परीक्षण अलग-अलग आर्टिलरी प्लेटफॉर्म पर किए गए। के-9 वज्र सेल्फ प्रोपेल्ड हॉवित्जर की रेंज 36 किलोमीटर से बढ़कर 62 किलोमीटर हो गई, जबकि धनुष आर्टिलरी गन की रेंज 30 किलोमीटर से बढ़कर 55 किलोमीटर तक पहुंच गई।
आईआईटी मद्रास के अधिकारियों के मुताबिक, यह टेक्नोलॉजी रॉकेट-असिस्टेड प्रोजेक्टाइल से अलग है। इसमें शेल के गन बैरल से बाहर निकलने के बाद भी लगातार प्रोपल्शन मिलता रहता है, जिससे रेंज काफी बढ़ जाती है। (Pinaka Rocket Ramjet Engine)
क्या है रैमजेट टेक्नोलॉजी
रैमजेट एक ऐसा इंजन होता है जिसमें किसी टरबाइन या घूमने वाले हिस्से की जरूरत नहीं होती। यह शेल की तेज रफ्तार का इस्तेमाल करके हवा को कंप्रेस करता है और फ्यूल के साथ जलाकर थ्रस्ट पैदा करता है। आर्टिलरी सिस्टम में इसका मतलब है कि शेल ज्यादा दूर तक जा सकता है, बिना गन को बदले। (Pinaka Rocket Ramjet Engine)
देवलाली और पोखरण में सफल परीक्षण
इस प्रोजेक्ट के तहत देवलाली और पोखरण में कई गन और फील्ड ट्रायल किए गए हैं। इन परीक्षणों में क्लीन गन एग्जिट, स्टेबल फ्लाइट और भरोसेमंद रैमजेट इग्निशन को सफलतापूर्वक वैलिडेट किया गया है। आईआईटी मद्रास के अनुसार, यही टेक्नोलॉजी भविष्य में रॉकेट सिस्टम में अपनाई जा सकती है, जिससे उनकी रेंज में भी बड़ा इजाफा संभव होगा। (Pinaka Rocket Ramjet Engine)



