📍नई दिल्ली | 29 Dec, 2025, 11:01 PM
DG BrahMos Appointment CAT Verdict: कैट ने ब्रह्मोस डीजी की नियुक्ति को लेकर डीआरडीओ को तगड़ा झटका दिया है। ट्रिब्यूनल ने 25 नवंबर को जारी उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसके तहत ब्रह्मोस एयरोस्पेस के डायरेक्टर जनरल के पद पर एक अधिकारी की नियुक्ति की गई थी। कैट ने साफ कहा कि यह नियुक्ति मनमानी, बिना ठोस वजह और कानून के मुतााबिक नहीं थी।
कैट ने ब्रह्मोस के डीजी और सीईओ जयतीर्थ आर जोशी को हटाने का आदेश देते हुए डिफेंस मिनिस्ट्री से सीनियर साइंटिस्ट एस नांबी नायडू के नाम पर फिर से विचार करने को कहा है।
कैट का कहना है कि जब चयन प्रक्रिया में शामिल सभी उम्मीदवारों को बराबर अंक दिए गए हों, तो फिर सबसे जूनियर अधिकारी को चुनने की वजह रिकॉर्ड पर लिखित रूप में दर्ज होनी चाहिए। लेकिन इस मामले में ऐसा कुछ भी नहीं किया गया, जो संविधान के अनुच्छेद 14 यानी समानता के अधिकार का उल्लंघन है।
DG BrahMos Appointment CAT Verdict: क्या था पूरा मामला
ब्रह्मोस एयरोस्पेस में डीजी पद के लिए डीआरडीओ ने वर्ष 2024 में चयन प्रक्रिया शुरू की थी। स्क्रीनिंग और इंटरव्यू के बाद तीन उम्मीदवारों का पैनल तैयार किया गया। रिकॉर्ड के मुताबिक, तीनों को 80-80 अंक दिए गए। इसके बावजूद चयन के समय वरिष्ठता, अनुभव, वेतन स्तर और पद की गरिमा जैसे अहम पहलुओं को नजरअंदाज कर दिया गया।
कैट ने पाया कि चयन पैनल में नामों को अल्फाबेटिकल ऑर्डर में रखा गया, जबकि ऐसा करने का कोई नियम या एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) मौजूद नहीं है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि यह तरीका पारदर्शिता और तर्कसंगत फैसले की कसौटी पर खरा नहीं उतरता।
DG BrahMos Appointment CAT Verdict: नायडू ने दी थी अपॉइंटमेंट को चुनौती
सीनियर साइंटिस्ट एस नांबी नायडू ने 19 नवंबर 2024 को कैट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने दावा किया था कि उनकी सीनियरिटी और अनुभव को नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि वह सभी कैंडिडेट्स में सबसे सीनियर साइंटिस्ट थे, जबकि जोशी सबसे जूनियर थे।
नायडू ने कहा था कि लेवल-16 में एक जाने-माने साइंटिस्ट होने और मौजूदा डायरेक्टर जनरल से सीनियर होने के नाते, उनके मामले पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। अपनी दलील में उन्होंने कहा, “जोशी का अपॉइंटमेंट सरकारी नौकरी में सही चुनाव के सिद्धांतों के हिसाब से नहीं है।”
जोशी ने 2 दिसंबर, 2024 को ब्रह्मोस के डायरेक्टर जनरल का पद संभाला था।
DG BrahMos Appointment CAT Verdict: “प्रतिष्ठित वैज्ञानिक” की अनदेखी पर सवाल
कैट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि खास तौर डिस्टिंग्विश्ड साइंटिस्ट (डीएस) यानी “प्रतिष्ठित वैज्ञानिक” का दर्जा ऑटोमैटिक नहीं होता। यह दर्जा कठोर पीयर-रिव्यू, लंबे अनुभव, वैज्ञानिक योगदान, नेतृत्व क्षमता और उत्कृष्ट रिकॉर्ड के बाद मिलता है। इसलिए डीएस का महत्व कम नहीं आंका जा सकता।
ट्रिब्यूनल ने कहा कि डीआरडीओ के भीतर डीजी जैसे शीर्ष पद सामान्यतः डिस्टिंग्विश्ड साइंटिस्ट को दिए जाते हैं। साइंटिस्ट ‘एच’ को तब ही मौका दिया जाना चाहिए, जब डीएस उपलब्ध न हों। इस केस में डीएस उपलब्ध होने के बावजूद जूनियर साइंटिस्ट ‘एच’ को तरजीह दी गई, जिसकी कोई ठोस वजह नहीं बताई गई।
कैट ने साफ कहा कि डीआरडीओ चेयरमैन का विवेकाधिकार असीमित नहीं है। विवेकाधिकार का इस्तेमाल कारणयुक्त और रिकॉर्ड पर आधारित होना चाहिए। ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि फाइल नोटिंग में न तो अंकों के निर्धारण की स्पष्ट वजह है और न ही यह बताया गया कि बराबर अंक होने के बावजूद किस आधार पर अंतिम चयन किया गया।
अदालत ने इस पूरी प्रक्रिया को “उचित विचार-विमर्श से रहित” बताया और कहा कि ऐसा चयन संवैधानिक शासन की भावना के खिलाफ है। कैट ने यहां तक कहा कि यह चयन प्रक्रिया पहले से तय लगती है और बाद में केवल औपचारिकता निभाई गई।
चार सप्ताह में नए सिरे से विचार करे डीआरडीओ
कैट ने डीआरडीओ को निर्देश दिया है कि वह चार सप्ताह के भीतर इस पूरे मामले पर नए सिरे से विचार करे। साथ ही ट्रिब्यूनल ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक नया फैसला नहीं हो जाता, तब तक चयनित अधिकारी को अंतरिम प्रभार भी नहीं दिया जाएगा।
ट्रिब्यूनल ने दो टूक कहा कि न्यूनतम पात्रता पूरी करना, अधिक अनुभव और उच्च योग्यता पर भारी नहीं पड़ सकता। खासकर जब बात राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पद की हो, तो चयन में सबसे योग्य और वरिष्ठ व्यक्ति को प्राथमिकता देना जरूरी है। (DG BrahMos Appointment CAT Verdict)


