📍नई दिल्ली | 30 Oct, 2025, 2:02 PM
India-China Talks: भारत और चीन के बीच 23वीं कोर कमांडर स्तर की बैठक 25 अक्टूबर 2025 को लद्दाख के चुशुल-मोल्डो बॉर्डर पॉइंट पर आयोजित की गई। इस बैठक में दोनों देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने एक बार फिर एलएसी पर शांति और स्थिरता बनाए रखने को लेकर बातचीत की। बैठक के चार दिन बाद, 29 अक्टूबर को भारत और चीन दोनों ने अपने-अपने आधिकारिक बयान जारी किए। दोनों ही देशों ने यह कहा कि सीमा क्षेत्रों में शांति बनी हुई है और बातचीत की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।
India-China Talks: क्या कहा भारतीय विदेश मंत्रालय ने
भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में बताया कि यह बैठक “मित्रवत और सौहार्दपूर्ण माहौल” में हुई। मंत्रालय ने कहा कि यह पश्चिमी सेक्टर में जनरल लेवल मैकेनिज्म की पहली बैठक थी, जो 19 अगस्त 2025 को हुई 24वीं स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव बातचीत के बाद आयोजित की गई। भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह बैठक भारतीय पक्ष के चुशुल-मोल्डो बॉर्डर पॉइंट पर हुई थी।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, बातचीत में अक्टूबर 2024 में हुई 22वीं कोर कमांडर बैठक के बाद हुई प्रगति की समीक्षा की गई। मंत्रालय ने कहा कि पिछले एक वर्ष में एलएसी पर शांति और स्थिरता बनी रही है। भारत ने आगे भी मौजूदा मैकेनिज्म जैसे वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन और कोर कमांडर स्तर की बैठकों के जरिए किसी भी स्थानीय मुद्दे को सुलझाने पर जोर दिया।
बयान में भारत का रुख स्पष्ट था कि शांति और स्थिरता के लिए स्ट्रक्चर्ड तरीके से वार्ता प्रक्रिया जारी रहनी चाहिए। विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से सीमा क्षेत्रों में बातचीत के मौजूदा तरीकों का पालन करने पर जोर दिया।
India-China Talks: क्या कहा गया चीन की तरफ से
वहीं चीन की ओर से जारी बयान चाइना मिलिट्री ऑनलाइन और चीनी रक्षा मंत्रालय की प्रवक्ता यू जिंग के जरिए आया। चीन ने बैठक को “मोल्डो-चुशुल” कहते हुए लिखा कि यह वार्ता भारत की तरफ हुई यानी चुशुल में हुई। चीन ने बैठक को “सक्रिय और गहन बातचीत” बताया और कहा कि दोनों देशों ने बॉर्डर मैनेजमेंट के पश्चिमी हिस्से (वेस्टर्न सेक्शन) पर विचार-विमर्श किया।
चीन के बयान में यह भी कहा गया कि बैठक दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी “महत्वपूर्ण आम सहमति” के तहत हुई। चीन ने यह जोड़ा कि भविष्य में सैन्य और कूटनीतिक चैनलों के जरिए बातचीत जारी रखी जाएगी ताकि सीमा पर शांति और स्थिरता बनी रहे।
India-China Talks: क्या नहीं कहा चीन ने
दिलचस्प बात यह रही कि चीन ने अपने बयान में न तो 22वीं बैठक का जिक्र किया और न ही 24वीं स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव बातचीत के बाारे में कुछ लिखा। भारत ने जहां बातचीत की निरंतरता पर जोर दिया, वहीं चीन ने अपने बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात का अप्रत्यक्ष संदर्भ देते हुए नेतृत्व स्तर की सहमति को प्राथमिकता दी।
India-China Talks: क्या है दोनों देशों के संदेशों का मतलब
विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बयान लगभग एक जैसे संदेश देते हैं, यानी “शांति बनी रहे, बातचीत जारी रहे”। लेकिन उनके शब्दों और प्राथमिकताओं में अंतर है। भारत का रुख पूरी तरह से प्रक्रिया-केंद्रित है, यानी भारत एक तय प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ रहा है, जबकि चीन नेतृत्व-केंद्रित दृष्टिकोण अपना रहा है।
भारत यह दिखाना चाहता है कि गलवान घाटी संघर्ष (2020) के बाद जो बातचीत की प्रक्रिया शुरू हुई है, उससे दोनों देशों के बीच रिश्तों में काफी प्रगति हुई है। डिसएंगेजमेंट, बफर जोन और नियमित बातचीत जैसे उठाए गए कदमों ने हालात को स्थिर बनाए रखा है। वहीं चीन यह संकेत दे रहा है कि उसकी टॉप लीडरशिप की “समझदारी” से सीमा पर शांति बनी हुई है।
India-China Talks: क्यों अहम है यह बैठक
यह बैठक इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि सर्दियों के मौसम की शुरुआत के बावजूद दोनों देशों के लगभग 50 हजार जवान की सेनाएं अभी भी एलएसी पर तैनात हैं। हालांकि, इस बैठक में सैनिकों की संख्या घटाने या नए डिसएंगेजमेंट पॉइंट्स पर कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई।
अगस्त 2025 की स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव वार्ता के बाद यह पहली बार था जब दोनों देशों ने सैन्य स्तर पर इतनी व्यापक चर्चा की। उस बैठक में एक नए वर्किंग ग्रुप के गठन पर सहमति बनी थी, जो सीमा प्रबंधन और पेट्रोलिंग बहाली जैसे मुद्दों पर काम करेगा।
विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, भारत और चीन दोनों ही एलएसी पर शांति को सबसे बड़ी प्राथमिकता मानते हैं। भारत का कहना है कि सीमाओं पर कोई नई गतिविधि नहीं होनी चाहिए जो हालात को बिगाड़े। चीन ने भी कहा कि “दोनों देशों के बीच सहमति के अनुसार, सीमा क्षेत्रों में टकराव से बचा जाएगा और शांति को बरकरार रखा जाएगा।”
यह बैठक 2020 के गलवान संघर्ष के बाद से जारी बातचीत प्रक्रिया का हिस्सा है। उस संघर्ष के बाद से दोनों देशों के कॉर्प्स कमांडरों के बीच कुल 23 बैठकें हो चुकी हैं, जिनका उद्देश्य एलएसी पर तनाव कम करना और पारस्परिक विश्वास बहाली करना है।
भविष्य में बढ़ सकता है सैन्य गतिरोध
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार डॉ. ब्रह्मा चेलाने कहते हैं, “दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन अभी भी कुछ महत्वपूर्ण अनसुलझे इलाकों पर बातचीत होनी है। पूर्वी लद्दाख में दोनों तरफ लगभग 50,000 से 60,000 सैनिक तैनात हैं, जो बताते हैं, हालात अभी भी नाजुक हैं। वहीं, चीन पूरे हिमालयी मोर्चे पर नए परमानेंट स्ट्रक्चर बना कर, और अग्रिम मोर्चों पर तैनाती करके सिस्टेमेटिक तरीके से मिलिटराइजेशन कर रहा है, जिससे भविष्य में सैन्य गतिरोध और बढ़ने की संभावना है।”
फिलहाल, 23वीं बैठक से यह स्पष्ट संकेत मिला है कि भारत और चीन दोनों शांति और आपकी बातचीत को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहे हैं। जबकि कोई बड़ा समझौता नहीं हुआ है, लेकिन मौजूदा स्थिति को स्थिर रखना दोनों की प्राथमिकता बनी हुई है।


