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तेजस एमके-1ए और ट्रेनर जेट एचटीटी-40 की डिलीवरी क्यों अटकी? HAL ने बताई वजह

एचएएल के अनुसार, ज्यो-पॉलिटिक्स दिक्कतों और तकनीकी चुनौतियों के चलते ये दिक्कतें हुईं, जिससे जरूरी उपकरण और इंजन समय पर नहीं मिल सके...

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📍नई दिल्ली/बेंगलुरु | 31 Mar, 2026, 10:34 PM

Tejas Mk1A-HTT-40 delivery delay: स्वदेशी फाइटर जेट तेजस एमके-1ए और बेसिक ट्रेनर जेट एचटीटी-40 की डिलीवरी को लेकर हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने कहा कि इन दोनों प्रोजेक्ट्स में देरी की बड़ी वजह सप्लाई चेन से जुड़ी समस्याएं हैं। एचएएल के अनुसार, ज्यो-पॉलिटिक्स दिक्कतों और तकनीकी चुनौतियों के चलते ये दिक्कतें हुईं, जिससे जरूरी उपकरण और इंजन समय पर नहीं मिल सके।

Tejas Mk1A-HTT-40 delivery delay: तेजस एमके-1ए: बार-बार बदला डिलीवरी शेड्यूल

तेजस एमके-1ए भारतीय वायुसेना के लिए तैयार किया जा रहा आधुनिक हल्का लड़ाकू विमान है। पहले इसकी डिलीवरी मार्च 2024 तक करने का लक्ष्य रखा गया था। उस समय योजना यह थी कि इसके बाद लगातार विमान वायुसेना को मिलते रहेंगे।

लेकिन ऐसा नहीं हो सका। समय के साथ इसका शेड्यूल बदलता गया। पहले इसे 2024 के आखिर तक खिसकाया गया, फिर 2025 के आखिर तक कुछ विमानों की डिलीवरी देने का नया लक्ष्य रखा गया। बाद में एचएएल ने कहा कि मार्च 2026 तक पांच विमानों की डिलीवरी कर देगी।

इस देरी की सबसे बड़ी वजह जीई एयरोस्पेस से एफ-404 इंजन की सप्लाई में रुकावट रही। विमान के लिए जरूरी इंजन समय पर नहीं पहुंच पाए, जिससे तैयार एयरफ्रेम भी आगे नहीं बढ़ सके। इसके अलावा विमान के सिस्टम को पूरी तरह जोड़ने और टेस्ट करने में भी समय लगा। वायुसेना इन विमानों को पूरी तरह तैयार स्थिति में ही लेना चाहती है, इसलिए अधूरी तैयारी के साथ डिलीवरी नहीं हो पाई।

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एचएएल के पास तेजस मार्क-1ए के कुल 180 विमानों के ऑर्डर हैं। ये ऑर्डर दो बड़े चरणों में दिए गए हैं। इसमें 83 विमान पहले चरण के हैं और 97 विमान दूसरे चरण के। इनमें सिंगल सीटर फाइटर और ट्विन सीटर ट्रेनर दोनों शामिल हैं।

पहला ऑर्डर फरवरी 2021 में रक्षा मंत्रालय ने एचएएल के साथ लगभग 48,000 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट दिया था। इस डील में 83 तेजस एमके-वन-ए विमान शामिल थे, जिनमें 73 सिंगल सीटर फाइटर और 10 ट्विन सीटर ट्रेनर विमान थे।

वहीं, दूसरा 62,370 करोड़ रुपये का बड़ा ऑर्डर 25 सितंबर 2025 को साइन हुआ। इसमें 97 तेजस एमके-वन-1ए विमान शामिल हैं, जिनमें 68 सिंगल सीटर फाइटर और 29 ट्विन सीटर ट्रेनर हैं।

एचएएल ने उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए बेंगलुरु और नासिक में असेंबली लाइनें तैयार की हैं। कंपनी का लक्ष्य सालाना 16 से 24 विमान बनाने का है। (Tejas Mk1A-HTT-40 delivery delay)

एचटीटी-40: ट्रेनर विमान डिलीवरी में हुई देरी

एचटीटी-40 एक बेसिक ट्रेनर विमान है, जिसका इस्तेमाल नए पायलटों को ट्रेनिंग देने के लिए किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के लिए शुरुआत में 2025 सितंबर तक ज्यादा संख्या में विमान देने का लक्ष्य तय किया गया था।

लेकिन इसकी डिलीवरी भी समय से पीछे चली गई। हनीवेल कंपनी से इंजन मिलने में समस्या आई। दिसंबर 2025 में लक्ष्य घटाकर सिर्फ तीन विमान कर दिया गया। इंजन की पहली खेप सितंबर 2025 में आने वाली थी, जो जनवरी 2026 तक टल गई। कंपनी ने उत्पादन लाइन तेज करने की कोशिश की, लेकिन उत्पादन की तैयारी होने के बावजूद जरूरी पार्ट्स की कमी ने काम की रफ्तार को धीमा कर दिया।

एचएएल के पास एचटीटी-40 के कुल 70 विमानों का फर्म ऑर्डर है। इसके अलावा 38 और विमानों का विकल्प भी रखा गया है। रक्षा मंत्रालय ने मार्च 2023 में एचएएल के साथ यह कॉन्ट्रैक्ट साइन किया था। अनुबंध की कुल कीमत लगभग 6,828 करोड़ रुपये है। इसमें विमान के साथ जरूरी उपकरण, सिमुलेटर और प्रशिक्षण सामग्री भी शामिल है। डिलीवरी छह साल के अंदर पूरी करने की योजना थी।

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वायुसेना को बेसिक ट्रेनर विमानों की जरूरत है। पुराने एचपीटी-32 दीपक ट्रेनर 2014 में सर्विस से बाहर हो गए थे। उसके बाद 75 पिलाटस पीसी-7 एमके-टू ट्रेनर आयात किए गए। लेकिन स्वदेशी विकल्प की जरूरत महसूस होने पर एचटीटी-40 प्रोजेक्ट को बढ़ावा दिया गया। एचएएल ने 2016 में इसका पहला प्रोटोटाइप उड़ाया। उसके बाद अक्टूबर 2022 और मार्च 2023 में अंतिम अनुबंध तय हुआ। इस विमान में हनीवेल का टीपीई331-12बी टर्बोप्रॉप इंजन लगा है।

क्या है सप्लाई चेन की समस्या

एयरोस्पेस सेक्टर में किसी भी विमान को बनाने के लिए कई तरह के पार्ट्स और सिस्टम अलग-अलग जगहों से मंगाए जाते हैं। इनमें इंजन, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और कई अहम कंपोनेंट शामिल होते हैं।

अगर इनमें से कोई एक भी हिस्सा समय पर नहीं मिलता, तो पूरा उत्पादन रुक जाता है। एचएएल ने बताया कि तेजस और एचटीटी-40 के साथ भी यही हुआ। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे तनाव और तकनीकी दिक्कतों के कारण सप्लाई में रुकावट आई, जिसका सीधा असर डिलीवरी पर पड़ा। (Tejas Mk1A-HTT-40 delivery delay)

दूसरे प्रोडक्ट्स ने संभाली स्थिति

इन दोनों प्रोजेक्ट्स में देरी के बावजूद एचएएल ने अपने दूसरे प्रोडक्ट्स की डिलीवरी तेज कर दी। कंपनी ने एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर, एएल-31 एफपी इंजन, आरडी-33 इंजन और अन्य सेवाओं की सप्लाई बढ़ाई।

इन प्रोडक्ट्स की वजह से कंपनी की कुल आय पर ज्यादा असर नहीं पड़ा। यानी जहां एक तरफ तेजस और एचटीटी-40 की डिलीवरी धीमी रही, वहीं बाकी काम तेजी से चलता रहा, जिससे कंपनी का प्रदर्शन संतुलित बना रहा।

एचएएल के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर डीके सुनील ने कहा कि कंपनी ने मुश्किल हालात में भी अपना काम जारी रखा। उनके मुताबिक, वैश्विक तनाव, संघर्ष और सप्लाई से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद कंपनी ने स्थिर ग्रोथ बनाए रखी।

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उन्होंने यह भी बताया कि पिछले एक साल में कंपनी ने अपने ऑर्डर बढ़ाए और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को मजबूत किया।

इन चुनौतियों के बावजूद एचएएल का वित्तीय प्रदर्शन मजबूत रहा। वित्तीय वर्ष 2025-26 में कंपनी का कुल रेवेन्यू बढ़कर 32,250 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल यह 30,981 करोड़ रुपये था।

यह बढ़ोतरी इसलिए संभव हो सकी क्योंकि कंपनी ने दूसरे प्रोडक्ट्स और सेवाओं की डिलीवरी तेज कर दी थी। इससे कुल आय और मुनाफा संतुलित बना रहा। (Tejas Mk1A-HTT-40 delivery delay)

ऑर्डर बुक करीब 2.54 लाख करोड़ रुपये

31 मार्च तक एचएएल की ऑर्डर बुक करीब 2.54 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। इससे पहले यह 1.89 लाख करोड़ रुपये थी। इस बढ़ोतरी में रक्षा मंत्रालय के साथ हुए बड़े समझौते शामिल हैं। इनमें तेजस एमके-वन-ए विमान के लिए बड़ा ऑर्डर भी शामिल है। इसके अलावा हेलीकॉप्टर और अन्य एयरक्राफ्ट के ऑर्डर भी कंपनी को मिले हैं। (Tejas Mk1A-HTT-40 delivery delay)

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  • News Desk

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