📍नई दिल्ली/मॉस्को | 28 Oct, 2025, 12:22 PM
SJ-100 Aircraft: भारतीय एयरोस्पेस कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और रूस की पब्लिक जॉइंट स्टॉक कंपनी यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन ने मॉस्को में सिविल कम्यूटर एयरक्राफ्ट एसजे-100 के प्रोडक्शन के लिए एक एमओयू पर दस्तखत किए हैं। यह पहली बार होगा जब भारत में एक फुल पैसेंजर विमान का निर्माण किया जाएगा। इससे पहले एचएएल ने एवरो विमान बनाया था।
SJ-100 Aircraft: 37 साल बाद भारत में बनेगा पैसेंजर विमान
इस समझौते के बाद देश में ही पैसेंजर विमान बनाए जाएंगे। जिससे सिविल एविएशन इंडस्ट्री को जबरदस्त बूम मिलेगा। इससे पहले एचएएल ने एवरो एचएस-748 विमान का उत्पादन 1961 से 1988 के बीच किया था। वहीं, एसजे-100 के निर्माण से भारत फिर से यात्री विमान निर्माण के क्षेत्र में प्रवेश करेगा। यह विमान देश की उड़ान योजना (उड़े देश के आम नागरिक) के तहत क्षेत्रीय हवाई संपर्क को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा।

इस समझौते पर दस्तखत एचएएल की ओर से प्रभात रंजन और यूएसी की ओर से ओलेग बोगोमोलोव ने किए। इस मौके पर एचएएल के चेयरमैन डॉ. डीके सुनील और यूएसी के डायरेक्टर जनरल वाडिम बाडेखा मौजूद थे।
वहीं, एचएएल अब यूएसी के साथ मिलकर इस एमओयू को आगे बढ़ाकर एक जॉइंट वेंचर समझौते में बदलने पर विचार कर रही है। यह प्रोजेक्ट एचएएल को डिफेंस एयरक्राफ्ट्स के अलावा सिविल एविएशन प्रोडक्शन के क्षेत्र में भी नई पहचान देगा।
SJ-100 Aircraft की खासियत
एसजे-100 एक ट्विन-इंजन नैरो बॉडी सिविल एयरक्राफ्ट है, जिसमें लगभग 100 यात्रियों के बैठने की क्षमता है।
रूस में अब तक इस विमान के 200 से अधिक यूनिट्स बनाई जा चुकी हैं, जिन्हें 16 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ऑपरेट कर रही हैं। भारत में इसका निर्माण एचएएल की बेंगलुरु या नासिक फैसिलिटी में किया जाएगा। इस समझौते के तहत एचएएल को घरेलू ग्राहकों के लिए एसजे-100 बनाने का अधिकार दिया गया है।
हालांकि एचएएल और रूस ने पहले भी कई सैन्य विमान प्रोजेक्ट्स पर साझेदारी की थी। वहीं, अब यह साझेदारी सिविल एविएशन सेक्टर तक पहुंच चुकी है। यूएसी की तरफ से यह कदम रूस के एमसी-21 और एसजे-100 प्रोग्राम्स के तहत भारत के साथ तकनीकी सहयोग बढ़ाने का हिस्सा है।

यूएसी ने हाल ही में एसजे-100 के नई पीढ़ी वाले रूसी इंजन पीडी-8 के साथ टेस्ट फ्लाइट पूरी की थी। वर्तमान में रूस में 24 नए एसजे-100 यूनिट्स प्रोडक्शन में हैं, जिन्हें आने वाले महीनों में सर्टिफिकेशन के बाद डिलीवर किया जाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दस सालों में भारत को 200 से अधिक रीजनल जेट्स की जरूरत होगी। इसके अलावा, हिंद महासागर क्षेत्र और आसपास के अंतरराष्ट्रीय रूट्स के लिए 350 अतिरिक्त विमानों की मांग भी देखी जा रही है। ऐसे में एसजे-100 का प्रोडक्शन भारतीय एविएशन सेक्टर के लिए बड़ा कदम साबित हो सकता है।


