📍नई दिल्ली | 7 Apr, 2026, 8:45 PM
Indian Army Drone Roadmap Explained: भारतीय सेना ने हाल ही में अनमैन्ड एरियल सिस्टम यानी यूएएस और लॉइटरिंग म्यूनिशन के लिए एक टेक्नोलॉजी रोडमैप जारी किया है। भारपतीय सेना ने पहली बार ड्रोन को लेकर कोई रोडमैप तैयार किया है। इसका मकसद आने वाले समय के युद्ध के लिए सेना को तैयार करना और देश में ही नई तकनीक विकसित करना है। यह रोडमैप सेना के आर्मी डिजाइन ब्यूरो और ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया के साथ मिलकर तैयार किया गया है
मॉडर्न वॉरफेयर में ड्रोन का किस तरह से तरह से इस्तेमाल किया जा रहा है इसकी झलक हालिया युद्धों ईरान-इजरायल वॉर और यूक्रेन वॉर में देखी जा सकती है। जहां सस्ते ड्रोन के जरिए महंगे वेपन सिस्टम को निशाना बनाया जा रहा है। इन संघर्षों में ड्रोन ने निगरानी, सटीक हमले, लॉजिस्टिक सपोर्ट और यहां तक कि इलेक्ट्रॉनिक युद्ध में भी अहम भूमिका निभाई है। यही वजह है कि अब सेना यह समझ चुकी है कि अगर भविष्य के युद्ध में बढ़त बनानी है तो ड्रोन और ऑटोमैटिक सिस्टम पर फोकस करना ही होगा।
Indian Army Drone Roadmap Explained: क्या होते हैं यूएएस और लॉइटरिंग म्यूनिशन?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि यूएएस यानी अनमैन्ड एरियल सिस्टम सिर्फ एक ड्रोन नहीं होता, बल्कि यह पूरा सिस्टम होता है जिसमें ड्रोन के साथ-साथ कैमरे, सेंसर, कम्युनिकेशन सिस्टम और ग्राउंड कंट्रोल शामिल होते हैं। इसी तरह लॉइटरिंग म्यूनिशन ऐसे ड्रोन होते हैं जो हवा में कुछ समय तक घूमते रहते हैं, टारगेट की पहचान करते हैं और फिर खुद ही जाकर उस पर हमला कर देते हैं। इन्हें आम भाषा में कामिकाजे ड्रोन भी कहा जाता है, क्योंकि ये हमला करने के बाद खुद भी नष्ट हो जाते हैं।
Indian Army Drone Roadmap: भारतीय सेना का बड़ा कदम, ड्रोन और लॉइटरिंग म्यूनिशन के लिए पहली बार जारी हुआ मेगा रोडमैपhttps://t.co/9n5GjXqVKM#IndianArmy #DroneWarfare #LoiteringMunition #DefenceNews #AtmanirbharBharat #MilitaryTech #FutureWar #UAS #DroneIndia #ArmyUpdate…
— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) April 6, 2026
पांच हिस्सों में बंटा पूरा रोडमैप
इस रोडमैप की सबसे खास बात यह है कि इसे पांच बड़े हिस्सों में बांटा गया है, ताकि हर तरह के सैन्य ऑपरेशन के लिए अलग-अलग ड्रोन और सिस्टम तैयार किए जा सकें।
पहला हिस्सा निगरानी यानी सर्विलांस का है, जो किसी भी सेना की आंख और कान होता है। इसमें ऐसे ड्रोन शामिल हैं जो बहुत ऊंचाई पर लंबे समय तक उड़ सकते हैं और लगातार दुश्मन की हरकतों पर नजर रख सकते हैं।
कुछ ड्रोन ऐसे होते हैं जो 20,000 फीट से भी ज्यादा ऊंचाई पर जाकर कई घंटों या दिनों तक उड़ान भर सकते हैं, जबकि कुछ मध्यम ऊंचाई पर रहकर लगातार जानकारी देते रहते हैं। इन ड्रोन की मदद से सेना को रियल टाइम इंटेलिजेंस मिलती है, जिससे सीमा पर किसी भी हलचल को तुरंत समझा जा सकता है। खासकर पहाड़ी इलाकों और कठिन सीमाओं पर यह तकनीक बेहद उपयोगी साबित होती है।
स्पेशल रोल ड्रोन
दूसरा हिस्सा स्पेशल रोल का है, इसमें ऐसे ड्रोन शामिल हैं जो सिर्फ निगरानी नहीं करते, बल्कि कई तरह के ऑपरेशन कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर मदर ड्रोन से कई ड्रोन निकल कर अलग-अलग दिशाओं में उड़ सकते हैं, जिससे एक साथ कई जगहों पर निगरानी या हमला किया जा सकता है। कुछ ड्रोन वेपन से लैस होते हैं और जरूरत पड़ने पर सीधे हमला कर सकते हैं। कुछ ड्रोन दुश्मन के कम्युनिकेशन सिस्टम को जाम करने के लिए बनाए गए हैं।
इसके अलावा ऐसे ड्रोन भी शामिल हैं जो माइंस यानी बारूदी सुरंगें बिछा सकते हैं या स्वार्म यानी झुंड में हमला कर सकते हैं। स्वार्म टेक्नोलॉजी आधुनिक युद्ध की सबसे बड़ी पहचान बन चुकी है, जहां एक साथ कई ड्रोन मिलकर दुश्मन के डिफेंस सिस्टम को भ्रमित कर देते हैं और हमला करना आसान हो जाता है।
लॉइटरिंग म्यूनिशन
तीसरा हिस्सा लॉइटरिंग म्यूनिशन का है, जो सीधे तौर पर हमले से जुड़ा हुआ है। इसमें छोटे से लेकर लंबी दूरी तक मार करने वाले ड्रोन शामिल हैं। ये ड्रोन हवा में घूमते रहते हैं और सही समय आने पर टारगेट पर हमला करते हैं। कुछ ड्रोन सस्ते होते हैं ताकि बड़ी संख्या में इस्तेमाल किए जा सकें, जबकि कुछ हाई-टेक होते हैं जो बहुत सटीक निशाना लगा सकते हैं। इनका इस्तेमाल दुश्मन के बंकर, वाहन या महत्वपूर्ण ठिकानों को नष्ट करने के लिए किया जाता है। खास बात यह है कि ये ड्रोन कई बार इतने छोटे होते हैं कि उन्हें पहचानना भी मुश्किल होता है, जिससे दुश्मन के लिए उन्हें रोकना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
लॉजिस्टिक ड्रोन
चौथा हिस्सा लॉजिस्टिक ड्रोन का है, जो युद्ध के दौरान सप्लाई चेन को मजबूत बनाने में मदद करता है। सेना के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है कि कठिन और दूरदराज के इलाकों में तैनात सैनिकों तक समय पर राशन, दवा और गोला-बारूद पहुंचाया जाए। ऐसे में ये ड्रोन बड़ी भूमिका निभाते हैं। ये बिना पायलट के उड़कर जरूरी सामान सीधे सैनिकों तक पहुंचा सकते हैं। इससे न सिर्फ समय की बचत होती है, बल्कि जोखिम भी कम होता है, क्योंकि हर बार हेलीकॉप्टर या गाड़ियों का इस्तेमाल करना जरूरी नहीं रहता।
एयर डिफेंस रोल
पांचवां और आखिरी हिस्सा एयर डिफेंस रोल का है, जो दुश्मन के ड्रोन से रक्षा करने के लिए बनाया गया है। आज के समय में ड्रोन सिर्फ हमला ही नहीं करते, बल्कि खुद भी खतरा बन जाते हैं। इसलिए ऐसे सिस्टम जरूरी हैं जो दुश्मन के ड्रोन को हवा में ही रोक सकें। इसमें ऐसे ड्रोन शामिल हैं जो दूसरे ड्रोन को मार सकते हैं या स्वार्म हमले को रोक सकते हैं। कुछ सिस्टम ऐसे भी हैं जो नकली लक्ष्य बनाकर दुश्मन को भ्रमित करते हैं, जिससे असली सिस्टम सुरक्षित रहते हैं।
इस रोडमैप में क्या खास है?
पहले सेना अपनी जरूरतें अलग-अलग टेंडर या दस्तावेजों में बताती थी। जिससे इंडस्ट्री और स्टार्टअप्स को जरूरत समझने में मुश्किल होती थी। लेकिन अब एक ही दस्तावेज में करीब 30 तरह के प्लेटफॉर्म और उनकी जरूरतें बताई गई हैं। इससे कंपनियों को सेना की जरूरतों की स्पष्ट जानकारी मिलेगी कि उन्हें किस तरह की तकनीक डेवलप करनी है।
इंडस्ट्री और स्टार्टअप्स के लिए मौका
इस रोडमैप का एक बड़ा मकसद यह भी है कि देश की कंपनियां, स्टार्टअप्स और यूनिवर्सिटीज इसमें हिस्सा लें। इसके लिए एक पूरा प्रोसेस बनाया गया है, जिसमें कंपनियां आवेदन करके इस रोडमैप की डिटेल्स ले सकती हैं और उसी के अनुसार अपने प्रोडक्ट बना सकती हैं। इससे पहले कई बार ऐसा होता था कि कंपनियां कुछ और बनाती थीं और सेना को कुछ और चाहिए होता था। अब यह गैप कम होगा।
इस पूरे प्लान में सबसे ज्यादा जोर स्वदेशी तकनीक पर दिया गया है। यानी सेना चाहती है कि ड्रोन और संबंधित सिस्टम देश में ही डिजाइन और डेवलप किए जाएं। इससे बाहरी देशों पर निर्भरता कम होगी और देश के अंदर ही एक मजबूत डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम तैयार होगा। यह कदम आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां देश अपनी जरूरतों को खुद पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
क्यों जरूरी है यह रोडमैप?
आज का युद्ध तेजी से बदल रहा है। अब फैसले सेकंडों में होते हैं, और ड्रोन इस प्रक्रिया को और तेज बना देते हैं।
छोटे-छोटे ड्रोन भी बड़े हथियारों को बेअसर कर सकते हैं। यही वजह है कि दुनिया की बड़ी सेनाएं अब ड्रोन और ऑटोमैटिक सिस्टम पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं। भारतीय सेना भी अब उसी दिशा में आगे बढ़ रही है।

