📍नई दिल्ली | 9 Jan, 2026, 9:58 PM
DRDO Scramjet Engine Test: भारत ने हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक की दिशा में एक बहुत बड़ी छलांग लगाई है। डीआरडीओ की हैदराबाद स्थित प्रयोगशाला डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी (डीआरडीएल) ने पहली बार फुल स्केल एक्टिवली कूल्ड लॉन्ग ड्यूरेशन स्क्रैमजेट इंजन कम्बस्टर का सफल ग्राउंड टेस्ट किया है। यह टेस्ट 12 मिनट से अधिक समय तक चला और पूरी तरह सफल रहा। यह टेस्ट स्क्रैमजेट कनेक्ट पाइप टेस्ट (एससीपीटी) फैसिलिटी में किया गया, जिसे पूरी तरह भारत में ही डिजाइन और डेवलप किया गया है।
DRDO Scramjet Engine Test: क्या है यह उपलब्धि और क्यों है इतनी खास
हाइपरसोनिक तकनीक को आज के समय में डिफेंस सेक्टर की सबसे जटिल और एडवांस तकनीकों में गिना जाता है। हाइपरसोनिक मिसाइल वह होती है जो मैक-5 यानी ध्वनि की रफ्तार से पांच गुना या उससे ज्यादा रफ्तार से उड़ान भर सकती है। यह रफ्तार करीब 6,100 किलोमीटर प्रति घंटा या उससे भी अधिक होती है।
डीआरडीओ का यह टेस्ट इसलिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें लॉन्ग ड्यूरेशन, यानी लंबे समय तक इंजन को स्थिर और सुरक्षित रूप से चलाकर दिखाया गया है। हाइपरसोनिक उड़ान में सबसे बड़ी चुनौती होती है बेहद ज्यादा तापमान, तेज हवा का दबाव और ईंधन के स्थिर दहन को बनाए रखना। (DRDO Scramjet Engine Test)
स्क्रैमजेट इंजन क्या होता है, आसान भाषा में समझिए
इस पूरी तकनीक का सबसे अहम हिस्सा है स्क्रैमजेट इंजन। स्क्रैमजेट का पूरा नाम है सुपरसोनिक कंबशन रैमजेट। यह एक ऐसा एयर-ब्रीदिंग इंजन है, जो वातावरण से ऑक्सीजन लेता है और उसी के जरिए ईंधन जलाकर थ्रस्ट पैदा करता है। सामान्य रॉकेट इंजन को अपने साथ ऑक्सीजन ले जानी पड़ती है, जिससे उसका वजन बढ़ जाता है और रेंज सीमित हो जाती है। स्क्रैमजेट इंजन इस समस्या को खत्म कर देता है, क्योंकि यह हवा से ही ऑक्सीजन लेता है। इससे मिसाइल हल्की होती है और ज्यादा दूरी तक उड़ान भर सकती है। (DRDO Scramjet Engine Test)
2,000 डिग्री सेल्सियस से भी ज्यादा तापमान
स्क्रैमजेट इंजन की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें इंजन के अंदर भी हवा सुपरसोनिक गति से बहती रहती है। यानी हवा को धीमा नहीं किया जाता, बल्कि उसी तेज रफ्तार में ईंधन मिलाकर दहन कराया जाता है। यही चीज इस इंजन को जटिल बना देती है। इतनी तेज हवा में आग को स्थिर बनाए रखना अपने आप में एक बहुत बड़ी वैज्ञानिक चुनौती है।
🚀 Major Hypersonic Milestone for India! 🇮🇳
DRDO has successfully conducted a long-duration ground test of a full-scale, actively cooled scramjet engine for India’s Hypersonic Missile Programme. The test ran for over 12 minutes at DRDL’s state-of-the-art facility, validating… pic.twitter.com/RqBlUmA77D— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) January 9, 2026
DRDO Scramjet Engine Test: एक्टिवली कूल्ड स्क्रैमजेट क्यों जरूरी है
इसके साथ ही दूसरी बड़ी समस्या होती है तापमान। हाइपरसोनिक स्पीड पर इंजन के अंदर का तापमान 2,000 डिग्री सेल्सियस से भी ज्यादा हो सकता है। यह तापमान स्टील के पिघलने के तापमान से कहीं अधिक होता है। अगर इंजन को सही तरीके से ठंडा न किया जाए, तो वह कुछ सेकंड में ही खराब हो सकता है। (DRDO Scramjet Engine Test)
इसी वजह से डीआरडीओ ने एक्टिवली कूल्ड स्क्रैमजेट इंजन विकसित किया है। इसमें कूलिंग के लिए किसी अलग सिस्टम का इस्तेमाल नहीं किया जाता, बल्कि खुद ईंधन को ही कूलेंट के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। ईंधन को इंजन की दीवारों के पास से गुजारा जाता है, जहां वह अत्यधिक गर्मी को सोख लेता है। इसके बाद वही ईंधन कंबशन के लिए इस्तेमाल होता है। इस तकनीक को एंडोथर्मिक फ्यूल सिस्टम कहा जाता है। (DRDO Scramjet Engine Test)
हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल क्यों है गेम चेंजर
इस टेस्ट को सिर्फ एक तकनीकी सफलता के तौर पर देखना इसकी अहमियत को कम करके आंकना होगा। असल में यह भारत के हाइपरसोनिक मिसाइल प्रोग्राम के लिए वह आधार तैयार करता है, जिस पर भविष्य की सबसे तेज और सबसे घातक मिसाइलें बनाई जा सकेंगी। हाइपरसोनिक तकनीक आने के बाद भारत भी दुनिया के सबसे ताकतवर देशों के क्लब में मजबूती से खड़ा हो सकता है।
अब तक दुनिया में दो तरह की मिसाइलें प्रमुख रही हैं। एक हैं बैलिस्टिक मिसाइलें, जो बहुत तेज होती हैं लेकिन उनके रास्ते का पहले से अनुमान लगाया जा सकता है। दूसरी हैं क्रूज मिसाइलें, जो रास्ता बदल सकती हैं लेकिन उनकी स्पीड अपेक्षाकृत कम होती है। हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल इन दोनों के बीच की दूरी को खत्म कर देती है। यह बेहद तेज भी होती है और जरूरत पड़ने पर रास्ता भी बदल सकती है। यही वजह है कि मौजूदा एयर डिफेंस सिस्टम के लिए इन्हें रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि अमेरिका, रूस और चीन इस तकनीक को लेकर बेहद गंभीर हैं। (DRDO Scramjet Engine Test)
DRDO Scramjet Engine Test: ग्राउंड टेस्ट का मतलब क्या है
9 जनवरी को हुआ यह टेस्ट इसलिए ऐतिहासिक है, क्योंकि इसमें पहली बार भारत ने फुल स्केल एक्टिवली कूल्ड स्क्रैमजेट इंजन को लंबे समय तक सफलतापूर्वक चलाकर दिखाया। इससे पहले अप्रैल 2025 में सब-स्केल इंजन का लंबी अवधि का टेस्ट किया गया था। अब फुल स्केल इंजन का 12 मिनट से ज्यादा चलना यह दिखाता है कि तकनीक अब प्रयोगशाला से निकलकर ऑपरेशनल स्टेज के बेहद करीब पहुंच चुकी है।
यह ग्राउंड टेस्ट भले ही जमीन पर किया गया हो, लेकिन इसका महत्व किसी फ्लाइट टेस्ट से कम नहीं है। हाइपरसोनिक तकनीक में पहले जमीन पर इंजन की स्थिरता और सुरक्षा साबित की जाती है, उसके बाद ही उड़ान परीक्षण किए जाते हैं। डीआरडीओ पहले ही 2020 में हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डेमॉन्स्ट्रेशन व्हीकल (एचएसटीडीवी) का सफल फ्लाइट टेस्ट कर चुका है। अब स्क्रैमजेट इंजन का यह लंबी अवधि वाला टेस्ट उस दिशा में अगला बड़ा कदम है। (DRDO Scramjet Engine Test)
DRDO Scramjet Engine Test: भारत ने पहले भी किए हैं टेस्ट
भारत की हाइपरसोनिक यात्रा अचानक शुरू नहीं हुई है। पिछले दो दशकों से डीआरडीओ, इसरो, शैक्षणिक संस्थान और उद्योग मिलकर इस तकनीक पर काम कर रहे हैं। 2016 में इसरो ने स्क्रैमजेट इंजन का पहला एक्सपेरिमेंटल फ्लाइट टेस्ट किया था। 2020 में डीआरडीओ ने ओडिशा तट से एचएसटीडीवी उड़ाकर दुनिया को अपनी क्षमता दिखाई। इसके बाद हैदराबाद में एडवांस्ड हाइपरसोनिक विंड टनल और आईआईटी कानपुर में हाइपरवेलोसिटी टेस्ट फैसिलिटी जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की गईं। (DRDO Scramjet Engine Test)
DRDO Scramjet Engine Test: रक्षा मंत्री ने दी बधाई
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि को भारत के हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रोग्राम के लिए मजबूत आधार बताया है। वहीं डीआरडीओ के प्रमुख डॉ. समीर वी कामत ने इसे वैज्ञानिकों, उद्योग और शिक्षण संस्थानों की साझा मेहनत का परिणाम कहा है। यह संदेश भी साफ है कि भारत अब सिर्फ हथियार खरीदने वाला देश नहीं, बल्कि अत्याधुनिक हथियार बनाने वाला देश बन चुका है।
इस टेस्ट का एक बड़ा पहलू आत्मनिर्भर भारत से भी जुड़ा है। स्क्रैमजेट इंजन का डिजाइन, उसकी कूलिंग तकनीक, इस्तेमाल होने वाला ईंधन और टेस्ट फैसिलिटी सब कुछ भारत में ही डेवलप किया गया है। इसका मतलब है कि भविष्य में बनने वाली हाइपरसोनिक मिसाइलों के लिए भारत को किसी दूसरे देश पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। (DRDO Scramjet Engine Test)



