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Brazil-India Defence Deal: क्या सी-390 विमानों के बदले बार्टर डील में तेजस और प्रचंड खरीद रहा है ब्राजील? क्या है इस ‘स्वैप डील’ का असली सच?

ब्राजील के रक्षा मामलों पर नजर रखने वाले एयर डेटा न्यूज ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि दोनों देश “म्यूचुअल डिफेंस डील” या कहा जाए तो बार्टर सिस्टम डील पर विचार कर रहे हैं। इस रिपोर्ट में कहा गया कि ब्राजील और भारत के बीच चल रही वार्ताओं में एक “दोतरफा रक्षा सहयोग समझौता” शामिल है...

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📍नई दिल्ली/ब्रासीलिया | 23 Oct, 2025, 1:43 PM

Brazil-India Defence Deal: भारत और ब्राजील के बीच संभावित रक्षा सहयोग को लेकर इस सप्ताह कई विदेशी मीडिया रिपोर्टों में स्वैप डील, बॉर्टर सिस्टम या आपसी रक्षा खरीद समझौते की चर्चा सामने आई। कुछ रिपोर्टों में यह दावा किया गया कि ब्राजील भारत से 32 तेजस एमके1ए फाइटर जेट और 24 प्रचंड अटैक हेलिकॉप्टर खरीदने को तैयार है, जबकि बदले में भारत ब्राजील के 80 सी-390एम मिलेनियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट खरीदेगा।

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Brazil-India Defence Deal: क्या लिखा था ब्राजीलियाई मीडिया में

ब्राजील के रक्षा मामलों पर नजर रखने वाले एयर डेटा न्यूज ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि दोनों देश “म्यूचुअल डिफेंस डील” या कहा जाए तो बार्टर सिस्टम डील पर विचार कर रहे हैं। इस रिपोर्ट में कहा गया कि ब्राजील और भारत के बीच चल रही वार्ताओं में एक “दोतरफा रक्षा सहयोग समझौता” शामिल है, जिसमें भारत की ओर से सी-390 मिलेनियम ट्रांसपोर्ट विमान की खरीद और इसके बदले ब्राजील की ओर से तेजस एमके1ए लड़ाकू विमान और लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर प्रचंड की खरीद का प्रस्ताव शामिल हो सकता है।

कहा जा रहा है कि 32 तेजस और 24 प्रचंड की लागत लगभग 3.5 से 4 बिलियन अमेरिकी डॉलर होगी। जबकि 80 सी-390 मिलेनियम की लागत लगभग 7 से 8 बिलियन अमेरिकी डॉलर होगी।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि यह साझेदारी तकनीकी सहयोग, स्थानीय असेंबली और को-प्रोडक्शन पर आधारित होगी, जिससे भारत और ब्राजील दोनों के एयरोस्पेस सेक्टर में नई संभावनाएं खुलेंगी।

भारत में ब्राजीलियाई राजदूत केनेथ द नोब्रिगा के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया कि दोनों देश “रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए समान रूप से इच्छुक हैं।” रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (एमटीए) प्रोग्राम के तहत 40 से 80 विमान खरीदने की योजना बनाई गई है। इसमें ब्राजील का सी-390 मिलेनियम, अमेरिका का लॉकहीड सी-130जे, और यूरोप का एयरबस ए400एम शामिल हैं।

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Brazil-India Defence Deal: तेजस और प्रचंड में ब्राजील की दिलचस्पी

एयर डेटा न्यूज की रिपोर्ट में कहा गया कि ब्राजील अपनी वायुसेना में पुराने एफ-5 टाइगर II फाइटर जेट्स को बदलने के लिए भारतीय तेजस एमके1ए विमान में दिलचस्पी दिखा रहा है। इसके अलावा, ब्राजील के अमेजन जैसे दुर्गम इलाकों में ऑपरेशन के लिए भारत में बने लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर एलसीएच प्रचंड की क्षमताओं का अध्ययन किया जा रहा है। ब्राजील की वायुसेना के पास पहले एमआई-35 अटैक हेलिकॉप्टर थे, जिन्हें बाद में सेवा से हटा दिया गया है। रिपोर्ट में कहा गया कि प्रचंड उनकी जगह विकल्प बन सकते हैं।

Brazil-India Defence Deal: “कोई स्वैप डील नहीं हुई”

वहीं, इन रिपोर्टों के सामने आने के कुछ घंटों बाद ही ब्राजील सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भारत-ब्राजील डिफेंस टॉक में किसी तरह की “बार्टर डील” या “एक्सचेंज एग्रीमेंट” पर चर्चा नहीं हुई है। ब्राजील के उपराष्ट्रपति गेराल्डो अल्कमिन, रक्षा मंत्री जोसे मूसियो और वायुसेना प्रमुख लेफ्टिनेंट ब्रिगेडियर मार्सेलो डामासेनो ने नई दिल्ली में भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की थी।

बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में उपराष्ट्रपति अल्कमिन ने कहा- “ऐसी किसी स्वैप डील की कोई चर्चा नहीं हुई। एम्ब्रेयर पहले से भारत में सक्रिय है और भारतीय कंपनियों के साथ सहयोग कर रही है। लेकिन किसी व्यावसायिक सौदे को रक्षा वार्ता से जोड़ना गलत है।”

ब्राजील के दूतावास ने भी नई दिल्ली में जारी एक बयान में कहा, “भारत-ब्राजील की रक्षा साझेदारी ‘परस्पर खरीद’ पर नहीं, बल्कि दोनों देशों की रक्षा उद्योगों की तकनीकी गुणवत्ता और रणनीतिक विश्वास पर आधारित है।” दूतावास ने आगे कहा कि दोनों देश रक्षा निर्माण और संयुक्त तकनीकी विकास में सहयोग बढ़ाने पर ध्यान दे रहे हैं।

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ब्राजील ने यह भी बताया कि उसने नई दिल्ली में एम्ब्रेयर का एक स्थायी दफ्तर खोला है और दोनों देशों के बीच रक्षा और एविएशन टेक्नोलॉजी में साझेदारी के लिए एमओयू पर दस्तखत किए गए हैं।

आकाश मिसाइल सिस्टम में रूचि

भारत और ब्राजील के बीच हाल के वर्षों में रक्षा सहयोग लगातार बढ़ा है। भारत का स्वदेशी आकाश मिसाइल सिस्टम, गरुड़ 105 वी2 गन, और ऑफशोर पेट्रोल वेसल जैसे प्लेटफॉर्म्स ब्राजील के मिलिटरी इवैल्यूएशन प्रोग्राम्स का हिस्सा हैं।

ब्राजील आकाश मिड रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल का परीक्षण कर रहा है। हालांकि बजटीय कारणों और राजनीतिक प्रक्रियाओं के चलते इसकी खरीद में देरी है, लेकिन ब्राजील के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह इवैल्यूएशन टेक्निकल लेवल पर हो रहा है और किसी अन्य सौदे से जुड़ा नहीं है।

ब्राजील के डिफेंस ग्रुप एम्ब्रेयर, टॉरस आरमास, अविब्रस, अटेक और सीबीसी पहले से ही भारतीय रक्षा कंपनियों के साथ साझेदारी में हैं। इनमें महिंद्रा डिफेंस, जिंदल डिफेंस, और एसएसएस डिफेंस जैसे भारतीय साझेदार शामिल हैं। इसके अलावा स्माल ऑर्म्स, अम्यूनिशन, एयरोस्पेस सिस्टम, और कॉप्लेक्स डिफेंस प्लेटफॉर्म्स का को-प्रोडक्शन शामिल है।

नियुक्त किया एयर और नेवल अताशे

ब्राजील ने हाल ही में नई दिल्ली में अपने दूतावास में एयर और नेवल अताशे को नियुक्त किया है। दक्षिण अमेरिका के किसी भी देश की ओर से पहली बार ऐसा किया है। हालांकि पहले से ही भारतीय राजधानी में एक ब्राजीलियाई आर्मी अताशे तैनात है।

एमटीए में फिट है एंब्रेयर सी-390!

ब्राजील का एंब्रेयर सी-390 मिलेनियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट भारतीय वायुसेना के लिए चल रहे एमटीए प्रोजेक्ट का एक प्रमुख दावेदार है। यह विमान 26 टन तक का पेलोड ले जा सकता है और कच्चे या छोटे रनवे पर भी लैंडिंग और टेकऑफ करने में सक्षम है। भारतीय वायुसेना वर्तमान में पुराने एंटोनोव एन-32 और इल्यूशिन Il-76 बेड़े को बदलने की कोशिशों में है। वहीं, सी-390 का मुकाबलालॉकहीड सी-130जे और एयरबस ए400एम जैसे विमानों से है। एम्ब्रेयर ने भारत में लोकल असेंबली और जॉब क्रिएशन की पेशकश की है।

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बता दें कि भारतीय वायुसेना के पास लगभग 100-104 एन-32 मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट विमान हैं। जिनकी पेलोड क्षमता लगभग 7.5 टन है। इनका उपयोग सामरिक परिवहन, सैनिकों की ढुलाई, और आपदा राहत के लिए किया जाता है। हालांकि कुछ एएन-32 को अपग्रेड भी किया गया है, जिसमें बेहतर एवियोनिक्स और इंजन शामिल हैं

वहीं, भारतीय वायुसेना के पास लगभग 17 इल्यूशिन Il-76एमडी विमान हैं। जिनकी पेलोड क्षमता लगभग 40-48 टन है। इनका उपयोग भारी उपकरण, टैंक, और लंबी दूरी के परिवहन के लिए होता है।

क्या है एमटीए की रिक्वॉयरमेंट

मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (एमटीए) प्रोजेक्ट के तहत 18 से 30 टन तक की पेलोड क्षमता वाले जहाज चाहिए, जो स्वदेशी जोरावर लाइट टैंक (25 टन वजन) को भी ढो सकें। साथ ही अनप्रिपेयर्ड रनवे जैसे लद्दाख और पूर्वोत्तर के एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड्स पर काम करने की क्षमता हो। इसके अलावा मल्टी-रोल फंक्शनैलिटी जैसे कार्गो ट्रांसपोर्ट, ट्रूप्स (सैनिकों) की ढुलाई, पैराट्रूपर्स (पैराशूट सैनिकों) को भी ले जा सके। इसके अलावा सीलिंग क्षमता अधिकतम 40,000 फीट तक की हो। यानी इस उंचाई तक उड़ान भर सके।

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    रक्षा समाचार न्यूज डेस्क भारत की अग्रणी हिंदी रक्षा समाचार टीम है, जो Indian Army, Navy, Air Force, DRDO, रक्षा उपकरण, युद्ध रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक खबरें पेश करती है। हम लाते हैं सटीक, सरल और अपडेटेड Defence News in Hindi। हमारा उद्देश्य है – "हर खबर, देश की रक्षा से जुड़ी।"

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