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IAF Medium Transport Aircraft: भारतीय वायुसेना खरीदेगी 80 नए ट्रांसपोर्ट विमान, अमेरिका, ब्राजील और यूरोप की कंपनियों में कांटे की टक्कर

डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल इस प्रपोजल को दिसंबर के आखिर तक एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी (एओएन) मंजूरी दे सकती है। बता दें कि यह किसी भी डिफेंस सौदे की खरीद की पहली औपचारिक मंजूरी होती है। मंजूरी के बाद 2026 की शुरुआत में टेंडर जारी किए जाएंगे...

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📍नई दिल्ली | 7 Nov, 2025, 12:06 PM

IAF Medium Transport Aircraft: रक्षा मंत्रालय जल्द ही भारतीय वायुसेना के लिए मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (एमटीए) की खरीद प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है। इसके तहत वायुसेना को 18 से 30 टन तक का वजन ढोने वाले 80 तक नए ट्रांसपोर्ट विमान मिल सकते हैं। इस बड़े रक्षा सौदे की दौड़ में तीन अंतरराष्ट्रीय कंपनियां शामिल हैं। जिनमें अमेरिका की लॉकहीड मार्टिन, ब्राजील की एम्ब्रेयर और यूरोप की एयरबस डिफेंस एंड स्पेस हैं।

सूत्रों के अनुसार, डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल इस प्रपोजल को दिसंबर के आखिर तक एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी (एओएन) मंजूरी दे सकती है। बता दें कि यह किसी भी डिफेंस सौदे की खरीद की पहली औपचारिक मंजूरी होती है। मंजूरी के बाद 2026 की शुरुआत में टेंडर जारी किए जाएंगे।

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रक्षा सूत्रों के मुताबिक, इन 80 विमानों (IAF Medium Transport Aircraft) की खरीद “मेक इन इंडिया” योजना के तहत की जाएगी। यानी जिस भी कंपनी के साथ यह डील साइन होगी, उसे भारत में ही इन विमानों की असेंबली और प्रोडक्शन लाइन तैयार करनी होगी। इससे देश में रक्षा उत्पादन और तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।

भारतीय वायुसेना के पास वर्तमान में 12 सी-130जे सुपर हरक्यूलिस एयरक्राफ्ट हैं, जिनका इस्तेमाल कार्गो, सैनिकों और राहत सामग्री के लिए किया जाता है। लॉकहीड मार्टिन कंपनी का कहना है कि भारत में पहले से ही इन विमानों के मेंटेनेंस और ट्रेनिंग के लिए पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है, जिससे तुरंत डिलीवरी देने में मदद मिलेगी।

कंपनी का कहना है, “भारतीय वायुसेना हमारे एयरक्राफ्ट (IAF Medium Transport Aircraft) के परफॉरमेंस से संतुष्ट है। हम भारत में अपनी साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।” लॉकहीड मार्टिन ने इस प्रोजेक्ट के लिए टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड के साथ साझेदारी की है। वहीं, ब्राजील की एम्ब्रेयर ने हाल ही में महिंद्रा ग्रुप के साथ करार किया है। एयरबस ने अभी तक अपने भारतीय पार्टनर के नाम का एलान नहीं किया है।

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एयरबस अपना एटलस ए400एम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (IAF Medium Transport Aircraft) ऑफर कर रही है, जिसकी पेलोड कैपेसिटी 40 टन तक है। वहीं एयरबस भारत में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, इंडिजिनाइजेशन और प्रोडक्शन लाइन सेटअप पर फोकस कर रही है। साथ ही एयरबस ने रिक्वेस्ट फॉर इन्फॉर्मेशन का जवाब दिया है और लोकल मैन्युफैक्चरिंग की पेशकश भी की है।

वहीं, बाकी दोनों कंपनियों की तुलना में एयरबस एटलस ए400एम की पेलोड कैपेसिटी 40 टन, जबकि लॉकहीड मार्टिन के सी-130जे की कैपेसिटी 20 टन और एम्ब्रेयर केसी-390 मिलेनियम की कैपेसिटी 26 टन है। वहीं एटलस ए400एम 25 टन के जोरावर लाइट टैंक को आसानी से ढो सकता है।

रक्षा मंत्रालय ने करीब तीन साल पहले इन ट्रांसपोर्ट विमानों (IAF Medium Transport Aircraft) की जरूरत को लेकर कई विदेशी कंपनियों से आरएफआई मांगी थी। भारत ने उनसे यह भी पूछा था कि वे कितनी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर देने को तैयार हैं और देश में कितना इंडिजिनाइजेशन कर सकते हैं। इसमें यह भी शामिल था कि क्या भारत को इस क्षेत्र में रीजनल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाया जा सकता है।

लॉकहीड मार्टिन और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स बेंगलुरु में एक एमआरओ (मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल) सेंटर तैयार कर रहे हैं, जो 2027 तक काम करना शुरू करेगा। यह सेंटर भारत के मौजूदा सी-130जे फ्लीट की देखभाल करेगा।

इसके अलावा रूस भी यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन का नया आईएल-276 (IAF Medium Transport Aircraft) भी ऑफर कर रहा है। जिसकी पेलोड कैपेसिटी करीब 20 टन है। रूस इसे एचएएल के साथ मिलकर पेश करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन मौजूदा जियोपॉलिटिकल हालात के चलते इसके साथ साझेदारी करना मुश्किल माना जा रहा है। हालांकि अभी हाल ही में यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन यानी यूएसी ने एचएएल के साथ मिल कर सिविल कम्यूटर एयरक्राफ्ट एसजे-100 के प्रोडक्शन के लिए एक एमओयू पर दस्तखत किए हैं।

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वहीं, एयरबस कंपनी पहले से ही भारत में एक बड़ा डिफेंस प्रोजेक्ट चला रही है। कंपनी भारतीय वायुसेना को 56 सी-295 ट्रांसपोर्ट विमान उपलब्ध करा रही है। यह प्रोजेक्ट 21,935 करोड़ रुपये का है और इसे भी टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स के साथ मिलकर किया जा रहा है।

ब्राजील की एम्ब्रेयर (IAF Medium Transport Aircraft) भी भारत से जुड़ी हुई है। उसने पहले ही देश को आठ विमान सप्लाई किए हैं, जिनका इस्तेमाल वीवीआईपी यात्रा और एयरबोर्न अर्ली वार्निंग मिशनों के लिए किया जाता है। रक्षा सूत्रों का कहना है कि नए ट्रांसपोर्ट विमानों की खरीद से भारतीय वायुसेना की एयरलिफ्ट क्षमता में बड़ा इजाफा होगा। यह विमान सैनिकों, उपकरणों, और राहत सामग्रियों की तेजी से ले सकेंगे।

भारतीय वायुसेना लंबे समय अपने लिए मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (IAF Medium Transport Aircraft) तलाश रही है, जिसका मकसद पुराने एंटोनोव एएन-32 और इल्यूशिन आईएल-76 जैसे सोवियत युग के ट्रांसपोर्ट विमानों को रिप्लेस करना हैं। भारत के पास लगभग 100 एन-32 एयरक्राफ्ट हैं जबकि 17 के आसपास आईएल-76 हैं। पुराने होने के चलते इनका मेंटेनेंस खर्च काफी बढ़ गया है। इसलिए वायुसेना अपनी एयरलिफ्ट कैपेसिटी को आधुनिक बनाना चाहता है।

एमटीए प्रोग्राम (IAF Medium Transport Aircraft) के तहत भारत को 18 से 30 टन पेलोड कैपेसिटी वाले विमानों की जरूरत है। जिसके तहत 40 से 80 विमान खरीदे जाने हैं। यह विमान न केवल सैनिकों और उपकरणों के ट्रांसपोर्टेशन के लिए इस्तेमाल होंगे, बल्कि इन्हें लद्दाख जैसे हाई-ऑल्टिट्यूड इलाकों और शॉर्ट रनवे से ऑपरेट करने के लिए डिजाइन किया जाएगा। इनकी क्षमता इतनी होगी कि ये 25 टन वजनी जोरावर लाइट टैंकतक को भी एयरलिफ्ट कर सकें। साथ ही, इन विमानों में एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग, रैपिड ट्रूप डिप्लॉयमेंटऔर आपातकालीन राहत कार्य की क्षमता भी होगी।

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यह पूरा प्रोजेक्ट (IAF Medium Transport Aircraft) मेक इन इंडिया पहल के तहत लागू किया जाएगा। इसके तहत भारत में ही मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और कम से कम 50 प्रतिशत स्वदेशी कंटेंट का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके साथ ही एक एमआरओ हब भी बनाया जाएगा, ताकि रखरखाव और मरम्मत के लिए विदेशों पर निर्भरता कम हो। रक्षा मंत्रालय ने इस प्रोग्राम के लिए दिसंबर 2022 में आरएफआई जारी किया था और अब तक सभी कंपनियों के जवाब मिल चुके हैं। अब जल्द ही इसका आरएफपी जारी किया जाएगा।

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