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Tejas Mk1A Engine Delivery: एचएएल को जीई से मिला चौथा एफ404 इंजन, वायुसेना को जल्द होगी दो तेजस जेट्स की डिलीवरी

एचएएल अधिकारियों ने पुष्टि की है कि पहले दो तेजस एमके1ए विमान भारतीय वायुसेना को सौंपने के लिए तैयार हैं। इसके अलावा कम से कम 10 अतिरिक्त यूनिट्स भी एचएएल ने असेंबल कर ली हैं और वे सिर्फ इंजनों का इंतजार कर रही हैं...

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📍नई दिल्ली | 1 Oct, 2025, 12:35 PM

Tejas Mk1A Engine Delivery: हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस से चौथा जीई-एफ404 इंजन मिल गया है। यह डिलीवरी 2021 में साइन हुए उस कॉन्ट्रैक्ट का हिस्सा है जिसके तहत जीई को एचएएल को कुल 99 इंजन उपलब्ध कराने हैं। इन इंजनों की सप्लाई से स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस एमके1ए के प्रोडक्शन में तेजी आएगी और भारतीय वायुसेना को जल्द ही पहले एमके1ए जेट्स मिलने का रास्ता साफ होगा।

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वायुसेना को जल्द मिलेंगे दो तेजस Mk1A – Tejas Mk1A Engine Delivery

एचएएल अधिकारियों ने पुष्टि की है कि पहले दो तेजस एमके1ए विमान भारतीय वायुसेना को सौंपने के लिए तैयार हैं। इसके अलावा कम से कम 10 अतिरिक्त यूनिट्स भी एचएएल ने असेंबल कर ली हैं और वे सिर्फ इंजनों का इंतजार कर रही हैं। एचएएल ने बताया कि “हमारी तैयारी पूरी है। दो जेट्स की डिलीवरी जल्द की जा सकती है। सूत्रों का कहना है कि तेजस एमके1ए के वेपन इंटीग्रेशन ट्रायल पूरे कर लिए हैं, जिसमें अस्त्रा और ASRAAM मिसाइलों का सफल परीक्षण भी शामिल है। उन्होंने बताया कि 10 और विमान तैयार हैं जिनमें इंजन लगते ही उड़ान भर सकेंगे।”

भारत ने 2021 में जीई एयरोस्पेस के साथ 716 मिलियन डॉलर का समझौता किया था। इस डील के तहत 99 जीई-एफ404 इंजनों की सप्लाई की जानी है। एचएएल ने इस कॉन्ट्रैक्ट के जरिए अपने प्रोडक्शन कार्यक्रम को बनाए रखने और समय पर तेजस एमके1ए विमानों की सप्लाई सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा था। हालांकि, दक्षिण कोरिया के एक कंपोनेंट सप्लायर की समस्या और ग्लोबल सप्लाई चेन में दिक्कतों के चलते इंजनों की सप्लाई में देरी हुई। अब चौथे इंजन की डिलीवरी के बाद एचएएल को भरोसा है जल्दी ही बाकी इंजन भी समय पर आएंगे।

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Tejas Mk1A Engine GE-F404 engine
GE-F404 engine

एचएएल अधिकारियों ने बताया कि अक्टूबर में नासिक स्थित प्रोडक्शन लाइन से फ्लाइट टेस्ट शेड्यूल किए गए हैं। हथियार परीक्षण पहले से ही जारी हैं। नासिक फैसिलिटी को अप्रैल 2023 में 150 करोड़ रुपये से अधिक की लागत के साथ शुरू किया गया था। यह एचएएल की तीसरी प्रोडक्शन लाइन है। यहां हर साल आठ विमान तैयार करने की क्षमता है। बेंगलुरु की दो मौजूदा लाइनों के साथ मिलकर एचएएल का टारगेट है कि वर्ष 2027 से हर साल 24 तेजस एमके1ए विमानों की डिलीवरी की जाए।

एचएएल ने ऐलान किया है कि वित्तीय वर्ष के अंत तक उसे 12 इंजन मिल जाएंगे। इसके बाद अगले वित्त वर्ष में सप्लाई सुचारू हो जाएगी। 2026–27 तक एचएएल का लक्ष्य हर साल 30 तेजस एमके1ए विमान तैयार करना है। इसमें निजी और सरकारी साझेदार कंपनियों को भी शामिल किया जाएगा।

बता दें कि भारतीय वायुसेना ने पहले से ही 2021 में Tejas Mk1A Engine Delivery ऑर्डर एचएएल को दिया है। इसके अलावा 97 और तेजस एमके1ए खरीदने पर चर्चा चल रही है। लंबे समय में वायुसेना का लक्ष्य कुल 352 तेजस विमान अपने बेड़े में शामिल करना है, जिनमें एमके1ए और एमके2 दोनों वेरिएंट होंगे। इस कदम से न केवल वायुसेना की कॉम्बैट स्ट्रेंथ बढ़ेगी बल्कि भारत के रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण को भी मजबूती मिलेगी।

तेजस एमके1ए का प्रोजेक्ट भारत की स्वदेशी क्षमताओं का प्रतीक है। हालांकि इसमें इंजन जैसे कुछ विदेशी कंपोनेंट्स हैं, लेकिन विमान का डिजाइन, स्ट्रक्चर और कई महत्वपूर्ण सिस्टम डीआरडीओ और एचएएल ने डेवलप किए हैं।

Tejas Mk1A Engine Delivery विमान में अत्याधुनिक एवियोनिक्स, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट, ओईएसए रडार और अत्याधुनिक हथियार प्रणालियां शामिल हैं। यह विमान एयर-टू-एयर और एयर-टू-ग्राउंड मिशनों में सक्षम है। तेजस एमके1ए को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वह भविष्य के खतरों का सामना करने के लिए तैयार रहे।

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HAL Tejas Mk1A Engine Delivery has gained momentum as Hindustan Aeronautics Limited (HAL) received the fourth GE-F404-IN20 engine from GE Aerospace under the 2021 contract for 99 engines. This milestone brings the indigenous Light Combat Aircraft (LCA) Tejas Mk1A closer to induction into the Indian Air Force (IAF). HAL officials confirmed that the first two Tejas Mk1A jets are ready for handover, while 10 more units await engines. With production lines in Bengaluru and Nashik, HAL is targeting annual deliveries of 24 aircraft by 2027. The Tejas Mk1A project strengthens India’s defence preparedness and supports the vision of Atmanirbhar Bharat.

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