📍नई दिल्ली | 10 Mar, 2026, 8:50 PM
ADC-150 Air Droppable Container: भारत की समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए डीआरडीओ और भारतीय नौसेना मंगलवार को एक खास परीक्षण किया। दोनों ने मिलकर स्वदेशी एयर ड्रॉपेबल कंटेनर ‘एडीसी-150’ के इन-फ्लाइट रिलीज ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा किया। यह परीक्षण गोवा के तट से दूर समुद्र में 21 फरवरी से 1 मार्च के बीच किया गया।
इन ट्रायल के दौरान कंटेनर को बोइंग पी-8आई पोसाइडन विमान से अलग-अलग ऊंचाई और परिस्थितियों में रिलीज किया गया। चारों ट्रायल सफल रहे, जिससे यह साबित हो गया कि यह सिस्टम वास्तविक ऑपरेशन में भी भरोसेमंद तरीके से काम कर सकता है।
यह स्वदेशी सिस्टम समुद्र में तैनात नौसैनिक जहाजों तक जरूरी सामान, मेडिकल सहायता और उपकरण तेजी से पहुंचाने में मदद करेगा। (ADC-150 Air Droppable Container)
ADC-150 Air Droppable Container: क्या है एयर ड्रॉपेबल कंटेनर एडीसी-150
एडीसी-150 एक खास तरह का कंटेनर है, जिसे विमान से समुद्र में ड्रॉप करके जहाजों तक जरूरी सामान पहुंचाने के लिए बनाया गया है। यह कंटेनर लगभग 150 किलोग्राम तक का पेलोड ले जा सकता है। इसका मतलब है कि इसमें मेडिकल सप्लाई, जरूरी स्पेयर पार्ट्स, टेक्निकल इक्विपमेंट, फूड पैकेट या अन्य जरूरी सामग्री रखकर सीधे समुद्र में मौजूद जहाज तक पहुंचाया जा सकता है।
जब यह कंटेनर विमान से छोड़ा जाता है, तो इसके साथ लगा पैराशूट खुल जाता है, जिससे यह धीरे-धीरे समुद्र की सतह पर उतरता है। बाद में जहाज के कर्मचारी इसे आसानी से रिकवर कर सकते हैं। इस कंटेनर का रंग चमकीला नारंगी रखा गया है और उस पर काले-पीले मार्किंग्स बनाए गए हैं ताकि समुद्र में इसे आसानी से देखा जा सके। (ADC-150 Air Droppable Container)
समुद्र के बीच जहाजों के लिए क्यों जरूरी है यह सिस्टम
समुद्र में कई बार जहाज लंबे समय तक तट से सैकड़ों किलोमीटर दूर तैनात रहते हैं। ऐसी स्थिति में अगर किसी जहाज को अचानक किसी जरूरी सामान की जरूरत पड़ जाए, तो उसे तुरंत उपलब्ध कराना आसान नहीं होता।
अक्सर जहाजों को सप्लाई देने के लिए दूसरे जहाज भेजने पड़ते हैं या जहाज को खुद पोर्ट की ओर लौटना पड़ता है। इससे समय भी लगता है और ऑपरेशन भी प्रभावित हो सकते हैं। (ADC-150 Air Droppable Container)
एडीसी-150 जैसे सिस्टम से यह समस्या काफी हद तक हल हो सकती है। अब विमान सीधे समुद्र के ऊपर पहुंचकर जरूरी सामान कंटेनर के जरिए ड्रॉप कर सकता है। इससे जहाज को तुरंत मदद मिल सकती है और उसका मिशन जारी रह सकता है।
इस प्रोजेक्ट में डीआरडीओ की कई लैबोरेट्री ने मिलकर काम किया है। इस पूरे प्रोग्राम की मुख्य जिम्मेदारी विशाखापत्तनम स्थित नेवल साइंस एंड टेक्नोलॉजिकल लेबोरेटरी के पास थी। कंटेनर के पैराशूट सिस्टम को आगरा स्थित एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट ने विकसित किया है। वहीं बेंगलुरु के सेंटर फॉर मिलिट्री एयरवर्थिनेस एंड सर्टिफिकेशन ने इस सिस्टम को फ्लाइट क्लियरेंस और सर्टिफिकेशन दिया। जबकि हैदराबाद स्थित डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी ने ट्रायल के दौरान इंस्ट्रुमेंटेशन सपोर्ट दिया। इन सभी संस्थानों के संयुक्त प्रयास से यह सिस्टम कम समय में तैयार किया गया। (ADC-150 Air Droppable Container)
🇮🇳 DRDO & Indian Navy Test Indigenous ADC-150
DRDO and the Indian Navy successfully conducted in-flight release trials of the indigenous Air Droppable Container (ADC-150) from a P-8I aircraft off the Goa coast between 21 Feb – 1 Mar 2026.
The system can deliver 150 kg… pic.twitter.com/qWZUa3xe9D— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) March 10, 2026
पी-8आई विमान की क्षमता भी बढ़ेगी
जिस विमान से यह कंटेनर ड्रॉप किया गया, वह भारतीय नौसेना का बेहद एडवांस मैरीटाइम पेट्रोल एयरक्राफ्ट है। पी-8आई विमान को मुख्य रूप से लंबी दूरी की निगरानी, एंटी-सबमरीन वॉरफेयर और समुद्री गश्त के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
अब एडीसी-150 के इस्तेमाल से इस विमान की भूमिका और भी बढ़ जाएगी। यह केवल दुश्मन की निगरानी ही नहीं करेगा बल्कि जरूरत पड़ने पर समुद्र में मौजूद जहाजों को सप्लाई भी पहुंचा सकेगा। इससे नौसेना की ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी और रिस्पॉन्स कैपेबिलिटी दोनों मजबूत होंगी। (ADC-150 Air Droppable Container)
इन परीक्षणों के दौरान कंटेनर को अलग-अलग ऊंचाई, गति और मौसम जैसी परिस्थितियों में रिलीज किया गया। इन सभी स्थितियों को इसलिए चुना गया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वास्तविक ऑपरेशन में भी यह सिस्टम सही तरीके से काम करेगा।
चारों ट्रायल सफल रहे और कंटेनर सुरक्षित तरीके से समुद्र में उतरा। इससे यह स्पष्ट हो गया कि सिस्टम भरोसेमंद है और नौसेना की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है। वहीं, सभी डेवलपमेंटल फ्लाइट ट्रायल पूरे होने के बाद अब इस सिस्टम को जल्द ही नौसेना में शामिल किए जाने की उम्मीद है।
वहीं, एडीसी-150 का डेवलपमेंट भारत की आत्मनिर्भर भारत नीति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पहले इस तरह के कई सिस्टम विदेशों से आयात करने पड़ते थे। लेकिन अब डीआरडीओ और भारतीय वैज्ञानिकों ने स्वदेशी तकनीक के जरिए ऐसा समाधान तैयार किया है जो भारतीय नौसेना की जरूरतों के अनुसार बनाया गया है। इससे न केवल आयात पर निर्भरता कम होगी बल्कि रक्षा तकनीक के क्षेत्र में देश की क्षमता भी मजबूत होगी। (ADC-150 Air Droppable Container)
समुद्री ऑपरेशन होंगे ज्यादा प्रभावी
विशेषज्ञों का मानना है कि एडीसी-150 जैसे सिस्टम से नौसेना के समुद्री ऑपरेशन और अधिक प्रभावी बनेंगे। समुद्र के बीच तैनात जहाजों को अब किसी भी आपात स्थिति में तेजी से सहायता मिल सकेगी। चाहे जहाज में टेक्निकल खराबी हो, किसी उपकरण की जरूरत हो या किसी सैनिक को तत्काल मेडिकल सहायता चाहिए हो, विमान के जरिए तुरंत सप्लाई भेजी जा सकेगी। इससे मिशन की निरंतरता बनी रहेगी और जहाजों को ऑपरेशन छोड़कर वापस लौटने की जरूरत भी कम होगी।
वहीं, भविष्य में इस तरह के एयर डिलीवरी सिस्टम को और भी एडवांस बनाया जा सकता है। आने वाले समय में बड़े पेलोड वाले कंटेनर, स्मार्ट नेविगेशन सिस्टम और जीपीएस आधारित ड्रॉप टेक्नोलॉजी विकसित की जा सकती है, जिससे कंटेनर को बिल्कुल सटीक स्थान पर गिराया जा सके। डीआरडीओ पहले से ही कई नई टेक्नोलॉजी पर काम कर रहा है, जो भारतीय सेना और नौसेना की लॉजिस्टिक क्षमता को और मजबूत बना सकती हैं। (ADC-150 Air Droppable Container)

