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Trump-Xi meeting: अमेरिका और चीन की यह बैठक भारत के लिए बड़ा सबक, एक्सपर्ट बोले- आखिर हम क्यों बनना चाहते हैं सुपरपावर?

अंतराष्ट्रीय मामलों के जानकार सुशांत सरीन का कहना है, चीन अब भी खुद को एक ‘विकासशील देश’ कहता है। दूसरी ओर हम हैं, जो एक ‘मिडल पावर’ होने के बावजूद खुद को ‘सुपरपावर’ साबित करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि हमारे पास न तो उतनी आर्थिक क्षमता है, न ही सैन्य ताकत, जो किसी ‘महाशक्ति’ के पास होती है।”

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📍बुसान (दक्षिण कोरिया) | 30 Oct, 2025, 6:48 PM

Trump-Xi meeting: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच गुरुवार को दक्षिण कोरिया के बुसान में हुई बैठक में दोनों देशों ने व्यापार, ऊर्जा और फेंटानिल जैसे अहम मुद्दों पर कई समझौतों पर सहमति जताई। ट्रंप ने बैठक को “ट्रूली ग्रेट मीटिंग” बताते हुए कहा कि यह बातचीत दोनों देशों के बीच “आपसी सम्मान और भरोसे” को और मजबूत करेगी। वहीं, इस बैठक पर विशेषज्ञों का कहना है कि जी2 यानी अमेरिका और चीन का यह द्विपक्षीय शक्ति-समीकरण भारत के लिए एक बड़ा सबक है। चीन ने चुपचाप अपनी ताकत बढ़ाई और अब वह अमेरिका को उसी के स्तर पर चुनौती दे रहा है।

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हालांकि ट्रंप और शी जिनपिंग की यह बैठक करीब 1 घंटे 40 मिनट तक चली। बैठक का आयोजन गिम्हे इंटरनेशनल एयरपोर्ट के एक विशेष हॉल में हुआ। दोनों नेताओं के बीच बातचीत का मुख्य विषय टैरिफ, ऊर्जा व्यापार और अवैध ड्रग फेंटानिल की तस्करी था।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म “ट्रुथ सोशल” पर लिखा, “मेरी राष्ट्रपति शी के साथ बहुत शानदार मुलाकात हुई। हमारे देशों के बीच गहरा सम्मान है और यह मुलाकात उसे और मजबूत करेगी। हमने कई मुद्दों पर सहमति बनाई है और कुछ बाकी मुद्दों पर जल्द प्रगति होगी।”

उन्होंने बताया कि चीन अब अमेरिका से “बड़े पैमाने पर कृषि उत्पाद” खरीदेगा, जिसमें सोयाबीन और ज्वार शामिल हैं। ट्रंप ने इसे अमेरिकी किसानों के लिए बहुत बड़ी राहत बताया। उन्होंने कहा, “हमारे किसान बहुत खुश होंगे। मैंने पहले भी कहा था, उन्हें अब और जमीन और ट्रैक्टर खरीदने चाहिए।”

Trump-Xi meeting: चीन पर लगे टैरिफ में की कमी

ट्रंप ने एलान किया कि अमेरिका और चीन के बीच एक साल का नया व्यापार समझौता हुआ है, जिसके तहत चीनी वस्तुओं पर लगने वाले टैरिफ को 57 फीसदी से घटाकर 45 फीसदी किया जाएगा (जो कि भारत पर लगे 50 फीसदी ट्रैरिफ से कम है)। उन्होंने कहा कि हर साल यह समझौता फिर से समीक्षा के लिए लाया जाएगा, लेकिन उम्मीद है कि यह लंबे समय तक चलेगा।

Trump Xi meeting

उन्होंने बताया कि यह टैरिफ कटौती चीन की तरफ से फेंटानिल की अवैध तस्करी पर कड़े कदम उठाने के वादे के बदले में दी गई है। ट्रंप ने कहा, “चीन ने फेंटानिल पर सख्त कार्रवाई शुरू की है, इसी वजह से हमने शुल्क घटाने का फैसला लिया। हमें इस दिशा में पहले से कार्रवाई दिख रही है।” फेंटानिल नामक सिंथेटिक ड्रग अमेरिका में एक बड़ी समस्या बनी हुई है, जिससे हर साल हजारों लोगों की जान जाती है। ट्रंप ने कहा कि चीन अब इस ड्रग के केमिकल इंग्रीडिएंट्स के अवैध निर्यात को रोकने के लिए ठोस कदम उठा रहा है।

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चीन ने साथ ही यह भी सहमति जताई कि वह अमेरिका से ऊर्जा उत्पादों तेल और गैस की बड़ी मात्रा में खरीद करेगा। ट्रंप ने बताया कि अलास्का सहित कई अमेरिकी राज्यों से तेल और प्राकृतिक गैस की बिक्री पर काम शुरू हो गया है।

क्या कहा चीन के राष्ट्रपति ने

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा, “आंधी, लहरों और चुनौतियों के बीच भी, चीन-अमेरिका संबंधों की नाव को हमें सही दिशा में आगे बढ़ाना चाहिए। आप और मैं, इन संबंधों के स्टीयरिंग पर हैं, इसलिए हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि यह विशाल जहाज स्थिरता और समझदारी के साथ आगे बढ़ता रहे।

उन्होंने कहा, मैं हमेशा मानता हूं कि चीन का विकास आपकी ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ की सोच के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकता है। हमारे दोनों देश एक-दूसरे की मदद करके एक साथ सफलता और समृद्धि प्राप्त करने की पूरी क्षमता रखते हैं। शी जिनपिंग ने कहा कि सालों से मैं सार्वजनिक मंचों पर बार-बार यह बात कहता आया हूं कि चीन और अमेरिका को साझेदार और मित्र बनकर रहना चाहिए। यही इतिहास ने हमें सिखाया है…।”

रेयर अर्थ मिनरल्स पर सहमति

बैठक में दोनों नेताओं ने रेयर अर्थ मिनरल्स के मुद्दे पर भी समाधान निकाल लिया। व्हाइट हाउस के अनुसार, यह मुद्दा अब “पूरी तरह सुलझा लिया गया” है। ये मिनरल्स मॉडर्न इलेक्ट्रॉनिक्स, डिफेंस इक्विपमेंट्स और एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी के लिए जरूरी होते हैं।

ट्रंप ने कहा, “रेयर अर्थ मिनरल्स पर सालभर का समझौता हुआ है और यह हर साल रिन्यू किया जाएगा। यह पूरी दुनिया के लिए अहम कदम है।”

बैठक में एक-दूसरे की तारीफ

ट्रंप और शी के बीच मुलाकात बेहद सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई। शुरुआत में ट्रंप ने शी को अपना “पुराना दोस्त” बताया और कहा, “यह मेरे लिए सम्मान की बात है कि मैं इतने समय बाद अपने एक दोस्त से मिल रहा हूं। हमें कई मुद्दों पर पहले से ही सहमति है और बाकी बातों पर अभी प्रगति करेंगे।”

शी जिनपिंग ने भी ट्रंप की तारीफ करते हुए कहा कि “आपसे दोबारा मिलकर बहुत खुशी हुई। हमने आपके दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद कई बार फोन पर बात की। चीन और अमेरिका को सहयोगी और मित्र बने रहना चाहिए।”

दोनों नेताओं ने माना कि दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन संवाद जारी रहना चाहिए। शी ने कहा कि चीन और अमेरिका दोनों देशों का एक साथ आगे बढ़ना “विकास और समृद्धि” के लिए जरूरी है।

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यूक्रेन और गाजा संघर्ष पर बातचीत

इसके अलावा, ट्रंप ने बताया कि दोनों देशों के बीच एक बड़ा ऊर्जा समझौता होने वाला है। इसमें अमेरिकी कंपनियों द्वारा चीन को तेल, गैस और रेयर मटेरियल्स की आपूर्ति शामिल है। ऊर्जा क्षेत्र के अधिकारी दोनों देशों में जल्द बैठक करेंगे।

ट्रंप ने बताया कि दोनों नेताओं के बीच यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व में संघर्ष विराम पर भी चर्चा हुई। यूक्रेन पर हमने लंबी बातचीत की। हम दोनों चाहते हैं कि इस संघर्ष को खत्म करने के रास्ते तलाशे जाएं। चीन इसमें मदद करने के लिए तैयार है। शी जिनपिंग ने ट्रंप के गाजा युद्धविराम समझौते में भूमिका की सराहना की और कहा कि चीन भी “अपने तरीके से” कंबोडिया-थाईलैंड सीमा विवाद सुलझाने में मदद कर रहा है।

ट्रंप-शी बैठक को 10 में से 12 अंक

बातचीत के बाद ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि यह बैठक “असाधारण रूप से सफल” रही। उन्होंने इसे 10 में से 12 अंक दिए और कहा, “यह हमारी दोनों देशों के बीच नए अध्याय की शुरुआत है। हमने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रगति की है और भविष्य में इसे और आगे बढ़ाएंगे।” ट्रंप ने यह भी एलान किया कि वह अगले साल अप्रैल में चीन का दौरा करेंगे, जबकि शी जिनपिंग उसके बाद अमेरिका आएंगे।

भारत क्यों ‘सुपरपावर’ बनना चाहता है

वहीं, इस मामले में अंतराष्ट्रीय मामलों के जानकार सुशांत सरीन का कहना है, “जी2 यानी अमेरिका और चीन का मिलना भारत के लिए एक बड़ा सबक है। चीन ने चुपचाप अपनी ताकत बढ़ाई और अब वह अमेरिका को उसी के स्तर पर चुनौती दे रहा है। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि चीन अब भी खुद को एक ‘विकासशील देश’ कहता है। दूसरी ओर हम हैं, जो एक ‘मिडल पावर’ होने के बावजूद खुद को ‘सुपरपावर’ साबित करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि हमारे पास न तो उतनी आर्थिक क्षमता है, न ही सैन्य ताकत, जो किसी ‘महाशक्ति’ के पास होती है।”

सरीन ने सवाल उठाया, “आखिर हम सुपरपावर बनना क्यों चाहते हैं? अगर मान भी लें कि हम सुपरपावर बन जाएं, तो हमारी ‘ग्रैंड स्ट्रैटेजी’ क्या होगी? उस ताकत के साथ हम क्या करेंगे? जब हम आज अपनी मौजूदा ताकत का उपयोग ही नहीं कर पा रहे, तो सुपरपावर बनने की बातें करना सिर्फ सेल्फ-डिसेप्शन है।”

हकीकत स्वीकार करे भारत

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत को अब हकीकत स्वीकार करनी चाहिए, “सच का सामना करो। शांत रहो। डींगे हांकना बंद करो। पहले अपनी अर्थव्यवस्था और सैन्य ताकत को मजबूत करो। दूसरों से टेक्नोलॉजी मांगना बंद करो, कोई तुम्हें मुफ्त में नहीं देगा। या तो पुरानी तकनीक खरीदो, या अपनी खुद की तकनीक विकसित करो, या फिर दूसरों की तरह ‘सीखो और कॉपी करो’। दुनिया में किसी को भी टेक्नोलॉजी चांदी की थाली में नहीं मिली है।”

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अंत में उन्होंने भारत की नीतिगत व्यवस्था पर प्रहार करते हुए कहा, “अर्थव्यवस्था में सुधार करो। गवर्नेंस में सुधार लाओ। नौकरशाही के शिकंजे को तोड़ो। वरना तुम पीछे रह जाओगे।”

कमजोरों पर दबाव डालते हैं ट्रंप

अंतराष्ट्रीय मामलों के एक्सपर्ट डॉ. ब्रह्मा चेल्लानी कहते हैं कि ट्रंप और शी जिनपिंग ने आपसी सहमति से ट्रेड वॉर में एक साल की राहत मिली है। लेकिन उनकी इस मुलाकात से अमेरिका और चीन के बीच चल रहे गहरे तनावों में कोई खास राहत नहीं मिली। इसके बावजूद ट्रंप ने तुरंत अधिकांश चीनी सामानों पर लगने वाले टैरिफ को घटाकर 45 प्रतिशत कर दिया, जो भारत और ब्राजील पर लगाए गए 50 फीसदी शुल्क से कम है।

डॉ. चेल्लानी कहते हैं कि ट्रंप का अब तक का कार्यकाल एक बात साफ करता है कि वह ताकत और आक्रामकता का सम्मान करते हैं, लेकिन कमजोरों पर दबाव डालते हैं। शी जिनपिंग के साथ तथाकथित जी2 बैठक का उनका उल्लेख भी इसी पैटर्न को दर्शाता है, जैसे कि वे अक्सर नरम और झुकने वाले नेताओं से बड़े समझौते या रियायतें हासिल करने की कोशिश करते हैं।

ट्रंप ने चीन के साथ व्यापार युद्ध में विराम की कोशिश की, लेकिन दूसरी ओर उन्होंने भारत जैसे रणनीतिक सहयोगी देश पर सख्त आर्थिक दबाव बनाए रखा। चीन के प्रति उनका “कभी नरम, कभी कठोर” रवैया और भारत पर आर्थिक दबाव यह दिखाता है कि उनकी विदेश नीति दीर्घकालिक रणनीति के बजाय अल्पकालिक आर्थिक लाभ और व्यक्तिगत प्राथमिकताओं से प्रेरित है।

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  • हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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