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IAF Modernisation 2026: इस साल ‘हेवीवेट फोर्स’ बनेगी भारतीय वायुसेना, 2026 में मिड-एयर रिफ्यूलर, अवाक्स और 114 फाइटर जेट को मंजूरी की तैयारी

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📍नई दिल्ली | 1 Jan, 2026, 1:34 PM

IAF Modernisation 2026: 2026 में भारतीय वायुसेना को एक “हेवीवेट फोर्स” बनाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। भारतीय वायुसेना आने वाले दो साल में अपनी क्षमता में ऐसा इजाफा करने जा रही है, जिससे वह सिर्फ क्षेत्रीय ही नहीं, बल्कि रणनीतिक स्तर पर भी एक मजबूत “हेवीवेट एयर फोर्स” के रूप में उभरेगी। दिसंबर 2025 के आखिरी में हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) में ऐसे कई प्रस्तावों को मंजूरियां दी गईं, जिनका मकसद एयर ऑपरेशन को कई गुना ज्यादा प्रभावी बनाना हैं।

डिफेंस सूत्रों के मुताबिक मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वायुसेना ने कई अहम सबक सीखे। उस ऑपरेशन में पाकिस्तान के पास एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग सिस्टम यानी अवाक्स की संख्या भारत से ज्यादा थी। हालांकि भारतीय वायुसेना ने हालात को संभाला, लेकिन यह साफ हो गया कि भविष्य में सिर्फ फाइटर जेट्स की संख्या बढ़ाना काफी नहीं होगा। हवा में ईंधन भरने की क्षमता, लंबी दूरी की निगरानी और मजबूत एयर डिफेंस नेटवर्क उतने ही जरूरी हैं। इन्हीं जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अब बड़े फैसले लिए गए हैं। (IAF Modernisation 2026)

IAF Modernisation 2026: मिड-एयर रिफ्यूलर्स लेने की तैयारी

डिफेंस सूत्रों के अनुसार, रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायुसेना के लिए छह नए मिड-एयर रिफ्यूलर विमान लेने की प्रक्रिया तेज कर दी है। ये विमान बोइंग 767 प्लेटफॉर्म पर आधारित होंगे और इन्हें इजरायल की कंपनी इजरायल एरोस्पेस इंडस्ट्रीज कन्वर्ट करेगी। अनुमान है कि इस पूरे प्रोजेक्ट की लागत करीब 8 से 10 हजार करोड़ रुपये तक हो सकती है। इसके लिए डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल ने जरूरत की मंजूरी यानी एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी दे दी है और अब कीमत तय करने के लिए कॉस्ट नेगोशिएशन कमिटी बनाई जा रही है। इसके बाद मामला कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी के पास जाएगा, जहां से अंतिम हरी झंडी मिलने पर कॉन्ट्रैक्ट साइन होगा।

फिलहाल वायुसेना के पास रूस से खरीदे गए छह आईएल-78 रिफ्यूलर विमान हैं, जो साल 2003 से सर्विस में हैं। डिफेंस सूत्रों का कहना है कि ये विमान अब अपनी उम्र पूरी कर रहे हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते स्पेयर पार्ट्स और मेंटेनेंस में भी दिक्कतें आ रही हैं, जिससे इनकी उपलब्धता कई बार कम हो जाती है।

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नए बोइंग 767 आधारित टैंकर की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि ये बूम और होज-एंड-ड्रोग, दोनों तरह के रिफ्यूलिंग सिस्टम सपोर्ट करेंगे। इससे सुखोई-30 और राफेल जैसे विमानों को एक ही प्लेटफॉर्म से हवा में ईंधन दिया जा सकेगा। डिफेंस सूत्रों के मुताबिक, इससे फाइटर जेट्स की ऑपरेशनल रेंज लगभग दोगुनी हो सकती है और इंडियन ओशन रीजन जैसे इलाकों में लंबे समय तक ऑपरेशन करना आसान होगा। (IAF Modernisation 2026)

IAF Modernisation 2026: एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग सिस्टम पर बड़ा फोकस

सूत्रों के मुताबिक वायुसेना के लिए 12 नए एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम यानी एईडब्ल्यूएंडसी और एडवांस्ड अवाक्स प्लेटफॉर्म भी तैयार किए जा रहे हैं। इसमें दो अलग-अलग तरह के सिस्टम शामिल होंगे। पहला, ब्राजील के एम्ब्रायर जेट्स पर डीआरडीओ द्वारा विकसित नेत्रा मार्क-2 रडार लगाए जाएंगे। यह रडार करीब 270 डिग्री तक निगरानी कर सकता है और इसमें मॉडर्न इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और नेटवर्क सेंट्रिक वॉरफेयर की क्षमता होगी। इसके लिए जल्द ही रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल जारी किया जाएगा। (IAF Modernisation 2026)

दूसरे चरण में एयर इंडिया से लिए गए एयरबस ए319 और ए321 विमानों को फ्रांस में अपग्रेड किया जाएगा। इन विमानों पर 360 डिग्री कवरेज वाला रोटोडोम रडार लगाया जाएगा, जिससे ये पूरी तरह अवाक्स प्लेटफॉर्म बन जाएंगे। डिफेंस सूत्रों का कहना है कि इस कॉन्ट्रैक्ट पर पहले ही दस्तखत हो चुके हैं और अपग्रेड का काम जल्द शुरू होगा।

फिलहाल भारतीय वायुसेना के पास सीमित संख्या में ही अवाक्स और एईडब्ल्यूएंडसी सिस्टम हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान यह कमी साफ तौर पर सामने आई थी, जब पाकिस्तान के पास तुलनात्मक रूप से ज्यादा अवाक्स प्लेटफॉर्म मौजूद थे। पाकिस्तान के पास 9 से 13 अवाक्स सिस्टम बताए जाते हैं। नए 12 सिस्टम शामिल होने के बाद 2030 तक भारतीय वायुसेना के पास 18 से ज्यादा अवाक्स और एईडब्ल्यूएंडसी प्लेटफॉर्म होंगे। इससे न सिर्फ पाकिस्तान, बल्कि चीन के मुकाबले भी संतुलन बेहतर होगा, जिसके पास 30 से ज्यादा ऐसे सिस्टम माने जाते हैं।

यही वजह है कि वायुसेना लंबे समय से इन्हें “फोर्स मल्टीप्लायर” के तौर पर देख रही है। नए सिस्टम शामिल होने से दुश्मन के विमानों, मिसाइलों और ड्रोन पर काफी पहले नजर रखी जा सकेगी। (IAF Modernisation 2026)

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IAF Modernisation 2026: 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट की तैयारी

डिफेंस सूत्रों के मुताबिक, भारतीय वायुसेना के लिए 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट यानी एमआरएफए की खरीद को भी तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। यह सौदा “मेक इन इंडिया” फ्रेमवर्क के तहत किया जाएगा। माना जा रहा है कि फ्रांस से राफेल जेट्स का यह अगला बड़ा ऑर्डर हो सकता है। चर्चा है कि ये विमान राफेल एफ-4 स्टैंडर्ड के हो सकते हैं और भविष्य में एफ-5 वर्जन का विकल्प भी खुला रखा जाएगा।

वायुसेना की स्क्वाड्रन संख्या लगातार घट रही है और पुराने मिग-21 जैसे विमानों के रिटायरमेंट के बाद यह कमी और बढ़ गई है। फिलहाल भारतीय वायुसेना की स्क्वाड्रन संख्या 31 के आसपास है, जबकि जरूरी संख्या 42 है। पुराने मिग-21 और मिग-27 विमानों के रिटायरमेंट के बाद यह कमी और बढ़ गई है। मौजूदा समय में वायुसेना के पास 36 राफेल विमान पहले से सेवा में हैं और भारत में पहले से राफेल के लिए मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल की सुविधा मौजूद है। ऐसे में उसी प्लेटफॉर्म पर आगे बढ़ना लॉजिस्टिक और ऑपरेशनल दोनों लिहाज से आसान होगा। इससे चीन और पाकिस्तान के जे-35 और जेएफ-17 जैसे विमानों से निपटने की क्षमता भी बढ़ेगी। ऐसे में नए 114 विमानों का इसी प्लेटफॉर्म पर आधारित होना लॉजिस्टिक और ऑपरेशनल दोनों नजरिए से आसान माना जा रहा है। (IAF Modernisation 2026)

IAF Modernisation 2026: राफेल और एयर डिफेंस के लिए नई मिसाइलें

डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल ने राफेल लड़ाकू विमानों के लिए 36 और मीटियोर एयर-टू-एयर मिसाइलों की खरीद को भी मंजूरी दे दी है। डिफेंस सूत्रों का कहना है कि कुल संख्या आगे चलकर 50 से 100 से ज्यादा हो सकती है। मीटियोर मिसाइल लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल है और इसे दुनिया की सबसे खतरनाक मिसाइलों में गिना जाता है। मीटियोर मिसाइल की 200 किलोमीटर से ज्यादा की रेंज और रैमजेट इंजन इसे हवा में होने वाली लड़ाई में बेहद खतरनाक बनाते हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इसकी उपयोगिता सामने आ चुकी है। इससे राफेल की बियॉन्ड विजुअल रेंज क्षमता और मजबूत होगी। (IAF Modernisation 2026)

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इसके साथ ही रूस से खरीदे गए एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम के लिए 280 लंबी और छोटी दूरी की मिसाइलों को भी हरी झंडी मिल चुकी है। डिफेंस सूत्रों के अनुसार, भारत और रूस के बीच पांच और एस-400 सिस्टम खरीदने को लेकर भी बातचीत चल रही है। इसके अलावा, पैंटसिर जैसे मीडियम रेंज एयर डिफेंस सिस्टम पर भी विचार हो रहा है, जो ड्रोन, क्रूज मिसाइल और हेलिकॉप्टर जैसे खतरों से निपट सकता है।

IAF Modernisation 2026: ऑपरेशन सिंदूर से मिले सबक

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वायुसेना को कई अहम सबक मिले। खास तौर पर यह समझ में आया कि सिर्फ फाइटर जेट्स की संख्या बढ़ाना ही काफी नहीं है। हवा में ईंधन भरने की क्षमता, बेहतर रडार कवरेज और मजबूत एयर डिफेंस नेटवर्क भी उतने ही जरूरी हैं। पाकिस्तान की तरफ से ज्यादा अवाक्स प्लेटफॉर्म होने के कारण शुरुआती दौर में चुनौती महसूस की गई थी। (IAF Modernisation 2026)

इसी अनुभव के आधार पर अब वायुसेना की योजना बनाई जा रही है, ताकि भविष्य में किसी भी मोर्चे पर ऐसी कमी महसूस न हो। चीन और पाकिस्तान दोनों के साथ दो मोर्चों की चुनौती को ध्यान में रखते हुए यह तैयारियां की जा रही हैं।

इसके साथ ही आत्मनिर्भरता पर भी खास जोर है। डीआरडीओ के स्वदेशी रडार, देश में एमआरओ सुविधाएं और मेक इन इंडिया के तहत उत्पादन से आयात पर निर्भरता कम होगी। डिफेंस सूत्र मानते हैं कि 2026 तक जैसे-जैसे ये सिस्टम वायुसेना में शामिल होंगे, भारतीय एयर पावर की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी। (IAF Modernisation 2026)

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