Ran Samwad 2025: Indian Navy Deputy Chief Vice Admiral Tarun Sobti says that the operation was not only an operation but a glimpse of the future war. The learnings from this helped the Indian Navy and the three forces to understand that the wars in the coming time will be fought not only from guns, tanks and ships, but also by drones, cyber wars, satellites, artificial intelligence and natural controls.
Ran Samwad 2025: Larger learning from operation syntre
The Vice Admiral Tarun Sobti, speaking at the Ran Dialogue 2025 event held at the Army War College of Mau, acknowledged that Operation Sitter gave several important lessons to the Indian Navy. He pointed out that when Pakistani terrorists in Jammu and Kashmir’s wrestling, carried out the terror attack and then when the recent war moves, the navy had completed its entire preparation within just 96 hours.
Ran Samwad 2025: Pakistani army prisoned in its own ports
He told the defence news that the navy does theater-level exercise Tropex every two years. This year was also practiced between January to March. The advantage of the same preparation was that when the situation worsened, the navy was immediately prepared to descend to the sea. All ships and submarines were immediately equipped with ammunition. He reported that the 15 Mig-29 fighter aircraft were deployed on the Aircraft Carrier INS Vikrant and the entire navy became active on the western beach.
Tomorrow won’t be like yesterday. ⚓🇮🇳
Vivek’s Naval readiness during Operation Sindoor
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3️⃣ Pakistan’s ships weren’t allowed anywhere near us. Maritime… pic.twitter.com/LmMuiJE8vy— Raksha Samachar | 🇮🇳 (@RakshaSamachar) August 27, 2019
उद्देश्य स्पष्ट था फॉरवर्ड पोस्टचर और डिटरेंस, ताकि पाकिस्तान किसी भी हाल में भारत की समुद्री सीमाओं, व्यापारिक मार्गों या तटवर्ती क्षेत्रों को खतरा न पहुंचा सके। इस तेज और संगठित कार्रवाई का नतीजा यह हुआ कि पाकिस्तान की नौसेना अरब सागर से बाहर निकल ही नहीं पाई। वाइस एडमिरल सोबती ने गर्व से कहा, “हमने उन्हें उनके ही बंदरगाहों में कैद कर दिया। वे बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पाए।”
Ran Samwad 2025: कैसा होगा भविष्य का युद्ध?
सोबती ने कहा कि इतिहास गवाह है कि हर बड़ी तकनीकी क्रांति ने युद्ध का चेहरा बदला है। तलवार से तोप तक, टैंक से परमाणु बम तक, हर युग में तकनीक ने निर्णायक भूमिका निभाई। आज हम एक साथ कई तकनीकी क्रांतियों के बीच खड़े हैं।
उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, सैटेलाइट कम्युनिकेशन, साइबर ऑपरेशंस और ड्रोन टेक्नोलॉजी ने युद्ध को पूरी तरह बदल दिया है। खास बात यह है कि ये तकनीकें अब बहुत तेजी से विकसित हो रही हैं, सस्ती हो गई हैं और हर किसी के लिए उपलब्ध हैं। सोबती ने कहा कि अब युद्ध का आधार केवल संख्या नहीं बल्कि स्पीड और सटीकता (Precision) है।
उन्होंने कहा कि आज की निर्णायक शक्ति ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और रियल-टाइम कम्युनिकेशन है। उनका कहना था कि सिविल सोर्स तकनीक जैसे Starlink सैटेलाइट इंटरनेट, AI आधारित डेटा एनालिटिक्स और ऑफ-द-शेल्फ ड्रोन अब युद्ध के मैदान पर हथियार के रूप में इस्तेमाल हो रहे हैं। इसका असर यह है कि युद्ध केवल सेनाओं के बीच नहीं, बल्कि तकनीक को अपनाने और इस्तेमाल करने की क्षमता पर निर्भर हो गया है।
Ran Samwad 2025: प्रिसिजन-गाइडेड म्युनिशन से कम कॉलेटरल डैमेज
वाइस एडमिरल सोबती ने रूस-यूक्रेन युद्ध और गाजा संघर्ष का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि ड्रोन अब युद्ध के सबसे बड़े हथियार बन गए हैं। ईरान-इजरायल संघर्ष में लंबी दूरी से की गई स्ट्राइक और प्रिसिजन-गाइडेड म्युनिशन (PGMs) ने युद्ध की दिशा बदल दी। प्रिसिजन-गाइडेड म्युनिशन का इस्तेमाल करते हुए कम से कम कॉलेटरल डैमेज के साथ दुश्मन के मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया।
वाइस एडमिरल सोबती ने कहा कि अब ये हथियार केवल टैक्टिकल लग्जरी नहीं बल्कि रणनीतिक जरूरत बन चुके हैं।
उन्होंने बताया कि यूक्रेन युद्ध ने दिखा दिया कि कम लागत वाले ड्रोन अब बड़े हथियारों के बराबर असर डाल सकते हैं। साधारण क्वाडकॉप्टर को बम गिराने और आत्मघाती (Kamikaze) मिशनों के लिए बदला गया। रूसी टैंकों और आर्मर्ड कॉलम्स को ड्रोन और सैटेलाइट से पहले पहचानकर यूक्रेनी सेना ने सटीक हमले किए। यमन के हूती विद्रोहियों ने रेड सी और गल्फ ऑफ एडन में सस्ते UAVs का इस्तेमाल कर बड़े जहाजों और व्यापारिक मार्गों को चुनौती दी। सोबती ने कहा कि अब ड्रोन स्वॉर्म्स (झुंड) हाई टेक्नोलॉजी वेपंस और जहाजों को टक्कर दे रहे हैं।
Ran Samwad 2025: स्पेस: वॉर का नया डोमेन
सोबती ने कहा कि अब अंतरिक्ष केवल वैज्ञानिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहा। युद्ध में यह सबसे अहम साधन बन चुका है। यूक्रेन को Maxar और Planet Labs जैसी कंपनियों से रियल टाइम सैटेलाइट इमेजरी मिली। Starlink इंटरनेट नेटवर्क ने उन्हें सेफ कम्युनिकेशन उपलब्ध कराया, जबकि रूस लगातार इलेक्ट्रॉनिक जामिंग कर रहा था। इसी तरह गाजा में इजरायल ने सैटेलाइट से हमास की सुरंगों और ठिकानों का पता लगाकर चुनिंदा हमले किए। उन्होंने कहा कि इससे साफ है कि आधुनिक युद्ध में स्पेस-बेस्ड एसेट्स निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं।
Ran Samwad 2025: इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर का बढ़ता दबदबा
वाइस एडमिरल सोबती ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (EW) आज की लड़ाई का अहम हिस्सा बन गया है। रूस ने यूक्रेनी ड्रोन और GPS आधारित हथियारों को जैमिंग और स्पूफिंग से बेकार कर दिया। उन्होंने कहा कि भारत को भी जॉइंट इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर एसेट्स तैयार करने होंगे क्योंकि आज “जो स्पेक्ट्रम को कंट्रोल करता है, वही युद्ध को कंट्रोल करता है।”
इनफॉरमेशन वॉर और नैरेटिव कंट्रोल
वाइस एडमिरल सोबती ने बताया कि युद्ध केवल मैदान में नहीं बल्कि लोगों के दिमाग में भी लड़ा जाता है। रूस और यूक्रेन दोनों ने अपने-अपने पक्ष में नैरेटिव बनाने के लिए मीडिया लीक, सोशल मीडिया, वीडियो और प्रोपेगैंडा का इस्तेमाल किया। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर में भी दुश्मन ने दुष्प्रचार फैलाने की कोशिश की, लेकिन भारतीय सेना ने समय रहते इसका जवाब दिया। उनका कहना है, “नैरेटिव कंट्रोल अब युद्ध का जरूरी हिस्सा बन चुका है।”
बता दें कि सीडीएस अनिल चौहान ने कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान लगभग 15 प्रतिशत ऊर्जा दुश्मन के झूठे नैरेटिव और दुष्प्रचार को रोकने में लग गई। यही कारण है कि ऑपरेशन के बाद भारत ने अपनी बात मजबूत ढंग से रखी और वैश्विक स्तर पर समर्थन हासिल किया।
साइबर ऑपरेशंस का रोल
वाइस एडमिरल सोबती के मुताबिक साइबर अटैक युद्ध का हिस्सा बन चुके हैं, लेकिन अभी तक निर्णायक नहीं साबित हुए हैं। रूस ने यूक्रेन की पावर ग्रिड और कम्युनिकेशन सिस्टम को निशाना बनाया, वहीं ईरान समर्थित हैकर्स ने इजरायल की वाटर सप्लाई और एनर्जी फैसिलिटी पर हमला किया। हालांकि, यूक्रेन रेडंडेंसी और बैकअप सिस्टम के जरिए ऐसे हमलों से जल्दी उबर गया। लेकिन इन हमलों का असर लंबे समय तक नहीं रहा। उन्होंने कहा कि साइबर हमले सहयोगी तो हैं लेकिन निर्णायक नहीं हैं। लेकिन उन्हें नजरअंदाज करना खतरनाक होगा।
नेटवर्क-इंटीग्रेटेड फोर्स स्ट्रक्चर
उन्होंने कहा कि भारत को नेटवर्क-इंटीग्रेटेड फोर्स स्ट्रक्चर की ओर बढ़ना होगा, जहां सेंसर और शूटर अलग-अलग होकर भी डेटा शेयर कर सकें और तुरंत हमला कर सकें। सोबती ने कहा कि आधुनिक युद्ध ने यह साबित कर दिया है कि अब केवल सैनिकों की संख्या से जीत नहीं मिलती। बल्कि स्पीड, एक्यूरेसी और टेक्निकल ऑप्टिमाइजेशन ही युद्ध में जीत दिला सकते हैं।
उन्होंने सुझाव दिया कि भारतीय सेनाओं को मॉड्यूलर, टेक-एनेबल्ड और एगाइल फोर्स पैकेजेज अपनाने होंगे। युद्ध अब “Mass vs Mass” नहीं बल्कि “Fast vs Fast” हो गया है। उन्होंने कहा कि अब भारत को अपने डॉक्ट्रिन्स (सैन्य सिद्धांतों) में मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस शामिल करने होंगे, ताकि थल, जल, नभ, अंतरिक्ष और साइबर हर क्षेत्र में एक साथ तालमेल बनाया जा सके।














