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Tri Services Jointness: रक्षा मंत्री बोले- ऑपरेशन सिंदूर में IACCS, आकाशतीर और त्रिगुण नेटवर्क ने दिखाया कमाल, स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स से पहले सोच बदलें सेनाएं

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि जॉइंटनेस अब विकल्प नहीं बल्कि जरूरत है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा और ऑपरेशनल इफेक्टिवनेस का मूल आधार है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि थल, जल, नभ, अंतरिक्ष और साइबर, ये सभी आपस में जुड़े हुए डोमेन्स हैं और इन्हें अलग-अलग नहीं देखा जा सकता...

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📍नई दिल्ली | 30 Sep, 2025, 2:03 PM

Tri Services Jointness: ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेनाओं ने ऐसा ऐतिहासिक उदाहरण पेश किया जिसने दिखा दिया कि आने वाले समय में युद्ध जीतने की असली ताकत थल सेना, नौसेना और वायुसेना की संयुक्त क्षमता होगी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि इस ऑपरेशन ने एक यूनिफाइड रियल-टाइम ऑपरेशनल पिक्चर बनाकर कमांडरों को समय पर फैसला लेने, हालात की सही समझ बनाने और फ्रेंडली फायर जैसी घटनाओं से बचने में सक्षम बनाया।

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ऑपरेशन सिंदूर: जॉइंटनेस का असली चेहरा

नई दिल्ली के सब्रोतो पार्क में आयोजित वायुसेना की एक सेमिनार के दौरान राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर इस बात का जीवंत उदाहरण है कि जब तीनों सेनाएं मिलकर काम करती हैं, तो परिणाम कितने निर्णायक होते हैं। उन्होंने बताया कि इस ऑपरेशन में भारतीय वायुसेना का इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (IACCS), भारतीय थल सेना के आकाशतीर सिस्टम और भारतीय नौसेना का त्रिगुण नेटवर्क एक साथ जुड़े। इन तीनों ने मिलकर एक Tri Services Jointness जॉइंट ऑपरेशनल बैकबोन तैयार किया, जिसने दुश्मन पर काबू पाने में अहम भूमिका निभाई। रक्षा मंत्री ने कहा कि भविष्य के युद्धों में यह जॉइंटनेस ही जीत की गारंटी बनेगी।

Tri Services Jointness Operation Sindoor
Raksha Mantri Shri Rajnath Singh addressing a seminar organised by the Indian Air Force at Subroto Park, New Delhi on September 30, 2025.

क्यों जरूरी है जॉइंटनेस?

राजनाथ सिंह ने कहा कि आज युद्ध का स्वरूप बदल चुका है। पारंपरिक खतरों के साथ-साथ अब हाइब्रिड थ्रेट्स, साइबर वॉरफेयर, स्पेस डोमेन और ड्रोन अटैक जैसी चुनौतियां सामने आ चुकी हैं। इन हालात में कोई भी सर्विस अकेले काम नहीं कर सकती। उन्होंने कहा, “जॉइंटनेस अब विकल्प नहीं बल्कि जरूरत है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा और ऑपरेशनल इफेक्टिवनेस का मूल आधार है।”

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उन्होंने यह भी जोड़ा कि थल, जल, नभ, अंतरिक्ष और साइबर, ये सभी आपस में जुड़े हुए डोमेन्स हैं और इन्हें अलग-अलग नहीं देखा जा सकता और Tri Services Jointness सेना के लिए अहम है।

रक्षा मंत्री ने याद दिलाया कि हाल ही में कोलकाता में आयोजित कंबाइंड कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी तीनों सेनाओं के बीच इंटीग्रेशन पर जोर दिया था। यह सरकार की स्पष्ट प्राथमिकता है कि भारतीय सशस्त्र बल केवल परंपरा और मूल्यों में ही नहीं, बल्कि भविष्य के लिए तैयार टेक्नॉलॉजी और सिस्टम्स में भी दुनिया में अग्रणी बनें।

राजनाथ सिंह ने कहा, “हमारी सरकार का उद्देश्य सिर्फ नीति स्तर पर नहीं बल्कि जीवित रहने के सवाल के रूप में जॉइंटनेस को बढ़ावा देना है। सुरक्षा परिदृश्य इतनी तेजी से बदल रहा है कि यदि हम संयुक्त रूप से काम नहीं करेंगे तो खतरे और बड़े होंगे।”

डिजिटल पहलों की तरीफ

रक्षा मंत्री ने सेना, वायुसेना और नौसेना की डिजिटल पहलों की तारीफ भी की। उन्होंने कहा कि आर्मी का कंप्यूटराइज्ड इन्वेंट्री कंट्रोल ग्रुप (CICG), एयरफोर्स का इंटीग्रेटेड मैटेरियल्स मैनेजमेंट ऑनलााइन सिस्टम (IMMOLS) और नेवी का इंटीग्रेटेड लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट सिस्टम पहले ही लॉजिस्टिक्स को बदल चुके हैं।

उन्होंने यह भी ऐलान किया कि अब एक ट्राइ सर्विसेज लॉजिस्टिक्स एप्लीकेशन पर काम चल रहा है, जिससे तीनों सेनाओं के गुड्स और रिसोर्सेज एक साझा प्लेटफॉर्म पर ट्रैक होंगे। इससे फिजूलखर्ची कम होगी, क्रॉस-सर्विस रिसोर्सेज का इस्तेमाल बढ़ेगा और पारदर्शिता आएगी।

Tri Services Jointness Operation Sindoor-2
Raksha Mantri Shri Rajnath Singh addressing a seminar organised by the Indian Air Force at Subroto Park, New Delhi on September 30, 2025.

परंपरागत बंदिशों को तोड़ने की जरूरत

राजनाथ सिंह ने कहा कि दशकों से हर सेवा ने अपने-अपने अनुभवों के आधार पर इंस्पेक्शन, ऑडिट और ऑपरेशनल प्रैक्टिसेज डेवलप की हैं। लेकिन यह ज्ञान अक्सर उसी सेवा तक सीमित रह गया।

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उन्होंने कहा, “अगर आर्मी ने कोई नया सिस्टम डेवलप किया तो वह सिर्फ आर्मी तक रह गया। अगर नेवी या एयरफोर्स ने कुछ सीखा, तो वह भी उनके दायरे में ही रह गया। इस कम्पार्टमेंटलाइजेशन ने कीमती अनुभवों को साझा होने से रोका है। अब वक्त है कि हम इस दीवार को तोड़ें और सामूहिक सीख को अपनाएं।”

रक्षा मंत्री ने चेतावनी दी कि एविएशन सेफ्टी और साइबर वॉरफेयर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में अगर स्टैंडर्ड्स में फर्क रहा तो यह घातक साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी छोटी गलती का असर चेन-रिएक्शन की तरह होता है और अलग-अलग स्टैंडर्ड दुश्मन के लिए मौके पैदा कर सकते हैं।

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इंटीग्रेशन का मतलब यह नहीं कि हर जगह एक जैसा सिस्टम थोप दिया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिमालय की ठंड और रेगिस्तान की गर्मी में अंतर है। इसी तरह, नौसेना की चुनौतियां थल सेना और वायुसेना से अलग हैं। इसलिए जरूरी है कि विशिष्टताओं को बनाए रखते हुए साझा न्यूनतम मानक बनाए जाएं।

मानसिकता में बदलाव सबसे अहम

राजनाथ सिंह ने कहा कि स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स से पहले ज्यादा जरूरी है कि सोच में बदलाव लाया जाए। उन्होंने सभी वरिष्ठ सैन्य नेताओं से अपील की कि वे लगातार अपने अधीनस्थों को जॉइंटनेस का महत्व समझाएं। उन्होंने स्वीकार किया कि यह बदलाव आसान नहीं होगा, क्योंकि दशकों की परंपराएं और आदतें बीच में आएंगी।

लेकिन उन्होंने विश्वास जताया कि संवाद, आपसी समझ और परंपराओं के सम्मान से इन चुनौतियों को पार किया जा सकता है। उन्होंने कहा, “हर सेवा को यह महसूस होना चाहिए कि दूसरी सेवाएँ उनकी चुनौतियों को समझती हैं। तभी हम नए सिस्टम मिलकर बना सकते हैं।”

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रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि भारतीय सेनाओं को लगातार अंतरराष्ट्रीय अनुभवों और बेस्ट प्रैक्टिसेज का अध्ययन करना चाहिए। लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत को अपने जवाब खुद ढूंढने होंगे।

उन्होंने कहा, “हम दूसरों से सीख सकते हैं, लेकिन हमारे समाधान भारतीय भूगोल, हमारी संस्कृति और हमारी जरूरतों के हिसाब से होने चाहिए। तभी हम स्थायी और भविष्य के लिए तैयार सिस्टम बना पाएंगे।”

राजनाथ सिंह ने भरोसा दिलाया कि सरकार तीनों सेनाओं और अन्य सुरक्षा संस्थाओं जैसे भारतीय तटरक्षक, बीएसएफ और डीजीसीए को भी इस रास्ते पर आगे बढ़ाने के लिए हर संभव मदद करेगी।

उन्होंने कहा, “केवल तभी जब हमारी सेनाएं एक सुर में, तालमेल के साथ और पूर्ण समन्वय में काम करेंगी, तभी हम हर डोमेन में दुश्मन को मात दे पाएंगे और भारत को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे। यह समय की मांग है और हमें इसे हासिल करना ही होगा।”

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