📍New Delhi | Environment Policy 2017
Nyoma Airstrip Eastern Ladakh: Mud Neyoma Airbase, being in the Neyama terrain of Eastern Ladakh, is willing to take India’s military strength to new heights. This state-of-the-art advance landing ground (as per sources)Algae Inauguration of Prime Minister Narendra Modi Tax in October 2025 Can. Genuine Control Line (LAC This airbase is at a height of 13,700 feet from the sea level, located at a distance of 30 kilometres. It will be India’s highest airbase and the fifth highest airspace in the world.
Nyoma Airstrip Eastern Ladakh: Only 7 months ago
Construction of Neoma Airbase Border Roads Organization (BRO Have done, which completed this project prematurely despite the tough geographical and seasonal challenges. The sources pointed out that the work of its runway started on 12 September 2023 and was fully prepared on 12 October 2024. Since Ladakh is completely covered with snow for six months and the way is completely closed, in such a runway is effectively prepared only in seven months. He told that the work can be done until September-October. The project was completed in mission mode. He said, "We worked day and night and did not compromise the quality even in difficult situations. ""
सूत्रों ने बताया कि भारतीय वायुसेना के तय मानकों के मुताबिक एयर स्ट्रिप बनाई गई है और थोड़ा जरूरी काम अभी बाकी है। वहीं अक्तूबर तक न्योमा एयर बेस पर फुल इमर्जेंसी लैंडिंग के लिए सभी तैयारियां और इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने का काम पूरा हो जाएगा। यह रन 2.7 किलोमीटर लंबा है और पूरी तरह से कंक्रीट से बना है।
Nyoma Airstrip Eastern Ladakh: पीएम मोदी करेंगे उद्घाटन!
सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस साल अक्तूबर के दूसरे हफ्ते में पूर्वी लद्दाख के रणनीतिक न्योमा एयरबेस का उद्घाटन कर सकते हैं। यह एयरबेस समुद्र तल से 13,700 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। न्योमा एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड का इस्तेमाल 2020 में चीन और भारत के बीच लद्दाख में हुए सीमा विवाद के दौरान बड़े पैमाने पर किया गया था। उस समय इस एयरस्ट्रिप ने भारतीय सेना के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यहां से सैनिकों और सैन्य साजोसामान तेसी से एलएसी तक पहुंचाया गया था। लेह तक हैवी लिफ्ट ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट के जरिए जवानों को लाया गया और फिर न्योमा से उन्हें ऊंचाई वाले मोर्चों तक भेजा गया। इसके लिए भारतीय वायुसेना ने सी-130 जे सुपर हरक्यूलिस और चिनूक हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल किया था।
🚨 LAC पर चीन को करारा जवाब! 🇮🇳 पूर्वी लद्दाख में न्योमा एयरस्ट्रिप ✈️ पर अक्टूबर से उतरेंगे MiG-29 और Su-30 MKI जैसे फाइटर जेट 📍LAC से सिर्फ 30 किमी दूर 🏔️ समुद्र तल से 11,000 फीट की ऊंचाई पर 🔧 BRO ने रनवे को पक्का कर किया तैयार | पूरी रिपोर्ट पढ़ें👇 https://t.co/SfYsm4mpum…
— Raksha Samachar | 🇮🇳 (@RakshaSamachar) July 20, 2025
Nyoma Airstrip Eastern Ladakh: फाइटर जेट्स भर सकेंगे उड़ान
यह एयरबेस रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल यानी वास्तविक नियंत्रण रेखा से लगभग 25-30 किमी की दूरी पर है। और डेमचोक जैसे संवेदनशील इलाके के करीब है। डेमचोक और डेपसांग जैसे इलाके भारत और चीन के बीच तनाव की बड़ी वजह रहे हैं। 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद भारत ने एलएसी के पास अपनी सैन्य तैयारियों को तेज कर दिया है। न्योमा एयरबेस के चालू होने से भारतीय वायुसेना मिग-29 और सुखोई-30 एमकेआई जैसे फाइटर जेट्स को यहां से ऑपरेट कर सकेगी। इसके अलावा, सी-17 ग्लोबमास्टर और सी-130जे जैसे ट्रांसपोर्ट विमान भी यहां से सैनिकों, हथियारों और राशन को जल्दी पहुंचा सकेंगे।
भारतीय सेना की सप्लाई चेन में आएगा बड़ा बदलाव
न्योमा एयरबेस लद्दाख में भारत का चौथा वायुसेना अड्डा होगा। इससे पहले लेह, कारगिल और परतापुर (थॉईस) में दो फाइटर एयरफील्ड मौजूद हैं। दौलत बेग ओल्डी (DBO) में एक मिट्टी का रनवे है, जो विशेष अभियानों के लिए उपयोग होता है। फुकचे और चुशूल में भी छोटे रनवे हैं, लेकिन युद्ध जैसे हालात में इनका उपयोग सीमित है। न्योमा एयरबेस के बन जाने के बाद यह लद्दाख के डाउनहिल फ्लैट प्लेन्स (नीचे के समतल क्षेत्र) में स्थित दक्षिणी क्षेत्र का पहला वायुसेना अड्डा होगा। वहीं, न्योमा एयरबेस की खासियत यह है कि यह अपेक्षाकृत कम ऊंचाई पर स्थित है, जिससे फिक्स्ड-विंग एयरक्राफ्ट के लिए यह अधिक उपयुक्त है।
न्योमा एयरबेस के एक्टिव हो जाने के बाद भारतीय सेना की सप्लाई चेन में बड़ा बदलाव आएगा। अभी तक लेह से न्योमा तक सड़क मार्ग से लॉजिस्टिक सप्लाई पहुंचाने में छह घंटे लगते हैं, लेकिन अब दिल्ली या चंडीगढ़ से विमान सीधे यहां तक डेढ़ से दो घंटे में पहुंच सकेंगे। इसका फायदा सैनिकों, गोला-बारूद, हथियारों और मेडिकल सपोर्ट को तेजी से आगे तक पहुंचाने में मिलेगा।
माइनस 30 डिग्री तक गिर जाता है तापमान
बीआरओ के प्रोजेक्ट हिमांक के चीफ इंजीनियर ब्रिगेडियर विशाल श्रीवाास्तव ने इस उपलब्धि पर गर्व जताते हुए कहा, “हमारी टीम ने कठिन परिस्थितियों में असाधारण काम किया है। न्योमा का यह रनवे न केवल सैन्य दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह स्थानीय लोगों के लिए बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगा और आपात स्थिति में राहत सामग्री को जल्दी पहुंचाने में मदद करेगा। न्योमा के पास मुद गांव के नाम पर इस एयरबेस का नाम रखा गया है, जो इस क्षेत्र की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को भी दर्शाता है। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में सर्दियों में तापमान माइनस 30 डिग्री तक गिर जाता है, और छह महीने तक सड़कें बर्फ से ढक जाती हैं। इसके बावजूद, बीआरओ ने आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करके इस एयरबेस को समय पर पूरा किया।
Nyoma Airstrip Eastern Ladakh: एयरफोर्स कर चुकी है टेस्टिंग
वहीं पिछले साल वायुसेना की एक विशेष टीम ने न्योमा रनवे का निरीक्षण भी किया था। टीम में पायलटों के साथ एयर ट्रैफिक कंट्रोलर और तकनीकी स्टाफ शामिल थे। हर पहलू की जांच के बाद रनवे को ऑपरेशनल घोषित किया गया। इसके बाद सी-130 जे सुपर हरक्यूलिस ने न्योमा Algae पर टेस्ट फ्लाइट की थी। इस ट्रायल में विमान ने रनवे के ऊपर से लो ओवरशूट किया, यानी लैंडिंग गियर खोलकर बिना टच किए रनवे के बिल्कुल नजदीक से उड़ान भरी। यह ट्रायल को एयर ट्रैफिक कंट्रोल की गाइडेंस में सफलतापूर्वक पूरा किया गया था।
बीआरओ के बजट में भारी इजाफा
2020 के गलवान संघर्ष के बाद भारत ने अपनी सीमा पर बुनियादी ढांचे के विकास को प्राथमिकता दी है। सरकार ने बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन के बजट में भी भारी इजाफा किया है। जहां 12-15 साल पहले इसका वार्षिक बजट केवल 4,000 करोड़ रुपये था, वहीं अब यह बढ़कर 18,700 करोड़ रुपये हो गया है। इस बढ़े हुए बजट का सीधा असर सीमा क्षेत्रों में नई सड़कों और एयरफील्ड्स के निर्माण में दिखाई दे रहा है। इस बढ़े हुए बजट ने सड़कों, पुलों और हवाई अड्डों के निर्माण में तेजी लाई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हमेशा कहा है कि सरकार सीमा पर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए हर संभव मदद देगी। इसका परिणाम यह है कि भारत ने एलएसी के पास सड़कों का जाल बिछा दिया है, जिसमें हानले-चुमार रोड और सासोमा-डीबीओ रोड जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट शामिल हैं।
चुशूल-डेमचोक-फुकचे-डम रोड भी तैयार
हानले-चुमार रोड, जो 16,500 फीट की ऊंचाई पर सल्सा पास से होकर गुजरती है, अब हानले से चुमार तक की दूरी को छह घंटे से घटाकर केवल एक घंटे 45 मिनट तक रह गई है। इसी तरह, चुशूल-डेमचोक-फुकचे-डम रोड (CDFD) एलएसी के समानांतर चलती है और डेमचोक जैसे संवेदनशील क्षेत्रों तक तेजी से पहुंच मिलती है। सूत्रों ने बताया कि यह सड़क 14,000 से 15,000 फीट की ऊंचाई पर बनाई गई है, जहां तापमान माइनस 35 डिग्री तक गिर जाता है। उन्होंने कहा, “हमने कई चुनौतियों का सामना किया, लेकिन इस सड़क को समय पर पूरा करना हमारी प्राथमिकता थी।”
गेम-चेंजर साबित होगा न्योमा एयरबेस
न्योमा एयरबेस का निर्माण भारत की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह LAC पर चीन की सैन्य तैनाती का मुकाबला करने के लिए तैयार है। चीन ने अपनी तरफ 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा पर कई अग्रिम हवाई अड्डे विकसित किए हैं। अप्रैल 2020 में चीनी सेना की भारी तैनाती को देखते हुए भारत ने भी अपनी तैयारियों को तेज किया। न्योमा एयरबेस के चालू होने से भारत को तेजी से सैन्य उपकरण और सैनिकों को तैनात करने की क्षमता मिलेगी, जो युद्ध की स्थिति में गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
Author
Harendra Chaudhary is active in defence journalism and is associated with RakshaSamachar.com. They have long been covering strategic news, defence policies and national security related issues involving Indian Army, Navy and Air Force. In his career of journalism, Harendra has written detailed articles on Parliament’s activities, military campaigns, India-Pak and India-China border dispute, defence procurement and ‘Make in India’ defence projects. They are known for deep understanding and analytical approach of defense cases.












