📍नई दिल्ली/बेंगलुरु | 8 Apr, 2026, 9:46 PM
RUAV-200 Drone: रणसंवाद कार्यक्रम में हिस्सा लेने बेंगलुरु पहुंचे आर्मी चीफ उपेंद्र द्विवेदी गुरुवार को हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) पहुंचे, जहां उन्होंने देश में डेवलप हो रहीं स्वदेशी एयरोस्पेस क्षमताओं और आर्मी एविएशन से जुड़े प्रोजेक्ट्स की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर ध्रुव के अलावा RUAV-200 यानी रोटरी अनमैन्ड एरियल व्हीकल को करीब से देखा और उसकी ऑपरेशनल क्षमता को समझा। वहीं, इस दौरान उन्होंने भारत के स्वदेशी लाइट कॉम्बैट अटैक हेलीकॉप्टर प्रचंड में भी उड़ान भरी और उसकी ऑपरेशनल क्षमता का जायजा लिया।
RUAV-200 Drone: क्या है RUAV-200 ड्रोन
RUAV-200 यानी रोटरी अनमैन्ड एरियल व्हीकल, यह एक ऐसा ड्रोन है जो हेलीकॉप्टर की तरह उड़ता है और बिना पायलट के ऑपरेट होता है। इसे खास तौर पर निगरानी, जानकारी जुटाने और टारगेट पहचान जैसे कामों के लिए तैयार किया गया है।
यह ड्रोन पूरी तरह ऑटोनोमस यानी खुद से उड़ान भर सकता है और मिशन पूरा कर सकता है। इसमें नेटवर्क-सेंट्रिक ऑपरेशन की क्षमता है, यानी यह दूसरे सिस्टम्स के साथ मिलकर काम कर सकता है। इसमें लगे कैमरे और सेंसर दिन और रात दोनों समय काम कर सकते हैं, जिससे लगातार निगरानी संभव होती है।

RUAV-200 की तकनीकी खूबियां
RUAV-200 का वजन करीब 200 किलोग्राम है, जो समुद्र तल पर 250 किलोग्राम तक हो सकता है। यह लगभग 4.5 घंटे तक लगातार उड़ सकता है और इसकी डेटा लिंक रेंज करीब 100 किलोमीटर है। इसका मतलब है कि इसे काफी दूर से कंट्रोल किया जा सकता है।
यह ड्रोन करीब 6000 मीटर तक की ऊंचाई पर पहाड़ी इलाकों में भी उड़ान भर सकता है। इसकी अधिकतम स्पीड करीब 100 किलोमीटर प्रति घंटा है। इसमें 30 किलोग्राम तक का पेलोड ले जाने की क्षमता है, जो समुद्र तल पर 80 किलोग्राम तक पहुंच सकती है।
इसमें पोर्टेबल और फिक्स्ड दोनों तरह के ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन का विकल्प है, जिससे इसे अलग-अलग परिस्थितियों में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके साथ ही इसमें रियल टाइम वीडियो और डेटा फीड देने की क्षमता भी है, जिससे जमीन पर मौजूद कमांड सेंटर को तुरंत जानकारी मिलती रहती है।
जमीन और समुद्र दोनों जगह इस्तेमाल
RUAV-200 को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसे जमीन और समुद्र दोनों जगह इस्तेमाल किया जा सके। जमीन पर यह बॉर्डर निगरानी, टारगेट ट्रैकिंग, आईईडी और लैंडमाइन की पहचान जैसे काम कर सकता है। इसके अलावा यह जमीन का सर्वे और मैपिंग भी कर सकता है।
आपदा के समय राहत और बचाव कार्यों में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं समुद्री ऑपरेशन में यह तटीय निगरानी, एंटी-पायरेसी ऑपरेशन और पोर्ट मॉनिटरिंग में काम आ सकता है। कुछ मामलों में इसे रडार और मिसाइल से बचाव के लिए डिकॉय के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
अलग-अलग मिशन के लिए बदल सकता है सिस्टम
इस हेलीकॉप्टर ड्रोन की एक खास बात यह है कि इसमें अलग-अलग तरह के पेलोड लगाए जा सकते हैं। इसमें इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इंफ्रारेड कैमरा, सिंथेटिक एपर्चर रडार, इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस और कम्युनिकेशन इंटेलिजेंस सिस्टम लगाए जा सकते हैं।
इसके अलावा इसमें लिडार, हाईपर-स्पेक्ट्रल कैमरा, सर्च लाइट और लाउड हेलर जैसे उपकरण भी लगाए जा सकते हैं। इससे यह ड्रोन अलग-अलग मिशन के हिसाब से खुद को बदल सकता है।
लंबे समय से चल रहा है RUAV प्रोजेक्ट
RUAV-200 प्रोजेक्ट पर काम कई सालों से चल रहा है। पहले 2009 में एक अनमैन्ड हेलीकॉप्टर का कॉन्सेप्ट सामने आया था, जो बाद में डेवलप होकर RUAV के रूप में सामने आया। एरो इंडिया 2025 में इसे शोकेस भी किया गया था।
बीच में निजी कंपनियों के कुछ ड्रोन सिस्टम भी सेना में शामिल हुए, लेकिन एचएएल के बनाए इस प्रोजेक्ट को खास तौर पर ऊंचाई वाले इलाकों और कठिन परिस्थितियों के लिए डिजाइन किया गया है।
हाई एल्टीट्यूड ऑपरेशन के लिए तैयार
RUAV-200 को खास तौर पर ऐसे इलाकों के लिए बनाया गया है जहां हवा पतली होती है, तापमान बेहद कम होता है और मौसम तेजी से बदलता है। यह ड्रोन -35 डिग्री से लेकर +55 डिग्री तक के तापमान में काम कर सकता है।
यह 4000 मीटर से ज्यादा ऊंचाई वाले इलाकों से भी उड़ान भर सकता है, जो पहाड़ी सीमाओं के लिए जरूरी है। इसी वजह से इसे बॉर्डर एरिया में तैनात सैनिकों के लिए उपयोगी माना जा रहा है।
Chief of the Army Staff General Upendra Dwivedi, , visited Hindustan Aeronautics Limited (HAL) today and undertook a sortie in the Prachand Light Combat Helicopter, experiencing first-hand its performance, agility, and mission readiness.
During the visit, the COAS also toured the… pic.twitter.com/4NpVZbbmox— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) April 8, 2026

प्रचंड हेलीकॉप्टर में भरी उड़ान
इस दौरे के दौरान आर्मी चीफ ने स्वदेशी लाइट कॉम्बैट अटैक हेलीकॉप्टर प्रचंड में भी उड़ान भरकर उन्होंने इसकी स्पीड, कंट्रोल, मारक क्षमता को नजदीक से देखा। साथ ही यह भी बताया गया कि इन हेलीकॉप्टर्स का अपग्रेड, मेंटेनेंस और प्रोडक्शन किस तरह किया जा रहा है। यह हेलीकॉप्टर पूरी तरह ऑपरेशनल है और युद्ध के मैदान में अहम भूमिका निभाने के लिए तैयार है। प्रचंड को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह दुश्मन के खिलाफ सटीक और तेज हमला कर सके और जमीन पर लड़ रही सेना को सीधे हवाई सपोर्ट दे सके।

हल्का और फुर्तीला होने की वजह से यह हेलीकॉप्टर हर तरह के इलाके में आसानी से ऑपरेट कर सकता है। चाहे पहाड़ी इलाका हो, रेगिस्तान हो या सामान्य मैदान, यह हर जगह अपनी भूमिका निभाने में सक्षम है। प्रचंड को खास तौर पर ऊंचाई वाले इलाकों के लिए तैयार किया गया है। यह 6000 मीटर से ज्यादा ऊंचाई पर भी प्रभावी तरीके से काम कर सकता है, जहां हवा पतली होती है और सामान्य हेलीकॉप्टरों के लिए उड़ान भरना मुश्किल होता है। इसमें एडवांस्ड एवियोनिक्स सिस्टम, सटीक हथियार और मजबूत सुरक्षा फीचर्स लगाए गए हैं, जिससे यह क्लोज एयर सपोर्ट, एंटी-आर्मर ऑपरेशन और निगरानी जैसे मिशनों में बेहद उपयोगी है।

एयर लिटोरल पर सेना का फोकस
आज का युद्ध पहले से काफी बदल चुका है। अब सिर्फ टैंक और बंदूकें ही नहीं, बल्कि ड्रोन, लॉइटरिंग म्यूनिशन और अनमैन्ड एरियल सिस्टम भी बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। युद्ध अब जमीन से आगे बढ़कर नीचे के हवाई क्षेत्र तक फैल चुका है, जिसे एयर लिटोरल कहा जाता है। यह वह इलाका है जहां कम ऊंचाई पर हेलीकॉप्टर, ड्रोन और अन्य सिस्टम काम करते हैं। हाल के संघर्षों में यह देखा गया है कि इस इलाके पर नियंत्रण रखने वाली सेना को बड़ा फायदा मिलता है। इसी वजह से अब सेनाएं इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने पर जोर दे रही हैं। (RUAV-200 Drone)

