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ड्रोन बनाने वाली कंपनी अब भारत में बनाएगी एडवांस गोला-बारूद, सागर डिफेंस को मिला एक्सप्लोसिव्स लाइसेंस

रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय सेना के लिए जरूरी 175 तरह के गोला-बारूद में से लगभग 154 को देश में ही बनाया जाने लगा है। यानी करीब 88 प्रतिशत जरूरतें अब स्वदेशी स्तर पर पूरी हो रही हैं...

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📍नई दिल्ली | 7 Apr, 2026, 6:44 PM

Sagar Defence ammunition licence: गोला-बारूद की विदेशों पर ने निर्भरता घटाने के लिए देश के डिफेंस सेक्टर ने बड़ा कदम उठाया है। अब तक ड्रोन और ऑटोमैटिक सिस्टम बनाने वाली प्राइवेट डिफेंस कंपनी सागर डिफेंस इंजीनियरिंग को अब देश में ही विस्फोटक और गोला-बारूद बनाने का लाइसेंस मिल गया है। यह लाइसेंस इंडस्ट्रीज (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट 1951 के तहत मिला है, जिसके बाद कंपनी अब अगले दो साल में बड़े स्तर पर विस्फोटक और एम्युनिशन बनाने की तैयारी कर रही है।

Sagar Defence ammunition licence: महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में बनेगी नई फैक्ट्री

कंपनी के मुताबिक, यह नई सुविधा उत्पादन क्षमता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी और इसे खास तौर पर भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जा रहा है।

कंपनी ने जानकारी दी है कि वह महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में अपने नए प्रोडेक्शन नेटवर्क तैयार करेगी। खास तौर पर आंध्र प्रदेश के जुव्वालादिने फिशिंग हार्बर में एक बड़ी और मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी तैयार की जा रही है, जहां बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जाएगा।

कंपनी के संस्थापक निकुंज पराशर के अनुसार, यह नई सुविधा उत्पादन क्षमता को तेजी से बढ़ाने में मदद करेगी। यहां बड़े पैमाने पर विस्फोटक और गोला-बारूद बनाए जाएंगे, ताकि देश की जरूरतों को पूरा किया जा सके। (Sagar Defence ammunition licence)

ड्रोन टेक्नोलॉजी से फुल डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग तक

अब तक सागर डिफेंस इंजीनियरिंग भारत के डिफेंस टेक इकोसिस्टम में एक इनोवेटर के तौर पर जानी जाती रही है। कंपनी समुद्र, हवा और जमीन तीनों क्षेत्रों में बिना चालक वाले और ऑटोमैटिक सिस्टम तैयार करती है।

इनमें ऑटोनोमस वेपनाइज्ड बोट स्वार्म, अंडरवाटर व्हीकल और ड्रोन जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं, जो सिक्योरिटी ऑपरेशंस में इस्तेमाल हो रहे हैं। अब कंपनी इन प्लेटफॉर्म्स के साथ विस्फोटक और गोला-बारूद को जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रही है। ताकि पूरी तरह से इंटीग्रेटेड हथियार प्लेटफॉर्म तैयार किए जा सकें।

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अगले दो साल में कंपनी का लक्ष्य है कि वह अपने ऑटोमैटिक सिस्टम और गोला-बारूद निर्माण को एक साथ जोड़कर नई क्षमताएं विकसित करे। (Sagar Defence ammunition licence)

सरकार की नीतियों से से मिला फायदा

भारत लंबे समय से रक्षा उपकरणों और गोला-बारूद के लिए आयात पर निर्भर रहा है। लेकिन अब सरकार का जोर इस बात पर है कि ज्यादा से ज्यादा उत्पादन देश में ही हो। रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय सेना के लिए जरूरी 175 तरह के गोला-बारूद में से लगभग 154 को देश में ही बनाया जाने लगा है। यानी करीब 88 प्रतिशत जरूरतें अब स्वदेशी स्तर पर पूरी हो रही हैं।

भारत में गोला-बारूद का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। अनुमान है कि 2026 में यह बाजार करीब 2.66 अरब डॉलर का है, जो 2031 तक बढ़कर 4.44 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। बढ़ती सुरक्षा जरूरतों और आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप के कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।

इस बढ़ोतरी की वजह सेना की बढ़ती जरूरतें, सीमाओं पर लगातार तनाव और आधुनिक हथियारों की मांग है। ऐसे में देश में ही उत्पादन बढ़ाना एक जरूरी कदम बन गया है।

वहीं, कंपनी की इस प्रगति में सरकार की नीतियों की भी बड़ी भूमिका रही है। ‘इनोवेशन्स फॉर डिफेंस एक्सीलेंस’ (आईडेक्स), ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक’ जैसे कार्यक्रमों ने स्टार्टअप्स और सेना के बीच सहयोग को बढ़ाया है।

इसी दिशा में रक्षा मंत्रालय ने भी कई नीतियां बनाई हैं, ताकि निजी कंपनियां इस क्षेत्र में आगे आएं। सागर डिफेंस इंजीनियरिंग को मिला यह लाइसेंस उसी प्रक्रिया का हिस्सा है। इससे देश में न केवल उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि नई तकनीक भी विकसित होगी और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। (Sagar Defence ammunition licence)

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सरकारी और निजी कंपनियां भी आगे

सरकारी कंपनी म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड को भी अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए बड़ा बजट दिया गया है, ताकि उत्पादन क्षमता बढ़ाई जा सके। वहीं निजी क्षेत्र में भी तेजी देखने को मिल रही है।

इसके लिए कंपनियों को औद्योगिक लाइसेंस लेना पड़ता है, जो रक्षा मंत्रालय और पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन जैसी एजेंसियों के तहत जारी होता है।

हाल के सालों में नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। 2025-26 में रेवेन्यू प्रोक्योरमेंट मैन्युअल में संशोधन के बाद निजी कंपनियों को अब पहले की तरह म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड से एनओसी लेने की जरूरत नहीं रही। इससे निजी सेक्टर के लिए रास्ता काफी आसान हो गया है और अब वे आर्टिलरी शेल, मिसाइल, बम, मोर्टार, ग्रेनेड और छोटे-बड़े कैलिबर के गोला-बारूद बनाने में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। (Sagar Defence ammunition licence)

निजी क्षेत्र में अदाणी डिफेंस एंड एरोस्पेस भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश के कानपुर में अदाणी डिफेंस की बड़ी फैक्ट्री है, जहां छोटे हथियारों के गोला-बारूद का बड़े पैमाने पर उत्पादन हो रहा है। कंपनी अपनी क्षमता को और बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।

इसी तरह भारत फोर्ज अब सिर्फ पार्ट्स बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरा तैयार गोला-बारूद बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। महाराष्ट्र में इसकी नई फैसिलिटी तैयार की जा रही हैं।

नागपुर की सोलार इंडस्ट्रीज भी इस क्षेत्र में तेजी से उभरी है। यह कंपनी पहले कमर्शियल विस्फोटक बनाती थी, लेकिन अब डिफेंस सेक्टर के लिए भी गोला-बारूद तैयार कर रही है।

इसके अलावा आईडीएल एक्सप्लोसिव्स को भी हाई एनर्जी डिफेंस विस्फोटक बनाने का लाइसेंस मिला है। यह कंपनी टीएनटी और एचएमएक्स जैसे शक्तिशाली विस्फोटक तैयार कर रही है।

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रिलायंस डिफेंस भी इस क्षेत्र में बड़ी योजना पर काम कर रही है। महाराष्ट्र में एक बड़े डिफेंस प्रोजेक्ट के तहत विस्फोटक और गोला-बारूद बनाने की तैयारी की जा रही है, जिसमें विदेशी कंपनियों के साथ साझेदारी भी शामिल है। (Sagar Defence ammunition licence)

वहीं, गुडलक इंडिया को भी मिडियम कैलिबर के आर्टिलरी शेल बनाने का लाइसेंस मिला है। इनके अलावा कई और कंपनियां जैसे प्रीमियर एक्सप्लोसिव्स और ह्यूजेस प्रिसिजन भी इस क्षेत्र में सक्रिय हैं और उत्पादन क्षमता बढ़ा रही हैं।

दरअसल, देश में सैकड़ों लाइसेंस जारी किए गए हैं, लेकिन बड़े स्तर पर उत्पादन करने वाली कंपनियों की संख्या अभी सीमित है। छोटे हथियारों के गोला-बारूद में कुछ कंपनियां आगे हैं, जबकि बड़े विस्फोटक और प्रोपेलेंट बनाने में कुछ अन्य कंपनियां मजबूत स्थिति में हैं।

यह भी ध्यान देने वाली बात है कि लाइसेंस मिलने के बाद तुरंत उत्पादन शुरू नहीं होता। इसके लिए फैक्ट्री तैयार करना, परीक्षण करना और सुरक्षा मानकों को पूरा करना जरूरी होता है, जिसमें समय लगता है।

फिलहाल, भारत अपनी जरूरत के ज्यादातर गोला-बारूद का उत्पादन देश में ही करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। निजी कंपनियों की बढ़ती भागीदारी से यह प्रक्रिया और तेज हो रही है और जिससे भविष्य में देश में ही एक मजबूत डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम तैयार होगा। (Sagar Defence ammunition licence)

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