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सबसे बड़े डिफेंस रिफॉर्म्स की तैयारी; सरकार ने संसदीय कमेटी में क्या कहा थिएटर कमांड्स पर, अगले 3 माह में कैसे बदलेगा पूरा मिलिट्री स्ट्रक्चर?

माना जा रहा है कि मई तक इस पर बड़ा फैसला हो सकता है। कोशिश यह है कि चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान के मई में रिटायर होने से पहले इस योजना को मंजूरी मिल जाए। इसके लिए जल्द ही कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी से अप्रूवल लिया जा सकता है...

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📍नई दिल्ली | 21 Mar, 2026, 5:50 PM

India Theatre Commands: अगले कुछ महीने भारतीय सेनाओं के लिए बेहद अहम होने वाले हैं। एक तरफ जहां, सीडीएस, नेवी चीफ मई के आखिर तक रिटायर हो जाएंगे तो मौजूदा आर्मी चीफ जून के आखिर तक रिटायर होंगे। वहीं दूसरी तरफ सरकार तीन इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड्स बनाने की तैयारी में है, जिससे सेना, नौसेना और वायुसेना एक साथ मिलकर काम करेंगी। इस पर संसदीय कमेटी की ताजा रिपोर्ट में बताया गया है कि इस दिशा में काफी प्रगति हो चुकी है और लगभग सभी पक्षों में सहमति बन गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, अब कुछ अंतिम मुद्दों पर चर्चा चल रही है और प्रशासनिक काम भी साथ-साथ आगे बढ़ रहा है। माना जा रहा है कि मई तक इस पर बड़ा फैसला हो सकता है। कोशिश यह है कि चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान के मई में रिटायर होने से पहले इस योजना को मंजूरी मिल जाए। इसके लिए जल्द ही कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी से अप्रूवल लिया जा सकता है। यह बदलाव आर्मी, नेवी और एयर फोर्स के बीच तालमेल बढ़ाने के लिए बहुत अहम माना जा रहा है। (India Theatre Commands)

India Theatre Commands: क्या होते हैं थिएटर कमांड्स

थिएटर कमांड्स का मतलब है कि किसी खास इलाके या दुश्मन के हिसाब से सेना की तीनों शाखाओं को एक कमांड के तहत लाया जाए। अभी भारत में आर्मी, नेवी और एयर फोर्स के अलग-अलग कमांड हैं, जो अपने-अपने तरीके से काम करते हैं।

नए सिस्टम में एक ही कमांडर के तहत तीनों सेनाएं मिलकर ऑपरेशन चलाएंगी। इससे फैसले जल्दी होंगे और युद्ध के समय तालमेल बेहतर रहेगा। (India Theatre Commands)

रक्षा मंत्रालय ने क्या कहा संसदीय कमेटी को

संसदीय कमेटी को रक्षा मंत्रालय ने बताया कि थिएटर कमांड्स बनाने की दिशा में अच्छा काम हुआ है और ज्यादातर मुद्दों पर सहमति बन चुकी है। अब कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा चल रही है, जिन्हें चीफ्स ऑफ स्टाफ कमिटी यानी सीओएससी अंतिम रूप दे रही है। साथ ही, प्रशासनिक स्तर पर भी तैयारियां लगातार जारी हैं, ताकि जब फैसला हो, तो उसे तुरंत लागू किया जा सके।

सरकार का मानना है कि आज का युद्ध पहले जैसा नहीं रहा। अब लड़ाई सिर्फ जमीन, हवा या समुद्र तक सीमित नहीं है, बल्कि साइबर, स्पेस और मल्टी-डोमेन में भी होती है। ऐसे में सेना के ढांचे में बदलाव करना जरूरी हो गया है, ताकि आधुनिक युद्ध की जरूरतों के हिसाब से तेजी और बेहतर तरीके से काम किया जा सके।

रक्षा मंत्रालय ने यह भी कहा है कि थिएटर कमांड्स का एक बड़ा फायदा यह होगा कि तीनों सेनाओं के बीच “जॉइंटनेस” यानी मिलकर काम करने की संस्कृति मजबूत होगी। अभी अलग-अलग सिस्टम होने की वजह से कई बार तालमेल की कमी दिखती है, लेकिन नए ढांचे में यह समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी। (India Theatre Commands)

तीन बड़े थिएटर कमांड्स की योजना

अभी भारत में करीब 17 अलग-अलग सिंगल सर्विस कमांड्स हैं। जैसे आर्मी के अलग कमांड, एयर फोर्स के अलग और नेवी के अलग कमांड्स हैं। थिएटर कमांड्स बनने के बाद इन सभी को मिलाकर तीन बड़े कमांड बनाए जाएंगे। इसका मतलब यह नहीं है कि पुराने कमांड पूरी तरह खत्म हो जाएंगे, बल्कि उनका रोल बदल जाएगा।

दुश्मन के हिसाब से बनेगा नया स्ट्रक्चर

सूत्रों के मुताबिक भारत जिस नए थिएटर कमांड सिस्टम की तैयारी कर रहा है, उसकी सबसे खास बात यह है कि यह सिर्फ नक्शे के हिसाब से नहीं, बल्कि दुश्मन के हिसाब से बनाया जा रहा है। यानी पहले की तरह सिर्फ इलाके के आधार पर कमांड नहीं होगी, बल्कि जहां से खतरा है, उसी हिसाब से पूरी सैन्य ताकत को एक जगह लाकर रखा जाएगा।

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इस नए मॉडल में तीन बड़े थिएटर कमांड नॉर्दर्न, वेस्टर्न और मैरिटाइम बनाए जाने की योजना है। हर कमांड का अपना अलग रोल होगा और उसमें तीनों सेनाओं के संसाधन एक साथ काम करेंगे। (India Theatre Commands)

नॉर्दर्न थिएटर कमांड: चीन के खिलाफ सबसे बड़ा फ्रंट

नॉर्दर्न थिएटर कमांड का सबसे बड़ा फोकस चीन के साथ लगने वाली सीमा यानी एलएसी पर होगा। इसमें लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक का पूरा इलाका शामिल होगा। इसके साथ ही पूर्वी सेक्टर में बांग्लादेश और म्यांमार से जुड़े इलाकों पर भी नजर रखी जाएगी, ताकि पूरे पूर्वी मोर्चे को एक साथ कंट्रोल किया जा सके।

इस कमांड का हेडक्वार्टर लखनऊ में बनाया जा सकता है। इसके पीछे वजह यह है कि लखनऊ भौगोलिक रूप से इस पूरे क्षेत्र के बीच में पड़ता है और यहां से कमांड और कंट्रोल करना आसान होगा।

इस थिएटर कमांड में आर्मी की नॉर्दर्न, सेंट्रल और ईस्टर्न कमांड्स के कुछ हिस्सों को शामिल किया जाएगा। साथ ही एयर फोर्स की वेस्टर्न, सेंट्रल और ईस्टर्न कमांड्स के एयर एसेट्स भी इसमें शामिल होंगे। यानी लड़ाई की स्थिति में जमीन और हवा दोनों से एक साथ कार्रवाई हो सकेगी। (India Theatre Commands)

इसका कमांडर तीन-स्टार रैंक का अधिकारी होगा, जो आर्मी या एयर फोर्स दोनों में से किसी से भी हो सकता है। माना जा रहा है कि इसमें रोटेशन सिस्टम भी हो सकता है, ताकि दोनों सेनाओं को बराबर मौका मिले।

इस कमांड का मुख्य उद्देश्य चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के खिलाफ मजबूत डिफेंस तैयार करना और जरूरत पड़ने पर जवाबी कार्रवाई यानी काउंटर-ऑफेंसिव करना होगा। पिछले कुछ सालों में एलएसी पर जो तनाव देखने को मिला है, उसके बाद इस कमांड की अहमियत और बढ़ जाती है। (India Theatre Commands)

वेस्टर्न थिएटर कमांड: पाकिस्तान फ्रंट पर तेजी से जवाब

वेस्टर्न थिएटर कमांड पूरी तरह पाकिस्तान को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। इसका इलाका सियाचिन में साल्टोरो रिज से लेकर रण ऑफ कच्छ तक फैला होगा। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर में चल रहे काउंटर इंसर्जेंसी और काउंटर टेररिज्म ऑपरेशंस भी इसी कमांड के तहत आएंगे।

इसका हेडक्वार्टर जयपुर में बनाया जा सकता है। जयपुर की लोकेशन पश्चिमी मोर्चे के लिए रणनीतिक रूप से काफी अहम मानी जाती है, क्योंकि यहां से पूरे बॉर्डर पर नजर रखना आसान होता है। (India Theatre Commands)

इस थिएटर में आर्मी की वेस्टर्न और साउथ-वेस्टर्न कमांड्स के हिस्से शामिल होंगे। इसके अलावा एयर फोर्स के जरूरी स्क्वाड्रन्स भी इसमें जोड़े जाएंगे। यानी अगर किसी भी तरह के तनाव की स्थिति बनती है, तो आर्मी और एयर फोर्स मिलकर तुरंत कार्रवाई कर सकेंगे।

इस कमांड का नेतृत्व भी तीन-स्टार जनरल करेगा, लेकिन यहां आर्मी अफसर को कमांड सौंपी जाा सकती है, क्योंकि पाकिस्तान के साथ जमीन पर टकराव की संभावना ज्यादा रहती है।

इस थिएटर का सबसे बड़ा उद्देश्य यह है कि पाकिस्तान के साथ किसी भी तरह की पारंपरिक लड़ाई या “कोल्ड स्टार्ट” जैसे ऑपरेशन में तेजी से और प्रभावी कार्रवाई की जा सके। अभी तक अलग-अलग कमांड्स के चलते फैसलों में देरी हो सकती थी, लेकिन अब एक ही कमांडर के पास पूरा कंट्रोल होगा, जिससे प्रतिक्रिया का समय कम हो जाएगा। (India Theatre Commands)

मैरिटाइम थिएटर कमांड: नेवी की समुद्र में बढ़ेगी ताकत

तीसरा और बेहद महत्वपूर्ण थिएटर कमांड होगा मैरिटाइम थिएटर कमांड, जो पूरी तरह समुद्री क्षेत्र पर फोकस करेगा। इसमें हिंद महासागर, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी जैसे इलाके शामिल होंगे। इसके साथ ही इंडियन ओशन रीजन में चीन की बढ़ती मौजूदगी पर भी नजर रखी जाएगी।

इसके हेडक्वार्टर के लिए तिरुवनंतपुरम, कारवार या कोयंबटूर में से किसी एक जगह को चुना जा सकता है। हालांकि तिरुवनंतपुरम की लोकेशन समुद्री ऑपरेशंस के लिए ज्यादा उपयुक्त मानी जाती है।

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इस थिएटर में नेवी की ईस्टर्न और वेस्टर्न कमांड्स के सभी एसेट्स शामिल होंगे। इसके अलावा एयर फोर्स के कुछ समुद्री ऑपरेशन से जुड़े स्क्वाड्रन्स और आर्मी की कोस्टल यूनिट्स भी इसमें शामिल होंगी। यानी समुद्र से जुड़े हर ऑपरेशन को एक ही कमांड के तहत लाया जाएगा।

इस कमांड का नेतृत्व नेवी के फ्लैग ऑफिसर यानी एडमिरल रैंक के अधिकारी के पास होगा। यह स्वाभाविक भी है, क्योंकि समुद्री ऑपरेशंस में नेवी की भूमिका सबसे ज्यादा होती है।

इस थिएटर का मुख्य उद्देश्य समुद्री रास्तों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होगा। खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से लेकर मलक्का स्ट्रेट तक, जहां से दुनिया का बड़ा व्यापार गुजरता है। इसके अलावा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की बढ़ती नौसैनिक ताकत को संतुलित करना भी इसका अहम लक्ष्य होगा। (India Theatre Commands)

कुल 197 जॉइंटनेस इनिशिएटिव्स तय

आज के समय में सेना की ताकत सिर्फ हथियारों से नहीं, बल्कि इस बात से तय होती है कि तीनों सेनाएं – आर्मी, नेवी और एयर फोर्स – मिलकर कितनी अच्छी तरह काम करती हैं। इसी को “जॉइंटनेस और इंटीग्रेशन” कहा जाता है। आसान भाषा में समझें तो इसका मतलब है तीनों सेनाओं का एक टीम की तरह काम करना, ताकि युद्ध के समय पूरी ताकत एक साथ इस्तेमाल हो सके।

सरकार और रक्षा मंत्रालय का मानना है कि यही जॉइंटनेस और इंटीग्रेशन भविष्य के युद्धों में जीत की सबसे बड़ी कुंजी है। इसी सोच के तहत कुल 197 अलग-अलग पहलें यानी इनिशिएटिव्स तय किए गए हैं। ये पहलें कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में फैली हुई हैं, जैसे ऑपरेशन और इंटेलिजेंस, नई सैन्य क्षमता का विकास, कम्युनिकेशन और आईटी सिस्टम, लॉजिस्टिक्स यानी सप्लाई सिस्टम, ट्रेनिंग, मेंटेनेंस, मानव संसाधन, प्रशासन और कानूनी व्यवस्था।

इन सभी क्षेत्रों में सुधार करके यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि तीनों सेनाएं अलग-अलग नहीं, बल्कि एक साथ मिलकर काम करें।

इन 197 पहलों को अलग-अलग चरणों में लागू किया जा रहा है। पहले चरण में वे काम शामिल थे, जो थिएटर कमांड्स की घोषणा से पहले पूरे किए जाने थे। इस चरण में कुल 50 काम तय किए गए थे, जिनमें से 29 पूरे हो चुके हैं।

दूसरे चरण में थिएटर कमांड्स की घोषणा के बाद से लेकर उनके पूरी तरह काम शुरू करने तक पूरे किए जाएंगे। इस चरण में 62 काम तय किए गए हैं, जिनमें से 12 पर काम पूरा हो चुका है और बाकी पर तेजी से काम चल रहा है।

तीसरा चरण वह है, जो थिएटर कमांड्स के पूरी तरह ऑपरेशनल होने के बाद भी जारी रहेगा। इसमें 51 काम शामिल हैं, जिनमें से 7 पूरे किए जा चुके हैं। यानी यह प्रक्रिया सिर्फ एक बार की नहीं है, बल्कि लगातार चलने वाला सुधार है।

अगर इन तीनों चरणों को मिलाकर देखें, तो कुल 163 काम इस मुख्य सेट में आते हैं, जिनमें से अब तक 48 पूरे हो चुके हैं। इसके अलावा 34 ऐसे काम भी हैं, जो थिएटर कमांड्स बनने से सीधे जुड़े नहीं हैं, लेकिन सेना की जॉइंटनेस बढ़ाने के लिए जरूरी हैं। इनमें से 10 काम पूरे हो चुके हैं। (India Theatre Commands)

क्या हैं फोर्स एप्लीकेशन और फोर्स जनरेशन

थिएटर कमांड बनने के बाद अब सर्विस चीफ यानी आर्मी, नेवी और एयर फोर्स के प्रमुख “फोर्स जनरेशन” पर ध्यान देंगे। यानी भर्ती, ट्रेनिंग, उपकरण और तैयारी उनकी जिम्मेदारी होगी। फोर्स जनरेशन यानी सेना को तैयार करना – भर्ती, ट्रेनिंग, हथियार आदि – यह काम सर्विस चीफ्स करेंगे।

जबकि फोर्स एप्लीकेशन यानी असली ऑपरेशन की जिम्मेदारी थिएटर कमांडर के पास होगी। इससे कमांडर पूरी तरह युद्ध और ऑपरेशन पर ध्यान दे पाएगा।

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सथ ही, रणनीतिक और ऑपरेशनल प्लानिंग को नए तरीके से व्यवस्थित किया जाएगा। अब पूरे ऑपरेशन की जिम्मेदारी एक ही कमांडर के पास होगी। इससे “यूनिटी ऑफ कमांड” बनेगी। पहले अलग-अलग कमांड होने की वजह से कई बार तालमेल की समस्या आती थी, लेकिन अब यह समस्या कम हो जाएगी। एक ही कमांडर पूरे ऑपरेशन को प्लान करेगा और तीनों सेनाएं मिलकर काम करेंगी। (India Theatre Commands)

अगले तीन महीनों में कई बड़े बदलाव

अगले तीन महीनों में भारतीय सेना के शीर्ष स्तर पर कई बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। इसकी शुरुआत नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ यानी सीडीएस की नियुक्ति से होगी। मौजूदा सीडीएस जनरल अनिल चौहान को पिछले साल सितंबर में एक्सटेंशन दिया गया था, जो 30 मई तक है। यानी मई के अंत तक नए सीडीएस की नियुक्ति तय मानी जा रही है।

सरकार अप्रैल के अंत तक इस पर फैसला ले सकती है। रक्षा मंत्रालय के 2022 के नियमों के मुताबिक, सीडीएस पद के लिए वही अधिकारी चुने जा सकते हैं जो तीन-स्टार रैंक के हों, यानी लेफ्टिनेंट जनरल, एयर मार्शल या वाइस एडमिरल। ये अधिकारी या तो सेवा में हों या रिटायर हो चुके हों, लेकिन उनकी उम्र नियुक्ति के समय 62 साल से कम होनी चाहिए। (India Theatre Commands)

इस नियम में 2019 के पुराने नियम में बदलाव करके यह दायरा बढ़ाया गया था, जिसके बाद जनरल अनिल चौहान को भी 2022 में सीडीएस बनाया गया था। इसका मतलब यह है कि सरकार के पास काफी बड़ा विकल्प है और 150 से ज्यादा तीन-स्टार अधिकारी इस पद के लिए संभावित उम्मीदवार हो सकते हैं।

हालांकि अगर सरकार चाहे, तो वह इस नियम से आगे जाकर मौजूदा सेना प्रमुखों में से भी किसी को सीडीएस बना सकती है। इसलिए अभी यह कहना मुश्किल है कि अगला सीडीएस कौन होगा।

सीडीएस के अलावा आर्मी और नेवी में भी बड़े बदलाव होने वाले हैं। नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी 31 मई को रिटायर हो रहे हैं, जबकि थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी 30 जून को रिटायर होंगे। ऐसे में इन दोनों पदों पर भी नए चेहरों की नियुक्ति होगी।

अप्रैल की शुरुआत में ही आर्मी के शीर्ष अधिकारियों में फेरबदल की योजना बनाई जा चुकी है। लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ दिल्ली में वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ की जिम्मेदारी संभालेंगे। उनके स्थान पर लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन को साउदर्न आर्मी कमांड का नया कमांडर बनाया जाएगा।

वहीं, मौजूदा वाइस चीफ लेफ्टिनेंट जनरल पीपी सिंह, लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कटियार की जगह वेस्टर्न कमांड की कमान संभालेंगे, जो 31 मार्च को रिटायर हो रहे हैं। इसी दिन ईस्टर्न आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल आरसी तिवारी भी रिटायर होंगे और उनकी जगह लेफ्टिनेंट जनरल वीएमबी कृष्णन को जिम्मेदारी दी जाएगी, जो अभी क्वार्टर मास्टर जनरल के पद पर हैं।

यह सारे बदलाव इस बात पर निर्भर करते हैं कि मौजूदा कमांड सिस्टम जारी रहता है या नहीं। अगर जल्द ही इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड्स लागू हो जाते हैं, तो सेना के पूरे ढांचे में बड़े स्तर पर बदलाव, प्रमोशन और नई नियुक्तियां देखने को मिल सकती हैं। (India Theatre Commands)

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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