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पुणे से जैसलमेर तक सेना ने चलाया मिलिट्री-सिविल फ्यूजन अभियान, कई एजेंसियों को जोड़ा एक मंच पर

इस अभियान के तहत पुणे स्थित सदर्न कमांड मुख्यालय में एक बड़ी टेबल टॉप एक्सरसाइज भी की गई, जिसमें यह समझने की कोशिश की गई कि देश के अंदर अलग-अलग तरह के खतरों से कैसे निपटा जाए...

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📍पुणे | 28 Mar, 2026, 5:46 PM

Military-Civil Fusion Campaign: देश की सुरक्षा तैयारियों को मजबूत करने के लिए भारतीय सेना की सदर्न कमांड ने एक खास पहल शुरू की है, जिसे मिलिट्री सिविल फ्यूजन अभियान नाम दिया गया है। इस अभियान के तहत सेना ने अलग-अलग सरकारी और गैर-सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर कई जगहों पर संयुक्त गतिविधियां कीं। इसका मकसद था कि किसी भी आपात स्थिति में सभी एजेंसियां एक साथ बेहतर तरीके से काम कर सकें।

यह अभियान महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में चलाया गया। इसमें सेना के साथ सिविल एडमिनिस्ट्रेशन, पुलिस, सुरक्षा एजेंसियां, शिक्षण संस्थान और इंडस्ट्री के लोग भी शामिल हुए।

Military-Civil Fusion Campaign: अलग-अलग एजेंसियों को एक मंच पर लाने की कोशिश

इस अभियान की खास बात यह रही कि इसमें कई तरह की एजेंसियों को एक साथ जोड़ा गया। इसमें सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स, स्टेट पुलिस, डिजास्टर मैनेजमेंट एजेंसियां, एयरपोर्ट और सिविल एविएशन से जुड़ी संस्थाएं, फॉरेस्ट और माइनिंग विभाग, एनसीसी और कई शैक्षणिक संस्थान शामिल रहे।

इन सभी ने मिलकर सुरक्षा से जुड़े अलग-अलग पहलुओं पर काम किया। जैसे इंटरनल सिक्योरिटी, एयरस्पेस की निगरानी, डिजास्टर रिस्पॉन्स और महत्वपूर्ण इलाकों की सुरक्षा। इस दौरान अलग-अलग एजेंसियों ने एक-दूसरे के काम करने के तरीके को समझा और एक जैसी प्रक्रिया अपनाने पर जोर दिया। (Military-Civil Fusion Campaign)

Military-Civil Fusion Campaign

पुणे में हुई बड़ी टेबल टॉप एक्सरसाइज

अभियान के तहत पुणे स्थित सदर्न कमांड मुख्यालय में एक बड़ी टेबल टॉप एक्सरसाइज भी की गई, जिसमें यह समझने की कोशिश की गई कि देश के अंदर अलग-अलग तरह के खतरों से कैसे निपटा जाए।

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इस अभ्यास की अगुवाई लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने की। इसमें महाराष्ट्र सरकार के अधिकारी, रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी और कई सुरक्षा एजेंसियों के प्रतिनिधि शामिल हुए। सभी ने मिलकर संभावित खतरों पर चर्चा की और उनसे निपटने की रणनीति पर काम किया।

कई शहरों में हुए अलग-अलग अभ्यास

इस अभियान के तहत देश के अलग-अलग शहरों में विशेष गतिविधियां आयोजित की गईं। पुणे के औंध मिलिट्री स्टेशन में एक मल्टी एजेंसी एक्सरसाइज हुई, जिसमें सेना, पुलिस, सिविल एडमिनिस्ट्रेशन और एनसीसी ने मिलकर काम किया। इसका मकसद था कि किसी संकट के समय सभी एजेंसियां एक साथ कैसे प्रतिक्रिया दें।

भोपाल में काउंटर यूएएस यानी ड्रोन से जुड़े खतरों पर एक सेमिनार आयोजित किया गया। इसमें मिलिट्री विशेषज्ञों के साथ सिविल एविएशन और एयरपोर्ट अथॉरिटी के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। यहां ड्रोन से बढ़ते खतरों पर चर्चा की गई।

बबीना में सेना, पुलिस और अन्य विभागों ने मिलकर जमीन स्तर पर गतिविधियां कीं। इसमें निगरानी, संयुक्त पेट्रोलिंग और आसपास के गांवों में संपर्क बढ़ाने पर ध्यान दिया गया। (Military-Civil Fusion Campaign)

Military-Civil Fusion Campaign

चेन्नई और अन्य शहरों में भी हुई चर्चा

चेन्नई में विक्ट्री वॉर मेमोरियल पर एक सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इसमें सेना, सिविल एडमिनिस्ट्रेशन और राज्य एजेंसियों के अधिकारी शामिल हुए। यहां इंटरनल सिक्योरिटी और संकट के समय प्रतिक्रिया पर चर्चा हुई।

बेलगावी और हैदराबाद में भी ट्रेनिंग और कोऑर्डिनेशन से जुड़ी गतिविधियां हुईं। वहीं जोधपुर और जैसलमेर जैसे रणनीतिक इलाकों में सिविल और मिलिट्री के बीच बेहतर तालमेल पर काम किया गया।

साथ काम करने से बढ़ा भरोसा

इस पूरे अभियान में सबसे अहम बात यह रही कि अलग-अलग एजेंसियां एक साथ आईं और उन्होंने मिलकर काम किया। सेना और सिविल एजेंसियों ने एक-दूसरे के अनुभव से सीखा और अपने काम करने के तरीके को बेहतर बनाया। इससे जानकारी का आदान-प्रदान तेज हुआ, फैसले जल्दी लिए गए और किसी भी स्थिति में मिलकर काम करने की क्षमता मजबूत हुई। (Military-Civil Fusion Campaign)

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