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एवरेस्ट तक उड़ने वाला H-125 अब बनेगा भारत में, मोदी-मैक्रों ने किया पहली प्राइवेट हेलीकॉप्टर असेंबली लाइन का उद्घाटन

एच-125 दुनिया का सबसे ज्यादा बिकने वाला सिंगल इंजन लाइट हेलीकॉप्टर माना जाता है। यह एक हल्का लेकिन बेहद ताकतवर हेलीकॉप्टर है...

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📍नई दिल्ली | 17 Feb, 2026, 7:44 PM

Tata-Airbus H-125 Helicopter: कर्नाटक के वेमगल में मंगलवार को एयरबस एच-125 हेलीकॉप्टर की फाइनल असेंबली लाइन का उद्घाटन किया गया। यह भारत के निजी क्षेत्र में स्थापित होने वाली पहली हेलीकॉप्टर फाइनल असेंबली लाइन है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने मुंबई से वर्चुअली इसका उद्घाटन किया।

यह फैसिलिटी यूरोपीय एयरोस्पेस की दिग्गज एयरबस हेलीकॉप्टर्स और भारत की टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड के जॉइंट वेंचर के तहत बनाई गई है। वहीं इस फैसिलिटी के उद्घाटन के बाद वेमगल अब भारत के उभरते एयरोस्पेस सेंटर में शामिल हो गया है। (Tata-Airbus H-125 Helicopter)

Tata-Airbus H-125 Helicopter: क्यों खास है यह फाइनल असेंबली लाइन

अब तक भारत में हेलीकॉप्टरों का निर्माण मुख्य रूप से सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों तक ही सीमित था। यह पहली बार है जब निजी क्षेत्र में किसी हेलीकॉप्टर की पूरी फाइनल असेंबली, सिस्टम इंटीग्रेशन और फ्लाइट टेस्टिंग की व्यवस्था की गई है। इसका मतलब है कि यहां हेलीकॉप्टर के स्ट्रक्चर को जोड़ने से लेकर उसके इंजन, इलेक्ट्रिकल सिस्टम, एवियोनिक्स और अन्य उपकरणों को फिट करने और अंतिम परीक्षण तक का काम भारत में ही होगा। (Tata-Airbus H-125 Helicopter)

पीएम मोदी ने कहा- मजबूत हो रही साझेदारी

उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत में हेलीकॉप्टर असेंबली लाइन की शुरुआत दोनों देशों के बीच गहरे भरोसे का प्रतीक है। उनका कहना था कि भारत और फ्रांस के रिश्ते सिर्फ औपचारिक नहीं हैं, बल्कि आपसी भरोसे पर टिके हुए हैं। राफेल विमान से लेकर पनडुब्बियों और अब हेलीकॉप्टर निर्माण तक, यह साझेदारी लगातार मजबूत होती जा रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत और फ्रांस मिलकर ऐसा हेलीकॉप्टर बनाएंगे जो दुनिया में अपनी तरह का खास है। यह वही हेलीकॉप्टर है जो माउंट एवरेस्ट जैसी ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है। प्रधानमंत्री ने गर्व के साथ कहा कि अब यह हेलीकॉप्टर भारत में बनेगा और दुनिया के दूसरे देशों को भी निर्यात किया जाएगा। इसका मतलब है कि भारत अब सिर्फ खरीदने वाला देश नहीं, बल्कि बनाने और बेचने वाला देश बन रहा है। (Tata-Airbus H-125 Helicopter)

प्रधानमंत्री ने भारत-फ्रांस साझेदारी को गहराई और ऊंचाई दोनों से जोड़ा। उन्होंने कहा कि यह रिश्ता समुद्र की गहराइयों से लेकर पहाड़ों की ऊंचाइयों तक फैला है। उनका इशारा रक्षा, तकनीक, इनोवेशन और रणनीतिक सहयोग की ओर था। उन्होंने इस परियोजना को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक मजबूत कदम बताया। (Tata-Airbus H-125 Helicopter)

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मैक्रों बोले- रक्षा क्षेत्र में फ्रांस, “मेक इन इंडिया” का एक भरोसेमंद साझेदार

वहीं, इंडिया-फ्रांस इनोवेशन फोरम में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में फ्रांस, “मेक इन इंडिया” का एक मजबूत और भरोसेमंद साझेदार है। उन्होंने बताया कि भारत और फ्रांस के बीच उच्च स्तर का सहयोग है, जिसकी वजह से दोनों देश मिलकर अगली पीढ़ी के इंजन, मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर, एडवांस कॉम्बैट एयरक्राफ्ट और सबमरीन जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर पा रहे हैं।

मैक्रों ने कहा कि वह भारत की ओर से इस साझेदारी पर जताए गए भरोसे के लिए दिल से आभार व्यक्त करते हैं। उनके मुताबिक यह सिर्फ रक्षा सौदों की एक श्रृंखला नहीं है, बल्कि दो संप्रभु देशों के बीच एक मजबूत गठबंधन है। उन्होंने कहा कि भारत और फ्रांस जमीन, समुद्र और आसमान तीनों क्षेत्रों में एक-दूसरे को मजबूती से चुन रहे हैं, और यह चुनाव मजबूरी में नहीं, बल्कि भरोसे के साथ किया गया है। (Tata-Airbus H-125 Helicopter)

उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों का सहयोग सिर्फ रक्षा तक सीमित नहीं है। अंतरिक्ष क्षेत्र में भी यह साझेदारी बेहद अहम है। उन्होंने ‘त्रिश्ना’ सैटेलाइट के विकास का उदाहरण देते हुए कहा कि जब वैज्ञानिक उत्कृष्टता और औद्योगिक विशेषज्ञता साथ आती हैं, तो बड़े परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

मैक्रों ने आगे कहा कि भारत में कई सिविल और न्यूक्लियर पहलें भी चल रही हैं, जिनमें दोनों देश साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इनोवेशन का मतलब सिर्फ बड़ी तकनीकी उपलब्धियां हासिल करना नहीं होता, बल्कि इसका मकसद आम लोगों की जिंदगी बेहतर बनाना भी है। उनके अनुसार, तकनीक ऐसी होनी चाहिए जो लोगों के रोजमर्रा के जीवन को ज्यादा सुरक्षित, स्वस्थ और आसान बनाए।

उन्होंने इस परियोजना को दोनों देशों के बीच इनोवेशन और तकनीकी सहयोग का उदाहरण बताया। मैक्रों ने यह भी कहा कि आने वाले समय में भारत और फ्रांस रक्षा, तकनीक और इनोवेशन के क्षेत्र में मिलकर और आगे बढ़ेंगे। (Tata-Airbus H-125 Helicopter)

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रक्षा मंत्री ने रक्षा निर्यात में हुई बढ़ोतरी पर दिया जोर

वेमगल में आयोजित कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत और फ्रांस के बीच सहयोग की कोई सीमा नहीं है। उन्होंने बताया कि दोनों देश रक्षा क्षेत्र में लंबे समय से साथ काम कर रहे हैं और अब हेलीकॉप्टर निर्माण के जरिए यह संबंध और मजबूत होगा।

रक्षा मंत्री ने भारत के रक्षा निर्यात में हुई बढ़ोतरी पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में रक्षा निर्यात कई गुना बढ़ा है और भारत अब दुनिया के प्रमुख रक्षा निर्यातकों में शामिल हो रहा है। पहले रक्षा उत्पादन में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों की ज्यादा भूमिका थी, लेकिन अब निजी क्षेत्र भी तेजी से आगे आ रहा है। टाटा जैसी कंपनियां अब बड़े रक्षा प्रोजेक्ट्स में अहम भूमिका निभा रही हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि एच-125 कार्यक्रम में एक हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश होने की उम्मीद है। इससे देश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। सीधे तौर पर फैक्ट्री में काम मिलेगा और अप्रत्यक्ष रूप से सप्लाई चेन, छोटे उद्योग और सेवा क्षेत्र को भी फायदा होगा। रक्षा मंत्री ने कहा कि यह परियोजना सिर्फ एक फैक्ट्री नहीं है, बल्कि भारत के औद्योगिक आत्मविश्वास का प्रतीक है। (Tata-Airbus H-125 Helicopter)

क्या है एयरबस एच-125?

एच-125 दुनिया का सबसे ज्यादा बिकने वाला सिंगल इंजन लाइट हेलीकॉप्टर माना जाता है। यह एक हल्का लेकिन बेहद ताकतवर हेलीकॉप्टर है। सिविल क्षेत्र में इसका इस्तेमाल पर्यटन, वीआईपी यात्रा, आपातकालीन चिकित्सा सेवा, पुलिस ऑपरेशन, जंगल में आग बुझाने और आपदा राहत जैसे कामों में किया जाता है।

इस हेलीकॉप्टर की सबसे बड़ी खासियत इसकी हाई-एल्टीट्यूड क्षमता है। यह दुनिया का एकमात्र ऐसा हेलीकॉप्टर है जिसने माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई तक उड़ान भरी है। इसलिए बर्फीले और ऊंचे इलाकों में यह बेहद उपयोगी साबित होता है। भारत के हिमालयी सीमावर्ती क्षेत्रों में, जहां मौसम कठिन और ऊंचाई अधिक होती है, ऐसे हेलीकॉप्टर की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। (Tata-Airbus H-125 Helicopter)

मिलिटरी वर्जन भी होगा तैयार

इस प्लांट में भविष्य में एच-125 का मिलिटरी वर्जन, जिसे एच-125एम कहा जाता है, बनाने की भी योजना है। यह लाइट मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर के रूप में भारतीय सेनाओं बलों की जरूरतों को पूरा कर सकता है।

मिलिटरी वर्जन में निगरानी, टोही, हल्के हथियारों के साथ सीमित हमला क्षमता और ट्रेनिंग जैसी सुविधाएं हो सकती हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें अधिक से अधिक स्वदेशी कंपोनेंट्स और तकनीक शामिल करने की योजना है। इससे भारत में रक्षा हेलीकॉप्टर निर्माण का मजबूत इकोसिस्टम तैयार होगा। (Tata-Airbus H-125 Helicopter)

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2027 की शुरुआत में डिलीवरी

पहला ‘मेड इन इंडिया’ सिविल एच-125 हेलीकॉप्टर वर्ष 2027 की शुरुआत में डिलीवर किए जाने की उम्मीद है। यह हेलीकॉप्टर सिर्फ घरेलू बाजार के लिए ही नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया के अन्य देशों को भी निर्यात किया जाएगा।

इससे भारत एक एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभरेगा। हेलीकॉप्टर के निर्यात से विदेशी कमाई भी बढ़ेगी और भारत की छवि एक भरोसेमंद रक्षा उत्पादन केंद्र के रूप में मजबूत होगी। (Tata-Airbus H-125 Helicopter)

मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा

यह परियोजना ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सरकार का लक्ष्य है कि भारत रक्षा उपकरणों का आयातक देश बने रहने के बजाय निर्माता और निर्यातक देश बने।

टाटा और एयरबस की यह साझेदारी दो साल पहले शुरू हुए सी-295 सैन्य ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट प्रोजेक्ट के बाद दूसरा बड़ा कदम है। गुजरात के वडोदरा में सी-295 विमान की असेंबली लाइन स्थापित की गई थी। अब हेलीकॉप्टर निर्माण के साथ यह सहयोग और मजबूत हो गया है। (Tata-Airbus H-125 Helicopter)

रोजगार और उद्योग को फायदा

इस संयंत्र के जरिए बड़ी संख्या में सीधे और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। हेलीकॉप्टर निर्माण में सैकड़ों छोटे और मध्यम उद्योगों की भागीदारी होती है, जो पार्ट्स, वायरिंग, कंपोनेंट्स और अन्य उपकरण बनाते हैं।

इससे स्थानीय सप्लाई चेन मजबूत होगी और भारत का एयरोस्पेस इकोसिस्टम बढ़ेगा। डिजाइन, इंजीनियरिंग, मेंटेनेंस और रिपेयर जैसी सेवाओं में भी नई संभावनाएं खुलेंगी।

वहीं, भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग पहले से ही मजबूत रहा है। राफेल लड़ाकू विमान, स्कॉर्पीन पनडुब्बियां और अब हेलीकॉप्टर निर्माण, ये सभी इस भरोसे को दर्शाते हैं। (Tata-Airbus H-125 Helicopter)

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