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तेजस को लेकर जीई और एचएएल के बीच हुई अहम बैठक, इंजन की समय पर डिलीवरी को लेकर हुई बात

इस साल मार्च 2026 तक 5 और अतिरिक्त इंजन मिलने की उम्मीद थी, लेकिन वह भी पूरी नहीं हुई। इससे तेजस एमके1ए का प्रोडक्शन सीधे प्रभावित हुआ है। कई विमान बनकर तैयार हैं, लेकिन इंजन न होने की वजह से उन्हें उड़ान के लिए तैयार नहीं किया जा सका...

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📍नई दिल्ली/बेंगलुरु | 8 Apr, 2026, 8:26 PM

Tejas engine delay GE HAL meeting: लगभग दो महीने के ग्राउंडिंग के बाद, 34 तेजस फाइटर जेट्स की फ्लीट ने 8 अप्रैल से उड़ान भरनी शुरू कर दी है। वहीं बेंगलुरु में बुधवार को हिंदुस्ताान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) में अहम बैठक हुई। इस बैठक में तेजस के लिए इंजन बनाने वाली अमेरिकी कंपनी जीई एरोस्पेस के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने एचएएल के अधिकारियों से मुलाकात की। वहीं, इस अहम बैठक का फोकस तेजस के इंजन की डिलीवरी में देरी और आगे की योजना को लेकर था।

जीई एरोस्पेस की टीम का नेतृत्व कंपनी की वाइस प्रेसिडेंट रीटा फ्लेहर्टी कर रही थीं। जबकि एचएएल की तरफ से चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. डीके सुनील और डायरेक्टर (ऑपरेशंस) रवि के. शामिल हुए।

Tejas engine delay GE HAL meeting: एफ-404 इंजन की देरी पर जताई चिंता

सूत्रों के मुताबिक इस बैठक का सबसे बड़ा मुद्दा एफ-404 इंजन की सप्लाई का रहा। यही इंजन भारतीय वायुसेना के तेजस एमके1ए (मार्क अल्फा) फाइटर जेट में लगाया जाता है। एचएएल ने साल 2021 में जीई से (83 विमानों का ऑर्डर) कुल 99 एफ-404 इंजन का ऑर्डर दिया था, ताकि तेजस एमके1ए के प्रोडक्शन को तेज किया जा सके। लेकिन अब तक केवल 6 इंजन ही एचएएल को मिल पाए हैं। छठा इंजन हाल ही में अमेरिका में हैंडओवर किया गया है, जिसे भारत आने में थोड़ा वक्त लगेगा।

सूत्रों के बताया कि असल समस्या ग्लोबल सप्लाई चेन में आई दिक्कतों से जुड़ी है। कोरोना के बाद से दुनिया भर में मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स पर असर पड़ा था, जिसका असर अब भी कई डिफेंस प्रोजेक्ट्स पर दिख रहा है। जीई भी इसी वजह से समय पर इंजन नहीं दे पाया।

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वहीं, इस साल मार्च 2026 तक 5 और अतिरिक्त इंजन मिलने की उम्मीद थी, लेकिन वह भी पूरी नहीं हुई। इससे तेजस एमके1ए का प्रोडक्शन सीधे प्रभावित हुआ है। कई विमान बनकर तैयार हैं, लेकिन इंजन न होने की वजह से उन्हें उड़ान के लिए तैयार नहीं किया जा सका। वहीं, पहले तेजस एमके 1ए की डिलीवरी अब इस साल जून तक होने की उम्मीद है।

एचएएल ने लगाई जीई पर पेनल्टी

इंजन डिलीवरी में देरी को लेकर एचएएल ने अब सख्त रुख अपनाया है। कंपनी ने जीई पर कॉन्ट्रैक्चुअल पेनल्टी यानी लिक्विडेटेड डैमेज लगाना शुरू कर दिया है। जिसके तहत हर देरी वाले इंजन पर जीई को जुर्माना देना होगा। यह कदम इसलिए उठाया गया ताकि सप्लाई को लेकर गंभीरता बनी रहे।

बैठक में इसी मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई कि अब तक कितनी डिलीवरी हुई, कितनी बाकी है और आगे किस तरह से देरी को कम किया जा सकता है। जीई की तरफ से भी यह भरोसा दिलाया गया कि अब सप्लाई की रफ्तार बढ़ाई जाएगी।

बैठक के दौरान जीई ने एचएएल को भरोसा दिलाया कि 2026 के दूसरे हिस्से यानी जून से दिसंबर के बीच करीब 20 इंजन डिलीवर कर दिए जाएंगे। अगर ऐसा होता है तो तेजस एमके1ए प्रोग्राम को कुछ राहत मिल सकती है।

हालांकि पहले भी कई बार डेडलाइन मिस हो चुकी हैं, इसलिए एचएएल इस बार ज्यादा सतर्क नजर आ रहा है। कंपनी अब हर डिलीवरी को करीब से मॉनिटर कर रही है, ताकि आगे किसी तरह की अनिश्चितता न रहे।

इंजन की कमी का असर सिर्फ सप्लाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पूरे प्रोडक्शन लाइन पर असर पड़ा है। एचएएल के पास कई विमान तैयार हैं, जिनमें सिस्टम इंस्टॉल हो चुके हैं, टेस्टिंग भी हो चुकी है, लेकिन इंजन न होने की वजह से वे हैंगर में खड़े हैं।

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इंजन सप्लाई में सबसे बड़ी रुकावट सप्लाई चेन है। इंजन बन जाने के बाद भी उन्हें समय पर डिलीवर करना आसान नहीं होता। इंटरनेशनल शिपमेंट, एक्सपोर्ट क्लियरेंस और लॉजिस्टिक्स जैसी कई प्रक्रियाएं इसमें शामिल होती हैं।

तेजस एमके1ए भारतीय वायुसेना के लिए बेहद अहम है, क्योंकि यह पुराने लड़ाकू विमानों को रिप्लेस करेगा। ऐसे में इंजन की देरी ने पूरे शेड्यूल को पीछे धकेल दिया है।

एफ-414 इंजन प्रोग्राम पर भी हुई चर्चा

इस बैठक में एफ-414 इंजन प्रोग्राम को लेकर भी चर्चा हुई। यह इंजन तेजस एमके2 फाइटर जेट के लिए लगाया जाना है। और यह इंजन एफ-404से ज्यादा ताकतवर है। इस पर भारत और जीई के बीच ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी यानी टी-ओ-टी को लेकर बातचीत चल रही है।

भारत चाहता है कि इस इंजन की तकनीक का बड़ा हिस्सा देश में आए, ताकि भविष्य में इन्हें भारत में ही बनाया जा सके। यह आत्मनिर्भरता के लिहाज से बहुत अहम माना जा रहा है। हालांकि इस डील पर अभी पूरी तरह सहमति नहीं बन पाई है और बातचीत जारी है।

एचएएल और जीई के बीच सहयोग नया नहीं है। दोनों कंपनियां लंबे समय से साथ काम कर रही हैं, खासकर तेजस प्रोग्राम में जीई का अहम रोल रहा है। एफ-404 इंजन भी इसी साझेदारी का हिस्सा है।

इस बैठक में जीई के प्रतिनिधियों ने एचएएल के एयरक्राफ्ट डिवीजन का दौरा भी किया और तेजस एमके1ए के प्रोडक्शन को देखा।

हालांकि आज हुई इस बैठक में किसी नए प्रोजेक्ट की घोषणा नहीं हुई, बल्कि पहले से चल रहे प्रोग्राम्स की समीक्षा पर जोर रहा। खास तौर पर यह देखा गया कि कहां दिक्कत आ रही है और उसे कैसे दूर किया जाए। (Tejas engine delay GE HAL meeting)

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