📍नई दिल्ली | 13 Oct, 2025, 10:33 PM
AUSTRAHIND-2025 भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए दोनों देशों की सेनाओं के बीच चौथा संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘ऑस्ट्राहिंद 2025’ (AUSTRAHIND-2025) आज से पर्थ, ऑस्ट्रेलिया में शुरू हो गया है। यह अभ्यास 13 अक्टूबर से 26 अक्टूबर 2025 तक चलेगा।
अभ्यास का आयोजन इरविन बैरक्समें किया जा रहा है, जहां भारत और ऑस्ट्रेलिया की सेनाएं एक साथ कई कॉम्प्लेक्स आपरेशनल सिनारियो पर काम करेंगी। इस साल का फोकस खासतौर पर शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में आतंकवाद-रोधी अभियानों पर है।
इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी यानी एक-दूसरे के साथ तालमेल और संयुक्त अभियानों को बेहतर बनाना है। सैनिक मिलकर जॉइंट प्लानिंग, टैक्टिकल मूवमेंट्स और फील्ड ट्रेनिंग एक्सरसाइज करेंगे। इससे न केवल उनकी सामरिक क्षमताएं परखी जाएंगी बल्कि ऑपरेशनल सिनर्जी भी मजबूत होगी।
AUSTRAHIND-2025 भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रक्षा सहयोग
अभ्यास के दौरान सैनिक संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों से जुड़े सिनोरियो पर भी काम करेंगे। इसमें ऐसे सिनारियो तैयार किए जाएंगे जो वास्तविक बहुराष्ट्रीय अभियानों की तरह हों, जहां विभिन्न देशों की सेनाएं एक साथ मिलकर काम करती हैं। इसका उद्देश्य सैनिकों को रैपिड रिस्पॉन्स और एडैप्टेबिलिटी की स्थिति में ट्रेनिंग करना है।
ऑस्ट्राहिंद 2025 का आयोजन दोनों देशों की सेनाओं की क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और स्थिरता के प्रति साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में प्रमुख रणनीतिक साझेदार हैं और यह अभ्यास उनके बीच रक्षा सहयोग और आपसी विश्वास को और गहरा बनाएगा।
अभ्यास के दौरान भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई सैनिकों को एक-दूसरे की रणनीतियों, हथियार प्रणालियों और ऑपरेशनल तकनीकों को समझने का अवसर मिलेगा। इससे दोनों सेनाओं के बीच दीर्घकालिक सैन्य संबंधों को मजबूती मिलेगी।
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सैन्य सहयोग पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। दोनों देश क्वाड साझेदारी का हिस्सा हैं और कई सामरिक मंचों पर एक साथ काम कर रहे हैं।
ऑस्ट्राहिंद अभ्यास इसी सहयोग का एक अहम हिस्सा है, जो हर साल भारत और ऑस्ट्रेलिया में बारी-बारी से आयोजित किया जाता है। पिछले संस्करण का आयोजन भारत में हुआ था, जबकि इस बार ऑस्ट्रेलिया इसकी मेजबानी कर रहा है।
अभ्यास के दौरान दोनों सेनाएं जॉइंट आपरेशंस प्लानिंग और बैटल ड्रिल्स करेंगी। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी संभावित सुरक्षा चुनौती की स्थिति में दोनों सेनाएं एक साथ मिलकर प्रभावी तरीके से प्रतिक्रिया दे सकें।
इस प्रशिक्षण के जरिए भारत और ऑस्ट्रेलिया की सेनाओं के बीच कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर मिलिट्री डिप्लोमेसी को और बढ़ावा मिलेगा, जिससे दोनों देशों के रक्षा संबंध और अधिक मजबूत होंगे AUSTRAHIND-2025 भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रक्षा सहयोग दोनों ही देशों के लिए महत्वपूर्ण है।


