📍चंडीगढ़ | 28 Sep, 2025, 1:44 PM
MiG-21 Farewell: चंडीगढ़ एयरबेस पर 26 सितंबर 2025 का दिन भारतीय वायुसेना के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया। 62 वर्षों तक भारत के आसमान की सुरक्षा करने वाले MiG-21 फाइटर जेट्स को भावुक विदाई दी गई। वहीं, इस समारोह की पूरी रूपरेखा अमेठी निवासी और हाल ही में रिटायर हुए स्क्वाड्रन लीडर सुबोध दीक्षित ने तैयार की थी। वे इससे पहले भी कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय एयरशो आयोजित कर चुके हैं, जिसके बाद भारतीय वायुसेना ने उन्हें इस विशेष मौके के लिए खासतौर पर आमंत्रित किया था।
जगुआर और तेजस को किया शामिल
अमेठी के कोरवा आयुधपुरम निवासी स्क्वाड्रन लीडर सुबोध दीक्षित के रिटायर होने के बाद भी वायुसेना ने उनके अनुभवों का सम्मान करते हुए मिग-21 के फेयरवेल एयरशो को यादगार बनाने के लिए उन्हें यह खास जिम्मेदारी सौंपी। स्क्वाड्रन लीडर सुबोध दीक्षित ने MiG-21 Farewell के साथ-साथ जगुआर बॉम्बर और लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस के करतबों को भी एयरशो में शामिल किया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमरप्रीत सिंह और पश्चिमी वायु कमान के वरिष्ठ अधिकारियों समेत देश-विदेश से आए गणमान्य अतिथियों के सामने यह कार्यक्रम शानदार ढंग से आयोजित किया गया।
मिग-21 दुनिया के सबसे प्रसिद्ध जेट विमानों में से एक रहा है। सोवियत संघ में निर्मित इस सुपरसोनिक फाइटर जेट ने 1955 में पहली उड़ान भरी और 1985 तक इसके 10,000 से अधिक विमान बनाए गए। पश्चिमी देशों ने इसे “फिशबेड” नाम दिया था। भारत ने 1963 में इसे शामिल किया और तब से यह पाकिस्तान के खिलाफ कई युद्धों और संघर्षों में निर्णायक साबित हुआ।
62 साल की सेवा में इस विमान ने न सिर्फ भारत की सीमाओं की रक्षा की बल्कि कई बार दुश्मनों को धूल चटाई। 1971 के युद्ध से लेकर कारगिल और बालाकोट एयर स्ट्राइक औऱ हाल में हुए ऑपरेशन सिंदूर में भी MiG-21 ने हर मिशन में तिरंगे को गर्व से उड़ाया।
आखिरी 23 स्क्वाड्रन का रहे हिस्सा
सुबोध दीक्षित MiG-21 Farewell की आखिरी बची 23 स्क्वाड्रन का हिस्सा रहे। वे बताते हैं कि राजस्थान की भीषण गर्मी में भी वे रनवे के किनारे खड़े होकर मिग-21 की टेकऑफ देखना पसंद करते थे। इस विमान की बारीकियों को समझने और उसके ऑपरेशन को देखना उनके लिए गर्व की बात थी और MiG-21 Farewell अब जल्द ही होने वाली है।
ट्रैफिक कंट्रोल ऑफिसर के तौर पर भी उन्हें 2019 और 2023 में वायु कमान मेंटेनेंस कमांड नागपुर और सेंट्रल एयर कमांड प्रयागराज से प्रशस्ति पत्र भी मिला। एयर मार्शल अर्जन सिंह से लिखित प्रशंसा पत्र पाना उनके करियर का खास पल रहा। 25 मई 2024 को उत्तर प्रदेश की राज्यपाल ने भी उनकी लेखन कला और पुस्तकों को सराहा।
सुबोध दीक्षित को तीनों सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारियों से 20 से अधिक प्रशंसा पत्र मिले हैं। वे मानते हैं कि धर्म और राष्ट्र की रक्षा के लिए ईश्वर किसी योग्य व्यक्ति को चुनकर उसका मार्गदर्शन करता है। उनकी यह यात्रा युवाओं के लिए प्रेरणा है। वे यह संदेश देते हैं कि रिटायर हुआ सैनिक किसी काम का नहीं होता, बल्कि अपने अनुभव और सेवा से समाज और राष्ट्रहित में योगदान देता रहता है।
वहीं, स्क्वाड्रन लीडर सुबोध दीक्षित का यह योगदान अमेठी ही नहीं, पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। MiG-21 के विदाई समारोह में उनकी भूमिका ने यह साबित किया कि भारतीय वायुसेना अपने दिग्गजों को हमेशा सम्मान देती है और उनके अनुभव को राष्ट्रहित में जोड़ती है और अब MiG-21 Farewell हो रही है।


