📍नई दिल्ली | 29 Mar, 2026, 5:31 PM
Drone warfare: चाहे अमेरिका-ईरान युद्ध हो या रूस-यूक्रेन युद्ध, हालिया जंगों में ड्रोन वॉरफेयर का अलग ही रूप देखने को मिल रहा है। यूक्रेन ने रूस के शाहेद के ड्रोन का मुकाबला करने के लिए सस्ता इंटरसेप्टर ड्रोन बनाया तो, रूस ने यूक्रेनी ड्रोन को गिराने के लिए रियूजेबल तरीका अपनाया। हाल ही में एक वीडियो रूस की तरफ से जारी किया गया, जिसमें एक रूसी एफपीवी (फर्स्ट पर्सन व्यू) इंटरसेप्टर ड्रोन ने यूक्रेनी ड्रोन को बिना किसी विस्फोटक के सिर्फ मेटल रॉड्स की टक्कर मारकर गिरा दिया।
हालांकि यह तरीका देखने में बेहद साधारण लगता है, लेकिन इसका असर काफी बड़ा है। खास बात यह रही कि हमला करने वाला ड्रोन खुद सुरक्षित दिखाई दिया और उसे दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। (Drone warfare)
Drone warfare: कैसे हुआ ये हमला
वीडियो में साफ दिखता है कि रूसी ड्रोन के आगे दो लंबी मेटल रॉड्स लगी हुई थीं। यह ड्रोन तेजी से उड़ते हुए एक सफेद रंग के यूक्रेनी फिक्स्ड-विंग ड्रोन की तरफ बढ़ता है।
कुछ ही सेकंड में वह सीधे टारगेट से टकराता है और दोनों रॉड्स दुश्मन ड्रोन की बॉडी और विंग्स में घुस जाती हैं। टक्कर के साथ ही स्पार्क्स निकलते हैं और यूक्रेनी ड्रोन में आग लग जाती है। थोड़ी ही देर में वह हवा में टूटकर नीचे गिर जाता है।
इस पूरे ऑपरेशन में कोई विस्फोट नहीं हुआ। सिर्फ टक्कर से ही टारगेट को नष्ट कर दिया गया। (Drone warfare)
🎯 Drone Warfare Takes a New Turn — No Explosives, Just Precision
A latest video from the Russia-Ukraine War shows a Russian FPV interceptor drone destroying a Ukrainian drone using metal rods instead of explosives.
🚁 The concept is simple but effective:
Instead of carrying a… pic.twitter.com/fzR3g76ceF— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) March 29, 2026
क्या है ‘काइनेटिक इंटरसेप्शन’
इस तरीके को ‘काइनेटिक इंटरसेप्शन’ कहा जाता है। इसका मतलब है कि बिना बम या मिसाइल के, सिर्फ फिजिकल अटैक से ही दुश्मन को नष्ट किया जाता है।
आम तौर पर एफपीवी ड्रोन में विस्फोटक वॉरहेड लगाया जाता है। टारगेट से टकराते ही दोनों ड्रोन खत्म हो जाते हैं। लेकिन इस नए तरीके में सिर्फ मेटल रॉड्स का इस्तेमाल किया गया, जिससे हमला करने वाला ड्रोन बच गया।
यही इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत मानी जा रही है। (Drone warfare)
लागत में है बड़ा फर्क
ड्रोन युद्ध में सबसे बड़ी चुनौती लागत की होती है। एक साधारण एफपीवी ड्रोन की कीमत लगभग 500 से 1000 डॉलर के बीच होती है। अगर इसमें विस्फोटक जोड़ा जाए तो खर्च और बढ़ जाता है।
लेकिन इस नए तरीके में कोई वॉरहेड नहीं लगाया गया। सिर्फ साधारण मेटल रॉड्स से काम हो गया। इससे हर इंटरसेप्शन की लागत काफी कम हो जाती है।
युद्ध में जहां रोज हजारों ड्रोन इस्तेमाल हो रहे हैं, वहां यह तरीका बड़ी बचत की वजह बन सकता है। (Drone warfare)
दोबारा इस्तेमाल की सुविधा
इस तकनीक का एक और अहम पहलू यह है कि ड्रोन को दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। पारंपरिक हमलों में ड्रोन खुद भी नष्ट हो जाता है, लेकिन यहां ऐसा नहीं हुआ।
वीडियो में दिखता है कि टक्कर के बाद रूसी ड्रोन उड़ता रहता है। वीडियो में यह भी देखा गया कि उसने कुछ समय तक दुश्मन ड्रोन को साथ लेकर उड़ान जारी रखी और रूसी ड्रोन सुरक्षित रहा। यह सिस्टम सिर्फ सस्ता ही नहीं, बल्कि टिकाऊ भी है। (Drone warfare)
किन ड्रोन पर इस्तेमाल हो रही तकनीक
इस तरह की तकनीक कुछ खास इंटरसेप्टर ड्रोन मॉडल्स में इस्तेमाल हो रही है। इनका मकसद यूक्रेन के सस्ते स्ट्राइक ड्रोन को रोकना है।
यूक्रेन की तरफ से भी इसी तरह के कम लागत वाले प्रयोग देखने को मिले हैं। कुछ मामलों में ड्रोन पर फिशिंग रॉड या जाल लगाकर दुश्मन ड्रोन को गिराने की कोशिश की गई है।
दोनों पक्ष अब महंगे हथियारों की जगह सस्ती और सरल तकनीकों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। (Drone warfare)
ड्रोन बनाम ड्रोन की नई लड़ाई
2022 में शुरू हुए इस युद्ध में शुरुआत में ड्रोन का इस्तेमाल जमीन पर हमला करने के लिए किया जा रहा था। लेकिन अब स्थिति बदल गई है।
अब ड्रोन ही ड्रोन को मार रहे हैं। यानी आसमान में ही एक अलग तरह की लड़ाई चल रही है। इसे ड्रोन-वर्सेस-ड्रोन कॉम्बैट कहा जा रहा है।
इसमें छोटे, तेज और सस्ते ड्रोन ज्यादा असरदार साबित हो रहे हैं। (Drone warfare)
इलेक्ट्रॉनिक और अन्य तरीके भी इस्तेमाल
रूस सिर्फ टक्कर वाले ड्रोन ही नहीं, बल्कि अन्य तरीकों का भी इस्तेमाल कर रहा है। इसमें इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर यानी ईडब्ल्यू सिस्टम शामिल हैं, जो दुश्मन ड्रोन के सिग्नल को जाम कर देते हैं।
कुछ मामलों में जाल फेंककर ड्रोन को फंसाने की तकनीक भी अपनाई जा रही है। इसके अलावा डिकॉय ड्रोन यानी नकली ड्रोन भेजकर दुश्मन को भ्रमित किया जाता है।
लो-एल्टीट्यूड फ्लाइट और फाइबर-ऑप्टिक कंट्रोल जैसे तरीके भी इस्तेमाल में आ रहे हैं, जिससे जामिंग का असर कम हो जाता है।
ड्रोन तकनीक में हो रहे ये बदलाव दिखाते हैं कि युद्ध का तरीका तेजी से बदल रहा है। अब महंगे मिसाइल सिस्टम के साथ-साथ सस्ते और स्मार्ट सॉल्यूशंस भी अहम हो गए हैं। (Drone warfare)

