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भारतीय वायुसेना कर रही मॉडर्न वॉरफेयर को लेकर बड़ी तैयारी, खरीदेगी AI-बेस्ड हाई-टेक वॉरगेमिंग सिमुलेटर

यह एक आधुनिक डिजिटल ट्रेनिंग सिस्टम है, या सीधे शब्दों में कहें तो यह एक वर्चुअल युद्ध का मैदान है, जहां भारतीय वायुसेना के अधिकारी बिना कोई जोखिम उठाए, असली युद्ध के लिए खुद को तैयार करते हैं...

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📍नई दिल्ली | 20 Mar, 2026, 12:01 PM

Computer Aided Wargaming Simulator: भारतीय वायुसेना अब मॉडर्न वॉरफेयर को लेकर बड़ी तैयारी कर रही है। वायुसेना आधुनिक युद्ध की तैयारियों के लिए एक नया हाई-टेक सिस्टम लाने जा रही है। इसके लिए कंप्यूटर एडेड वारगेमिंग सिमुलेटर खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस सिस्टम के जरिए वायुसैनिक बिना किसी असली हथियार के इस्तेमाल के, वर्चुअल तरीके से युद्ध की पूरी तैयारी कर सकेंगे।

इस सिस्टम के लिए सिकंदराबाद स्थित कॉलेज ऑफ एयर वारफेयर ने टेंडर जारी किया है। इसके तहत एक यूनिट खरीदी जाएगी। (Computer Aided Wargaming Simulator)

Computer Aided Wargaming Simulator: क्या होता है वारगेमिंग सिमुलेटर

यह एक आधुनिक डिजिटल ट्रेनिंग सिस्टम है, या सीधे शब्दों में कहें तो यह एक वर्चुअल युद्ध का मैदान है, जहां भारतीय वायुसेना के अधिकारी बिना कोई जोखिम उठाए, असली युद्ध के लिए खुद को तैयार करते हैं। इसमें कंप्यूटर, सॉफ्टवेयर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और थ्रीडी ग्राफिक्स की मदद से युद्ध जैसी पूरी स्थिति को वर्चुअल तरीके से तैयार किया जाता है। आसान शब्दों में कहें तो यह “वारगेमिंग” का कंप्यूटर वाला रूप है, जिसमें बिना असली हथियार इस्तेमाल किए और बिना किसी नुकसान के, सैन्य अधिकारियों को युद्ध की योजना बनाना, फैसले लेना और ऑपरेशन चलाने की प्रैक्टिस कराई जाती है। (Computer Aided Wargaming Simulator)

अगर इसे और सरल तरीके से समझें, तो यह एक एडवांस वीडियो गेम जैसा होता है, लेकिन इसमें सब कुछ असली युद्ध जैसा होता है। इसमें अधिकारी हवाई जहाज, मिसाइल, रडार, दुश्मन की गतिविधियां, साइबर अटैक और यहां तक कि स्पेस सैटेलाइट तक को स्क्रीन पर देख और कंट्रोल कर सकते हैं। कई अधिकारी एक साथ इसमें हिस्सा लेते हैं, जहां कोई एयर ऑपरेशन संभालता है तो कोई ग्राउंड या दूसरी जिम्मेदारी निभाता है। इस दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस दुश्मन की तरफ से फैसले लेता है और मौसम, जमीन की स्थिति और इंटेलिजेंस इनपुट भी रियल टाइम में बदलते रहते हैं।

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जब यह पूरा अभ्यास खत्म होता है, तो उसका पूरा रिव्यू किया जाता है। इसमें बताया जाता है कि कहां गलती हुई और आगे कैसे बेहतर रणनीति अपनाई जा सकती है। (Computer Aided Wargaming Simulator)

हमलों और मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस का अभ्यास

भारतीय वायुसेना में इस सिस्टम का इस्तेमाल अधिकारियों की ट्रेनिंग के लिए किया जाएगा। इसे सिकंदराबाद स्थित कॉलेज ऑफ एयर वारफेयर में लगाया जा रहा है। इसके जरिए एयर वॉर, जॉइंट ऑपरेशन, साइबर और स्पेस से जुड़े हमलों और मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस का अभ्यास कराया जाएगा। अधिकारी इसमें नई रणनीतियों और नए हथियारों को भी सुरक्षित तरीके से टेस्ट कर सकते हैं।

इस सिमुलेटर की मदद से वास्तविक युद्ध जैसी स्थितियों को बार-बार दोहराया जा सकता है, जैसे सीमा पर तनाव या किसी बड़े ऑपरेशन की तैयारी। इसमें 10 अधिकारियों के लिए करीब 28 दिन का ट्रेनिंग प्रोग्राम भी शामिल है।

इस तरह के सिमुलेटर में हाई क्वालिटी थ्रीडी मैप, रियल टाइम सिमुलेशन, एआई आधारित दुश्मन का व्यवहार, मल्टी-प्लेयर सिस्टम और डेटा एनालिसिस जैसी सुविधाएं होती हैं। इसके साथ ही यह सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित होता है और सेना की सुरक्षा नीतियों के अनुसार डिजाइन किया जाता है। (Computer Aided Wargaming Simulator)

कैसे काम करेगा यह सिस्टम

इस सिमुलेटर में कई अधिकारी एक साथ जुड़कर अलग-अलग जिम्मेदारी निभाते हैं। कोई एयर ऑपरेशन संभालता है, तो कोई ग्राउंड सपोर्ट या नेवल सपोर्ट देखता है। सिस्टम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भी होता है, जो दुश्मन की तरफ से फैसले लेता है।

जब पूरा सिमुलेशन खत्म होता है, तो उसका विश्लेषण किया जाता है। इसमें यह बताया जाता है कि कहां गलती हुई और कैसे बेहतर रणनीति अपनाई जा सकती थी। इसे आफ्टर एक्शन रिव्यू कहा जाता है।

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इस टेंडर के लिए बोली जमा करने की अंतिम तारीख 27 मार्च रखी गई है। इससे पहले 23 मार्च को प्री-बिड मीटिंग भी आयोजित की जाएगी। बिड में शामिल होने के लिए कंपनियों को कुछ शर्तें पूरी करनी होंगी। जैसे पिछले तीन साल में कम से कम 20 करोड़ रुपये का औसत टर्नओवर होना जरूरी है। हालांकि एमएसएमई और स्टार्टअप के लिए इसमें कुछ छूट दी गई है। (Computer Aided Wargaming Simulator)

यह टेंडर मेक इन इंडिया नीति के तहत जारी किया गया है। इसमें कम से कम 50 फीसदी लोकल कंटेंट अनिवार्य रखा गया है। यानी इस सिस्टम का बड़ा हिस्सा भारत में ही बनाया जाएगा। इससे भारतीय कंपनियों को डिफेंस सेक्टर में काम करने का मौका मिलेगा और देश को तकनीक के मामले में आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी।

इस सिस्टम के लिए सुरक्षा के कड़े नियम भी तय किए गए हैं। इसमें मैलिशियस कोड नहीं होना चाहिए और सभी डेटा पूरी तरह सुरक्षित होना चाहिए। सिस्टम को आईपीवी6 रेडी भी होना जरूरी है। इसके अलावा, अगर हार्ड डिस्क खराब होती है, तो उसे वापस नहीं लिया जाएगा, ताकि कोई संवेदनशील डेटा बाहर न जा सके।

इस सिमुलेटर के साथ दो साल की वारंटी दी जाएगी। इसके बाद तीन साल तक मेंटेनेंस का विकल्प भी रहेगा। इसमें सिस्टम की देखभाल और तकनीकी सहायता शामिल होगी। (Computer Aided Wargaming Simulator)

क्यों जरूरी है यह सिस्टम

आज के समय में युद्ध का तरीका तेजी से बदल रहा है। अब लड़ाई सिर्फ जमीन, हवा या समुद्र तक सीमित नहीं है, बल्कि साइबर और स्पेस जैसे क्षेत्रों तक फैल चुकी है। ऐसे में इस तरह के सिमुलेटर पर अभ्यास करने से अधिकारियों की फैसले लेने की क्षमता बेहतर होती है, गलतियां कम होती हैं और कम खर्च में ज्यादा ट्रेनिंग मिलती है। इस सिस्टम के जरिए वायुसेना के अधिकारी अलग-अलग युद्ध स्थितियों का बार-बार अभ्यास कर सकते हैं और अपनी रणनीति को मजबूत बना सकते हैं। (Computer Aided Wargaming Simulator)

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