📍अहमदाबाद | 12 Nov, 2025, 8:00 PM
Exercise MahaGujRaj-25: भारतीय वायुसेना ने पश्चिमी सेक्टर में अपनी ऑपरेशनल तैयारी और जॉइंट वारफेयर कैपेबिलिटी का शानदार प्रदर्शन किया। 29 अक्टूबर से 11 नवंबर 2025 तक चले इस बड़े अभ्यास एक्सरसाइज महागुजराज-25 में वायुसेना ने समुद्र, थल और आकाश के कोआर्डिनेटेड ऑपरेशनों के जरिए अपनी ताकत दिखाई।
Exercise MahaGujRaj-25
इस अभ्यास में भारतीय वायुसेना एक साथ विभिन्न डोमेन एयर कैम्पेन, मरीटाइम और एयर-लैंड मिशनों को पूरा किया। इस दौरान वायुसेना ने अपने लड़ाकू विमानों को गुजरात के हीरासर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भराकर अभ्यास में शामिल किया। इस दौरान वायुसेना ने सिविल और मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर को एक साथ इस्तेमाल किया।
अभ्यास में वायुसेना ने तकनीकी एकीकरण, नेटवर्क आधारित ऑपरेशंस और मल्टी-डोमेन युद्ध रणनीति को परखा। इसमें फील्ड स्तर पर प्रशासन, लॉजिस्टिक्स और मेंटेनेंस टीमों के बीच कोआर्डिनेशन की हाई लेवल तैयारी दिखाई दी।
इस दौरान भारतीय सेना के सदर्न कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने भी एक्सरसाइज अखंड प्रहर की समीक्षा की, जो ट्राई-सर्विस एक्सरसाइज त्रिशूल का एक प्रमुख हिस्सा है। उन्होंने कोणार्क कॉर्प्स की ऑपरेशनल तैयारी का जायजा लिया और अभ्यास के दौरान हुए कम्बाइंड आर्म्स मैन्यूवर्स को देखा, जिसमें थल सेना और वायुसेना ने मिलकर कई मिशनों को अंजाम दिया।
As #ExerciseMahaGujRaj25 continues across the tri-services, the seamless coordination between the #IndianAirForce, @AAI_Official, and civil authorities showcases the true essence of jointmanship.
When IAF jets touch down on civil airfields — it’s not just a landing, it’s… pic.twitter.com/tJ52tzQEL0— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) November 12, 2025
Exercise MahaGujRaj-25 अभ्यास के दौरान स्वदेशी तकनीक से बने ड्रोन, काउंटर-ड्रोन सिस्टम और एडवांस सर्विलांस उपकरण का भी प्रदर्शन किया गया। यह सभी उपकरण आत्मनिर्भर भारत के तहत विकसित किए गए हैं और अब इन्हें वास्तविक परिस्थितियों में परखा गया।
लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने सैनिकों की मेहनत, तकनीकी समझ और पेशेवर क्षमता की सराहना की। उन्होंने कहा कि सदर्न कमांड की यह पहल पीएम मोदी के विजन “जय” मंत्र यानी जॉइंटनेस, आत्मनिर्भरता और इनोवेशन के अनुरूप है। यह अभ्यास न केवल युद्धक्षेत्र में तालमेल और टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन को बढ़ावा देता है, बल्कि भारत की रक्षा तैयारियों को नए स्तर पर ले जाता है।
वायुसेना और थलसेना के इस संयुक्त अभ्यास का मकसद है कि भारत की सेनाएं अब मल्टी-डोमेन वारफेयर के लिए पूरी तरह तैयार हैं, जहा हर ब्रांच का तालमेल, तकनीक का सही उपयोग और तुरंत प्रतिक्रिया ही जीत की कुंजी है।
यह अभ्यास भारतीय रक्षा बलों के लिए केवल एक सैन्य कवायद नहीं, बल्कि एक आत्मविश्वास का प्रतीक भी है — जो यह दिखाता है कि आधुनिक युद्ध में भारत न केवल तैयार है, बल्कि निर्णायक बढ़त हासिल करने की क्षमता रखता है।

