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पोखरण में भारतीय सेना की ‘अग्नि वर्षा’, रेगिस्तान में टैंक, ड्रोन और हेलीकॉप्टर्स ने दिखाई मल्टी-डोमेन ताकत

इस अभ्यास में सेना ने दिखाया कि असली युद्ध में अलग-अलग यूनिट्स कैसे मिलकर काम करती हैं...

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📍पोखरण, राजस्थान | 24 Feb, 2026, 5:51 PM

Exercise Agni Varsha: राजस्थान के रेगिस्तानी इलाके में एक बार फिर भारतीय सेना की ताकत और तैयारी की झलक देखने को मिली। पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में ‘एक्सरसाइज अग्नि वर्षा’ नाम का बड़ा सैन्य अभ्यास किया गया, जिसमें सेना ने आधुनिक युद्ध की अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। यह अभ्यास भारतीय सेना की दक्षिण कमांड ने आयोजित किया था। इस अभ्यास का मकसद यह दिखाना था कि भारत किसी भी हालात में, खासकर रेगिस्तान जैसे कठिन इलाके में, तेज और सटीक कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

इस अभ्यास की खास बात यह रही कि इसमें जमीन, हवा और तकनीक तीनों को मिलाकर युद्ध का पूरा मॉडल पेश किया गया। इस अभ्यास में सेना ने दिखाया कि असली युद्ध में अलग-अलग यूनिट्स कैसे मिलकर काम करती हैं। (Exercise Agni Varsha)

Exercise Agni Varsha: आधुनिक युद्ध की दिखी झलक

मॉडर्न वॉरफेयर में केवल टैंक और सैनिक ही नहीं, बल्कि ड्रोन, हेलीकॉप्टर, रॉकेट और डिजिटल सिस्टम भी उतने ही जरूरी हो गए हैं। ‘अग्नि वर्षा’ अभ्यास में यही सब देखने को मिला।

इस अभ्यास में टी-90 टैंक, इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल (आईसीवी), के-9 वज्र हॉवित्जर, बोफोर्स और सारंग तोपें, और लंबी दूरी के रॉकेट सिस्टम का इस्तेमाल किया गया। जैसे ही अभ्यास शुरू हुआ, रेगिस्तान तोपों और टैंकों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। अलग-अलग यूनिट्स ने मिलकर टारगेट पर सटीक हमला किया।

साथ ही आसमान में अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर और एएलएच ध्रुव हेलीकॉप्टर ने भी हिस्सा लिया। इन हेलीकॉप्टरों ने जमीन पर मौजूद सैनिकों को सपोर्ट दिया और टारगेट पर नजर रखी। (Exercise Agni Varsha)

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ड्रोन और टेक्नोलॉजी का बढ़ता रोल

इस अभ्यास में ड्रोन टेक्नोलॉजी को खास महत्व दिया गया। आज के समय में ड्रोन युद्ध का बड़ा हिस्सा बन चुके हैं। दुश्मन बिना सामने आए हमला कर सकता है, इसलिए ड्रोन से निपटना जरूरी हो गया है।

अग्नि वर्षा में सेना ने सर्विलांस ड्रोन (निगरानी करने वाले) और स्ट्राइक ड्रोन (हमला करने वाले) दोनों का इस्तेमाल किया। ये ड्रोन दुश्मन की लोकेशन पहचानते हैं और फिर टारगेट पर हमला करने में मदद करते हैं।

सिर्फ हमला ही नहीं, बल्कि सेना ने काउंटर-ड्रोन सिस्टम का भी प्रदर्शन किया। यानी अगर दुश्मन ड्रोन से हमला करे, तो उसे कैसे रोका जाए, इसकी भी जवानों को ट्रेनिंग दी गई। (Exercise Agni Varsha)

नेटवर्क से जु़ड़े रहे हथियार

इस अभ्यास की एक और खास बात थी नेटवर्क-इनेबल्ड कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम। इसका मतलब है कि सभी यूनिट्स एक डिजिटल नेटवर्क से जुड़ी रहती हैं। इससे कमांडर को रियल टाइम में जानकारी मिलती है और वह तुरंत फैसला ले सकता है।

उदाहरण के लिए, अगर ड्रोन किसी टारगेट को देखता है, तो उसकी जानकारी तुरंत टैंक या तोप तक पहुंचती है और कुछ ही सेकंड में हमला किया जा सकता है। इससे युद्ध में तेजी और सटीकता दोनों बढ़ जाती हैं। (Exercise Agni Varsha)

रेगिस्तान में युद्ध की तैयारी

थार रेगिस्तान में युद्ध आसान नहीं होता। यहां गर्मी, रेत और लंबी दूरी जैसी कई चुनौतियां होती हैं। ऐसे में इस तरह के अभ्यास बहुत जरूरी होते हैं। अग्नि वर्षा के दौरान सेना ने इन सभी परिस्थितियों में ऑपरेशन करके दिखाया। टैंक और गाड़ियां रेत में चलते हुए, तोपें दूर तक फायर करती हुई और हेलीकॉप्टर हवा में सपोर्ट देते हुए नजर आए। जिससे पता लगता है कि भारतीय सेना किसी भी कठिन इलाके में ऑपरेशन करने के लिए तैयार है। (Exercise Agni Varsha)

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विदेशी पत्रकारों ने भी देखा अभ्यास

इस अभ्यास को खास बनाने वाली एक और बात यह रही कि इसमें 25 देशों के विदेशी डिफेंस पत्रकारों को भी बुलाया गया था। उन्होंने अपनी आंखों से देखा कि भारतीय सेना किस तरह तेजी, सटीकता और तालमेल के साथ काम करती है।

यह कदम सिर्फ अभ्यास तक सीमित नहीं था, बल्कि यह भारत की डिफेंस डिप्लोमेसी का भी हिस्सा है। इससे दुनिया को यह संदेश जाता है कि भारत की सेना आधुनिक तकनीक और स्वदेशी सिस्टम के साथ तेजी से आगे बढ़ रही है। (Exercise Agni Varsha)

आत्मनिर्भर भारत की झलक

इस अभ्यास में इस्तेमाल हुए कई सिस्टम स्वदेशी या भारत में डेवलप किए गए थे। इससे साफ होता है कि भारत अब रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

ड्रोन, हेलीकॉप्टर, आर्टिलरी सिस्टम और नेटवर्क टेक्नोलॉजी, इन सबमें भारत अपनी क्षमता बढ़ा रहा है। इससे न सिर्फ सेना मजबूत होती है, बल्कि देश की रक्षा इंडस्ट्री को भी फायदा मिलता है। (Exercise Agni Varsha)

ऑपरेशन सिंदूर से मिली सीख

हाल के समय में हुए ऑपरेशन सिंदूर के अनुभवों ने भी सेना की रणनीति को बदलने में भूमिका निभाई है। अब फोकस बड़े सैन्य जमावड़े पर नहीं, बल्कि तेज, सटीक और तकनीक आधारित ऑपरेशन पर है। अग्नि वर्षा अभ्यास इसी नई सोच का हिस्सा है, जहां कम समय में ज्यादा असर डालने की क्षमता पर जोर दिया जा रहा है। (Exercise Agni Varsha)

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