📍नई दिल्ली | 14 Nov, 2025, 12:26 PM
Pakistan drone ToT: भारतीय सुरक्षा एजेंसियां इन दिनों पाकिस्तान और एक यूरोपीय ड्रोन कंपनी के बीच हुए कथित ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी समझौते पर कड़ी नजर रख रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह समझौता पाकिस्तान की सरकारी डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग यूनिट हेवी इंडस्ट्रीज तक्षिला के साथ हुआ है, जिसे पाकिस्तान बेहद गोपनीय रखने की कोशिश कर रहा है।
सूत्रों ने बताया कि यह पूरा मामला हाल के महीनों में तब सामने आया जब भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की ड्रोन गतिविधियों को बारीकी से मॉनिटर किया। अधिकारी के अनुसार, ऑपरेशन के बाद पाकिस्तान के सैन्य अधिकारी यूरोप, रूस और यूक्रेन के विभिन्न ड्रोन निर्माताओं से संपर्क में थे। उद्देश्य था ऐसे मिलिट्री ग्रेड मीडियम-एल्टीट्यूड लॉन्ग-एंड्योरेंस (MALE) ड्रोन हासिल करना, जो उसकी ड्रोन क्षमता बढ़ा सकते हैं।
Pakistan drone ToT
ये ड्रोन हाई एल्टीट्यूड पर उड़ान भर सकते हैं, और सर्विलांस के साथ अटैक भी कर सकते हैं। अगर यह डील पूरी होती है तो पाकिस्तान की ड्रोन वॉरफेयर कैपेबिलिटी में बड़ा बूस्ट मिलेगा। सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान अपनी ड्रोन फोर्स को डाइवर्सिफाई करना चाहता है ताकि सिर्फ तुर्की या चीन पर निर्भर न रहे। अगर यह डील पूरी हुई तो 2027-28 तक पाकिस्तान खुद MALE ड्रोन्स बना सकेगा।
ड्रोन टेक्नोलॉजी पर इन दिनों पूरी दुनिया का ध्यान है। रूस–यूक्रेन युद्ध में दोनों देशों ने ड्रोन का इस्तेमाल एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर, मिलिट्री इंस्टालेशंस और लंबी दूरी के लक्ष्यों पर हमले करने के लिए किया है। कई बार ड्रोन ने सीमा से सैकड़ों किलोमीटर अंदर जाकर रिफाइनरी और लॉजिस्टिक हब को नुकसान पहुंचाया।
अंदाजा लगाया जा रहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने कई विदेशी कंपनियों से संपर्क किया था। इनमें यूक्रेन की कंपनी अंतानोव और यूक्रोबोरोनप्रोम भी शामिल हैं। इसके अलावा ईस्टर्न यूरोप की प्राइवेट फर्म और रूस से भी संपर्क किया था। सूत्रों का कहना है कि यूक्रेन रूस के खिलाफ ड्रोन वॉर में एक्सपर्ट हो गया है। यूक्रेन की कंपनियां टीबी2 जैसी टेक्नोलॉजी इस्तेमाल करती हैं। वहीं पाकिस्तान पहले से यूक्रेनी टैंक इंजन्स लेता रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ड्रोन सिस्टम ने भारतीय सेना के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मई 2025 की रात पाकिस्तान ने पूरे पश्चिमी मोर्चे पर कई बार ड्रोन और दूसरे म्यूनिशंस का इस्तेमाल किया, जिन्हें भारतीय सेनाओं ने प्रभावी तरीके से रोक दिया था। इस ऑपरेशन के बाद भारत ने ड्रोन वारफेयर से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी और बढ़ा दी है।
Pakistan drone ToT के बारे में अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तान का यह संभावित ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी समझौता अगर आगे बढ़ता है, तो उसकी ड्रोन क्षमता में बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि भारत की सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे मसले को बेहद बारीकी से देख रही हैं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि पाकिस्तान को ड्रोन या तकनीकी उपकरणों की डिलीवरी कब होगी, लेकिन भारतीय एजेंसियां इस सौदे से जुड़ी हर गतिविधि को मॉनिटर कर रही हैं।

