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LCA Tejas Delay: क्या भारत में अब निजी कंपनियां बनाएंगी फाइटर जेट? राजनाथ सिंह को सौंपी रिपोर्ट, क्या होगा HAL का रोल?

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📍नई दिल्ली | 3 Mar, 2025, 10:05 PM

LCA Tejas Delay: भारतीय वायुसेना (IAF) की युद्धक क्षमताओं को मजबूत करने और स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने “सशक्त समिति” (Empowered Committee for Capability Enhancement of IAF) की रिपोर्ट सोमवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को सौंप दी। यह रिपोर्ट वायुसेना की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए शार्ट टर्म, मीडियम टर्म एंड लॉन्ग टर्म सिफारिशें पेश की गई हैं। जिससे भारतीय वायुसेना को अत्याधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में स्पष्ट रोडमैप तैयार किया जा सके।

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LCA Tejas Delay: निजी क्षेत्र की भागीदारी को बताया जरूरी

इस रिपोर्ट का मुख्य फोकस ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल को और तेज करना है, जिसमें रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (DPSUs) और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के साथ-साथ निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी जरूरी बताया गया है। रक्षा मंत्री ने इस रिपोर्ट की सराहना करते हुए सिफारिशों को समयबद्ध तरीके से लागू करने के निर्देश दिए हैं।

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इस समिति का गठन रक्षा मंत्री के निर्देश पर किया गया था, ताकि भारतीय वायुसेना की सभी ऑपरेशनल जरूरतों की व्यापक समीक्षा की जा सके। रक्षा सचिव की अध्यक्षता वाली इस समिति में वायुसेना के उपप्रमुख, रक्षा उत्पादन सचिव, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव, DRDO के अध्यक्ष और DG एक्वीजीशन को सदस्य के रूप में शामिल किया गया था।

LCA Tejas Delay: तेजस MkII प्रोजेक्ट में निजी क्षेत्र की एंट्री?

भारतीय वायुसेना अपने लड़ाकू विमानों के मॉर्डनाइजेशन को लेकर बड़े फैसले ले रही है। जिसके चलते वायुसेना तेजस MkII प्रोग्राम को रफ्तार देने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी की भी बात कर रही है। इस प्रोजेक्ट के तहत वायुसेना इस लड़ाकू विमान के विकास में लगभग 10,000 करोड़ रुपये की लागत का 30 फीसदी खुद वहन कर रही है।

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IAF ने पहले ही 120 तेजस MkII विमानों की खरीद की बात कही है, जो 2034-35 से पुराने मिराज-2000 और MiG-29UPG विमानों को रिप्लेस करेंगे। अब वायुसेना इसके अतिरिक्त 180 और तेजस MkII विमानों की खरीद पर विचार कर रही है, जिससे कुल संख्या 300 हो सकती है। यदि रक्षा मंत्रालय (MoD) निजी क्षेत्र की भागीदारी को मंजूरी देता है, तो यह भारत के रक्षा उत्पादन क्षेत्र के लिए एक बड़ा बदलाव होगा।

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LCA Tejas Delay: प्राइवेट कंपनियां बनाएं 60 तेजस MkII

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) तेजस MkI और MkIA वेरिएंट का प्रोडक्शन कर रहा है, लेकिन वह सालाना केवल 16-20 विमान ही बना सकता है। ऐसे में, तेजस MkII के लिए HAL के अलावा एक और प्रोडक्शन लाइन की जरूरत महसूस की जा रही है, जिसका जिम्मा किसी निजी कंपनी के पास हो। वायुसेना चाहती है कि निजी कंपनियों को भी इसमें शामिल किया जाए ताकि तेजस MkII की डिलीवरी समय पर हो सके।

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वायुसेना सूत्रों का कहना है कि कम से कम 60 तेजस MkII विमानों का निर्माण निजी कंपनियों द्वारा किया जाएगा। इसके लिए टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL), लार्सन एंड टुब्रो (L&T) और रिलायंस डिफेंस जैसी कंपनियों को संभावित साझेदार के रूप में देखा जा रहा है। इन कंपनियों के पास आधुनिक प्रोडक्शन फैसिलिटी और कैपिटल इन्वेस्टमेंट की क्षमता है, जिससे तेजस MkII के प्रोडक्शन में तेजी आ सकती है।

क्या निजी कंपनियों की होगी एंट्री?

यदि रक्षा मंत्रालय (MoD) इस योजना को मंजूरी देता है, तो कुल 300 तेजस MkII विमानों की खरीद पर 75,000-90,000 हजार करोड़ (250-300 करोड़ रुपये प्रति विमान) खर्च हो सकते हैं। वायुसेना ने इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए रक्षा मंत्रालय से हरी झंडी मांगी है, जिससे HAL और निजी कंपनियां मिलकर एक हाइब्रिड प्रोडक्शन मॉडल पर काम कर सकें। इस नए ढांचे में HAL डिजाइन, प्रोटोटाइप और शुरुआती प्रोडक्शन पर फोकस करेगा। जबकि निजी कंपनियां बड़े पैमाने पर उत्पादन, निर्यात और सप्लाई चेन को बेहतर बनाने का काम करेंगी।

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डेवलपमेंट फेज में है तेजस MkII

तेजस MkII प्रोजेक्ट अभी भी डेवलपमेंट फेज में है। इसके अभी इंजन इंटीग्रेशन, एवियोनिक्स टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन का काम चल रहा है। तेजस MkII की पहली उड़ान 2026 में होने की उम्मीद है, लेकिन अगर किसी वजह से देरी होती है, तो 2034-35 तक इसकी डिलीवरी भी प्रभावित हो सकती है। वहीं इस फैसले से HAL का बोझ कम होगा। जबकि HAL अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं, जैसे AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) और TEDBF (Twin Engine Deck Based Fighter) पर फोकस कर सकेगा।

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  • LCA Tejas Delay: क्या भारत में अब निजी कंपनियां बनाएंगी फाइटर जेट? राजनाथ सिंह को सौंपी रिपोर्ट, क्या होगा HAL का रोल?

    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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